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टैंकर का ढक्कन खोलकर ईंधन चोरी का खेल, जबलपुर में 2 आरोपी पकड़े गए

मध्य प्रदेश । जबलपुर में पेट्रोल-डीजल सप्लाई सिस्टम से जुड़ी बड़ी चोरी का मामला सामने आया है। शहपुरा-भिटौनी ऑयल प्लांट से निकलने वाले ईंधन से भरे टैंकरों से चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए क्राइम ब्रांच और भेड़ाघाट थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों को उस समय पकड़ा गया जब वे सुनसान इलाके में टैंकर से पेट्रोल-डीजल निकाल रहे थे पुलिस ने मौके से चोरी किया गया ईंधन, टैंकर और चोरी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी जब्त किए हैं। पेट्रोलिंग के दौरान मिली सूचना से हुई कार्रवाईभेड़ाघाट थाना प्रभारी कमलेश चौरिया के अनुसार, पुलिस टीम क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि ग्राम पडुआ में एक इंडियन ऑयल कंपनी का टैंकर संदिग्ध स्थिति में खड़ा है और उससे ईंधन निकाला जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत घेराबंदी की और मौके से दो लोगों को पकड़ लिया। इनमें एक व्यक्ति टैंकर के ऊपर चढ़कर ढक्कन खोल रहा था, जबकि दूसरा नीचे गैलनों में तेल भर रहा था। चालक ही निकला मुख्य आरोपी, साथी के साथ मिलकर करता था चोरीपूछताछ में पकड़े गए आरोपियों की पहचान राजेश यादव (35), निवासी सिरमौर (रीवा) और मुकेश सेन (34), निवासी सुहागी अधारताल के रूप में हुई है। चौंकाने वाली बात यह रही कि मुख्य आरोपी राजेश यादव उसी टैंकर का चालक था। उसने स्वीकार किया कि वह शहपुरा-भिटौनी से पेट्रोल और डीजल लेकर रानीताल चौक स्थित पेट्रोल पंप के लिए निकला था, लेकिन रास्ते में अपने साथी के साथ मिलकर सुनसान जगह पर टैंकर रोककर ईंधन की चोरी करता था। औजारों से खोलते थे टैंकर, 50 लीटर पेट्रोल और 85 लीटर डीजल बरामदआरोपियों ने टैंकर का ढक्कन खोलने के लिए रिपिट खोलने की मशीन, हथौड़ी, पेचकस और प्लास्टिक की सटक जैसे औजारों का इस्तेमाल किया। इसके बाद कुप्पी और अन्य साधनों की मदद से गैलनों में ईंधन भरा जाता था। पुलिस को मौके से पांच गैलन बरामद हुए, जिनमें से दो में करीब 50 लीटर पेट्रोल और तीन में लगभग 85 लीटर डीजल पाया गया। टैंकर, उपकरण और मोबाइल जब्त, मामला दर्जपुलिस ने मौके से इंडियन ऑयल का टैंकर, ईंधन से भरे गैलन, विभिन्न औजार, मोबाइल फोन और चाबियां जब्त कर ली हैं। दोनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और ईसी एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

थिंकटेक इंडिया पर धोखाधड़ी के आरोपों का साया: CEO गिरफ्तार, 700 से अधिक कर्मचारियों का भविष्य अधर में

नई दिल्ली । पुणे के प्रमुख आईटी केंद्र हिंजेवाड़ी में संचालित थिंकटेक इंडिया से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कंपनी के अचानक संचालन बंद कर देने और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद 700 से अधिक कर्मचारी और इंटर्न गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से वंचित कर दिया गया, जबकि उनके वेतन, स्टाइपेंड और कंपनी के पास जमा सुरक्षा राशि अब भी फंसी हुई है। मामला उस समय सामने आया जब एक इंटर्न ने कंपनी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में वित्तीय अनियमितताओं, भुगतान रोकने और कर्मचारियों से धन लेने के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी की गतिविधियों की पड़ताल शुरू की। शुरुआती जांच के दौरान कई अन्य कर्मचारियों और इंटर्न ने भी समान शिकायतें दर्ज कराईं, जिससे मामला और व्यापक हो गया। जांच के क्रम में पुलिस ने कंपनी के सीईओ हर्षल ठाकरे को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तारी कथित वित्तीय घोटाले और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों के आधार पर की गई है। पुलिस अब कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और कारोबारी गतिविधियों की विस्तृत जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कर्मचारियों के साथ हुए कथित वित्तीय नुकसान के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी ने अप्रैल महीने में अचानक अपना संचालन बंद कर दिया। कई कर्मचारी नियमित रूप से कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि दफ्तर बंद है और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों या प्रबंधन से संपर्क संभव नहीं हो पा रहा है। इस स्थिति ने कर्मचारियों के सामने न केवल रोजगार का संकट खड़ा कर दिया, बल्कि उनकी आर्थिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू कर्मचारियों और इंटर्न से ली गई सुरक्षा जमा राशि को लेकर भी है। कर्मचारियों का दावा है कि कंपनी ने आधिकारिक लैपटॉप और अन्य उपकरण उपलब्ध कराने के नाम पर प्रत्येक कर्मचारी से लगभग 15 हजार रुपये जमा कराए थे। अब कंपनी के संचालन बंद होने के बाद यह राशि वापस नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों की चिंता और बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी शुरुआती दौर में समय पर वेतन और स्टाइपेंड का भुगतान करती थी, जिससे कर्मचारियों का भरोसा बना रहा। हालांकि, इस वर्ष जनवरी से भुगतान में अनियमितता शुरू हुई और बाद में वेतन पूरी तरह रुक गया। कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि बकाया भुगतान के लिए कंपनी ने उन्हें चेक जारी किए, लेकिन इनमें से अनेक चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गए। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति और प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। जांच एजेंसियों ने इस मामले में कंपनी के ट्रेनिंग एवं डेवलपमेंट विभाग के प्रमुख तथा एक एचआर प्रबंधक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और संबंधित दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। यह मामला देश के आईटी क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों और नए रोजगार तलाश रहे युवाओं के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। फिलहाल प्रभावित कर्मचारी अपने बकाया भुगतान और जमा राशि की वापसी की उम्मीद में जांच प्रक्रिया के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जबकि पुलिस वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों को जुटाने में लगी हुई है।

योग दिवस पर बड़ा कार्यक्रम, जबलपुर में शामिल हो सकती हैं राष्ट्रपति; स्कूलों में अभ्यास सत्र शुरू

मध्य प्रदेश । जबलपुर में 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार कार्यक्रम को और भी भव्य बनाने की योजना है, क्योंकि इसमें भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि उनका दौरा अभी प्रस्तावित है, लेकिन प्रशासन ने इसे लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति के साथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कई वरिष्ठ मंत्री भी इस कार्यक्रम में मौजूद रह सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर लगातार बैठकें शुरू कर दी हैं। सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष फोकसराष्ट्रपति के संभावित आगमन को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की चूक नहीं चाहता। कार्यक्रम स्थल, रूट मैप, हेलीकॉप्टर लैंडिंग ज़ोन और भीड़ प्रबंधन को लेकर विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। मानसून की आशंका को देखते हुए वाटरप्रूफ डोम और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है। कार्यक्रम के लिए गैरीसन ग्राउंड और ग्वारीघाट स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज मैदान को संभावित स्थल के रूप में देखा जा रहा है। जल्द ही अंतिम स्थल का निर्णय लिया जा सकता है। स्कूलों में योग अभ्यास सत्र अनिवार्य, बच्चों की होगी बड़ी भागीदारीइस आयोजन में स्कूली बच्चों की भागीदारी को लेकर शिक्षा विभाग भी सक्रिय हो गया है। विभाग की ओर से स्कूलों के शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रेरित करें और इसकी जानकारी तुरंत साझा करें। जारी संदेश में कहा गया है कि 21 जून को होने वाले योग दिवस पर राष्ट्रपति के आगमन की संभावना को देखते हुए छात्रों की उपस्थिति और भागीदारी को प्राथमिकता दी जाए। इसके तहत स्कूलों में सुबह 6:30 से 8 बजे तक विशेष योग अभ्यास सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। हजारों लोगों की भागीदारी वाला भव्य आयोजनप्रशासन की योजना के अनुसार, इस बड़े आयोजन में हजारों स्कूली छात्र, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और शहर के नागरिक सामूहिक योग करते नजर आएंगे। कार्यक्रम को व्यवस्थित और अनुशासित बनाने के लिए मिनट-टू-मिनट शेड्यूल तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही सार्वजनिक किया जा सकता है।

पीएम मोदी और जेन फ्रेजर की अहम बैठक, निवेश, एआई और हरित ऊर्जा में भारत की संभावनाओं पर हुआ विस्तृत मंथन

नई दिल्ली । भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और वैश्विक निवेश केंद्र के रूप में उभरती भूमिका को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिटीग्रुप की चेयरपर्सन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेन फ्रेजर के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच आर्थिक विकास, निवेश अवसरों, वैश्विक पूंजी प्रवाह, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वच्छ ऊर्जा जैसे रणनीतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुंबई में आयोजित इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने देश के दीर्घकालिक विकास रोडमैप ‘विकसित भारत 2047’ के संबंध में अपना दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में जारी आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचा विकास और निवेश-अनुकूल वातावरण पर प्रकाश डाला। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत की विकास यात्रा में वैश्विक वित्तीय संस्थानों की भूमिका को और मजबूत बनाना था। चर्चा के दौरान भारत में विदेशी निवेश और पूंजी प्रवाह को बढ़ाने के उपायों पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही भारतीय कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उपलब्ध अवसरों तथा उनके वैश्विक विस्तार में वित्तीय संस्थानों की संभावित भूमिका पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत की आर्थिक क्षमता और बाजार का आकार वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। बैठक में वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्र भी प्रमुख एजेंडा रहा। सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विकास को लेकर मौजूद संभावनाओं पर चर्चा की गई। भारत सरकार द्वारा ऊर्जा संक्रमण और कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए उठाए जा रहे कदमों को वैश्विक निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इस क्षेत्र में निजी निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर भी विचार हुआ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े विषयों पर भी दोनों पक्षों के बीच सार्थक संवाद हुआ। बातचीत में एआई तकनीक के जिम्मेदार उपयोग, नियामकीय ढांचे और आर्थिक विकास में इसकी भूमिका जैसे मुद्दे शामिल रहे। यह माना गया कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में एआई उत्पादकता, नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने का एक प्रमुख माध्यम बन सकता है। इस अवसर पर सिटी इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. बालासुब्रमण्यम भी उपस्थित रहे। उन्होंने भारत में सिटी की लगभग 125 वर्षों की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए देश के प्रति संस्था की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने बताया कि भारत न केवल कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भी उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्चस्तरीय बैठकों से वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की सकारात्मक छवि और मजबूत होती है। पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय समावेशन, डिजिटल भुगतान, बैंकिंग सुधार और कारोबारी सुगमता से जुड़े कदमों ने देश को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाया है। यही कारण है कि दुनिया के प्रमुख वित्तीय संस्थान भारत की विकास यात्रा में अपनी भागीदारी बढ़ाने में रुचि दिखा रहे हैं। गौरतलब है कि सिटीग्रुप मुंबई में 3 से 5 जून तक ‘सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन कर रही है, जिसमें दुनिया भर से 1,500 से अधिक निवेशक और ग्राहक शामिल हो रहे हैं। इस मंच के माध्यम से भारत से जुड़े निवेश अवसरों को वैश्विक पूंजी के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। वर्ष 2027 में भारत में सिटी की 125वीं वर्षगांठ भी पूरी होने जा रही है, जो देश के साथ उसके लंबे आर्थिक संबंधों का प्रतीक है।

यंग टीम इंडिया को मिलेगा खुद को साबित करने का अवसर, अफगानिस्तान टेस्ट पर सबा करीम का बयान

नई दिल्ली । भारत और अफगानिस्तान के बीच 6 जून से न्यू पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेले जाने वाले एकमात्र टेस्ट मैच को लेकर पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज सबा करीम ने अहम टिप्पणी की है। उनका मानना है कि यह मुकाबला टीम इंडिया के लिए केवल एक मैच नहीं, बल्कि भविष्य की मजबूत नींव रखने का बड़ा अवसर है। सबा करीम ने जियोहॉटस्टार पर बातचीत में कहा कि भले ही यह टेस्ट विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह शुभमन गिल की कप्तानी में बन रही नई टीम के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। उनके अनुसार, इस मैच के जरिए टीम अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी की कमजोरियों को पहचानकर सुधार सकती है। युवाओं को मौका देने का सही समयकरीम ने कहा कि भारतीय टीम को अब घरेलू मैदानों पर अपना दबदबा फिर से मजबूत करने की जरूरत है। ऐसे में यह टेस्ट मैच उभरते हुए खिलाड़ियों को परखने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने का सही मंच हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर युवा खिलाड़ी इस मौके पर अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें आगे बड़ी सीरीज, खासकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मुकाबलों में जगह मिलने की संभावना मजबूत होगी। करीम के मुताबिक, भारतीय टेस्ट क्रिकेट इस समय बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां सिर्फ मैच जीतना ही लक्ष्य नहीं बल्कि एक संतुलित और मजबूत टीम तैयार करना भी जरूरी है। गेंदबाजी में जिम्मेदारी का केंद्र बने सिराजटीम इंडिया की गेंदबाजी पर बात करते हुए सबा करीम ने कहा कि जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में मोहम्मद सिराज पर जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। उन्होंने इंग्लैंड दौरे पर सिराज के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी क्षमता साबित की है। करीम ने कहा कि सिराज में गति, आक्रामकता और दोनों दिशाओं में स्विंग कराने की क्षमता है। ऐसे में वह न सिर्फ गेंदबाजी आक्रमण का नेतृत्व कर सकते हैं, बल्कि युवा गेंदबाजों के लिए प्रेरणा भी बन सकते हैं। हालांकि, उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग की भी जरूरत होगी ताकि टीम बेहतर प्रदर्शन कर सके। नई टीम, नया संतुलन और बड़ा अवसरसबा करीम का मानना है कि यह टेस्ट मैच चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के लिए नए संयोजन आजमाने का बेहतरीन मौका है। इससे यह तय किया जा सकता है कि आने वाले समय में भारतीय टेस्ट टीम का संतुलन कैसा होगा और कौन से खिलाड़ी लंबे समय तक टीम का हिस्सा बन सकते हैं।

सेबी की सख्त कार्रवाई से राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भूचाल, 5% गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंचे; वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी दबाव देखने को मिला। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ लोअर सर्किट पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही कंपनी के शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखाई दिया और यह बीएसई पर अपने पिछले बंद स्तर 110.15 रुपये से गिरकर 104.65 रुपये पर पहुंच गया। सेबी की ओर से जारी आदेश में कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग और कारोबारी लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। नियामक ने प्रारंभिक जांच के आधार पर संकेत दिए हैं कि कंपनी द्वारा घोषित कुल राजस्व का लगभग 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा वास्तविकता से अधिक दिखाया गया हो सकता है। सेबी ने इन निष्कर्षों को बेहद गंभीर और अभूतपूर्व बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप को आवश्यक माना है। आदेश में कहा गया है कि जांच के दौरान सामने आई अनियमितताएं सामान्य कारोबारी त्रुटियों से कहीं अधिक गंभीर प्रतीत होती हैं। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वर्ष्णेय ने स्पष्ट किया कि निवेशकों के हितों की रक्षा और बाजार की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियामक कदम उठाना जरूरी था। इसी के तहत प्रमोटर राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों की खरीद, बिक्री अथवा किसी भी प्रकार के लेन-देन से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह मामला मार्च 2024 में प्राप्त एक शेयरधारक की शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायत में कंपनी की बैलेंस शीट में दर्ज बड़े व्यापारिक देयकों और वित्तीय आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद सेबी ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक की अवधि की विस्तृत जांच शुरू की और स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट के लिए बीडीओ इंडिया सर्विसेज को नियुक्त किया। जांच के दौरान फॉरेंसिक ऑडिटर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सेबी के अनुसार कंपनी ने कई अवसरों पर आवश्यक लेखा प्रणालियों, वित्तीय रिकॉर्ड और प्रमुख दस्तावेजों तक पूर्ण पहुंच उपलब्ध नहीं कराई। इसके कारण ऑडिटर कई महत्वपूर्ण लेन-देन और वित्तीय दावों का स्वतंत्र सत्यापन नहीं कर सका। केवल सीमित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई। नियामक ने कंपनी की विदेशी सहायक और अप्रत्यक्ष सहायक इकाइयों की भी समीक्षा की। सिंगापुर और स्विट्जरलैंड स्थित कुछ इकाइयों के वित्तीय लेन-देन और रिपोर्टिंग पैटर्न को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सेबी का मानना है कि कुछ वित्तीय संरचनाओं का उपयोग धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम गंतव्य को छिपाने के लिए किया गया हो सकता है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो कंपनी की वित्तीय पारदर्शिता और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वह जांचकर्ताओं द्वारा मांगी गई सभी लंबित जानकारियां 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराए। साथ ही कंपनी के खातों और लेन-देन की विस्तृत समीक्षा के लिए नए फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति का भी आदेश दिया गया है। इस घटनाक्रम का असर केवल राजेश एक्सपोर्ट्स तक सीमित नहीं रहा। कंपनी में करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयरों पर भी दबाव देखा गया और कारोबार के दौरान उसके शेयरों में लगभग 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में जांच की दिशा और निष्कर्ष निवेशकों की धारणा तथा कंपनी के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।

अस्पताल में अंधेरा और गर्मी का कहर, जबलपुर में बिजली कटौती से मरीजों की हालत बिगड़ी

मध्य प्रदेश । जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कुछ ही पलों में पूरे अस्पताल परिसर, वार्डों और गलियारों में अंधेरा छा गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों के बीच अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली जाते ही गर्मी और उमस बढ़ गई, जिससे कई मरीज बेचैन हो गए। जनरल वार्ड में भर्ती कुछ मरीजों और उनके परिजनों को बाहर निकलते भी देखा गया। हालांकि, यह स्थिति करीब 15 से 20 मिनट तक बनी रही, जिसके बाद बिजली आपूर्ति सामान्य हो गई। गर्मी और अंधेरे से परेशान हुए मरीज, परिजनों में चिंताअस्पताल में सैकड़ों मरीज भर्ती हैं, जिनमें कई गंभीर स्थिति वाले मरीज भी शामिल हैं जो जीवन रक्षक उपकरणों पर निर्भर थे। अचानक बिजली गुल होने से परिजनों में चिंता बढ़ गई कि कहीं इलाज प्रभावित न हो जाए। कुछ लोगों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि इतने बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बिजली कटौती जैसी स्थिति में तुरंत और सुचारू बैकअप सिस्टम का प्रभावी होना जरूरी है, ताकि मरीजों को परेशानी न हो। बिजली विभाग ने मांगी रिपोर्ट, अस्पताल प्रशासन का दावा- जनरेटर तुरंत चालू हुएइस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) के अधिकारियों ने भी जानकारी ली है। अधीक्षण यंत्री संजय अरोरा ने कहा कि उन्हें इस घटना की विस्तृत जानकारी नहीं मिली है, लेकिन संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अस्पताल के बड़े जनरेटर सिस्टम के बावजूद स्थिति कैसे प्रभावित हुई। वहीं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने बिजली गुल होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि शहर में उस समय बिजली आपूर्ति प्रभावित थी। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में बैकअप के लिए सात बड़े जनरेटर लगे हुए हैं, जिनमें पर्याप्त डीजल भी उपलब्ध था। जैसे ही बिजली गई, जनरेटर सिस्टम स्वतः सक्रिय हो गया। डीन के अनुसार, अस्पताल में किसी भी मरीज को गंभीर परेशानी नहीं हुई और न ही किसी को वार्ड से बाहर निकलना पड़ा। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक चिकित्सा सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं। प्रशासनिक दावे बनाम हकीकत, जांच की मांग उठीइस घटना के बाद अस्पताल की आपातकालीन बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर बिजली विभाग इसकी जानकारी जुटा रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन अपने सिस्टम को पूरी तरह कार्यशील बता रहा है। अब देखना होगा कि जांच में वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

पश्चिम एशिया संकट पर राहत के संकेत, कच्चा तेल 1 प्रतिशत से अधिक फिसला; वैश्विक बाजारों में फिर भी बनी रही अनिश्चितता

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की संभावनाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत दी है। इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू करने पर सहमति बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच यह घटनाक्रम निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया है और इससे व्यापक कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट दोनों प्रमुख तेल बेंचमार्क में गिरावट देखी गई। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और संभावित आपूर्ति बाधाओं की आशंका के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। हालांकि युद्धविराम की दिशा में बढ़ते कदमों ने बाजार की चिंताओं को कुछ हद तक कम कर दिया है, जिससे कीमतों पर दबाव देखने को मिला। बाजार विश्लेषकों के अनुसार तेल की कीमतें केवल मांग और आपूर्ति के आधार पर नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से भी गहराई से प्रभावित होती हैं। पश्चिम एशिया विश्व ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष या अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजारों में तुरंत असर डालती है। हालिया गिरावट इसी धारणा को दर्शाती है कि निवेशक अब स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान की संभावना को महत्व दे रहे हैं। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक संपर्कों पर भी वैश्विक बाजारों की नजर बनी हुई है। अमेरिकी नेतृत्व की ओर से बातचीत में प्रगति के संकेत दिए गए हैं, जबकि ईरान की तरफ से भी संवाद पूरी तरह समाप्त न होने की बात कही गई है। हालांकि दोनों पक्षों ने अभी तक किसी ठोस समझौते की पुष्टि नहीं की है, लेकिन बातचीत जारी रहने को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इसके विपरीत खाड़ी क्षेत्र में कुछ घटनाओं ने अनिश्चितता को पूरी तरह समाप्त नहीं होने दिया है। हालिया सैन्य गतिविधियों और हमलों के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव फिर से बढ़ता है तो तेल बाजार में उतार-चढ़ाव दोबारा तेज हो सकता है। इसलिए निवेशक फिलहाल हर कूटनीतिक और सैन्य घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। तेल बाजार की नरमी का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी देखने को मिला। एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजार दबाव में रहे और निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाए रखी। जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे वैश्विक निवेश भावना पर असर पड़ा। घरेलू बाजार भी इस वैश्विक माहौल से अछूते नहीं रहे। भारतीय शेयर बाजारों में कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। निवेशकों का ध्यान अब पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक कूटनीतिक प्रयासों और ऊर्जा बाजार की आगामी दिशा पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्धविराम स्थायी रूप लेता है और क्षेत्रीय तनाव में और कमी आती है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता देखने को मिल सकती है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में बाजार अभी भी सतर्क है और किसी भी नए घटनाक्रम का प्रभाव तेल तथा वैश्विक वित्तीय बाजारों पर तुरंत दिखाई दे सकता है।

फूलों और ड्रायफ्रूट से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, गुरुवार भस्म आरती में उमड़ी श्रद्धा

मध्य प्रदेश । Ujjain स्थित Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में गुरुवार तड़के भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया। सुबह लगभग 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ। पंचामृत और भस्म से हुआ अभिषेकआरती के दौरान प्रथम घंटा बजाकर हरि-ओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई और भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पण की परंपरा निभाई गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भांग, चंदन और फूलों से राजा स्वरूप श्रृंगारभस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल का अत्यंत दिव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें भांग, चंदन, गुलाब के फूलों की माला, रजत चंद्र, रजत मुकुट और त्रिपुंड से सजाया गया। इसके अलावा शेषनाग का रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्प मालाएं भी अर्पित की गईं। भगवान को भव्य “राजा स्वरूप” में सजाया गया, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण रहा। ड्रायफ्रूट और मिष्ठान का भोग श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल, ड्रायफ्रूट और मिष्ठान का भोग लगाया गया। पूरे गर्भगृह में फूलों और सुगंधित मालाओं से अलौकिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और पूरे वातावरण में “हर हर महादेव” की गूंज सुनाई दी। भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम है, जो हर दिन Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple को दिव्यता से भर देता है।

वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में दिखाई दिए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से 400 अंकों से अधिक टूटकर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी में भी शुरुआती कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि शुरुआती झटके के बाद बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में ही कारोबार करते रहे। सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 227 अंक और निफ्टी लगभग 80 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया। बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी, रियल्टी, मेटल और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दिखाई दिया। प्रमुख आईटी कंपनियों और निजी बैंकों में बिकवाली का माहौल रहा, जबकि कुछ चुनिंदा उपभोक्ता वस्तु, तेल एवं गैस तथा एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सीमित बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि व्यापक बाजार में निवेशकों की रुचि पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी भारतीय बाजार पर दबाव बना रही है। विदेशी निवेशक हाल के सत्रों में भारतीय इक्विटी बाजार से पूंजी निकालते दिखाई दिए हैं, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है। घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों पर टिकी हुई है। शुक्रवार को आने वाले फैसले से ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर नई दिशा मिल सकती है। ऐसे में बड़े निवेशक फिलहाल आक्रामक दांव लगाने से बचते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विदेशी निवेशकों की डेरिवेटिव बाजार में बढ़ती शॉर्ट पोजिशन भी निकट भविष्य में कमजोरी की आशंका को मजबूत करती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार की धारणा तेजी से बदल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा अस्थिरता के दौर में अल्पकालिक ट्रेडिंग जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश के अवसर भी प्रदान कर सकता है। बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और ऑटो एंसिलरी सेक्टर के कई मजबूत शेयर हालिया गिरावट के कारण आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं, जो भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।