US बेस में सुरक्षित नहीं खाड़ी देश… खामेनेई- 'ढाल' की तरह नहीं कर पाएंगे काम

वाशिंगटन। पश्चिम एशिया (West Asia.) में जारी संकट बुरी तरह से उलझता नजर आ रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) हैं, जो किसी भी हाल में इस युद्ध को अमेरिका (America) के लिए जीत साबित करने में लगे हुए हैं, तो दूसरी तरफ ईरान (Iran) है, जो अपने दशकों पुराने अमेरिकी डर का सामना करके और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है। इसी निडरता का परिचय देते हुए शांति समझौते के बीच ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Iranian Supreme Leader Mojtaba Khamenei) ने साफ कर दिया है कि अब से खाड़ी देश अमेरिकी ठिकानों के लिए ‘ढाल’ की तरह काम नहीं कर पाएंगे। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईद-अल-अजहा के मौके पर खामेनेई ने ईरानी लोगों के लिए एक लिखित बयान जारी किया। इस बयान में खामेनेई ने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को लेकर भी बात की। इतना ही नहीं युद्ध की स्थिति को लेकर उन्होंने साफ किया कि अब ईरान अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने से नहीं चूकेगा। उन्होंने कहा, “यह निश्चित है कि समय के हाथ अब पीछे की तरफ नहीं मुड़ेंगे और क्षेत्र की जनता और जमीन अब अमेरिकी ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेगी। अमेरिका को अब इस क्षेत्र में बुराई फैलाने या सैन्य अड्डा स्थापित करने का सुरक्षित आश्रय नहीं मिलेगा।” बता दें, खामेनेई का इशारा यहां पर युद्ध के समय अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने को लेकर था। हालांकि, ईरान ने पिछले संघर्ष के समय भी इन देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन उस वक्त सभी देशों ने इसको लेकर नाराजगी जाहिर की थी। इस बयान के साथ ही, खामेनेई ने संदेश दे दिया है कि ईरान अब खाड़ी देशों में अमेरिकी बेसों की मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेगा। वैसे भी खाड़ी देशों के साथ सुरक्षा समझौता करने के बदले में वहां बेस बनाकर बैठे अमेरिका की पोल ईरान युद्ध के दौरान खुल गई थी। ईरान के हल्के ड्रोन्स ने सुरक्षित माने जाने वाले इन देशों में काफी उत्पात मचाया था, जिसकी वजह से यह देश पहले ही अमेरिका के अलावा दूसरे विकल्पों की तरफ देख रहे हैं। अमेरिका के साथ 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा ईरानरॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी कि ईरान और अमेरिका के बीच में इस वक्त 14 सूत्रीय समझौते पर बातचीत जारी है। इसमें से ज्यादातर मुद्दों को हल कर लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी समझौता बहुत दूर है। वरिष्ठ ईरानी राजनयिक होसैन नूशाबादी के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच में ज्यादातर मामलों में समझौता हो सकता है, लेकिन केवल परमाणु का मुद्दा फंसा हुआ है। अमेरिका इस बात को बार-बार कहता आ रहा है कि ईरान को संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका का सौंपना होगा, इसके साथ ही उसे इस बात की भी पुष्टि करनी होगी कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु कार्यक्रम शुरू नहीं करेगा। इसके अलावा तेहरान केवल एक परमाणु रिएक्टर बना सकता है। इसके साथ ही उसे अपने मिसाइल कार्यक्रम को भी बंद करना होगा। दरअसल, ट्रंप की मजबूरी यह है कि उन्हें ओबामा से बेहतर ईरानी डील करनी ही होगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह उनके और उनकी पार्टी के लिए एक बड़ी हार साबित होगी। इसलिए ट्रंप भी इस पर झुकने को तैयार नहीं है। उन्होंने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर लिखे पोस्ट में साफ किया कि ईरान के साथ अगर डील होगी, तो वह बेहतर होगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो फिर कोई भी डील नहीं होगी। अमेरिका भले ही इन शर्तों के साथ आगे बढ़ रहा हो, लेकिन ईरान के लिए यह शर्तें स्वीकार करने योग्य नहीं है। दूसरी बात, दशकों पुराने अमेरिकी हमले के डर का सामना करने वाले ईरान के नेता अब निर्भीकता के साथ अमेरिका का सामना कर रहे हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा है कि डोनाल्ड ट्रंप भी अब युद्ध नहीं चाहते, ऐसे में अब तेहरान भी बातचीत की टेबल पर सख्ती के साथ अपनी शर्तें रख रहा है।
इजरायल अब युद्ध से इतर AI और सेमीकंडक्टर तकनीक बढ़ाने पर दे रहा जोर, जानें क्या है प्लान?

तेलअवीव। इजरायल (Israel) अब मिडिल ईस्ट (Middle East.) के युद्ध मोर्चों पर पारंपरिक सैन्य रणनीति के बजाय बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), संचार प्रणालियों और अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीक (Cutting-edge Semiconductors Technology) पर निर्भर रहने की तैयारी कर रहा है। इजरायली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुलासा किया है कि आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय रणनीतिक श्रेष्ठता बंदरगाहों या रेलवे गलियारों पर नहीं, बल्कि उन्नत प्रौद्योगिकी पर आधारित होगी। अधिकारियों ने कहा है कि भविष्य के युद्ध मैदान पर सैनिकों के बजाय बड़ी टेक कंपनियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इजरायल मध्य पूर्व में विकसित हो रहे रणनीतिक आर्थिक गलियारों की ‘वास्तविक रीढ़’ के रूप में प्रौद्योगिकी और संचार अवसंरचना ( Communication Infrastructure ) को देख रहा है। IMEC और I2U2 को नया नजरियावहीं, इस नई सोच के तहत इजराइल भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) और I2U2 समूह जैसी पहलों को पूरी तरह नए नजरिए से देख रहा है। इजरायली अधिकारी अमेरिकी चिप दिग्गज एनवीडिया समेत वैश्विक टेक कंपनियों के साथ बढ़ते सहयोग पर जोर दे रहे हैं। इजरायल खुद को भारत, खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों के बीच नवाचार और प्रौद्योगिकी का प्रवेश द्वार बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जहां ये कंपनियां अपने अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित कर रही हैं। ईरान पर इजरायल की स्पष्ट रणनीतिईरान के साथ चल रहे तनाव पर इजरायली अधिकारियों ने साफ किया कि इजरायल का लक्ष्य तेहरान में सत्ता परिवर्तन नहीं है। उनका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को ‘पीढ़ीगत रूप से कमजोर’ करना है। अधिकारियों ने बताया कि लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के विकास के लिए विशाल औद्योगिक आधार जरूरी होता है। इजरायल इसी आधार को निशाना बना रहा है ताकि ईरान इजरायल की हवाई सुरक्षा को भेद सकने वाली मिसाइलें विकसित न कर सके। इसके अलावा ईरानी सैन्य नेतृत्व और प्रॉक्सी समूहों के कमांडरों को लक्ष्य बनाना भी ऑपरेशनल क्षमता को बाधित करने की रणनीति का हिस्सा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब नेतृत्व लगातार छिपने, जगह बदलने और नई कम्युनिकेशन लाइनें बनाने में लगा रहता है, तो उसकी परिचालन क्षमता तेजी से घट जाती है। भारत से IRGC पर कार्रवाई की अपीलइजरायली पक्ष ने भारत से बड़े राजनयिक प्रयास के तहत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है। अधिकारियों ने कहा कि इजरायल इस मुद्दे को भारतीय अधिकारियों के समक्ष कई बार उठा चुका है और उम्मीद करता है कि भारत आधिकारिक तौर पर IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करे। उन्होंने बताया कि अब तक 44 देश IRGC के खिलाफ कार्रवाई कर चुके हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया के फैसले और यूरोपीय संघ की पहल का जिक्र किया। हमास पर भी भारत से उम्मीद7 अक्टूबर के हमले के बाद इजराइल ने भारत से हमास को भी आतंकवादी संगठन घोषित करने की अपील दोहराई है। भारत ने हमले की कड़ी निंदा की थी, लेकिन अब तक हमास को आतंकवादी संगठन के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। इसी दौरान ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची का हालिया नई दिल्ली दौरा इजरायली पक्ष की चिंता का विषय बना हुआ है, जहां उन्होंने भारत को ‘भरोसेमंद दोस्त’ बताया था। दूसरी ओर इजरायली अधिकारी पूरे टकराव को क्षेत्रीय रणनीतिक और ऊर्जा प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देख रहे हैं। उनके अनुसार, ईरान की मिसाइल क्षमता को कम करने और उसके क्षेत्रीय सैन्य प्रभाव को सीमित करने के इजरायली लक्ष्य काफी हद तक हासिल हो चुके हैं।
Karnataka में राज्यसभा चुनाव के लिए मुसलमानों से मांग एक सीट…. बढ़ी कांग्रेस की टेंशन

नई दिल्ली। कर्नाटक (Karnataka) में आगामी राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha elections) को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य के मुस्लिम संगठनों (Muslim Organizations) के एक प्रमुख महासंघ ने सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी (Ruling Congress party) के सामने एक बड़ी मांग रख दी है। फेडरेशन ऑफ स्टेट मुस्लिम ऑर्गेनाइजेशन्स ने मंगलवार को कांग्रेस नेतृत्व से पुरजोर मांग की है कि वह कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव में कम से कम एक सीट मुस्लिम समुदाय के उम्मीदवार को आवंटित करे। कर्नाटक से राज्यसभा की चार सीटों के लिए आगामी 18 जून को मतदान होना है। राज्य विधानसभा में विधायकों की मौजूदा संख्या के बल पर यह साफ है कि इन चार में से 3 सीटों पर कांग्रेस की जीत तय है, जबकि 1 सीट भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के खाते में जाने की पूरी संभावना है। यह चुनाव उन चार मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 25 जून को समाप्त होने के कारण हो रहा है, जो रिटायर हो रहे हैं। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस नेता एचडी देवेगौड़ा, भाजपा से इरण कडाडी और नारायण कोरा गप्पा शामिल हैं। मुस्लिम महासंघ ने अपने बयान में कहा है, “चूंकि कांग्रेस पार्टी आसानी से तीन सीटें जीतने की स्थिति में है, इसलिए हमारी पुरजोर मांग है कि इन जीतने वाली सीटों में से कम से कम एक सीट मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि को दी जाए।” संगठन ने इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और केपीसीसी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से रुचि लेने का आग्रह किया है। मुस्लिम संगठन ने जताई चिंतामुस्लिम संगठन ने राज्य से संसद में समुदाय के लगातार घटते प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर चिंता जताई है। आंकड़ों का हवाला देते हुए महासंघ ने कहा कि कर्नाटक से राज्यसभा के कुल 12 मौजूदा सदस्यों में से केवल एक सदस्य मुस्लिम समुदाय से है। अतीत में कर्नाटक से कांग्रेस के टिकट पर कम से कम दो मुस्लिम लोकसभा सांसद चुनकर दिल्ली जाते थे, लेकिन वर्तमान में राज्य से एक भी मुस्लिम लोकसभा सांसद नहीं है। कांग्रेस द्वारा मुस्लिम उम्मीदवारों को दिए जाने वाले लोकसभा टिकटों की संख्या भी घटकर अब सिर्फ एक रह गई है। महासंघ के अनुसार, “इन परिस्थितियों के कारण संसद में राज्य के मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।” किस बात की दिलाई यादमहासंघ ने कांग्रेस नेतृत्व को याद दिलाया कि कर्नाटक में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत से सत्ता में लाने में मुस्लिम समुदाय ने बेहद निर्णायक भूमिका निभाई थी। समुदाय ने एकजुट होकर और एकमुश्त तरीके से कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया। किसी भी अन्य समुदाय की तुलना में मुस्लिमों ने सबसे अधिक अनुपात में कांग्रेस को वोट दिया, जो पार्टी की जीत का एक मुख्य आधार बना। महासंघ ने असंतोष जताते हुए कहा, “इतने भारी समर्थन के बावजूद राज्य कैबिनेट, नौकरशाही, प्रमुख सरकारी संस्थानों, विश्वविद्यालयों और बोर्ड-निगमों में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व उनकी आबादी और उनके द्वारा दिए गए समर्थन के मुकाबले बेहद कम है।” बयान में यह भी कहा गया कि समुदाय के भीतर अब यह धारणा घर करने लगी है कि कांग्रेस उन निर्वाचन क्षेत्रों में भी मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारने से हिचकती है, जहां जीत की संभावना सबसे ज्यादा होती है। राहुल गांधी के विचारों का दिया हवालासंगठन ने उम्मीद जताई है कि आगामी राज्यसभा चुनावों में इस कमी को दूर कर कांग्रेस नेतृत्व एक सकारात्मक संदेश दे सकता है। उन्होंने हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गांधी ने पार्टी की अल्पसंख्यक शाखा को निर्देश दिए थे कि संगठन के भीतर मुस्लिम समुदाय की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जाए। फेडरेशन ने कहा कि कर्नाटक की सत्ता पर काबिज कांग्रेस को अपने शीर्ष नेतृत्व की इसी सोच और विचारधारा को मजबूत करते हुए राज्यसभा की एक सीट मुस्लिम उम्मीदवार को देनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि दिल्ली और बेंगलुरु में बैठा कांग्रेस का आलाकमान इस मांग पर क्या फैसला लेता है।
बकरीद का अवकाश 27 या 28 मई को…. जानिए किस दिन रहेगी बैंक की छुट्टी?

नई दिल्ली। बकरीद (Bakrid) यानी ईद-उल-अजहा 2026 (Eid al-Adha 2026) के मौके पर बैंकों की छुट्टी को लेकर लोगों में काफी कन्फ्यूजन है। क्या 27 मई बुधवार यानी आज बैंक बंद रहेंगे या 28 मई गुरुवार को? दरअसल, इस बार चांद दिखने और राज्य सरकारों के अलग-अलग नोटिफिकेशन के चलते तारीखों में फर्क देखने को मिल रहा है। आइए, समझते हैं कि आपके शहर में कब रहेगी बैंकों की छुट्टी (Bank Holiday) और कौन सी सेवाएं जारी रहेंगी। केंद्र सरकार ने 28 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित कियाकेंद्र सरकार (Central Government) ने ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर अवकाश की तारीख में बदलाव किया है। कार्मिक मंत्रालय ने 22 मई को एक बयान जारी कर कहा कि दिल्ली स्थित सभी केंद्रीय प्रशासनिक कार्यालय 27 मई 2026 के बजाय 28 मई 2026 (गुरुवार) को बंद रहेंगे। यानी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ईद की छुट्टी 28 मई को ही मान्य होगी। क्या बैंक 27 मई को बंद रहेंगे या 28 मई को?बकरीद पर बैंकों की छुट्टी पूरे देश में एक समान नहीं है। यह मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करती है पहला चांद दिखना, दूसरा स्थानीय सरकार की अधिसूचना और तीसरा क्षेत्रीय परंपराएं। इसीलिए कुछ राज्यों में 27 मई को बैंक बंद रहेंगे, तो कुछ जगहों पर 28 मई को छुट्टी रहेगी। जम्मू-कश्मीर में बैंकों की छुट्टी आजरिजर्व बैंक (RBI) के हॉलीडे कैलेंडर के अनुसार, जम्मू और श्रीनगर में 27 मई 2026 (बुधवार) को बकरीद (ईद-उल-अजहा) के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। इसका मतलब है कि कामर्शियल बैंक, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) और स्थानीय क्षेत्रीय बैंक (LAB) सभी इस दिन बंद रहेंगे। केरल में बकरीद पर दो दिन की छुट्टीकेरल सरकार ने बकरीद के लिए लगातार दो दिनों की सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 24 मई को जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य में बकरीद 28 मई को मनाई जा रही है, इसलिए 27 मई और 28 मई दोनों दिन सभी सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान और सार्वजनिक उपक्रम बंद रहेंगे। यह आदेश निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत आने वाली संस्थाओं पर भी लागू होगा। मई 2026 में अब तक कब-कब बंद हुए बैंक· 1 मई (शुक्रवार): मजदूर दिवस/बुद्ध पूर्णिमा· 9 मई (दूसरा शनिवार)· 23 मई (चौथा शनिवार)· हर रविवार (4, 11, 18, 25 और 31 मई)अब 27 या 28 मई को बकरीद का अवकाश इसमें जुड़ जाएगा। आरटीजीएस और एनईएफटी पर कोई असर नहींअगर आपको जरूरी पैसे भेजने हैं तो चिंता न करें। आरटीजीएस और एनईएफटी सेवाएं 24×7 चालू रहती हैं। 14 दिसंबर 2020 से ये सुविधा हर दिन, हर समय उपलब्ध है, फिर चाहे बैंक की छुट्टी ही क्यों न हो। क्या ऑनलाइन बैंकिंग छुट्टी वाले दिन काम करेगी?हां, ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं बैंक अवकाश के दिन भी बिना रुकावट चलती हैं। आप यूपीआई से पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग/नेट बैंकिंग, पैसे का लेन-देन, ऑनलाइन लोन अप्लाई करना और चेकबुक के लिए रिक्वेस्ट आसानी से और घर बैठे अपने मोबाइल से ही कर सकते हैं। एटीएम से कैश निकालने में दिक्कत नहींअगर बैंक की शाखाएं बंद हैं, तब भी एटीएम चालू रहते हैं। आप जरूरत के अनुसार कैश निकाल और जमा कर सकते हैं। बस यह जरूर ध्यान रखें कि एटीएम में समय पर कैश भरा हो। बता दें अलग-अलग राज्यों में स्थानीय अवकाश भी लागू रहते हैं। इसलिए बैंक की छुट्टी की सही जानकारी के लिए अपने राज्य का आरबीआई कैलेंडर या संबंधित बैंक की वेबसाइट जरूर चेक कर लें।
पद्मिनी एकादशी आज….. तीन साल में एक बार आता है ये व्रत… जानें इसके नियम एवं विधि

नई दिल्ली। पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi 2026)/ कमला एकादशी (Kamala Ekadashi) का व्रत अधिक मास में किया जाता है। पुरुषोत्तम मास (Purushottam month) में एकादशी तिथि होने के कारण पद्मिनी एकादशी का व्रत तीन साल में एक बार ही आता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की अधिक कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत की महिमा का वर्णन पद्म पुराण में भी किया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा भाव से जो कोई भी इस व्रत को करेगा उसे जन्म जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही वह व्यक्ति अक्षय पुण्य प्राप्त करता है। इस व्रत को करने वालों को विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही इस दिन दान पुण्य करने से व्यक्ति की सारी इच्छाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं पद्मिनी एकादशी पर किन किन चीजों का दान करना चाहिए साथ ही जानें व्रत का नियम। पद्मिनी एकादशी व्रत के नियमपद्म पुराण में बताया गया है कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। साथ ही हाथ में थोड़ा जल लेकर व्रत का संकल्प लें। इस दिन विशेष रुप से पीले रंग के वस्त्र धारण करें। एकादशी के दिन अन्न का त्याग करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन ही करना शुभ फलदायी माना गया है। एकादशी के व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए। पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही इस दिन बाल आदि कटवाना नहीं चाहिए। पद्म पुराण में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी के दिन जो व्यक्ति घर पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करता है उसे एक गुना फल मिलता है। वहीं, नदी के तट पर जप करने से दो गुना, गोशाला में जाकर जप करने से सहस्त्र गुना, अग्निहोत्र गृहं में जप करने से एक हजार गुना, भगवान शिव के मंदिर में जप करने और तुलसी के पास जप करने से लाख गुना फल मिलता है। पद्मिनी एकादशी पर क्या दान करेंपद्मिनी एकादशी के दिन अन्न और फल का दान करना बहुत ही पुण्य फलदायी माना गया है। इस दिन अन्न और फल का दान करना चाहिए। पुरुषोत्तम मास के दौरान अधिक गर्मी के चलते जल से भरा घड़ा, मौसमी फल जैसे आम, खरबूजा, तरबूज और बाकी फलों का दान करना चाहिए। अधिक मास के दौरान गुड़ और तिल का दान करना भी सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन जरुरतमंद लोगों को चप्पल, वस्त्र और छाता आदि चीजों का दान करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। पुरुषोत्तम मास की यह पद्मिनी एकादशी तीन साल में एक बार आती है इसलिए इस दिन दान के अलावा मंदिरों में दीप दान भी करना चाहिए। मंदिर में घी के कम से कम पांच दीपक जरुर जलाने चाहिए।
SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला…. जानें क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची (Voter List) के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Review.- SIR) को लेकर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) बुधवार को अहम फैसला सुनाने जा रहा है। मामला इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या चुनाव आयोग ने अपने संवैधानिक अधिकारों की सीमा लांघते हुए वोटर लिस्ट को लगभग नए सिरे से तैयार करने की कोशिश की। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दावा किया कि आयोग की यह प्रक्रिया लाखों वैध मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकती है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। याचिकाओं में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के तहत चुनाव आयोग को इतनी व्यापक कार्रवाई का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूचियों का पूरी तरह नया पुनर्गठन किया जा रहा है, जो सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है। इस दौरान आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को स्वीकार नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। चुनाव आयोग का क्या है पक्षदूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है। आयोग का कहना है कि मताधिकार केवल पात्र नागरिकों को ही मिलना चाहिए और फर्जी या अपात्र नाम हटाना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। आयोग ने यह भी दलील दी कि वोट देने का अधिकार संविधान और कानून में तय योग्यताओं के अधीन है, इसलिए अपात्र लोगों को सूची से हटाना लोकतंत्र के हित में है। इस पूरे विवाद का राजनीतिक असर भी दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर असली मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं, जबकि सत्तापक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम बता रहा है। बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यह मुद्दा पहले ही राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह निर्णय भविष्य में देशभर में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की शक्तियों की सीमा तय कर सकता है।
PM मोदी की मितव्ययिता की अपील पर मारुति सुजुकी में लागू किया वर्क फ्रॉम होम

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी (Country Largest Car Maker) मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) (Maruti Suzuki India Limited – MSIL) ने वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) को लागू कर दिया है। सप्ताह के दूसरे दिन यानी मंगलवार को कहा कि कंपनी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया में युद्ध के प्रभाव को कम करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं, जिनमें संभव होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करना और विदेशी यात्राओं पर रोक शामिल है। क्या कहा कंपनी ने?कंपनी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि वह प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया युद्ध के संभावित प्रभाव को कम करने के आह्वान को अत्यधिक महत्व देती है। मारुति सुजुकी ने कहा कि यह सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और उन्हें अधिक कुशल बनाने का उपयुक्त समय है, ताकि राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ-साथ कारोबार के स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जा सके। कंपनी के अनुसार, प्रबंधन ने कर्मचारियों को कई उपायों को संस्थागत रूप देने का संदेश दिया है। इसके तहत जहां संभव हो वहां पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू किया जा रहा है, ताकि आवागमन से जुड़े ईंधन की खपत कम की जा सके। कंपनी ने कहा कि यह कदम उसकी मौजूदा रिमोट वर्किंग नीति के अनुरूप है। विदेश यात्रा पर क्या कहा?इसके अलावा, विदेश यात्राओं को केवल बेहद जरूरी व्यावसायिक जरूरतों तक सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनी ने कर्मचारियों को बैठकों के लिए वर्चुअल माध्यम को प्राथमिकता देने और घरेलू यात्राओं को भी न्यूनतम रखने को कहा है। मारुति सुजुकी ने कर्मचारियों को भी कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग जैसे उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। साथ ही, कार्यालय और घर दोनों जगह ऊर्जा संरक्षण पर जोर देते हुए एयर कंडीशनर, पंखे और रोशनी के बचत के हिसाब से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। कंपनी ने कहा कि इन सभी उपायों की जानकारी आंतरिक कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों तक व्यापक रूप से पहुंचाई जा रही है। हरियाणा में मैन्युफैक्चरिंग लैबइस बीच, मारुति सुजुकी ने सरकार के कौशल विकास मिशन के तहत हरियाणा के रोहतक में अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग लैब स्थापित की है। कंपनी ने बयान में कहा कि रोहतक स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) हसनगढ़ में स्थापित इस मैन्युफैक्चरिंग लैब में पहले वर्ष में लगभग 200 छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस लैब में छात्रों को वाहन असेंबली, वेल्डिंग और रंगाई जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट मामले) राहुल भारती ने कहा- इस लैब में आधुनिक मशीनों और कार्यस्थल जैसे वातावरण का उपयोग किया जाएगा। कौशल विकास मिशन के अनुरूप यह पहल छात्रों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार होने और बदलते वाहन परिवेश के लिए प्रतिभा को निखारती है। मारुति सुजुकी देशभर में 31 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को सहयोग दे रही है और अब तक 18 ऐसी लैब स्थापित कर चुकी है।
Gwalior Suicide Case: ग्वालियर के सराफा व्यापारी ने किया सुसाइड, क्या थी वजह तनाव या व्यापारिक घाटा?

HIGHLIGHTS: ग्वालियर के आर्य नगर में सराफा कारोबारी ने फांसी लगाकर दी जान मां के फोन पर बेटा दुकान छोड़ दौड़ता हुआ घर पहुंचा बेटे ने चाकू से लोहे का तार काटकर पिता को नीचे उतारा बिरला अस्पताल में डॉक्टरों ने कारोबारी को मृत घोषित किया पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, जांच जारी Gwalior Suicide Case: मध्यप्रदेश। ग्वालियर के आर्य नगर इलाके में सदर बाजार के एक सराफा कारोबारी श्रीकृष्ण सोनी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बता दें कि उनकी पत्नी अर्चना सोनी ने जब पति को फंदे पर लटका देखा तो रोते हुए बेटे आशुतोष सोनी को फोन किया। जिसके बाद बेटा अपनी दुकान से तुरंत घर पहुंचा और अपने पिता को अस्पताल लेकर गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि घटनास्थल पर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, मुरार थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। ChatGPTने 80 साल पुराना गणित का सवाल हल किया, AI की ताकत से वैज्ञानिक जगत हैरान बेटे ने चाकू से काटा तार मुरार थाना पुलिस को मुताबिक आर्य नगर निवासी श्रीकृष्ण सोनी की मुरार सदर बाजार में सोने-चांदी की दुकान है। पुलिस का कहना है कि घटना के बाद जब बेटा घर पहुंचा तो उसकी मां और दादी बिलख-बिलख कर रोती नजर आई मां ने बताया कि उसके पिता ने अंदर कमरे में फांसी लगा ली है। आशुतोष भागकर कमरे में गया तो देखा कि उसके पिता छत के कुंदे पर लोहा के तार से लटके हुअ थे, उसने तुरंत फंदे को खोलने की कोशिश की लेकिन न खुलने पर उसने तार काट दिया। उस वक्त पिता की नब्ज हल्की चल रही थी और वह बेहोश थे। बकरीद (ईद-उल-अज़हा): त्याग, आस्था और इंसानियत का सबसे पवित्र पर्व डॉ. ने किया मृत घोषित आशुतोष तुरंत अपने परिजनों की मदद से पिता को कार में डालकर इलाज के लिए गोला का मंदिर स्थित बिरला अस्पताल लेकर भागा। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने श्रीकृष्ण सोनी को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, अस्पताल लाने से कुछ ही देर पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि: आधुनिक भारत के शिल्पकार को नमन क्या थी सुसाइड की वजह घटना की सूचना मिलते ही मुरार थाना पुलिस अस्पताल पहुंची। साथ ही उन्होंने घटना स्थल को जायजा लिया। इसके बाद पुलिस ने शव का पंचनामा बनाकर उसे पोस्टमार्टम हाउस भेजा। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिससे आत्महत्या के कारणों को लेकर रहस्य गहरा गया है। फिलहाल पुलिस इसी थ्योरी पर काम कर रही है कि खुदकुशी के लिए पीछे की वजह क्या है। कोई तनाव, व्यापारिक घाटा या फिर गृह क्लेश।
बकरीद (ईद-उल-अज़हा): त्याग, आस्था और इंसानियत का सबसे पवित्र पर्व

ईद-उल-अज़हा जिसे भारत में आमतौर पर बकरीद या बक्रीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक अत्यंत पवित्र और भावनात्मक पर्व है। यह त्योहार हर साल दुनिया भर में करोड़ों लोगों द्वारा गहरी आस्था, श्रद्धा और समर्पण के साथ मनाया जाता है। बकरीद केवल एक धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि यह त्याग, भरोसे और इंसानियत का संदेश देने वाला पर्व है। बकरीद का इतिहास पैगंबर हज़रत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) की उस महान परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें अल्लाह ने उनकी आस्था की परीक्षा ली थी। मान्यता के अनुसार, उन्हें अपने सबसे प्रिय पुत्र को अल्लाह की राह में कुर्बान करने का आदेश दिया गया था। हज़रत इब्राहिम ने बिना किसी हिचकिचाहट के अल्लाह के आदेश को स्वीकार किया और अपने बेटे को कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए। उनकी इस अटूट आस्था और समर्पण को देखकर अल्लाह ने उनके पुत्र की जगह एक दुम्बा (भेड़) को कुर्बानी के लिए भेज दिया। इसी ऐतिहासिक घटना की याद में बकरीद मनाई जाती है। इस पर्व का असली उद्देश्य केवल कुर्बानी देना नहीं है, बल्कि अपने अंदर की बुराइयों, लालच और अहंकार की कुर्बानी देना भी है। बकरीद हमें यह सिखाती है कि सच्चा धर्म वही है जिसमें त्याग, सेवा और इंसानियत हो। इस दिन लोग सुबह विशेष नमाज अदा करते हैं, जिसे ईद की नमाज कहा जाता है, और उसके बाद कुर्बानी की रस्म निभाई जाती है। कुर्बानी के बाद मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिसमें एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दिया जाता है, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और पड़ोसियों के लिए रखा जाता है और तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए उपयोग किया जाता है। यह परंपरा समाज में समानता और भाईचारे को मजबूत बनाती है। बकरीद का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि इंसान को अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के लिए जीना चाहिए। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि असली खुशी केवल पाने में नहीं, बल्कि बांटने में है। आज के समय में जब समाज में दूरी और असमानता बढ़ रही है, बकरीद का संदेश और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाता है। यह त्योहार हमें यह भी सिखाता है कि विश्वास और समर्पण से हर कठिन परीक्षा को पार किया जा सकता है। हज़रत इब्राहिम की कहानी आज भी हर इंसान को यह प्रेरणा देती है कि सच्चा ईमान वही है जिसमें बिना शर्त समर्पण हो। अंत में बकरीद केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि इंसानियत, करुणा और एकता का जीवंत संदेश है, जो हमें एक बेहतर समाज और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। -बकरीद (ईद-उल-अज़हा)
ChatGPTने 80 साल पुराना गणित का सवाल हल किया, AI की ताकत से वैज्ञानिक जगत हैरान

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ जानकारी देने या सवालों के जवाब तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब जटिल समस्याओं को हल करने और नए तर्क विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ता दिख रहा है। इसका ताजा उदाहरण ChatGPT द्वारा 80 साल पुराने अनसुलझे गणितीय सवाल को हल करने के रूप में सामने आया है। यह सवाल 1946 में मशहूर गणितज्ञ पॉल एर्डोश ने पूछा था, जिसमें यह समझना था कि किसी समतल सतह पर बने कई बिंदुओं में कितने जोड़े ऐसे हो सकते हैं जिनके बीच की दूरी ठीक 1 यूनिट हो। दशकों तक इस समस्या का कोई सर्वमान्य समाधान नहीं मिल पाया था। ChatGPT ने इस समस्या पर काम करते हुए ऐसे नए गणितीय पैटर्न और उदाहरण खोजे, जिनमें पहले से अधिक यूनिट डिस्टेंस जोड़े संभव हो सकते हैं। खास बात यह रही कि AI ने केवल पुरानी जानकारी नहीं दोहराई, बल्कि अलग-अलग गणितीय क्षेत्रों को जोड़कर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समाधान में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि AI ने अल्जेब्रिक नंबर थ्योरी जैसे जटिल सिद्धांतों का उपयोग किया और उन्हें ज्यामितीय समस्या से जोड़कर एक नया समाधान रास्ता तैयार किया। गणितज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि AI की रीजनिंग क्षमता का बड़ा प्रमाण है, जहां मशीनें केवल गणना नहीं बल्कि गहराई से सोचकर नए निष्कर्ष निकालने में सक्षम हो रही हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि AI इंसानों की जगह नहीं लेगा। यह केवल समाधान सुझा सकता है, लेकिन यह तय करना कि कौन सा सवाल महत्वपूर्ण है और उसका वास्तविक अर्थ क्या है, यह भूमिका अभी भी इंसानों के पास ही रहेगी। कुल मिलाकर यह उपलब्धि दिखाती है कि AI आने वाले समय में विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और रिसर्च के क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।