वैश्विक पटल पर भारत का बड़ा रणनीतिक कदम: एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा संभालेंगे विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक का कार्यभार

नई दिल्ली । वैश्विक वित्तीय और प्रशासनिक पटल पर भारत की स्थिति को और मजबूत करते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया है। वर्तमान में एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार समिति (EAC-PM) के प्रमुख सदस्य नीलकंठ मिश्रा को विश्व बैंक में भारत का नया एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर (कार्यकारी निदेशक) नियुक्त किया गया है। 4 जून को केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने इस हाई-प्रोफाइल नियुक्ति को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। प्रशासनिक आदेश के अनुसार, विश्व बैंक के वाशिंगटन स्थित मुख्यालय में नीलकंठ मिश्रा का कार्यकाल अगले तीन वर्षों के लिए होगा। वे इस महत्वपूर्ण वैश्विक पद पर पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी परमेश्वरन अय्यर का स्थान ग्रहण करेंगे, जिनका निर्धारित कार्यकाल जल्द ही समाप्त होने जा रहा है। सरकार द्वारा जारी कूटनीतिक दिशानिर्देशों के तहत, जब तक नीलकंठ मिश्रा वाशिंगटन पहुंचकर विधिवत रूप से अपना नया कार्यभार नहीं संभाल लेते, तब तक परमेश्वरन अय्यर बोर्ड में इस पद पर बने रहेंगे ताकि कूटनीतिक निरंतरता बनी रहे। विश्व बैंक के संगठनात्मक ढांचे में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर का यह पद रणनीतिक और आर्थिक रूप से अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है। इस पद पर आसीन होकर नीलकंठ मिश्रा विश्व बैंक के उस मुख्य शासी बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, जो दुनिया भर के विकासशील देशों को दिए जाने वाले वित्तीय ऋण, ब्याज दरों के निर्धारण, नीतिगत सुधारों और वैश्विक कल्याणकारी योजनाओं में पूंजी निवेश जैसे अत्यंत संवेदनशील और बड़े फैसले लेता है। नीलकंठ मिश्रा की गिनती भारत के सबसे कुशल और प्रखर बाजार रणनीतिकारों तथा अर्थशास्त्रियों में की जाती है। वे वर्तमान में एक्सिस कैपिटल में ग्लोबल रिसर्च के प्रमुख और पूर्णकालिक निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। एक्सिस ग्रुप के साथ जुड़ने से पहले, उन्होंने लगभग दो दशकों तक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय दिग्गज ‘क्रेडिट सुइस’ के साथ काम किया था, जहां उन्होंने एशिया-पैसिफिक (APAC) क्षेत्र के लिए सह-रणनीतिकार के रूप में अपनी विशिष्ट वित्तीय पहचान बनाई थी। शैक्षणिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि के दृष्टिकोण से भी नीलकंठ मिश्रा का सफर काफी प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा झारखंड के बोकारो स्टील सिटी स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। स्नातक होने के बाद, उन्होंने वर्ष 1997 से 2000 तक हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड में सिस्टम मैनेजर के रूप में अपने कॉरपोरेट करियर की शुरुआत की थी और धीरे-धीरे वित्तीय विश्लेषण के क्षेत्र में शीर्ष मुकाम हासिल किया।
टीसीएस कांड में जबरन मजहब परिवर्तन की गहरी साजिश: व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए महिला कर्मचारियों को निशाना बनाने वाली आरोपी निदा खान के बढ़े संकट

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) परिसर से सामने आए यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के बहुचर्चित मामले में विशेष जांच दल (SIT) की चार्जशीट से कई सनसनीखेज और गंभीर खुलासे हुए हैं। मामले की 23 वर्षीय मुख्य शिकायतकर्ता ने जांच अधिकारियों के समक्ष दिए अपने विस्तृत बयान में उस संगठित प्रशासनिक और मानसिक दबाव का पर्दाफाश किया है, जो उस पर धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से लगातार बनाया जा रहा था। चार्जशीट के अनुसार, इस पूरी साजिश का ताना-बाना बेहद पेशेवर और रणनीतिक तरीके से बुना गया था। देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई इस प्राथमिकी और उसके बाद दाखिल की गई चार्जशीट के अनुसार, मुख्य आरोपी दानिश शेख ने शादी का झांसा देकर न केवल पीड़िता का शारीरिक और यौन शोषण किया, बल्कि उसकी धार्मिक आस्था को भी चोट पहुंचाने की पूरी कोशिश की। दानिश ने पीड़िता को पूरी तरह से उसकी हिंदू मान्यताओं से दूर करने के लिए कूटनीतिक रूप से प्रभावित करना शुरू किया था। उसने पीड़िता को मंदिर जाने और भगवान के भजन सुनने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता को ढाढस बंधाने के बहाने कहा था कि उसे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि अल्लाह उनके साथ है। उसने पीड़िता को मानसिक तनाव कम करने का झांसा देकर सनातन पद्धतियों को छोड़ने और इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार इबादत करने तथा ‘तस्बीह’ पढ़ने के लिए मजबूर किया। इस प्रशासनिक और आर्थिक नियंत्रण के तहत आरोपी के पास पीड़िता के बैंक खातों और गोपनीय यूपीआई पिन की भी पूरी जानकारी उपलब्ध थी। एसआईटी की जांच के अनुसार, दानिश ने इस साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए अपने दो अन्य सहयोगियों- तौसीफ अत्तार और निदा खान को विशेष जिम्मेदारी सौंप रखी थी। तौसीफ अत्तार ने पीड़िता का पूरी तरह से ब्रेनवॉश करने के लिए उसे इंटरनेट और यूट्यूब पर विवादित प्रचारक जाकिर नाइक, पाकिस्तानी मौलवी तारिक जमील और पाकिस्तानी इस्लामिक विद्वान डॉ. इसरार अहमद के कट्टरपंथी भाषणों और वीडियो को बार-बार देखने का निर्देश दिया था। पीड़िता को लगातार जन्नत, जहन्नुम और अन्य धार्मिक अवधारणाओं के बारे में बताकर यह विश्वास दिलाया गया कि यदि वह अपना मूल धर्म छोड़ देती है, तो उसका सारा मानसिक तनाव और परेशानियां हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगी। इसके अलावा, मामले की अन्य प्रमुख आरोपी निदा खान पर एक संगठित व्हाट्सएप ग्रुप संचालित करने का आरोप है। इस ग्रुप के माध्यम से कंपनी की अन्य महिला कर्मचारियों को भी लक्षित किया जाता था और उन पर नमाज पढ़ने, विशिष्ट पहनावा अपनाने और जीवनशैली बदलने का अनैतिक दबाव बनाया जाता था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने अब तक 106 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें टीसीएस के कर्मचारी और कंपनी की आंतरिक ‘पॉश’ (POSH) कमेटी के सदस्य भी शामिल हैं। मामले में कुल नौ कर्मचारियों ने शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद आरोपियों- दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, निदा खान सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस मामले में एआईएमआईएम के एक स्थानीय नगरसेवक मतीन पटेल का नाम भी शामिल है, जिन पर फरार रहने के दौरान आरोपियों को पनाह देने का आरोप है। इस पूरे गंभीर विवाद और कानूनी कार्रवाई पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के प्रबंधन ने भी अपना कड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के. कृतिवासन ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि संस्थान में किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या अनैतिक दबाव के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू है। प्रबंधन ने इस मामले के सभी दागी आरोपियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निलंबित कर दिया है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जांच में पूरा प्रशासनिक सहयोग प्रदान कर रहा है।
रायसेन में आमने-सामने भिड़ीं दो बसें, बच्चे समेत 3 की मौत; कई घायल भोपाल रेफर

रायसेन । रायसेन जिले के खरबई थाना चौकी क्षेत्र में स्थित सेहतगंज टोल प्लाजा के समीप सुबह करीब 11 बजे यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भोपाल-सागर रूट पर चलने वाली दो निजी बसें तेज रफ्तार में थीं और मोड़ पर नियंत्रण खो बैठीं। देखते ही देखते दोनों बसों की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बसों के अगले हिस्से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में कुछ यात्री बस की सीटों और खिड़कियों के बीच फंस गए। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और आसपास मौजूद लोग तुरंत राहत कार्य में जुट गए। तीन लोगों की मौत, पहचान में भी आई मुश्किलहादसे में तीन यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में दो की पहचान नीतीश व्यास (28) निवासी सुल्तानगंज और माखन लोधी (29) निवासी बेगमगंज के रूप में हुई है। एक अन्य मृतक की पहचान समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि कुछ यात्रियों के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। शवों की हालत भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे पहचान करने में कठिनाई हो रही है। 15 से अधिक घायल, कई भोपाल रेफरहादसे में घायल हुए यात्रियों को तत्काल स्थानीय अस्पतालों में पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल कई लोगों को बेहतर उपचार के लिए भोपाल रेफर किया गया है। घायलों के हाथ, पैर और सिर में गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। दुर्घटना के कारण मार्ग की एक लेन पर यातायात भी कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। ओवरस्पीड और मोड़ को बताया जा रहा कारणस्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों बसें तेज रफ्तार में थीं। मोड़ पर पहुंचने के बाद चालक बसों पर नियंत्रण नहीं रख सके और सीधी भिड़ंत हो गई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि टक्कर के बाद एक बस सड़क से नीचे उतर गई, जबकि दूसरी बस पुलिया से टकराकर रुकी। शक्ति ट्रेवल्स की बस को अधिक नुकसान पहुंचा है। प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे मौके परघटना की सूचना मिलते ही रायसेन कलेक्टर Arun Kumar Vishwakarma और पुलिस अधीक्षक Ashutosh Gupta मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने राहत कार्यों की निगरानी की और घायलों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
'गोल्ड किंग' से विवादों के केंद्र तक, राजेश मेहता पर लगे 15 लाख करोड़ के आरोप क्या हैं?

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े कथित अकाउंटिंग विवादों में से एक माने जा रहे मामले में बाजार नियामक सेबी ने Rajesh Mehta और उनकी कंपनी Rajesh Exports Limited के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई की है। आरोप है कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपनी आय और कारोबार के आंकड़ों को भारी स्तर पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। फर्श से अर्श तक का सफरराजेश मेहता को लंबे समय तक भारतीय स्वर्ण उद्योग की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में गिना जाता रहा है। बेंगलुरु के एक जैन कारोबारी परिवार से आने वाले मेहता ने अपने भाई के साथ मिलकर पारिवारिक ज्वेलरी कारोबार को एक वैश्विक कंपनी में बदल दिया। 1995 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई राजेश एक्सपोर्ट्स ने तेजी से विस्तार किया और देश की प्रमुख सोना निर्यातक कंपनियों में शामिल हो गई। वर्ष 2015 में स्विट्जरलैंड की मशहूर रिफाइनरी Valcambi के अधिग्रहण के बाद कंपनी का वैश्विक प्रभाव और बढ़ गया। इसी उपलब्धि के बाद राजेश मेहता को ‘गोल्ड किंग’ के नाम से भी पहचान मिली। सेबी के आरोप क्या हैं?सेबी के अनुसार, कंपनी ने पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया हो सकता है। जांच में यह भी कहा गया कि विदेशी सहायक कंपनियों द्वारा दिखाए गए राजस्व का बड़ा हिस्सा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका। नियामक का दावा है कि कंपनी की रिपोर्ट की गई विदेशी आय का लगभग 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संदिग्ध पाया गया। इसी आधार पर सेबी ने जांच पूरी होने तक राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री या अन्य प्रकार के लेनदेन से रोक दिया है। साथ ही कंपनी के खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश भी दिया गया है। फर्जी एंट्री और निजी ट्रेडिंग का आरोपजांच के दौरान Affluence Shares and Stocks Private Limited नामक एक ब्रोकिंग फर्म का नाम भी सामने आया। सेबी का आरोप है कि कंपनी ने हजारों करोड़ रुपये के खरीद-बिक्री लेनदेन का रिकॉर्ड दिखाया, जबकि संबंधित जीएसटी रिकॉर्ड में ऐसे लेनदेन का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ वित्तीय एंट्रीज का उपयोग कंपनी के कारोबार को बड़ा दिखाने और निजी डेरिवेटिव ट्रेडिंग से जुड़े नुकसान को छिपाने के लिए किया गया। जांच में कंपनी के फंड के कथित दुरुपयोग और संबंधित खातों में धन हस्तांतरण की बात भी कही गई है। कंपनी ने आरोपों को बताया गलतफहमीसेबी की कार्रवाई के बाद कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। राजेश एक्सपोर्ट्स का कहना है कि उसके द्वारा घोषित राजस्व आंकड़े सही हैं और नियामक को कंपनी की रिपोर्टिंग प्रणाली को लेकर गलतफहमी हुई है। कंपनी का दावा है कि उसकी सहायक इकाई वालकाम्बी के वित्तीय आंकड़ों की व्याख्या में अंतर के कारण यह विवाद पैदा हुआ है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि वह जांच एजेंसियों को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगी और पूरा सहयोग करेगी। निवेशकों की बढ़ी चिंतामामले के सार्वजनिक होने के बाद कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इस घटनाक्रम ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस, ऑडिट प्रक्रिया और बड़े संस्थागत निवेशकों की निगरानी क्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत में पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही पर बड़ी बहस का कारण बन गया है।
यू-टर्न के बाद फंसी रणनीति? अभिजीत दीपके के अगले कदम पर सस्पेंस

नई दिल्ली। अमेरिका से 6 जून को दिल्ली पहुंचने वाले Abhijeet Deepke ने पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को राजधानी में जुटने का आह्वान किया था। शुरुआत में उन्होंने लोगों से कहा था कि वे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर उनका स्वागत करने पहुंचें। उनका दावा था कि दिल्ली पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, इसलिए समर्थकों की मौजूदगी जरूरी होगी। हालांकि, प्रदर्शन से ठीक दो दिन पहले दीपके ने अपने रुख में बड़ा बदलाव करते हुए समर्थकों से एयरपोर्ट न आने की अपील कर दी। उन्होंने तर्क दिया कि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से आम यात्रियों और नागरिकों को परेशानी हो सकती है। लेकिन इस फैसले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एयरपोर्ट से हटे, लेकिन आगे का रास्ता अस्पष्टदीपके ने अब कहा है कि वे एयरपोर्ट से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने जाएंगे और समर्थक वहीं एकत्रित हों। यहीं से प्रदर्शन की अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। लेकिन आलोचकों और पर्यवेक्षकों का सवाल है कि यदि वास्तव में हजारों या लाखों लोग पहुंचते हैं, जैसा कि CJP दावा कर रही है, तो नई दिल्ली के अत्यंत संवेदनशील इलाके में व्यवस्था कैसे बनाए रखी जाएगी? पार्लियामेंट स्ट्रीट और आसपास के क्षेत्रों में कई सरकारी कार्यालय, महत्वपूर्ण संस्थान और व्यस्त मार्ग मौजूद हैं। ऐसे में बड़ी भीड़ के जुटने से यातायात और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि अनुमति मिलने तक समर्थक कहां रहेंगे और भीड़ को नियंत्रित करने की क्या व्यवस्था होगी। अनुमति को लेकर सबसे बड़ा सवालपूरा विवाद प्रदर्शन की अनुमति को लेकर भी केंद्रित है। अब तक CJP की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुलिस या प्रशासन से पहले ही अनुमति क्यों नहीं मांगी गई। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि दीपके स्वयं दिल्ली पहुंचकर आवेदन देंगे, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ घंटों के भीतर किसी बड़े धरना-प्रदर्शन की अनुमति मिल पाना संभव होगा। अगर अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा?सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन या जंतर-मंतर पर सभा की अनुमति देने से इनकार कर दिया, तो पार्टी की अगली रणनीति क्या होगी? इस मुद्दे पर न तो दीपके ने और न ही पार्टी के अन्य नेताओं ने कोई स्पष्ट जवाब दिया है। समर्थकों को भी यह नहीं बताया गया है कि ऐसी स्थिति में उन्हें क्या करना होगा। यही वजह है कि प्रदर्शन से पहले ही पूरे कार्यक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल, 6 जून के कार्यक्रम पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अभिजीत दीपके का ‘दिल्ली प्लान’ जमीन पर कितना सफल होता है और प्रशासन तथा प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
बंगाल में BJP ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई, सामने आई जमीन विवाद की कहानी

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान उत्तर दिनाजपुर जिले के हेमताबाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय कार्यालय से जुड़ा एक दिलचस्प मामला सामने आया है। सरकारी जमीन की मापी के दौरान पता चला कि पार्टी कार्यालय का एक हिस्सा निर्धारित सरकारी भूमि के दायरे में आ रहा है। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुद आगे बढ़कर उस हिस्से को हटाने का फैसला किया। मामले की शुरुआत तब हुई जब हेमताबाद के ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) Biswajit Dutta ने सरकारी जमीनों पर बने अवैध निर्माणों को हटाने का निर्देश जारी किया। प्रशासन की ओर से इलाके में मापी कराई गई, जिसमें शालबागान के पास राज्य राजमार्ग किनारे स्थित भाजपा ब्लॉक कार्यालय का बरामदा सरकारी जमीन पर पाया गया। प्रशासन के आने से पहले खुद शुरू कर दी कार्रवाईजांच रिपोर्ट सामने आते ही स्थानीय भाजपा नेताओं ने प्रशासन की ओर से बुलडोजर चलाए जाने का इंतजार नहीं किया। भाजपा के प्रखंड अध्यक्ष Biplab Sarkar की मौजूदगी में कार्यकर्ता हथौड़े और अन्य उपकरण लेकर कार्यालय पहुंचे और अवैध हिस्से को स्वयं तोड़ना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में कार्यालय के उस हिस्से को पूरी तरह हटा दिया गया, जो सरकारी भूमि की सीमा के भीतर पाया गया था। यह कदम स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि आमतौर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान विरोध, धरना या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं। सड़क चौड़ीकरण अभियान से जुड़ा मामलाप्रशासन के अनुसार, कालियागंज से दक्षिण दिनाजपुर को जोड़ने वाले राज्य राजमार्ग के दोनों ओर 15 फीट के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है।भाजपा नेता बिप्लव सरकार ने कहा कि जब पार्टी कार्यालय का बरामदा भी चिन्हित क्षेत्र में पाया गया तो कानून का सम्मान करते हुए उसे हटाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी मांग की कि अभियान से प्रभावित छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। दुकानदारों ने भी दिखाई पहलभाजपा कार्यालय पर हुई कार्रवाई का असर आसपास के व्यापारियों पर भी देखने को मिला। रायगंज-बालुरघाट राज्य राजमार्ग के किनारे स्थित कई दुकानदारों ने प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किए बिना अपने अतिक्रमण वाले हिस्सों को स्वयं हटाना शुरू कर दिया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अभियान शुरू होने से पहले लगातार मुनादी, लाउडस्पीकर घोषणाओं और नोटिसों के माध्यम से लोगों को सरकारी भूमि खाली करने के लिए आगाह किया गया था। BDO बिस्वजीत दत्ता ने स्पष्ट किया कि अब आधिकारिक बेदखली अभियान शुरू हो चुका है और भविष्य में सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण मिलने पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।
ज्येष्ठ कालाष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां: काल भैरव की नाराजगी से बढ़ सकती हैं जीवन में परेशानियां, जानें शुभ-अशुभ नियम

नई दिल्ली । सनातन धर्म में आध्यात्मिक साधना और ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए कालाष्टमी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस वर्ष ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आने वाली मासिक कालाष्टमी 8 जून, दिन सोमवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि का प्रारंभ 8 जून को तड़के सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर होगा, जिसका समापन अगले दिन 9 जून को सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। इस विशेष दिन पर भगवान शिव के रौद्र रूप और अंशावतार भगवान काल भैरव की प्राकट्य पूजा और व्रत का विधान है, जो जीवन के दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की क्षमता रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव की आराधना करने से जीवन में व्याप्त किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र-मंत्र का प्रभाव और मानसिक भय पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इसके अतिरिक्त, जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या अथवा राहु और केतु के अशुभ प्रभाव चल रहे हों, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में इस दिन कुछ विशेष कार्यों को वर्जित घोषित किया गया है, जिन्हें करने से साधक को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कालाष्टमी के दिन सबसे महत्वपूर्ण नियम पशु सेवा से जुड़ा है। सनातन परंपरा में श्वान (कुत्ते) को भगवान काल भैरव का वाहन और प्रतीक माना गया है। इसलिए इस दिन भूलकर भी किसी कुत्ते को मारना, डांटना या उसे जूते-चप्पल दिखाना महापाप की श्रेणी में आता है। ऐसा करने से काल भैरव तत्काल रुष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही, इस दिन कुत्ते को कभी भी जूठा भोजन या अपवित्र अन्न नहीं देना चाहिए। इसके विपरीत, इस शुभ तिथि पर काले कुत्ते को ताजी एवं मुलायम रोटी, गुड़ या मीठे बिस्कुट खिलाना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। जो श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं, उनके लिए खान-पान के कड़े नियम निर्धारित हैं। कालाष्टमी के व्रत में सामान्य नमक या समुद्री नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे व्रत खंडित होने का दोष लगता है जिसके परिणाम जीवन में कष्टकारी हो सकते हैं। व्रत न रखने वाले सामान्य लोगों को भी इस दिन पूरी तरह सात्विकता का पालन करना चाहिए। इस तिथि पर मदिरापान और मांसाहार जैसे तामसिक भोजन से पूर्ण दूरी बना लेनी चाहिए, क्योंकि अनजाने में किया गया ऐसा कृत्य भी गंभीर दोष का कारण बनता है। शास्त्रों में भगवान काल भैरव को ‘दंडपाणि’ भी कहा गया है, जिसका अर्थ है अन्याय और अधर्म के मार्ग पर चलने वालों को कड़ा दंड देने वाला। यही कारण है कि कालाष्टमी के दिन किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्य, झूठ बोलने, किसी का दिल दुखाने या छल-कपट करने से बचना चाहिए। इस दिन किए गए गलत कार्यों का परिणाम बेहद कष्टप्रद हो सकता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को कम से कम सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक इन कड़े नियमों और मर्यादाओं का अक्षुण्ण पालन करना अनिवार्य बताया गया है। नकारात्मकता को दूर करने और पुण्य फल की प्राप्ति के लिए इस दिन कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं। कालाष्टमी के पावन अवसर पर किसी भी काल भैरव मंदिर में जाकर उनके सम्मुख सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। इसके अलावा, मंदिर में उड़द की दाल, काले तिल और सरसों का तेल दान करने से पितृदोष और ग्रह बाधाओं से शांति मिलती है। इस दिन छोटे बालकों को उनकी प्रिय वस्तुएं या मिष्ठान भेंट करना भी पारिवारिक समृद्धि और मानसिक शांति के लिए सर्वोत्तम उपाय माना गया है।
चुनाव चिह्न विवाद के बीच TMC का सख्त संदेश, ममता बनर्जी पर सांसद का बड़ा बयान

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मुख्य विपक्षी दल की मान्यता दिए जाने के बाद TMC नेतृत्व और बागी गुट के बीच टकराव और तेज हो गया है। इसी बीच TMC सांसद Mahua Moitra ने बागी विधायकों पर जमकर हमला बोला है। एक इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने कहा कि जिन नेताओं ने वर्षों तक Mamata Banerjee की लोकप्रियता और पार्टी के संगठनात्मक बल का लाभ उठाया, वही आज पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बागी नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि सत्ता में रहने की आदत पड़ चुकी है, इसलिए वे विपक्ष में संघर्ष करने के बजाय आसान रास्ता चुन रहे हैं। महुआ ने दो टूक कहा कि यदि किसी नेता को पार्टी छोड़नी है तो वह खुलकर जाए, लेकिन खुद को तृणमूल कांग्रेस बताने का अधिकार नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बागी नेता चाहें तो अपनी अलग पार्टी बना लें, लेकिन TMC के नाम और पहचान का इस्तेमाल न करें। भाजपा पर गंभीर आरोमहुआ मोइत्रा ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भारतीय जनता पार्टी की भूमिका होने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि भाजपा योजनाबद्ध तरीके से TMC को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के नेता Suvendu Adhikari का नाम लेते हुए कहा कि वे कभी तृणमूल का हिस्सा रहे हैं और पार्टी के नेताओं की राजनीतिक कमजोरियों से भली-भांति परिचित हैं। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर भाजपा नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। महुआ ने दावा किया कि कुछ नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पक्ष बदलने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विधायकों और नेताओं को गिरफ्तारी की धमकियां दी गईं, जिसके चलते वे बागी खेमे के साथ चले गए। “असली TMC ममता के साथ”बागी गुट के बढ़ते प्रभाव और चुनाव चिह्न पर संभावित विवाद के सवाल पर महुआ मोइत्रा ने स्पष्ट कहा कि असली तृणमूल कांग्रेस आज भी ममता बनर्जी और उनके साथ खड़े नेताओं के पास ही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मूल संगठन, विचारधारा और जनाधार ममता बनर्जी के नेतृत्व में कायम है। महुआ ने यह भी कहा कि यदि कभी ऐसी स्थिति आती है कि पार्टी को अपना मौजूदा चुनाव चिह्न छोड़ना पड़े, तब भी उन्हें कोई चिंता नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर नई राजनीतिक राह चुनी थी, तब उन्होंने अपनी पहचान और चुनावी प्रतीक खुद तैयार किया था। नया सिंबल बनाकर भी जीत सकती हैं ममतामहुआ मोइत्रा ने विश्वास जताया कि ममता बनर्जी का राजनीतिक कद किसी चुनाव चिह्न का मोहताज नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस नेता ने नया दल बनाकर और नया प्रतीक लेकर पश्चिम बंगाल में तीन बार सरकार बनाई, वह भविष्य में भी नया चुनावी चिह्न बनाकर जनता का समर्थन हासिल कर सकती हैं। उनके अनुसार, चुनाव चिह्न या पार्टी का नाम बदल सकता है, लेकिन जनता के बीच ममता बनर्जी की पहचान और राजनीतिक प्रभाव को कोई नहीं छीन सकता।
'गुड बॉय' के किरदारों से ऊब चुके हैं ऋतिक रोशन: सोशल मीडिया पर बयां किया अपना दर्द, ग्रे शेड भूमिकाओं में काम करने की जताई इच्छा

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत में पिछले 26 वर्षों से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे अभिनेता ऋतिक रोशन अपनी स्थापित और लोकप्रिय ‘गुड बॉय’ वाली छवि से अब कुछ अलग करने का मन बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी एक होलिया पोस्ट ने फिल्म गलियारों और प्रशंसकों के बीच कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है। अभिनेता ने सार्वजनिक रूप से इस बात पर निराशा व्यक्त की है कि फिल्म निर्देशक उन्हें लगातार एक आदर्श और सीधे-सादे इंसान के किरदारों में ही देखना चाहते हैं, जबकि वे अब जटिल और नकारात्मक रंगत वाले चरित्रों को पर्दे पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब ऋतिक रोशन ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में एफिल टावर के सामने से अपनी एक बेहद आकर्षक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा की। इस तस्वीर के साथ लिखे गए उनके विस्तृत कैप्शन ने सबका ध्यान आकर्षित किया। अभिनेता ने लिखा कि हाल ही में उनसे जब यह पूछा गया कि वे वर्तमान में किस तरह की भूमिका की तलाश कर रहे हैं, तो उनका अपना ही उत्तर उनके लिए भी अप्रत्याशित था। उन्होंने दर्शकों से फिल्म ‘लक बाय चांस’ के स्वार्थी और घमंडी स्टार ‘जफर’ के किरदार को याद करने को कहा। ऋतिक रोशन के अनुसार, वे ‘जफर’ जैसे यथार्थवादी और ग्रे शेड वाले किरदारों को पर्दे पर दोबारा जीने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आज उन्हें ऐसा कोई चुनौतीपूर्ण प्रस्ताव मिलता है, तो वे बिना समय गंवाए उसे तुरंत स्वीकार कर लेंगे। हालांकि, उन्होंने फिल्म उद्योग की वर्तमान प्रशासनिक और रचनात्मक सीमाओं पर तंज कसते हुए कहा कि निर्देशकों की मानसिकता उन्हें केवल एक ‘अच्छे नायक’ के रूप में ही भुनाने की है, जो उनके रचनात्मक विकास के दृष्टिकोण से एक दुखद स्थिति है। अभिनेता की इस स्पष्टवादी पोस्ट पर बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने बेहद संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली टिप्पणी करते हुए लिखा, ‘चलो फिर’। इस प्रतिक्रिया के सामने आते ही सोशल मीडिया और फिल्म समीक्षकों के बीच कयासों का दौर शुरू हो गया है। कूटनीतिक स्तर पर इसे दोनों के बीच आगामी समय में एक बड़े एक्शन या थ्रिलर प्रोजेक्ट के सहयोग के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें संभवतः ऋतिक रोशन एक मुख्य विलेन या डार्क प्रोटागोनिस्ट के रूप में नजर आ सकते हैं। इससे पहले ऋतिक रोशन की फिल्म ‘वॉर 2’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक व्यावसायिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी, जिसके बाद वे अपनी अभिनय शैली में बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं। यदि ऋतिक रोशन के आगामी व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स की बात करें, तो वे इस समय अपनी सबसे बड़ी सुपरहीरो फ्रेंचाइजी फिल्म ‘कृष 4’ के निर्माण और लेखन कार्य में व्यस्त हैं। इस बार वे अभिनय के साथ-साथ खुद ही इस महत्वाकांक्षी फिल्म के निर्देशन की कमान भी संभाल रहे हैं, जो उनके करियर का एक बड़ा प्रशासनिक मोड़ है। इसके अतिरिक्त उनके पास ‘स्टोर्म’ नामक एक और बड़ी फिल्म है, जिसे लेकर सिनेमा प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है। साल 2000 में आई अपनी पहली ही ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ से रातों-रात सुपरस्टार बनने वाले ऋतिक रोशन ने ‘कोई मिल गया’, ‘धूम 2’, ‘जोधा अकबर’ और ‘वॉर’ जैसी कई मील का पत्थर साबित होने वाली फिल्में दी हैं। यद्यपि उन्होंने ‘धूम 2’ में एक शातिर चोर का किरदार निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय पहले भी दिया है, लेकिन साल 2026 तक के अपने 26 साल लंबे फिल्मी सफर के इस मोड़ पर वे अब पूरी तरह से लीक से हटकर काम करने की योजना बना रहे हैं।
शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की हालत हुई खराब, लगातार काम करने से हुए परेशान

नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई कलाकार अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन राजेश खन्ना की पहली फिल्म ‘आखिरी खत’ के दौरान जो हुआ, वह आज भी फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय है। साल 1966 में रिलीज हुई इस फिल्म से राजेश खन्ना ने बड़े पर्दे पर कदम रखा था। फिल्म का निर्देशन चेतन आनंद ने किया था, जो अपने यथार्थवादी और संवेदनशील सिनेमा के लिए जाने जाते थे। किरदार में असली थकान दिखाने के लिए नहीं सोने दिया फिल्म में राजेश खन्ना का किरदार मानसिक तनाव और भावनात्मक संघर्ष से गुजरता है। निर्देशक चाहते थे कि उनके चेहरे पर थकान बनावटी न लगे, बल्कि वास्तविक दिखाई दे। बताया जाता है कि चेतन आनंद आधी रात को फोन कर-करके राजेश खन्ना को जगा देते थे, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती थी। यह सिलसिला कई दिनों तक चला और करीब तीन दिन बाद जब अभिनेता सेट पर पहुंचे तो उनके चेहरे पर वास्तविक थकान और बेचैनी साफ नजर आ रही थी। निर्देशक की यह तकनीक फिल्म के उस दृश्य के लिए कारगर साबित हुई, जहां किरदार को बेहद परेशान और टूटे हुए मनोभाव में दिखाना था। ऑस्कर तक पहुंची थी ‘आखिरी खत’ ‘आखिरी खत’ केवल राजेश खन्ना की पहली फिल्म ही नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई। यह फिल्म भारत की ओर से अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर) में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी के लिए भेजी गई थी। अग्रेजी में ‘द लास्ट लेटर’ नाम से पहचानी जाने वाली इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हासिल की थी। एक बच्चे की कहानी ने जीता दिल फिल्म में राजेश खन्ना के साथ मास्टर बंटी बहल भी नजर आए थे। कहानी गोविंद नाम के युवक और उसकी पत्नी लज्जो के इर्द-गिर्द घूमती है। परिस्थितियों के कारण दोनों अलग हो जाते हैं और एक छोटा बच्चा मुंबई की भीड़ में खो जाता है इसके बाद पिता अपने बेटे की तलाश में भटकता है और कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है। फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती एक छोटे बच्चे के साथ वास्तविक लोकेशंस पर शूटिंग करना था। 15 महीने के बच्चे के साथ हुई थी मुश्किल शूटिंगनिर्देशक चेतन आनंद के बेटे Ketan Anand ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ने 15 महीने के बच्चे के साथ फिल्म की शूटिंग की थी। बच्चे को मुंबई की सड़कों पर स्वाभाविक रूप से चलते हुए कैमरे में कैद करना उस दौर में बेहद कठिन काम था। यही वजह है कि ‘आखिरी खत’ को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है और यह राजेश खन्ना के शानदार फिल्मी सफर की शुरुआत भी बनी।