जबलपुर में फर्जी डॉक्टर का भंडाफोड़: 80 हजार वेतन लेकर करता था सिर्फ 2 घंटे ड्यूटी

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां संजीवनी क्लीनिक में फर्जी एमबीबीएस डिग्री और जाली मेडिकल रजिस्ट्रेशन के आधार पर एक व्यक्ति के डॉक्टर बनकर काम करने का खुलासा हुआ है। हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी हर महीने करीब 80 हजार रुपये वेतन लेता था, लेकिन मरीजों का इलाज करने की बजाय केवल कुछ घंटे ही क्लीनिक में मौजूद रहता था। यह मामला तब सामने आया जब दमोह पुलिस की जांच में संजीवनी क्लीनिक से जुड़े दो अन्य फर्जी डॉक्टरों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। जांच आगे बढ़ी तो जबलपुर के चेरीताल स्थित क्लीनिक में पदस्थ अजय मौर्य का नाम सामने आया, जिसे बाद में हिरासत में लिया गया। सूत्रों और जांच रिपोर्ट के अनुसार अजय मौर्य मार्च 2025 में क्लीनिक में नियुक्त हुआ था और डेढ़ साल से अधिक समय तक यहां कार्यरत रहा। इस दौरान वह हर महीने नियमित रूप से वेतन लेता रहा, लेकिन मरीजों के इलाज में उसकी भूमिका बेहद सीमित रही। क्लीनिक स्टाफ और मरीजों के अनुसार वह केवल दो घंटे के लिए आता था और ज्यादातर समय अपने केबिन में बैठा रहता था। स्थानीय मरीजों ने बताया कि इलाज का पूरा काम काउंटर पर बैठे स्टाफ द्वारा ही किया जाता था। मरीजों की समस्या सुनकर वहीं दवा दे दी जाती थी और डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती थी। कई मरीजों ने यह भी कहा कि उन्होंने डॉक्टर अजय मौर्य को कभी गंभीर रूप से मरीजों का परीक्षण करते नहीं देखा। क्लीनिक में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर ने भी इस बात की पुष्टि की कि डॉक्टर रोजाना केवल कुछ समय के लिए आते थे और जल्दी चले जाते थे। किसी को अंदेशा नहीं था कि उनके दस्तावेज फर्जी हो सकते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों आरोपी डॉक्टर एनएचएम के तहत संविदा पर नियुक्त किए गए थे और पिछले कुछ वर्षों में लाखों रुपये वेतन के रूप में प्राप्त कर चुके थे। अकेले अजय मौर्य ने ही करीब 14 लाख रुपये से अधिक वेतन ले लिया था। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि वॉक-इन इंटरव्यू के जरिए की गई नियुक्तियों में दस्तावेजों की सही तरह से जांच नहीं की गई। इसी का फायदा उठाकर फर्जी डिग्रीधारी लोगों ने सरकारी सिस्टम में घुसपैठ कर ली। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह मामला सिर्फ तीन लोगों तक सीमित नहीं है और प्रदेश में 70 से अधिक फर्जी डॉक्टर इसी तरह सरकारी या निजी क्लीनिकों में काम कर सकते हैं। इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क की भी संभावना जताई जा रही है, जो फर्जी डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन तैयार कराने का काम करता है। फिलहाल पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड हीरा सिंह कौशल को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और जांच लगातार जारी है।
MSP भुगतान घोटाला: फर्जी खातों में पहुंची किसानों की मेहनत की रकम

शिवपुरी । शिवपुरी जिले में किसानों की मेहनत की कमाई पर बड़ा साइबर हमला सामने आया है, जहां समर्थन मूल्य पर बेचे गए गेहूं का भुगतान सीधे किसानों के खातों में न जाकर फर्जी बैंक खातों में पहुंच गया। इस मामले ने न केवल सरकारी भुगतान प्रणाली बल्कि आधार लिंकिंग और डिजिटल ट्रांजैक्शन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के कोलारस, बदरवास और शिवपुरी ब्लॉक की कई सहकारी संस्थाओं से जुड़े इस फर्जीवाड़े की जांच साइबर सेल द्वारा की जा रही है। शुरुआती जांच में करीब 100 संदिग्ध बैंक खातों पर होल्ड लगाया गया है, जबकि संबंधित फिनो बैंक और कियोस्क आईडी की गहन जांच की जा रही है। साइबर सेल प्रभारी धर्मेंद्र सिंह जाट के अनुसार, अभी तक दो किसानों की विस्तृत शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनके आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई गई है। जांच में यह भी सामने आया है कि गुना जिले के चक्का क्षेत्र में रामलाल सहरिया के नाम पर जारी कियोस्क आईडी के जरिए संदिग्ध खाते खोले गए थे, जिनका इस्तेमाल इस पूरे फर्जीवाड़े में किया गया। मामले में सामने आए अलग-अलग उदाहरणों ने इस घोटाले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। ग्राम गंगौरा के किसान भजन सिंह ने पत्नी सुशीला देवी के नाम पर सेवा सहकारी संस्था कोटा में 86 क्विंटल गेहूं बेचा था, लेकिन भुगतान के लिए दिए गए एक्सिस बैंक खाते के बजाय 2.25 लाख रुपये फिनो बैंक के खाते में ट्रांसफर हो गए। परिवार का कहना है कि उनका इस बैंक में कोई खाता ही नहीं है। इसी तरह ग्राम बेंहटा के किसान विश्वीर सिंह जाट ने 306 क्विंटल गेहूं बेचा, जिसमें 6.65 लाख रुपये का भुगतान फर्जी खाते में चला गया। वहीं ग्राम सूखा राजापुर के अमर सिंह लोधी के 1.48 लाख रुपये भी SBI खाते के बजाय फिनो बैंक खाते में पहुंच गए, जबकि परिवार ने ऐसे किसी खाते से इनकार किया है। एक अन्य मामले में ग्राम सुरवाया के किसान राजेंद्र उर्फ गब्बर सिंह गुर्जर के 44 हजार 626 रुपये भी गलत खाते में ट्रांसफर हो गए, हालांकि समय रहते खाते को होल्ड कर दिया गया जिससे रकम निकाली नहीं जा सकी। जांच में सामने आया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में किसानों के नाम पर बिना दस्तावेज और बिना बायोमेट्रिक सत्यापन के खाते खोले गए और उन्हें आधार से लिंक कर दिया गया। एनपीसीआई सिस्टम का दुरुपयोग कर नए लिंक किए गए खातों में सरकारी भुगतान सीधे ट्रांसफर करा लिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका बेहद खतरनाक है क्योंकि इसी पैटर्न पर अन्य सरकारी योजनाओं जैसे पीएम आवास, लाड़ली बहना योजना, वृद्धावस्था पेंशन और दिव्यांग पेंशन की राशि भी खतरे में पड़ सकती है। फिलहाल साइबर सेल पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और बैंकिंग सिस्टम से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है, ताकि इस बड़े फर्जीवाड़े में शामिल सभी आरोपियों तक पहुंचा जा सके।
वर्षों की मेहनत, अनुशासन और जुनून की उड़ान: तुलसी रेड्डी ने फतह की दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट

नई दिल्ली। तेलंगाना के हैदराबाद क्षेत्र के कुतबुल्लापुर मंडल के बोवरामपेट गांव के रहने वाले पर्वतारोही तुलसी रेड्डी पालपुनूरी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक पहुंचकर एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने पूरे देश को गौरव और प्रेरणा से भर दिया है। वर्षों की कठिन ट्रेनिंग, अनुशासन और निरंतर प्रयासों के बाद मिली यह सफलता केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और जीवन में बदलाव की एक जीवंत कहानी है। तुलसी रेड्डी की यह यात्रा साधारण जीवनशैली से शुरू होकर असाधारण उपलब्धि तक पहुंचने की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है। तुलसी रेड्डी की शुरुआत किसी पेशेवर खिलाड़ी या पर्वतारोही के रूप में नहीं हुई थी, बल्कि वे सामान्य जीवन जीते हुए फिटनेस की ओर आकर्षित हुए। उन्होंने स्वास्थ्य सुधार के लिए जिम जाना शुरू किया और धीरे-धीरे यह आदत उनके जीवन का जुनून बन गई। फिटनेस के प्रति बढ़ते समर्पण ने उन्हें एंड्योरेंस स्पोर्ट्स की ओर प्रेरित किया, जहां उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ और कठिन शारीरिक चुनौतियों को अपनाया। इसके बाद उन्होंने पर्वतारोहण की दुनिया में कदम रखा और खुद को ऊंचाइयों की कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार करना शुरू किया। लगातार मेहनत और अभ्यास के कारण उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के अभियानों में भाग लिया और धीरे-धीरे उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित की। अपने अभियान के दौरान तुलसी रेड्डी ने केवल एवरेस्ट ही नहीं बल्कि दुनिया की कई कठिन चोटियों को भी सफलतापूर्वक पार किया। इनमें यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस, दक्षिण अमेरिका की एकोंकागुआ, अफ्रीका की किलिमंजारो और भारत तथा आसपास के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों की कई कठिन चोटियां शामिल हैं। इन सभी अभियानों ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया। कठिन मौसम, ऑक्सीजन की कमी और जोखिम भरे रास्तों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हर चुनौती को सीख के रूप में स्वीकार किया। एवरेस्ट अभियान के दौरान भी उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी तैयारी और दृढ़ संकल्प ने उन्हें सफलता की ओर अग्रसर किया। एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचना उनके लिए केवल एक लक्ष्य की प्राप्ति नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत, त्याग और परिवार तथा साथियों के सहयोग का परिणाम था। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, गाइड्स और टीम को दिया जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ निभाया। उनके परिवार ने इस उपलब्धि को गर्व और भावनात्मक क्षण बताया। तुलसी रेड्डी की यह उपलब्धि आज उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो जीवन में बड़े सपने देखते हैं लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो तो कोई भी ऊंचाई असंभव नहीं होती।
पारिवारिक विवाद से बढ़ा मामला: भजन समिति सदस्य पर पुलिस कार्रवाई

शिवपुरी । शिवपुरी शहर में एक भजन समिति से जुड़े युवक पर महिला के साथ अश्लील हरकतें करने, ब्लैकमेल करने और धमकी देने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़ित महिला की शिकायत और कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फतेहपुर क्षेत्र निवासी 40 वर्षीय महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि करीब पांच महीने पहले वह एक हनुमान चालीसा भजन समिति से जुड़ी थी, जहां उसकी पहचान आरोपी संजय गौतम से हुई थी। शुरुआत में धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान जान-पहचान बढ़ी, लेकिन बाद में आरोपी ने महिला पर अनुचित तरीके से नजदीकियां बनाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। महिला के अनुसार, आरोपी ने समिति के कार्यक्रमों के दौरान कई बार उसके साथ अशोभनीय हरकतें कीं। 28 जनवरी 2026 को हुए एक कार्यक्रम में भी इसी तरह की घटना सामने आई, जिसके बाद महिला ने समिति के कार्यक्रमों में जाना बंद कर दिया। इसके बावजूद आरोपी लगातार फोन कर उसे परेशान करता रहा और मिलने का दबाव बनाता रहा। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब महिला ने आरोपी की बात मानने से इनकार कर दिया, तो उसने बदले की भावना से उसके परिवार को निशाना बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि आरोपी ने महिला के बेटे की नौकरी छुड़वा दी और पति के क्लीनिक को भी बंद करा दिया, जिससे परिवार पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया। महिला ने पुलिस को बताया कि आरोपी उसे धमकी देता था कि यदि वह उससे मिलने नहीं आई तो उसके परिवार को नुकसान पहुंचाया जाएगा, जबकि मिलने पर बेटे को नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता था। इस पूरे मामले की कॉल रिकॉर्डिंग भी पीड़िता ने पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंपी है। 20 मई को भी आरोपी द्वारा फोन कर अश्लील मांग करने और धमकी देने का आरोप है। लगातार बढ़ते दबाव और उत्पीड़न से परेशान होकर महिला ने आखिरकार पुलिस का सहारा लिया। फिलहाल कोतवाली पुलिस ने आरोपी संजय गौतम के खिलाफ बीएनएस (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
शिवपुरी में किराना दुकान में आग: पुलिस की सतर्कता से टली बड़ी घटना

शिवपुरी । शिवपुरी जिले के लुकवासा कस्बे में बुधवार देर रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब स्टेशन रोड पर स्थित एक बंद किराना दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना में दुकान के अंदर रखा करीब डेढ़ लाख रुपये मूल्य का किराना सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया, जिससे दुकानदार को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। रात के समय गश्त पर निकली पुलिस टीम ने सबसे पहले दुकान के शटर से धुआं और लपटें उठती देखीं, जिसके बाद तुरंत दुकानदार पंकज गुप्ता को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही दुकानदार मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आग तेजी से फैल चुकी थी। दुकानदार के पहुंचने के बाद तुरंत दुकान का शटर तोड़ा गया और आग बुझाने के प्रयास शुरू किए गए। स्थिति को देखते हुए आसपास के लोगों को भी मदद के लिए बुलाया गया। पड़ोस में लगे बोरवेल को चालू कर पानी की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। पुलिस और स्थानीय लोगों की संयुक्त मेहनत से करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सका। फिलहाल आग लगने के कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को संभावित वजह माना जा रहा है। अचानक लगी आग ने दुकान के भीतर रखे सभी किराना सामान को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे पूरा स्टॉक नष्ट हो गया। इस घटना में राहत की बात यह रही कि समय रहते पुलिस ने स्थिति को भांप लिया, जिससे आग आसपास की दुकानों तक नहीं फैल सकी और एक बड़ी दुर्घटना टल गई। हालांकि, व्यापारी को हुए नुकसान ने स्थानीय व्यापारियों में चिंता जरूर बढ़ा दी है। फिलहाल प्रशासन और पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आग किन परिस्थितियों में लगी।
राष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन के लिए दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक, सरकार की रणनीति और संभावित बदलावों पर नजर

नई दिल्ली । विदेश दौरे से लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर सक्रिय राजनीतिक और प्रशासनिक मोड में दिखाई दे रहे हैं। गुरुवार को राजधानी दिल्ली में होने वाली मंत्रिपरिषद की अहम बैठक को लेकर पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब देश के सामने कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियाँ मौजूद हैं और सरकार की नीतिगत दिशा पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक में सभी केंद्रीय मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी रहने की संभावना है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि चर्चा केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें महत्वपूर्ण निर्णय और भविष्य की रणनीति पर भी मंथन किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार बैठक में सरकार विभिन्न मंत्रालयों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा कर सकती है। खासतौर पर ऐसे विभाग जिन पर हाल के समय में प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे हैं, उन पर अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही देश की मौजूदा आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए नीतिगत सुधारों पर भी विचार किया जा सकता है। बैठक में वैश्विक परिस्थितियों का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रहा है, इस विषय को भी गंभीरता से लिया जा सकता है। विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और उसके घरेलू प्रभाव जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है। इसी बीच देश में NEET परीक्षा से जुड़े विवाद ने सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती खड़ी कर दी है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है। परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और संस्थागत कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार पर दबाव बढ़ा है कि वह इस पूरे मामले में ठोस और भरोसेमंद कदम उठाए। माना जा रहा है कि बैठक में इस विषय पर भी विस्तृत चर्चा हो सकती है और भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए कुछ नए निर्णय सामने आ सकते हैं। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर चल रहे तनावपूर्ण हालात भी भारत की नीति निर्धारण प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संसाधनों की स्थिति और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं को देखते हुए सरकार इस दिशा में पहले से अधिक सतर्क रुख अपनाने की कोशिश कर रही है। बैठक में यह भी विचार किया जा सकता है कि आम जनता पर किसी भी तरह के आर्थिक दबाव को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। राजनीतिक दृष्टि से भी इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसे सरकार के वर्तमान कार्यकाल की एक बड़ी समीक्षा बैठक के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि आने वाले समय में कुछ विभागों में बदलाव या नई जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण संभव है। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन बैठक के एजेंडे को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है।
साइबर खतरों को लेकर गंभीर आरोप: डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया

नई दिल्ली । डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और निजता के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जब पीपल फोरम ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने अपने परिवार को कथित रूप से निशाना बनाए जाने और मोबाइल टैपिंग जैसी गतिविधियों के आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह मामला न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ा बताया जा रहा है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते असुरक्षित वातावरण की ओर भी इशारा करता है, जहां आम नागरिकों की निजता खतरे में पड़ती दिख रही है। डॉ. मल्लप्पा ने अपने आरोपों में कहा है कि उनके परिवार के सदस्यों को संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों के जरिए निशाना बनाया गया, जिसमें अज्ञात व्यक्ति द्वारा टेलीग्राम जैसे माध्यम से संदिग्ध लिंक भेजे जाने की घटना शामिल है। यह लिंक केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी और भाई को भी भेजा गया, जिससे यह आशंका और गहरी हो गई कि यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि सुनियोजित डिजिटल हमला हो सकता है। इन घटनाओं को लेकर उन्होंने संबंधित शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग व्यवस्था में दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामला जांच की प्रक्रिया में बताया जा रहा है। इस शिकायत में 13 अप्रैल को दर्ज की गई ऑनलाइन अपराध संबंधी प्रविष्टि का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें डिजिटल साक्ष्य और संबंधित रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को सौंपे जाने की बात कही गई है। डॉ. मल्लप्पा का कहना है कि इस तरह की घटनाएं केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रता, निजता और सुरक्षा पर सीधा हमला हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोबाइल टैपिंग, साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल माध्यमों से डराने-धमकाने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिन्हें अब अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, यह एक व्यापक पैटर्न की ओर संकेत करता है, जिसे रोकने के लिए संस्थागत स्तर पर सख्त और त्वरित कार्रवाई आवश्यक है। डॉ. मल्लप्पा ने मानवाधिकार आयोग से अपील की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए देश के साइबर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि आम नागरिक सुरक्षित वातावरण में डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जागरूकता की कमी और तकनीकी सुरक्षा में खामियां ऐसे मामलों को और बढ़ावा देती हैं, इसलिए सरकार और संबंधित संस्थानों को मिलकर एक मजबूत रणनीति तैयार करनी चाहिए। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मौजूदा डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था नागरिकों की निजता की रक्षा करने में पर्याप्त है या नहीं, और क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता होगी।
इंदरगंज में बड़ा हादसा: 100 किमी की स्पीड में बेकाबू कार ने मचाया तांडव

ग्वालियर। ग्वालियर शहर एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने की वजह से बड़े सड़क हादसे का गवाह बना। इंदरगंज थाना क्षेत्र के राम मंदिर के पास देर रात एक बेकाबू कार ने पहले ई-रिक्शा और फिर ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में ऑटो सड़क पर पलट गया और कुल पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना 18 मई की रात करीब 2:30 बजे की बताई जा रही है, जिसका सीसीटीवी फुटेज अब सामने आया है। फुटेज के आधार पर पुलिस ने जांच तेज कर दी है और आरोपी वाहन चालक की तलाश की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सफेद रंग की तेज रफ्तार कार लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आ रही थी। वह गश्त के ताजिया की ओर से आते हुए पहले एक ई-रिक्शा से टकराई और फिर सीधे एक ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि ऑटो पलट गया और सड़क पर मौजूद लोग घबरा गए। घटना के वक्त कुछ युवक ई-रिक्शा से उतरकर पास खड़े ऑटो में बैठे ही थे कि अचानक यह हादसा हो गया। बावन पायगा निवासी 16 वर्षीय अनिकेत सविता अपने दोस्तों राजीव जाटव, नौमित जाटव और कृष्णा राठौर के साथ रेलवे स्टेशन से घर लौट रहे थे। राम मंदिर के पास ई-रिक्शा की बैटरी खत्म हो जाने के बाद वे ऑटो में सवार हुए ही थे कि यह दुर्घटना हो गई। हादसे के बाद आरोपी चालक ने मौके पर रुकने के बजाय गाड़ी को पीछे लेकर तेजी से फरार हो गया। भागते समय उसने एक अन्य ई-रिक्शा को भी टक्कर मार दी, जबकि एक ऑटो में सवार परिवार बाल-बाल बच गया। इस पूरी घटना ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। घायल हुए पांच लोगों में अनिकेत सविता (16), राजीव जाटव, नौमित जाटव, कृष्णा राठौर और ऑटो चालक सतीश प्रजापति शामिल हैं। सभी घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। इंदरगंज थाना पुलिस ने अज्ञात कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और अब आसपास के मैरिज गार्डन और राम मंदिर क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपी वाहन और चालक की पहचान की जा सके। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फुटेज के आधार पर जल्द ही आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया जाएगा। यह मामला एक बार फिर शहर में बढ़ते ट्रैफिक नियम उल्लंघन और तेज रफ्तार ड्राइविंग पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
भितरवार में चीते की चहलकदमी से दहशत: कूनो टीम ने बढ़ाई निगरानी

ग्वालियर । ग्वालियर अंचल के भितरवार क्षेत्र में एक बार फिर कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता KGP-1 देखे जाने से इलाके में हलचल मच गई है। इस बार चीते को केरुआ गांव के खेतों में घूमते हुए ग्रामीणों ने कैमरे में कैद किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग और कूनो की मॉनिटरिंग टीम पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है और लगातार चीते की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जानकारी के अनुसार, KGP-1 पिछले लगभग 45 दिनों से अलग-अलग इलाकों में लगातार मूवमेंट कर रहा है। कूनो से निकलने के बाद वह आरोन, सिमरिया, तिघरा डैम, मुरैना के जंगलों और घाटीगांव क्षेत्र तक पहुंच चुका है। लगातार बदलते उसके मूवमेंट ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को भी सक्रिय कर दिया है। 15 अप्रैल को उसकी लोकेशन तिघरा डैम के लखनपुरा जंगल क्षेत्र में ट्रैक की गई थी, जहां माना गया कि वह पानी और सुरक्षित कॉरिडोर की तलाश में पहुंचा था। इसके बाद 20 अप्रैल को घाटीगांव क्षेत्र के ऊआखेड़ा गांव और आसपास के खेतों में भी उसकी मौजूदगी दर्ज की गई। वहीं 30 अप्रैल को ग्रामीणों ने उसे खेतों में आराम करते हुए देखा था, जिसके बाद वहां कुछ देर के लिए दहशत और उत्सुकता दोनों का माहौल बन गया था। हालांकि धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होती गई क्योंकि चीते ने अब तक किसी भी ग्रामीण या मवेशी पर हमला नहीं किया है। वन विभाग के अनुसार KGP-1 के गले में ट्रैकिंग कॉलर लगा हुआ है, जिससे उसकी हर मूवमेंट को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है। इसी तकनीक की मदद से उसकी लोकेशन समय-समय पर ट्रैक की जा रही है और टीम उसके पीछे-पीछे निगरानी में जुटी रहती है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में पर्याप्त शिकार और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के कारण चीता आक्रामक व्यवहार नहीं दिखा रहा है। वह लगातार खुले जंगलों, पानी के स्रोतों और सुरक्षित मूवमेंट कॉरिडोर की तलाश में नए क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। इस बीच वन विभाग ने आसपास के गांवों में एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ग्रामीणों से कहा गया है कि वे अकेले खेतों या जंगल की ओर न जाएं, चीते के पास जाने या उसे घेरकर फोटो-वीडियो बनाने की कोशिश न करें, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। कुल मिलाकर KGP-1 का यह लगातार बदलता मूवमेंट न सिर्फ वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में उत्सुकता और सतर्कता दोनों को बढ़ा रहा है।
भारत-यूरोप संबंधों को नई दिशा, पीएम मोदी की पांच देशों की यात्रा से खुल सकते हैं विकास के नए रास्ते

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों की लंबी और महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पूरी करने के बाद गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली लौट आए। इस यात्रा को भारत की विदेश नीति और वैश्विक संबंधों के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया, जहां विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ व्यापक चर्चा हुई। यात्रा के अंतिम चरण में इटली में प्रधानमंत्री मोदी और वहां की प्रधानमंत्री के बीच हुई बैठक विशेष रूप से चर्चा में रही। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताते हुए उन्हें ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने का फैसला किया। यह कदम आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई गति देने वाला माना जा रहा है। इस मुलाकात के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तार से बातचीत हुई, जिनमें रक्षा, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विज्ञान और प्रौद्योगिकी शामिल रहे। दोनों देशों ने आगामी वर्षों में व्यापारिक संबंधों को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। इसके साथ ही शिक्षा, संस्कृति और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इस यात्रा के दौरान वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श हुआ, जिसमें पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे विषय प्रमुख रहे। इन चर्चाओं के जरिए भारत ने अपने संतुलित और स्पष्ट कूटनीतिक दृष्टिकोण को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा है। यह दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल दर्शक नहीं बल्कि एक सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभा रहा है। दिल्ली लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम भी काफी व्यस्त रहा। राजधानी पहुंचते ही उन्होंने शाम को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें सरकार के कामकाज की समीक्षा और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई। इस बैठक को नीति निर्माण और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पांच देशों की यात्रा से भारत को कई स्तरों पर लाभ मिल सकता है। एक ओर जहां विदेशी निवेश और व्यापारिक अवसरों में बढ़ोतरी की संभावना है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी सहयोग और ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। यूरोपीय देशों और पश्चिम एशिया के साथ मजबूत होते संबंध भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेंगे। इसके अलावा, इस यात्रा से भारतीय उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ने से रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है और देश की आर्थिक वृद्धि को भी गति मिल सकती है।