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अदाणी पावर और एईएसएल में निवेश के लिए बुलिश संकेत, क्षमता विस्तार और मजबूत पीपीए की वजह

अहमदाबाद । ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अदाणी ग्रुप की तीन प्रमुख कंपनियों – अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड, अदाणी पावर लिमिटेड और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड – पर बुलिश रुख अपनाया है। जेफरीज का कहना है कि इन कंपनियों में क्षमता में तेज विस्तार, मजबूत क्रियान्वयन और बढ़ती मांग की वजह से निवेश के लिए आकर्षक अवसर मौजूद हैं। अदाणी ग्रीन एनर्जी को जेफरीज ने “बाय” रेटिंग के साथ 1,435 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार कंपनी वित्त वर्ष 2026 में 19.3 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता से वित्त वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है। इसमें 5 गीगावाट की पंप स्टोरेज परियोजना और बैटरी स्टोरेज सिस्टम में 10 गीगावाट से अधिक की वृद्धि शामिल है। गुजरात के खावड़ा में 30 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता का निर्माण चल रहा है, जो ग्रोथ का प्रमुख ड्राइवर है। अदाणी पावर पर जेफरीज ने अपनी “बाय” रेटिंग बनाए रखते हुए 255 रुपये का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। कंपनी वित्त वर्ष 2032 तक अपनी क्षमता 42 गीगावॉट तक बढ़ाने की योजना रखती है। इसके अलावा दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों (PPA) की मजबूत पाइपलाइन से आय में सुधार की संभावना है। वर्तमान में आगामी क्षमता का लगभग 56 प्रतिशत पीपीए पहले से ही सुनिश्चित किया जा चुका है। अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) के लिए जेफरीज ने 1,665 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ “बाय” रेटिंग बरकरार रखी है। एईएसएल भारत की एकमात्र सूचीबद्ध प्योर प्ले ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी है। कंपनी वर्तमान में 718 अरब रुपये के ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स क्रियान्वित कर रही है और स्मार्ट मीटरिंग व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 तक 11 मिलियन से अधिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। जेफरीज का अनुमान है कि मध्यम अवधि में एबिटा और कर के बाद मुनाफे में मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि होगी। यह क्रियान्वयन की गति, डेटा सेंटर, वाणिज्यिक और औद्योगिक ऊर्जा समाधानों में बढ़ते अवसरों और स्मार्ट मीटरिंग के व्यापक विस्तार से प्रेरित होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अदाणी ग्रुप की ये कंपनियां भारत में बढ़ती ऊर्जा मांग और ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से बढ़ते निवेश का लाभ उठा रही हैं। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि ग्रुप की लंबी अवधि की रणनीति और क्षमता विस्तार योजनाएं उनके पोर्टफोलियो के लिए आकर्षक साबित हो सकती हैं।

“विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस: हर परिवार के लिए सुरक्षित आहार”

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मानव जीवन की आधारशिला भोजन है, पर भोजन तभी जीवनदायी बनता है जब वह सुरक्षित, स्वच्छ और पोषणयुक्त हो। “अन्नं ब्रह्मेति व्यजानात्” उपनिषदों की यह दिव्य उद्घोषणा अन्न को ब्रह्म के समकक्ष प्रतिष्ठित करती है, क्योंकि समस्त जीवन की धारा उसी से प्रवाहित होती है। अन्न केवल शरीर की भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति, स्वास्थ्य और मानव अस्तित्व का मूलाधार है। यदि भोजन ही रोगों का वाहक बन जाए, तो वह अमृत के स्थान पर विष का कार्य करने लगता है। आज वैश्वीकरण, तीव्र शहरीकरण, बदलती जीवन शैली और जटिल होती खाद्य आपूर्ति प्रणालियों के युग में खाद्य सुरक्षा (Food Safety) केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण और सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। इक्कीसवीं शताब्दी में जब विश्व अभूतपूर्व वैज्ञानिक प्रगति, वैश्वीकरण और तकनीकी क्रांति के युग में प्रवेश कर चुका है, तब खाद्य सुरक्षा का प्रश्न पहले से कहीं अधिक जटिल और महत्वपूर्ण बन गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (World Food Safety Day) मनाया जाता है। यह दिवस सुरक्षित भोजन के महत्व के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने, खाद्य जनित रोगों की रोकथाम तथा “सुरक्षित भोजन, स्वस्थ जीवन” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करता है। वास्तव में, सुरक्षित भोजन स्वस्थ समाज, सशक्त अर्थव्यवस्था और सतत भविष्य की अनिवार्य शर्त है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस : वैश्विक जागरूकता का उदयखाद्य जनित रोगों से उत्पन्न गंभीर वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसंबर 2018 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कर प्रतिवर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। वर्ष 2019 में इसका प्रथम आयोजन हुआ और तब से यह दिवस विश्वव्यापी जन-जागरूकता अभियान का स्वरूप ग्रहण कर चुका है। इस पहल के पीछे संयुक्त राष्ट्र की दो प्रमुख संस्थाओं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन संस्थाओं ने यह स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा केवल भोजन उत्पादन का प्रश्न नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता और वैश्विक कल्याण का आधार है। आज यह दिवस सरकारों, वैज्ञानिकों, कृषकों, खाद्य उद्योगों, उपभोक्ताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को एक साझा मंच प्रदान करता है, जहां सुरक्षित भोजन के माध्यम से स्वस्थ भविष्य की दिशा में वैश्विक संकल्प व्यक्त किया जाता है। खाद्य सुरक्षा की अवधारणा : खेत से थाली तक सुरक्षा का विज्ञानसामान्यतः लोग खाद्य उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों में मौलिक अंतर है। भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना खाद्य सुरक्षा (Food Security) का विषय है, जबकि भोजन का स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और हानि रहित होना खाद्य संरक्षा (Food Safety) का विषय है।खाद्य सुरक्षा का तात्पर्य ऐसे भोजन से है जो उपभोग के समय किसी भी प्रकार के जैविक, रासायनिक अथवा भौतिक जोखिम से मुक्त हो तथा आवश्यक पोषण प्रदान करने में सक्षम हो। यह केवल स्वाद, रंग या गुणवत्ता का प्रश्न नहीं, बल्कि जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा का विषय है। आधुनिक खाद्य विज्ञान में “फार्म टू फोर्क” (Farm to Fork) अथवा “खेत से थाली तक” की अवधारणा को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है। इसका अर्थ है कि खेती, कटाई, भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और उपभोग प्रत्येक चरण में सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए। खाद्य सुरक्षा की पूरी श्रृंखला उतनी ही मजबूत होती है जितनी उसकी सबसे कमजोर कड़ी। वैश्विक परिदृश्य : दूषित भोजन की अदृश्य महामारीविश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 60 करोड़ लोग दूषित भोजन के कारण बीमार पड़ते हैं और लगभग 4.2 लाख लोगों की मृत्यु खाद्य जनित रोगों से हो जाती है। इनमें बड़ी संख्या बच्चों की होती है, जो इस संकट की गंभीरता को और अधिक स्पष्ट करती है। दूषित भोजन केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं है; यह आर्थिक विकास पर भी गहरा प्रभाव डालता है। असुरक्षित भोजन के कारण स्वास्थ्य व्यय बढ़ता है, श्रम उत्पादकता घटती है, व्यापार प्रभावित होता है और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ता है। वैश्वीकरण के वर्तमान युग में खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाएं महाद्वीपों तक फैली हुई हैं। किसी एक देश में उत्पन्न खाद्य जोखिम कुछ ही दिनों में विश्व के अनेक देशों तक पहुंच सकता है। इसलिए खाद्य सुरक्षा अब राष्ट्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक उत्तरदायित्व बन चुकी है। खाद्य जनित रोग : स्वास्थ्य पर अदृश्य आक्रमणदूषित भोजन अनेक प्रकार की बीमारियों और संक्रमणों का कारण बनता है। इनके प्रमुख स्रोत जैविक, रासायनिक तथा भौतिक प्रदूषक होते हैं। जैविक जोखिम: साल्मोनेला, ई-कोलाई, लिस्टेरिया जैसे जीवाणु; नोरोवायरस और हेपेटाइटिस-ए जैसे विषाणु; तथा विभिन्न परजीवी संक्रमण भोजन को विषाक्त बना सकते हैं। रासायनिक जोखिम: कीटनाशकों, उर्वरकों, भारी धातुओं, औद्योगिक प्रदूषकों तथा कृत्रिम रसायनों की अत्यधिक उपस्थिति मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है। भौतिक एवं मानवीय कारण: खाद्य मिलावट, दूषित जल, अस्वच्छ भंडारण, अनुचित परिवहन और प्रसंस्करण में लापरवाही खाद्य सुरक्षा को कमजोर बनाते हैं। ये सभी कारक मानव शरीर में अल्पकालिक संक्रमण से लेकर कैंसर, यकृत रोग, गुर्दा विकार और तंत्रिका तंत्र संबंधी गंभीर समस्याओं तक को जन्म दे सकते हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य की आधारशिला के रूप में खाद्य सुरक्षाखाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच गहरा और अविभाज्य संबंध है। असुरक्षित भोजन कुपोषण, संक्रमण, दस्त, आंत्र रोगों तथा अनेक दीर्घकालिक बीमारियों का कारण बनता है। इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव बच्चों, गर्भवती महिलाओं, वृद्धों तथा कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले व्यक्तियों पर पड़ता है। दूषित भोजन और कुपोषण एक दुष्चक्र का निर्माण करते हैं। बीमारी शरीर की पोषक तत्व ग्रहण करने की क्षमता को कम करती है, जिससे कुपोषण बढ़ता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति पुनः संक्रमण का शिकार हो जाता है। इसके विपरीत सुरक्षित एवं पोषणयुक्त भोजन स्वस्थ जीवन, बेहतर कार्यक्षमता, मानसिक विकास और उच्च जीवन गुणवत्ता का आधार बनता है। इसलिए खाद्य सुरक्षा किसी भी राष्ट्र की मानव पूंजी निर्माण प्रक्रिया का अभिन्न अंग है। सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में खाद्य सुरक्षा की भूमिकाखाद्य सुरक्षा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। सुरक्षित भोजन भूख और कुपोषण को समाप्त करने में सहायता करता है, स्वास्थ्य

27 साल बाद फिर गूंज सकती है ‘ताल’ की धुन, सुभाष घई ने ‘ताल-2’ को लेकर फैंस से मांगी राय

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की चर्चित म्यूजिकल फिल्मों में शामिल ‘ताल’ एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। फिल्म के निर्माता-निर्देशक Subhash Ghai ने इसके संभावित सीक्वल को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिससे फिल्म प्रेमियों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने प्रशंसकों से सीधा सवाल पूछा कि क्या उन्हें ‘ताल-2’ का निर्माण करना चाहिए। इस सवाल के सामने आते ही फिल्म के सीक्वल को लेकर उत्साह बढ़ गया है। सुभाष घई ने अपने पोस्ट में फिल्म ‘ताल’ से जुड़ी एक खास याद साझा की। उन्होंने बताया कि उन्हें इस फिल्म के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली थी। उन्होंने उस अवसर को याद किया जब प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक Roger Ebert ने फिल्म की प्रशंसा की थी। घई ने बताया कि एक विशेष फिल्म समारोह में ‘ताल’ के प्रदर्शन के दौरान फिल्म को संगीत, प्रस्तुति और अभिनय के लिए काफी सराहा गया था। निर्देशक के अनुसार, फिल्म को उस दौर में भारतीय सिनेमा की एक अलग पहचान के रूप में देखा गया था। इसकी कहानी, भावनात्मक प्रस्तुति और संगीत ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का भी ध्यान आकर्षित किया था। यही वजह है कि वर्षों बाद भी यह फिल्म दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में गिनी जाती है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सुभाष घई ने यह भी संकेत दिया कि यदि ‘ताल-2’ बनती है तो इसमें नई पीढ़ी के कलाकारों और एक युवा निर्देशक को अवसर दिया जा सकता है। उन्होंने सीधे तौर पर फैंस से राय मांगी कि क्या दर्शक इस क्लासिक फिल्म की नई कहानी को बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं। इस सवाल के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म प्रेमियों की प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आने लगी हैं। साल 1999 में रिलीज हुई Taal उस दौर की सबसे सफल और चर्चित फिल्मों में शामिल रही थी। फिल्म में Aishwarya Rai, Anil Kapoor और Akshaye Khanna ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसके गीत और संगीत भी जबरदस्त लोकप्रिय हुए थे। आज भी इसके कई गाने श्रोताओं की पसंदीदा सूची में शामिल हैं। फिल्म की सफलता का एक बड़ा कारण इसका संगीत भी माना जाता है। शानदार गीतों, आकर्षक लोकेशनों और प्रभावशाली अभिनय ने इसे उस समय की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया था। बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करने के साथ-साथ फिल्म ने कई पुरस्कार भी अपने नाम किए थे। फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्लासिक फिल्मों के सीक्वल और रीबूट को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला है। ऐसे में यदि ‘ताल-2’ का निर्माण होता है तो यह नई पीढ़ी के दर्शकों को पुराने दौर की लोकप्रिय फिल्म से जोड़ने का अवसर भी बन सकता है। हालांकि, फिलहाल सीक्वल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सुभाष घई के सवाल ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि इस दिशा में संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

घंटों शूटिंग, मिनटों में डायलॉग याद और बदलते इमोशन्स, नेहा हरसोरा ने बताया डेली सोप का असली संघर्ष

नई दिल्ली । टेलीविजन इंडस्ट्री की चमक-दमक और लोकप्रियता के पीछे कलाकारों की कड़ी मेहनत और निरंतर संघर्ष छिपा होता है। दर्शकों तक रोजाना नए एपिसोड पहुंचाने के लिए कलाकारों और पूरी टीम को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। इसी विषय पर अभिनेत्री नेहा हरसोरा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि डेली सोप में काम करना आसान नहीं है, लेकिन यही चुनौतियां उन्हें लगातार बेहतर बनने की प्रेरणा देती हैं। नेहा हरसोरा का कहना है कि डेली सोप की दुनिया बाहर से जितनी आकर्षक दिखाई देती है, वास्तविकता में उतनी ही मेहनत और समर्पण की मांग करती है। कलाकारों को कई बार लगातार घंटों तक शूटिंग करनी पड़ती है और सीमित समय में अपने किरदार के अनुरूप प्रदर्शन देना होता है। उनके अनुसार, अभिनय का यह क्षेत्र मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर कलाकारों की परीक्षा लेता है। उन्होंने बताया कि कई बार कलाकारों को शूटिंग शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही संवाद दिए जाते हैं। ऐसे में उन्हें तुरंत याद करना और कैमरे के सामने बिना किसी गलती के प्रस्तुत करना बड़ी चुनौती होती है। इसके अलावा, एक ही दिन में अलग-अलग भावनात्मक दृश्यों की शूटिंग करनी पड़ती है। कभी कलाकार को भावुक दृश्य निभाना होता है तो कुछ ही समय बाद हल्के-फुल्के या खुशमिजाज दृश्य में नजर आना पड़ता है। इस तरह तेजी से भावनाओं में बदलाव करना आसान नहीं होता। अभिनेत्री का मानना है कि डेली सोप का व्यस्त शेड्यूल कलाकारों की व्यक्तिगत जिंदगी को भी प्रभावित करता है। सुबह से देर रात तक चलने वाली शूटिंग के कारण कलाकारों को परिवार के साथ पर्याप्त समय बिताने का अवसर नहीं मिल पाता। हालांकि, उन्होंने कहा कि जो लोग अभिनय को अपना करियर चुनते हैं, उन्हें इन चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। नेहा ने स्पष्ट किया कि कठिनाइयों के बावजूद उन्हें अपने काम से बेहद लगाव है। उनके अनुसार, कैमरे के सामने खड़े होकर किरदार को जीवंत बनाना, संवादों को आत्मसात करना और दर्शकों तक भावनाओं को पहुंचाना उन्हें संतुष्टि देता है। अभिनय उनके लिए केवल पेशा नहीं बल्कि एक जुनून है, जिसे वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाती हैं। उन्होंने फिल्मों और वेब सीरीज की कार्यप्रणाली की तुलना भी की। नेहा के अनुसार, फिल्मों और वेब सीरीज में कलाकारों को अपने किरदार को समझने, तैयारी करने और भाषा या व्यवहार पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। कई प्रोजेक्ट्स में कलाकारों के लिए विशेष वर्कशॉप भी आयोजित की जाती हैं। इसके विपरीत, डेली सोप में काम की गति काफी तेज होती है और कलाकारों को सीमित समय में ही सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यही तेज रफ्तार और निरंतर चुनौतियां डेली सोप को अन्य माध्यमों से अलग बनाती हैं। हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने का अवसर मिलता है। उनके मुताबिक, संघर्ष और मेहनत से मिली सफलता का आनंद भी अलग होता है और यही बात उन्हें इस क्षेत्र से जोड़े रखती है।

Instagram Reels का बढ़ता प्रभाव: मनोरंजन से आगे बढ़कर शॉपिंग और ब्रांड डिस्कवरी का बना नया केंद्र

नई दिल्ली । डिजिटल युग में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका तेजी से बदल रही है। जो मंच कभी केवल मनोरंजन और संवाद का माध्यम माने जाते थे, वे अब उपभोक्ताओं के खरीदारी व्यवहार को भी प्रभावित करने लगे हैं। हालिया अध्ययन में सामने आया है कि Instagram Reels अब भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि नए प्रोडक्ट्स की खोज और खरीदारी संबंधी निर्णय लेने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। देशभर में किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण के अनुसार वीडियो कंटेंट देखने की आदत अब महानगरों तक सीमित नहीं रही है। छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोग रोजाना वीडियो कंटेंट देख रहे हैं। अध्ययन में शामिल अधिकांश प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि वे प्रतिदिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वीडियो देखते हैं और Reels उनके डिजिटल अनुभव का अहम हिस्सा बन चुका है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच वीडियो देखने की खाई लगातार कम हो रही है। जहां शहरों में लगभग सभी इंटरनेट उपयोगकर्ता नियमित रूप से वीडियो कंटेंट देखते हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि डिजिटल कंटेंट की पहुंच अब देश के हर हिस्से तक हो चुकी है। युवा वर्ग, विशेषकर Gen Z, Instagram Reels का सबसे बड़ा दर्शक समूह बनकर उभरा है। बड़ी संख्या में युवा प्रतिदिन Reels देखते हैं और नए ट्रेंड्स, उत्पादों तथा सेवाओं की जानकारी प्राप्त करते हैं। महिलाओं और प्रीमियम उपभोक्ता वर्ग में भी Reels की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और आकर्षक वीडियो फॉर्मेट ने दर्शकों की पसंद को बदल दिया है, जिसके कारण यह प्लेटफॉर्म तेजी से प्रभावशाली बनता जा रहा है। व्यापारिक दृष्टि से भी Reels का महत्व लगातार बढ़ रहा है। कंपनियां और ब्रांड अब इसे केवल विज्ञापन दिखाने का मंच नहीं मान रहे, बल्कि उपभोक्ताओं तक सीधे पहुंचने और उन्हें खरीदारी के लिए प्रेरित करने के प्रभावी माध्यम के रूप में देख रहे हैं। वीडियो के माध्यम से उत्पादों की प्रस्तुति, उपयोग के तरीके और वास्तविक अनुभव उपभोक्ताओं के बीच विश्वास पैदा करने में मदद कर रहे हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि बड़ी संख्या में लोग नए उत्पादों की जानकारी सबसे पहले Reels के माध्यम से प्राप्त करते हैं। कई उपभोक्ता किसी उत्पाद को खरीदने से पहले उससे संबंधित वीडियो देखते हैं और उसके बाद निर्णय लेते हैं। यह बदलाव बताता है कि डिजिटल कंटेंट अब पारंपरिक विज्ञापन माध्यमों की तुलना में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। फैशन, ब्यूटी, लाइफस्टाइल, फिटनेस, कॉमेडी और स्पोर्ट्स जैसी श्रेणियां दर्शकों के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय बनी हुई हैं। इन विषयों से जुड़े कंटेंट को बड़ी संख्या में देखा और साझा किया जा रहा है। इसके साथ ही क्रिएटर्स को भी बेहतर पहुंच और अधिक एंगेजमेंट मिल रहा है, जिससे उनका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सोशल मीडिया आधारित कॉमर्स और भी मजबूत होगा। Instagram Reels जैसे प्लेटफॉर्म न केवल मनोरंजन प्रदान करेंगे बल्कि उपभोक्ताओं की पसंद, खरीदारी के तरीके और बाजार की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

अब वॉइस मैसेज सुनना नहीं पड़ेगा, WhatsApp की ट्रांसक्रिप्ट सुविधा से सीधे पढ़ें मैसेज और बचाएं प्राइवेसी

नई दिल्ली । WhatsApp दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक है। इसके जरिए यूजर्स टेक्स्ट चैट, वॉइस और वीडियो कॉल करने के साथ स्टेटस शेयरिंग और वॉइस नोट भेजने जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, कई बार वॉइस मैसेज ऐसे समय पर आते हैं जब उन्हें सुनना सार्वजनिक जगहों, ऑफिस या भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मुश्किल हो जाता है। ऐसे में WhatsApp का Voice Message Transcript फीचर बेहद उपयोगी साबित होता है। यह फीचर वॉइस मैसेज को सीधे लिखित टेक्स्ट में बदल देता है। इसका मतलब है कि यूजर को ऑडियो सुनने की जरूरत नहीं होती और मैसेज की सामग्री तुरंत पढ़ी जा सकती है। इससे न केवल प्राइवेसी बनी रहती है, बल्कि समय की बचत भी होती है। फीचर Android और iPhone दोनों डिवाइस पर उपलब्ध है और इसे इस्तेमाल करना बेहद आसान है। इस सुविधा का उपयोग करने के लिए सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में WhatsApp खोलें। इसके बाद Settings में जाएं और Chat विकल्प चुनें। यहां आपको Voice Message Transcripts का ऑप्शन दिखाई देगा। इसे ऑन कर दें और अपनी पसंदीदा भाषा का चयन करें। वर्तमान में अंग्रेजी भाषा सबसे अधिक इस्तेमाल की जाती है। जब फीचर एक्टिव हो जाता है, तो किसी भी चैट में मौजूद वॉइस मैसेज पर टैप करें। अब Transcribe विकल्प दिखाई देगा। इस पर क्लिक करने के बाद WhatsApp ऑडियो को कुछ ही सेकंड में टेक्स्ट में बदल देता है। पूरा संदेश आपकी स्क्रीन पर लिखित रूप में दिखाई देने लगता है। WhatsApp ने यह Voice Message Transcript फीचर वर्ष 2024 में पेश किया था। शुरुआत में यह सुविधा केवल सीमित यूजर्स के लिए उपलब्ध थी, लेकिन अब इसे व्यापक रूप से रोलआउट कर दिया गया है। आज अधिकांश यूजर्स अपने स्मार्टफोन पर इस फीचर का लाभ उठा सकते हैं और वॉइस मैसेज सुनने के बजाय आसानी से पढ़ सकते हैं। विशेष रूप से सार्वजनिक स्थानों पर यह सुविधा प्राइवेसी बनाए रखने में मदद करती है। यदि आप सार्वजनिक परिवेश में WhatsApp का उपयोग करते हैं, तो इस फीचर की मदद से आप बिना किसी परेशानी के मैसेज पढ़ सकते हैं। साथ ही, यह समय की बचत भी करता है क्योंकि किसी भी ऑडियो को पूरा सुनने की आवश्यकता नहीं होती। इस फीचर के इस्तेमाल से न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ती है बल्कि सामाजिक शिष्टाचार भी बना रहता है। हेडफोन न होने या आसपास का माहौल शांत रखने की आवश्यकता होने पर यह सुविधा और भी उपयोगी साबित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के ट्रांसक्रिप्शन फीचर्स आने वाले समय में मैसेजिंग एप्स की नई पहचान बन सकते हैं। सारांश यह है कि WhatsApp का Voice Message Transcript फीचर यूजर्स को पब्लिक जगहों पर वॉइस मैसेज सुनने से बचाता है, प्राइवेसी को सुरक्षित रखता है और समय की बचत करता है। यह फीचर सरल, तेज और सभी स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए सहज रूप से उपलब्ध है।

AC के साथ सीलिंग फैन चलाने से क्यों बढ़ जाती है ठंडक, जानिए बिजली बिल कम करने का आसान और वैज्ञानिक तरीका

नई दिल्ली । गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर का उपयोग लगभग हर घर में बढ़ जाता है। तेज गर्मी से राहत पाने के लिए लोग अक्सर AC का तापमान काफी कम कर देते हैं, लेकिन इसके साथ ही बिजली का बिल भी तेजी से बढ़ने लगता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि सीलिंग फैन और AC का संयुक्त उपयोग बेहतर कूलिंग के साथ-साथ बिजली बचत का भी प्रभावी उपाय साबित हो सकता है। अधिकांश लोगों के बीच यह धारणा होती है कि पंखा कमरे का तापमान कम करता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। सीलिंग फैन सीधे तौर पर कमरे को ठंडा नहीं करता, बल्कि हवा के प्रवाह को बढ़ाकर शरीर को अधिक ठंडक का एहसास कराता है। जब हवा त्वचा से टकराती है तो पसीना तेजी से सूखता है और शरीर की गर्मी बाहर निकलती है। इसी कारण व्यक्ति को वास्तविक तापमान की तुलना में अधिक ठंडक महसूस होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, AC चलाने के दौरान कमरे में ठंडी हवा नीचे की ओर जमा होने लगती है जबकि गर्म हवा ऊपर बनी रहती है। इससे कमरे के अलग-अलग हिस्सों में तापमान का अंतर पैदा हो जाता है। ऐसे में एयर कंडीशनर को पूरे कमरे को समान रूप से ठंडा करने के लिए अधिक समय तक काम करना पड़ता है। सीलिंग फैन इस समस्या को काफी हद तक कम कर देता है। फैन ठंडी और गर्म हवा को पूरे कमरे में समान रूप से फैलाता है, जिससे हर हिस्से में एक जैसी ठंडक महसूस होती है। इसका फायदा यह होता है कि AC का थर्मोस्टेट अपेक्षाकृत जल्दी निर्धारित तापमान तक पहुंच जाता है और कंप्रेसर को कम समय तक चलना पड़ता है। इससे बिजली की खपत में कमी आती है। ऊर्जा विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि AC को पहले 22 डिग्री सेल्सियस पर चलाया जाता था, तो फैन के साथ इसे 24 या 25 डिग्री सेल्सियस पर सेट करने के बाद भी लगभग समान स्तर का आराम प्राप्त किया जा सकता है। तापमान में यह छोटा बदलाव बिजली की खपत पर बड़ा असर डाल सकता है। अनुमान है कि AC का तापमान हर एक डिग्री बढ़ाने पर ऊर्जा खपत में लगभग 4 से 8 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। एक सामान्य एयर कंडीशनर जहां 1000 से 2000 वॉट तक बिजली की खपत करता है, वहीं अधिकांश सीलिंग फैन केवल 15 से 70 वॉट के बीच बिजली लेते हैं। ऐसे में फैन का अतिरिक्त खर्च बहुत कम होता है, जबकि AC पर पड़ने वाला दबाव घटने से कुल बिजली बिल में उल्लेखनीय बचत संभव हो जाती है। तकनीकी रूप से उन्नत BLDC फैन इस बचत को और बढ़ा सकते हैं। ये फैन पारंपरिक पंखों की तुलना में काफी कम बिजली खर्च करते हैं और फुल स्पीड पर भी बेहद कम ऊर्जा का उपयोग करते हैं। यही कारण है कि ऊर्जा दक्ष उपकरणों की मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि यदि कमरे में कोई मौजूद न हो तो पंखे को बंद कर देना चाहिए। खाली कमरे में चलता हुआ फैन केवल बिजली खर्च करता है। इसके अलावा AC के फिल्टर और पंखे के ब्लेड की नियमित सफाई भी जरूरी है, क्योंकि धूल जमा होने पर दोनों उपकरणों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और बिजली की खपत बढ़ सकती है।

कम उम्र में बड़ा सपना, वैभव सूर्यवंशी बोले- लंबे समय तक क्रिकेट पर राज करना चाहता हूं

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में अपने बल्ले से धमाल मचाने वाले 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के नए सितारे बनकर उभरे हैं। शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के साथ-साथ एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह मिली है। चयन के बाद वैभव ने अपने भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ क्रिकेट खेलना नहीं, बल्कि लंबे समय तक इस खेल में अपना दबदबा बनाए रखना है। राजस्थान रॉयल्स द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक इंटरव्यू में वैभव ने अपने क्रिकेट करियर को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह ऐसा खिलाड़ी बनना चाहते हैं, जिसे क्रिकेट प्रेमी वर्षों तक याद रखें। वैभव का मानना है कि एक महान खिलाड़ी वही होता है जो अपने दम पर मैच का रुख बदल दे और टीम को जीत दिलाए। युवा बल्लेबाज ने कहा कि उन्होंने अपने करियर को लेकर स्पष्ट लक्ष्य तय कर रखा है। उनका सपना है कि जब भी लोग उनके खेल को देखें या भविष्य में उनके बारे में चर्चा करें तो यह महसूस करें कि वह ऐसा बल्लेबाज था जो अकेले दम पर मुकाबले का नतीजा बदल सकता था। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ वह लगातार मेहनत कर रहे हैं और अपने खेल को बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं। वैभव ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कुछ साल क्रिकेट खेलकर संतुष्ट हो जाना नहीं है। वह चाहते हैं कि अगले 10 से 20 वर्षों तक उनके प्रदर्शन की चर्चा हो और उनका प्रभाव क्रिकेट जगत में बना रहे। उन्होंने कहा कि क्रिकेट उनके लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम है। इसी कारण वह पूरी जिंदगी इस खेल का आनंद लेते हुए लगातार बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं। भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने भी वैभव की प्रतिभा की सराहना की है। चयन समिति का मानना है कि युवा बल्लेबाज ने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया और टीम में जगह पाने का मजबूत दावा पेश किया। आईपीएल 2026 में उनकी बल्लेबाजी ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि विशेषज्ञों को भी प्रभावित किया। राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए वैभव सूर्यवंशी ने पूरे सीजन में शानदार निरंतरता दिखाई। उन्होंने 16 पारियों में विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए 237 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए। इस प्रदर्शन के दम पर उन्होंने ऑरेंज कैप अपने नाम की और यह उपलब्धि हासिल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। इसके अलावा उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 72 छक्के जड़कर टी20 क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। अब क्रिकेट प्रेमियों की नजरें वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय सफर पर टिकी हैं। कम उम्र में मिली सफलता ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जाना शुरू कर दिया है। आने वाले महीनों में आयरलैंड, इंग्लैंड और एशियन गेम्स के मंच पर उनके प्रदर्शन से यह तय होगा कि वह घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट की सफलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी मजबूती से आगे बढ़ा पाते हैं।

गिल-राहुल के दमदार शतक, भारतीय बल्लेबाजों ने गेंदबाजों के लिए तैयार किया मजबूत मंच

नई दिल्ली। मुल्लांपुर स्थित महाराजा यादवेंद्र सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मैच में भारतीय बल्लेबाजों ने दूसरे दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए मेहमान टीम के गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। मजबूत बल्लेबाजी के दम पर भारत ने अपनी पहली पारी 8 विकेट पर 564 रन बनाकर घोषित की और मुकाबले में मजबूत स्थिति हासिल कर ली। दूसरे दिन भारतीय टीम ने शुभमन गिल और ऋषभ पंत के साथ अपनी पारी को आगे बढ़ाया। दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही सकारात्मक रवैया अपनाया और अफगान गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। कप्तान शुभमन गिल ने जिम्मेदारी भरी पारी खेलते हुए 177 गेंदों में 126 रन बनाए। उनकी पारी में 15 चौके और एक छक्का शामिल रहा। गिल ने एक बार फिर साबित किया कि वह लंबी पारियां खेलने की क्षमता रखते हैं और टीम के शीर्ष क्रम की सबसे मजबूत कड़ी बन चुके हैं। दूसरी ओर ऋषभ पंत ने अपनी आक्रामक शैली में बल्लेबाजी करते हुए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। उन्होंने 81 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली, जिसमें छह चौके और तीन शानदार छक्के शामिल थे। हालांकि वह शतक से चूक गए, लेकिन उनकी तेजतर्रार बल्लेबाजी ने भारत की रन गति को लगातार बनाए रखा। गिल और पंत की साझेदारी ने भारतीय टीम को विशाल स्कोर की दिशा में मजबूती प्रदान की। ध्रुव जुरेल से भी बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन वह 19 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद वॉशिंगटन सुंदर और टेस्ट पदार्पण कर रहे मानव सुथार ने पारी को संभाला। दोनों खिलाड़ियों ने सातवें विकेट के लिए उपयोगी साझेदारी कर टीम को और मजबूत स्थिति में पहुंचाया। मानव सुथार ने अपने पहले टेस्ट मैच में 28 रन का योगदान देकर सकारात्मक संकेत दिए। वॉशिंगटन सुंदर ने निचले क्रम में शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद अर्धशतक जमाया। उन्होंने 68 गेंदों में 52 रन बनाए और अंत तक क्रीज पर डटे रहे। उनकी पारी में पांच चौके और एक छक्का शामिल था। सुंदर ने मोहम्मद सिराज के साथ तेज साझेदारी कर टीम के स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाया। सिराज ने भी बल्लेबाजी में हाथ दिखाते हुए केवल 12 गेंदों में 22 रन बनाए, जिसमें चार चौके और एक छक्का शामिल रहा। कुलदीप यादव 9 रन बनाकर नाबाद लौटे। भारतीय पारी की नींव पहले दिन ही मजबूत हो चुकी थी। यशस्वी जायसवाल ने 24 रन का योगदान दिया, जबकि केएल राहुल ने बेहतरीन शतक जड़ा। राहुल ने 165 गेंदों में 100 रन बनाकर अपनी तकनीक और धैर्य का शानदार प्रदर्शन किया। वहीं साई सुदर्शन ने 81 रन की आकर्षक पारी खेलकर शीर्ष क्रम को मजबूती प्रदान की। अफगानिस्तान की ओर से गेंदबाजी में मोहम्मद सलीम सफी सबसे सफल रहे। उन्होंने छह विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजों को चुनौती देने की कोशिश की। जियाउर रहमान और हशमतुल्लाह शाहिदी को एक-एक सफलता मिली। हालांकि भारतीय बल्लेबाजों के सामने अफगान गेंदबाजी काफी हद तक बेअसर नजर आई। 564 रन का विशाल स्कोर भारत की बल्लेबाजी गहराई और मौजूदा फॉर्म को दर्शाता है। यह अफगानिस्तान के खिलाफ किसी भी टीम द्वारा बनाए गए सबसे बड़े स्कोरों में से एक है। अब भारतीय गेंदबाजों की नजर अफगानिस्तान को जल्द समेटकर मैच पर पूरी पकड़ बनाने पर होगी।

फैंस का बढ़ता प्यार हमारी ताकत: टी20 विश्व कप से पहले हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान

नई दिल्ली। इंग्लैंड में आयोजित होने वाले टी20 विश्व कप 2026 से पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम आत्मविश्वास से भरपूर नजर आ रही है। पिछले वर्ष वनडे विश्व कप में ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के बाद अब टीम की नजरें टी20 विश्व कप के खिताब पर टिकी हैं। इस बीच भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम की तैयारियों, बढ़ती उम्मीदों और महिला क्रिकेट को मिल रहे अभूतपूर्व समर्थन को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। हरमनप्रीत कौर का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में महिला क्रिकेट के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है और इसका सकारात्मक प्रभाव खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्रशंसक खिलाड़ियों और मैचों से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं, तो इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होते हैं। उनके अनुसार, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में महिला क्रिकेट को पहले की तुलना में कहीं अधिक पहचान और चर्चा मिल रही है, जो खेल के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। टी20 विश्व कप में भारतीय टीम को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। हालांकि हरमनप्रीत का कहना है कि वह बाहरी दबाव या उम्मीदों के बारे में ज्यादा नहीं सोचतीं। उनके अनुसार, किसी भी बड़े टूर्नामेंट में सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार तैयारी और वर्तमान पर ध्यान केंद्रित रखना होता है। उन्होंने कहा कि वर्षों के अनुभव ने उन्हें यह सिखाया है कि उम्मीदें हमेशा रहेंगी, लेकिन खिलाड़ी को अपने खेल और प्रक्रिया पर ही ध्यान देना चाहिए। कप्तान ने बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हुए प्रशिक्षण शिविर को टीम की तैयारी का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कैंप खिलाड़ियों के बीच तालमेल बढ़ाने, आत्मविश्वास मजबूत करने और रणनीतिक रूप से टीम को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। युवा खिलाड़ियों को अनुभवी क्रिकेटरों के साथ समय बिताने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी समझ और प्रदर्शन दोनों में सुधार होता है। उन्होंने बताया कि टीम प्रबंधन ने प्रत्येक खिलाड़ी की भूमिका स्पष्ट करने पर विशेष ध्यान दिया है, जो टी20 जैसे तेज प्रारूप में बेहद जरूरी है। अपनी बल्लेबाजी शैली में आए बदलाव पर हरमनप्रीत ने कहा कि आधुनिक टी20 क्रिकेट लगातार विकसित हो रही है और खिलाड़ियों को भी समय के साथ खुद को ढालना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आक्रामक क्रिकेट खेलने का अर्थ अपनी प्राकृतिक शैली को बदलना नहीं है, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार सही समय पर जोखिम उठाना और विपक्षी टीम पर दबाव बनाना है। उन्होंने माना कि कोचिंग स्टाफ के साथ हुई चर्चाओं ने उन्हें अपनी बल्लेबाजी में नए आयाम जोड़ने में मदद की है। फील्डिंग को लेकर भी हरमनप्रीत उतनी ही उत्साहित नजर आईं। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी जहां व्यक्तिगत संतुष्टि देती है, वहीं फील्डिंग टीम के लिए अतिरिक्त योगदान देने का अवसर प्रदान करती है। उनके अनुसार, मैदान पर डाइव लगाना, रन बचाना या शानदार कैच लेना न केवल मैच का रुख बदल सकता है, बल्कि टीम के अन्य खिलाड़ियों को भी प्रेरित करता है। भारतीय कप्तान का मानना है कि महिला क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता खेल के भविष्य के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि जब लोग मैचों, खिलाड़ियों और प्रदर्शन को लेकर चर्चा करते हैं, तो इससे खेल मुख्यधारा की क्रिकेट संस्कृति का हिस्सा बनता है। यही बढ़ता जुड़ाव और समर्थन भारतीय महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।