चोरी की बुलेट को बना दिया कमाई का धंधा, पुलिस ने किया खुलासा

मध्य प्रदेश । Indore में वाहन चोरी की वारदातों पर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। बाणगंगा थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो महंगी बुलेट और अन्य बाइक चोरी कर उन्हें अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल करते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के नाम शिवेंद्र, वीरेंद्र और पंकज हैं, जिन्हें टीआई सियाराम गुर्जर की टीम ने दबोचा है। आरोपियों के पास से करीब एक दर्जन वाहन बरामद किए गए हैं, जिनमें चार बुलेट बाइक भी शामिल हैं। यह गिरोह सूने इलाकों और पार्किंग स्थलों को निशाना बनाकर चोरी की वारदातों को अंजाम देता था। जांच में सामने आया है कि आरोपी सिर्फ शौक या जरूरत के लिए चोरी नहीं करते थे, बल्कि एक संगठित तरीके से महंगी बुलेट चोरी कर उन्हें “ऑर्डर पर उपलब्ध” कराते थे। यानी पहले से डिमांड मिलने पर वाहन चोरी कर उसकी सप्लाई की जाती थी, और कई मामलों में इन्हें किराए पर भी दिया जाता था। पुलिस ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क में एक अन्य आरोपी साहिल का नाम भी सामने आया था, हालांकि शुरुआती पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया है। मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह गिरोह कितने समय से सक्रिय था और किन-किन इलाकों में इसकी गतिविधियां फैली हुई थीं। इसी बीच Indore के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में चोरी की अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे शहर में बढ़ते संपत्ति अपराधों को लेकर चिंता बढ़ गई है। तिलक नगर इलाके में एक ज्वेलर्स संचालक के घर चोरी की घटना ने भी पुलिस को अलर्ट कर दिया है। पीड़िता के अनुसार, घर में ताला लगाकर बाहर जाने के बाद चोरों ने अलमारी का ताला तोड़कर सोने के गहने और नकदी पर हाथ साफ कर दिया। चोरी गए सामान में अंगूठियां, चेन, कंगन और अन्य कीमती जेवर शामिल हैं। वहीं विजयनगर क्षेत्र में एक पुराने चोरी मामले में भी एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें पीड़िता ने अपने ही रिश्तेदारों पर संदेह जताया है। पुलिस इन सभी मामलों की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वाहन और घर चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए पेट्रोलिंग बढ़ाई जा रही है और संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरफ्तार गिरोह के तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं। फिलहाल पुलिस की इस कार्रवाई को शहर में बढ़ते वाहन चोरी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि चोरी की वारदातों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अलर्ट: फैटी लिवर को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी

मध्य प्रदेश । Indore एक बार फिर चिकित्सा जगत के महत्वपूर्ण विमर्श का केंद्र बना, जहां मैरियट होटल में आयोजित ‘लिवर कैंसर अपडेट-2026’ ने देशभर के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर लिवर कैंसर के बढ़ते खतरे और उसके आधुनिक उपचार पर गहन चर्चा की। इस राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न हिस्सों—दिल्ली, मुंबई, भोपाल, अहमदाबाद, रायपुर, ग्वालियर और रीवा—से आए वरिष्ठ डॉक्टरों ने भाग लिया। पूरे दिन चले विभिन्न सत्रों में लिवर कैंसर की रोकथाम, शुरुआती पहचान और अत्याधुनिक उपचार तकनीकों पर विस्तार से विचार साझा किए गए। विशेषज्ञों ने सबसे बड़ी चिंता नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज को लेकर जताई, जिसे अब लिवर कैंसर के प्रमुख कारणों में तेजी से उभरता हुआ माना जा रहा है। पहले जहां हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और शराब सेवन को मुख्य कारण माना जाता था, वहीं अब बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यदि इस स्थिति को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह धीरे-धीरे लिवर सिरोसिस में बदल सकती है, जिसमें लिवर सिकुड़ने लगता है और उसकी कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होती है। यही स्थिति आगे चलकर लिवर कैंसर का रूप ले सकती है। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और समय पर हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण को बेहद जरूरी बताया गया। नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद टीका लगाना इसी रोकथाम रणनीति का हिस्सा है। कॉन्फ्रेंस में शामिल विशेषज्ञों ने मल्टीडिसिप्लिनरी इलाज की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिसमें गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, सर्जन, रेडियो ऑनकोलॉजिस्ट और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट मिलकर मरीज के इलाज की रणनीति बनाते हैं। इससे रोग की विभिन्न अवस्थाओं में बेहतर और प्रभावी उपचार संभव हो पाता है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि अब कई मामलों में बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ती। ट्रांसआर्टेरियल थेरेपी जैसी तकनीकों में कैथेटर के जरिए सीधे ट्यूमर तक दवा पहुंचाई जाती है, जिससे ट्यूमर को नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज की रिकवरी बेहतर होती है। इसके अलावा एब्लेटिव थेरेपी जैसी तकनीकों के माध्यम से सुई के जरिए ट्यूमर को गर्म या ठंडा कर नष्ट किया जा रहा है, जो मरीजों के लिए कम आक्रामक और अधिक प्रभावी विकल्प साबित हो रहा है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ऐसे फोकस्ड कॉन्फ्रेंस चिकित्सा जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनमें अलग-अलग विशेषज्ञ एक साथ मिलकर बीमारी के हर पहलू पर चर्चा करते हैं और वैश्विक स्तर की नई गाइडलाइंस और उपचार विधियों को समझते हैं। कार्यक्रम के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि लिवर कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए जागरूकता, समय पर जांच और आधुनिक उपचार तकनीकों का व्यापक उपयोग बेहद जरूरी है।
इंदौर में पानी संकट चरम पर: चेतावनी के बावजूद लोग पी रहे हैं हैंडपंप का पानी

मध्य प्रदेश । Indore इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है, जहां पानी की कमी ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान होता नजर नहीं आ रहा। शहर के पालदा चौराहे पर रविवार को वार्ड 75 और वार्ड 64 के लोगों ने मिलकर घंटों तक चक्काजाम किया। करीब 3 से 4 घंटे तक लोग तेज धूप में पानी की मांग को लेकर बैठे रहे। हाथों में तख्तियां और बोतलें लिए लोग प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग करते रहे, लेकिन उनकी परेशानियां कम होने के बजाय और बढ़ती दिखीं। प्रदर्शन के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिससे सिटी बसों से लेकर ट्रैवल्स वाहन तक फंस गए। बाद में प्रशासनिक आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया, लेकिन लोगों की नाराजगी जस की तस बनी रही। सबसे चिंताजनक तस्वीर पालदा चौराहे के पास उस हैंडपंप की सामने आई, जिस पर लाल रंग से स्पष्ट लिखा है—“पानी पीने योग्य नहीं है।” इसके बावजूद स्थानीय लोग मजबूरी में उसी हैंडपंप से पानी भरते और उपयोग करते नजर आए। लोगों का कहना है कि जब आसपास कोई और विकल्प नहीं है, तो उन्हें यही पानी पीना पड़ रहा है, चाहे उसे छानकर या उबालकर ही क्यों न इस्तेमाल करना पड़े। स्थानीय निवासी रुपेंद्र का कहना है कि क्षेत्र में पानी की भारी कमी है और उन्हें मजबूरी में लगभग 600 मीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। उनका कहना है कि चेतावनी के बावजूद उन्हें यही पानी लेना पड़ता है क्योंकि कोई दूसरा स्रोत उपलब्ध नहीं है। वहीं एक छात्रा, जो बाहर से आकर Indore में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है, उसने बताया कि पिछले डेढ़ महीने से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। हॉस्टल और रूम में रहने वाले छात्रों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है क्योंकि न तो पर्याप्त सप्लाई है और न ही बोरिंग काम कर रही है। नर्मदा जल आपूर्ति भी नियमित नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें मजबूरी में हैंडपंप का सहारा लेना पड़ रहा है। इलाके के एक अन्य निवासी शैलेंद्र ने बताया कि उन्हें रोजाना करीब 1 किलोमीटर दूर पानी टंकी तक जाना पड़ता है। कई बार टैंकर भी उपलब्ध नहीं होते, जिससे स्थिति और खराब हो जाती है। लोग ड्रम और केन में पानी भरकर किसी तरह दिन निकाल रहे हैं। जल संकट की यह स्थिति सिर्फ पानी की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी, पढ़ाई और कामकाज को भी प्रभावित कर रही है। कई इलाकों में लोग प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं और जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अगर जल्द ही स्थायी व्यवस्था नहीं बनी, तो आने वाले दिनों में संकट और गंभीर हो सकता है।
पीएम मोदी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, बेंगलुरु में विस्फोटक मिलने के बाद प्रशासन का बड़ा कदम

नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक संवेदनशील मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। बेंगलुरु दौरे के दौरान प्रधानमंत्री के निर्धारित कार्यक्रम के आसपास संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिलने के मामले ने सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस महकमे की चिंता बढ़ा दी थी। अब इस पूरे प्रकरण में शुरुआती जांच के आधार पर छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई सुरक्षा में संभावित लापरवाही और चूक को गंभीरता से लेते हुए की गई है, जबकि मामले की जांच अभी भी जारी है। जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री 10 मई को बेंगलुरु दौरे पर पहुंचे थे। इसी दौरान शहर के बाहरी इलाके में ऐसी जगह पर दो जिलेटिन की छड़ें मिलने की सूचना सामने आई जो प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित बताई गई। जैसे ही इस घटना की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन तक पहुंची, पूरे विभाग में हलचल मच गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू कर दी गई और आंतरिक जांच बैठा दी गई। इस मामले में पुलिस विभाग ने शुरुआती स्तर पर कार्रवाई करते हुए छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है उनमें एक पुलिस सब इंस्पेक्टर, एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल शामिल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित रखने का फैसला लिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यह संदेश देने की कोशिश भी मानी जा रही है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। घटना सामने आने के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया था। इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय मानते हुए सवाल उठाए गए कि इतने संवेदनशील दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई। मामले को लेकर राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर भी चर्चा तेज हो गई थी। साथ ही इस घटना के पीछे की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की पहचान को लेकर भी जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई थीं। प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की सुरक्षा को देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में गिना जाता है। ऐसे में किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या विस्फोटक सामग्री मिलने की सूचना को अत्यधिक गंभीरता से लिया जाता है। यही कारण है कि इस मामले में भी प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि यह रिपोर्ट तय करेगी कि सुरक्षा व्यवस्था में वास्तविक चूक कहां हुई और इसके पीछे किन परिस्थितियों ने भूमिका निभाई। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि यह केवल लापरवाही का मामला था या इसके पीछे कोई और गंभीर पहलू छिपा हुआ है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा प्रबंधन को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।
इंदौर में दर्दनाक वारदात: प्रेम संबंधों से जुड़ा मामला बना मौत का सिलसिला

मध्य प्रदेश । Indore एक बार फिर रिश्तों की भयावह त्रासदी का गवाह बना है, जहां प्रेम, शक और विवाद ने तीन जिंदगियों को खत्म कर दिया। मेघदूत नगर इलाके में सामने आए इस मामले ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। घटना की शुरुआत उस वक्त हुई जब हल्केवीर पटेल नामक व्यक्ति ने अपनी पत्नी रोशनी पटेल की हत्या कर दी। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी ने पहले पत्नी को जबरन जहर देने की कोशिश की, और जब उसने विरोध किया तो गला घोंटकर उसकी जान ले ली। इसके बाद आरोपी ने भी जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब महिला के कथित प्रेमी और मामले से जुड़े एक अन्य व्यक्ति सतीश सावले ने भी आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि सतीश खंडवा जिले के पंधाना क्षेत्र में पहुंचा था और वहां परिवार से मिलने के बाद उसने जहर खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस पूरी घटना ने इसे एक साधारण घरेलू विवाद से बढ़ाकर एक जटिल “ट्रिपल ट्रैजेडी” में बदल दिया है, जहां एक तरफ हत्या है तो दूसरी ओर आत्महत्याओं की श्रृंखला। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि विवाद की जड़ कथित प्रेम संबंध और एफआईआर को लेकर तनाव था। बताया गया कि हल्केवीर को पत्नी और सतीश के बीच संबंधों की जानकारी थी, जिससे घर में लंबे समय से तनाव चल रहा था। इसी तनाव ने धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लिया। घटना से पहले हल्केवीर अपने साले और अन्य परिजनों के साथ सतीश से बातचीत के लिए गया था, जहां विवाद बढ़ने पर मारपीट भी हुई थी। इसके बाद दोनों पक्षों में एफआईआर और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ, जिसने स्थिति को और बिगाड़ दिया। घटना के बाद मिले सुसाइड नोट ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। नोट में पत्नी पर धोखा देने, सतीश पर मारपीट कराने और मानसिक तनाव का आरोप लगाया गया है। साथ ही बेटी की जिम्मेदारी और संपत्ति को लेकर भी निर्देश लिखे गए हैं। वहीं दूसरी ओर महिला के परिजनों ने भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि सतीश और रोशनी के बीच लंबे समय से संपर्क था, जिससे परिवार में तनाव बना हुआ था। पुलिस ने सुसाइड नोट और बयानों के आधार पर जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है। सतीश की मौत के बाद मामला और जटिल हो गया है, क्योंकि अब तीनों मुख्य पात्रों की मौत हो चुकी है और जांच मुख्य रूप से परिस्थितियों और साक्ष्यों पर आधारित रह गई है। यह घटना न सिर्फ पारिवारिक रिश्तों की जटिलता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि शक, तनाव और संवादहीनता कैसे एक सामान्य परिवार को त्रासदी में बदल सकती है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर वह कौन-सा मोड़ था जहां से यह पूरा मामला नियंत्रण से बाहर हो गया।
भोपाल में पेट्रोल ₹114.65, उज्जैन में डीजल ₹100 के पार-आम जनता पर महंगाई का दबाव बढ़ा

Madhya Pradesh। मध्य प्रदेश में ईंधन की कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल दरों ने न सिर्फ परिवहन व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि महंगाई के नए संकेत भी दे दिए हैं। ताजा बढ़ोतरी के बाद राज्य में पेट्रोल ₹116 प्रति लीटर से ऊपर पहुंच चुका है, जबकि डीजल कई शहरों में ₹100 के आंकड़े को पार कर चुका है। राजधानी Bhopal में नए रेट के मुताबिक पेट्रोल ₹114.65 प्रति लीटर और डीजल ₹99.74 प्रति लीटर दर्ज किया गया है। वहीं राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है। Ujjain में डीजल ₹100.11 प्रति लीटर पहुंच गया है, जो इसे प्रदेश का सबसे महंगा शहर बनाता है। यहां पेट्रोल ₹115.03 प्रति लीटर बिक रहा है। इसी तरह Indore में पेट्रोल ₹114.54 और डीजल ₹99.57 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। Jabalpur और Gwalior में भी कीमतों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। तेल कंपनियों ने सिर्फ 11 दिनों के भीतर चार बार कीमतें बढ़ाई हैं। 25 मई को ही पेट्रोल में ₹2.61 और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इस महीने की पहली बढ़ोतरी 15 मई को हुई थी, उसके बाद 19 मई और 23 मई को भी लगातार रेट बढ़ाए गए। कुल मिलाकर इस छोटे से अंतराल में पेट्रोल-डीजल करीब ₹8 प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है। इस तेज बढ़ोतरी का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियां, फल और रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी होने की आशंका जताई जा रही है। ट्रक और टेम्पो किराए में बढ़ोतरी से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा, जिसका असर जल्द ही बाजारों में दिखाई दे सकता है। किसानों के लिए भी यह बढ़ोतरी चिंता का विषय है क्योंकि ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और अन्य कृषि उपकरणों में डीजल की खपत अधिक होती है। इससे खेती की लागत बढ़ने और अनाज महंगा होने की संभावना है। वहीं बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। तेल कीमतों में इस उछाल की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव के बाद क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इसी दबाव का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं। कीमतों में कच्चे तेल की लागत, रिफाइनिंग खर्च, टैक्स, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के वैट का बड़ा योगदान होता है। Madhya Pradesh में वैट अधिक होने के कारण यहां ईंधन की कीमतें कई अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।
सूर्य के नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में चंद्रमा का प्रवेश, इन 4 राशियों पर बरसेगी सफलता, सम्मान और धन की वर्षा

नई दिल्ली। गंगा दशहरा 2026 के पावन अवसर पर एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिसने ज्योतिष प्रेमियों और राशि आधारित भविष्य में रुचि रखने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। 25 मई 2026 को चंद्रमा सूर्य के प्रभाव वाले उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और यह गोचर 26 मई की सुबह तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं और निर्णय क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र को स्थिरता, प्रतिष्ठा और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस विशेष संयोग का असर कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आने वाला माना जा रहा है। इस नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव विशेष रूप से मिथुन राशि के जातकों के लिए शुभ संकेत दे रहा है। लंबे समय से नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुल सकते हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी समय लाभकारी माना जा रहा है, जहां नई साझेदारी या बड़ी डील सफलता का कारण बन सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार और रुके हुए कार्यों के पूरे होने की संभावना से मानसिक संतुष्टि बढ़ सकती है। कर्क राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर राहत और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आने वाला माना जा रहा है। परिवार में चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और रिश्तों में मधुरता लौटने के संकेत मिल रहे हैं। कार्यक्षेत्र में अच्छी खबर मिलने के योग बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि जैसी खुशखबरी मिल सकती है। व्यापारिक गतिविधियों में भी गति बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जिससे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है। सिंह राशि के लिए यह समय विशेष रूप से प्रभावशाली माना जा रहा है। नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि के साथ सामाजिक पहचान मजबूत हो सकती है। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और आय के नए स्रोत बनने की संभावना भी जताई जा रही है। समाज में सम्मान बढ़ सकता है और लोग आपके विचारों को गंभीरता से सुन सकते हैं। यह समय नई शुरुआत और बड़े निर्णय लेने के लिए अनुकूल माना जा रहा है। वहीं धनु राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर नई उम्मीदें लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आने की संभावना है और सफलता के नए मार्ग खुल सकते हैं। सरकारी कार्यों से जुड़े मामलों में राहत मिल सकती है और यदि कोई कानूनी प्रक्रिया चल रही है तो सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ने से व्यक्ति अपने फैसले अधिक स्पष्टता के साथ ले पाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो गंगा दशहरा पर बना यह चंद्र गोचर कई लोगों के लिए नई ऊर्जा और नई संभावनाओं का संकेत बनकर सामने आ सकता है।
बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

नई दिल्ली । बॉलीवुड को सालों तक अपनी कॉमेडी फिल्मों से हंसाने वाले मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. वे अब फिल्में बनाना छोड़ रहे हैं, यानी वे रिटायर होने जा रहे हैं. उनकी आखिरी फिल्म बेटे वरुण धवन के साथ ‘है जवानी तो इश्क होना है’ होगी. अपनी रिटायरमेंट का ऐलान उन्होंने हाल ही में पीवीआर के एक खास इवेंट में किया. इस खबर को सुनकर इंडस्ट्री के कई लोग और उनके फैंस को झटका लगा है, क्योंकि अब डेविड धवन फिल्मों का डायरेक्शन करते हुए नजर नहीं आएंगे. उन्होंने अपने अब तक के करियर में करीब 45 फिल्मों का निर्देशन किया है. डायरेक्टर ने अपने करियर की शुरुआत साल 1989 में आई फिल्म ‘ताकतवर’ से की थी. डेविड धवन ने बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान का भी कमबैक कराया था. डेविड धवन क्यों हुए इमोशनलफेमस डायरेक्टर डेविड धवन इन दिनों अपने बेटे की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. इस फिल्म के ट्रेलर लॉन्च में डेविड धवन भी नजर आए थे. इस दौरान मीडिया से बात करते हुए वे इमोशनल हो गए. उन्होंने ट्रेलर इवेंट में बेटे वरुण धवन की जमकर तारीफ की. डायरेक्टर ने कहा, ‘जब मैं साल 2022 में बीमार पड़ा था, तो वह मेरे साथ अस्पताल में सोया करता था.’ पिता को इमोशनल देख एक्टर वरुण धवन ने उन्हें शांत किया. वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ सिनेमाघरों में 5 जून को रिलीज होगी, जो डेविड धवन की आखिरी फिल्म होगी.डेविड धवन ने फिल्म मेकिंग से लिया संन्यास?बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने 23 मई 2026 को डायरेक्शन की दुनिया को अलविदा कह दिया है. उन्होंने इसका ऐलान एक इवेंट के दौरान किया. इस पार्टी में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान, करण जौहर, पूजा हेगड़े, वरुण धवन और चंकी पांडे जैसे सितारे शामिल हुए थे. दरअसल, डायरेक्टर की रिटायरमेंट की खबर की पुष्टि करण जौहर ने की है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी शेयर की, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘कल जब मैं डेविड जी के सेलिब्रेशन में गया, तो उन्होंने मुझे बताया कि यह ‘है जवानी तो इश्क होना है’ उनकी आखिरी फिल्म होने वाली है.’ डेविड धवन ने बॉलीवुड को दी कई हिट कॉमेडीफेमस डायरेक्टर डेविड धवन को बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडी डायरेक्टर्स में गिना जाता है. उन्होंने 90 और 2000 के दशक में एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दी हैं, जिन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया है. उन्होंने इंडस्ट्री को राजा बाबू, जुड़वा, पार्टनर, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, हीरो नंबर 1, हसीना मान जाएगी, मुझसे शादी करोगी, कुली नंबर 1 और मैंने प्यार किया जैसी कई फिल्में दी हैं। कई बड़े कलाकारों संग किया कामडेविड धवन को बॉलीवुड इंडस्ट्री में कॉमेडी फिल्मों के सबसे सफल निर्देशकों में माना जाता है. उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में कई बड़े सितारों संग काम किया है. इसमें अमिताभ बच्चन, गोविंदा, सलमान खान, अक्षय कुमार, तापसी पन्नू, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर जैसे कई सितारे शामिल हैं. डेविड धवन ने करीब 6 साल के ब्रेक के बाद ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के साथ डायरेक्शन में वापसी की है. इसमें उनके बेटे वरुण धवन के अलावा मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े, मौनी रॉय, राकेश बेदी, राजेश कुमार और मनीष पॉल जैसे सितारे नजर आएंगे. सिनेमाघरों में यह फिल्म 5 जून को रिलीज होगी.
कॉकरोज जनता पार्टी पर जनता की राय बंटी: सर्वाइवल बनाम जल्दी हार

भोपाल। भोपाल में एक नई और अनोखी राजनीतिक बहस ने जोर पकड़ लिया है। “कॉकरोज जनता पार्टी” नाम की यह अवधारणा अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम लोगों की चर्चा का भी हिस्सा बन गई है। शहर में किए गए एक अनौपचारिक सर्वे में सामने आया कि करीब 80 प्रतिशत लोग मानते हैं कि यह नई तरह की डिजिटल-आधारित “जेन-जी राजनीति” लंबे समय तक टिक सकती है, जबकि 20 प्रतिशत लोगों का कहना है कि युवा वर्ग जल्दी उत्साहित होता है और उतनी ही जल्दी राजनीति से दूर भी हो जाता है। इस पूरे विवाद की शुरुआत 15 मई 2026 को हुई, जब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान युवाओं की भूमिका को लेकर टिप्पणी की थी। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने युवाओं के एक वर्ग का उल्लेख करते हुए कहा था कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय कुछ युवा तेजी से प्रतिक्रिया देने वाले समूह के रूप में उभर रहे हैं। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड शुरू हुआ, जिसे युवाओं ने “कॉकरोज जनता पार्टी” का नाम दे दिया। यह नाम तेजी से वायरल हो गया और इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इस पेज ने चौंकाने वाली रफ्तार से फॉलोअर्स जुटाने शुरू कर दिए। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ ही घंटों में इसके फॉलोअर्स की संख्या कई स्थापित राजनीतिक दलों से आगे निकल गई, जिससे यह चर्चा और तेज हो गई कि क्या यह केवल एक डिजिटल मजाक है या भविष्य की किसी नई राजनीतिक दिशा का संकेत। भोपाल के विभिन्न इलाकों में लोगों से बातचीत के दौरान मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों का कहना है कि यह युवाओं की नाराजगी और नई सोच का प्रतीक है, जो पारंपरिक राजनीति से अलग रास्ता तलाश रही है। वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि जेन-जी का उत्साह ज्यादा समय तक नहीं टिकता, इसलिए इस तरह के डिजिटल आंदोलन ज्यादा देर तक प्रभावी नहीं रहते। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरी घटना दरअसल डिजिटल युग की राजनीति का नया उदाहरण है, जहां सोशल मीडिया किसी भी विचार या मजाक को तेजी से एक बड़े आंदोलन में बदल सकता है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि “कॉकरोज जनता पार्टी” भविष्य में किसी वास्तविक राजनीतिक संरचना का रूप लेगी या यह केवल एक सोशल मीडिया ट्रेंड बनकर रह जाएगी। फिलहाल भोपाल सहित देश के कई हिस्सों में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है और लोग इसे राजनीति, हास्य और डिजिटल क्रांति—तीनों के मिश्रण के रूप में देख रहे हैं।
मीना कुमारी के आखिरी दिनों का सबसे भावुक किस्सा, मौत के बिस्तर पर मोहम्मद रफी से सुना था अपना पसंदीदा गीत

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय और खूबसूरती से छाप छोड़ने वाली मीना कुमारी का आखिरी वक्त बुरा गुजरा। एक्ट्रेस लीवर सिरोसिस से पीड़ित थीं। और लंबे इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। लेकिन जब वो बीमार, बिस्तर पर पड़ी थीं तो अक्सर एक गाना सुना करती थीं। उन्हें हमेशा से लगता था कि ये गाना उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा हुआ है। वो एक ऐसा गीत था जो तकलीफ भरे दिनों में मीना कुमारी को राहत की सांस देता था। मीना जब-जब इस गीत को गुनगुनाया करतीं तो अपने आधे ग़मों को भूल जाया करती थीं। मीना कुमारी का इस गाने से इतना गहरा जुड़ाव था कि जब मोहम्मद रफी उनसे मिलने आए तो एक्ट्रेस ने उनसे ये गाना गाने की रिक्वेस्ट की थी। बुरे दिनों में मीना कुमारी का साथी था ये गाना 1961 में मीना कुमारी की एक रिलीज हुई थी जिसका नाम था प्यार का सागर। इस फिल्म में मीना के साथ एक्टर राजेंद्र कुमार लीड रोल में थे। इस फिल्म में वैसे कई खूबसूरत गाने थे लेकिन ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’। इस गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने गाया था। ये गाना मीना कुमारी के दर्द की दवा बन गया था। अपना अकेलापन, दर्द भूलने के लिए अक्सर एक्ट्रेस इसी गाने को गुनगुनाया करती थीं। ये वो समय था जब मीना बहुत बीमार पड़ चुकी थीं, मौत से लड़ रही थीं। उन्हें फिल्मों के सेट पर नहीं बल्कि घर के एक कमरे में पड़े बिस्तर पर बीमार हालत में देखा जाता था। उनके आखिरी समय में फिल्मी जगत के कई कलाकार उनसे मिलने पहुंचा करते थे। एक दिन सिंगर मोहम्मद रफी भी पहुंचे। और मौत के बिस्तर पर मीना ने मोहम्मद रफी से वो गाना गाने की रिक्वेस्ट कर दी जो उनके दिल के बहुत करीब था। आत्मा में उतर चुका था मोहम्मद रफी का ये गीतबीमार, मौत से लड़ रही मीना कुमारी की इस इच्छा को मोहम्मद रफी ने टाला नहीं। वो उनके सिरहाने बैठे थे। उन्होंने उसी दर्द, और फीलिंग्स के साथ मीना के सामने गाया ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’। ये गाना मीना की आत्मा में उतर चुका था।ऐसे बना था ये गाना इस गाने को बनाने की भी एक अलग कहानी है। फिल्म प्यार का सागर में कुल 8 गाने थे। इन सभी गानों को रवि और प्रेम धवन ने कंपोज़ किया था। असद भोपाली ने गीत लिखे थे। इन गानों को आशा भोसले। शमशाद बेगम, मोहम्मद रफी और मुकेश ने गाए थे। फिल्म का गाना ‘ ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’ गाने को अगले दिन फिल्माया जाना था, लेकिन उस वक़्त तक रिकॉर्डिंग नहीं हुई थी। प्रेम धवन ने गाने को लिखा था और सिंगर मोहम्मद रफी को गाना रिकॉर्डिंग के लिए उसी दिन बुला लिया गया। लेकिन फीमेल सिंगर के लिए आशा भोसले और लता मंगेशकर से संपर्क नहीं हो पा रहा था। ऐसे में कंपोजर रवि ने सुमन कल्यानपुर से बात की गई। उन्होंने आने का वादा किया लेकिन वो स्टूडियो पहुंची नहीं। बहुत इंतजार के बाद अंत में एक बार फिर आशा भोसले से संपर्क किया गया और उनसे इस गाने को लेकर बात पक्की हो गई। आशा भोसले और मोहम्मद रफी ने मिलकर इस गाने को गया। अगले दिन गाने की शूटिंग को गई। मीना कुमारी और राजेंद्र इस गाने में नजर आए थे।