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कोलकाता में बड़ा मामला: फरार आरोपी सोना पप्पू ईडी दफ्तर पहुंचा, लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार

नई दिल्ली । कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के तहत एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां पिछले तीन महीनों से फरार चल रहा बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू अचानक सॉल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय पहुंच गया। उसके इस अचानक कदम ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया, क्योंकि लंबे समय से वह लगातार फरार चल रहा था और कई बार समन जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुआ था। सूत्रों के अनुसार, सोमवार सुबह सोना पप्पू ईडी कार्यालय पहुंचा और अंदर प्रवेश करते समय उसने खुद को व्यवसायी बताते हुए कहा कि वह कोई अपराधी नहीं है। हालांकि इसके बाद शुरू हुई पूछताछ कई घंटों तक चली, जिसमें जांच अधिकारियों ने उससे विभिन्न मामलों को लेकर सवाल-जवाब किए। करीब नौ घंटे से अधिक चली इस लंबी पूछताछ के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि सोना पप्पू पर जबरन वसूली, जमीन हड़पने और अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े गंभीर आरोप हैं। उसके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज होने की बात भी सामने आई है, जिनमें प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों को धमकाकर पैसे वसूलने और संपत्ति पर अवैध कब्जे जैसे आरोप शामिल हैं। इस मामले में यह भी जानकारी सामने आई है कि हाल के महीनों में पुलिस और ईडी की संयुक्त कार्रवाई के दौरान उसके कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जहां से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई थी। इसके बाद से ही वह लगातार फरार चल रहा था और उसकी तलाश तेज कर दी गई थी। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि फरारी के दौरान भी सोना पप्पू सोशल मीडिया के जरिए अपनी मौजूदगी का संकेत देता रहा और खुद को निर्दोष बताने की कोशिश करता रहा। हालांकि जांच एजेंसियों के पास मौजूद साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ती रही। ईडी सूत्रों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ यह भी संदेह है कि वह कोलकाता के विभिन्न इलाकों में सक्रिय कई नेटवर्क और सिंडिकेट्स के जरिए अवैध गतिविधियों को संचालित करता था। इन नेटवर्क्स के जरिए कथित रूप से वसूली और संपत्ति से जुड़े मामलों को नियंत्रित किया जाता था, जिससे कई लोगों पर दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है। फिलहाल गिरफ्तारी के बाद उसे मंगलवार को अदालत में पेश किए जाने की तैयारी है, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने कोलकाता में प्रॉपर्टी और वित्तीय अपराधों से जुड़े नेटवर्क पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित कर दिया है और जांच एजेंसियां अब मामले की गहराई से जांच में जुट गई हैं।

पार्सल से 455 ग्राम अफीम बरामद: पूछताछ होते ही भाग निकला युवक

मंदसौर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी के लिए अब तस्कर नए-नए तरीके अपना रहे हैं। मंदसौर में ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां चॉकलेट और कैंडी के रैपर में अफीम छिपाकर कनाडा भेजने की कोशिश की जा रही थी। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) ने नई आबादी पोस्ट ऑफिस से 455 ग्राम अवैध अफीम बरामद की है। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब 4 बजे एक युवक नई आबादी स्थित पोस्ट ऑफिस पहुंचा और कनाडा के ओंटारियो में इंटरनेशनल पार्सल भेजने की प्रक्रिया शुरू की। करीब दो किलो वजन के इस पार्सल को लेकर युवक ने दावा किया कि उसमें केवल चॉकलेट और कैंडी आइटम हैं। लेकिन उसकी गतिविधियां पोस्ट ऑफिस कर्मचारियों को संदिग्ध लगीं। पोस्टल असिस्टेंट ने जब पार्सल में रखी सामग्री को लेकर युवक से विस्तार से पूछताछ की, तो वह घबराने लगा। कर्मचारियों ने उससे और जानकारी मांगी तो वह अचानक पार्सल काउंटर पर ही छोड़कर मौके से फरार हो गया। युवक के इस व्यवहार से कर्मचारियों का शक और गहरा गया, जिसके बाद तुरंत सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही सीबीएन मंदसौर सेल की टीम मौके पर पहुंची और पार्सल की जांच शुरू की। करीब दो घंटे तक चली जांच में पार्सल के अंदर ‘लव पैन’ नाम की कैंडी के दो बॉक्स मिले। जब टीम ने कैंडी और चॉकलेट के रैपर खोले तो उनमें छिपाए गए 25 छोटे पाउच बरामद हुए। इन पाउचों में कुल 455 ग्राम अफीम भरी हुई थी। बाकी रैपरों में सामान्य कैंडी रखी गई थी, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके। सीबीएन अधिकारियों के मुताबिक, तस्करों ने ड्रग्स को छिपाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पार्सल नीमच क्षेत्र से कनाडा भेजा जाना था। एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। पोस्ट ऑफिस परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में संदिग्ध युवक की तस्वीर कैद हो गई है। अब जांच एजेंसियां फुटेज के आधार पर उसकी पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश कर रही हैं। सीबीएन का कहना है कि एंटी ड्रग ऑपरेशन के तहत पहले से विशेष सूचना मिलने के बाद निगरानी बढ़ाई गई थी। पोस्टल असिस्टेंट प्रदीप मेहरा ने बताया कि युवक की घबराहट और संदिग्ध गतिविधियों के चलते उन्हें शक हुआ था। पूछताछ बढ़ाने पर वह सामान छोड़कर भाग गया, जिसके बाद तुरंत नारकोटिक्स टीम को बुलाया गया। फिलहाल जब्त अफीम को कब्जे में लेकर मामले की गहन जांच की जा रही है।

15,000 करोड़ का बोझ बढ़ा! सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को माना सामान्य बिजली उपभोक्ता, क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज अनिवार्य

नई दिल्ली । भारतीय ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसमें देश की सर्वोच्च अदालत ने Indian Railways को बिजली कानून के तहत कोई विशेष दर्जा देने से इनकार कर दिया है। इस निर्णय के बाद रेलवे को अब सामान्य उपभोक्ता की तरह बिजली खरीद पर सभी लागू सरचार्ज चुकाने होंगे, जिससे उस पर करीब 15,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला लंबे समय से कानूनी विवाद में था, जिसमें रेलवे यह दावा करता रहा था कि वह एक ‘डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी’ है और उसे बिजली वितरण से जुड़े अतिरिक्त शुल्क से छूट मिलनी चाहिए। रेलवे की दलील थी कि उसके पास अपना मजबूत बिजली ढांचा और नेटवर्क मौजूद है, जिसके आधार पर वह ग्रिड से सीधे बिजली खरीदता है और उसका उपयोग अपने संचालन में करता है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी वही माना जा सकता है, जो बिजली को आगे किसी तीसरे पक्ष को आपूर्ति करता हो। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि रेलवे का पूरा बिजली ढांचा उसके आंतरिक उपयोग के लिए है, जिसमें ट्रेनों, सिग्नल सिस्टम और स्टेशनों का संचालन शामिल है। इसे किसी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसी आधार पर रेलवे को सामान्य औद्योगिक उपभोक्ता माना गया है, जिसके कारण अब उसे क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और अतिरिक्त शुल्क देना अनिवार्य होगा। इस फैसले का सीधा असर रेलवे की वित्तीय योजनाओं पर पड़ सकता है। पिछले कई वर्षों से रेलवे ओपन एक्सेस के जरिए सस्ती बिजली खरीदकर बड़े पैमाने पर बचत करने की कोशिश कर रहा था। इस रणनीति के तहत हजारों करोड़ रुपये की बचत का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब नए आदेश के बाद यह पूरी योजना प्रभावित हो सकती है। अनुमान है कि राज्यों के हिसाब से यह सरचार्ज प्रति यूनिट काफी अधिक होगा, जिससे कुल मिलाकर भारी देनदारी बन सकती है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से राज्य बिजली वितरण कंपनियों को राहत मिलेगी, क्योंकि अब बड़े उपभोक्ताओं से मिलने वाला सरचार्ज उन्हें वित्तीय स्थिरता प्रदान करेगा। वहीं रेलवे के लिए यह एक नई चुनौती है, क्योंकि वह पहले ही इलेक्ट्रिफिकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश कर चुका है। यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में रेलवे को अपनी बिजली खरीद रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। डीजल से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर बढ़ने के साथ जिस बचत की उम्मीद की जा रही थी, वह अब इस अतिरिक्त लागत के कारण कम हो सकती है। इससे रेलवे के परिचालन खर्च और बजट प्रबंधन पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। कुल मिलाकर यह फैसला ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र के बीच वित्तीय संतुलन को नए तरीके से परिभाषित करता है। एक ओर जहां राज्यों की बिजली कंपनियों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर देश के सबसे बड़े उपभोक्ता के लिए यह निर्णय एक बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है।

यौन उत्पीड़न पीड़ित बच्चों के लिए सहायक नियुक्त होंगे, 28 मई तक आवेदन

मंदसौर। लैंगिक अपराधों से पीड़ित बच्चों को संवेदनशील माहौल में कानूनी और मानसिक सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत जिले में 7 सहायक व्यक्तियों यानी “सपोर्ट पर्सन” की नियुक्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग ने इच्छुक और योग्य व्यक्तियों से 28 मई 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी बी.एल. बिश्नोई ने बताया कि पॉक्सो एक्ट की धारा 39 के अंतर्गत इन सहायक व्यक्तियों का चयन किया जाएगा। इनका मुख्य उद्देश्य यौन उत्पीड़न का शिकार हुए बच्चों को सुरक्षित, भरोसेमंद और संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराना होगा, ताकि वे मानसिक दबाव और भय से बाहर निकलकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर सकें। विभाग के अनुसार, कई मामलों में बच्चे और उनके परिवार कानूनी प्रक्रियाओं, पुलिस कार्रवाई और न्यायालयीन कार्यवाही को लेकर असहज महसूस करते हैं। ऐसे में सपोर्ट पर्सन बच्चों के साथ हर चरण में सहयोग करेंगे। ये सहायक व्यक्ति पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज कराने से लेकर कोर्ट में पेशी, मानसिक परामर्श, पुनर्वास और शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने तक की प्रक्रिया में मार्गदर्शन देंगे। साथ ही बच्चों और उनके परिजनों को यह भी समझाया जाएगा कि वे किस तरह कानूनी अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं और किसी भी प्रकार के सामाजिक दबाव या डर से कैसे बाहर निकल सकते हैं। विभाग का मानना है कि इस पहल से पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया अधिक आसान और मानवीय बन सकेगी। महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन स्वयं उपस्थित होकर, पंजीकृत डाक, स्पीड पोस्ट या कोरियर के माध्यम से जिला कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 28 मई 2026 निर्धारित की गई है। विभाग ने पात्रता, चयन प्रक्रिया और अन्य दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशिक्षित और संवेदनशील सपोर्ट पर्सन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे पीड़ित बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे न्यायिक प्रक्रिया में अधिक सहजता से भाग ले पाते हैं। विभाग की यह पहल जिले में बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर, फाल्टा सीट पर TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से किया इनकार

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में फाल्टा विधानसभा सीट को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मतदान से ठीक पहले पार्टी के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से हटने का फैसला कर सभी को चौंका दिया है। इस अचानक हुए घटनाक्रम ने न केवल पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी है, बल्कि पूरे राजनीतिक माहौल में भी चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। फाल्टा सीट पर पहले हुए मतदान के दौरान कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया गया था। दोबारा मतदान की तारीख तय होने के बाद सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी थीं, लेकिन अंतिम समय में TMC उम्मीदवार का पीछे हटना एक अप्रत्याशित राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है। जहांगीर खान अपने प्रचार अभियान के दौरान अपने अलग अंदाज और बयानों को लेकर काफी चर्चा में रहे थे। उनके वायरल प्रचार स्टाइल और आत्मविश्वास भरे बयानों ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया था। लेकिन चुनाव से महज कुछ दिन पहले उनके मैदान छोड़ने के फैसले ने सभी राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है और विपक्ष को भी इस पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ इसे व्यक्तिगत कारणों से लिया गया फैसला बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि राजनीतिक और कानूनी दबाव ने इस स्थिति को जन्म दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार की ओर से अपना नाम वापस लेने की पुष्टि की गई है, लेकिन इसके पीछे की पूरी वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। इस बीच यह भी चर्चा में है कि फाल्टा सीट पर पहले चरण के मतदान के दौरान कई बूथों पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई और फिर दोबारा मतदान का आदेश दिया। इसी पृष्ठभूमि में यह नया घटनाक्रम राजनीतिक महत्व और बढ़ा देता है। कुल मिलाकर फाल्टा विधानसभा सीट पर यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है। मतदान से ठीक पहले उम्मीदवार का हटना न केवल सत्ताधारी दल के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि आने वाले दिनों में इस सीट के राजनीतिक समीकरणों को भी पूरी तरह बदल सकता है।

ऐतिहासिक स्थल पर नियमों को लेकर हंगामा, बादामी में पर्यटक महिला और स्टाफ के बीच गरमाया मामला

नई दिल्ली । कर्नाटक के बागलकोट जिले स्थित ऐतिहासिक बादामी क्षेत्र एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह इसकी प्राचीन विरासत नहीं बल्कि वहां सामने आया एक विवाद है। मेनाबसिदी स्मारक परिसर में चप्पल पहनकर प्रवेश को लेकर एक पर्यटक महिला और पुरातत्व विभाग की कर्मचारी के बीच तीखी बहस हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना उस समय हुई जब धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल की मर्यादा और नियमों को लेकर दोनों पक्षों के बीच असहमति बढ़ गई और मामला गरमाता चला गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पर्यटक महिला ने परिसर में चप्पल पहनकर प्रवेश और अंदर मौजूद कुछ लोगों के व्यवहार पर आपत्ति जताई। उसका कहना था कि ऐसे पवित्र और ऐतिहासिक स्थानों पर नियमों का पालन सभी को करना चाहिए। इसी दौरान मौके पर मौजूद एक कर्मचारी से उसकी बहस शुरू हो गई, जो धीरे-धीरे काफी तीखी हो गई। वीडियो में दोनों के बीच शब्दों का आदान-प्रदान स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिसमें स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती नजर आती है। इसी दौरान एक अन्य युवती को भी परिसर के भीतर चप्पल पहनकर बैठा देखा गया, जिससे वहां मौजूद कुछ श्रद्धालुओं और पर्यटकों में नाराजगी और बढ़ गई। इस घटना ने पूरे माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। आरोप यह भी लगाए गए कि संबंधित कर्मचारी का व्यवहार कुछ लोगों को अनुचित लगा, जिससे विवाद और गहरा गया। यह पूरा मामला बादामी के उस क्षेत्र से जुड़ा है, जो अपने प्राचीन चालुक्य कालीन मंदिरों और गुफाओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। हर साल यहां बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक इन ऐतिहासिक धरोहरों को देखने आते हैं। ऐसे में इस तरह के विवाद ने स्थानीय प्रशासन और नियमों के पालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मानते हैं कि धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है, जबकि कुछ अन्य लोगों का कहना है कि कर्मचारियों को पर्यटकों के साथ अधिक संयम और सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। फिलहाल इस पूरे मामले पर संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन वीडियो के वायरल होने के बाद यह घटना चर्चा का विषय बन गई है और प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग भी उठने लगी है।

बजरंग दल जिला मंत्री पर आरोप: निगम टीम से बदसलूकी और थप्पड़बाजी का विवाद

रतलाम। शहर के डीडी नगर क्षेत्र में सोमवार देर रात नगर निगम की मवेशी पकड़ो टीम पर हुए हमले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। आवारा मवेशियों को पकड़कर ले जा रही निगम टीम को विश्व हिंदू परिषद-बजरंग दल के जिला मंत्री गौरव शर्मा ने बीच रास्ते रोक लिया। आरोप है कि उन्होंने निगम कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज करते हुए उप स्वच्छता पर्यवेक्षक विराट मेहरा को थप्पड़ मार दिए और वाहन में बंद गायों व सांडों को जबरन छुड़ा लिया। घटना के बाद निगम कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया और मंगलवार सुबह शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। घटना रात करीब पौने दो बजे की बताई जा रही है। निगम की टीम हनुमान मंदिर क्षेत्र से पांच आवारा मवेशियों को पकड़कर वाहन से गौशाला ले जा रही थी। इसी दौरान गौरव शर्मा अपने साथियों के साथ वहां पहुंचे और वाहन रुकवा लिया। कर्मचारियों का आरोप है कि आरोपी ने पहले अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और फिर विरोध करने पर मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान वाहन में मौजूद दो गाय और तीन सांडों को भी जबरन नीचे उतार लिया गया। घटना के समय वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि पूरी घटना पुलिस जवानों के सामने हुई, लेकिन किसी ने बीच-बचाव नहीं किया। निगम कर्मचारियों का कहना है कि अगर प्रशासन उन्हें सुरक्षा नहीं देगा तो वे भविष्य में मवेशी पकड़ने का काम नहीं करेंगे। घटना के बाद मंगलवार सुबह सफाई कर्मचारियों और वार्ड प्रभारियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कचरा वाहन डीडी नगर थाने के बाहर खड़े कर दिए। कर्मचारियों ने थाने का घेराव कर कार्रवाई की मांग की, जिसके चलते शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित रही। उप स्वच्छता पर्यवेक्षक विराट मेहरा ने बताया कि आरोपी ने टीम के अन्य सदस्यों के साथ भी धक्का-मुक्की की। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी चरणसिंह के मुताबिक, आरोपी पहले भी निगम टीम के साथ विवाद कर चुका है। कर्मचारियों का आरोप है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से उनका मनोबल टूट रहा है। इधर, स्वच्छता प्रभारी राजेंद्र सिंह पंवार ने कहा कि निगम टीम शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गौरव शर्मा शराब के नशे में थे और उन्होंने सरकारी काम में बाधा डालते हुए कर्मचारियों से मारपीट की। वहीं दूसरी ओर गौरव शर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि निगम कर्मचारी गर्भवती गायों को क्रूरतापूर्वक वाहन में भरकर ले जा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि रात में मवेशी पकड़ने के लिए कर्मचारियों के पास कोई वैध आदेश नहीं था। पूरे मामले में डीडी नगर थाना पुलिस ने गौरव शर्मा सहित अन्य लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी अनुराग यादव ने बताया कि घटना की जांच जारी है और सीसीटीवी फुटेज व प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जुटाए जा रहे हैं। घटना के बाद शहर में निगम कर्मचारियों और हिंदू संगठनों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है।

तेज रफ्तार का कहर: कार की टक्कर से महिला और बेटा गंभीर रूप से घायल

मध्य प्रदेश। रतलाम के रतलाम-सैलाना रोड स्थित पलसोड़ा फंटे पर सोमवार सुबह एक भयावह सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार कार और बाइक की आमने-सामने टक्कर में बाइक पर सवार मां-बेटा गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें टक्कर के बाद महिला करीब 10 फीट हवा में उछलती दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार हादसा सोमवार सुबह करीब 10 बजे हुआ। राजस्थान पासिंग की एक कार सैलाना की ओर से तेज रफ्तार में बीच सड़क पर चल रही थी। उसी दौरान रतलाम की तरफ से आ रही बाइक कार से सीधे टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक पर पीछे बैठी महिला उछलकर सामने से आ रही दूसरी बाइक पर जा गिरी। इसके बाद दोनों बाइकें भी आपस में भिड़ गईं। हादसे में मां-बेटा गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन समय पर मदद नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों ने इंसानियत दिखाते हुए घायलों को निजी वाहन से मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। बताया जा रहा है कि बाद में परिजन उन्हें बेहतर इलाज के लिए अन्य स्थान पर ले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के वक्त कार में एक महिला और दो बच्चे भी सवार थे। दुर्घटना के बाद कार चालक कुछ देर मौके पर रुका, लेकिन बाद में वाहन लेकर वहां से चला गया। वहीं दूसरी बाइक सवार को मामूली चोट आने के कारण वह भी मौके से निकल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पलसोड़ा फंटा दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट बन चुका है। यहां दो गांवों की क्रॉसिंग होने के कारण लगातार हादसे होते रहते हैं। सड़क पर स्पीड ब्रेकर बने होने के बावजूद वाहन चालक तेज रफ्तार से वाहन निकालते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। घटना को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूरे घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। पुलिस अब कार चालक की पहचान कर आगे की कार्रवाई में जुटी है।

बुरहानपुर में जल संकट के बीच बड़ा फैसला: अवैध कनेक्शन काटे जाएंगे

मध्य प्रदेश। बुरहानपुर में बढ़ते जल संकट के बीच नगर निगम अब सख्त कार्रवाई के मूड में नजर आ रहा है। शहर में अवैध नल कनेक्शनों, पानी की बर्बादी और मोटर लगाकर सीधे पाइपलाइन से पानी खींचने वालों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया गया है। नगर निगम ने साफ कर दिया है कि अब नियम तोड़ने वालों पर सीधे स्पॉट फाइन लगाया जाएगा और अवैध कनेक्शन तत्काल काट दिए जाएंगे। नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने एमआईसी हॉल में आयोजित जल विभाग की बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि बिना मीटर और बिना टैक्स दिए पानी का उपयोग करने वाले सभी कनेक्शनों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग न सिर्फ नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि वैध उपभोक्ताओं के हिस्से का पानी भी प्रभावित कर रहे हैं। बैठक में विशेष रूप से उन लोगों को निशाने पर लिया गया जो मोटर लगाकर मुख्य पाइपलाइन से सीधे पानी खींचते हैं। निगम के अनुसार इससे अन्य इलाकों में पानी का दबाव कम हो जाता है और कई घरों तक पर्याप्त जलापूर्ति नहीं पहुंच पाती। इसके अलावा खुले नल, क्षतिग्रस्त पाइपलाइन और लगातार बहते पानी को भी गंभीर लापरवाही माना गया है। नगर निगम ने चेतावनी दी है कि पानी की बर्बादी करते पाए जाने पर मौके पर ही जुर्माना लगाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पानी की मांग तेजी से बढ़ गई है, जबकि जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। ऐसे में पानी की हर बूंद बचाना जरूरी हो गया है। निगम का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य टैक्स भरने वाले वैध उपभोक्ताओं को समान रूप से पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है। कई इलाकों से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग अवैध तरीके से अधिक पानी उपयोग कर रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को परेशानी हो रही है। नगर निगम ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि यदि उनके क्षेत्र में कहीं पानी की बर्बादी हो रही है या अवैध कनेक्शन दिखाई दे रहे हैं, तो इसकी सूचना तुरंत निगम की टीम को दें। इस बैठक में सहायक यंत्री अशोक पाटिल, उपयंत्री सुनील चौहान, एमएमपीयूडीसी के राहुल पवार, सुरेश डोडीयार सहित जल विभाग और जेएमसी कंपनी के कई अधिकारी मौजूद रहे।

AI से नौकरी पर बड़ा खतरा! Anthropic CEO की चेतावनी- खत्म हो सकती हैं लाखों एंट्री लेवल जॉब्स

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी से बढ़ती ताकत अब नौकरीपेशा लोगों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। AI कंपनी Anthropic के CEO Dario Amodei ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ वर्षों में AI लाखों एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर नौकरियों को खत्म कर सकता है। उनका कहना है कि फाइनेंस, टेक, कंसल्टिंग और एडमिनिस्ट्रेशन जैसे सेक्टर्स सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। एक इंटरव्यू में डारियो एमोदेई ने कहा कि पिछले दो वर्षों में AI की क्षमता बेहद तेजी से बढ़ी है। उनके मुताबिक, जो AI पहले एक होशियार हाई स्कूल स्टूडेंट के स्तर पर काम करता था, वह अब एक स्मार्ट कॉलेज स्टूडेंट जैसी क्षमता हासिल कर चुका है। AI अब डॉक्यूमेंट समरी, डेटा एनालिसिस, रिसर्च, ब्रेनस्टॉर्मिंग और फाइनेंशियल रिपोर्ट तैयार करने जैसे जटिल काम तेजी से सीख रहा है। एमोदेई ने कहा कि शुरुआती दौर में AI इंसानों की मदद करेगा, लेकिन बहुत जल्द कई जगह पूरी तरह उनकी जगह लेने लगेगा। खास तौर पर एंट्री-लेवल नौकरियों पर इसका सबसे बड़ा असर देखने को मिल सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगले 1 से 5 वर्षों के भीतर नौकरी बाजार में बड़े बदलाव दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि AI की रफ्तार को रोकना अब लगभग असंभव है, क्योंकि यह केवल एक कंपनी या देश तक सीमित नहीं रह गया है। अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा के कारण AI डेवलपमेंट लगातार तेज हो रहा है। एमोदेई के अनुसार, अगर अमेरिकी कंपनियां काम धीमा भी कर दें, तब भी चीन जैसी शक्तियां इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ती रहेंगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि समय रहते सही कदम उठाए जाएं तो इस संकट के असर को कम किया जा सकता है। इसके लिए लोगों को AI टूल्स का इस्तेमाल सिखाना जरूरी होगा, ताकि वे नई तकनीक के साथ खुद को ढाल सकें। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में AI कंपनियों पर विशेष टैक्स लगाया जा सकता है, जिससे उन लोगों की मदद की जा सके जिनकी नौकरियां AI की वजह से प्रभावित होंगी।