पुष्पा झुकेगा नहीं’ लिखी पिकअप से सागौन तस्करी: खंडवा में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

खंडवा। जिले के कालीभीत वन क्षेत्र में सागौन तस्करी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां फिल्मी अंदाज में ‘पुष्पा झुकेगा नहीं साला’ जैसे डायलॉग लिखी पिकअप गाड़ी से अवैध लकड़ी की तस्करी का खुलासा हुआ। वन विभाग की टीम ने मंगलवार देर रात घेराबंदी कर वाहन को पकड़ लिया, हालांकि अंधेरे का फायदा उठाकर तस्कर मौके से फरार हो गए। जांच में वाहन से करीब 3 घनमीटर सागौन लकड़ी बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग पौने दो लाख रुपये बताई जा रही है। इस कार्रवाई के बाद पूरा मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। जंगल में रोशनी देखकर बढ़ा शक, फिर शुरू हुई कार्रवाईमामला पश्चिम कालीभीत वन परिक्षेत्र के सिरालिया सब रेंज के भुरकुला जंगल क्षेत्र का है। नियमित गश्त के दौरान वनकर्मियों को जंगल के अंदर संदिग्ध वाहन की रोशनी दिखाई दी। देर रात जंगल में वाहन की मौजूदगी संदिग्ध लगने पर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद वन विभाग की टीम ने इलाके की घेराबंदी कर वाहन को रोका। जैसे ही टीम नजदीक पहुंची, तस्करों ने वन विभाग की गाड़ियों की रोशनी देख वाहन छोड़कर जंगल में भागने में सफलता पा ली। गाड़ी से मिला सागौन का बड़ा जखीराघेराबंदी के बाद जब वाहन की जांच की गई तो वह लॉक मिला। वन विभाग ने लॉक तोड़कर जब तलाशी ली तो अंदर सागौन के करीब 20 लट्ठे भरे हुए पाए गए। इसके बाद वाहन और लकड़ी दोनों को जब्त कर लिया गया। वन विभाग की कार्रवाई के बाद पिकअप पर लिखे फिल्मी डायलॉग भी सुर्खियों में आ गए हैं, जिससे यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। पहले से संदिग्ध थी गाड़ी की गतिविधियांवन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रम सिंह भदौरिया ने बताया कि यह वाहन पहले भी कई बार रात के समय जंगल क्षेत्र में संदिग्ध रूप से घूमता देखा गया था। हालांकि तब पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण कार्रवाई संभव नहीं हो सकी थी। इस बार वाहन को सागौन लकड़ी के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया है, जिससे तस्करी की पुष्टि हो गई है। अब विभाग इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गया है। तस्करी नेटवर्क की जांच तेज, मालिक से पूछताछ की तैयारीप्रारंभिक जांच में यह पिकअप वाहन वनग्राम कोटवारिया निवासी रामकिशन पाटिल के नाम पर दर्ज बताया जा रहा है। वन विभाग अब वाहन मालिक सहित अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर तस्करी के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की कोशिश कर रहा है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
खोखला होता देश, मौन समाज: नशे के खिलाफ अब आर-पार की जंग जरूरी..

ललित गर्ग:- भारत आज विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में अग्रणी है। देश की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यह युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी सामर्थ्य, सबसे बड़ी पूंजी और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। विज्ञान, तकनीक, उद्योग, शिक्षा, खेल और नवाचार के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों के पीछे इसी युवा शक्ति का योगदान है। किंतु विडंबना यह है कि आज यही युवा वर्ग नशे के बढ़ते जाल में फंसता जा रहा है। नशा अब केवल व्यक्तिगत कमजोरी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। देश के विभिन्न भागों में समय-समय पर करोड़ों और अरबों रुपये मूल्य के मादक पदार्थों की बरामदगी यह प्रमाणित करती है कि नशे का कारोबार संगठित अपराध का एक विशाल अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बन चुका है। विशेष रूप से पंजाब, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, गुजरात तथा पूर्वोत्तर राज्यों में सीमापार से होने वाली तस्करी ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लगातार हेरोइन, अफीम, चरस, कोकीन तथा सिंथेटिक ड्रग्स की बड़ी खेपों को पकड़ा जाना इस बात का संकेत है कि भारत को नशे के बड़े बाजार के रूप में देखा जा रहा है।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो तथा विभिन्न सरकारी रिपोर्टों के अनुसार देश में लाखों युवा किसी न किसी प्रकार के मादक पदार्थों के सेवन के आदी हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कराए गए एक व्यापक अध्ययन में यह तथ्य सामने आया था कि करोड़ों भारतीय तंबाकू, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं तथा उनमें बड़ी संख्या युवाओं की है। चिंता की बात यह है कि स्कूल और कॉलेज स्तर तक नशे की पहुंच बढ़ रही है। अनेक राज्यों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां किशोरों को ड्रग्स के वितरण और तस्करी में इस्तेमाल किया गया। नशे के बढ़ते संकट का एक राष्ट्रीय सुरक्षा पक्ष भी है। अनेक सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान प्रत्यक्ष युद्ध में लगातार असफल होने के बाद भारत को अस्थिर करने के लिए आतंकवाद, नकली मुद्रा और नशे की तस्करी जैसे छद्म युद्ध के हथियारों का उपयोग करता रहा है। पंजाब में लंबे समय से सीमा पार से ड्रोन और अन्य माध्यमों द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। अब जम्मू-कश्मीर में भी नशे के बढ़ते प्रभाव को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। आतंकवाद की कम होती गतिविधियों के बीच नशे का फैलाव एक नए खतरे के रूप में उभर रहा है, जिसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को कमजोर करना और समाज की ऊर्जा को नष्ट करना है।इसी संदर्भ में जम्मू-कश्मीर में प्रारंभ किया गया ‘नशामुक्त जम्मू-कश्मीर’ अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता पर भी बल देता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक समूहों तथा आम नागरिकों को जोड़ने का प्रयास किया गया है। कुलगाम सहित कई क्षेत्रों में विभिन्न समुदायों द्वारा इस अभियान को समर्थन दिया जाना इस बात का संकेत है कि नशे जैसी समस्या का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। वास्तव में नशे का सबसे दुखद और भयावह प्रभाव युवा पीढ़ी पर पड़ता है। युवा जीवन ऊर्जा, सृजन और सपनों का प्रतीक होता है, किंतु नशा इन सभी संभावनाओं को नष्ट कर देता है। एक बार नशे की गिरफ्त में आने के बाद व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी शारीरिक क्षमता, मानसिक संतुलन, आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा खोने लगता है। उसका आत्मविश्वास कमजोर पड़ जाता है और वह अवसाद, तनाव तथा अपराध की दुनिया की ओर बढ़ सकता है। यही कारण है कि नशा केवल व्यक्ति को नहीं, पूरे परिवार को प्रभावित करता है। परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ती है, पारिवारिक संबंध टूटते हैं और सामाजिक जीवन में अस्थिरता बढ़ती है।नशे के विस्तार के पीछे केवल तस्करी जिम्मेदार नहीं है। इसके सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारण भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। बेरोजगारी, भविष्य की अनिश्चितता, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक तनाव, सामाजिक विघटन, अकेलापन, मानसिक अवसाद और गलत संगति युवाओं को नशे की ओर धकेलती है। आधुनिक उपभोक्तावादी संस्कृति ने भी कृत्रिम सुख और त्वरित आनंद की मानसिकता को बढ़ावा दिया है। जब जीवन में लक्ष्य, दिशा और सकारात्मक प्रेरणा का अभाव होता है, तब व्यक्ति नशे जैसे विनाशकारी विकल्पों की ओर आकर्षित हो सकता है। नशे और अपराध का संबंध भी अत्यंत गहरा है। अनेक अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि चोरी, लूट, हिंसा, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य अपराधों के पीछे नशे की भूमिका बढ़ती जा रही है। नशे की डोज प्राप्त करने के लिए युवा अपराध की राह पर उतर जाते हैं। इससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है और समाज में असुरक्षा का वातावरण बनता है। सरकारें इस चुनौती से निपटने के लिए अनेक स्तरों पर प्रयास कर रही हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेंसी, सीमा सुरक्षा बल तथा राज्य पुलिस की संयुक्त कार्रवाइयों से कई बड़े ड्रग नेटवर्क ध्वस्त किए गए हैं। पंजाब, राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में विशेष अभियान चलाकर तस्करों पर शिकंजा कसा गया है।इस संदर्भ में सामाजिक और आध्यात्मिक आंदोलनों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। कानून भय पैदा कर सकता है, लेकिन जीवन में सकारात्मक परिवर्तन केवल जागरूकता और आत्मानुशासन से ही आता है। आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से नशामुक्ति को एक व्यापक सामाजिक अभियान का स्वरूप दिया था। उन्होंने संयम, सदाचार और आत्मनियंत्रण के आधार पर लाखों लोगों को व्यसनमुक्त जीवन की प्रेरणा दी। अनेक क्षेत्रों में उनके अभियान ने उल्लेखनीय परिणाम दिए। आचार्य महाश्रमण ने भी अपनी ऐतिहासिक अहिंसा यात्रा के दौरान भारत और पड़ोसी देशों में लाखों लोगों को नशा त्यागने की प्रेरणा दी। उनकी पदयात्राओं का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य समाज में नैतिक चेतना जगाना और युवाओं को व्यसनमुक्त जीवन की ओर प्रेरित करना रहा। हजारों किलोमीटर की यात्राओं में उन्होंने गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों को यह संदेश दिया कि नशामुक्ति केवल स्वास्थ्य की सुरक्षा नहीं, बल्कि आत्मविकास, पारिवारिक सुख और राष्ट्र निर्माण का आधार है।आज आवश्यकता इस बात की है कि नशे के विरुद्ध बहुआयामी रणनीति अपनाई जाए। सीमाओं पर
खंडवा को केंद्र सरकार से मिली 4 सड़कें: PMGSY के तहत 14 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

खंडवा। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी विकास सौगात दी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत खंडवा जिले की चार महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 13.74 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा, जिसके तहत 14.44 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इस स्वीकृति के बाद लंबे समय से लंबित ग्रामीण इलाकों की सड़क सुविधा से जुड़ी मांगों को राहत मिलने की उम्मीद है। नई सड़कों के बनने से न सिर्फ गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और आवागमन व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तारइन सड़कों के निर्माण से किसानों को अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी, वहीं विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों के लिए भी आवागमन सुगम हो जाएगा। बरसात के मौसम में जिन इलाकों में संपर्क टूट जाता था, वहां अब स्थायी सड़क सुविधा से राहत मिलेगी। केंद्र सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है, ताकि विकास का लाभ सीधे गांवों तक पहुंच सके। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी मंजूरीइन परियोजनाओं को केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है। खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि स्वीकृति पत्र उन्हें सौंपा गया है और यह निर्णय क्षेत्र की वर्षों पुरानी जरूरतों को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण भारत में कनेक्टिविटी को मजबूत करने का काम तेजी से किया जा रहा है और खंडवा जिले को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कौन-कौन से मार्ग बनेंगेस्वीकृत परियोजनाओं में कुल चार सड़क मार्ग शामिल हैं:बरमलाय से कुकडाल मार्ग – 7.64 किमी, लागत 7.18 करोड़ रुपयेबरमलाय से सुकलतालाई-4 मार्ग – 3.20 किमी, लागत 3.13 करोड़ रुपयेलहाड़पुर से पारवाड़ी मार्ग – 2.24 किमी, लागत 2.06 करोड़ रुपयेमालूद रोड से खेड़ी रैयत मार्ग – 1.36 किमी, लागत 1.35 करोड़ रुपयेइन सभी परियोजनाओं के पूरा होने पर ग्रामीण क्षेत्रों की आवाजाही व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। ग्रामीणों में खुशी का माहौलसड़क निर्माण की स्वीकृति के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से खराब और कच्चे रास्तों के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब स्थायी सड़क बनने से उनकी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।
खरगोन में 1.05 लाख हेक्टेयर में कपास की बोवनी: सरकारी खरीदी से बढ़ा रकबा, प्रदेश में सबसे बड़ा लक्ष्य

खरगोन। जिले में कपास की खेती इस बार तेज रफ्तार पकड़ती नजर आ रही है। प्री-मानसून गतिविधियों और अनुकूल मौसम के चलते अब तक 1.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है, जो कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 51 प्रतिशत है। नर्मदा क्षेत्र के कसरावद, महेश्वर और बड़वाह इलाकों में सबसे अधिक बुवाई दर्ज की गई है, जहां किसान तेजी से खेतों में काम कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में कपास उत्पादन के प्रमुख जिलों में शामिल खरगोन इस बार भी अग्रणी बना हुआ है। इस वर्ष जिले के लिए 2.09 लाख हेक्टेयर (209800 हेक्टेयर) का बुवाई लक्ष्य तय किया गया है, जो पिछले वर्ष के लगभग समान है। हालांकि, पिछले साल हुई अच्छी सरकारी खरीदी के कारण इस बार कपास के रकबे में हल्की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। सरकारी खरीदी का असर, किसानों का बढ़ा रुझानकृषि विभाग के अनुसार पिछले वर्ष कपास की मजबूत सरकारी खरीदी ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका सीधा असर इस साल की बुवाई पर दिख रहा है। अनुमान है कि इस बार कपास का रकबा करीब 300 हेक्टेयर तक बढ़ सकता है। किसानों का कहना है कि बेहतर समर्थन मूल्य और खरीद व्यवस्था के चलते कपास की खेती अधिक लाभकारी साबित हो रही है, जिससे वे अन्य फसलों की तुलना में कपास को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्री-मानसून बारिश से मिला फायदाजिले में हाल ही में हुई प्री-मानसून बारिश ने खेती के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। तापमान 38 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जो कपास की बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। मौसम में नमी और हल्की बारिश के कारण खेतों में नमी बनी हुई है, जिससे बुवाई कार्य में तेजी आई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा तो आने वाले दिनों में बुवाई का आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। नर्मदा क्षेत्र में सबसे ज्यादा बुवाईजिले के कसरावद, महेश्वर और बड़वाह क्षेत्रों में कपास की बुवाई सबसे अधिक दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में सिंचाई के बेहतर साधन उपलब्ध होने के कारण किसान समय पर बुवाई कर पा रहे हैं। सहायक संचालक कृषि प्रकाश ठाकुर ने बताया कि जिले में लू का असर कम हो गया है और यह समय कपास की बुवाई के लिए पूरी तरह अनुकूल है। उन्होंने पुष्टि की कि इस वर्ष का लक्ष्य 2.09 लाख हेक्टेयर तय किया गया है और विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में और बढ़ेगा रकबाकृषि विभाग का अनुमान है कि जैसे-जैसे मानसून करीब आएगा, वैसे-वैसे कपास की बुवाई में और तेजी आएगी। फिलहाल किसान अनुकूल मौसम का पूरा फायदा उठा रहे हैं और खेतों में गतिविधियां बढ़ गई हैं।
केरल हाईकोर्ट का फैसला: ‘वायरल गर्ल’ को बालिग माना, पति को एमपी में जमानत के लिए ट्रांजिट बेल

नई दिल्ली । केरल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में ‘वायरल गर्ल’ को प्रथम दृष्टया बालिग मानते हुए उसके पति को एक महीने की ट्रांजिट बेल प्रदान कर दी है। इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश पुलिस अब अगले एक महीने तक आरोपी पति को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। इस अवधि में उसे मध्य प्रदेश की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने की अनुमति दी गई है। यह मामला लगातार विवादों में घिरा हुआ है, जिसमें उम्र, शादी की वैधता और POCSO एक्ट के तहत दर्ज केस जैसे कई गंभीर पहलू शामिल हैं। कोर्ट ने जन्म प्रमाण पत्र और दस्तावेजों को माना आधारकेरल हाईकोर्ट के जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद जन्म प्रमाण पत्र, वोटर आईडी और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज यह संकेत देते हैं कि युवती बालिग है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि युवती स्वयं भी अपनी उम्र बालिग होने का दावा कर रही है और उसने विवाह को लेकर शपथपत्र भी दिया है। हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि जन्म प्रमाण पत्र फर्जी है और असल में युवती नाबालिग है। लेकिन कोर्ट ने फिलहाल इस दलील को स्वीकार नहीं किया। पति को मिली राहत, गिरफ्तारी पर रोकअदालत ने आदेश दिया कि पति 3 जून से एक महीने के भीतर मध्य प्रदेश की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। इस अवधि के दौरान उसे पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इस फैसले को मामले में बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि मध्य प्रदेश पुलिस उस पर POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही थी। शादी की वैधता और धर्म आधारित दलीलें भी बनीं विवाद का हिस्सायाचिका में दंपती ने दावा किया कि यदि वे मध्य प्रदेश जाते हैं तो उन्हें अलग-अलग धर्मों के कारण संभावित खतरा हो सकता है और ‘ऑनर किलिंग’ की आशंका जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि बिना सुरक्षा के वे यात्रा या कानूनी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते। वहीं सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि दोनों अलग-अलग धर्मों से हैं और मंदिर में हुई शादी की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। फिल्म शूटिंग से शुरू हुई थी कहानी जानकारी के अनुसार, दोनों की मुलाकात केरल में एक फिल्म शूटिंग के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे संबंध बढ़े और मार्च 2026 में दोनों ने शादी कर ली। इसके बाद मामला विवादों में तब आया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने उम्र को लेकर आपत्ति जताई। POCSO केस और जांच में बढ़ा विवादआयोग का दावा है कि शादी के समय युवती की उम्र 16 वर्ष थी और दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद मध्य प्रदेश के खरगोन में पति के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। वहीं जांच में जन्म प्रमाण पत्रों में विसंगतियां सामने आने और मेडिकल रिकॉर्ड में अलग जन्मतिथि दर्ज होने के बाद मामला और जटिल हो गया। डायरेक्टर पर भी आरोप, अलग FIR दर्जइसी प्रकरण में युवती ने फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ भी POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई है। आरोप है कि शूटिंग के दौरान उसका शोषण किया गया और फिल्म में अवसर देने के नाम पर उसे प्रभावित किया गया। निर्देशक ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और साजिश बताया है। यह मामला अब कानूनी, सामाजिक और दस्तावेजी विवादों के बीच उलझता जा रहा है। एक ओर कोर्ट ने फिलहाल युवती को बालिग मानते हुए पति को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां दस्तावेजों और उम्र की सत्यता को लेकर जांच में जुटी हैं।
खरीफ सीजन से पहले खाद की किल्लत, किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी

खरगोन। जिले के कसरावद और झिरन्या क्षेत्र के वनग्रामों में किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। फार्मर आईडी जनरेट न होने के कारण बड़ी संख्या में वन अधिकार पट्टाधारी किसान रासायनिक खाद से वंचित रह गए हैं। खरीफ सीजन की बुवाई से ठीक पहले खाद वितरण व्यवस्था बाधित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों द्वारा अब खाद का वितरण फार्मर आईडी आधारित टोकन सिस्टम से किया जा रहा है, लेकिन वनग्रामों के अधिकांश किसानों की फार्मर आईडी अब तक नहीं बन पाई है। ऐसे में वे सिस्टम से बाहर हो गए हैं और जरूरी खाद प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की बढ़ी मुश्किलेंझिरन्या क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि यह क्षेत्र पूरी तरह आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत है, जहां अधिकांश किसानों को वन अधिकार पट्टे प्राप्त हैं। वर्षों से ये किसान इन्हीं भूमि पर खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं, लेकिन अब डिजिटल व्यवस्था के कारण वे खाद जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले उनके दस्तावेज और फार्मर आईडी अपडेट नहीं की गई, जिससे पूरा वनग्राम सिस्टम से बाहर हो गया है। तहसीलदार को सौंपा गया ज्ञापन, समाधान की मांगइस समस्या को लेकर समाजसेवी गजेंद्र पटेल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने तहसीलदार नरेंद्र मुवेल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की फार्मर आईडी तत्काल बनाई जाए और उन्हें खाद वितरण के लिए टोकन जारी किए जाएं।किसानों ने साफ कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। खरीफ सीजन की बुवाई पर संकटकिसानों ने बताया कि खरीफ सीजन की बुवाई का समय बेहद नजदीक है और इस समय खाद का उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। बारिश शुरू होने के साथ ही खेती का कार्य तेज हो जाता है, लेकिन खाद न मिलने से पूरी कृषि तैयारी प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि अगर समय पर खाद नहीं मिला तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीदग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तकनीकी और दस्तावेजी समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान निकाला जाए। साथ ही वनग्राम के सभी पात्र किसानों को सिस्टम में शामिल कर उन्हें खाद वितरण की सुविधा सुनिश्चित की जाए। फिलहाल क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है और किसान प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
आजीविका मिशन बना उम्मीद की नई किरण, रेखा बेसरा ने खड़ा किया सफल मुर्गी पालन व्यवसाय

नई दिल्ली । ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संचालित विभिन्न योजनाएं अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव की कहानी लिख रही हैं। झारखंड के जामताड़ा जिले की रहने वाली रेखा बेसरा इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी हैं। कभी परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दूसरों के खेतों में मजदूरी करने वाली रेखा आज सफल मुर्गी पालन उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी यह सफलता न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में बदलाव लेकर आई है, बल्कि आसपास की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। कुछ वर्ष पहले तक रेखा बेसरा का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें और उनके पति को मजदूरी करनी पड़ती थी। सीमित आय के कारण बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं था। ऐसे समय में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के माध्यम से उन्हें ग्रामीण आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने समूह की सदस्यता ग्रहण की और उपलब्ध प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रेखा ने बैंक से ऋण लेकर मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के कारण उनका व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। वर्तमान में उनके पास लगभग 100 मुर्गियां हैं और उनका पोल्ट्री व्यवसाय लगातार विस्तार कर रहा है। इससे होने वाली नियमित आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की तुलना में काफी मजबूत बना दिया है। मुर्गी पालन व्यवसाय की सफलता में उनके पति का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दोनों मिलकर फार्म का संचालन करते हैं और उत्पादन से लेकर बिक्री तक की जिम्मेदारियां साझा करते हैं। स्थानीय बाजार में अंडों की अच्छी मांग होने के कारण उनके उत्पाद आसानी से बिक जाते हैं। इससे परिवार को स्थिर आय का स्रोत प्राप्त हुआ है और आर्थिक सुरक्षा भी बढ़ी है। आय में वृद्धि का सबसे बड़ा लाभ बच्चों की शिक्षा और परिवार के जीवन स्तर में सुधार के रूप में दिखाई दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार आधारित गतिविधियां महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही हैं। मुर्गी पालन, बकरी पालन, अंडा उत्पादन और अन्य छोटे उद्यमों के माध्यम से महिलाएं अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ परिवार के आर्थिक निर्णयों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब महिलाओं को सही दिशा, कौशल विकास और आर्थिक सहयोग मिलता है तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में योगदान देती हैं। रेखा बेसरा की सफलता इसी सोच को मजबूत करती है। उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि संसाधनों और अवसरों का उचित उपयोग करके ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। आज रेखा बेसरा की कहानी क्षेत्र की अनेक महिलाओं को स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। उनकी मेहनत और सफलता यह साबित करती है कि आत्मविश्वास, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग के बल पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक समृद्धि का नया अध्याय लिखा जा सकता है। ऐसी कहानियां देशभर में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के बढ़ते कदमों का मजबूत उदाहरण बनकर सामने आ रही हैं।
बस स्टैंड और मंदिर मार्ग पर शराब दुकान-ढाबा हटाने की मांग तेज: ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

शाजापुर। जिले की ग्राम पंचायत मोहन बड़ोदिया में बस स्टैंड परिसर और प्रसिद्ध गुसाईजी की बैठक मंदिर जाने वाले मार्ग पर संचालित शराब दुकान और नॉनवेज ढाबे को हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकजुट होकर कलेक्टर के नाम ग्राम पंचायत, थाना और तहसील कार्यालय में ज्ञापन सौंपा और तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थान और मंदिर जाने वाले मुख्य मार्ग पर शराब दुकान का संचालन क्षेत्र के सामाजिक माहौल को प्रभावित कर रहा है। लोगों का आरोप है कि इससे न केवल आम नागरिकों को असुविधा हो रही है, बल्कि धार्मिक वातावरण भी बाधित हो रहा है। स्कूल, पंचायत और मंदिर के पास दुकान से बढ़ी चिंतग्रामीणों ने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि जिस स्थान पर शराब दुकान संचालित हो रही है, उसके आसपास ग्राम पंचायत भवन, स्कूल, बस स्टैंड, रिहायशी कॉलोनी और डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थित है। इसके अलावा यह मार्ग गुसाईजी की बैठक मंदिर तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता भी है, जहां नियमित रूप से धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से महिलाओं और श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना रहता है, ऐसे में शराब दुकान और ढाबे की मौजूदगी से असुरक्षा का माहौल बनता है। टीनशेड में बैठकर शराब सेवन का आरोपग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शराब ठेके के पास टीनशेड लगाकर बैठने की व्यवस्था की गई है, जहां दिनभर शराब पीने वालों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे क्षेत्र में गाली-गलौज, विवाद और अराजकता की स्थिति बनी रहती है, जिससे आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से गांव की शांति और सामाजिक माहौल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच के निर्देशमामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार ने नॉनवेज ढाबे के संचालन स्थल की जांच कर ग्राम पंचायत को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर गंदगी फैलाने और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं आबकारी विभाग की सदस्य मीनाक्षी सिंह ने दो दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों की उम्मीद: जल्द हटे अवैध गतिविधियांग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द इस मामले में ठोस कदम उठाएगा और बस स्टैंड तथा मंदिर मार्ग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को विवाद और अव्यवस्था से मुक्त कराया जाएगा। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
Apple का बड़ा दांव: AI से लैस स्मार्ट चश्मे की तैयारी तेज, 2027 के अंत तक हो सकता है लॉन्च

नई दिल्ली । तकनीक की दुनिया में पहनने योग्य स्मार्ट डिवाइसों को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच Apple अपने पहले स्मार्ट ग्लासेस को लेकर चर्चा में है। कंपनी लंबे समय से ऐसे डिवाइस पर काम कर रही है जो केवल एक तकनीकी उत्पाद न होकर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन सके। नई रिपोर्टों के अनुसार Apple के पहले स्मार्ट ग्लासेस अब 2027 के अंत तक लॉन्च हो सकते हैं। पहले उम्मीद की जा रही थी कि यह डिवाइस 2026 के अंत तक पेश कर दिया जाएगा, लेकिन कंपनी इस उत्पाद को अधिक परिपक्व और उपयोगी बनाने के लिए अतिरिक्त समय ले रही है। बताया जा रहा है कि Apple इस नए डिवाइस को अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना चाहती है। कंपनी का लक्ष्य है कि स्मार्ट ग्लासेस केवल नोटिफिकेशन दिखाने या कॉल करने तक सीमित न रहें, बल्कि वे उपयोगकर्ताओं के लिए एक व्यक्तिगत डिजिटल सहायक की तरह काम करें। इसी वजह से Apple Intelligence और Siri को इस डिवाइस के केंद्र में रखा जा रहा है। भविष्य में यह चश्मा उपयोगकर्ता की आवाज समझकर विभिन्न कार्यों को पूरा कर सकेगा और कई जरूरी जानकारियां सीधे सामने उपलब्ध करा सकेगा। तकनीकी जानकारों का मानना है कि Apple का यह कदम पहनने योग्य तकनीक के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है। जहां कई कंपनियां ऑगमेंटेड रियलिटी आधारित जटिल फीचर्स पर जोर दे रही हैं, वहीं Apple शुरुआत में एक सरल और व्यावहारिक उत्पाद पेश करने की रणनीति अपना रही है। कंपनी ऐसे स्मार्ट ग्लासेस तैयार करना चाहती है जिन्हें लोग पूरे दिन आराम से पहन सकें और जिनका उपयोग किसी विशेष अवसर तक सीमित न रहे। यही वजह है कि डिजाइन, वजन, बैटरी क्षमता और उपयोगकर्ता अनुभव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार स्मार्ट ग्लासेस में कैमरा, माइक्रोफोन और स्पीकर जैसी सुविधाएं दी जा सकती हैं। इनकी मदद से उपयोगकर्ता फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर सकेंगे, फोन कॉल कर पाएंगे तथा वॉयस कमांड के जरिए विभिन्न सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे। इसके अलावा नोटिफिकेशन देखने, दिशा-निर्देश प्राप्त करने और दैनिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल करने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकती हैं। इससे स्मार्टफोन पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है और कई सामान्य कार्य सीधे चश्मे के माध्यम से किए जा सकेंगे। कीमत को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस डिवाइस की कीमत प्रीमियम श्रेणी में रखी जा सकती है, लेकिन इसे आम उपभोक्ताओं की पहुंच के भीतर रखने की भी कोशिश की जाएगी। कंपनी का उद्देश्य केवल तकनीकी उत्साही लोगों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक उपभोक्ता वर्ग को आकर्षित करना है। इसी कारण हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच संतुलन बनाकर ऐसा उत्पाद तैयार किया जा रहा है जो उपयोगी होने के साथ-साथ व्यावहारिक भी हो। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाला है। ऐसे में स्मार्ट ग्लासेस जैसे उपकरण उपयोगकर्ताओं को तकनीक से जोड़ने का नया माध्यम बन सकते हैं। Apple भी इसी दिशा में अपनी दीर्घकालिक रणनीति तैयार कर रही है। हालांकि शुरुआती मॉडल में सीमित सुविधाएं मिल सकती हैं, लेकिन भविष्य में सॉफ्टवेयर अपडेट और नए AI फीचर्स के जरिए इसकी क्षमताओं को लगातार बढ़ाया जा सकेगा। तकनीकी बाजार में स्मार्ट ग्लासेस को अगली बड़ी क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। यदि Apple अपने विजन के अनुसार इस उत्पाद को सफलतापूर्वक बाजार में उतारने में कामयाब रहती है, तो यह न केवल पहनने योग्य तकनीक की परिभाषा बदल सकता है बल्कि उपभोक्ताओं के तकनीक इस्तेमाल करने के तरीके को भी नई दिशा दे सकता है।
बढ़ती ईंधन लागत पर सरकार का बड़ा फैसला, घरेलू एयरलाइंस के लिए 10,000 करोड़ रुपये का विशेष समर्थन पैकेज

नई दिल्ली । देश के विमानन क्षेत्र को बढ़ती ईंधन लागत के दबाव से राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की अस्थिर और ऊंची कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की विशेष बजटीय सहायता को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इस कदम से एयरलाइंस को ईंधन लागत में स्थिरता मिलेगी और वे अपने परिचालन को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगी। सरकार द्वारा स्वीकृत यह सहायता तेल विपणन कंपनियों को ब्याज-मुक्त अग्रिम राशि के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन कीमतों में आने वाले अचानक उतार-चढ़ाव के दौरान एयरलाइंस को अपेक्षाकृत स्थिर दरों पर एटीएफ उपलब्ध कराना है। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण विमानन ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर एयरलाइंस की परिचालन लागत पर पड़ा है। नई व्यवस्था के तहत एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण सहायता को 36 महीनों तक लागू रखा जाएगा। हालांकि इसकी वार्षिक समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार इसमें संशोधन भी संभव होगा। योजना का उद्देश्य केवल तत्काल राहत प्रदान करना नहीं है, बल्कि विमानन उद्योग को वित्तीय अनिश्चितताओं से बचाते हुए दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करना भी है। सरकारी व्यवस्था के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की आयात समता कीमत निर्धारित मानक स्तर से अधिक हो जाती है, तो उससे होने वाले अतिरिक्त वित्तीय भार की भरपाई इस सहायता कोष से की जाएगी। दूसरी ओर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में कमी आएगी, तब तेल विपणन कंपनियों से अंतर की राशि वापस ली जाएगी और उसे सरकारी कोष में जमा कराया जाएगा। इस प्रकार योजना को संतुलित और वित्तीय रूप से जिम्मेदार ढंग से संचालित करने का प्रयास किया गया है। यह सुविधा सभी इच्छुक अनुसूचित भारतीय एयरलाइंस के लिए उपलब्ध होगी और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की उड़ानों पर लागू होगी। योजना में भाग लेने वाली एयरलाइंस को एक निर्धारित अवधि तक केवल अधिकृत तेल विपणन कंपनियों से ही एटीएफ खरीदना होगा। इसके लिए एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों के बीच औपचारिक समझौता किया जाएगा, जिसमें संबंधित मंत्रालय भी भागीदार होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन उद्योग की लागत संरचना में ईंधन का हिस्सा अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में ईंधन कीमतों में तेज वृद्धि सीधे टिकट दरों, परिचालन योजनाओं और एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करती है। सरकार की इस पहल से एयरलाइंस को लागत प्रबंधन में मदद मिलेगी और वे भविष्य की व्यावसायिक रणनीतियां अधिक सटीक तरीके से तैयार कर सकेंगी। इस निर्णय का प्रभाव केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। पर्यटन, होटल उद्योग, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय संपर्क जैसे क्षेत्रों को भी इससे अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। बेहतर और स्थिर हवाई सेवाएं आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे व्यापक स्तर पर विकास को प्रोत्साहन मिल सकता है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतों में बेहद तेज वृद्धि हुई है। कुछ ही महीनों के भीतर ईंधन लागत में कई गुना बढ़ोतरी ने एयरलाइंस के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर दी थी। ऐसे समय में सरकार का यह कदम विमानन उद्योग को राहत देने और उसकी वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।