नेहा धूपिया की अमृतसर यात्रा चर्चा में, स्वर्ण मंदिर दर्शन के साथ लोकल खाने का उठाया लुत्फ

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री नेहा धूपिया इन दिनों अपनी निजी और आध्यात्मिक यात्रा को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में वह पंजाब के अमृतसर पहुंचीं, जहां उन्होंने प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर में श्रद्धा के साथ मत्था टेका। यह यात्रा उनके लिए न केवल आध्यात्मिक अनुभव रही, बल्कि सांस्कृतिक और खानपान के लिहाज से भी बेहद खास साबित हुई। इस दौरान उनकी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वह पूरी श्रद्धा और सादगी के साथ नजर आ रही हैं। अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में नेहा धूपिया ने सिर पर दुपट्टा ओढ़कर पवित्र सरोवर के पास खड़े होकर प्रार्थना की। उनके चेहरे पर दिखाई देने वाली शांति और भाव स्पष्ट रूप से उनकी आध्यात्मिक अनुभूति को दर्शाते हैं। मंदिर परिसर में बिताए गए इन पलों को उन्होंने बेहद निजी और भावनात्मक अनुभव के रूप में महसूस किया। इस दौरान ली गई तस्वीरों में उनकी सादगी और श्रद्धा साफ झलकती है, जिसे उनके प्रशंसकों ने भी काफी सराहा है। स्वर्ण मंदिर दर्शन के बाद नेहा धूपिया ने अमृतसर के स्थानीय स्वाद का भी आनंद लिया। उन्होंने शहर के मशहूर छोले-भटूरे का स्वाद चखा, जिसे वहां की पहचान माना जाता है। एक वीडियो में वह स्थानीय दुकान पर बैठकर पारंपरिक पंजाबी व्यंजन का आनंद लेते हुए दिखाई दीं। उनके चेहरे की मुस्कान और सहजता इस बात का संकेत देती है कि उन्हें यह अनुभव बेहद पसंद आया। इसके अलावा उन्होंने शहर की गलियों में घूमते हुए अन्य स्थानीय व्यंजनों और माहौल को भी करीब से महसूस किया। अपनी इस यात्रा को उन्होंने खास बताते हुए कहा कि हर पल यादगार रहा। तस्वीरों और वीडियो में वह कभी गंभीर भाव में प्रार्थना करती नजर आती हैं, तो कभी हल्के-फुल्के अंदाज में पोज देती दिखाई देती हैं। यह संतुलन उनकी यात्रा को और भी प्राकृतिक और वास्तविक बनाता है, जिससे दर्शकों को भी उनकी यह यात्रा जुड़ी हुई महसूस होती है। यह पहली बार नहीं है जब नेहा धूपिया किसी धार्मिक स्थल पर पहुंची हों। इससे पहले भी वह विभिन्न आध्यात्मिक स्थानों पर दर्शन और सेवा कार्यों में भाग ले चुकी हैं। उनकी यह यात्राएं अक्सर उनके निजी जीवन में शांति और संतुलन के पहलू को दर्शाती हैं। नेहा धूपिया ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में मॉडलिंग से की थी और मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों और टेलीविजन प्रोजेक्ट्स में काम कर अपनी अलग पहचान बनाई। अभिनय के साथ-साथ वह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय हैं और विभिन्न शो के माध्यम से दर्शकों से जुड़ी रहती हैं। उनकी यह अमृतसर यात्रा एक बार फिर यह दिखाती है कि व्यस्त फिल्मी जीवन के बावजूद वह अपने लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभवों को भी महत्व देती हैं। स्वर्ण मंदिर में उनका यह दौरा और पंजाबी व्यंजनों के प्रति उनका आकर्षण दोनों ही उनकी इस यात्रा को यादगार बनाते हैं।
बीएसएनएल में जेटीओ भर्ती का बड़ा अवसर, 100 पदों पर आवेदन 4 जून से शुरू, इंजीनियर युवाओं के लिए सुनहरा मौका

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के इंजीनियरिंग युवाओं के लिए भारत संचार निगम लिमिटेड की ओर से एक महत्वपूर्ण रोजगार अवसर सामने आया है, जिसमें जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर के 100 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को एक मजबूत अवसर प्राप्त हुआ है। जारी जानकारी के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 4 जून की सुबह 10 बजे से शुरू होगी और उम्मीदवार 3 जुलाई की सुबह 10 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। इस अवधि के भीतर इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। साथ ही आवेदन में किसी प्रकार की त्रुटि सुधारने के लिए 4 जुलाई से 11 जुलाई तक सुधार विंडो भी उपलब्ध रहेगी, जिससे उम्मीदवार अपनी जानकारी को सही कर सकेंगे। इस भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता के रूप में उन उम्मीदवारों को पात्र माना गया है जिन्होंने दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी, विद्युत या इंस्ट्रूमेंटेशन जैसे विषयों में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की हो। इसके अलावा कंप्यूटर साइंस या इलेक्ट्रॉनिक्स में एमएससी तथा संबंधित क्षेत्रों में एमटेक करने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। यह अवसर विशेष रूप से तकनीकी क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयु सीमा के अनुसार उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक पात्र अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित बहुविकल्पीय परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और चिकित्सा परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया के माध्यम से योग्य और तकनीकी रूप से सक्षम अभ्यर्थियों का चयन सुनिश्चित किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को 16,400 रुपये से 40,500 रुपये तक मासिक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो इस पद को और अधिक आकर्षक बनाता है। परीक्षा के आयोजन को लेकर संभावना जताई जा रही है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा अगस्त महीने में आयोजित की जा सकती है। परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को आगे की चयन प्रक्रिया के लिए बुलाया जाएगा। आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क 2000 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए यह शुल्क 1000 रुपये रखा गया है। इस भर्ती प्रक्रिया को सरकारी क्षेत्र में तकनीकी करियर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। देशभर के इंजीनियरिंग स्नातक इस भर्ती का लाभ उठाकर एक स्थिर और सम्मानजनक करियर की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
GWALIOR FIRING NEWS: रेत डंप करने पर हुआ विवाद, रिटायर्ड BSF जवान ने ससुर दामाद को मारी गोली

HIGHLIGHTS: ग्वालियर में रिटायर्ड BSF जवान ने ससुर-दामाद पर की फायरिंग 15 से 20 राउंड गोलियां चलने से इलाके में फैली दहशत रेत डंपिंग विवाद में एक युवक की मौत, दूसरा गंभीर गुर्जर समाज में आक्रोश, QRF और भारी पुलिस बल तैनात आरोपियों की तलाश में पुलिस की 4 टीमें लगातार दबिश दे रहीं GWALIOR FIRING NEWS: ग्वालियर। महाराजपुरा थाना क्षेत्र के पटरी रोड पर बुधवार सुबह ताबड़तोड़ फायरिंग हुई जिसके चलते पूरा इलाका दहशत में आ गया। बता दें कि एक रिटायर्ड BSF जवान और उसके साथियों ने ससुर-दामाद पर 15 से 20 राउंड गोलियां चला दी। हमले में महेंद्र उर्फ भोला गुर्जर की मौत हो गई, जबकि सत्यभान गुर्जर गंभीर रूप से घायल है और वेंटिलेटर पर है। सरकारी जमीन पर रेत डंप करने पर हुआ विवाद पुलिस के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच सरकारी जमीन पर रेत डंप करने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। बुधवार सुबह इसी बात को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। आरोप है कि बहस और गाली-गलौज के बाद रिटायर्ड फौजी विष्णु दुबे ने अपने साथियों के साथ मिलकर हमला करने की साजिश रची। जब महेंद्र और सत्यभान गुर्जर बाइक से पटरी रोड से गुजर रहे थे तभी आरोपियों ने उनपर हमला कर दिया। 12 घंटे ड्यूटी फिर भी वेतन नहीं, ग्वालियर में 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों का फूटा गुस्सा एक की मौत दूसरा घायल गोली लगते ही ससुर और दामाद दोनों जमीं पर गिर पड़े, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और दोनों को इलाज के लिए जयारोग्य अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि ज्यादा खून बहने के कारण भोला गुर्जर की मौत हो गई, जबकि सत्यभान की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। भोपाल का पानी RO से भी ज्यादा शुद्ध? मेयर मालती राय ने प्लांट में खुद पिया पानी मुख्य आरोपी अभी भी फरार पुलिस ने मुख्य आरोपी विष्णु दुबे और उसके साथियों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार विशेष टीमें बनाई गई हैं, जो ग्वालियर के साथ-साथ भिंड और मुरैना में भी दबिश दे रही हैं। मामले को लेकर पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ब्लैक बॉक्स का वित्त वर्ष 2026 रहा शानदार, रिकॉर्ड ऑर्डर बुक और वैश्विक विस्तार से कंपनी को मिला नया उछाल

नई दिल्ली । एस्सार ग्रुप की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी कंपनी ब्लैक बॉक्स लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन दर्ज किया है, जिससे कंपनी की बाजार स्थिति और वैश्विक उपस्थिति दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। कंपनी ने इस अवधि में न केवल राजस्व और लाभप्रदता में स्थिर वृद्धि दर्ज की, बल्कि अपने ऑर्डर बैकलॉग को भी एक अरब डॉलर से अधिक पहुंचाकर भविष्य की मजबूत विकास संभावनाओं का संकेत दिया है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने अपने प्रमुख वित्तीय मानकों में निरंतर सुधार किया। बेहतर व्यावसायिक मिश्रण, मजबूत ग्राहक संबंधों और रणनीतिक अनुबंधों के चलते कंपनी की ग्रोथ स्थिर बनी रही। डेटा सेंटर, नेटवर्किंग और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे मुख्य क्षेत्रों में बढ़ती मांग ने कंपनी की स्थिति को और मजबूत किया। चौथी तिमाही में भी कंपनी ने स्थिर प्रदर्शन जारी रखा, जिससे पूरे वर्ष का परिणाम सकारात्मक रहा। कंपनी का ऑर्डर बैकलॉग लगभग 792 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। इस वृद्धि ने न केवल राजस्व की स्थिरता को मजबूत किया, बल्कि वित्त वर्ष 2027 के लिए भी मजबूत शुरुआत की नींव रखी है। इसी अवधि में कंपनी को वैश्विक स्तर पर कई बड़े अनुबंध प्राप्त हुए, जिनमें डेटा सेंटर सेवाएं, हवाई अड्डा परियोजनाएं और विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के महत्वपूर्ण डिजिटल समाधान शामिल रहे। घरेलू बाजार में भी कंपनी ने दूरसंचार, बैंकिंग और एंटरप्राइज नेटवर्किंग सेक्टर में महत्वपूर्ण अनुबंध हासिल किए, जिससे इसकी घरेलू उपस्थिति और मजबूत हुई। विभिन्न क्षेत्रों में मिले नए ऑर्डरों ने कंपनी की विकास गति को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही, कंपनी ने ब्राजील स्थित एक टेक्नोलॉजी फर्म का अधिग्रहण कर लैटिन अमेरिका में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी पकड़ और मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को भी मजबूत किया और पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस कदम ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थिरता प्रदान की और निवेशकों का विश्वास और मजबूत हुआ। कंपनी के नेतृत्व ने इस प्रदर्शन को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग से जोड़ते हुए इसे दीर्घकालिक विकास का आधार बताया है। कंपनी प्रबंधन का मानना है कि वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क और एंटरप्राइज डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की मांग आने वाले वर्षों में और तेज होगी। इस बहु-वर्षीय निवेश चक्र से कंपनी को बड़े अवसर मिलने की संभावना है, जिससे उसका व्यवसाय और विस्तार करेगा। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026 ब्लैक बॉक्स लिमिटेड के लिए मजबूत विकास, बेहतर निष्पादन और वैश्विक विस्तार का वर्ष साबित हुआ है। ऑर्डर बुक में रिकॉर्ड वृद्धि और रणनीतिक अधिग्रहणों ने कंपनी को आने वाले वर्षों के लिए एक मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया है।
12 घंटे ड्यूटी फिर भी वेतन नहीं, ग्वालियर में 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों का फूटा गुस्सा

ग्वालियर । ग्वालियर में लोगों की जान बचाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा खुद गंभीर बदहाली का शिकार होती नजर आ रही है। मेंटीनेंस की कमी, खराब वाहनों, डीजल संकट और कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने जैसे आरोपों ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े चालक और EMT कर्मचारी अपनी समस्याएं लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा रखी। कर्मचारियों ने सेवा संचालन करने वाली JASS कंपनी पर लापरवाही और व्यवस्थाओं की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए। कर्मचारियों के मुताबिक जिले में संचालित सात से आठ एम्बुलेंस लंबे समय से मेंटीनेंस के अभाव में बंद पड़ी हैं। कई वाहनों के एयर कंडीशनर खराब हैं, जिससे भीषण गर्मी में मरीजों और कर्मचारियों दोनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कई एम्बुलेंस की लाइटें खराब हैं और कुछ वाहन डीजल की कमी के कारण रास्ते में ही बंद हो जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो रहा है, जिससे उनकी जान पर भी खतरा बन सकता है। एम्बुलेंस कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार 12-12 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा। वेतन में देरी और खराब कार्य परिस्थितियों से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो वे काम बंद करने को मजबूर हो सकते हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद कंपनी की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस पूरे मामले ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति को उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित कंपनी 108 एम्बुलेंस सेवा को पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं, क्योंकि इसका सीधा असर मरीजों की जिंदगी पर पड़ सकता है।
प्रखर राष्ट्रवाद में ओझल सावरकर का भाषाई योगदान

-प्रो. एस.के.सिंहदुनिया में ऐसे बहुत से उदाहरण मिल जायेंगे जहां पर किसी व्यक्ति का जब एक विशेष पक्ष लोकप्रियता के शिखर पर होता है तो उसकी छाया में व्यक्ति की दूसरी महत्वपूर्ण विशेषतायें ओझल हो जाती हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर की पहचान वैश्विक स्तर पर एक महान दार्शनिक एवं शिक्षाविद् के रूप में है, किंतु इन उपलब्धियों की छाया में उनकी एक दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता पेंटिंग (चित्रकला) की प्रतिभा दबकर रह गई एवं उसकी पर्याप्त चर्चा नहीं हो पायी। वस्तुत: इसी तरह प्रखर क्रांतिकारी रणनीतिकार एवं कालापानी की कठोर यातनायें सहने वाले स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) की क्रांतिकारी छवि एवं उनके व्यापक संघर्षों की छाया में उनका महत्वपूर्ण ‘भाषाशुद्धि आन्दोलन’ जन-मानस में उतनी ख्याति नहीं पा सका, जिसका कि वह आन्दोलन हकदार था। उन्होंने देवनागरी लिपि को आधुनिक मुद्रण एवं टंकण के अनुरूप बनाने हेतु अनेक व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किये। इतना ही नहीं, इसके अलावा इतिहास लेखन के माध्यम से औपनिवेशिक दृष्टिकोण को चुनौती देते हुए भारतीय इतिहास की तार्किक एवं गौरवपूर्ण पुनर्व्याख्या प्रस्तुत की। सावरकर के प्रखर राष्ट्रवादी व्यक्तित्व के प्रभाव में उनका गंभीर अकादमिक एवं बौद्विक योगदान प्रायः ओझल ही रहा। एतिहासिक दृष्टि एवं तथ्यों के आधार पर देखें तो मुगलकाल में फारसी-अरबी का प्रभुत्व तथा औपनिवेशक काल में अंग्रेजी के वर्चस्व के कारण भारत को भाषाई स्तर पर भारी चुनौतियों और उथल-पुथल का सामना करना पड़ा है। 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज की ‘राजभाषा नीति’ और 20वीं शताब्दी में विनायक दामोदर सावरकर द्वारा चलाए गए ‘भाषाशुद्वि आंदोलन’ ऐसे प्रमुख उदाहरण हैं, जिनके माध्यम से भाषाई अतिक्रमण की चुनौतियों का प्रतिकार किया गया। सावरकर की 1926 में प्रकाशित पुस्तक ‘भाषाशुद्वि’ उनके आंदोलन की वैचारिक आधारशिला बनी। यह केवल व्याकरण संबंधी पुस्तक नहीं बल्कि सावरकर जी के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है। अत्यधिक विदेशी शब्दों के प्रयोग को वे बौद्विक गुलामी का प्रतीक मानते थे। इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने मराठी में घर कर गये उर्दू, अरबी एवं फारसी के शब्दों के स्थान पर संस्कृतनिष्ठ और प्राकृतिक मूल के शब्दों के प्रयोग का आव्हान किया। वस्तुत: उनका मानना था कि भारतीय भाषाओं को अधिक सामथ्र्यवान तथा मौलिक बनाने के लिये उन्हें अपनी मूल जड़ संस्कृत से जुड़ना होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाषाशुद्वि का लक्ष्य किसी का अंधा विरोध नहीं बल्कि शब्दों का विवेकपूर्ण चयन करना है। उन्होंने कहा कि अन्य भाषाओं के श्रेष्ठ शब्द अपनाने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए, लेकिन जहां देशी शब्द उपलब्ध हों वहां विदेशी शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। सावरकर जी ने न केवल पूर्णतः नवीन शब्दों का निर्माण किया बल्कि उन्होंने भाषा में पहले से मौजूद शब्दों को पुनर्जीवित तथा पुनः परिभाषित भी किया। उन्होंने मेयर के लिये ‘महापौर’, टेलीग्राम के लिये ‘तार’, लाउडस्पीकर के लिये ‘ध्वनिवर्धक’, कॉलेज के लिये ‘महाविद्यालय’, कॉलम के लिये ‘स्तम्भ’, स्पेशल इश्यू के लिए ‘विशेषांक’ और प्रोफेसर के लिये ‘प्राध्यापक’ जैसे शब्दों का सृजन किया। इसके अतिरिक्त भाषाशुद्वि के लिहाज से सावरकर जी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान उन शब्दों को पुनःस्थापित करना माना जाना चाहिये जो व्यवहार से लुप्त हो चुके थे। उन्होंने बहुत से संस्कृत और मराठी शब्दों को आधुनिक संदर्भ में पुनःप्रचारित एवं प्रतिस्थापित किया। उदाहरण के लिये उन्होंने स्कूल के लिये ‘शाला’, गवर्नेन्स के लिये ‘शासन’, हेडमास्टर के लिये ‘मुख्याध्यापक’ जैसे पहले से मौजूद शब्दों को आधुनिक संस्थागत प्रयोग में लाने का आव्हान किया। उनका मानना था कि भाषाशुद्वि का अर्थ केवल नये शब्दों का निर्माण करना ही नहीं, बल्कि पहले से मौजूद शब्दों को पुनःस्थापित करना और भाषा की खोई हुई जीवंतता को पुनः प्राप्त करना भी है। विश्रामगृह, प्रशिक्षण, संसद, न्यायालय, जनपद, आरक्षण, विशेषाधिकार, अभियंता, अनुमोदन, प्रतिवेदन, परिषद, राजदूत, दिनांक, दिग्दर्शक जैसे शब्दों को पुनः प्रतिस्थापित करने का श्रेय सावरकर जी को ही जाता है। उन्होंने सैद्धांतिक पक्ष से अधिक व्यवहारिक क्रियान्वयन पर बल दिया तथा अपने भाषणों, ग्रन्थों में उर्दू एवं अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग बंद कर दिया। अत: आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 मातृभाषा में शिक्षण तथा भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशेष बल दे रही है, जिससे भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित किया जा सके। इन परिस्थितियों में सावरकर जी का ‘भाषाशुद्वि आंदोलन’ और भी महत्वपूर्ण एवं प्रासंगिक हो जाता है। वर्तमान समय में इसे नये संदर्भ में देखा जाना चाहिये। आज जब भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है तब यह आवश्यक हो जाता है कि हम ज्ञान का सृजन अपनी भाषाओं में करें। हमें केवल अनुवाद पर निर्भर नहीं रहना चाहिये। इसके लिये शिक्षण संस्थानो में ‘भाषा नियोजन’ को एक स्वतंत्र अकादमिक अनुशासन के रूप में स्थापित किया जाना आवश्यक है। सावरकर जी के अनुसार भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती बल्कि वैचारिक स्वायत्तता, सांस्कृतिक स्वावलंबन, स्वतंत्रता तथा स्वाभिमान का प्रतीक भी होती है। स्वदेशी शब्दावली के पुनरूत्थान में सावरकर जी का अद्वितीय योगदान है। उनका दर्शन एवं साहित्यक कृतियां आज भी भारतीय बौद्विक और अकादमिक जगत के लिये एक महत्वपूर्ण आधार हैं। उनकी वैज्ञानिक दृष्टि और भाषाई योगदान उन्हें एक महान विचारक और शिक्षाविद के रूप में स्थापित करता है। उनके द्वारा गढ़े गये प्रशासनिक, तकनीकी एवं संसदीय शब्द आज भी हमारी लोकतांत्रिक और अकादमिक शब्दावली में जीवंत हैं। (लेखक जीवाजी विश्वविद्यालय में वाणिज्य एवं व्यवसाय अध्ययनशाला विभागाध्यक्ष हैं)
सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली कमजोरी, लेकिन मिडकैप-स्मॉलकैप की रफ्तार ने निवेशकों को दिया सहारा

नई दिल्ली । बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला और बाजार हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही मामूली कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुए, हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जिससे बाजार की व्यापक धारणा संतुलित बनी रही। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 141 अंक से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी बेहद सीमित दायरे में रहते हुए हल्की कमजोरी के साथ समाप्त हुआ। बाजार में लार्जकैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट ने निवेशकों को कुछ राहत दी। मिडकैप इंडेक्स में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई, वहीं स्मॉलकैप इंडेक्स भी हल्की मजबूती के साथ बंद हुआ। सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो कई क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान देखा गया। मीडिया, एनर्जी, मेटल, ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में तेजी रही, जिससे बाजार को सहारा मिला। इन सेक्टरों में निवेशकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, खासकर मेटल और ऑटो सेक्टर में मजबूत खरीदारी का रुझान बना रहा। इसके विपरीत बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में दबाव देखा गया। निजी बैंक और कुछ प्रमुख वित्तीय कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण लार्जकैप इंडेक्स पर असर पड़ा। आईटी और कंज्यूमर सेक्टर में भी मिला-जुला रुख रहा, जिससे पूरे बाजार में संतुलित लेकिन कमजोर समापन देखने को मिला। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में कुछ कंपनियों ने मजबूती दिखाई, जिनमें ऊर्जा, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयर शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर बैंकिंग और आईटी सेक्टर के प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। इससे सूचकांक सीमित दायरे में ही कारोबार करता रहा और दिन के अंत में हल्की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी ने दिन की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के साथ की थी और शुरुआती कारोबार में यह सीमित दायरे में ऊपर-नीचे होता रहा। दिन के मध्य सत्र में यह स्तरों पर पहुंचा लेकिन ऊपरी स्तरों पर दबाव बनने के कारण मुनाफावसूली देखने को मिली। इसके बाद इंडेक्स में गिरावट आई और यह अंततः हल्की कमजोरी के साथ बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी के लिए निकट भविष्य में एक अहम प्रतिरोध स्तर बना हुआ है, जबकि नीचे की ओर भी एक मजबूत सपोर्ट जोन मौजूद है। यदि बाजार में खरीदारी का रुझान बढ़ता है तो आगे और तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि बिकवाली बढ़ने पर इंडेक्स सीमित दायरे में रह सकता है। कुल मिलाकर, बुधवार का सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए मिला-जुला रहा, जहां बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप ने बाजार को संभाले रखा। निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्रों पर बनी हुई है, जहां वैश्विक संकेत और घरेलू आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे।
भोपाल का पानी RO से भी ज्यादा शुद्ध? मेयर मालती राय ने प्लांट में खुद पिया पानी

भोपाल । भोपाल में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत और गंदे पानी की शिकायतों को लेकर चल रहे विवाद के बीच नगर निगम ने लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की है। इसी कड़ी में मंगलवार को भोपाल की मेयर मालती राय ने अरेरा हिल्स स्थित वॉटर फिल्ट्रेशन प्लांट का औचक निरीक्षण किया और वहां पहुंचकर खुद ट्रीटेड पानी का गिलास पीकर उसकी शुद्धता का दावा किया। मेयर मालती राय ने कहा कि अपर लेक से सप्लाई होने वाला पानी पूरी तरह सुरक्षित है और यह RO से भी बेहतर गुणवत्ता का है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और निगम के जल सप्लाई सिस्टम पर भरोसा रखने की अपील की। निरीक्षण के दौरान भाजपा पार्षद रवींद्र यति और नगर निगम के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मेयर को जानकारी दी कि एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब में पानी के सैंपल की जांच की गई है, जिसमें पीएच लेवल, टीडीएस, टर्बिडिटी और बैक्टीरियल सेफ्टी सभी मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। नगर निगम का दावा है कि अब तक 20 हजार से अधिक पानी के सैंपल की जांच की जा चुकी है और सभी रिपोर्ट संतोषजनक रही हैं। हालांकि दूसरी ओर शहर में लो-प्रेशर और गंदे पानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। अधिकारियों ने माना कि बार-बार बिजली कटौती होने से पंपिंग सिस्टम प्रभावित होता है, जिसके कारण कई इलाकों में पानी का दबाव कम हो जाता है। सिस्टम को दोबारा शुरू करने में समय लगने से सप्लाई प्रभावित हो रही है। नगर निगम के आंकड़े भी शहर की जल व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर रहे हैं। निगम के अनुसार 1 जनवरी से अब तक 5,610 पाइपलाइन लीकेज सुधारे गए हैं। इसका मतलब है कि पिछले करीब पांच महीनों में रोज औसतन 38 पाइपलाइन लीकेज सामने आए हैं। इसके अलावा नगर निगम ने 15 हजार से अधिक सीवेज चैंबरों की सफाई भी कराई है ताकि जलभराव और ओवरफ्लो जैसी समस्याओं को रोका जा सके। बावजूद इसके विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट का पानी भले शुद्ध हो, लेकिन पुरानी और बार-बार टूटने वाली पाइपलाइनें घरों तक पहुंचते-पहुंचते पानी को दूषित कर सकती हैं। मेयर के इस निरीक्षण और दावे के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नगर निगम पानी की गुणवत्ता के साथ वितरण व्यवस्था को सुधारने के लिए कितनी तेजी से काम करता है।
मुरैना में हैरान करने वाला कांड, स्कूटर पर पिस्टल लोड करते समय चली गोली, दोनों घायल

मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दो युवकों ने खुद पर चली गोलियों को गैंगवार और हमले का रूप देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस जांच और CCTV फुटेज ने पूरी सच्चाई उजागर कर दी। घटना मंगलवार को गर्ल्स स्कूल रोड इलाके में हुई, जब अचानक गोलियों की आवाज सुनकर इलाके में हड़कंप मच गया। स्कूटर पर सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए और दोनों को तीन-तीन गोलियां लगीं। शुरुआत में मामला किसी आपसी रंजिश या गैंगवार जैसा दिखाई दिया, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर कहानी पूरी तरह बदल गई। पुलिस के अनुसार घायल युवकों की पहचान गोपालपुरा निवासी राहुल सिकरवार और पुराना चुंगी नाका निवासी निखिल तिवारी के रूप में हुई है। दोनों एक स्कूटर पर सवार होकर जा रहे थे। इसी दौरान पीछे बैठे युवक ने अपनी अवैध पिस्टल निकाली और चलते वाहन पर ही उसे लोड करने लगा। जांच में सामने आया कि जैसे ही स्कूटर एक स्पीड ब्रेकर से गुजरा, जोरदार झटका लगने से युवक का संतुलन बिगड़ गया और पिस्टल से लगातार कई राउंड फायर हो गए। अचानक हुई फायरिंग में दोनों युवक खुद ही गोलियों की चपेट में आ गए। पुलिस ने जब सड़क किनारे लगे CCTV कैमरों की फुटेज देखी तो पूरी घटना साफ हो गई। फुटेज में स्कूटर के झटके के बाद गोली चलने और दोनों युवकों के घायल होने की घटना कैद हो गई। इसके बाद पुलिस को समझ आ गया कि यह किसी गैंगवार का मामला नहीं बल्कि लापरवाही और अवैध हथियार के इस्तेमाल का मामला है। इस घटना ने एक बार फिर चंबल क्षेत्र में अवैध हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल और युवाओं में हथियारों के क्रेज को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस्तेमाल की गई पिस्टल प्रतिबंधित श्रेणी की और बेहद खतरनाक मानी जा रही है। फिलहाल दोनों घायलों का इलाज जारी है। उनकी हालत स्थिर होने के बाद पुलिस आधिकारिक बयान दर्ज करेगी। इसके बाद आर्म्स एक्ट सहित अन्य धाराओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
समान नागरिक संहिता की ओर बड़ा कदम, असम में शादी, तलाक और लिव-इन नियमों में सख्त प्रावधान मंजूर

नई दिल्ली । असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी बिल के पास होने के साथ ही राज्य में पारिवारिक और विवाह संबंधी कानूनों में बड़े बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक नियमों को एक समान कानूनी ढांचे में लाना बताया गया है, हालांकि अनुसूचित जनजाति समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इस कदम को राज्य में सामाजिक और कानूनी व्यवस्था में एक बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर अलग-अलग वर्गों की तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। नए प्रावधानों के अनुसार बहुविवाह और द्विविवाह को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक विवाह करता है, तो उसे सात साल तक की कैद का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही विवाह को कानूनी रूप से एकविवाही व्यवस्था के तहत अनिवार्य किया गया है, जिससे एक से अधिक विवाह पर रोक सुनिश्चित की जा सके। शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए गए हैं, जिसके तहत पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष की सीमा निर्धारित की गई है। कानून के अनुसार सभी विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। यदि कोई दंपति 60 दिनों के भीतर अपने विवाह या तलाक का पंजीकरण नहीं कराता है, तो उस पर जुर्माने का प्रावधान होगा। इसके अलावा गलत या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर सख्त दंड और कारावास की सजा का भी उल्लेख किया गया है। लिव-इन रिलेशनशिप को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है, जिसके तहत ऐसे संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। पंजीकरण न कराने या जानकारी छिपाने की स्थिति में जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान रखा गया है। वहीं तलाक के लिए भी समान आधार तय किए गए हैं, जिसमें क्रूरता, परित्याग और आपसी सहमति जैसे कारण शामिल हैं। छोटे बच्चों की कस्टडी को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है, जिसके तहत पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की अभिरक्षा सामान्यतः माता को दी जाएगी। उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारे को लेकर भी समान नियम लागू करने का प्रस्ताव है, जिसमें पति, पत्नी, बच्चे और माता-पिता को बराबरी का अधिकार देने की बात कही गई है। वसीयत बनाने के लिए किसी भी वयस्क व्यक्ति को गवाहों की उपस्थिति में लिखित रूप से संपत्ति का बंटवारा करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए विवाह विभिन्न रीति-रिवाजों जैसे वैदिक, निकाह और अन्य पारंपरिक तरीकों से किए जा सकते हैं। सरकार का दावा है कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा, जबकि कुछ वर्ग इसे धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में इसके प्रभाव को लेकर और चर्चाएं होने की संभावना है।