सलमान खान की ‘अकेलेपन’ वाली पोस्ट पर मचा हंगामा, मां ने पूछा- क्या हुआ बेटा? अभिनेता ने दी सफाई

मुंबई। बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान ख़ान की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने फैंस के बीच हलचल पैदा कर दी। अभिनेता ने कुछ दिन पहले अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए अकेलेपन और तन्हाई को लेकर एक संदेश लिखा था, जिसके बाद सोशल media पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। फैंस उनके भावनात्मक हालात को लेकर चिंता जताने लगे। अब सलमान ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले पर सफाई दी है। सलमान खान ने देर रात इंस्टाग्राम पर नई पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनका संदेश उनके निजी जीवन से जुड़ा नहीं था। उन्होंने लिखा कि इतने बड़े परिवार, दोस्तों और चाहने वालों के बीच वह खुद को अकेला महसूस नहीं कर सकते। अभिनेता ने कहा, “जब मेरे पास परिवार, दोस्त और आप सभी का प्यार व दुआएं हैं, तो मैं अकेला कैसे हो सकता हूं? अगर ऐसा कहूं तो मैं सबसे बड़ा नाशुक्रा इंसान होऊंगा।” उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पोस्ट पढ़कर उनकी मां सलमा खान भी परेशान हो गई थीं। सलमान ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि इस बार बिना किसी फोटो के ही पोस्ट ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बन गई और उनकी मां ने उनसे पूछा, “क्या हुआ बेटा?” अभिनेता ने आगे कहा कि कभी-कभी लोगों के बीच रहकर थकान महसूस होती है, इसलिए उन्हें थोड़ा अकेले समय की जरूरत पड़ती है। दरअसल, इससे पहले सलमान खान ने अपनी शर्टलेस तस्वीर के साथ एक क्रिप्टिक कैप्शन साझा किया था। पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि “अकेला होना और तन्हा होना दोनों अलग बातें हैं। अकेलापन अपनी पसंद से होता है, जबकि तन्हाई तब महसूस होती है जब कोई आपके साथ नहीं रहना चाहता।” इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर फैंस लगातार अलग-अलग अंदाजे लगा रहे थे। वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान के पास इस समय कई बड़े प्रोजेक्ट हैं। उनकी आगामी फिल्म मातृभूमि पहले ‘बैटल ऑफ गलवां’ नाम से चर्चा में थी, लेकिन बाद में इसका टाइटल बदल दिया गया। इसके अलावा वह निर्देशक वामशी पेडिपल्ली की फिल्म ‘SVC63’ की शूटिंग में भी व्यस्त हैं, जिसमें उनके साथ नयनतारा नजर आएंगी। वहीं राज निदिमोरु और कृष्ण डी.के. के साथ भी उनके नए प्रोजेक्ट की चर्चाएं जारी हैं।
OTT पर फ्री टीवी चैनलों पर रोक लगेगी? TRAI की समीक्षा से केबल–DTH और डिजिटल प्लेटफॉर्म में टकराव तेज

नई दिल्ली। भारत में फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी (FAST) और OTT प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे लाइव टीवी चैनलों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। केबल और DTH ऑपरेटर्स का कहना है कि Tata Play, Airtel Digital TV और अन्य पारंपरिक सेवाओं के ग्राहक तेजी से कम हो रहे हैं क्योंकि वही टीवी चैनल और कंटेंट अब इंटरनेट पर फ्री में उपलब्ध हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिसंबर 2022 में जहां DTH ग्राहकों की संख्या 6.66 करोड़ थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर लगभग 5.09 करोड़ रह गई। कंपनियों का आरोप है कि OTT प्लेटफॉर्म्स बिना भारी लाइसेंस फीस के वही कंटेंट दे रहे हैं, जो केबल और DTH पर भुगतान के साथ मिलता है। इसी वजह से वे मांग कर रहे हैं कि इंटरनेट टीवी प्लेटफॉर्म्स पर भी करीब 10 करोड़ रुपये तक की लाइसेंसिंग फीस और समान नियम लागू किए जाएं। वहीं दूसरी तरफ OTT और डिजिटल कंपनियों का तर्क है कि यह प्लेटफॉर्म टीवी ब्रॉडकास्ट नहीं बल्कि इंटरनेट आधारित सेवाएं हैं। Jio Platforms, JioStar और अन्य डिजिटल इकाइयों का कहना है कि पुराने केबल नियमों को इंटरनेट युग पर लागू करना गलत होगा। उनके अनुसार FAST चैनल्स टीवी नहीं बल्कि ऐप-आधारित स्ट्रीमिंग हैं, जिन्हें अलग कानूनी ढांचे में देखा जाना चाहिए। इसी विवाद में अब टीवी निर्माता कंपनियां भी शामिल हो गई हैं। उनका कहना है कि वे सिर्फ स्मार्ट टीवी में ऐप्स उपलब्ध कराते हैं, कंटेंट की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। भारत में करोड़ों लोग कनेक्टेड टीवी और मोबाइल पर फ्री लाइव चैनल देखते हैं, ऐसे में अगर TRAI केबल कंपनियों के पक्ष में फैसला देता है, तो कई फ्री OTT लाइव टीवी चैनल और स्पोर्ट्स स्ट्रीमिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है या उन्हें पेड मॉडल में बदलना पड़ सकता है। अब सबकी नजर TRAI के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो भारत में डिजिटल टीवी और पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।
शरीर पर छिपकली गिरना शुभ या अशुभ? सामुद्रिक शास्त्र में जानें हर अंग का संकेत

नई दिल्ली। प्राचीन मान्यताओं और ज्योतिषीय ग्रंथ Samudrik Shastra में शरीर पर छिपकली गिरने को केवल एक सामान्य घटना नहीं बल्कि एक संकेत के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर छिपकली गिरने का अर्थ अलग-अलग फल देता है, जो व्यक्ति के जीवन में शुभ या अशुभ घटनाओं की ओर इशारा कर सकता है। सिर पर छिपकली गिरना अत्यंत शुभ माना जाता है और इसे धन, सम्मान या बड़े अवसर की प्राप्ति का संकेत बताया गया है। वहीं माथे पर गिरना किसी पुराने परिचित से मुलाकात या सामाजिक मान-सम्मान बढ़ने का संकेत देता है। नाक पर छिपकली गिरने को स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है, जिसमें रोग से राहत मिलने की संभावना बताई जाती है। कान पर छिपकली गिरना शुभ समाचार या लाभ का संकेत माना जाता है, जबकि आंख पर गिरना मानसिक तनाव से मुक्ति का प्रतीक बताया जाता है। होंठों पर इसके प्रभाव को आर्थिक स्थिति से जोड़ा गया है, जिसमें ऊपर के होंठ पर गिरना नुकसान और नीचे के होंठ पर गिरना लाभ का संकेत माना जाता है। हाथों पर छिपकली गिरने के भी अलग अर्थ बताए गए हैं—दाहिने हाथ पर गिरना सफलता और सम्मान का संकेत है, जबकि बाएं हाथ पर इसे सावधानी का संकेत माना गया है। पेट और नाभि क्षेत्र पर गिरना सुख-समृद्धि और संतान सुख से जुड़ा शुभ संकेत माना जाता है। पीठ पर छिपकली गिरना आमतौर पर अशुभ माना जाता है, जबकि पैर या जांघ पर इसका गिरना यात्रा, स्थान परिवर्तन या वाहन सुख से जुड़ा संकेत बताया जाता है। हालांकि यह सभी मान्यताएं पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं और इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, फिर भी लोग इन्हें लोक आस्था और ज्योतिषीय संकेत के रूप में देखते हैं।
ईरान पर अमेरिकी हमले की योजना टली, खाड़ी देशों की अपील पर ट्रंप ने लिया फैसला, समझौता पर जोर

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित एक बड़े सैन्य हमले को फिलहाल के लिए रोक दिया है। यह हमला मंगलवार को होने वाला था, लेकिन अंतिम समय पर खाड़ी देशों के नेताओं की अपील के बाद इसे टाल दिया गया। ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में दोनों पक्षों के बीच गंभीर बातचीत चल रही है, इसलिए सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई ठोस समझौता नहीं होता है तो हालात फिर से बिगड़ सकते हैं। इससे पहले ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी थी कि अगर वार्ता विफल रहती है तो युद्धविराम के कमजोर होने के बाद स्थिति गंभीर संघर्ष में बदल सकती है। जानकारी के मुताबिक, इस संभावित हमले को लेकर अमेरिकी सेना को पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए गए थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य अधिकारियों से कहा था कि यदि ईरान के साथ कोई स्वीकार्य समझौता नहीं होता, तो पल भर के नोटिस पर बड़े सैन्य हमले के लिए तैयार रहें। इससे यह संकेत मिला था कि अमेरिका कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार था। हालांकि यह हमला अचानक टाल दिया गया। ट्रंप ने बताया कि यह फैसला मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों—कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अपील के बाद लिया गया है। इससे पहले सप्ताहांत में ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ईरान के पास समय बहुत कम है और अगर समझौता नहीं हुआ तो परिणाम गंभीर होंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है और युद्धविराम किसी भी समय टूट सकता है।
आम आदमी को एक और झटका, पेट्रोल-डीजल और दूध के बाद अब ब्रेड भी हुई महंगी

नई दिल्ली। देश में महंगाई का असर अब रोजमर्रा की चीजों पर साफ दिखने लगा है। पेट्रोल-डीजल और दूध के दाम बढ़ने के बाद अब ब्रेड भी महंगी हो गई है। हाल ही में 14 मई को दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद अब ब्रेड के दामों में भी 5 रुपये प्रति पैकेट तक का इजाफा किया गया है। ब्रेड की कीमतों में यह बढ़ोतरी बढ़ती परिवहन लागत, प्लास्टिक पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले आयातित कच्चे माल की कीमतों में उछाल और रुपये में गिरावट को जिम्मेदार बताया जा रहा है। मॉडर्न ब्रेड ने अपने बेसिक वेरिएंट्स के दाम एकमुश्त 5 रुपये तक बढ़ा दिए हैं, जिसे अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि माना जा रहा है। बाजार में चर्चा है कि आने वाले दिनों में ब्रिटानिया और विब्स जैसी अन्य कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, मॉडर्न ब्रेड की मालिक कंपनी ग्रुपो बिम्बो की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। खुदरा विक्रेताओं के अनुसार, 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड की कीमत 40 रुपये से बढ़कर 45 रुपये हो गई है। होल व्हीट ब्रेड 55 से 60 रुपये, मल्टीग्रेन ब्रेड 60 से 65 रुपये, छोटे ब्राउन ब्रेड के पैकेट 28 से 30 रुपये और व्हाइट ब्रेड 20 से बढ़कर 22 रुपये हो गए हैं। वहीं ब्राउन ब्रेड की कीमत भी 45 से बढ़कर 50 रुपये तक पहुंच गई है। बेकरी संचालकों का कहना है कि प्लास्टिक पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल अधिकतर आयातित होता है, जिसकी कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट खर्च, प्रिजर्वेटिव्स और नमक जैसी जरूरी चीजों की लागत भी बढ़ी है, जिससे ब्रेड के दाम बढ़ाना मजबूरी बन गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया बेकर्स एसोसिएशन के सदस्य और क्वालिटी बेकर्स के निदेशक सलाहुद्दीन खान ने बताया कि लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है। आम उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले 2-3 रुपये की बढ़ोतरी भी भारी लगती थी, लेकिन अब एक बार में 5 रुपये तक का इजाफा आम बात हो गई है। इधर, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी जारी है। मंगलवार, 19 मई 2026 को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की है। पिछले पांच दिनों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले शुक्रवार को भी ईंधन के दामों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। सीएनजी की कीमतों में भी पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है। नई कीमतों के बाद दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल 107.59 रुपये और डीजल 94.08 रुपये, कोलकाता में पेट्रोल 109.70 रुपये और डीजल 96.07 रुपये तथा चेन्नई में पेट्रोल 104.49 रुपये और डीजल 96.11 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से सब्जी, दूध, राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
चेपॉक में गरमाया माहौल, संजू सैमसन और क्लासेन के बीच तीखी बहस ने मैच के बाद बढ़ाया ड्रामा

नई दिल्ली । चेन्नई सुपर किंग्स को सनराइजर्स हैदराबाद के हाथों 5 विकेट से शिकस्त झेलनी पड़ी. मैच खत्म होने के बाद सनराइजर्स हैदराबाद की जीत से ज्यादा चर्चा संजू सैमसन और हेनरिक क्लासेन के बीच हुई उस तीखी बहस की रही, जिसने चेपॉक के माहौल में अलग ही रोमांच भर दिया. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में सोमवार (19 मई) को एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए हाईवोल्टेज मुकाबले के दौरान चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के खिलाड़ियों के बीच मैदान पर तनाव देखने को मिला. सीएसके के विकेटकीपर संजू सैमसन और एसआरएच के स्टार बल्लेबाज हेनरिक क्लासेन के बीच हुई तीखी बहस ने तो मैच का माहौल पूरी तरह गरमा दिया. यह घटना सनराइजर्स हैदराबाद की पारी के 15वें ओवर में हुई. नूर अहमद ने उस ओवर की तीसरी गेंद ऑफ स्टम्प के बाहर फेंकी, जो एक गुगली थी. क्लासेन बड़ा शॉट खेलने के लिए क्रीज से बाहर निकले, लेकिन गेंद उनके बल्ले को छकाते हुए विकेटकीपर संजू सैमसन के दस्तानों में समा गई. सैमसन ने पलभर में बेल्स उड़ाकर क्लासेन को स्टम्प आउट कर दिया. संजू सैमसन की यह फुर्ती देखकर फैन्स को तुरंत महेंद्र सिंह धोनी की याद आ गई. सोशल मीडिया पर भी इस स्टम्पिंग की तुलना धोनी की क्लासिक विकेटकीपिंग से होने लगी. हालांकि असली ड्रामा इसके बाद शुरू हुआ. 26 गेंदों में 47 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर लौट रहे हेनरिक क्लासेन ने पिच के पास संजू सैमसन से कुछ कहा. जवाब में संजू सैमसन भी पीछे नहीं हटे. दोनों खिलाड़ियों के बीच कुछ सेकंड तक तीखी बहस चली. साउथ अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज हेनरिक क्लासेन पवेलियन की ओर लौटते वक्त भी पीछे मुड़कर लगातार कुछ कहते नजर आए, जिससे साफ था कि मामला सिर्फ मजाक तक सीमित नहीं था. मैदानी अंपायरों ने माहौल को शांत करने की कोशिश की. मैच में सनराइजर्स हैदराबाद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स को 5 विकेट से हरा दिया. इस जीत के साथ हैदराबाद ने प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की कर ली, जबकि गुजरात टाइटन्स भी अंतिम-4 में पहुंच गई. पहले बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स ने 180/7 का स्कोर बनाया. संजू सैमसन ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और शुरुआती ओवरों में लगातार चौके जड़े, लेकिन कप्तान पैट कमिंस ने शानदार वापसी करते हुए तीन बड़े विकेट निकाले और सीएसके को बड़ा स्कोर बनाने से रोक दिया. मध्यक्रम में कार्तिक शर्मा ने तेज 32 रन बनाए, जबकि डेवाल्ड ब्रेविस ने 44 रनों की उपयोगी पारी खेली. इसके बावजूद सीएसके 200 रनों तक नहीं पहुंच सकी.
NEET पेपरलीक: आरोपी कुलकर्णी को लेकर जांच एजेंसियां सक्रिय

नई दिल्ली। देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में सामने आए पेपर लीक मामले ने जांच एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अब एक बड़े नाम का खुलासा किया है पी.वी. कुलकर्णी, जिन्हें इस पूरे रैकेट का अहम आरोपी बताया जा रहा है। CBI की जांच के मुताबिक, कुलकर्णी मूल रूप से महाराष्ट्र के लातूर के रहने वाले हैं और एक समय में NTA से जुड़े हुए थे, जहां उन्हें परीक्षा प्रक्रिया और प्रश्नपत्र निर्माण से जुड़ी जिम्मेदारी मिली हुई थी। इसी कारण उनकी पहुंच सीधे फाइनल परीक्षा पेपर तक थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुलकर्णी ने इस संवेदनशील जानकारी का गलत इस्तेमाल किया और परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्रों को एक संगठित नेटवर्क के जरिए छात्रों तक पहुंचाना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने पुणे और आसपास के इलाकों में गुप्त कोचिंग क्लासेस का आयोजन किया, जहां चयनित छात्रों को परीक्षा से पहले ही ‘लीक हुए प्रश्न’ पढ़ाए जाते थे। इसी नेटवर्क के खुलासे के बाद CBI ने कार्रवाई तेज करते हुए उन्हें जयपुर से गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ यह भी आरोप है कि वह इस पूरे ऑपरेशन में “मास्टरमाइंड” की भूमिका निभा रहे थे और कई अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर यह रैकेट चला रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले में केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक पूरा नेटवर्क सक्रिय था, जिसमें कोचिंग सेंटर संचालक और अन्य शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल एजेंसी ने कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है। इस खुलासे के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। CBI अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक का दायरा कितना बड़ा था और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
वास्तु और शास्त्रों की चेतावनी, दरवाजे के पीछे लटकाई ये चीजें रोक सकती हैं सुख-समृद्धि का रास्ता

नई दिल्ली । Shakun Apshakun: अधिकांश घर में लोग जगह की बचाने के लिए दरवाजे के पीछे, बैग, कपड़े, इत्यादि सामान लटाका देते हैं. वैसे तो लोग इस आदत पर बहुत ध्यान नहीं देते, लेकिन शास्त्रों में इसके बड़े नुकसान बताए गए हैं. शास्त्रों की मानें तो दरवाजे के पीछे सामान लटकाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि शास्त्रों में इसे अशुभ माना गया है. मान्यता है कि कुछ चीजों को दरवाजे के पीछे लटकाने से निगेटिव एनर्जी बढ़ने लगती है. साथ ही परिवार की आर्थिक तरक्की में अनेक प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होने लगती है. गरुड़ पुराण के मुताबिक, घर के मुख्य द्वार और उसके आसपास की जगह को बेहद साफ-सुथरा रखना चाहिए. आइए, अब जानते हैं कि दरवाजे के पीछे किन चीजों की लटकाना अशुभ माना गया है. दरवाजे के पीछे ना लटकाएं कपड़ेशास्त्र-पुराणों के अनुसार, दरवाजे के पीछे कभी भी सूखे या भींगे कपड़े नहीं लटकाना चाहिए. ऐसा करना अशुभ माना गया है. दरवाजे के पीछे टंगे भींगे कपड़े भयानक वास्तु दोष उत्पन्न करते हैं. इसकी वजह से सकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है. कहा जाता है कि लगातार ऐसा करने से तनाव, कलह और आर्थिक नुकसान की संभावना बढ़ जाती है. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो ऐसा करने से राहु दोष भी उत्पन्न हो सकता है. पुराने बैग और दवाइयांवास्तु शास्त्र की मानें तो दरवाजे के पीछे दवाइयों का थैला, पुराने बैग इत्यादि टांगने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगता है. वास्तु एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसा करने से परिवार के सदस्य बीमारियों से घिरे रहते हैं. कमाई का अधिकांश हिस्सा इलाज पर खर्च होता है. इसके अलावा दरवाजे के पीछे पुराने कैलेंडर को भी लटकाने से बचना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे करियर में तरक्की रुक जाती है जूते और चप्पलशकुन शास्त्र के मुताबिक, दरवाजे के पीछे जूते-चप्पल इत्यादि के थैले को भी नहीं टांगना चाहिए. मान्यता है कि इससे घर में दरिद्रता का प्रवेश होने लगता है. इस स्थिति में अच्छी कमाई के बावजूद भी धन नहीं टिकता है. इसलिए, दरवाजे के पीछे भूलकर भी जूते-चप्पल ना लटकाएं कैसे दूर होगी निगेटिव एनर्जी?वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, दरवाजे के पीछे का हिस्सा बिल्कुल साफ और खाली रखना चाहिए. इसके साथ ही वास्तु दोष को दूर करने के लिए वहां स्वास्तिक का चिह्न बनाना शुभ होता है. ऐसा करने से घर की निगेटिव एनर्जी दूर होने लगती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान, अब तक 32 अवॉर्ड

नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। नॉर्वे ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान नॉर्वे का शीर्ष नागरिक अलंकरण माना जाता है, जो असाधारण सेवा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने में योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है। इस सम्मान के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को अब तक मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। यह उपलब्धि उनके वैश्विक कूटनीतिक और राजनयिक संबंधों में बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाती है। नॉर्वे के रॉयल हाउस की आधिकारिक व्यवस्था के अनुसार, यह ऑर्डर 1985 में किंग ओलाव V द्वारा स्थापित किया गया था। इसे उन विदेशी और नॉर्वेजियन नागरिकों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने नॉर्वे या मानवता के हित में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि यह उनकी नॉर्वे की पहली यात्रा है और पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह देश का पहला दौरा भी है। ओस्लो पहुंचने पर उनका स्वागत नॉर्वे के प्रधानमंत्री और शीर्ष नेतृत्व द्वारा किया गया। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 19 मई को आयोजित होने वाले तीसरे नॉर्डिक-इंडिया समिट में भाग लेंगे। इस सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, स्वीडन और नॉर्वे के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। यह शिखर सम्मेलन पहले स्टॉकहोम (2018) और कोपेनहेगन (2022) में हो चुके सम्मेलनों की कड़ी का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना है। विदेश मंत्रालय ने इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि यह भारत और नॉर्वे के बीच व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, हरित तकनीक और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देगा। इसके साथ ही भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच आर्थिक साझेदारी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह दौरा न केवल भारत-नॉर्वे संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को भी और मजबूत करता है।
रूसी तेल खरीद पर राहत, भारत की सप्लाई पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर

नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच अमेरिका ने एक अहम कदम उठाते हुए रूसी तेल से जुड़े प्रतिबंधों में 30 दिनों की अतिरिक्त छूट देने का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार यह राहत उन कच्चे तेल कार्गो पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं, ताकि उनकी सप्लाई बाधित न हो और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम किया जा सके। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा संकट और कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अमेरिका का कहना है कि यह “अस्थायी जनरल लाइसेंस” उन देशों के लिए राहत की तरह है, जिनकी ऊर्जा जरूरतें तत्काल हैं और जो समुद्र में फंसे तेल कार्गो पर निर्भर हैं। इस बीच भारत ने अपनी स्थिति एक बार फिर स्पष्ट कर दी है कि वह किसी भी अमेरिकी छूट या प्रतिबंध ढांचे पर निर्भर नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेट्री सुजाता शर्मा ने साफ कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदना न तो पहले रोका था, न छूट के दौरान रोका और न ही आगे रोकेगा। उनके मुताबिक यह निर्णय पूरी तरह से व्यावसायिक और आर्थिक जरूरतों पर आधारित है। सरकारी पक्ष का कहना है कि भारत की प्राथमिकता देश में ईंधन आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है, ताकि किसी भी प्रकार की कमी या मूल्य वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर न पड़े। हाल के समय में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारत में तेल कंपनियों पर दबाव बना हुआ है, जिससे प्रतिदिन करोड़ों रुपये के नुकसान की स्थिति भी बनी हुई है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से किसी भी तरह की सप्लाई बाधा देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर सीधा असर डाल सकती है। इसी कारण रूस से कच्चे तेल की खरीद को एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कुल तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और यह निर्भरता लगातार बढ़ रही है। घरेलू उत्पादन में गिरावट और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती मांग ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में आयातित तेल देश की ऊर्जा व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कुल मिलाकर, जहां अमेरिका वैश्विक बाजार को स्थिर रखने के लिए अस्थायी राहत दे रहा है, वहीं भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति पूरी तरह घरेलू जरूरतों और आर्थिक वास्तविकताओं पर आधारित रहेगी।