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राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस 2026: आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और शांति का संकल्प

राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस हर साल 21 मई को पूरे भारत में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य देश के लोगों को आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ जागरूक करना तथा समाज में शांति, एकता और सौहार्द का संदेश फैलाना है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि आतंकवाद किसी भी रूप में मानवता के लिए खतरा है और इससे निपटने के लिए सभी नागरिकों को मिलकर काम करना चाहिए। इस दिन की शुरुआत 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद की गई थी, ताकि आतंकवाद के खिलाफ देश को एकजुट किया जा सके। तब से हर वर्ष 21 मई को यह दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और विभिन्न संस्थानों में शपथ ग्रहण समारोह और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस पर लोगों को यह शपथ दिलाई जाती है कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा और आतंकवाद का समर्थन नहीं करेंगे और देश की अखंडता और एकता को बनाए रखने में अपना योगदान देंगे। यह दिन समाज में भाईचारे और शांति को मजबूत करने का संदेश देता है। आज के समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में आतंकवाद और हिंसा की घटनाएं सामने आती हैं, ऐसे में यह दिवस और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह हमें याद दिलाता है कि शांति ही विकास की पहली शर्त है और बिना शांति के कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता। राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस केवल एक औपचारिक दिन नहीं है, बल्कि यह एक संकल्प है कि हम सभी मिलकर आतंकवाद के खिलाफ खड़े होंगे और एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और मजबूत भारत के निर्माण में योगदान देंगे। -राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस

मौसमी स्वास्थ्य/वायरल बीमारियों पर जागरूकता

गर्मी का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएँ लेकर आता है। इस दौरान वायरल फीवर, डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), लू लगना और पेट संबंधी बीमारियाँ तेजी से फैलती हैं। बदलते तापमान और असंतुलित दिनचर्या के कारण शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी में क्यों बढ़ती हैं बीमारियाँ?तेज धूप और अधिक तापमान के कारण शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है। यही स्थिति डिहाइड्रेशन को जन्म देती है। इसके अलावा दूषित पानी, बासी खाना और साफ-सफाई की कमी वायरल संक्रमण को तेजी से फैलाती है। वायरस इस मौसम में अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जिससे बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और शरीर दर्द जैसी समस्याएँ आम हो जाती हैं। वायरल फीवर के लक्षणअचानक बुखार आना शरीर में दर्द और कमजोरी सिरदर्द और थकान गले में खराश या खांसी भूख कम लगना यदि ये लक्षण 2–3 दिन से ज्यादा बने रहें तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। डिहाइड्रेशन के खतरेगर्मी में पसीना अधिक निकलने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसके लक्षण हैं: बार-बार प्यास लगना चक्कर आना मुंह सूखना पेशाब का रंग गहरा होना कमजोरी महसूस होना गंभीर स्थिति में बेहोशी तक हो सकती है। बचाव के आसान उपायगर्मी और वायरल बीमारियों से बचने के लिए कुछ सरल सावधानियाँ अपनाई जा सकती हैं: दिनभर पर्याप्त पानी पिएं (8–10 गिलास) नींबू पानी, ओआरएस और नारियल पानी का सेवन करें हल्का और ताजा भोजन करें बाहर का तला-भुना और बासी खाना न खाएं धूप में निकलते समय सिर ढककर रखें व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें खान-पान में रखें विशेष ध्यानगर्मी में शरीर को ठंडक देने वाले फल जैसे तरबूज, खीरा, संतरा और दही का सेवन फायदेमंद होता है। कैफीन और ज्यादा मसालेदार भोजन से बचना चाहिए क्योंकि यह शरीर में गर्मी बढ़ाते हैं। कब लें डॉक्टर की सलाह?यदि तेज बुखार, लगातार उल्टी, अत्यधिक कमजोरी या पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। खुद से दवा लेना खतरनाक हो सकता है। गर्मी में वायरल फीवर और डिहाइड्रेशन आम समस्या हैं, लेकिन थोड़ी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर इनसे आसानी से बचा जा सकता है। साफ-सफाई, सही खान-पान और पर्याप्त पानी पीना ही स्वस्थ रहने की कुंजी है। –

आज बाजार में क्या रहेगा रुख? मुनाफे के मौके की तलाश में निवेशक सतर्क

नई दिल्ली ।  भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहने वाली है। विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में आज मिश्रित रुख (Mixed Trend) देखने को मिल सकता है, जहां कुछ सेक्टरों में खरीदारी रहेगी तो कुछ में मुनाफावसूली का दबाव बना रह सकता है। गिफ्ट निफ्टी के संकेतों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बाजार की ओपनिंग फ्लैट से हल्की तेजी के साथ हो सकती है। हालांकि, निवेशक किसी भी बड़े दांव से पहले ग्लोबल मार्केट्स के ट्रेंड और डॉलर इंडेक्स की चाल पर नजर बनाए रखेंगे। निफ्टी-सेंसेक्स पर दबाव और सपोर्ट लेवलमार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक निफ्टी के लिए आज का प्रमुख सपोर्ट लेवल 22,200–22,100 के आसपास रह सकता है, जबकि ऊपर की ओर 22,450–22,600 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है। सेंसेक्स में भी आज सीमित दायरे में कारोबार होने की संभावना है। बैंकिंग और आईटी सेक्टर बाजार को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कौन से सेक्टर रह सकते हैं फोकस में?आज के ट्रेडिंग सत्र में कुछ सेक्टर निवेशकों का ध्यान खींच सकते हैं-बैंकिंग सेक्टर: लोन ग्रोथ और Q4 नतीजों के बाद हलचल संभवआईटी सेक्टर: ग्लोबल टेक संकेतों से प्रभावितऑटो सेक्टर: डिमांड डेटा के चलते तेजी की उम्मीदफार्मा सेक्टर: सुरक्षित निवेश के रूप में खरीदारी संभव ग्लोबल मार्केट और FII का असरअमेरिकी बाजारों में मिले-जुले संकेत और एशियाई बाजारों की सुस्ती का असर भारतीय बाजार पर दिख सकता है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। अगर FII लगातार खरीदारी करते हैं तो बाजार में मजबूती लौट सकती है, लेकिन बिकवाली बढ़ने पर दबाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी संकेतविशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आज के बाजार में निवेशक सावधानी के साथ ट्रेडिंग करें। अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से बचने के लिए स्टॉप लॉस का उपयोग जरूरी रहेगा। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए यह दिन अवसर और जोखिम दोनों लेकर आ सकता है। लॉन्ग टर्म निवेशक मजबूत फंडामेंटल वाले स्टॉक्स में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं। 21 मई का शेयर बाजार पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों, डॉलर मूवमेंट और घरेलू निवेश भावना पर निर्भर रहेगा। बाजार में बड़ा ट्रेंड फिलहाल नहीं दिख रहा है, लेकिन सेक्टर आधारित तेजी निवेशकों को मौके दे सकती है।

विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस 2026: विविध संस्कृतियों में छिपी है मानवता की असली ताकत

विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस हर साल 21 मई को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य अलग-अलग संस्कृतियों, परंपराओं, भाषाओं और जीवनशैली के बीच आपसी समझ, सम्मान और सहयोग को बढ़ावा देना है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया की असली ताकत उसकी विविधता में छिपी हुई है और अलग-अलग संस्कृतियां मिलकर मानवता को और समृद्ध बनाती हैं। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने इस दिवस की शुरुआत सांस्कृतिक विविधता के महत्व को समझाने और वैश्विक स्तर पर संवाद को मजबूत करने के लिए की थी। आज के समय में जब दुनिया तेजी से वैश्वीकरण की ओर बढ़ रही है, तब अलग-अलग देशों और समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना और भी जरूरी हो गया है। यह दिवस लोगों को यह संदेश देता है कि हर संस्कृति अनोखी है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। सांस्कृतिक विविधता केवल परंपराओं और त्योहारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भाषा, खान-पान, पहनावा, कला, संगीत और सोचने के तरीके तक फैली हुई है। जब विभिन्न संस्कृतियां एक-दूसरे से जुड़ती हैं तो ज्ञान, अनुभव और रचनात्मकता का आदान-प्रदान होता है, जिससे समाज अधिक प्रगतिशील और मजबूत बनता है। इस दिन दुनिया भर में विभिन्न कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन, प्रदर्शनी और संवाद सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनमें अलग-अलग देशों की संस्कृति को प्रदर्शित किया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों में भी बच्चों को विविध संस्कृतियों के बारे में जागरूक किया जाता है ताकि वे बचपन से ही सम्मान और सहिष्णुता की भावना सीख सकें। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और तकनीक ने दुनिया को और करीब ला दिया है, जिससे अलग-अलग संस्कृतियों को समझना आसान हो गया है। हालांकि, इसके साथ यह जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए दूसरों की संस्कृति का भी सम्मान करें। विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस हमें यह संदेश देता है कि विविधता में ही एकता की शक्ति है। अगर दुनिया की सभी संस्कृतियां मिलकर आगे बढ़ें तो वैश्विक शांति, विकास और भाईचारे को और मजबूत किया जा सकता है। यह दिन मानवता को एक साझा परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा देता है, जहां हर संस्कृति सम्मान और गर्व का विषय है। -विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस

राजीव गांधी पुण्यतिथि 2026: आधुनिक भारत की नींव रखने वाले युवा नेता को देश की श्रद्धांजलि

21 मई 2026 को भारत में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाएगी। यह दिन भारतीय राजनीति के उस युवा नेता को याद करने का अवसर है, जिन्होंने देश के आधुनिकीकरण और तकनीकी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। राजीव गांधी को आधुनिक भारत की डिजिटल सोच की नींव रखने वाले नेताओं में गिना जाता है, जिन्होंने 18 वर्ष की उम्र में मतदान का अधिकार देकर लोकतंत्र को और व्यापक बनाया। राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था और वे देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र थे। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वे भारत के प्रधानमंत्री बने और उन्होंने देश की बागडोर संभाली। अपने कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा, दूरसंचार और कंप्यूटर क्रांति को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतियां लागू कीं, जिससे भारत तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ा। उनके नेतृत्व में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास किए गए, जिससे ग्रामीण भारत में लोकतंत्र की जड़ें और गहरी हुईं। उन्होंने युवा शक्ति को देश के विकास में शामिल करने पर विशेष जोर दिया और भारत को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने का सपना देखा। हालांकि उनका कार्यकाल कई राजनीतिक चुनौतियों और विवादों से भी घिरा रहा, लेकिन उनके सुधारवादी दृष्टिकोण और विकासपरक नीतियों को आज भी याद किया जाता है। 21 मई 1991 को एक चुनावी रैली के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। 21 मई को उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाएं, स्मृति कार्यक्रम और विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा उन्हें याद किया जाता है। यह दिन हमें न केवल उनके योगदान की याद दिलाता है, बल्कि देश की एकता, लोकतंत्र और विकास के प्रति उनकी सोच को भी आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है। राजीव गांधी का जीवन भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा और आधुनिक सोच के लिए प्रेरित करता रहेगा। -राजीव गांधीपुण्यतिथि

सुबह का सही नाश्ता क्या हो? ओट्स और पोहा में जानें कौन देगा ज्यादा एनर्जी

नई दिल्ली । सुबह का नाश्ता हमारे पूरे दिन की एनर्जी और हेल्थ को तय करता है। आजकल फिटनेस और वजन घटाने की चाहत के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि आखिर सुबह ओट्स खाना बेहतर है या पोहा। दोनों ही विकल्प भारतीय रसोई में आसानी से उपलब्ध हैं, जल्दी बन जाते हैं और हल्के भी माने जाते हैं, लेकिन इनके शरीर पर असर अलग-अलग होते हैं। ओट्स को अक्सर वेट लॉस डाइट का “किंग” कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर बीटा-ग्लूकन है, जो पाचन क्रिया को धीमा करता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता। यही कारण है कि ओट्स खाने के बाद व्यक्ति लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस करता है और बार-बार स्नैकिंग की जरूरत कम हो जाती है। इसके अलावा ओट्स ब्लड शुगर को भी अचानक बढ़ने से रोकते हैं, जिससे शरीर को लगातार स्थिर ऊर्जा मिलती रहती है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फ्लेवर्ड ओट्स की जगह प्लेन ओट्स का सेवन ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि इनमें अतिरिक्त चीनी नहीं होती। वहीं दूसरी तरफ पोहा को अक्सर हल्का और साधारण नाश्ता माना जाता है, लेकिन इसकी अपनी अलग ताकत है। चपटे चावल से बनने वाला पोहा आसानी से पच जाता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। जब इसमें मूंगफली, हरी सब्जियां, राई और करी पत्ता मिलाया जाता है तो इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू काफी बढ़ जाती है। मूंगफली प्रोटीन और हेल्दी फैट प्रदान करती है, जबकि नींबू आयरन के अवशोषण को बेहतर बनाता है। यही वजह है कि पोहा एक बैलेंस्ड और एनर्जी देने वाला नाश्ता माना जाता है। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि असली फर्क सिर्फ ओट्स या पोहा में नहीं बल्कि आपके पूरे डाइट पैटर्न में होता है। अगर आपका नाश्ता संतुलित है और उसमें फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट शामिल हैं, तो वह शरीर को बेहतर तरीके से सपोर्ट करता है। वजन घटाने के लिए केवल एक फूड आइटम पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है, बल्कि पूरे दिन की डाइट और लाइफस्टाइल ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ लोग ओट्स को अपनी फिटनेस जर्नी का हिस्सा बनाते हैं क्योंकि यह लंबे समय तक पेट भरा रखता है, जबकि कुछ लोग पोहा को पसंद करते हैं क्योंकि यह स्वादिष्ट, हल्का और जल्दी पचने वाला होता है। दोनों ही विकल्प सही हैं, बस जरूरत है उन्हें सही मात्रा और सही सामग्री के साथ खाने की। निष्कर्ष यही है कि ओट्स और पोहा दोनों ही हेल्दी ब्रेकफास्ट हैं, लेकिन आपके लक्ष्य के अनुसार चुनाव करना सबसे महत्वपूर्ण है। वजन घटाना हो तो ओट्स बेहतर हो सकता है, जबकि तुरंत एनर्जी और हल्के नाश्ते के लिए पोहा एक शानदार विकल्प है।

मौसम का मिजाज बदला: कई राज्यों में आंधी-बारिश की चेतावनी जारी

मध्‍य प्रदेश। 21 मई का दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में मिले-जुले मौसम का संकेत दे रहा है। कहीं तेज धूप और उमस लोगों को परेशान कर सकती है, तो वहीं कुछ राज्यों में बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश से मौसम सुहावना होने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्री-मानसून गतिविधियां अब धीरे-धीरे सक्रिय हो रही हैं, जिससे मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है और दोपहर के समय लू जैसे हालात भी महसूस किए जा सकते हैं। वहीं शाम होते-होते कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बादल छाने की संभावना जताई गई है। मध्य प्रदेश सहित इन राज्यों में गर्मी का असर जारी मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई इलाकों में दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं का असर रहेगा। खासकर दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तापमान चरम पर रह सकता है। मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्के बादल और स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना भी जताई गई है, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है। हालांकि पूरी तरह राहत की उम्मीद अभी कम ही है। दक्षिण और पूर्वी भारत में बारिश की संभावना दक्षिण भारत के केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में प्री-मानसून बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी दबाव के कारण कुछ इलाकों में तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी है आंधी-तूफान और बिजली गिरने का अलर्ट कई राज्यों में अचानक मौसम बदलने की संभावना है। खासकर ग्रामीण इलाकों में तेज आंधी और बिजली गिरने का खतरा बना रह सकता है। किसानों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।  IMD ने कहा है कि आने वाले कुछ दिनों तक मौसम में अस्थिरता बनी रहेगी, जिससे कभी तेज धूप तो कभी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। दिल्ली-एनसीआर में कैसा रहेगा मौसम दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में दिन के समय गर्म हवाएं चल सकती हैं। शाम तक आंशिक बादल छाने की संभावना है। हालांकि बारिश की संभावना फिलहाल सीमित है, लेकिन मौसम में हल्की ठंडक महसूस हो सकती है। 21 मई का मौसम देशभर में पूरी तरह मिश्रित रहने वाला है। कहीं गर्मी का प्रकोप तो कहीं बारिश की राहत देखने को मिलेगी। बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने और मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।

गुरुवार के उपाय: एक चुटकी हल्दी से बदल सकती है किस्मत और आर्थिक स्थिति

नई दिल्ली । सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा के साथ-साथ हल्दी से जुड़े उपाय करना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि हल्दी न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि यह कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति को भी मजबूत करती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और स्थिरता आती है। ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है, उन्हें गुरुवार के दिन विशेष उपाय करने की सलाह दी जाती है। गुरु ग्रह मजबूत होने से विवाह, करियर और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा के समय हल्दी का प्रयोग अत्यंत शुभ माना गया है। गुरुवार को भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने चुटकीभर हल्दी अर्पित करने से दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ती है और रिश्तों में मजबूती आती है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से आर्थिक समस्या या रुका हुआ धन परेशान कर रहा हो, तो गुरुवार के दिन चावल में हल्दी मिलाकर उसे लाल कपड़े में बांधकर पर्स या तिजोरी में रखना शुभ माना जाता है। इससे धन से जुड़ी बाधाएं दूर होने की मान्यता है। वहीं, करियर और बिजनेस में लगातार रुकावटों को दूर करने के लिए हल्दी की गांठ से माला बनाकर भगवान गणेश को अर्पित करना लाभकारी माना गया है। इससे कार्यों में आ रही बाधाएं कम होती हैं और सफलता के रास्ते खुलते हैं। इसके अलावा, काली हल्दी और केसर को पानी में मिलाकर तिजोरी पर स्वास्तिक बनाने की परंपरा भी प्रचलित है, जिसे व्यापार में वृद्धि और आर्थिक स्थिरता के लिए शुभ माना जाता है। कुल मिलाकर गुरुवार के दिन हल्दी से जुड़े ये सरल उपाय न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इन्हें जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक मजबूती का प्रतीक भी माना जाता है।

Cooler Buying Tips: नया कूलर खरीदते समय इन 5 बातों का रखें ध्यान, वरना हो सकता है नुकसान

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में कूलर खरीदना आसान काम नहीं है, क्योंकि सही विकल्प न चुना जाए तो न कूलिंग अच्छी मिलती है और न ही पैसे की सही वैल्यू। इसलिए खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। 1. कमरे के साइज के हिसाब से कूलर चुनेंकूलर लेते समय सबसे पहले अपने कमरे का आकार देखें। छोटे कमरे के लिए पर्सनल कूलर सही रहता है, जबकि बड़े कमरे या हॉल के लिए डेजर्ट कूलर बेहतर विकल्प होता है। गलत साइज का कूलर लेने से ठंडक कम मिलती है। 2. एयर थ्रो और फैन स्पीड जरूरी हैकूलर की कूलिंग काफी हद तक उसके एयर थ्रो पर निर्भर करती है। ज्यादा एयर थ्रो वाला कूलर पूरे कमरे में हवा पहुंचाता है। साथ ही मल्टी-स्पीड फैन होने से आप जरूरत के अनुसार कूलिंग कंट्रोल कर सकते हैं। 3. बड़ी पानी की टंकी लेंअगर आप बार-बार पानी भरने की परेशानी से बचना चाहते हैं तो बड़े टैंक वाला कूलर चुनें। इससे कूलर लंबे समय तक लगातार चल सकता है और बेहतर कूलिंग देता है। 4. बिजली की खपत जरूर देखेंकम बिजली खर्च करने वाला कूलर हमेशा बेहतर होता है। इन्वर्टर सपोर्ट वाले और एनर्जी-एफिशिएंट मॉडल लंबे समय में बिजली बिल कम करने में मदद करते हैं। 5. कूलिंग पैड और फीचर्स चेक करेंकूलिंग पैड की क्वालिटी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हनीकॉम्ब पैड वाले कूलर ज्यादा प्रभावी और टिकाऊ माने जाते हैं। इसके अलावा रिमोट कंट्रोल, आइस चैंबर और ऑटो वॉटर फिल जैसे फीचर्स भी सुविधा बढ़ाते हैं।

फास्ट फूड से बढ़ सकते हैं गंभीर बीमारियों का खतरा: जानें किन चीज़ों से रखें दूरी

नई दिल्ली। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में फास्ट फूड लोगों की पहली पसंद बन चुका है। बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज और इंस्टेंट नूडल्स जैसी चीजें स्वाद में लाजवाब लगती हैं, लेकिन लगातार सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। डॉक्टर और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट लगातार चेतावनी देते हैं कि इन फूड्स का सीमित सेवन ही सेहत के लिए सुरक्षित है। सबसे पहले बर्गर और पिज्जा का नाम आता है। इनमें इस्तेमाल होने वाला मैदा, प्रोसेस्ड चीज़ और हाई कैलोरी सॉस शरीर में फैट बढ़ाने का काम करते हैं। नियमित रूप से इनके सेवन से मोटापा तेजी से बढ़ता है और हार्ट संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा फ्रेंच फ्राइज और डीप फ्राइड स्नैक्स भी सेहत के लिए हानिकारक माने जाते हैं। इनको तलने में इस्तेमाल किया गया बार-बार तेल ट्रांस फैट बनाता है, जो कोलेस्ट्रॉल बढ़ाकर हार्ट अटैक और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इंस्टेंट नूडल्स और चाउमीन जैसे फास्ट फूड में मैदा, ज्यादा नमक और प्रिज़र्वेटिव्स की मात्रा अधिक होती है। लगातार सेवन से पेट की समस्याएं, गैस और एसिडिटी जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं। कोल्ड ड्रिंक्स और शुगर वाले पेय पदार्थ शरीर में अनावश्यक शुगर बढ़ाते हैं, जिससे डायबिटीज का खतरा और इम्युनिटी कमजोर हो सकती है। लिवर पर भी इसका नकारात्मक असर देखा जा सकता है। प्रोसेस्ड मीट जैसे सॉसेज, बेकन और पैकेज्ड फूड भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाते हैं। इनमें सोडियम और प्रिज़र्वेटिव्स की मात्रा अधिक होती है, जो लंबे समय तक शरीर में रहने पर किडनी और हार्ट पर असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि फास्ट फूड का पूरी तरह त्याग करना जरूरी नहीं है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में और कभी-कभार ही खाना चाहिए। हेल्दी रहने के लिए फल, सब्जियां, साबुत अनाज और घर का बना खाना सबसे सुरक्षित विकल्प हैं। संतुलित आहार और सही लाइफस्टाइल अपनाकर फास्ट फूड के दीर्घकालिक नुकसान को कम किया जा सकता है। आज की बदलती लाइफस्टाइल में समझदारी यही है कि हम अपने भोजन के चुनाव पर ध्यान दें और हेल्दी जीवनशैली को प्राथमिकता दें।