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अडानी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट ने जेपी सीमेंट के लिए ₹580 करोड़ की बोली लगाई, लेकिन डील क्यों फंसी?

नई दिल्ली । अडानी ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट ने दिवालिया जेपी सीमेंट कॉर्पोरेशन के लिए 580 करोड़ रुपये की बोली लगाई है। इस प्रक्रिया में दूसरी बोली लगाने वाली माई होम ग्रुप ने 300 करोड़ रुपये का ऑफर देकर खुद को बाहर कर लिया है। क्रेडिटर्स के अनुसार कंपनी का लिक्विडेशन वैल्यू 880 करोड़ रुपये तय किया गया है, जबकि अंबुजा सीमेंट का मौजूदा ऑफर इससे काफी कम है। इसी कारण लेनदार अब अडानी ग्रुप से अधिक राशि की मांग को लेकर बातचीत कर रहे हैं। डील अटकने की वजहरिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ी बाधा लिक्विडेशन वैल्यू और बोली के बीच का अंतर है। लिक्विडेशन वैल्यू 880 करोड़ रुपये है, जबकि अंबुजा का ऑफर 580 करोड़ रुपये है—यानी लगभग 300 करोड़ रुपये कम। लिक्विडेशन वैल्यू वह राशि होती है, जो कंपनी की संपत्तियों को अलग-अलग बेचने पर मिल सकती है। आम तौर पर इससे कम बोली मिलने पर लेनदार टुकड़ों में बिक्री को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन इस मामले में वे अभी भी अडानी ग्रुप से बेहतर ऑफर की उम्मीद कर रहे हैं। जेपी सीमेंट पर कर्जआधिकारिक जानकारी के अनुसार जेपी सीमेंट पर कुल कर्ज 3,361 करोड़ रुपये है। इसमें 2,892 करोड़ रुपये सुरक्षित लेनदारों का और 469 करोड़ रुपये असुरक्षित लेनदारों का कर्ज शामिल है। कंपनी को जुलाई 2024 में दिवालिया घोषित किया गया था और यह मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर शुरू हुआ था। पहले भी कम ऑफर खारिजपिछले वर्ष नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (NARCL) ने 227 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था, जिसे क्रेडिटर्स ने बेहद कम बताते हुए अस्वीकार कर दिया था। जेपी सीमेंट की संपत्तियांजेपी सीमेंट के पास सालाना 5 मिलियन टन उत्पादन क्षमता है। इसके अलावा कंपनी के पास दो कैप्टिव पावर प्लांट हैं आंध्र प्रदेश में 35 मेगावाट का चालू प्लांट और 25 मेगावाट का निर्माणाधीन प्लांट। कर्नाटक के शाहाबाद में 1.2 मिलियन टन क्षमता का सीमेंट प्लांट फिलहाल बंद है, साथ ही 60 मेगावाट का पावर प्लांट भी मौजूद है। अडानी ग्रुप का पिछला रिकॉर्डहाल ही में NCLT ने अडानी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को जेपी एसोसिएट्स के लिए मंजूरी दी थी। उस प्रक्रिया में NARCL के पास 85% वोटिंग शेयर होने के बावजूद उसने अडानी के पक्ष में मतदान किया था, जबकि वेदांता ने उससे 3,400 करोड़ रुपये अधिक का प्रस्ताव दिया था।अब निगाहें इस बात पर हैं कि अंबुजा सीमेंट अपना ऑफर बढ़ाती है या नहीं। यदि बोली लिक्विडेशन वैल्यू के करीब नहीं पहुंचती, तो कंपनी को अलग-अलग हिस्सों में बेचने की संभावना बन सकती है। फिलहाल लेन-देन और बातचीत जारी है।

अमेरिका-ईरान तनाव से तेल बाजार में भूचाल, ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ नजर आने लगा है। लगातार तीसरे दिन कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती सख्ती और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। इसी के चलते ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। फरवरी से अब तक 50% से ज्यादा महंगा हुआ तेलविशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। फरवरी से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं पिछले सप्ताह ही कीमतों में करीब 8 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया था। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान जल्द समझौते के लिए तैयार हो जाए। माना जा रहा है कि यदि दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो होर्मुज स्ट्रेट में बाधाएं कम हो सकती हैं और तेल परिवहन सामान्य हो सकता है। ट्रंप ने दी सख्त चेतावनीपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान के पास समय बहुत कम है और उसे जल्द फैसला लेना होगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान को केवल एक परमाणु साइट संचालित करने की अनुमति होगी, जबकि बाकी साइटों को बंद करना पड़ेगा। इसके अलावा ट्रंप ने हाई एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने की बात कही। उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका ईरान की विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियों का बड़ा हिस्सा जारी नहीं करेगा। ईरान ने भी दी जवाबी धमकीट्रंप के बयान के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। ईरानी सैन्य प्रवक्ता अबोलफजल शेकर्ची ने कहा कि यदि ईरान पर दोबारा हमला हुआ तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी संसाधनों और ठिकानों को निशाना बनाने में देर नहीं लगेगी। यूएई के न्यूक्लियर प्लांट के पास ड्रोन हमलाइसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल धफरा क्षेत्र स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के बाहरी हिस्से में ड्रोन हमला होने की खबर सामने आई है। हमले के बाद इलाके में आग लग गई, हालांकि सुरक्षा और दमकल टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित कर लिया। अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

हाइपरटेंशन से बचाव जरूरी, लाइफस्टाइल में बदलाव से ऐसे करें हाई बीपी को नियंत्रित

नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। अनियमित दिनचर्या, गलत खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और मानसिक तनाव इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। शुरुआत में यह समस्या सामान्य लग सकती है, लेकिन समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो यह दिल, किडनी और दिमाग जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर असर डाल सकती है। यही वजह है कि डॉक्टर इसे एक “साइलेंट किलर” भी कहते हैं, क्योंकि कई बार इसके लक्षण देर से सामने आते हैं और तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी होती है। जब ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ता है तो व्यक्ति को सिरदर्द, घबराहट, चक्कर आना, थकान और बेचैनी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। ऐसे में केवल दवाइयों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जीवनशैली में सुधार करना भी उतना ही जरूरी होता है। कुछ सरल घरेलू उपायों को अपनाकर ब्लड प्रेशर को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है और शरीर को स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है। सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है नमक का सेवन कम करना। अधिक नमक शरीर में पानी को रोकता है, जिससे रक्तचाप बढ़ने लगता है। ऐसे में पैकेज्ड फूड, चिप्स, फास्ट फूड और ज्यादा नमक वाली चीजों से दूरी बनाना जरूरी होता है। भोजन में संतुलन बनाए रखना ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने में मदद करता है। तनाव को कम करना भी हाई बीपी को नियंत्रित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। मानसिक दबाव शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है, जिससे ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है। रोजाना कुछ समय योग, ध्यान और प्राणायाम करने से मन शांत रहता है और शरीर रिलैक्स महसूस करता है। अनुलोम-विलोम और गहरी सांस लेने की तकनीकें विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती हैं। इसके साथ ही पोटैशियम से भरपूर आहार लेना भी फायदेमंद होता है। केला, पालक, टमाटर, दही और नारियल पानी जैसे खाद्य पदार्थ शरीर में सोडियम के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि शरीर में डिहाइड्रेशन होने पर ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है और बीपी बढ़ सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि भी हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाती है। रोजाना 30 मिनट की वॉक, हल्की एक्सरसाइज या साइकलिंग करने से दिल मजबूत होता है और रक्त संचार बेहतर होता है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना भी ब्लड प्रेशर बढ़ने का कारण बन सकता है, इसलिए सक्रिय रहना जरूरी है। अगर ब्लड प्रेशर बार-बार 140/90 से ऊपर जाता है या इसके साथ सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और तेज सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। घरेलू उपाय शुरुआती स्तर पर मदद कर सकते हैं, लेकिन गंभीर स्थिति में चिकित्सा उपचार ही सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।

देश में मौसम बदल रहा रंग, अंडमान में समय से पहले पहुंचा मानसून, उत्तर भारत लू की चपेट में

नई दिल्ली। देशभर में मौसम ने दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर दी हैं। जहां एक ओर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मानसून ने तय समय से पहले दस्तक दे दी है, वहीं दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान समेत उत्तर एवं मध्य भारत भीषण गर्मी और लू से झुलस रहा है। एक तरफ लोग बारिश का आनंद ले रहे हैं, तो दूसरी ओर तेज धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन मुश्किल बना दिया है। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिणी समुद्री क्षेत्रों में मानसून तेजी से सक्रिय हो रहा है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी तक मानसून पहुंच चुका है, जिसके असर से केरल और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में प्री-मानसून बारिश शुरू हो गई है। विभाग का कहना है कि इस बार मानसून सामान्य समय से करीब पांच दिन पहले आगे बढ़ रहा है और 26 मई तक केरल पहुंच सकता है, जबकि आमतौर पर इसकी एंट्री 1 जून को होती है। केरल के कई हिस्सों में लगातार तेज बारिश हो रही है। पटनामथिट्टा और अलाप्पुझा समेत कई इलाकों में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। वहीं पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में भी पिछले 24 घंटों के दौरान अच्छी बारिश दर्ज की गई। दूसरी ओर उत्तर भारत में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। बांदा सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। झांसी, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ में भी लोग भीषण गर्मी से परेशान हैं। दिल्ली में भी सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया है। हरियाणा और पंजाब के सिरसा, रोहतक, हिसार और बठिंडा जैसे शहरों में तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। सुबह 10 बजे के बाद ही तेज गर्म हवाओं के कारण लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। पहाड़ी राज्यों में भी गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। हिमाचल प्रदेश के ऊना में तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से काफी अधिक माना जा रहा है। हालांकि मौसम विभाग ने 19 मई से मौसम में बदलाव की संभावना जताई है। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से पहाड़ी इलाकों में बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। चंबा, कांगड़ा और कुल्लू के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। 22 और 23 मई को कुछ क्षेत्रों में बारिश होने से राहत मिलने की उम्मीद है। राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में भी भीषण गर्मी बनी हुई है, जहां तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। चंडीगढ़ में भी पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों में और तेज लू चलने की चेतावनी दी है। भीषण गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और नियमित रूप से पानी, ओआरएस, नींबू पानी, छाछ या लस्सी का सेवन करें। बाहर जाते समय हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और सिर को कपड़े, टोपी या छतरी से ढककर रखें। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है।

MP में गर्मी का कहर तेज, राजगढ़ 45 डिग्री के साथ सबसे गर्म, अगले 4 दिन और बढ़ेगा तापमान

भोपाल । मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश का आधा हिस्सा इस समय हीटवेव की चपेट में है और कई जिलों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। रविवार को राजगढ़ सबसे गर्म जिला रहा, जहां पारा 45 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं 11 जिलों में तापमान 43 डिग्री और 4 जिलों में 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री तक और बढ़ोतरी की संभावना जताई है। इसके चलते लोगों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, सागर, जबलपुर, छतरपुर, रीवा, मंदसौर, रतलाम, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर समेत कई जिलों में लू चलने का अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस के पार रहने की संभावना है। वहीं राजधानी भोपाल, इंदौर और उज्जैन सहित कई जिलों में लू का अलर्ट नहीं होने के बावजूद तेज गर्मी लोगों को परेशान करेगी। मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, इंदौर, धार, देवास, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, शहडोल और सिंगरौली समेत कई क्षेत्रों में दिनभर गर्म हवाएं और उमस बनी रहेगी। रविवार को प्रदेश के 16 शहरों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। राजगढ़ के बाद रतलाम में 44.8 डिग्री, खंडवा में 44.5 डिग्री, नौगांव और खजुराहो में 44.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। इसके अलावा गुना, श्योपुर, रायसेन, नरसिंहपुर, दतिया, दमोह, खरगोन और टीकमगढ़ में भी पारा 43 डिग्री के पार पहुंचा। प्रदेश के बड़े शहरों की बात करें तो उज्जैन में 43 डिग्री, इंदौर में 42.8 डिग्री, भोपाल में 42.7 डिग्री, ग्वालियर में 42.6 डिग्री और जबलपुर में 42.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी बनी रहेगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि दोपहर के समय बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाएं।

गर्मियों में ठंडक और ताजगी का डबल मजा, घर पर बनाएं हेल्दी और स्वादिष्ट समर स्पेशल ड्रिंक्स..

नई दिल्ली ।  गर्मियों का मौसम अपने साथ तेज धूप, थकान और शरीर में पानी की कमी जैसी कई परेशानियां लेकर आता है। ऐसे समय में लोग ऐसे पेय पदार्थों की तलाश करते हैं जो शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ स्वाद और ऊर्जा भी प्रदान करें। यही कारण है कि घर पर बनने वाले हेल्दी और फ्रेश ड्रिंक्स इन दिनों काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। ताजे फलों, सब्जियों और प्राकृतिक सामग्री से तैयार किए गए ये समर स्पेशल ड्रिंक्स न केवल शरीर को हाइड्रेट रखते हैं बल्कि गर्मी के असर को कम करने में भी मदद करते हैं। गर्मियों में चुकंदर और गाजर से तैयार होने वाला हेल्दी ड्रिंक शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ ठंडक भी पहुंचाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को तरोताजा बनाए रखते हैं और थकान को दूर करने में मदद करते हैं। इसी तरह गुलाब और अदरक से तैयार ड्रिंक स्वाद और ताजगी का अनोखा मेल माना जाता है, जो गर्मी में शरीर को तुरंत राहत देता है। इसमें पुदीना और नींबू का इस्तेमाल स्वाद को और भी बढ़ा देता है। फलों से बने कूलर्स भी इस मौसम में लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। सेब और खस के स्वाद से तैयार ठंडा पेय शरीर को सुकून देने के साथ गर्मी से राहत देता है। वहीं चीकू और ऑरेंज फ्लेवर से तैयार कूलर बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है। इसमें दूध और क्रीम का स्वाद इसे और अधिक रिच और खास बना देता है। गर्मियों में नींबू आधारित ड्रिंक्स की मांग सबसे ज्यादा रहती है और चेरी लेमोनेड इसका शानदार उदाहरण है। चेरी, नींबू और सोडा वॉटर से तैयार यह ड्रिंक शरीर को इंस्टेंट फ्रेशनेस देता है। इसका हल्का खट्टा-मीठा स्वाद गर्मी में मूड को भी फ्रेश कर देता है। इसी तरह मैंगो और पाइनएप्पल का कॉम्बिनेशन भी समर सीजन में काफी पसंद किया जाता है। पुदीना और शहद के साथ तैयार यह ड्रिंक स्वाद के साथ शरीर को ठंडा रखने में भी मदद करता है। मौसंबी स्लश जैसे पेय गर्मी में शरीर को तुरंत ठंडक पहुंचाने के लिए बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं। ताजे फलों के रस से तैयार ये ड्रिंक्स शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखते हैं। इसके अलावा आलूबुखारे और ऑरेंज फ्लेवर से तैयार कूलर भी इस मौसम में अलग स्वाद का अनुभव देता है। आजकल लोग बाजार में मिलने वाले अधिक शुगर और केमिकल वाले पेय पदार्थों की बजाय घर पर तैयार हेल्दी ड्रिंक्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ये ड्रिंक्स स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी होते हैं और इन्हें बेहद कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है। गर्मियों में यदि खानपान के साथ ऐसे हेल्दी और फ्रेश ड्रिंक्स को शामिल किया जाए तो शरीर को ठंडक, ऊर्जा और ताजगी लंबे समय तक मिलती रहती है।

स्किन केयर हैक: अलसी का पानी बना सकता है चेहरा निखरा और साफ

नई दिल्ली। अलसी के बीज यानी फ्लैक्ससीड्स को स्वास्थ्य के साथ-साथ स्किन के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं। जब अलसी के बीजों को पानी में भिगोकर उनका जेल या अर्क तैयार किया जाता है, तो यही “अलसी का पानी” स्किन के लिए एक असरदार घरेलू उपाय बन जाता है। दाग-धब्बों और पिगमेंटेशन में राहतअलसी के पानी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और लिग्नान्स त्वचा की रंगत सुधारने में मदद करते हैं। यह धीरे-धीरे चेहरे पर मौजूद दाग-धब्बों और पिगमेंटेशन को हल्का करता है। नियमित इस्तेमाल से त्वचा ज्यादा साफ, स्मूद और समान रंगत वाली दिखाई देने लगती है। त्वचा को देता है गहराई से हाइड्रेशनअलसी का पानी स्किन को अंदर तक नमी प्रदान करता है। यह ड्राईनेस को कम करके त्वचा को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व स्किन की ऊपरी परत को रिपेयर करते हैं, जिससे चेहरा हेल्दी और फ्रेश नजर आता है। मुंहासों और सूजन में फायदेमंदअलसी के बीजों में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मुंहासों की समस्या को कम करने में मदद करते हैं। यह स्किन की जलन और सूजन को शांत करता है और पोर्स को साफ रखता है, जिससे नए पिंपल्स बनने की संभावना कम हो जाती है। एंटी-एजिंग असर और कोलेजन बूस्टअलसी का पानी त्वचा में कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करता है। इससे त्वचा टाइट रहती है और झुर्रियां व फाइन लाइन्स कम दिखाई देती हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स से लड़कर स्किन को लंबे समय तक जवां बनाए रखने में मदद करते हैं। अलसी का पानी कैसे लगाएं?अलसी का फेस जेल तैयार करने के लिए 1–2 चम्मच अलसी के बीजों को एक कप पानी में रातभर भिगो दें। सुबह इसे हल्का उबालकर या छानकर जेल जैसा पानी निकाल लें। इस पानी को कॉटन की मदद से चेहरे और गर्दन पर लगाएं। 15–20 मिनट बाद धो लें या चाहें तो रातभर भी लगा सकते हैं। बाद में हल्का मॉइश्चराइज़र जरूर लगाएं। अलसी के बीज का पानी एक आसान, सस्ता और नेचुरल स्किन केयर उपाय है। यह दाग-धब्बों को कम करने के साथ-साथ त्वचा को हाइड्रेट, टाइट और ग्लोइंग बनाने में मदद करता है। नियमित उपयोग से स्किन की क्वालिटी में धीरे-धीरे सुधार देखा जा सकता है।

सरकारी दफ्तरों में सफेद तौलिये का राज आया सामने, आखिर क्यों अफसरों की कुर्सियों पर आज भी कायम है यह पुरानी परंपरा

नई दिल्ली ।  सरकारी दफ्तरों में अगर आपने कभी किसी बड़े अधिकारी के केबिन में कदम रखा हो, तो एक चीज जरूर आपकी नजरों में आई होगी—कुर्सी की पीठ पर सलीके से रखा सफेद तौलिया। वर्षों से यह दृश्य सरकारी कार्यालयों की पहचान बना हुआ है। बदलते दौर, आधुनिक फर्नीचर और एयर कंडीशन ऑफिसों के बावजूद यह परंपरा आज भी कायम है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर सरकारी अफसरों की कुर्सियों पर सिर्फ सफेद तौलिया ही क्यों लगाया जाता है? लाल, नीला या कोई दूसरा रंग क्यों नहीं? इसके पीछे छिपी वजह बेहद दिलचस्प और इतिहास से जुड़ी हुई है। दरअसल, इस परंपरा की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल से मानी जाती है। उस दौर में सरकारी कार्यालयों में आज जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद नहीं थीं। न एयर कंडीशनर होते थे और न ही बेहतर वेंटिलेशन की व्यवस्था। गर्मी और उमस के बीच अधिकारी लंबे समय तक काम करते थे, जिससे कुर्सियों पर पसीने और धूल का असर जल्दी दिखाई देता था। ऐसे में कुर्सियों को साफ और सुरक्षित रखने के लिए उन पर तौलिया डालने की शुरुआत की गई। सफेद रंग इसलिए चुना गया क्योंकि उस पर गंदगी तुरंत नजर आ जाती थी और उसे समय-समय पर बदलना आसान होता था। कुछ जानकारों के अनुसार, उस समय भारतीय लोगों में बालों में तेल लगाने की आदत आम थी। इससे कुर्सियों के कवर जल्दी खराब हो जाते थे। अंग्रेज अधिकारियों ने कुर्सियों को तेल और गंदगी से बचाने के लिए सफेद तौलिये का इस्तेमाल शुरू किया। धीरे-धीरे यह केवल सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी पद और अधिकार का प्रतीक बन गया। समय बीतने के साथ सफेद तौलिया अफसरों की पहचान में शामिल हो गया और यह परंपरा सरकारी संस्कृति का हिस्सा बन गई। आज भी कई सरकारी कार्यालयों में वरिष्ठ अधिकारियों की कुर्सियों पर सफेद तौलिया अनिवार्य रूप से दिखाई देता है। खास बात यह है कि कई जगहों पर इन्हें नियमित रूप से बदला भी जाता है ताकि साफ-सफाई बनी रहे। सफेद तौलिया अब केवल स्वच्छता का साधन नहीं, बल्कि अनुशासन और प्रशासनिक गरिमा का प्रतीक माना जाता है। बड़े अधिकारियों की कुर्सियों पर इसका होना उनके पद और जिम्मेदारी को दर्शाने वाला संकेत भी बन चुका है। हालांकि आधुनिक दौर में ऑफिसों का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। शानदार इंटीरियर, आरामदायक कुर्सियां, एयर कंडीशनर और आधुनिक सुविधाएं लगभग हर बड़े सरकारी कार्यालय में मौजूद हैं, लेकिन सफेद तौलिये की परंपरा अभी भी खत्म नहीं हुई। कई लोग इसे सरकारी सिस्टम की पुरानी पहचान मानते हैं, तो कुछ इसे एक तरह का स्टेटस सिंबल भी समझते हैं। दिलचस्प बात यह है कि निजी कंपनियों और कॉर्पोरेट ऑफिसों में यह परंपरा लगभग दिखाई नहीं देती, जबकि सरकारी दफ्तरों में इसका महत्व आज भी बरकरार है। यही वजह है कि सफेद तौलिया अब सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि भारतीय सरकारी व्यवस्था की एक खास पहचान बन चुका है। वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी मजबूती के साथ जारी है और शायद आने वाले समय में भी सरकारी दफ्तरों की संस्कृति का हिस्सा बनी रहेगी।

नींबू पानी के चमत्कारी फायदे: ग्लोइंग स्किन और हेल्दी लाइफ का नेचुरल राज

नई दिल्ली। नींबू पानी को आयुर्वेद और आधुनिक हेल्थ साइंस दोनों में एक बेहद फायदेमंद ड्रिंक माना गया है। इसमें मौजूद विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और साइट्रिक एसिड शरीर को अंदर से डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, जिसका सीधा असर त्वचा पर दिखाई देता है। नियमित रूप से नींबू पानी पीने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, जिससे स्किन साफ, फ्रेश और ग्लोइंग नजर आती है। यही कारण है कि इसे “नेचुरल ब्यूटी ड्रिंक” भी कहा जाता है। मुंहासों और पिंपल्स में राहतनींबू पानी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने में मदद करते हैं। इससे मुंहासे बनने की संभावना घटती है और स्किन धीरे-धीरे साफ होने लगती है। इसके अलावा इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड डेड स्किन सेल्स को हटाने में भी मदद करता है, जिससे स्किन ज्यादा स्मूद और क्लियर दिखती है। ब्लैकहेड्स और ऑयली स्किन पर असरनींबू पानी शरीर की अंदरूनी सफाई के साथ-साथ स्किन के ऑयल बैलेंस को भी सुधारता है। इससे चेहरे पर एक्स्ट्रा ऑयल कम होता है, जो ब्लैकहेड्स और पोर्स की समस्या को कम करने में मदद करता है। नियमित सेवन से स्किन ज्यादा बैलेंस्ड और हेल्दी दिखने लगती है। कोलेजन बढ़ाने में मददगारनींबू में मौजूद विटामिन C कोलेजन के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। कोलेजन एक ऐसा प्रोटीन है जो त्वचा को टाइट और जवां बनाए रखता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, कोलेजन कम होने लगता है, जिससे झुर्रियां और फाइन लाइन्स दिखने लगती हैं। नींबू पानी इसका प्राकृतिक समाधान माना जाता है। डिटॉक्स और स्किन ग्लो का कनेक्शननींबू पानी शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है। यह लीवर को साफ रखने में मदद करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। जब शरीर अंदर से साफ होता है, तो उसका असर चेहरे पर भी साफ दिखाई देता है। इसी वजह से इसे ग्लोइंग स्किन पाने का आसान और प्राकृतिक तरीका माना जाता है। नींबू पानी पीने का सही समयविशेषज्ञों के अनुसार, सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को दिनभर एक्टिव रखता है और मेटाबॉलिज्म को बेहतर करता है। नींबू पानी कोई जादुई इलाज नहीं, लेकिन यह एक सरल और प्राकृतिक तरीका जरूर है जो धीरे-धीरे स्किन और हेल्थ दोनों को सुधारता है। नियमित सेवन से त्वचा साफ, चमकदार और जवान बनी रह सकती है।

गर्मियों में पुदीना पानी का कमाल, शरीर को ठंडक देने के साथ मिलते हैं कई स्वास्थ्य लाभ

नई दिल्ली ।  गर्मियों के बढ़ते तापमान के बीच शरीर को ठंडा और संतुलित रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में प्राकृतिक और घरेलू उपायों की ओर लोगों का रुझान बढ़ता है, जिनमें पुदीना पानी एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आता है। यह न केवल शरीर को ठंडक प्रदान करने में मदद करता है, बल्कि कई शारीरिक और मानसिक लाभ भी देता है, जिससे गर्मी के मौसम में सेहत को बेहतर बनाए रखा जा सकता है। पुदीना एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसमें प्राकृतिक रूप से ठंडक प्रदान करने वाले गुण पाए जाते हैं। इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है, जो शरीर के तापमान को संतुलित करने में सहायक होती है। जब इसे पानी में मिलाकर सेवन किया जाता है, तो यह शरीर के अंदरूनी तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है और गर्मी के कारण होने वाली थकान और बेचैनी को कम कर सकता है। पुदीना पानी का सबसे बड़ा लाभ यह माना जाता है कि यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है और लू लगने जैसी समस्याओं से राहत दिला सकता है। लगातार गर्म वातावरण में रहने के कारण शरीर में जो गर्मी जमा होती है, उसे यह प्राकृतिक पेय कम करने में सहायक हो सकता है। इसके नियमित सेवन से व्यक्ति अधिक तरोताजा और ऊर्जावान महसूस कर सकता है। इसके अलावा यह पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी माना जाता है। गर्मियों में अक्सर गैस, अपच और पेट भारी रहने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। पुदीना पानी इन समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकता है क्योंकि यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और पेट को हल्का महसूस कराने में मदद करता है। गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होना एक आम समस्या है, जिससे कमजोरी और चक्कर आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। पुदीना पानी शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करता है, जिससे शरीर में पानी का संतुलन बना रहता है और डिहाइड्रेशन का खतरा कम हो सकता है। यह भी देखा गया है कि पुदीना पानी मुंह की दुर्गंध को कम करने में सहायक होता है। यह प्राकृतिक रूप से सांसों को ताजगी प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति अधिक फ्रेश महसूस करता है। साथ ही इसकी सुगंध और ठंडक मानसिक तनाव और थकान को कम करने में भी मदद कर सकती है, जिससे मूड बेहतर रहता है। त्वचा के लिए भी पुदीना पानी लाभकारी माना जाता है। यह शरीर को अंदर से डिटॉक्स करने में मदद करता है, जिसका प्रभाव त्वचा पर साफ दिखाई देता है। नियमित सेवन से त्वचा अधिक साफ, फ्रेश और स्वस्थ नजर आ सकती है। पुदीना पानी बनाना भी बेहद आसान है। ताजी पुदीना पत्तियों को पानी में डालकर उसमें नींबू और हल्का काला नमक मिलाकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद इसे ठंडा करके दिनभर सेवन किया जा सकता है। यह एक सरल, सस्ता और प्राकृतिक उपाय है जो गर्मियों में सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।