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स्किन के दाग-धब्बे होंगे गायब: हल्दी के साथ 2 घरेलू चीजों का कमाल, मिलेगा नेचुरल ग्लो

नई दिल्ली । सर्दियों के मौसम में ठंडी हवा और ड्राई स्किन के कारण चेहरा रूखा, बेजान और डल नजर आने लगता है। ऐसे में अगर आप केमिकल प्रोडक्ट्स की बजाय घरेलू नुस्खे अपनाते हैं तो त्वचा को प्राकृतिक रूप से निखारा जा सकता है। हल्दी को आयुर्वेद में त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो स्किन को साफ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं। अगर हल्दी में दो खास चीजें मिलाकर फेस पर लगाया जाए तो चेहरा सर्दियों में भी खिला-खिला और ग्लोइंग नजर आ सकता है। 1. हल्दी + दही: प्राकृतिक मॉइश्चराइजर पैकदही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को एक्सफोलिएट करता है और डेड स्किन हटाने में मदद करता है। हल्दी के साथ मिलकर यह स्किन को अंदर से साफ करता है। कैसे बनाएं पैक:1 चुटकी हल्दी2 चम्मच ताजा दहीदोनों को मिलाकर पेस्ट बना लें और चेहरे पर 15–20 मिनट लगाएं। फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें। फायदे:ड्राई स्किन से राहतदाग-धब्बे हल्के होते हैंचेहरा मुलायम और चमकदार बनता है 2. हल्दी + शहद: ग्लो बढ़ाने वाला नेचुरल फेस मास्कशहद एक बेहतरीन नेचुरल मॉइश्चराइजर है जो त्वचा को हाइड्रेट रखता है। हल्दी के साथ मिलकर यह स्किन को ग्लोइंग बनाता है और पिंपल्स कम करता है। कैसे बनाएं पैक:1 चुटकी हल्दी1 चम्मच शहदइसे अच्छे से मिक्स करके चेहरे पर लगाएं और 15–20 मिनट बाद धो लें। फायदे:स्किन में नेचुरल ग्लो आता हैमुंहासे और दाग कम होते हैंत्वचा सॉफ्ट और हाइड्रेट रहती हैध्यान रखने वाली बातेंहल्दी बहुत ज्यादा न लगाएं, वरना स्किन पीली पड़ सकती हैपहले पैच टेस्ट जरूर करेंहफ्ते में 2–3 बार ही इस्तेमाल करें हल्दी के साथ दही या शहद का इस्तेमाल सर्दियों में त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है। यह न केवल चेहरे को साफ करता है बल्कि उसे प्राकृतिक रूप से चमकदार भी बनाता है। नियमित उपयोग से स्किन चांद जैसी निखरी और हेल्दी दिख सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य कार्रवाई दिवस: महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों की वैश्विक आवाज

अंतर्राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य कार्रवाई दिवस (International Day of Action for Women’s Health) हर साल महिलाओं के स्वास्थ्य, उनके अधिकारों और सुरक्षित चिकित्सा सेवाओं के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन दुनिया को याद दिलाता है कि महिलाओं का स्वास्थ्य केवल एक व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और वैश्विक विकास का अहम आधार है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षित मातृत्व सेवाएं और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े अधिकार दिलाना है। यह दिवस इस बात पर जोर देता है कि हर महिला को समान और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए। कई देशों में आज भी महिलाएं जरूरी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित हैं, जिससे मातृ मृत्यु दर और स्वास्थ्य असमानता जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसी कारण यह दिन नीति-निर्माताओं, सरकारों और समाज को महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करता है। महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए आंकड़ों और सांख्यिकी (Statistics) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह जानना जरूरी है कि कितनी महिलाएं सुरक्षित प्रसव सुविधाओं से वंचित हैं, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में कितना अंतर है और महिलाओं को समय पर इलाज मिल पा रहा है या नहीं। सही डेटा के बिना कोई भी स्वास्थ्य नीति प्रभावी तरीके से नहीं बनाई जा सकती। इसलिए यह दिन “डेटा आधारित स्वास्थ्य सुधार” की जरूरत पर भी जोर देता है। आज भी दुनिया के कई हिस्सों में महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इनमें सुरक्षित प्रसव सुविधाओं की कमी, प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, जागरूकता की कमी और सामाजिक बाधाएं प्रमुख हैं। कई जगह महिलाओं को अपने स्वास्थ्य से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता भी नहीं मिलती, जो उनकी स्थिति को और कमजोर बनाता है। यह दिन वैश्विक स्तर पर कई संगठनों की भूमिका को भी उजागर करता है, जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), संयुक्त राष्ट्र महिला (UN Women) और विभिन्न गैर-सरकारी संगठन। ये संस्थाएं महिलाओं के लिए स्वास्थ्य कैंप, जागरूकता कार्यक्रम और सुरक्षित मातृत्व योजनाएं चलाकर उनकी स्थिति सुधारने का प्रयास करती हैं। अगर महिलाओं के स्वास्थ्य पर सही ध्यान दिया जाए और ठोस नीतियां लागू हों, तो मातृ मृत्यु दर में भारी कमी लाई जा सकती है और हर महिला को बेहतर जीवन मिल सकता है। यही कारण है कि यह दिन सिर्फ एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि एक वैश्विक आंदोलन है, जो समानता और अधिकारों की दिशा में काम करता है। अंत में यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ महिला ही एक स्वस्थ परिवार और मजबूत समाज की नींव होती है। इसलिए महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। -अंतर्राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य कार्रवाई दिवस

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव, बीएसएफ और बीजीबी के बीच हालिया घटनाओं ने बढ़ाई सुरक्षा चुनौतियां

नई दिल्ली । भारत और बांग्लादेश के बीच साझा सीमा एक लंबे समय से सामरिक और सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र रही है। हाल के दिनों में सीमा पर बढ़ती गतिविधियों और कुछ स्थानों पर सामने आई तनावपूर्ण घटनाओं ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पश्चिम बंगाल और असम से लगे कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में बाड़बंदी कार्य, अवैध घुसपैठ और स्थानीय विवादों से जुड़े घटनाक्रमों ने सीमा सुरक्षा बलों की भूमिका को प्रमुख बना दिया है। इसी क्रम में भारतीय सीमा सुरक्षा बल और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड की कार्यप्रणाली और उनकी जिम्मेदारियों पर भी चर्चा तेज हुई है। सीमावर्ती इलाकों से सामने आए कुछ वीडियो और घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस को बढ़ाया है। जानकारी के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में सीमा बाड़बंदी कार्य के दौरान स्थानीय स्तर पर विरोध और तनाव की स्थिति देखने को मिली। ऐसे मामलों में सीमा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने संयम बरतते हुए स्थापित प्रक्रियाओं और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने पर जोर दिया। दोनों देशों के सुरक्षा तंत्र के बीच फ्लैग मीटिंग और आधिकारिक संवाद लंबे समय से ऐसे विवादों को नियंत्रित करने का प्रमुख माध्यम रहे हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है, जो भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में शामिल है। इस विशाल सीमा क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखना आसान कार्य नहीं माना जाता। यहां घुसपैठ, तस्करी, अवैध गतिविधियों और सीमावर्ती अपराधों को रोकने की जिम्मेदारी सुरक्षा बलों पर होती है। भारतीय सीमा सुरक्षा बल की स्थापना वर्ष 1965 में की गई थी और इसका उद्देश्य शांति काल में सीमाओं की सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर नियंत्रण रखना है। दूसरी ओर, बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड का इतिहास काफी पुराना माना जाता है, जिसने समय के साथ कई संरचनात्मक बदलाव भी देखे हैं। दोनों बल अपने-अपने देशों की सीमा सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनका मुख्य कार्य सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून व्यवस्था तथा सुरक्षा बनाए रखना है। हालांकि समय-समय पर स्थानीय परिस्थितियों, सीमांकन, बाड़बंदी और अन्य मुद्दों को लेकर मतभेद भी सामने आते रहे हैं। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ताएं और समन्वय प्रक्रिया जारी रहती है, ताकि किसी भी स्थिति को बड़े तनाव में बदलने से रोका जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा सुरक्षा केवल सैन्य या सुरक्षा चुनौती नहीं बल्कि सामाजिक और कूटनीतिक संतुलन का विषय भी होती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की गतिविधियां, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के बीच समन्वय काफी अहम भूमिका निभाता है। ऐसे मामलों में अफवाहों और अपुष्ट जानकारियों से बचना भी आवश्यक माना जाता है। हाल के घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट किया है कि सीमा सुरक्षा के आधुनिक ढांचे में तकनीक, निगरानी प्रणाली और बेहतर समन्वय की भूमिका लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में उन्नत निगरानी प्रणाली, स्मार्ट तकनीक और बेहतर सीमा प्रबंधन व्यवस्था के जरिए सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में प्रयास तेज हो सकते हैं।

रीठी में हंगामा: महिलाओं सहित ग्रामीणों का आरोप-नशे का अवैध कारोबार और पुलिस पर हफ्ता वसूली

कटनी । कटनी जिले के रीठी थाना क्षेत्र अंतर्गत इमलाज और बांधा गांवों में अवैध शराब और गांजे की बिक्री के खिलाफ मंगलवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने लिखित शिकायत सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में अवैध नशे का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है, जिससे युवाओं और नाबालिगों पर बुरा असर पड़ रहा है। गांव का माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है और महिलाओं-बेटियों के लिए घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों ने कई नामों पर लगाए आरोपप्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सुरेश चौधरी ने आरोप लगाया कि फूलबाई यादव, घीसल काछी और लता चौधरी सहित कुछ लोग खुलेआम अवैध शराब और गांजे का कारोबार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से तस्करों के हौसले बुलंद हैं। पुलिस पर भी गंभीर आरोप, जांच की मांगग्रामीणों ने रीठी थाना पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस गश्ती दल गांव में आता है, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय कथित रूप से अवैध कारोबारियों से साठगांठ करता है। यहां तक कि कुछ पुलिसकर्मियों पर हफ्ता वसूली और नशा करने तक के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि ग्रामीणों ने इन आरोपों को लेकर कोई ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किए हैं, लेकिन उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रशासन का जवाब: जांच और कार्रवाई के निर्देशएएसपी डॉ. डेहरिया ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत प्राप्त हुई है और तत्काल पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया है। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर अवैध गतिविधियों की बात कही गई है, वहां पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। पुलिस पर लगाए गए आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि यदि शिकायतकर्ता साक्ष्य उपलब्ध कराते हैं तो विभागीय जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

पारिवारिक विवाद पहुंचा पुलिस के पास: बेटों और बहुओं की शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे माता-पिता

  झाबुआ । झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील अंतर्गत ग्राम हिरानिनामापाड़ा से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग दंपति ने अपने ही बेटों और बहुओं पर लगातार मारपीट, प्रताड़ना और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित रतनीबाई और उनके पति नाकु डांगी मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। जमीन बांटने के बाद भी नहीं थमी प्रताड़नादंपति ने बताया कि उन्होंने अपनी पूरी जमीन-जायदाद पहले ही अपने तीनों बेटों धनसिंग, डूंगरसिंग और एक अन्य पुत्र के बीच बांट दी थी। इसके बावजूद अब उनके पास केवल एक बीघा जमीन बची है, जिससे वे किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी बेटों और बहुओं द्वारा उनके साथ लगातार दुर्व्यवहार किया जा रहा है। शराब के नशे में मारपीट और मकान तोड़ने का आरोपपीड़ित दंपति के अनुसार, बीते रविवार और 23 मई को बेटों और उनकी पत्नियों ने शराब के नशे में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। नाकु डांगी ने आरोप लगाया कि उन्हें पत्थर मारकर घायल किया गया, जिससे उनके पैर में चोट आई है। वहीं, रतनीबाई ने बताया कि आरोपियों ने उनका मकान तोड़ दिया, जिसके चलते उन्हें भीषण गर्मी में खुले बरामदे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। ‘पुलिस भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती’ कहकर धमकी का आरोपदंपति ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने विरोध किया तो बेटों ने कहा कि अब जमीन और मकान उनके हैं और पुलिस भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने थाने में शिकायत करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और उनका पीछा भी किया। एसपी से सख्त कार्रवाई की मांगलगातार प्रताड़ना से परेशान बुजुर्ग दंपति ने पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र पाटीदार से निवेदन किया है कि उनके बेटों और बहुओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे अपना शेष जीवन भयमुक्त होकर जी सकें।

अमेरिका में फिर दहला भारतीय समुदाय, वर्जीनिया में भारतीय महिला की हत्या से बढ़ी सुरक्षा चिंताएं

नई दिल्ली । अमेरिका के वर्जीनिया में भारतीय मूल की एक महिला की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना ने प्रवासी भारतीय समुदाय को झकझोर दिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार महिला गुजरात के मेहसाणा जिले की रहने वाली थीं और लंबे समय से अमेरिका में रह रही थीं। घटना के बाद स्थानीय भारतीय समुदाय में गहरा दुख और चिंता का माहौल देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय में भारतीय मूल के लोगों से जुड़ी हिंसक घटनाओं की बढ़ती संख्या ने विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका में भारतीय समुदाय लगातार अपनी सामाजिक और आर्थिक उपस्थिति को मजबूत कर रहा है। व्यापार, तकनीक, शिक्षा और चिकित्सा जैसे कई क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोगों की भूमिका लगातार बढ़ी है। लेकिन हाल की कुछ घटनाओं ने सुरक्षा को लेकर चिंता भी पैदा कर दी है। विशेष रूप से गुजराती समुदाय के बीच इस घटना को लेकर भावनात्मक माहौल बना हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मामले की जांच एजेंसियों द्वारा विभिन्न पहलुओं से की जा रही है। घटना से जुड़े कई तथ्य जुटाए जा रहे हैं और आसपास के इलाकों की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना के पीछे क्या कारण रहे और क्या इसमें किसी प्रकार की पूर्व योजना शामिल थी। जांच प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है। पिछले एक वर्ष के दौरान अमेरिका में भारतीय मूल के कुछ नागरिकों से जुड़ी हिंसक घटनाओं की खबरों ने समुदाय के भीतर असुरक्षा की भावना को बढ़ाया है। कई सामाजिक संगठनों और समुदाय प्रतिनिधियों ने ऐसी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई है। प्रवासी भारतीय समुदाय के लोगों का कहना है कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है और ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण हो जाता है। कई समुदाय संगठन समय-समय पर स्थानीय प्रशासन के साथ संवाद स्थापित कर सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा करते रहे हैं। इस घटना के बाद भी समुदाय के स्तर पर बैठकें और आपसी संवाद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं होती, बल्कि सामाजिक समावेश और सामुदायिक जागरूकता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसी घटनाएं केवल एक परिवार को नहीं, बल्कि पूरे समुदाय को भावनात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि इस मामले को लेकर भारतीय समुदाय के बीच गहरी संवेदनाएं देखी जा रही हैं। फिलहाल सभी की नजर जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर बनी हुई है। उम्मीद की जा रही है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है।

26 मई: जॉर्जिया का Independence Day – इतिहास, जश्न और महत्व

26 मई को जॉर्जिया (देश) अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मनाता है, जो 1918 में रूसी साम्राज्य से आजादी की घोषणा की याद में होता है। यह दिन देश की पहचान, लोकतंत्र और सांस्कृतिक विरासत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय पर्व माना जाता है।26 मई 1918 को जॉर्जिया की नेशनल काउंसिल ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ जॉर्जिया की स्थापना की घोषणा की थी। यह घटना रूसी साम्राज्य के पतन और 1917 की रूसी क्रांति के बाद हुई राजनीतिक उथल-पुथल का नतीजा थी।उस समय जॉर्जिया लंबे समय से बाहरी शासन के प्रभाव में था, और यह घोषणा देश के लिए एक नए लोकतांत्रिक युग की शुरुआत थी। स्वतंत्रता कैसे मिली?प्रथम विश्व युद्ध के बाद रूस कमजोर हो गयाजॉर्जियाई राष्ट्रीय आंदोलन मजबूत हुआ26 मई 1918 को स्वतंत्र राज्य की घोषणा हुईराजधानी तब भी त्बिलिसी (Tbilisi) थी हालांकि यह स्वतंत्रता लंबे समय तक टिक नहीं पाई और 1921 में सोवियत संघ ने जॉर्जिया पर कब्जा कर लिया, लेकिन 1991 में देश ने फिर से स्वतंत्रता हासिल की। जॉर्जिया में कैसे मनाया जाता है यह दिन?यह देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उत्सव होता है, जिसे पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। प्रमुख आयोजन🇬🇪 राष्ट्रीय ध्वज फहराना सैन्य परेड राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के भाषण आतिशबाजी (Fireworks) संगीत कार्यक्रम और सांस्कृतिक शो प्रदर्शनी और लोक कार्यक्रमराजधानी त्बिलिसी के Rustaveli Avenue और Freedom Square पर सबसे बड़े कार्यक्रम होते हैं। आधुनिक जॉर्जिया में महत्वआज यह दिन सिर्फ ऐतिहासिक नहीं बल्कि:राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हैलोकतंत्र और स्वतंत्रता का संदेश देता हैयूरोप से जुड़ाव और पहचान का हिस्सा हैयुवाओं के लिए गर्व का अवसर है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वजॉर्जिया का यह दिन वैश्विक मंच पर भी मनाया जाता हैविदेशों में रहने वाले जॉर्जियाई समुदाय भी इसे उत्सव की तरह मनाते हैंकई देशों के प्रतिनिधि भी आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं26 मई को जॉर्जिया का नेशनल डे भी कहा जाता है1918 की यह घटना देश के आधुनिक लोकतंत्र की नींव मानी जाती हैयह यूरोप के सबसे पुराने लोकतांत्रिक आंदोलनों में से एक से जुड़ा है 26 मई का दिन जॉर्जिया के लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, संघर्ष और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है। यह दिन याद दिलाता है कि आज का आधुनिक जॉर्जिया कई ऐतिहासिक संघर्षों और बदलावों के बाद बना है। -जॉर्जिया (देश) राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस

पानी के लिए हाहाकार: अवल्दा गांव में संकट, पाइपलाइन खराब और ट्यूबवेल बंद होने से लोग परेशान

बड़वानी। बड़वानी जिले की ग्राम पंचायत अवल्दा के पुनर्वास स्थल पर पिछले एक सप्ताह से गंभीर पेयजल संकट बना हुआ है। नर्मदा जल आपूर्ति की पाइपलाइन जगह-जगह से टूट जाने के कारण बसाहट में पानी की सप्लाई पूरी तरह बाधित हो गई है। स्थिति यह है कि करीब 150 परिवारों को रोजाना दूर-दराज से कुएं, खेतों और नदी से पानी ढोना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर मंगलवार को सरपंच धर्मेंद्र मंडलोई के नेतृत्व में ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में पहुंचे और स्थायी समाधान की मांग की। चार ट्यूबवेल में से एक भी नहीं दे रहा पानीसरपंच ने बताया कि पुनर्वास स्थल पर खोदे गए चार ट्यूबवेलों में से एक भी सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। दो ट्यूबवेल का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, तीसरे में से मोटर पंप के पाइप निकाल लिए गए हैं, जबकि चौथे ट्यूबवेल में बार-बार मोटर जल जाने के कारण पानी की आपूर्ति ठप है। इस वजह से ग्रामीणों को मजबूरी में रोजाना कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। पुनर्वास स्थल हैंडओवर नहीं, अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर पंचायतसरपंच धर्मेंद्र मंडलोई ने यह भी बताया कि पुनर्वास स्थल अभी तक ग्राम पंचायत को आधिकारिक रूप से हैंडओवर नहीं किया गया है। इसके बावजूद पंचायत टैंकरों के माध्यम से किसी तरह पानी उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नर्मदा पाइपलाइन की मरम्मत और स्थायी जल आपूर्ति व्यवस्था के बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है। पशुओं के लिए भी पानी का संकट, होद निर्माण की मांगगांव में केवल इंसानों ही नहीं, बल्कि पशुओं के लिए भी गंभीर जल संकट पैदा हो गया है। बसाहट स्थल पर मवेशियों के लिए एक भी होद (पानी पीने का स्थान) नहीं बनाया गया है, जिससे गर्मी के मौसम में पशुधन भी प्रभावित हो रहा है। सरपंच ने एनवीडीए विभाग से पशुओं के लिए होद निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनीग्रामीण गौरी बाई सहित अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें रोजाना खेतों और कुओं से पानी लाना पड़ता है। शिकायत करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पेयजल व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। प्रशासन ने दिए कार्रवाई के निर्देशमामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने संबंधित विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, ताकि पाइपलाइन की मरम्मत और जल आपूर्ति बहाल की जा सके।

सेंधवा में बड़ा आरोप-प्रत्यारोप: विधायक ने लगाया वसूली का आरोप, जिला पंचायत CEO ने बताया बेबुनियाद

बड़वानी । बड़वानी जिले के सेंधवा क्षेत्र में विधायक मोंटू सोलंकी और जिला पंचायत सीईओ काजल जावला के बीच विवाद सामने आया है। ग्राम पाड़छा के दौरे के दौरान ग्रामीणों के बीच खड़े होकर विधायक ने सीईओ पर पंचायत सचिवों से 10-10 लाख रुपये की अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद मामला सुर्खियों में आ गया। विधायक ने आरोप लगाया कि पंचायत सचिवों को निलंबन की धमकी देकर उनसे अवैध वसूली की जा रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी विधानसभा क्षेत्र में प्रशासनिक दौरे और बैठकों की जानकारी उन्हें नहीं दी जाती, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। पानी, सड़क और विकास कार्यों पर भी उठाए सवालग्रामीणों की समस्याएं सुनते हुए विधायक ने क्षेत्र में पीने के पानी, खराब सड़कों और पुलियों की स्थिति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी विकास कार्यों की बजाय वसूली और मनमानी में लगे हुए हैं, जिससे जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सीईओ का पलटवार: आरोप पूरी तरह निराधारजिला पंचायत सीईओ काजल जावला ने विधायक के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि ग्राम पाड़छा में आयोजित गंगा दशहरा के शासकीय कार्यक्रम में विधायक को विधिवत आमंत्रित किया गया था, लेकिन सभी कार्यक्रमों में हर जनप्रतिनिधि की मौजूदगी संभव नहीं होती। सीईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि जिला पंचायत का प्रभार उनके पास है, इसलिए वे नियमित रूप से समीक्षा बैठकें और पंचायतों का निरीक्षण करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि बैठकों के लिए किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। निलंबित सचिव का मामला भी जुड़ासीईओ ने बताया कि संबंधित पंचायत में एक सचिव को जल गंगा अभियान के तहत कार्य में अनियमितता के कारण निलंबित किया गया है। आरोप है कि बिना कार्य पूर्ण किए भुगतान प्रमाणित किया गया था, जिसके चलते सरपंच और जीआरएस को भी नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इसी कार्रवाई के कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ है।

तुर्की-पाकिस्तान समीकरण के बीच भारत की बढ़ती रक्षा ताकत, साइप्रस ने दिखाई रणनीतिक हथियारों में गहरी रुचि

नई दिल्ली । वैश्विक भू-राजनीति के बदलते परिदृश्य में रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारियां लगातार नई दिशा ले रही हैं। ऐसे समय में भारत की रक्षा क्षमताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि भारतीय रक्षा तकनीक अब केवल घरेलू सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समीकरणों में भी उसकी भूमिका तेजी से मजबूत हो रही है। इसी कड़ी में साइप्रस की ओर से भारतीय रक्षा प्रणालियों में बढ़ती दिलचस्पी ने नई चर्चाओं को जन्म दिया है। हाल ही में साइप्रस के राष्ट्रपति Nikos Christodoulides की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस दौरान कई उच्चस्तरीय मुलाकातें हुईं, जिनमें द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक सहयोग पर विचार-विमर्श किया गया। माना जा रहा है कि इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में संभावित साझेदारी के लिए नई संभावनाएं खोल दी हैं। सूत्रों के अनुसार साइप्रस विशेष रूप से भारत की उन रक्षा प्रणालियों में रुचि दिखा रहा है, जिन्होंने हाल के सैन्य अभियानों के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया था। चर्चा है कि भारत की उन्नत मिसाइल तकनीक और स्वदेशी ड्रोन प्रणालियां साइप्रस के रणनीतिक हितों के केंद्र में हैं। हालांकि अभी तक किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर संभावनाएं लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही हैं। भारत की रक्षा क्षमता में सबसे अधिक चर्चा जिस प्रणाली को लेकर हो रही है, वह है BrahMos मिसाइल। अपनी सटीकता और तेज मारक क्षमता के कारण यह प्रणाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इसके अलावा स्वदेशी ड्रोन और आधुनिक रक्षा तकनीकों ने भी कई देशों का ध्यान आकर्षित किया है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय प्रणालियां अब विश्व बाजार में एक भरोसेमंद और प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रही हैं। क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए इस संभावित सहयोग को रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम एशिया और यूरोप क्षेत्र में कई देशों के बीच बदलते रक्षा संबंधों के कारण ऐसे सहयोगों को व्यापक भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि रक्षा सहयोग आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल सैन्य स्तर पर नहीं बल्कि क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन पर भी पड़ सकता है। भारत पिछले कुछ वर्षों में रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दे रहा है। स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता पर आधारित रक्षा मॉडल ने कई देशों का ध्यान आकर्षित किया है। फिलहाल साइप्रस की बढ़ती दिलचस्पी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि भारतीय रक्षा उद्योग अब वैश्विक मंच पर तेजी से अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। आने वाले समय में यह सहयोग किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी।