पुलिस की बड़ी कार्रवाई: मक्सी दंगे का आरोपी गिरफ्तार, 3 अभी भी फरार

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के मक्सी दंगा मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। करीब 20 महीने से फरार चल रहे मुख्य आरोपी लारेब मेव को मक्सी पुलिस ने सोमवार रात सब्जी मंडी क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी मुखबिर की पुख्ता सूचना के आधार पर की गई, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया। मक्सी थाना प्रभारी संजय वर्मा के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद आरोपी को मंगलवार सुबह उज्जैन से आई सीआईडी टीम के हवाले कर दिया गया। सीआईडी टीम ने उसे न्यायालय में पेश किया और आगे की पूछताछ तथा मामले के अन्य फरार आरोपियों तक पहुंचने के लिए रिमांड की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, लारेब मेव दंगा प्रकरण दर्ज होने के बाद से लगातार पुलिस की पकड़ से बचता आ रहा था। इस मामले में पहले भी कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन अब भी कुछ आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में एक बार फिर मक्सी दंगा मामला चर्चा में आ गया है। स्थानीय लोगों के बीच इस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जबकि पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। अपराध अनुसंधान कार्यालय में पदस्थ टीआई लाखन सिंह भूरिया ने बताया कि इस केस में एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी पकड़ लिया जाएगा।
सरकार की रणनीति में बदलाव के संकेत, IDBI Bank बिक्री प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की संभावना से बाजार में जोश

नई दिल्ली । भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जहां सरकार के स्वामित्व वाले IDBI Bank के निजीकरण को लेकर रुकी हुई प्रक्रिया फिर से गति पकड़ सकती है। इस संभावना की खबर सामने आने के बाद बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी अचानक बढ़ गई और बैंक के शेयर में करीब 7 प्रतिशत तक की तेज़ी दर्ज की गई, जिससे स्टॉक ने इंट्राडे में नया उच्च स्तर छू लिया। सूत्रों के अनुसार सरकार IDBI Bank में अपनी बहुमत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है। इससे पहले इस डील को रोक दिया गया था क्योंकि शुरुआती दौर में मिली बोलियां अपेक्षित मूल्य से कम थीं, जिससे सरकार संतुष्ट नहीं थी। अब अधिकारियों द्वारा यह आकलन किया जा रहा है कि प्रक्रिया को अधिक आकर्षक और व्यवहारिक बनाने के लिए इसमें कुछ बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि नए और मजबूत निवेशक इसमें रुचि दिखाएं। बताया जा रहा है कि सरकार इस बार बिक्री प्रक्रिया को सरल और निवेशकों के लिए अधिक लाभकारी बनाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें बैंक के मूल्यांकन ढांचे में बदलाव और रिजर्व प्राइस को समायोजित करने जैसी संभावनाएं शामिल हैं, ताकि बोली लगाने वाले अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में भाग ले सकें। पहले चरण में मिली कमजोर प्रतिक्रिया के बाद यह माना जा रहा है कि नए सिरे से रणनीति बनाकर प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जा सकता है। इस डील में IDBI Bank की हिस्सेदारी बिक्री लंबे समय से सरकार की बड़ी आर्थिक योजनाओं का हिस्सा रही है। सरकार लगातार अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में हिस्सेदारी घटाकर निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस बैंक की बिक्री अब तक कई कारणों से पूरी नहीं हो पाई है। यदि यह सौदा सफल होता है तो यह हाल के वर्षों में बैंकिंग सेक्टर की सबसे बड़ी हिस्सेदारी बिक्री में से एक माना जाएगा। पहले इस प्रक्रिया में कई बड़े निवेशकों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय समूह भी शामिल थे, लेकिन कीमत और शर्तों को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। अब संभावना जताई जा रही है कि यदि प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है तो इसमें नए निवेशकों को भी शामिल किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता होगी, जिससे समय और बढ़ सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खबरों का सीधा असर बैंकिंग शेयरों पर पड़ता है और निवेशकों की उम्मीदें तुरंत बदल जाती हैं। IDBI Bank के शेयर में आई तेजी भी इसी सकारात्मक धारणा का परिणाम मानी जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला प्रक्रिया की औपचारिक घोषणा और निवेश शर्तों पर निर्भर करेगा।
लू ने बढ़ाई मुश्किलें: शाजापुर में भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित

मध्य प्रदेश। शाजापुर जिले में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है और मंगलवार को तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने की संभावना जताई गई है। सोमवार को भी अधिकतम तापमान लगभग 45 डिग्री दर्ज किया गया, जिसके बाद से पूरे जिले में भीषण तपिश और लू जैसे हालात बने हुए हैं। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। मौसम विशेषज्ञ सत्येंद्र धनोतिया के अनुसार, इस समय रात का न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और आर्द्रता मात्र 15 प्रतिशत के आसपास है। उत्तर-पश्चिमी दिशा से चल रही 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं गर्मी के असर को और बढ़ा रही हैं, जिससे लू का प्रभाव और अधिक महसूस किया जा रहा है। दोपहर होते-होते हालात ऐसे हो जाते हैं कि शहर के बाजार और मुख्य चौराहों पर सन्नाटा पसर जाता है। दोपहर 1 बजे के बाद सड़कें लगभग खाली हो जाती हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हो जाते हैं। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जो गर्म हवाओं और जलते सूरज से बचने के लिए चेहरे को रुमाल, गमछा, हेलमेट और चश्मे से ढककर निकल रहे हैं। गर्मी का असर सिर्फ इंसानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी प्रभावित हो रहे हैं। कई लोगों ने शिकायत की है कि मोबाइल फोन अत्यधिक गर्म होकर धीमे काम कर रहे हैं या बार-बार बंद हो जा रहे हैं। कुछ मामलों में स्मार्टफोन की कार्यक्षमता पर भी असर देखा जा रहा है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, फिलहाल कुछ दिनों तक गर्मी का यह दौर जारी रहेगा, हालांकि 20 मई के बाद तापमान में हल्की गिरावट संभव है। लेकिन नौतपा के दौरान एक बार फिर तापमान में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं प्री-मानसून गतिविधियां 1 जून के आसपास शुरू होने और 16 जून तक मानसून के शाजापुर पहुंचने की संभावना जताई गई है। फिलहाल, तेज गर्मी और लू ने लोगों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है और प्रशासन ने भी सावधानी बरतने की सलाह दी है।
शिक्षा व्यवस्था की हकीकत: मध्यप्रदेश के स्कूलों में शौचालय संकट उजागर

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। प्रदेश के 788 सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं होने या अधूरे पड़े होने की वजह से ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे बड़े अभियानों की जमीनी हकीकत उजागर हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन स्कूलों में शौचालय निर्माण के लिए करीब 2 करोड़ 30 लाख रुपए का बजट जारी किया गया था, लेकिन कई जगह इस राशि का उपयोग शौचालय निर्माण के बजाय फर्नीचर, रंगाई-पुताई और अन्य कार्यों में कर लिया गया। नतीजा यह हुआ कि आज भी कई स्कूलों में छात्राओं को खुले मैदान, दीवार की ओट या अस्थायी व्यवस्था के सहारे शौच जाना पड़ रहा है। राज्य के कई जिलों अशोकनगर, सीहोर और राजगढ़ से सामने आई रिपोर्टें स्थिति की गंभीरता को और उजागर करती हैं। कहीं सिर्फ टूटी दीवारों के सहारे शौचालय का “नाम” बचा है, तो कहीं छात्राएं महिला शिक्षकों की निगरानी में असुरक्षित परिस्थितियों में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं। कई जगह तो हालत इतनी खराब है कि छात्राओं को आपात स्थिति में घर लौटना पड़ता है या स्कूल छोड़ना पड़ता है। राजगढ़ के एक प्राथमिक विद्यालय में 26 छात्राएं बिना शौचालय के पढ़ाई कर रही हैं, जबकि अशोकनगर के एक स्कूल में 135 बच्चों को अस्थायी रूप से कॉलेज परिसर के एक कमरे में शिफ्ट किया गया है, जहां शौचालय की सुविधा ही नहीं है। इस बीच भ्रष्टाचार के भी गंभीर मामले सामने आए हैं। धार जिले में लोकायुक्त ने एक डीपीसी अधिकारी को 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। आरोप है कि अधिकारी ने 122 शौचालयों के निर्माण से पहले ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) जारी करने के बदले 17 लाख रुपए की मांग की थी। शिक्षा मंत्री ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यदि शौचालय निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो उसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। फिलहाल यह पूरा मामला शिक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और विकास योजनाओं की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, जहां कागजों पर सुविधाएं पूरी दिख रही हैं लेकिन जमीनी स्तर पर छात्राएं आज भी बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं।
13 हजार मीट्रिक टन क्षमता बेकार: स्थानीय गोदाम खाली, 50 किमी दूर से सप्लाई जारी

नई दिल्ली। राजगढ़ जिले के खिलचीपुर क्षेत्र में समर्थन मूल्य पर खरीदे जा रहे गेहूं के भंडारण को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। जहां एक ओर स्थानीय स्तर पर करीब 13 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले वेयरहाउस खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों की उपज को 50 किलोमीटर दूर ब्यावरा भेजा जा रहा है। इस फैसले से न केवल समय और संसाधनों की बर्बादी हो रही है, बल्कि शासन पर अतिरिक्त परिवहन खर्च का बोझ भी बढ़ रहा है। खिलचीपुर क्षेत्र के छापीहेड़ा, माचलपुर, कोडक्या और भाटखेड़ा उपार्जन केंद्रों पर किसानों से गेहूं की खरीद जारी है। नियमों के अनुसार, खरीदी गई उपज को पहले नजदीकी वेयरहाउस में सुरक्षित किया जाना चाहिए ताकि परिवहन लागत कम रहे और भंडारण व्यवस्था सुचारू बनी रहे। लेकिन जमीनी स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। क्षेत्र के श्री गणेश किसान केंद्र बड़बेली और शिवहरे वेयरहाउस बड़बेली में पर्याप्त जगह उपलब्ध होने के बावजूद अधिकांश स्टॉक ब्यावरा भेजा जा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का आरोप है कि यह व्यवस्था तकनीकी से ज्यादा “मैपिंग और निर्णय प्रक्रिया” की खामियों का नतीजा है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि लंबी दूरी के परिवहन से ठेकेदारों को अधिक भुगतान और कमीशन का लाभ मिलता है, जिससे जानबूझकर गेहूं दूर भेजे जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) के खिलचीपुर-छापीहेड़ा शाखा प्रबंधक वसंत देवड़े ने स्वीकार किया है कि स्थानीय गोदाम खाली हैं। उनके अनुसार, “उपार्जन समितियों द्वारा जिस वेयरहाउस की मैपिंग की जाती है, उसी के अनुसार गेहूं भेजा जाता है।” हालांकि उन्होंने यह भी माना कि नियमानुसार पहले नजदीकी वेयरहाउस का उपयोग होना चाहिए और इस संबंध में सुधार के लिए संबंधित विभागों को पत्र लिखा गया है। फिलहाल इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और परिवहन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों और आम लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
बिजली कटौती अलर्ट: पठारी के कई इलाकों में 5 घंटे रहेगा अंधेरा

नई दिल्ली। विदिशा जिले के पठारी क्षेत्र में मंगलवार को बिजली उपभोक्ताओं को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा 33/11 केवी उपकेंद्र पर आवश्यक रखरखाव और क्षमता वृद्धि कार्य किया जाएगा, जिसके चलते विद्युत आपूर्ति पांच घंटे तक बाधित रहेगी। बिजली कटौती दोपहर 3 बजे से शुरू होकर रात 8 बजे तक जारी रहेगी। इस दौरान उपकेंद्र में नया और अधिक क्षमता वाला ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा, जिससे भविष्य में बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर और बेहतर बनाया जा सके। इस शटडाउन के कारण पठारी टाउन, बिसलोनी ग्रामीण, काकलखेड़ी, बीलाखेड़ी, कंकलखेड़ी पंप और बिसलोनी पंप फीडर से जुड़े सभी घरेलू और कृषि क्षेत्र प्रभावित रहेंगे। भीषण गर्मी के बीच यह बिजली कटौती लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है, क्योंकि इससे पानी की आपूर्ति, घरेलू कामकाज और छोटे व्यवसायों पर असर पड़ेगा। विद्युत विभाग ने उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि तकनीकी कार्य की वजह से यह आवश्यक शटडाउन लिया गया है। विभाग के अनुसार कार्य पूरा होने के बाद क्षेत्र में बेहतर और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि तकनीकी परिस्थितियों के अनुसार समय में बदलाव संभव है।
राहत की उम्मीद: मौसम विभाग का अनुमान-इस बार जल्दी आएगा मानसून

नई दिल्ली। सीहोर जिले में भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे दिन के समय सड़कें सुनसान नजर आईं और जनजीवन पर व्यापक असर पड़ा। तेज धूप और लू के कारण लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। गर्मी के इस प्रचंड दौर में मौसम विभाग ने एक राहत भरी संभावना जताई है। विभाग के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने सामान्य समय से लगभग एक सप्ताह पहले केरल में दस्तक दे सकता है। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश में भी मानसून 10 से 16 जून के बीच पहुंचने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मानसून बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन के रास्ते प्रदेश में प्रवेश करेगा और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए जून के दूसरे सप्ताह तक सीहोर जिले को भी कवर कर लेगा। इस बार सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना भी जताई जा रही है। फिलहाल, पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव कम होने के कारण गर्मी और लू का असर बना हुआ है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 25 मई से नौतपा की शुरुआत होगी, जिसके चलते जून के पहले सप्ताह तक भीषण गर्मी जारी रह सकती है। हालांकि जून के दूसरे सप्ताह से प्री-मानसून गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद है, जिससे बादल, हल्की बारिश और हवाओं के कारण लोगों को धीरे-धीरे राहत मिल सकती है। इस बीच प्रशासन ने लोगों को दोपहर के समय बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और लू से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
सुरक्षा सहयोग और समुद्री स्थिरता पर सहमति, वियतनाम दौरे में राजनाथ सिंह की अहम कूटनीतिक पहल

नई दिल्ली । भारत की विदेश और रक्षा नीति को नई दिशा देने वाले प्रयासों के तहत रक्षा मंत्री Rajnath Singh के वियतनाम दौरे को महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने वियतनाम के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता को लेकर व्यापक चर्चा की। इस मुलाकात में आपसी विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। राजधानी हनोई में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में राजनाथ सिंह ने वियतनाम के जनरल सेक्रेटरी और राष्ट्रपति To Lam से शिष्टाचार मुलाकात की। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और वियतनाम के संबंध केवल पारंपरिक मित्रता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब यह रक्षा और रणनीतिक सहयोग के एक मजबूत ढांचे में विकसित हो चुके हैं। रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर भारत की ओर से शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं और दोनों देशों के बीच साझेदारी को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन जैसे विषय प्रमुख रहे। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम आधारित व्यवस्था बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और वियतनाम की साझेदारी को संतुलन और सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग क्षेत्रीय तनावों के बीच एक स्थिर शक्ति के रूप में उभर रहा है। इसके साथ ही रक्षा मंत्री ने वियतनाम के रक्षा मंत्री सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल Phan Van Giang के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें रक्षा उद्योग, सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने यह स्वीकार किया कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए संयुक्त प्रयास और तकनीकी सहयोग बेहद आवश्यक हैं। बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और यह साझेदारी अब व्यापक रणनीतिक सहयोग के नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन और प्रशिक्षण के क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई, जिससे भविष्य में रक्षा क्षमताओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू उन्नत तकनीकी सहयोग से जुड़ा रहा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ। इसे भविष्य की रक्षा और तकनीकी रणनीति के लिए एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। यह पहल इस बात का संकेत देती है कि भारत और वियतनाम केवल वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकी जरूरतों पर भी मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं। कुल मिलाकर यह यात्रा भारत और वियतनाम के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास और सहयोग का प्रतीक मानी जा रही है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी साझेदारी के माध्यम से दोनों देश एक मजबूत और संतुलित क्षेत्रीय व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
एक युग का अंत: पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी नहीं रहे, ईमानदार नेतृत्व की मिसाल छोड़ गए

नई दिल्ली । उत्तराखंड की राजनीति और देश के सार्वजनिक जीवन में एक युग का अंत हो गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूरी ने 91 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। देहरादून में उनके निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने ईमानदारी, अनुशासन और सादगी को जिस तरह से अपनी पहचान बनाया, वह उन्हें भारतीय राजनीति में एक अलग स्थान देता है। उनका जीवन सेना से लेकर संसद और फिर राज्य की राजनीति तक एक प्रेरणादायक यात्रा रहा, जिसने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया। 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे भुवन चंद्र खंडूरी की प्रारंभिक शिक्षा और बाद की उच्च शिक्षा ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत आधार दिया। शिक्षा के दौरान ही वे स्वतंत्रता आंदोलन के विचारों से प्रभावित हुए, जिसने आगे चलकर उनके राष्ट्र सेवा के मार्ग को और स्पष्ट किया। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना का रुख किया और 1954 से 1990 तक लगभग 36 वर्षों तक कोर ऑफ इंजीनियर्स में सेवा दी। इस दौरान उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपनी कार्यकुशलता तथा नेतृत्व क्षमता से विशिष्ट पहचान बनाई। सेना में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया, जो उनके समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण था। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और जल्द ही एक सशक्त और ईमानदार नेता के रूप में अपनी पहचान बना ली। 1991 में वे पहली बार लोकसभा पहुंचे और इसके बाद कई बार संसद के लिए चुने गए। संसद में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण समितियों में कार्य किया और नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई। सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े मंत्रालयों में उनकी भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जहां उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास को नई दिशा देने में योगदान दिया। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भुवन चंद्र खंडूरी राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। 2007 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासन में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की नीति अपनाई। उनका कार्यकाल सख्त अनुशासन और जवाबदेही के लिए जाना गया। बाद में उन्होंने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद संभाला और लोकायुक्त कानून जैसे सुधारों को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए। हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्हें कई उतार-चढ़ाव का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उनके सिद्धांत और कार्यशैली हमेशा चर्चा में रहे। उनकी पहचान केवल एक राजनेता तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में जाने गए जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में नैतिकता को सर्वोपरि रखा। उनकी सादगी, अनुशासन और निर्णय लेने की स्पष्टता ने उन्हें अलग पहचान दी। आज उनके निधन के साथ ही एक ऐसे नेतृत्व का अध्याय समाप्त हो गया, जिसने ईमानदारी को राजनीति का आधार बनाने की कोशिश की। उनका योगदान न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के राजनीतिक इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
फैक्ट्री हादसे से मचा हड़कंप: जिंदा जले मजदूर, हाईवे जाम से बढ़ा तनाव

नई दिल्ली। सतना जिले के अमरपाटन रोड स्थित भटनवारा क्षेत्र में सोमवार रात विद्याश्री सॉल्वेंट प्लांट में अचानक भीषण आग लग गई। बताया जा रहा है कि प्लांट में बॉयलर फटने के बाद आग इतनी तेजी से फैली कि पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के समय प्लांट में 4 से 5 कर्मचारी मौजूद थे। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कई किलोमीटर दूर से धुआं और आग दिखाई दे रही थी। इस हादसे में मशीन ऑपरेटर दिलावर सिंह परिहार आग में फंस गए और उनकी मौके पर ही जलकर मौत हो गई, जबकि एक अन्य कर्मचारी मुन्नू केवट गंभीर रूप से झुलस गया। सूचना मिलते ही पुलिस और नगर निगम की दमकल टीम मौके पर पहुंची और करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान घायल कर्मचारी को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया। हादसे के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने सतना-अमरपाटन हाईवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया और मुआवजे की मांग की। कई घंटों तक सड़क पर आवागमन ठप रहा। प्रशासन और प्लांट मालिक की ओर से बातचीत के बाद 15 लाख रुपये मुआवजा और अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रुपये की सहायता देने के आश्वासन पर रात करीब 3:30 बजे जाम हटाया गया। फैक्ट्री में धान की भूसी से राइस ब्रान ऑयल बनाने का काम होता था और शुरुआती जांच में आग लगने के कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी है। पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।