सुशांत सिंह राजपूत को याद कर भावुक हुए शिशिर शर्मा, बोले-‘सच मानना आज भी मुश्किल है’

नई दिल्ली । दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया है, जब उनके साथ फिल्म ‘छिछोरे’ में काम कर चुके अभिनेता शिशिर शर्मा ने सालों बाद उनके निधन पर अपनी भावनाएं साझा कीं। एक हालिया बातचीत में शिशिर शर्मा ने कहा कि उन्हें आज भी यह स्वीकार करना बेहद कठिन लगता है कि सुशांत जैसा प्रतिभाशाली और शांत स्वभाव का व्यक्ति आत्महत्या जैसा कदम उठा सकता है। उनके इस बयान ने एक बार फिर सुशांत के चाहने वालों की भावनाओं को ताजा कर दिया है। मध्य प्रदेश सहित देशभर में सुशांत सिंह राजपूत की लोकप्रियता केवल फिल्मों तक सीमित नहीं थी, बल्कि टीवी धारावाहिकों से लेकर बड़े पर्दे तक उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। शिशिर शर्मा ने बताया कि उनकी और सुशांत की पहचान टीवी इंडस्ट्री के दिनों से ही थी, जहां दोनों की कई बार मुलाकात और साथ में काम करने का अवसर मिला था। इस दौरान उनके बीच एक सहज और दोस्ताना रिश्ता विकसित हुआ था, जो बाद में भी कायम रहा। शिशिर शर्मा ने आगे बताया कि जब उन्हें फिल्म ‘छिछोरे’ में काम करने का अवसर मिला और यह पता चला कि उसमें सुशांत सिंह राजपूत भी हैं, तो वह बेहद उत्साहित हो गए थे। शूटिंग के दौरान दोनों ने एक बार फिर पुराने दिनों की यादें साझा कीं और सेट पर एक अच्छा माहौल रहा। उन्होंने सुशांत को एक बेहद समर्पित, मेहनती और अपने काम के प्रति गंभीर कलाकार बताया। 14 जून 2020 का दिन उनके जीवन में एक ऐसा पल लेकर आया जिसे वह आज भी भूल नहीं पाए हैं। शिशिर शर्मा ने कहा कि जब उन्हें सुशांत के निधन की खबर मिली, तो वह पूरी तरह से स्तब्ध रह गए थे। उनके अनुसार यह खबर किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी और वह समझ नहीं पा रहे थे कि इतना ऊर्जावान और प्रतिभाशाली व्यक्ति अचानक इस तरह दुनिया को अलविदा कैसे कह सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें यह मानना मुश्किल लगता है कि सुशांत ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया होगा। उनके अनुसार सुशांत एक सुलझे हुए और समझदार व्यक्ति थे, जिनका व्यवहार और सोच काफी सकारात्मक थी। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह उनकी निजी राय है और वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहते, लेकिन भावनात्मक रूप से वह आज भी इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पाए हैं। सुशांत सिंह राजपूत ने अपने करियर में टीवी से शुरुआत कर बॉलीवुड में बड़ा मुकाम हासिल किया था। ‘पवित्र रिश्ता’ से लेकर ‘काई पो चे’, ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ और ‘छिछोरे’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। आज भी उनके प्रशंसक उन्हें याद करते हैं और सोशल मीडिया पर उनकी यादों को साझा करते रहते हैं, जिससे यह साफ है कि उनकी लोकप्रियता और प्रभाव आज भी बरकरार है।
तलाक के चार साल बाद फिर चर्चा में नागा चैतन्य, ऑनलाइन अफवाहों के खिलाफ कोर्ट से मिली अंतरिम राहत

नई दिल्ली । साउथ फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता नागा चैतन्य एक बार फिर सुर्खियों में हैं, हालांकि इस बार वजह उनकी निजी जिंदगी नहीं बल्कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही कथित भ्रामक और मानहानिकारक सामग्री है। अभिनेता ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है और अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट पर रोक लगाने की मांग की है। जानकारी के अनुसार नागा चैतन्य ने अपनी याचिका में कहा है कि कई वेबसाइट्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर और पहचान का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही उनके बारे में ऐसे दावे किए जा रहे हैं जो न केवल झूठे हैं बल्कि उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करते हैं। अभिनेता का कहना है कि यह पूरा मामला उनकी डिजिटल पहचान और सम्मान से जुड़ा हुआ है, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। याचिका में विशेष रूप से उन ऑनलाइन पोस्ट और वीडियो का उल्लेख किया गया है जिनमें यह दावा किया गया था कि नागा चैतन्य ने अपनी पूर्व पत्नी सामंथा रूथ प्रभु को धोखा दिया था या उनके करियर को प्रभावित किया था। अभिनेता ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह आधारहीन और भ्रामक बताया है और कहा है कि इस तरह की सामग्री से जनता के बीच गलत धारणा बन रही है। मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने प्राथमिक स्तर पर अभिनेता को अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने ऐसे सभी ऑनलाइन कंटेंट को हटाने के निर्देश दिए हैं, जो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने एआई और डीपफेक तकनीक के माध्यम से बनाए जा रहे आपत्तिजनक कंटेंट पर भी चिंता जताई है और इस तरह के मामलों में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है। गौरतलब है कि नागा चैतन्य और अभिनेत्री सामंथा रूथ प्रभु ने वर्ष 2021 में आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया था। तलाक के बाद दोनों को लेकर कई तरह की अटकलें और अफवाहें सामने आती रही हैं, जिन्हें दोनों कलाकारों ने समय-समय पर खारिज भी किया है। नागा चैतन्य पहले भी एक इंटरव्यू में यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वे और सामंथा एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हैं। इस ताजा कानूनी कदम को अभिनेता की छवि संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रही गलत सूचनाओं के खिलाफ यह मामला आने वाले समय में एक उदाहरण बन सकता है, जहां सार्वजनिक हस्तियां अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए न्यायिक प्रणाली का सहारा ले रही हैं।
सीहोर में थाने के बाहर बच्चे के साथ बैठी महिला का मामला, पुलिस पर FIR दर्ज न करने के गंभीर आरोप

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में एक महिला द्वारा न्याय की मांग को लेकर थाने के सामने अपने छोटे बच्चे के साथ सड़क पर बैठने का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित महिला अपनी बेटी के साथ हुई कथित मारपीट की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने पहुंची थी, लेकिन आरोप है कि उसकी FIR दर्ज करने के बजाय उसे अलग-अलग थानों के बीच भटकाया जाता रहा। इस पूरी प्रक्रिया में महिला घंटों तक थाने के बाहर बैठी रही और अंततः वह थक-हारकर सड़क पर ही बैठ गई, जबकि उसके साथ छोटा बच्चा भी मौजूद था। यह स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब शाम से लेकर देर रात तक पीड़िता न्याय की उम्मीद में वहीं मौजूद रही। बताया जा रहा है कि घटना उस समय की है जब पीड़िता की बेटी जंगल में बकरी चराने गई थी और किसी विवाद के दौरान कुछ लोगों द्वारा उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया। परिजनों का कहना है कि इस घटना में युवती गंभीर रूप से घायल हुई और उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मामले को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए तत्काल कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता को एक थाने से दूसरे थाने भेजना शुरू कर दिया। इस व्यवहार से आहत होकर महिला थाने के बाहर बैठने को मजबूर हो गई। महिला का कहना है कि वह लगातार पुलिस से गुहार लगाती रही कि उसकी शिकायत दर्ज कर उचित जांच की जाए, लेकिन उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि कई बार उसे यह कहकर टाल दिया गया कि संबंधित थाना जाकर शिकायत दर्ज कराएं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पीड़िता अपने छोटे बच्चे के साथ असहाय स्थिति में रही, जिससे उसकी परेशानी और बढ़ गई। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में महिला सुरक्षा और त्वरित न्याय व्यवस्था को लेकर लगातार बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आई यह घटना पुलिस की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की क्षमता पर सवाल खड़े करती है। कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को क्षेत्राधिकार के तकनीकी पहलू में उलझने के बजाय तुरंत प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए Zero FIR दर्ज करनी चाहिए, ताकि पीड़ित को राहत मिल सके और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ सके। घटना का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा और तेज हो गई है। अब यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है और लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है। फिलहाल देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए किस तरह की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती है।
अस्पताल व्यवस्था पर सवाल, सतना में मरीज को लेने आइसोलेशन वार्ड तक बाइक पहुंची, वीडियो हुआ वायरल

मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल में शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक मरीज को वार्ड से नीचे ले जाने के लिए जब समय पर स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो सका, तो परिजन मजबूरी में बाइक लेकर अस्पताल के भीतर फर्स्ट फ्लोर तक पहुंच गया। यह पूरा घटनाक्रम किसी फिल्मी दृश्य जैसा प्रतीत हुआ, जिसमें व्यवस्था की कमी और आम नागरिक की परेशानी दोनों एक साथ सामने आ गए। मध्य प्रदेश के सतना शहर में घटी इस घटना में सीताराम सोनी नामक युवक अपने परिजन अंजनी सोनी को, जो कि आइसोलेशन वार्ड में भर्ती थे, इलाज के बाद रेफर किए जाने पर रीवा ले जाने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने मरीज को बेहतर उपचार के लिए अन्य अस्पताल भेजने का निर्णय लिया था, लेकिन जब मरीज को वार्ड से नीचे लाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो स्ट्रेचर की अनुपलब्धता एक बड़ी बाधा बन गई। काफी देर तक इंतजार करने और प्रयास करने के बावजूद जब कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं मिली तो परिजन ने असामान्य कदम उठाते हुए बाइक से ही वार्ड तक पहुंचने का प्रयास किया। अस्पताल परिसर में बाइक का आइसोलेशन वार्ड तक पहुंच जाना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आपात स्थिति में बुनियादी संसाधनों की कमी किस तरह लोगों को मजबूरी में असामान्य कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है। मौके पर मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर स्तब्ध रह गए और कुछ ही समय में यह घटना चर्चा का विषय बन गई। प्रारंभिक तौर पर इसे अस्पताल की बड़ी चूक माना गया, हालांकि बाद में जांच में सामने आया कि युवक का उद्देश्य किसी तरह की अव्यवस्था या हंगामा करना नहीं था, बल्कि वह केवल अपने परिजन को सुरक्षित तरीके से नीचे लाने का प्रयास कर रहा था। घटना की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप किया और मरीज के लिए स्ट्रेचर की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। इसके बाद मरीज को सुरक्षित तरीके से एम्बुलेंस के माध्यम से रीवा के लिए रेफर किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि मरीज को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी थी और आगे के इलाज के लिए उसे स्थानांतरित किया गया है। बताया जा रहा है कि मरीज अंजनी सोनी को घोड़े की लात लगने से गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने की सलाह दी थी। लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान सामने आई व्यवस्थागत कमी ने अस्पताल की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर आपात स्थिति में मरीजों को स्थानांतरित करने की व्यवस्था को लेकर। इस घटना ने एक बार फिर यह मुद्दा सामने ला दिया है कि सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और उनका त्वरित उपयोग कितना महत्वपूर्ण है। स्ट्रेचर, एम्बुलेंस और त्वरित सहायता प्रणाली जैसी सुविधाएं यदि समय पर उपलब्ध न हों, तो मरीज और उनके परिजन को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने मामले की समीक्षा की बात कही है और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
इंदौर के ठेकेदार शकील शाह की गिरफ्तारी, आदिवासी युवती से छेड़छाड़ के मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले में एक आदिवासी मजदूर युवती से कथित छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने इंदौर निवासी ठेकेदार शकील शाह को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई कोतवाली थाना क्षेत्र में की गई, जहां आरोपी लंबे समय से पीड़िता को परेशान कर रहा था। मामला तब सामने आया जब शनिवार को आरोपी बस स्टैंड क्षेत्र में देखा गया और युवती के पिता ने तुरंत पुलिस को सूचना देकर उसे पकड़वाने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में ले लिया और थाने ले जाकर आगे की कार्रवाई शुरू की। जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपने परिवार के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा आरसेटी के पास चल रहे निर्माण कार्य में मजदूरी कर रही थी। इसी दौरान ठेकेदारी कार्य से जुड़े इंदौर निवासी शकील शाह पर युवती से छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगे। परिजनों ने शुरुआती स्तर पर ही विरोध जताया था और आरोपी को काम स्थल से दूर रहने की चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद आरोपी ने कथित रूप से अपनी हरकतें जारी रखीं और बाद में एक बार फिर आलीराजपुर पहुंचकर युवती से संपर्क करने और उसे प्रभावित करने की कोशिश की। स्थानीय लोगों के अनुसार, आरोपी की गतिविधियों को लेकर पहले से ही असंतोष का माहौल था। शनिवार को जब उसकी मौजूदगी बस स्टैंड क्षेत्र में देखी गई तो युवती के परिजनों ने इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में लिया और उसे कोतवाली थाना लाया गया, जहां उससे प्रारंभिक पूछताछ की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़, रास्ता रोकने और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत आवश्यक सभी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी। इस घटना के बाद क्षेत्र में सामाजिक संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। कई संगठनों के प्रतिनिधि कोतवाली थाने पहुंचे और उन्होंने मांग की कि बाहरी ठेकेदारों और कार्य पर्यवेक्षकों की पृष्ठभूमि की जांच और सत्यापन को अनिवार्य बनाया जाए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और आगे की जांच के आधार पर अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि पीड़िता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए जाएंगे।
बीएसएफ कॉलोनी में दर्दनाक हादसा, कार की टक्कर से बच्चा गंभीर रूप से घायल, आरोपी मौके से फरार

मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां बीएसएफ कॉलोनी क्षेत्र में सड़क पर चल रहे एक मासूम बच्चे को कार ने जोरदार टक्कर मार दी। यह हादसा इतना भयावह था कि बच्चा टक्कर लगते ही कई फीट ऊपर उछलकर नीचे गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसे देखने के बाद स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और आक्रोश फैल गया है। जानकारी के अनुसार यह घटना शनिवार शाम करीब चार बजे की है, जब दो बच्चे अपने घर के बाहर सड़क के किनारे टहल रहे थे। इसी दौरान एक कार तेज रफ्तार और असंतुलित तरीके से सड़क पर आई और अचानक एक बच्चे को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बच्चा हवा में उछलकर दूर जा गिरा। हादसे के बाद कार पास के एक घर से टकरा गई, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद कार में सवार युवक तुरंत मौके से फरार हो गए और घायल बच्चे की कोई मदद नहीं की। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बच्चे को उठाकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है और उसका इलाज जारी है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और लोग सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। फुटेज के आधार पर कार और उसमें सवार युवकों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी तेज रफ्तार वाहनों की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इस तरह की गंभीर घटना पहली बार हुई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। लोगों ने मांग की है कि कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में स्पीड कंट्रोल और ट्रैफिक निगरानी को और सख्त किया जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। डॉक्टरों के अनुसार घायल बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जा रही है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे आरोपी वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर शहरों में सड़क सुरक्षा और लापरवाह ड्राइविंग के खतरों को उजागर करती है, जहां एक छोटी सी चूक भी किसी मासूम की जान पर भारी पड़ सकती है। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहन जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
तनीषा मुखर्जी ने फराह खान को कराया अपने आलीशान घर का टूर, काजोल की मदद से खरीदे गए आशियाने का किया खुलासा

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री तनीषा मुखर्जी हाल ही में फिल्ममेकर फराह खान के व्लॉग में नजर आईं, जहां उन्होंने अपने मुंबई स्थित आलीशान और बेहद खास घर का टूर कराया। इस दौरान तनीषा ने न सिर्फ अपने घर की खूबसूरती और डिजाइन के बारे में बात की, बल्कि उससे जुड़ी निजी और पारिवारिक यादों को भी साझा किया, जिसने इस बातचीत को और भी दिलचस्प बना दिया। तनीषा मुखर्जी का यह घर अपने क्लासिक और पुराने दौर की झलक के लिए जाना जाता है। घर के अंदर लकड़ी का पारंपरिक फर्नीचर, पुरानी शैली की सजावट और विशाल सीढ़ियां इसे एक अलग पहचान देती हैं। घर का हर कोना किसी न किसी कहानी को अपने अंदर समेटे हुए दिखाई देता है, जहां आधुनिकता और विरासत का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। फराह खान ने भी घर के माहौल की सराहना करते हुए कहा कि मुंबई जैसे शहर में इस तरह की शांति और पुरानी शैली का वातावरण बहुत कम देखने को मिलता है। बातचीत के दौरान तनीषा मुखर्जी ने अपने घर की खरीद और उससे जुड़ी आर्थिक परिस्थितियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि इस घर को लेने में उनकी बहन काजोल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और आर्थिक रूप से उनकी मदद की थी। तनीषा ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि घर से जुड़े कई बड़े फैसलों में काजोल का योगदान काफी अहम रहा है। उनकी यह बात सुनकर फराह खान भी मुस्कुरा उठीं और माहौल बेहद सहज और पारिवारिक बन गया। तनीषा ने यह भी साझा किया कि यह घर केवल एक संपत्ति नहीं है, बल्कि उनकी मां तनुजा और पूरे परिवार की कई पुरानी यादों से जुड़ा हुआ एक भावनात्मक स्थान है। घर में रखे कई सामान पुराने घर से लाए गए हैं, जिन्हें आज भी उसी तरह संभालकर रखा गया है। यह घर परिवार की विरासत और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन चुका है, जहां हर वस्तु किसी न किसी याद को जीवित रखती है। व्लॉग के दौरान तनीषा और काजोल के रिश्ते की भी एक झलक सामने आई, जिससे यह साफ दिखाई दिया कि दोनों के बीच मजबूत पारिवारिक बंधन मौजूद है। तनीषा ने जिस सहजता से अपनी बहन के योगदान का उल्लेख किया, उससे उनके रिश्ते की गहराई और आपसी विश्वास का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, जहां दर्शक उनकी पारिवारिक बॉन्डिंग और घर की खूबसूरती की सराहना कर रहे हैं।
कर्नाटक में नेतृत्व बदलाव के बीच सिद्धारमैया को बड़ी जिम्मेदारी देने के संकेत, केसी वेणुगोपाल का बयान बना चर्चा का केंद्र

नई दिल्ली । कर्नाटक में सत्ता और संगठन के स्तर पर हुए हालिया नेतृत्व परिवर्तन के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से मुख्यमंत्री पद संभाल रहे सिद्धारमैया ने अब औपचारिक रूप से कमान डीके शिवकुमार को सौंप दी है, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर उनकी आगे की भूमिका को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का बयान सुर्खियों में आ गया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सिद्धारमैया को पार्टी ‘आराम नहीं करने देगी’ और उन्हें राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यह बयान कांग्रेस की उस रणनीति की ओर संकेत करता है, जिसमें अनुभवी नेताओं को संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में लगातार सक्रिय रखने की योजना दिखाई देती है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में जब डीके शिवकुमार को औपचारिक रूप से नेता चुना गया, उसी समय पार्टी के भीतर यह संदेश भी देने की कोशिश हुई कि यह बदलाव किसी एक नेता के पीछे हटने का संकेत नहीं है, बल्कि संगठनात्मक पुनर्संरचना का हिस्सा है। केसी वेणुगोपाल ने इस मौके पर सिद्धारमैया की राजनीतिक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उनके अनुभव का उपयोग आगे भी किया जाएगा। उनके अनुसार, सिद्धारमैया की राजनीतिक समझ और ओबीसी समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी उपयोगी साबित हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के दौरान कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने और दिल्ली में एक बड़ी जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव भी दिया था। यह प्रस्ताव इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने के लिए अनुभवी नेताओं को अग्रिम पंक्ति में बनाए रखना चाहती है। हालांकि 78 वर्षीय सिद्धारमैया ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और उन्होंने कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहने की इच्छा जताई। विधायक दल की बैठक में खुद सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखकर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सहज बनाने में अहम भूमिका निभाई। वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसके बाद विधायकों ने सर्वसम्मति से शिवकुमार को नेता चुन लिया। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर एकता का संदेश देने की कोशिश भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। बाद में सिद्धारमैया ने शिवकुमार को शुभकामनाएं देते हुए भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने संविधान और देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष की बात कही। इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन भले ही औपचारिक रूप से पूरा हो गया हो, लेकिन कांग्रेस के भीतर सिद्धारमैया की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है और पार्टी उन्हें विभिन्न स्तरों पर सक्रिय रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने संभाला नौसेना प्रमुख का पद, आत्मनिर्भर और आधुनिक नौसेना पर जोर

नई दिल्ली । भारतीय नौसेना के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने 31 मई को नौसेना प्रमुख का पदभार ग्रहण कर लिया। साउथ ब्लॉक परिसर में उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया, जिसके साथ ही वे भारतीय नौसेना के 27वें नौसेना प्रमुख बन गए। इस अवसर पर निवर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और औपचारिक रूप से सेवा से सेवानिवृत्त हुए। एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का नौसैनिक करियर लंबा और विविध अनुभवों से भरपूर रहा है। उन्हें वर्ष 1987 में भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था और वे संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के विशेषज्ञ माने जाते हैं। अपने सेवा काल में उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, संयुक्त सेवा कमान एवं स्टाफ कॉलेज और कई अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिससे उनकी रणनीतिक और तकनीकी समझ को और मजबूती मिली है। नौसेना प्रमुख का कार्यभार संभालने के बाद अपने पहले संबोधन में एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि वे इस जिम्मेदारी को विनम्रता, गर्व और कर्तव्य की भावना के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य लगातार बदल रहा है और अधिक जटिल होता जा रहा है, ऐसे में भारतीय नौसेना की परिचालन तत्परता को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए नौसेना को हर समय तैयार रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना पहले से ही आधुनिकीकरण और क्षमता विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही है और इस प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करने, नई तकनीकों को तेजी से अपनाने और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के विकास को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनके अनुसार आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में नौसेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में स्वदेशीकरण को और अधिक प्राथमिकता दी जाएगी। एडमिरल स्वामीनाथन ने संयुक्त सैन्य संचालन को मजबूत करने पर भी जोर दिया और कहा कि तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय आज की रणनीतिक जरूरत है। उन्होंने नौसेना कर्मियों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना के अधिकारी, नाविक और महिला कर्मी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पेशेवरों में शामिल हैं और उनके कल्याण, प्रशिक्षण तथा कार्य वातावरण में सुधार उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी रहेगी। अपने संबोधन में उन्होंने निवर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी के योगदान को भी याद किया और कहा कि उनके नेतृत्व में नौसेना ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं और एक मजबूत दिशा प्राप्त की। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी विरासत नौसेना को आगे भी प्रेरित करती रहेगी। नए नौसेना प्रमुख ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण युद्धपोतों और विमानवाहक पोत की कमान संभाली है, जिससे उन्हें समुद्री संचालन का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ है। उनके नेतृत्व में भारतीय नौसेना से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह न केवल तकनीकी रूप से अधिक उन्नत बनेगी, बल्कि रणनीतिक रूप से भी वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को और मजबूत करेगी।
तंबाकू सेवन में वैश्विक गिरावट के बावजूद किशोरों में वेपिंग बना गंभीर स्वास्थ्य संकट, WHO की रिपोर्ट में चेतावनी

नई दिल्ली । दुनिया भर में तंबाकू सेवन को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और वैश्विक स्तर पर इसके उपयोग में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन इसके साथ ही एक नई और गंभीर चुनौती उभरकर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। यह चुनौती किशोरों में तेजी से बढ़ती वेपिंग यानी ई-सिगरेट के उपयोग की है, जिसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक नया खतरा माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दशकों में तंबाकू उपयोग में उल्लेखनीय कमी आई है और कई देशों में सख्त नीतियों के कारण इसके सेवन पर नियंत्रण पाया गया है। वर्ष 2000 में जहां दुनिया भर में लगभग 1.379 अरब लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का उपयोग करते थे, वहीं 2024 तक यह संख्या घटकर लगभग 1.202 अरब रह गई है। यह गिरावट सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है। हालांकि इस सकारात्मक तस्वीर के बीच किशोरों में वेपिंग का बढ़ता चलन एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1.5 करोड़ किशोर, जिनकी उम्र 13 से 15 वर्ष के बीच है, ई-सिगरेट या वेपिंग का उपयोग कर रहे हैं। कई देशों में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह पाया गया है कि किशोरों में वेपिंग की दर वयस्कों की तुलना में कई गुना अधिक है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-सिगरेट और फ्लेवरयुक्त निकोटीन उत्पादों की आसान उपलब्धता ने युवाओं को तेजी से इसकी ओर आकर्षित किया है। इन उत्पादों को अक्सर सुरक्षित विकल्प के रूप में प्रचारित किया जाता है, लेकिन इनमें मौजूद निकोटीन अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला पदार्थ है, जो किशोरों के विकसित हो रहे मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि तंबाकू उद्योग लगातार अपने उत्पादों और विपणन रणनीतियों में बदलाव कर रहा है ताकि नई पीढ़ी को आकर्षित किया जा सके। फ्लेवरयुक्त ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और अन्य नए उत्पादों के माध्यम से युवाओं को लक्ष्य बनाने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर चुनौती के रूप में देख रहे हैं। लिंग और क्षेत्रीय स्तर पर भी तंबाकू उपयोग में विविध रुझान देखे जा रहे हैं। पुरुषों में तंबाकू सेवन अभी भी अधिक है, जबकि महिलाओं में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है, जबकि अफ्रीका और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में तंबाकू उपयोग बढ़ने की आशंका जताई गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट किया है कि तंबाकू से हर वर्ष लाखों लोगों की मौत होती है और यह हृदय रोग, कैंसर तथा श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण बना हुआ है। ऐसे में भले ही पारंपरिक तंबाकू उपयोग में गिरावट एक सकारात्मक संकेत हो, लेकिन वेपिंग का बढ़ता चलन इस प्रगति को चुनौती दे रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते किशोरों में वेपिंग की आदत को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है। इसी कारण कई देशों में इसके नियमन और जागरूकता अभियानों को और तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।