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ममता हुई शर्मसार: दूसरी शादी में बेटी बनी रुकावट तो मां ने रची खौफनाक साजिश

नई दिल्ली /Telangana के मेडचल-मलकाजगिरि जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक मां पर अपनी ही छह साल की बेटी की हत्या करने का आरोप लगा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिला ने दूसरी शादी में आ रही बाधा को हटाने के लिए इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और लोग इस अमानवीय कृत्य को लेकर स्तब्ध हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी महिला अपनी बेटी के साथ अलग रह रही थी। उसकी पहली शादी टूट चुकी थी और बाद में वह एक अन्य व्यक्ति के संपर्क में आई। दोनों ने शादी करने का फैसला किया, लेकिन बच्ची की मौजूदगी को लेकर कथित तौर पर नए रिश्ते में परेशानी पैदा हो रही थी। बताया जा रहा है कि इसी वजह से महिला ने अपनी बेटी को रास्ते से हटाने की साजिश रची। जांच में सामने आया कि महिला ने रात के समय अपनी मासूम बेटी को पानी की प्लास्टिक टंकी में डुबो दिया। घटना के बाद बच्ची की मौत हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शुरुआती पूछताछ और परिस्थितियों के आधार पर महिला को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह घटना बेहद चौंकाने वाली है क्योंकि मां और बेटी लंबे समय से साथ रह रहे थे। आसपास के लोगों को कभी इस बात का अंदाजा नहीं था कि मामला इतना भयावह मोड़ ले सकता है। घटना के बाद इलाके में दुख और गुस्से का माहौल बना हुआ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। महिला के निजी संबंधों, पारिवारिक विवाद और अन्य परिस्थितियों को भी जांच में शामिल किया गया है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस घटना में किसी और की भी भूमिका थी। यह मामला एक बार फिर समाज में बढ़ते पारिवारिक तनाव और रिश्तों में पैदा हो रही जटिलताओं को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक विवाद और व्यक्तिगत फैसलों का असर कई बार मासूम बच्चों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। इस तरह की घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है और बच्ची की मौत से जुड़े सभी तथ्यों को खंगाला जा रहा है। इस दर्दनाक घटना ने लोगों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है और हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि आखिर एक मां अपनी ही बेटी के साथ इतनी क्रूरता कैसे कर सकती है।

हैदराबाद में शर्मनाक वारदात: चाय के बहाने कार में घुमाया, फिर क्लासमेट को जबरन शराब पिलाकर बीटेक छात्र ने किया दुष्कर्म, आरोपी सलाखों के पीछे

नई दिल्ली /हैदराबाद: महानगर के शैक्षणिक हलकों को झकझोर देने वाली एक बेहद संवेदनशील और गंभीर घटना में पुलिस ने एक तकनीकी संस्थान के छात्र को अपनी ही सहपाठी के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पीड़ित युवती और आरोपी दोनों ही क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और एक ही कक्षा में होने के कारण दोनों के बीच सामान्य जान-पहचान थी। इसी परिचय का फायदा उठाकर आरोपी ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया है। घटनाक्रम के अनुसार, यह पूरी वारदात बीते सप्ताह की रात को घटित हुई थी। आरोपी छात्र पीड़िता को उसके घर के पास से महज चाय पीने और साथ घूमने के बहाने अपनी कार में बिठाकर ले गया था। वह काफी देर तक युवती को कार में इधर-उधर घुमाता रहा, जिससे पीड़िता को उसकी वास्तविक और दुर्भावनापूर्ण मंशा का जरा भी अंदाजा नहीं हुआ। वापसी के दौरान आरोपी ने बीच रास्ते में गाड़ी रोककर शराब खरीदी। इसके बाद उसने कार के भीतर ही खुद भी शराब का सेवन किया और युवती को भी जबरन अत्यधिक मात्रा में शराब पीने पर मजबूर कर दिया। युवती के विरोध को दरकिनार करते हुए उसे पूरी तरह नशे की हालत में ला दिया गया। जब पीड़िता अत्यधिक नशे के कारण खुद को संभालने की स्थिति में नहीं रही, तब आरोपी उसे इब्राहिमपटनम इलाके में स्थित एक सुनसान कमरे पर लेकर गया। वहां उसने युवती की बेबसी का फायदा उठाते हुए उसके साथ जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। होश में आने और घटना की भयावहता को समझने के बाद, बीस वर्षीय पीड़िता ने हिम्मत दिखाई और सीधे स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर अपने साथ हुई इस बर्बरता की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता की मानसिक और शारीरिक स्थिति को समझते हुए तुरंत उसकी शिकायत के आधार पर संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला पंजीकृत कर लिया। मामला दर्ज होते ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी छात्र को चौबीस घंटे के भीतर धर दबोचा। शुरुआती पूछताछ और प्राथमिक जांच के बाद आरोपी को स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से विद्वान न्यायाधीश ने उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है और मामले से जुड़े तमाम वैज्ञानिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि आरोपी को कड़ी सजा मिल सके।

ब्रिटिश कपल ने भारत के स्ट्रीट फूड को लेकर तोड़ा मिथक, बोले- डराया गया था लेकिन अनुभव शानदार रहा

नई दिल्ली। इंडियन स्ट्रीट फूड को लेकर फैली नकारात्मक धारणाओं पर ब्रिटेन के ट्रैवल कपल Hazel Lindsey और Martin Bailey ने बड़ा बयान दिया है। कपल का कहना है कि भारत आने से पहले उन्हें लगातार चेतावनियां दी गई थीं कि सड़क किनारे खाना खाने से बीमार पड़ सकते हैं, लेकिन उनका अनुभव इसके बिल्कुल उलट रहा। कपल ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से लेकर केरल तक अलग-अलग जगहों पर स्ट्रीट फूड का स्वाद लिया और हर जगह उन्हें बेहतरीन अनुभव मिला। उनके मुताबिक, भारतीय स्ट्रीट फूड ही देश की असली संस्कृति और “सोल” को दिखाता है, जिसे किसी फाइव स्टार होटल में महसूस नहीं किया जा सकता। View this post on Instagram A post shared by The Lindsey Family (@hazel.lindsey_) Hazel Lindsey ने कहा कि शुरुआत में मसालेदार खाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन बाद में उन्होंने इसका पूरा आनंद लिया। कपल ने यह भी बताया कि पूरे ट्रिप के दौरान उन्हें किसी तरह की बड़ी स्वास्थ्य समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने भी भारत के स्ट्रीट फूड की तारीफ की और इसे दुनिया के बेहतरीन फूड कल्चर में से एक बताया।

Zoho ने वर्क फ्रॉम होम पर क्यों लगाया पूर्ण विराम, श्रीधर वेम्बु ने बताए तकनीकी कारण!

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद देश में वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल वर्क कल्चर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पीएम मोदी ने हाल ही में नागरिकों और कंपनियों से ईंधन की बचत और यात्रा कम करने के लिए ऑनलाइन मीटिंग और रिमोट वर्क को बढ़ावा देने की सलाह दी थी। लेकिन इसी बीच टेक कंपनी Zoho ने स्पष्ट कर दिया है कि वह वर्क फ्रॉम होम मॉडल को आगे नहीं बढ़ाएगी। Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने अपने बयान में कहा कि कंपनी का फोकस पूरी तरह से ऑफिस-बेस्ड वर्क मॉडल पर रहेगा। उन्होंने बताया कि खासकर रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) जैसे जटिल कामों में टीम का एक साथ, आमने-सामने बैठकर काम करना ज्यादा प्रभावी साबित होता है। क्यों लिया गया यह फैसला? सामने आए तकनीकी कारणश्रीधर वेम्बु के अनुसार, जब टीमें एक ही स्थान पर बैठकर काम करती हैं तो समस्या-समाधान तेजी से होता है और विचारों का आदान-प्रदान बेहतर तरीके से हो पाता है। उन्होंने कहा कि रिमोट वर्क के दौरान कई बार कम्युनिकेशन गैप बढ़ जाता है, जिससे किसी तकनीकी समस्या को हल करने में अधिक समय लगता है। वेम्बु ने यह भी बताया कि उनके अनुभव में ऑन-साइट टीमवर्क से इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी दोनों में सुधार देखने को मिला है। इसी वजह से कंपनी ने निर्णय लिया है कि वह पूर्ण रूप से वर्क फ्रॉम होम मॉडल को अपनाने की योजना नहीं रखती। पीएम मोदी की अपील क्या थी?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में तनाव को देखते हुए देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोग यात्रा कम करें, वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा दें और कोविड काल जैसी आदतों को फिर से अपनाएं, ताकि देश की ऊर्जा खपत और आयात पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि Zoho का यह फैसला दिखाता है कि अलग-अलग कंपनियां अपने कामकाज के हिसाब से वर्क मॉडल चुन रही हैं, और हर सेक्टर में रिमोट वर्क पूरी तरह प्रभावी नहीं माना जा रहा है, खासकर तकनीकी और डेवलपमेंट से जुड़े क्षेत्रों में।

नवी मुंबई एयरपोर्ट नाम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- विरोध करें लेकिन आम लोगों को परेशानी न हो

नई दिल्ली । नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जहां मंगलवार को इस मामले पर अहम सुनवाई हुई। अदालत ने एयरपोर्ट का नाम बदलने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए साफ कहा कि यह नीति निर्माण से जुड़ा विषय है और इसमें न्यायपालिका हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की, जो अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गई है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी प्रदर्शन के कारण आम लोगों के जीवन में बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि विरोध दर्ज कराने के नाम पर सड़कें जाम करना, कानून व्यवस्था प्रभावित करना या लोगों के लिए परेशानी खड़ी करना उचित नहीं है। अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। यह मामला नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम बदलकर एक क्षेत्रीय नेता के नाम पर रखने की मांग से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार से राज्य सरकार के प्रस्ताव पर जल्द निर्णय लेने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि नामकरण जैसे फैसले सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और अदालत ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि विरोध करने वाले लोगों को कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि कुछ प्रदर्शन अब आम जनता के लिए परेशानी का कारण बनने लगे हैं। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान जरूरी है, लेकिन उसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसी बीच मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत हाल के कुछ बयानों को लेकर भी चर्चा में रहे। उन्होंने हाल ही में स्पष्ट किया था कि उनके कुछ पुराने बयान संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किए गए थे। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग या युवाओं का अपमान करना नहीं था, बल्कि उन लोगों की ओर ध्यान दिलाना था जो गलत तरीकों से विभिन्न पेशों में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। नवी मुंबई एयरपोर्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने यह साफ कर दिया है कि अदालत नीति निर्माण के मामलों में सीमित दखल ही देती है। साथ ही अदालत ने यह भी संदेश दिया कि विरोध लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, लेकिन उसका तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे आम नागरिकों को कठिनाई का सामना न करना पड़े।

Apple ने आखिर क्यों बंद किए iPhone बॉक्स में मिलने वाले फ्री स्टिकर? सामने आई बड़ी वजह

नई दिल्ली। Apple iPhone Sticker Policy: दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Apple ने अपने प्रोडक्ट्स के साथ लंबे समय से दी जाने वाली फ्री स्टिकर्स की परंपरा को अब खत्म कर दिया है। यह स्टिकर दशकों तक Apple की ब्रांडिंग और मार्केटिंग का अहम हिस्सा रहे, लेकिन अब कंपनी ने इन्हें हटाकर पैकेजिंग में बड़ा बदलाव किया है। आइए समझते हैं कि आखिर Apple ने यह फैसला क्यों लिया। 1970 के दशक से शुरू हुई थी स्टिकर की कहानीApple ने अपने शुरुआती प्रोडक्ट Apple II के साथ 1970 के दशक में पहली बार रेनबो Apple लोगो वाले स्टिकर देना शुरू किया था। बाद में 1988 के आसपास कंपनी ने इन्हें सॉलिड कलर लोगो में बदल दिया। धीरे-धीरे ये स्टिकर MacBook, iPod, iPhone और iPad जैसे हर प्रोडक्ट का हिस्सा बन गए। यूजर्स इन्हें लैपटॉप, कार और बैग पर लगाकर Apple ब्रांड को प्रमोट करने लगे। Apple के लिए क्यों थे ये स्टिकर इतने खास?Apple के लिए ये सिर्फ स्टिकर नहीं बल्कि एक सस्ते लेकिन बेहद प्रभावी मार्केटिंग टूल थे। कंपनी ने बिना किसी अतिरिक्त विज्ञापन खर्च के अपने यूजर्स को ही ब्रांड एंबेसडर बना दिया था। जहां भी ये स्टिकर लगाए जाते, वहीं Apple का लोगो खुद-ब-खुद प्रमोशन करता। साथ ही, बॉक्स खोलते समय मिलने वाला यह छोटा गिफ्ट यूजर्स के लिए एक प्रीमियम एक्सपीरियंस भी बन गया था। अब क्यों बंद कर दिए गए फ्री स्टिकर?रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple ने 2024 के बाद से धीरे-धीरे अपने प्रोडक्ट बॉक्स से फ्री स्टिकर हटाने शुरू कर दिए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी का ‘कार्बन न्यूट्रल’ और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी वाला लक्ष्य बताया जा रहा है। Apple अब पूरी तरह फाइबर-बेस्ड और इको-फ्रेंडली पैकेजिंग की ओर बढ़ रहा है। चूंकि पुराने स्टिकर प्लास्टिक आधारित थे, इसलिए इन्हें हटाना इस नई ग्रीन पॉलिसी का हिस्सा है। कुल मिलाकर, Apple का यह कदम पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, लेकिन लंबे समय से चले आ रहे एक छोटे लेकिन लोकप्रिय फीचर का अंत भी हो गया है। 

Earbuds का एक साइड क्यों नहीं करता काम? जानिए वजह और घर बैठे आसान तरीके से कैसे करें ठीक

नई दिल्ली। आजकल वायरलेस ईयरबड्स लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन कई यूजर्स एक आम समस्या से परेशान रहते हैं कि ईयरबड्स का एक साइड काम करना बंद कर देता है या जल्दी डिस्चार्ज हो जाता है। अक्सर लोग इसे खराबी समझकर नया ईयरबड खरीदने की सोच लेते हैं, लेकिन कई बार इसकी वजह बहुत सामान्य होती है और इसे घर पर ही ठीक किया जा सकता है। टेक एक्सपर्ट्स के अनुसार, ज्यादातर वायरलेस ईयरबड्स में एक साइड “मेन ईयरबड” की तरह काम करता है, जो सीधे फोन से कनेक्शन बनाए रखता है। यही साइड कॉलिंग, माइक्रोफोन और कंट्रोल का ज्यादा इस्तेमाल संभालता है, जिससे उस पर ज्यादा लोड पड़ता है और उसकी बैटरी दूसरे ईयरबड की तुलना में जल्दी खत्म होने लगती है। इसके अलावा अगर कोई यूजर अक्सर सिर्फ एक ही ईयरबड का इस्तेमाल करता है, तो उस साइड की बैटरी समय के साथ जल्दी कमजोर हो सकती है। इसके अलावा एक और बड़ी वजह बैटरी की उम्र भी होती है। जैसे-जैसे ईयरबड्स पुरानी होते जाते हैं, उनकी छोटी बैटरियों की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे एक साइड पहले डिस्चार्ज होने लगता है या ठीक से काम नहीं करता। कई बार समस्या ईयरबड में नहीं बल्कि उसकी चार्जिंग में भी होती है। ईयरबड के चार्जिंग पिन या केस में धूल, गंदगी या ईयरवैक्स जमा हो जाता है, जिससे एक ईयरबड ठीक से चार्ज नहीं हो पाता। ऐसे में वह डेड दिखने लगता है। इस स्थिति में ईयरबड और चार्जिंग केस को साफ, सूखे और मुलायम कपड़े या कॉटन स्वैब से हल्के हाथों से साफ करना चाहिए। ध्यान रखना जरूरी है कि पानी का इस्तेमाल न किया जाए। इसके बाद दोनों ईयरबड्स को चार्जिंग केस में रखकर रीसेट करना भी एक असरदार तरीका है। कई कंपनियों के ईयरबड्स में रीसेट या री-पेयरिंग का ऑप्शन होता है, जिससे कनेक्शन और सिंकिंग से जुड़ी समस्याएं ठीक हो जाती हैं। अगर फिर भी समस्या बनी रहती है तो फोन की ब्लूटूथ सेटिंग्स को चेक करना जरूरी है। कई बार फोन में ईयरबड को “Forget Device” करके दोबारा पेयर करने से ऑडियो और बैटरी से जुड़ी दिक्कतें खत्म हो जाती हैं। साथ ही फोन और ईयरबड दोनों के सॉफ्टवेयर या फर्मवेयर अपडेट करना भी फायदेमंद होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईयरबड्स की बैटरी लाइफ को बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ गलतियों से बचना चाहिए, जैसे उन्हें पूरी रात चार्जिंग पर लगाकर छोड़ना, बहुत गर्म जगह पर इस्तेमाल करना या हमेशा एक ही ईयरबड का लगातार उपयोग करना। दोनों ईयरबड्स का बराबर इस्तेमाल करने से उनकी बैटरी बैलेंस बनी रहती है और परफॉर्मेंस बेहतर रहती है। इस तरह थोड़ी सावधानी और आसान ट्रिक्स अपनाकर ईयरबड्स की ज्यादातर आम समस्याओं को घर बैठे ही ठीक किया जा सकता है और नए खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।

जिला अस्पताल पर उठे सवाल: मासूम की मौत के बाद परिजनों का हंगामा

मध्य प्रदेश।  अशोकनगर  जिले के महुअन गांव में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। पलंग से गिरकर घायल हुए छह माह के मासूम आदर्श चंदेल की मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। मासूम की मौत के बाद जिला अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई और परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए। जानकारी के मुताबिक, महुअन गांव निवासी विकास चंदेल का छह माह का बेटा आदर्श रविवार शाम घर में पलंग पर खेल रहा था। उसी दौरान उसकी मां रवि चंदेल घर से बाहर पानी भरने चली गई थीं। घर लौटने पर उन्होंने देखा कि मासूम पलंग से नीचे फर्श पर गिरा पड़ा है। बच्चे के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई थीं। परिवार के लोग तुरंत उसे इलाज के लिए ईसागढ़ के एक निजी क्लिनिक लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार किया गया। परिजनों का कहना है कि सोमवार शाम तक बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि मासूम की हालत में सुधार होगा, लेकिन मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत के बाद अस्पताल परिसर में मातम का माहौल बन गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने समय पर सही उपचार नहीं किया और बार-बार पूछने के बावजूद बच्चे की हालत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते बेहतर इलाज मिलता, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी। मासूम आदर्श की मौत के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। घटना के बाद गांव में भी शोक की लहर फैल गई। पड़ोसियों और रिश्तेदारों का कहना है कि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। यह हादसा एक बार फिर छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों को कभी भी पलंग या ऊंची जगह पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं, परिजन जिला अस्पताल के डॉक्टरों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Realme 16T भारत में 22 मई को होगा लॉन्च, 8000mAh बैटरी और 3 दिन बैकअप का दावा, कीमत ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली। रियलमी 22 मई 2026 को भारत में अपना नया स्मार्टफोन Realme 16T लॉन्च करने जा रही है, जो लॉन्च से पहले ही अपनी बैटरी और फीचर्स को लेकर चर्चा में आ गया है। इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 8000mAh की दमदार बैटरी बताई जा रही है, जिसे लेकर कंपनी दावा कर रही है कि यह एक बार चार्ज करने पर करीब तीन दिन तक चल सकती है। यानी यूजर्स को बार-बार चार्जिंग की टेंशन से काफी हद तक राहत मिल सकती है। लॉन्च से ठीक पहले सामने आई लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक Realme 16T के रिटेल बॉक्स पर इसकी MRP ₹55,999 दिखाई गई है, हालांकि माना जा रहा है कि असल बिक्री कीमत इससे काफी कम यानी लगभग ₹20,000 से ₹25,000 के बीच हो सकती है। कंपनी इसे बजट और मिड-रेंज सेगमेंट में आक्रामक कीमत के साथ पेश कर सकती है। फोन के फीचर्स की बात करें तो इसमें MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर दिया गया है, जो रोजमर्रा के कामों के साथ-साथ मीडियम लेवल गेमिंग और स्ट्रीमिंग को आसानी से संभाल सकता है। इसके साथ 8GB रैम दी गई है, जिसे रैम बूस्ट टेक्नोलॉजी की मदद से 10GB तक बढ़ाया जा सकता है। डिस्प्ले के तौर पर इसमें 6.8 इंच का बड़ा LCD पैनल दिया गया है, जो वीडियो देखने और गेमिंग के लिए अच्छा एक्सपीरियंस दे सकता है, हालांकि इसमें AMOLED जैसी प्रीमियम क्वालिटी नहीं मिलेगी। कैमरा सेटअप में पीछे की तरफ 50MP का मेन सेंसर और 2MP का सेकेंडरी लेंस दिया गया है, जबकि फ्रंट में 16MP का सेल्फी कैमरा मौजूद है। कैमरा को और बेहतर बनाने के लिए कंपनी ने इसमें Sony IMX852 सेंसर और AI बेस्ड LumaColor Image Engine जैसे फीचर्स शामिल किए हैं, जो कम रोशनी में भी बेहतर फोटो क्लिक करने में मदद करते हैं। इसके साथ AI Portrait Glow और अन्य क्रिएटिव AI फीचर्स भी दिए गए हैं। डिजाइन के मामले में फोन को स्लिम रखा गया है, जिसकी मोटाई लगभग 8.8mm बताई जा रही है, जबकि इतनी बड़ी बैटरी होने के बावजूद यह हैंडसेट हल्का और पोर्टेबल रहने का दावा करता है। इसके अलावा 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी दिया गया है, जिससे बैटरी तेजी से चार्ज हो सकेगी। फोन में रियर सेल्फी मिरर और AI Popout Collage जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं, जो इसे युवाओं के लिए और आकर्षक बनाते हैं। खास बात यह है कि इसमें 11 घंटे तक BGMI गेमिंग का भी सपोर्ट बताया जा रहा है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल इसकी कीमत को लेकर है, क्योंकि बॉक्स पर ₹55,999 MRP दिखने के बावजूद एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फोन असल में मिड-रेंज सेगमेंट में लॉन्च होगा। ऐसे में Realme 16T भारतीय बाजार में बैटरी और AI फीचर्स के दम पर एक मजबूत विकल्प बन सकता है।

93 साल के हुए पहाड़ों के जादूगर रस्किन बॉन्ड, देहरादून में सादगी से मनाया जन्मदिन, मसूरी ने महसूस की कमी

नई दिल्ली। पहाड़ों की रानी मसूरी को अपनी कहानियों और शब्दों से दुनिया भर में पहचान दिलाने वाले विश्वप्रसिद्ध लेखक Ruskin Bond मंगलवार को 93 वर्ष के हो गए। इस खास मौके पर उनका जन्मदिन बेहद सादगी के साथ देहरादून स्थित आवास पर परिवार के बीच मनाया गया। हालांकि इस बार स्वास्थ्य कारणों से वह मसूरी नहीं पहुंच सके, जिससे उनके हजारों प्रशंसकों में मायूसी देखने को मिली। रस्किन बॉन्ड का नाम आते ही लोगों के मन में मसूरी की धुंध भरी वादियां, देवदार के जंगल, बारिश की बूंदें और पहाड़ी जीवन की सादगी जीवंत हो उठती है। उन्होंने अपनी लेखनी से सिर्फ कहानियां नहीं लिखीं, बल्कि पहाड़ों की आत्मा को शब्दों में ढालकर दुनिया के सामने पेश किया। यही वजह है कि आज भी बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उनकी रचनाओं को बेहद पसंद करते हैं। पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें मसूरी से देहरादून शिफ्ट किया गया है। परिवार के मुताबिक उनका स्वास्थ्य फिलहाल स्थिर है और वह लगातार चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उनके बेटे राकेश बॉन्ड ने बताया कि इस बार जन्मदिन घर पर ही बेहद सादगी से मनाया गया। हर साल उनके जन्मदिन पर मसूरी के माल रोड स्थित प्रसिद्ध बुक स्टोर में खास आयोजन होता था। देशभर से साहित्य प्रेमी सिर्फ उनकी एक झलक पाने, किताबों पर ऑटोग्राफ लेने और उनसे मिलने मसूरी पहुंचते थे। रस्किन बॉन्ड भी अपने प्रशंसकों से बेहद आत्मीयता से मिलते और खासकर बच्चों के साथ समय बिताना पसंद करते थे। लेकिन इस बार उनके मसूरी नहीं आने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने उनकी कमी महसूस की। सोशल मीडिया पर भी दिनभर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देने का सिलसिला चलता रहा। साहित्य प्रेमियों ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की। 19 मई 1934 को Kasauli में जन्मे रस्किन बॉन्ड का बचपन पहाड़ों के बीच बीता। उन्होंने शिमला और देहरादून में शिक्षा प्राप्त की और कम उम्र में ही लेखन शुरू कर दिया था। उनकी कहानियों में प्रकृति, अकेलापन, दोस्ती, मासूमियत और इंसानी रिश्तों की गहराई साफ दिखाई देती है। उनकी चर्चित रचनाओं में The Blue Umbrella, Time Stops at Shamli, A Flight of Pigeons और “दिल्ली इज़ नॉट फार” जैसी किताबें शामिल हैं। उनकी कई कहानियों पर फिल्में और टीवी सीरीज भी बन चुकी हैं, जिन्होंने नई पीढ़ी तक उनकी लेखनी को पहुंचाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि रस्किन बॉन्ड केवल लेखक नहीं, बल्कि मसूरी की सांस्कृतिक पहचान हैं। उनकी वजह से दुनिया भर के लोग मसूरी को करीब से जान पाए। साहित्य प्रेमियों का मानना है कि उनकी कहानियां आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकृति, संवेदनशीलता और इंसानी रिश्तों की अहमियत सिखाती रहेंगी।