जितेंद्र-रीना रॉय की जोड़ी का सुनहरा दौर: 22 फिल्मों में 12 सुपरहिट, रोमांस ने जीता दर्शकों का दिल

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में 70 और 80 का दशक कई ऐसी जोड़ियों का गवाह बना, जिन्होंने पर्दे पर अपनी अदाओं और अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। इन्हीं में से एक प्रमुख जोड़ी रही जितेंद्र और रीना रॉय की, जिनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री ने उस दौर में बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रच दिया। दोनों ने मिलकर करीब 22 फिल्मों में साथ काम किया, जिनमें से 17 फिल्मों में रोमांस और इमोशन का ऐसा मेल देखने को मिला कि दर्शक उन्हें असली जीवन की जोड़ी समझने लगे। उनकी इन फिल्मों में से लगभग 12 फिल्में सुपरहिट साबित हुईं, जो उस समय की बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती हैं। रीना रॉय ने बहुत कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा था और शुरुआती संघर्ष के बाद उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से खुद को एक मजबूत अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया। धीरे-धीरे वह उस दौर की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं, जब हेमा मालिनी, रेखा, जीनत अमान और परवीन बॉबी जैसी दिग्गज एक्ट्रेस इंडस्ट्री पर राज कर रही थीं। इसके बावजूद रीना रॉय ने अपनी अलग पहचान बनाई और दर्शकों के बीच अपनी मजबूत जगह कायम की। जितेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खासतौर पर बेहद पसंद किया। फैमिली ड्रामा हो या रोमांटिक कहानी, दोनों की केमिस्ट्री हर तरह की फिल्म में सहज और प्रभावशाली नजर आती थी। उनकी फिल्मों की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि कई बार सिर्फ दोनों की जोड़ी को देखने के लिए दर्शक सिनेमाघरों तक खिंचे चले आते थे। यह दौर बॉलीवुड के लिए बेहद खास माना जाता है, जब स्टार पावर और कहानी दोनों मिलकर फिल्म को हिट बना देते थे। रीना रॉय के करियर से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि उन्हें एक बड़े प्रोजेक्ट से हटाकर दूसरी अभिनेत्री को लिया गया था। उस समय इंडस्ट्री में यह चर्चा आम रही कि कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स में स्टार पावर और लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए जाते थे। इसके बावजूद रीना रॉय की लोकप्रियता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा और वह लगातार हिट फिल्में देती रहीं। अपने करियर के शिखर पर रीना रॉय का नाम लगातार सफलता की सूची में शामिल रहा। कई वर्षों तक वह इंडस्ट्री की शीर्ष अभिनेत्रियों में गिनी जाती रहीं और उनका नाम उन कलाकारों में शामिल रहा जिन्होंने 80 के दशक को एक अलग पहचान दी। उनकी अभिनय शैली में भावनाओं की गहराई और स्क्रीन प्रेजेंस की मजबूती ने उन्हें दर्शकों का प्रिय बना दिया। बाद के वर्षों में रीना रॉय की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही और उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। हालांकि उनके फिल्मी करियर की यादें आज भी दर्शकों के बीच जीवित हैं। जितेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को आज भी बॉलीवुड की सबसे यादगार जोड़ियों में गिना जाता है, जिन्होंने अपने समय में रोमांस और मनोरंजन का नया मानक स्थापित किया।
रॉन्ग साइड से आया वाहन बना हादसे की वजह, बड़वानी में चार घायल

मध्य प्रदेश । बड़वानी जिले में सड़क सुरक्षा की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है, जहां बुधवार देर रात दो अलग-अलग सड़क हादसों में कुल चार लोग घायल हो गए। दोनों ही घटनाओं में स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पहला हादसा शहर के सांवरिया मंदिर के सामने हुआ, जहां दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालु एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अर्चना पति निलेश, हंसिका और मंथन बाइक पर सवार होकर मंदिर से लौट रहे थे। इसी दौरान रॉन्ग साइड से तेज रफ्तार में आ रहे एक छोटा हाथी वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों लोग सड़क पर गिरकर घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों की मदद की और 108 एम्बुलेंस को सूचना दी। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि इस मार्ग पर कई वाहन चालक लगातार लापरवाही से रॉन्ग साइड ड्राइविंग करते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। दूसरा हादसा राजघाट रोड स्थित सर्किट हाउस के पास हुआ, जहां ईंट भट्टे से निकलने वाले घने धुएं ने एक युवक की जान पर भारी संकट खड़ा कर दिया। कुकरा बसाहट निवासी संजय वर्मा ने बताया कि ईंट भट्टे का धुआं सड़क पर फैलने के कारण दृश्यता काफी कम हो जाती है। इसी दौरान 17 वर्षीय अखिलेश केवट, जो मछली पकड़कर बाइक से घर लौट रहे थे, धुएं के कारण रास्ता ठीक से न देख पाने की वजह से दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें साईं अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में रेत और मिट्टी से भरे डंपरों की लगातार आवाजाही के कारण भी भारी मात्रा में धूल उड़ती रहती है, जिससे सड़क पर दृश्यता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ईंट भट्टों और भारी वाहनों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके। जिला अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर के अनुसार, सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद भर्ती किया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। दोनों हादसों ने एक बार फिर क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिंचाई सिस्टम पर सवाल: इंदिरा सागर नहरों की बदहाली से खेती प्रभावित

मध्य प्रदेश । बड़वानी जिले में इंदिरा सागर परियोजना के तहत सिंचाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। 16 मई को मुख्य नहर में पानी छोड़े जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि यह पानी अगले आठ से दस दिनों में बड़वानी क्षेत्र तक पहुंच जाएगा, लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने वाली माइनर और सब-माइनर नहरों की जर्जर हालत किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है। स्थानीय किसानों का कहना है कि बीते करीब एक दशक से इन नहरों की नियमित सफाई और मरम्मत नहीं की गई है। इसके चलते कई स्थानों पर नहरों में गाद भर गई है और झाड़ियों ने अपना कब्जा जमा लिया है। नहरों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कई जगहों पर पानी का रिसाव होने और खेतों तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद होने का खतरा बना हुआ है। सजवानी, रेहगुन, सुराना और तलवाड़ा बुजुर्ग सहित कई गांवों के किसान लंबे समय से नहरों की टूट-फूट और जर्जर स्थिति को लेकर परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि नहरें अब पहले की तुलना में काफी संकरी हो गई हैं और उनकी दीवारों में दरारें आ चुकी हैं, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। भारतीय किसान संघ के जिला सदस्य धर्मेंद्र राठौर ने आरोप लगाया कि विभाग हर साल केवल आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं होता। इसके कारण किसानों को समय पर पानी नहीं मिल पाता और उनकी फसलें प्रभावित होती हैं। वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नहरों की मरम्मत और सुधार के लिए शासन को 2 करोड़ 25 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है। इंदिरा सागर परियोजना के सहायक अभियंता डीके गोरी ने बताया कि मुख्य अभियंता की नियुक्ति न होने के कारण फाइलें अटकी हुई थीं, लेकिन अब बजट स्वीकृत होने के बाद टेंडर प्रक्रिया के जरिए मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। हालांकि, मुख्य नहर में पानी छोड़े जाने के बाद समय का दबाव बढ़ गया है। किसानों में इस बात को लेकर संशय है कि क्या प्रशासन टेंडर प्रक्रिया और मरम्मत कार्य समय रहते पूरा कर पाएगा। यदि सुधार कार्य में देरी होती है तो इस सीजन में भी फसलों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाएगा, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है। किसानों की मांग है कि नहरों की तत्काल सफाई और मरम्मत कर जल वितरण व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि सिंचाई व्यवस्था प्रभावित न हो और फसलें सुरक्षित रह सकें।
फिल्मी दुनिया में भाषा नहीं, प्रतिभा मायने रखती है: नॉर्थ-साउथ बहस पर बोले बोमन ईरानी

नई दिल्ली । भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय से चल रही उत्तर और दक्षिण सिनेमा की बहस पर अभिनेता Boman Irani ने अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा है कि यह चर्चा अब पुरानी और थकाने वाली हो चुकी है। उनके अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री में भाषा या क्षेत्रीय पहचान से ज्यादा महत्वपूर्ण कहानी और काम की गुणवत्ता है। बोमन ईरानी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘पेड्डी’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं, जिसमें वह अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसी दौरान एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर देखना सही नहीं है, क्योंकि अंततः यह एक ही देश की रचनात्मक दुनिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हम सब भारतीय हैं” और किसी भी कलाकार की पहचान उसकी प्रतिभा और काम से होनी चाहिए, न कि उसकी भाषा या क्षेत्र से। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में भाषाई विविधता बहुत गहरी है और हर कुछ किलोमीटर पर बोली बदल जाती है, लेकिन इससे लोगों के बीच दूरी नहीं बननी चाहिए। उनके अनुसार, एक व्यक्ति अलग भाषा बोल सकता है, लेकिन भावनाएं और सिनेमा की आत्मा समान रहती है। यही कारण है कि आज भारतीय फिल्में क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर निकलकर पूरे देश और दुनिया में सराही जा रही हैं। अपनी आने वाली फिल्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब ऐसे समय में जब हैदराबाद जैसे शहरों में बनी फिल्में पूरे देश में प्रमोट हो रही हैं और मुंबई जैसे बड़े फिल्म हब में उनका स्वागत हो रहा है, तो यह साफ संकेत है कि इंडस्ट्री धीरे-धीरे एक साझा मंच की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव भारतीय सिनेमा की एकता और विस्तार को दर्शाता है। बोमन ईरानी ने अभिनय की गहराई पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक अच्छे अभिनेता के लिए भाषा से ज्यादा जरूरी है संवाद के भीतर छिपे भाव और अर्थ को समझना। उनके अनुसार, अभिनय केवल शब्द बोलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उसमें भावनाओं और सोच की गहराई को सही तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना सबसे अहम है। उन्होंने यह भी कहा कि कलाकार को पहले अपने विचारों को समझकर अपनी भाषा में तैयार करना चाहिए और फिर उसे पर्दे पर व्यक्त करना चाहिए, ताकि दर्शक उससे जुड़ सकें। उनका मानना है कि अगर भावनाएं सही तरीके से प्रस्तुत की जाएं तो भाषा कभी बाधा नहीं बनती। बोमन ईरानी ने अपने लंबे करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया है और अपनी अलग पहचान बनाई है। कॉमेडी और गंभीर दोनों तरह के किरदारों में उनकी अभिनय क्षमता को दर्शकों ने हमेशा सराहा है। ‘पेड्डी’ में भी उनकी भूमिका को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है, जिसमें राम चरण, जान्हवी कपूर और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार भी नजर आएंगे।
Meta Layoffs: AI निवेश के बीच 8 हजार कर्मचारियों की छंटनी, सुबह 4 बजे ईमेल से मचा हड़कंप

नई दिल्ली। मेटा (Meta) में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी का दौर शुरू हो गया है। कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भारी निवेश की रणनीति के तहत करीब 8 हजार कर्मचारियों की छंटनी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फैसले का सबसे पहला असर सिंगापुर में देखने को मिला है, जहां कई कर्मचारियों को अचानक सुबह 4 बजे ईमेल के जरिए नौकरी खत्म होने की सूचना दी गई। जानकारी के मुताबिक, मेटा ने अलग-अलग टाइम जोन के आधार पर प्रभावित कर्मचारियों को ईमेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। सिंगापुर में यह ईमेल स्थानीय समय के अनुसार सुबह 4 बजे और भारतीय समयानुसार रात करीब 1:30 बजे भेजे गए। इससे पहले कंपनी के पास दुनिया भर में लगभग 78 हजार कर्मचारी थे, लेकिन अब यह संख्या घटती जा रही है। बताया जा रहा है कि मेटा का यह कदम एआई सेक्टर में बढ़ते निवेश का हिस्सा है। कंपनी अपनी रणनीति को पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन की ओर शिफ्ट कर रही है। इसी वजह से कई पारंपरिक भूमिकाओं को खत्म किया जा रहा है। रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि छंटनी के साथ-साथ करीब 7 हजार कर्मचारियों को एआई आधारित नई टीमों में शिफ्ट किया जा रहा है। मेटा ने अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों में काम कर रहे कर्मचारियों से वर्क फ्रॉम होम मोड में काम करने को कहा है, ताकि यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जा सके। माना जा रहा है कि इस छंटनी का सबसे ज्यादा असर इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवेलपमेंट टीमों पर पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव केवल मेटा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री में एआई की वजह से बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और ओरेकल जैसी कंपनियां भी पहले ही हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही हैं। मेटा अब “एजेंटिक एआई” की दिशा में आगे बढ़ रही है, जहां ऐसे स्मार्ट एआई एजेंट विकसित किए जा रहे हैं जो यूजर्स के रोजमर्रा के कामों में मदद कर सकें। कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले समय में 3 अरब से अधिक यूजर्स के लिए पर्सनलाइज्ड एआई सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। फिलहाल इस छंटनी ने टेक इंडस्ट्री में हलचल बढ़ा दी है और आने वाले महीनों में और भी बड़े बदलाव की आशंका जताई जा रही है।
लॉकडाउन स्कैम का नया जाल: WhatsApp पर फर्जी मैसेज से साइबर ठग फैला रहे डर, सावधान रहने की जरूरत

नई दिल्ली। WhatsApp पर एक नया साइबर स्कैम तेजी से फैल रहा है, जिसमें “लॉकडाउन” और सरकारी आदेशों के नाम पर फर्जी मैसेज भेजकर लोगों को ठगा जा रहा है। इस स्कैम का फायदा उन खबरों के नाम पर उठाया जा रहा है जिनमें पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद कुछ राज्यों में वर्क फ्रॉम होम या आंशिक प्रतिबंध जैसे कदम उठाए गए हैं। साइबर ठग अब लोगों को डराने के लिए लॉकडाउन से जुड़े PDF और APK फाइल्स भेज रहे हैं, जो देखने में बिल्कुल सरकारी आदेश या आधिकारिक नोटिस जैसे लगते हैं। इन फाइलों के नाम भी ऐसे रखे जाते हैं जैसे “Emergency Lockdown Order” या “War Lockdown Notice.pdf”, ताकि लोग इन्हें असली समझकर तुरंत खोल लें। जानकारी के अनुसार, जैसे ही कोई व्यक्ति इन फाइलों पर क्लिक करता है या APK इंस्टॉल करता है, उसके फोन का डेटा हैक होने का खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में इन फाइलों के जरिए लोगों को फर्जी वेबसाइट पर रीडायरेक्ट किया जाता है, जहां उनसे बैंक डिटेल्स, ओटीपी और निजी जानकारी ली जाती है, जिसका बाद में ठगी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई नया तरीका नहीं है, लेकिन अब इसे सरकारी फैसलों और पीएम की अपील से जोड़कर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है, जिससे ज्यादा लोग आसानी से इसका शिकार बन रहे हैं। ठग इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों के मोबाइल और बैंक अकाउंट तक पहुंच बना लेते हैं। इस तरह के स्कैम से बचने के लिए जरूरी है कि अनजान नंबर से आए किसी भी मैसेज या लिंक को बिना जांचे न खोला जाए। साथ ही फोन में Unknown Sources का विकल्प बंद रखना चाहिए ताकि कोई भी APK फाइल अपने आप इंस्टॉल न हो सके। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि किसी भी सरकारी सूचना या लॉकडाउन जैसी खबरों के लिए सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय न्यूज सोर्स पर ही भरोसा करना चाहिए, न कि सोशल मीडिया या WhatsApp पर आए अनजान मैसेज पर। फिलहाल यह स्कैम तेजी से फैल रहा है और लोगों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि एक छोटी सी गलती भी बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकती है।
SIM Card Sale पर बड़ा फैसला: पाकिस्तान में रात 12 से सुबह 6 बजे तक बिक्री पर रोक, जानें वजह

नई दिल्ली। पाकिस्तान ने फर्जी सिम कार्ड और मोबाइल फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए नया सख्त कदम उठाया है। पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी (PTA) ने देशभर में रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक सिम कार्ड की बिक्री पर रोक लगा दी है। इस दौरान किसी भी फ्रेंचाइजी, रिटेल आउटलेट या अधिकृत सेल चैनल को सिम बेचने की अनुमति नहीं होगी। PTA के मुताबिक यह फैसला सिम कार्ड वितरण प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखने और फर्जी पहचान के जरिए जारी होने वाले सिम कार्ड को रोकने के लिए लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी होने और उनका दुरुपयोग होने की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। नए नियमों के तहत सभी सेलुलर मोबाइल ऑपरेटर्स (CMOs) को सख्ती से निर्देश दिया गया है कि वे इस समय सीमा का पालन करें। यदि कोई ऑपरेटर या रिटेलर नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ टेलीकॉम कानूनों के तहत कड़ी कानूनी और रेगुलेटरी कार्रवाई की जाएगी। PTA ने नागरिकों को भी सलाह दी है कि वे केवल अधिकृत आउटलेट से ही सिम कार्ड खरीदें और नए सिम को एक्टिवेट करने से पहले बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें। साथ ही शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी जारी किए गए हैं। भारत की बात करें तो यहां सिम बिक्री पर इस तरह का समयबद्ध प्रतिबंध नहीं है, लेकिन फर्जी सिम और साइबर क्राइम पर रोक के लिए डिजिटल सिस्टम को मजबूत किया गया है। भारत में ‘संचार साथी’ पोर्टल के जरिए लाखों संदिग्ध और फर्जी सिम कार्ड की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया जा चुका है, जिससे साइबर फ्रॉड पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है।
बलूचिस्तान के 1 ट्रिलियन डॉलर खनिज खजाने पर पाकिस्तान की सख्ती, सैन्य तैनाती से बढ़ा तनाव

नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में खनिज संपदा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद गहराता जा रहा है। इस क्षेत्र में मौजूद अरबों-खरबों डॉलर के सोना, तांबा और रेयर अर्थ खनिजों को लेकर पाकिस्तानी सरकार और सेना की गतिविधियों का विरोध लगातार तेज हो रहा है। जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बलूचिस्तान में सैन्य और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम खनिज संसाधनों और खनन परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इसके तहत फ्रंटियर कोर की अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात करने और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा चौकियां स्थापित करने की योजना बनाई गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलूचिस्तान का रखशान डिवीजन, सैंदक और रेको डिक जैसे क्षेत्र बड़े खनिज भंडारों के लिए जाने जाते हैं। यहां तांबा और सोने की विशाल खदानें मौजूद हैं, जिनमें अरबों टन अयस्क होने का अनुमान लगाया जाता है। इन खनिज संसाधनों का अनुमानित मूल्य 1 से 6 ट्रिलियन डॉलर तक बताया जाता है। पाकिस्तान लंबे समय से इन क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को खनन परियोजनाओं के लिए आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि आर्थिक संकट से राहत मिल सके। इनमें कुछ बड़ी अंतरराष्ट्रीय खनन कंपनियों की भागीदारी भी बताई जाती है, जो विभिन्न परियोजनाओं में हिस्सेदारी रखती हैं। हालांकि, बलूचिस्तान में इस खनन गतिविधि का लगातार विरोध हो रहा है। स्थानीय बलूच अलगाववादी समूहों और विद्रोही संगठनों का आरोप है कि उनकी जमीन के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है और इसका लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। इसी कारण यहां कई बार सुरक्षा बलों और विद्रोही गुटों के बीच हिंसक झड़पें भी हो चुकी हैं। पिछले समय में खनन स्थलों और सुरक्षा बलों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र की स्थिति और अधिक तनावपूर्ण बनी हुई है। विद्रोही गुटों का कहना है कि संसाधनों पर उनका पहला अधिकार है, लेकिन सरकार और सेना इन खजानों का उपयोग बाहरी कंपनियों के साथ मिलकर कर रही है। बलूचिस्तान की खनिज संपदा को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र दुनिया के सबसे समृद्ध प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों में से एक है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों के कारण इसका पूरा लाभ अभी तक नहीं उठाया जा सका है। फिलहाल पाकिस्तान सरकार की ओर से सुरक्षा बढ़ाने के फैसले के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान को ट्रंप-वेंस की कड़ी चेतावनी: डील नहीं तो सैन्य कार्रवाई, परमाणु हथियारों पर बढ़ा तनाव

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता है तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत करते हुए जेडी वेंस ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उनके अनुसार, अगर ईरान परमाणु हथियार विकसित करता है तो इससे वैश्विक स्तर पर हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है। वेंस ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के सामने एक सरल प्रस्ताव रखा है, जिसमें या तो बातचीत के जरिए समझौता किया जाए या फिर तनाव बढ़ने की स्थिति में परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ सद्भावना के आधार पर बातचीत करना चाहता है और बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। वेंस के मुताबिक, कुछ संकेत ऐसे मिले हैं जिससे लगता है कि ईरान समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकता है, लेकिन अंतिम स्थिति तभी साफ होगी जब किसी समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होंगे। जेडी वेंस ने ईरान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति को जटिल बताते हुए कहा कि वहां कई शक्तिशाली गुट सक्रिय हैं, जिससे यह समझना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में ईरान की नीति क्या है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार को रूस भेजने जैसी किसी रिपोर्ट की पुष्टि नहीं करता। इस बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है कि अमेरिका का लक्ष्य इस संघर्ष को जल्द खत्म करना है और ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि समाधान की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। हाल के वर्षों में कई बार सैन्य टकराव और हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, हालांकि कुछ समय के लिए सीजफायर की स्थिति बनी थी। इसके बावजूद स्थायी समझौता अभी तक नहीं हो सका है और हालात फिर से तनावपूर्ण बने हुए हैं।
गणेश-चूहा संबंध की कहानी: पौराणिक मान्यताओं में छिपा गहरा संदेश

नई दिल्ली। भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और विघ्नों को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। उनकी एक विशेष पहचान उनका वाहन “मूषक” यानी चूहा है, जो देखने में छोटा होने के बावजूद गहरे प्रतीकात्मक अर्थ रखता है। अक्सर यह सवाल उठता है कि इतने शक्तिशाली और सर्वपूज्य देवता का वाहन एक छोटा सा चूहा क्यों है। इसके पीछे पौराणिक कथा के साथ-साथ जीवन के महत्वपूर्ण संदेश भी छिपे हैं। पौराणिक कथा क्या कहती हैपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय क्रौंच नाम का एक गंधर्व था, जिसे एक ऋषि के श्राप के कारण चूहे के रूप में जन्म लेना पड़ा। वह चूहा अत्यंत शक्तिशाली और उपद्रवी बन गया। उसकी ताकत इतनी बढ़ गई कि वह खेतों को नष्ट करने लगा, अन्न को नुकसान पहुंचाने लगा और लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया। उसकी वजह से देवता भी चिंतित हो गए। देवताओं ने तब भगवान गणेश से इस समस्या का समाधान करने की प्रार्थना की। गणेश जी ने उस शक्तिशाली चूहे को नियंत्रित करने का निश्चय किया। जब गणेश जी उसके सामने पहुंचे, तो चूहा अपने अहंकार में इधर-उधर भागने लगा। लेकिन भगवान गणेश ने अपनी दिव्य शक्ति से उसे नियंत्रित कर लिया। अहंकार का अंत और विनम्रता का आरंभकहा जाता है कि जब चूहे को अपनी हार का एहसास हुआ, तो उसने गणेश जी के सामने समर्पण कर दिया और क्षमा मांगने लगा। उसने वचन दिया कि वह अब किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगा और गणेश जी की सेवा करेगा। उसकी विनम्रता को देखकर गणेश जी ने उसे क्षमा कर दिया और उसे अपना वाहन बना लिया। इस तरह शक्तिशाली लेकिन अहंकारी चूहा अंततः विनम्रता के आगे झुक गया और भगवान गणेश का वाहन बन गया। प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?यह कथा केवल धार्मिक कहानी नहीं है, बल्कि जीवन का गहरा संदेश भी देती है। चूहा मनुष्य की इच्छाओं, लालच और अस्थिर मन का प्रतीक माना जाता है, जो तेज़ी से बढ़कर नियंत्रण से बाहर हो सकता है। वहीं भगवान गणेश बुद्धि और नियंत्रण के प्रतीक हैं, जो इन इच्छाओं को साध लेते हैं। गणेश जी का चूहे पर सवार होना इस बात का संकेत है कि सच्चा ज्ञान और शक्ति वही है, जो मन की इच्छाओं और अहंकार पर नियंत्रण रख सके। जीवन के लिए संदेशइस कथा से सबसे बड़ा संदेश यह मिलता है कि चाहे शक्ति कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अहंकार हमेशा विनम्रता के सामने हार जाता है। सच्ची महानता शक्ति में नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण, ज्ञान और विनम्रता में होती है। इसी कारण गणेश जी का वाहन चूहा केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला प्रतीक भी माना जाता है।