नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

नई दिल्ली(New Delhi)। नेपाल की बालेन शाह सरकार ने देश के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति शुरू की है, जिसमें भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सीधे नेपाल आने का न्योता दिया गया है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी। इस अपील के बाद क्षेत्रीय पर्यटन और यात्रा उद्योग में हलचल देखी जा रही है। नेपाल सरकार की इस नई पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति के तहत भारतीय यूट्यूबर्स, व्लॉगर्स, पॉडकास्ट क्रिएटर्स और डिजिटल कंटेंट निर्माताओं को नेपाल यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है। नेपाली दूतावास (नई दिल्ली) की ओर से 30 मई तक आवेदन मांगे गए हैं और इस पहल को भारतीय क्रिएटर्स से तेजी से प्रतिक्रिया मिल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है जब नेपाल सरकार ने इस तरह सीधे भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन प्रचार के लिए शामिल किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ कुछ ही दिनों में 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि अंतिम तिथि तक यह आंकड़ा 1000 से ज्यादा पहुंच सकता है। नेपाल एयरलाइंस और होटल इंडस्ट्री ने भी इस अभियान को समर्थन दिया है। काठमांडू के कई फाइव स्टार होटलों ने चयनित इन्फ्लुएंसर्स के लिए विशेष पैकेज तैयार किए हैं। योजना के तहत चुने गए पांच इन्फ्लुएंसर्स को नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे काठमांडू, पोखरा और चितवन का दौरा कराया जाएगा, जहां वे देश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव करेंगे। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पर्यटन छवि को मजबूत करना है और भारतीय युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाना है।
65 इंजेक्शन, 7 IVF असफलताएं और लंबा इंतजार: 45 की उम्र में मां बनने जा रहीं एक्ट्रेस संभावना सेठ की प्रेरक कहानी

नई दिल्ली । मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री और मॉडल संभावना सेठ इन दिनों अपनी निजी जिंदगी की एक बड़ी खुशखबरी को लेकर सुर्खियों में हैं। लंबे संघर्ष और भावनात्मक उतार-चढ़ाव के बाद अब वह मां बनने की राह पर हैं। हाल ही में उन्होंने अपने बेबी शावर की खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिनमें उनकी खुशी और भावनाएं साफ झलक रही हैं। 45 वर्ष की उम्र में यह उनके जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण और भावुक मोड़ माना जा रहा है। संभावना सेठ पिछले कई वर्षों से मातृत्व की कोशिशों में लगी हुई थीं। करीब दस साल तक चले इस सफर में उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और अपने सपने को पूरा करने की कोशिश जारी रखी। इस दौरान उन्होंने कई बार IVF प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसमें कई प्रयास सफल नहीं हो सके। बताया जाता है कि इस पूरे उपचार और प्रयासों के दौरान उन्हें भारी शारीरिक और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा, जिसमें कई इंजेक्शन और चिकित्सकीय प्रक्रियाएं शामिल थीं। इन कठिन परिस्थितियों ने उनके जीवन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था। लगातार असफलताओं और एक गर्भपात के बाद संभावना और उनके पति ने अंततः सरोगेसी का सहारा लेने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का एक नया मोड़ साबित हुआ, जिसने उनकी वर्षों की उम्मीदों को फिर से जीवित कर दिया। सरोगेसी के माध्यम से अब वह अपने जीवन में मातृत्व का अनुभव करने के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं। इस पूरी यात्रा में उनके पति ने हमेशा उनका साथ दिया और किसी भी प्रकार का दबाव न बनाते हुए उन्हें भावनात्मक सहयोग प्रदान किया। हाल ही में उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा करते हुए कहा था कि यह उनके जीवन की सबसे खूबसूरत कहानी है, जो अब प्यार, उम्मीद और नए सफर के साथ आगे बढ़ रही है। बेबी शावर की तस्वीरों में उनकी मुस्कान और उत्साह इस बात को दर्शाता है कि लंबे इंतजार के बाद अब उनके जीवन में खुशी का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। संभावना सेठ मनोरंजन जगत में अपने अभिनय और रियलिटी शो में मजबूत उपस्थिति के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स और फिल्मों में काम किया है और अपने अलग अंदाज के लिए दर्शकों के बीच पहचान बनाई है। करियर के साथ-साथ उनका यह व्यक्तिगत संघर्ष भी उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद बनाए रखने का संदेश देता है। अब जब वह अपने जीवन के इस नए पड़ाव पर पहुंच चुकी हैं, तो उनके चाहने वाले भी इस खुशी में शामिल हो रहे हैं। लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा के बाद मिली यह सफलता उनके लिए किसी नए जीवन की शुरुआत से कम नहीं है।
5G Router: बिना तारों के इंटरनेट की नई क्रांति, जानिए कैसे मोबाइल टावर से सीधे मिलती है हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

नई दिल्ली(New Delhi)। इंटरनेट की दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहा है और अब पारंपरिक वाई-फाई राउटर की जगह 5G राउटर जैसी नई तकनीक सामने आ गई है। यह डिवाइस बिना किसी तार के सीधे मोबाइल टावर से 5G सिग्नल लेकर उसे Wi-Fi नेटवर्क में बदल देता है, जिससे यूजर्स को हाई स्पीड इंटरनेट मिल सकता है। खास बात यह है कि इसमें फाइबर केबल या DSL लाइन की जरूरत नहीं होती, जिससे सेटअप भी साफ-सुथरा और आसान हो जाता है। 5G राउटर असल में एक ऐसा डिवाइस होता है जिसमें 5G मॉडेम और वाई-फाई राउटर दोनों एक साथ मौजूद रहते हैं। यह मोबाइल की तरह सीधे 5G नेटवर्क से जुड़कर इंटरनेट प्राप्त करता है और उसे आसपास के उपकरणों तक वाई-फाई के रूप में पहुंचाता है। अगर 5G नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता, तो यह अपने आप 4G नेटवर्क पर स्विच कर जाता है, जिससे इंटरनेट कनेक्टिविटी बनी रहती है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा इसकी स्पीड और पोर्टेबिलिटी है। अगर आपके इलाके में मजबूत 5G नेटवर्क उपलब्ध है, तो यह पारंपरिक ब्रॉडबैंड कनेक्शन की तुलना में बेहतर परफॉर्मेंस दे सकता है। खासकर उन लोगों के लिए यह उपयोगी है जो ऑनलाइन गेमिंग, 4K वीडियो स्ट्रीमिंग या बड़े फाइल डाउनलोड जैसे हाई डेटा काम करते हैं। इसके अलावा 5G राउटर का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह पोर्टेबल होता है। इसमें इन-बिल्ट बैटरी होती है, जिससे इसे कहीं भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। यात्रा के दौरान या अलग-अलग स्थानों पर काम करने वाले लोगों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। हालांकि, इसके इस्तेमाल से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर आपके क्षेत्र में 5G नेटवर्क स्थिर नहीं है या बार-बार 4G और 5G के बीच स्विच करता है, तो पारंपरिक फाइबर इंटरनेट ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आपको स्थिर घरेलू या ऑफिस कनेक्शन चाहिए तो ब्रॉडबैंड अब भी भरोसेमंद माना जाता है। कुल मिलाकर, 5G राउटर इंटरनेट तकनीक में एक नया कदम है जो बिना तारों के तेज और लचीला कनेक्शन उपलब्ध कराता है, लेकिन इसका सही फायदा तभी मिलेगा जब क्षेत्र में मजबूत 5G नेटवर्क मौजूद हो।
फिल्मी दुनिया में हलचल: ‘डॉन 3’ छोड़ने पर रणवीर सिंह पर शिकायत, फरहान अख्तर ने उठाया बड़ा कदम

नई दिल्ली । बॉलीवुड में बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है। फिल्म से रणवीर सिंह के बाहर होने के बाद निर्माता और अभिनेता के बीच तनाव बढ़ गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मामला फिल्मी संगठनों तक पहुंच गया है और इस पर औपचारिक शिकायत दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं। चर्चा यह भी है कि प्रोजेक्ट के दौरान हुए कथित नुकसान को लेकर करोड़ों रुपये के मुआवजे की मांग पर विचार किया जा रहा है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री में हलचल बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार रणवीर सिंह को इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए पहले ही साइन किया गया था और फिल्म का प्रारंभिक प्रचार भी शुरू हो चुका था। लेकिन बाद में उन्होंने प्रोजेक्ट से हटने का फैसला लिया, जिससे पूरी योजना पर असर पड़ा। बताया जा रहा है कि उनकी अन्य फिल्मों की प्रतिबद्धताओं के चलते यह निर्णय लिया गया, जिसके बाद निर्माण पक्ष को आर्थिक और समय संबंधी नुकसान का सामना करना पड़ा। इसी कारण अब यह विवाद कानूनी और औपचारिक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। फिल्मी गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस पूरे मामले को लेकर आगे की स्थिति का फैसला एक आगामी बैठक में सामने आ सकता है। उद्योग से जुड़े लोग मानते हैं कि बड़े बजट की फिल्मों में इस तरह के बदलाव का सीधा असर उत्पादन लागत और रिलीज शेड्यूल पर पड़ता है, जिससे विवाद स्वाभाविक रूप से बढ़ जाते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई समाधान निकल पाता है या नहीं। इसी बीच बॉलीवुड से जुड़ी एक और पुरानी लेकिन चर्चित टिप्पणी फिर से सुर्खियों में आ गई है, जिसमें एक प्रसिद्ध अभिनेता ने वर्ष 1993 में रिलीज हुई एक लोकप्रिय कॉमेडी फिल्म को अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण से अत्यधिक बोल्ड और कुछ दृश्यों के कारण असहज बताया था। यह फिल्म अपने समय में बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल करने में कामयाब रही थी और दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रही थी। हालांकि उस अभिनेता ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनकी व्यक्तिगत पसंद उस फिल्म से मेल नहीं खाती, लेकिन दर्शकों की स्वीकार्यता ने इसे बड़ी हिट बना दिया। फिल्मी दुनिया में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि किसी फिल्म की सफलता और कलाकारों की व्यक्तिगत राय अलग-अलग हो सकती है। यही कारण है कि सिनेमा के प्रति दर्शकों का नजरिया हमेशा विविध और बहुआयामी रहता है।
आमिर खान का बड़ा बयान: गोविंदा-डेविड धवन की ब्लॉकबस्टर फिल्म को बताया था ‘वल्गर’, 25 करोड़ के कलेक्शन से बनी थी सुपरहिट

नई दिल्ली । बॉलीवुड में कई बार ऐसी फिल्में सामने आई हैं जिन्हें दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया, लेकिन आलोचकों और कलाकारों की राय उनसे बिल्कुल अलग रही। ऐसी ही एक चर्चा में आई थी 1993 में रिलीज हुई गोविंदा और चंकी पांडे स्टारर सुपरहिट फिल्म ‘आंखें’, जिसे लेकर बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने एक बार बेहद स्पष्ट और सख्त राय दी थी। आमिर खान ने एक पुराने इंटरव्यू में इस फिल्म पर बात करते हुए कहा था कि उन्हें यह फिल्म व्यक्तिगत रूप से पसंद नहीं आई। उन्होंने फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर टिप्पणी करते हुए इसे “वल्गर” और “अश्लीलता के करीब” बताया था। आमिर का कहना था कि फिल्म के कुछ कॉमेडी सीन उनकी समझ और पसंद से मेल नहीं खाते थे, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दर्शकों की पसंद अलग हो सकती है और किसी फिल्म की सफलता का पैमाना केवल व्यक्तिगत राय नहीं होता। ‘आंखें’ एक कॉमेडी-ड्रामा फिल्म थी, जिसका निर्देशन डेविड धवन ने किया था और कहानी अनीस बज्मी ने लिखी थी। गोविंदा इस फिल्म में डबल रोल में नजर आए थे, जिसने दर्शकों को खूब हंसाया और मनोरंजन का नया अंदाज दिया। फिल्म में चंकी पांडे, राज बब्बर, कादर खान और शक्ति कपूर जैसे कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। अपनी रिलीज के साथ ही यह फिल्म उस समय की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो गई थी। कम बजट में बनी इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी कॉमिक टाइमिंग और मनोरंजन से भरपूर कहानी थी। लगभग ढाई करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 25 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन किया था, जो उस दौर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इस सफलता ने गोविंदा को कॉमेडी फिल्मों के सुपरस्टार के रूप में और मजबूत पहचान दिलाई। आमिर खान के बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा जरूर पैदा की, क्योंकि जहां एक तरफ यह फिल्म जनता के बीच बेहद लोकप्रिय रही, वहीं दूसरी तरफ एक स्थापित अभिनेता द्वारा इसे लेकर इतनी सख्त राय सामने आई। हालांकि आमिर ने यह भी स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य किसी फिल्म को छोटा दिखाना नहीं था, बल्कि वह सिर्फ अपनी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया साझा कर रहे थे। बाद के वर्षों में भी ‘आंखें’ को हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में गिना जाता है, जिन्होंने कम लागत में बड़ी कमाई कर इंडस्ट्री को चौंका दिया। इस फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे बाद में अन्य भाषाओं में भी रीमेक किया गया। आज भी जब 90 के दशक की कॉमेडी फिल्मों की चर्चा होती है, तो ‘आंखें’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। आमिर खान की टिप्पणी और फिल्म की ऐतिहासिक सफलता मिलकर इसे बॉलीवुड इतिहास की उन फिल्मों में शामिल कर देती है, जो अपनी लोकप्रियता और विवाद दोनों के कारण याद की जाती हैं।
ऐश्वर्या राय का स्टाइलिश कमबैक, कान्स के क्लोजिंग डे पर व्हाइट पैंटसूट ने खींची पूरी लाइमलाइट

नई दिल्ली । फ्रांस में आयोजित कान फिल्म फेस्टिवल 2026 के समापन दिवस पर भारतीय अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन ने एक बार फिर अपने आकर्षक और स्टाइलिश अंदाज से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। रेड कारपेट पर उनकी मौजूदगी ने इस आयोजन को खास बना दिया, जहां उन्होंने ऑल-व्हाइट पैंटसूट में ऐसा ग्लैमरस अवतार पेश किया कि फैंस उन्हें एक बार फिर “कान्स की क्वीन” कहने लगे। उनकी यह एंट्री न केवल फैशन जगत में चर्चा का विषय बनी, बल्कि सोशल मीडिया पर भी उनका लुक तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने उनकी तारीफों के पुल बांध दिए। इस खास मौके के लिए ऐश्वर्या राय ने इंटरनेशनल डिजाइनर द्वारा तैयार किया गया एक शानदार व्हाइट सीक्विन पैंटसूट चुना, जिसमें क्लासिक एलिगेंस और मॉडर्न स्टाइल का बेहतरीन मेल देखने को मिला। उनके ब्लेजर में स्ट्रॉन्ग शोल्डर डिजाइन और सूक्ष्म लेस डिटेलिंग ने उनके लुक को और भी प्रभावशाली बना दिया। इसके साथ उन्होंने मैचिंग बस्टियर और फ्लेयर्ड ट्राउजर पहना, जिस पर सिल्वर टोन की हल्की चमक ने उनके पूरे व्यक्तित्व को और अधिक आकर्षक बना दिया। यह पूरा आउटफिट उन्हें एक पावरफुल और कॉन्फिडेंट फैशन स्टेटमेंट के रूप में पेश कर रहा था। उनके लुक का सबसे खास आकर्षण उनका फेदर और लेस से सजा हुआ स्टाइलिश स्कार्फ रहा, जिसने उनके पूरे आउटफिट में एक ड्रामेटिक और रॉयल टच जोड़ दिया। इसके साथ उन्होंने डायमंड ज्वेलरी और व्हाइट हील्स को चुना, जिसने उनके लुक को पूरी तरह से कंप्लीट किया। उनका मेकअप भी बेहद सॉफ्ट और एलिगेंट रखा गया, जिसमें ग्लॉसी फिनिश, विंग्ड आईलाइनर और नैचुरल टोन ने उनके चेहरे की खूबसूरती को और निखार दिया। सॉफ्ट वेवी हेयरस्टाइल ने उनके समग्र लुक में एक क्लासिक हॉलीवुड टच जोड़ दिया। रेड कारपेट पर उनकी एंट्री के साथ ही कैमरों की फ्लैश लाइट्स लगातार उन पर केंद्रित हो गईं और वहां मौजूद दर्शकों ने भी उनके अंदाज की जमकर सराहना की। फैंस ने उन्हें ग्लोबल फैशन आइकन बताते हुए कहा कि वे हर बार अपनी मौजूदगी से फेस्टिवल का आकर्षण बढ़ा देती हैं। सोशल मीडिया पर उनके इस लुक की तस्वीरें और वीडियो तेजी से फैल गए और कुछ ही समय में यह ट्रेंड करने लगा। कान फिल्म फेस्टिवल में इस बार कई देशों की फिल्मों का प्रदर्शन हुआ, लेकिन भारतीय सिनेमा की भागीदारी के बावजूद अवॉर्ड्स के मामले में सफलता नहीं मिल सकी। हालांकि, इसके बावजूद रेड कारपेट पर भारतीय प्रतिनिधित्व और ऐश्वर्या राय का प्रभावशाली अंदाज चर्चा का मुख्य केंद्र बना रहा। उनकी उपस्थिति ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फैशन और ग्लैमर आइकन में से एक हैं। फेस्टिवल के समापन पर ऐश्वर्या राय की यह शानदार उपस्थिति इस बात का प्रतीक रही कि फैशन और सिनेमा की दुनिया में उनका प्रभाव अब भी उतना ही मजबूत है जितना पहले था। उनकी यह एंट्री न केवल एक फैशन मोमेंट थी, बल्कि एक ग्लोबल स्टाइल स्टेटमेंट भी बन गई, जिसने कान्स 2026 के अंतिम दिन को यादगार बना दिया।
बच्चों पर मंडराया खतरा: सतना में मीजल्स के 7 केस, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

मध्यप्रदेश। सतना जिले में मीजल्स यानी खसरे का संक्रमण एक बार फिर चिंता का कारण बन गया है। पहले नागौद ब्लॉक के गिंजारा गांव में मामला सामने आने के बाद अब शहरी क्षेत्र में भी इसके नए केस दर्ज किए गए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चुनौती और बढ़ गई है। ताजा जानकारी के अनुसार सतना अर्बन क्षेत्र के राजेंद्र नगर गली नंबर-16 समेत अलग-अलग इलाकों में कुल 7 नए मीजल्स केस सामने आए हैं। इनमें से 4 मामले अकेले राजेंद्र नगर से हैं। सभी संक्रमित बच्चे 5 वर्ष से कम उम्र के हैं और फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मई माह में संदिग्ध लक्षण दिखने पर 22 बच्चों के सैंपल जांच के लिए आईसीएमआर लैब, जबलपुर भेजे गए थे। इनकी रिपोर्ट 23 मई को प्राप्त हुई, जिसमें 8 बच्चों में मीजल्स संक्रमण की पुष्टि हुई, जिनमें एक मामला नागौद ब्लॉक से संबंधित था। संक्रमित बच्चों में अधिकांश बच्चियां शामिल हैं, जो हनुमान नगर, नई बस्ती, बजरहा टोला, राजेंद्र नगर और गिंजारा जैसे क्षेत्रों से हैं। इस साल अब तक सतना और मैहर मिलाकर लगभग 40 मीजल्स केस दर्ज किए जा चुके हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। इससे पहले गिंजारा गांव में मीजल्स के कारण एक 2 वर्षीय मासूम बच्ची की मौत भी हो चुकी है। बच्ची को शुरुआत में बुखार और शरीर पर दाने निकले थे, लेकिन समय पर सही इलाज न मिलने और झाड़-फूंक पर भरोसा करने के कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई। अब उसी परिवार में बड़ी बहन की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वह अब खतरे से बाहर है। संक्रमित बच्ची को भी बहन से संक्रमण फैलने की आशंका जताई जा रही है। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे अभियान तेज कर दिया है। जिला टीकाकरण अधिकारी के अनुसार, जहां-जहां केस सामने आए हैं, वहां बच्चों को एमआर वैक्सीन की अतिरिक्त डोज और विटामिन-ए सिरप देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला ने बताया कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन निगरानी बढ़ा दी गई है। संदिग्ध बच्चों की जांच, टीकाकरण और सर्वे कार्य लगातार जारी रहेगा ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
सतना एयरपोर्ट पर अव्यवस्था: वेटिंग हॉल का AC ट्रिप, यात्रियों को गर्मी में राहत

मध्यप्रदेश। सतना एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के दौरान तैयारियों और व्यवस्थाओं की गंभीर खामियां सामने आ गईं। 31 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एयरपोर्ट पर उस समय अव्यवस्था का माहौल बन गया जब वेटिंग हॉल में क्षमता से तीन गुना अधिक भीड़ जमा हो गई। जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट के वेटिंग हॉल की क्षमता लगभग 50 लोगों की है, लेकिन मुख्यमंत्री की अगवानी के दौरान करीब 150 लोग वहां पहुंच गए। बाहर तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने और अंदर अत्यधिक भीड़ के कारण सेंट्रल एसी सिस्टम पर दबाव बढ़ गया और वह बार-बार ट्रिप होने लगा, जिससे कूलिंग पूरी तरह ठप हो गई। भीषण गर्मी और उमस के बीच यात्रियों और मौजूद लोगों को राहत देने के लिए एयरपोर्ट प्रबंधन को आनन-फानन में चार जंबो कूलर लगाने पड़े। इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी। यह घटना केवल तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं रही, बल्कि एयरपोर्ट की तैयारियों और मूलभूत सुविधाओं पर भी सवाल खड़े कर गई। बताया जा रहा है कि यह एयरपोर्ट अभी तक पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया है और यहां तक कि 6 सीटर छोटे विमान भी सुरक्षित रूप से नहीं उतर पा रहे हैं। इसी वजह से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भोपाल से विमान द्वारा रीवा पहुंचना पड़ा और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए सतना आना पड़ा। यह स्थिति एयरपोर्ट की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठाती है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 31 मई को इस एयरपोर्ट का ऑनलाइन लोकार्पण किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत में अभी भी कई सुविधाएं अधूरी हैं। बड़े-बड़े दावों के बावजूद एयरपोर्ट पर मूलभूत व्यवस्थाएं अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं।
गोलीकांड में नया खुलासा: महिला और नाबालिग समेत 5 आरोपी गिरफ्त में

मध्यप्रदेश। सागर जिले के मोतीनगर थाना क्षेत्र स्थित गौंड बब्बा चबूतरा इलाके में हुए सनसनीखेज गोलीकांड में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक नाबालिग भी शामिल है। इसके साथ ही इस हत्याकांड में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर पांच हो गई है, जबकि मुख्य आरोपी यश अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। यह घटना 21 मई की रात करीब 10:30 बजे की है, जब पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने फरियादी ओम साहू और उसके भाई मयंक साहू के साथ विवाद शुरू कर दिया था। विवाद के दौरान गाली-गलौज और मारपीट के बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक आरोपी ने अवैध हथियार से फायर कर दिया। गोली लगने से मयंक साहू गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसी दौरान हमले में ओम साहू पर चाकू से वार भी किया गया था। घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज की और साइबर सेल व मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करना शुरू किया। शनिवार को इसी कार्रवाई के तहत पुलिस ने तुत्तू उर्फ शैलेंद्र रैकवार (22 वर्ष, निवासी तिरुपतिपुरम) और एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले शुक्रवार को भी पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें 18 वर्षीय आर्यन आठिया, एक 16 वर्षीय नाबालिग और एक 60 वर्षीय महिला शामिल थी। इस तरह अब तक कुल पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह के अनुसार, इस हत्याकांड में कुल छह आरोपी नामजद हैं, जिनमें से एक मुख्य आरोपी यश अभी फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि सभी साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही फरार आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
कोर्ट की सख्ती के बाद लखनऊ में सपा पार्षद को मिली शपथ, मेयर के अधिकार सीमित होने से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज
नई दिल्ली। लखनऊ नगर निगम में लंबे समय से चल रहे पार्षद शपथ विवाद का अंत आखिरकार न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद हो गया। हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के अनुपालन में नगर निगम प्रशासन ने सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को औपचारिक रूप से शपथ दिलाई। यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और कानूनी बहस का भी बड़ा विषय बन गया था, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब निकाय चुनाव के परिणामों के बाद विजयी घोषित सपा पार्षद को शपथ दिलाने में देरी की गई। लगभग पांच महीने तक शपथ ग्रहण की प्रक्रिया लंबित रहने के कारण मामला धीरे-धीरे अदालत तक पहुंच गया। याचिकाकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि जानबूझकर शपथ ग्रहण में देरी की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। मामला पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल शपथ दिलाने का आदेश दिया, बल्कि लखनऊ नगर निगम के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारों पर भी सख्ती दिखाई। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन किया जाए, अन्यथा संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह माना जाएगा। इसी आदेश के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को पूरा किया गया। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मेयर सुषमा खर्कवाल ने सपा पार्षद को पद की शपथ दिलाई। यह कदम न्यायालय के आदेश के अनुपालन के रूप में देखा गया, जिससे यह संदेश भी गया कि संवैधानिक प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना संभव नहीं है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम के भीतर चल रहे प्रशासनिक तनाव और राजनीतिक खींचतान को भी उजागर कर दिया है। इस विवाद की पृष्ठभूमि 2023 के निकाय चुनावों से जुड़ी हुई है, जहां एक सीट पर चुनाव परिणाम को लेकर कानूनी चुनौती दी गई थी। आरोप-प्रत्यारोप के बीच अदालत ने अंतिम रूप से सपा प्रत्याशी को विजयी घोषित किया, लेकिन शपथ ग्रहण में देरी के कारण मामला फिर से विवादों में आ गया। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक संतुलन दोनों पर प्रभाव डाला है। अब शपथ ग्रहण के बाद यह मामला औपचारिक रूप से समाप्त माना जा रहा है, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या हस्तक्षेप न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है। प्रशासनिक स्तर पर इस घटना को एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।