बीड़ी नहीं दी तो युवक पर चाकू से हमला, मंदसौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप

मध्य प्रदेश । मंदसौर जिले के दलौदा कस्बे में शनिवार रात एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। बीड़ी मांगने और उसे देने से इनकार करने के बाद शुरू हुई कहासुनी चाकूबाजी तक पहुंच गई। घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, कुमारवाड़ा निवासी 23 वर्षीय विजय नाथ शनिवार रात दलौदा कृषि उपज मंडी रोड स्थित एक चाय की दुकान पर चाय पीने गया था। इसी दौरान वहां सिराज नामक युवक भी पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, सिराज ने विजय से बीड़ी मांगी, लेकिन विजय ने उसे बीड़ी देने से मना कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। शुरुआत में मामूली कहासुनी के रूप में शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में उग्र हो गया। आरोप है कि गुस्से में आकर सिराज ने विजय पर चाकू से हमला कर दिया। हमले के दौरान विजय ने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ में गंभीर चोट लग गई। घटना होते ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर भीड़ एकत्र हो गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल घायल युवक की मदद की और उसे दलौदा थाने पहुंचाया। इसके बाद पुलिस ने उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी चोटों का इलाज किया। परिजनों के मुताबिक, चाकू का वार काफी गहरा था, जिसके कारण घायल युवक के हाथ में सात से आठ टांके लगाने पड़े। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है और चिकित्सकीय निगरानी में उपचार जारी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी सक्रिय हो गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विवाद की वजह बीड़ी मांगने और उसे देने से इनकार करना था। हालांकि पुलिस पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवाद के पीछे कोई अन्य कारण तो नहीं था। एडिशनल एसपी टी.एस. बघेल ने बताया कि मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छोटी-छोटी बातों पर बढ़ती आक्रामकता किस तरह गंभीर अपराधों का रूप ले रही है। सामाजिक स्तर पर भी ऐसे मामलों को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि मामूली विवादों का हिंसा में बदलना कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द दोनों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को भी खंगाला जा रहा है। वहीं घायल युवक के परिजन आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
नदी में पहुंचे प्लास्टिक कचरे पर चला सफाई अभियान, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

मध्य प्रदेश । मंदसौर में शिवना नदी के संरक्षण और स्वच्छता को लेकर चल रहा जनअभियान लगातार नई मिसाल कायम कर रहा है। विधायक विपिन जैन के नेतृत्व में संचालित शिवना शुद्धिकरण अभियान रविवार को अपने 128वें दिन में प्रवेश कर गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रमदानियों, समाजसेवियों और पर्यावरण प्रेमियों ने नदी तट पर पहुंचकर सफाई कार्य में हिस्सा लिया और नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराया। हाल ही में हुई बारिश के कारण शहर के विभिन्न नालों से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य अपशिष्ट पदार्थ बहकर शिवना नदी में पहुंच गए थे। नदी के किनारों और उथले हिस्सों में यह कचरा जमा हो गया था, जिससे नदी की स्वच्छता और प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होने लगा था। इसी को ध्यान में रखते हुए रविवार को विशेष सफाई अभियान चलाया गया। श्रमदानियों ने नदी में उतरकर प्लास्टिक कचरा, गाद और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकाला। कई घंटों तक चले इस अभियान के दौरान लगभग एक ट्रॉली कचरा एकत्र किया गया। इसके बाद एकत्रित अपशिष्ट के उचित निस्तारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई, ताकि दोबारा यह सामग्री नदी या आसपास के क्षेत्रों को प्रदूषित न कर सके। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि शिवना नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि मंदसौर की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसकी स्वच्छता और संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। लगातार हो रहे श्रमदान से न केवल नदी का स्वरूप बदल रहा है, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है। अभियान के दौरान मौजूद सोनाली जैन ने बताया कि शिवना शुद्धिकरण अभियान का उद्देश्य केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और स्वच्छता के महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया जा रहा है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे प्रत्येक रविवार को आयोजित होने वाले इस अभियान में शामिल होकर अपने शहर और नदी के प्रति जिम्मेदारी निभाएं। रविवार को आयोजित श्रमदान में विभिन्न सामाजिक संगठनों, महिला समूहों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। अभियान में हेमराज खाबिया, रमेश सोनी, सुरेश सेजपुरिया, रफत पयामी, इष्टा भाचावत, सुनीता बंडी, राखी सत्रावाला, कौशल्या त्रिवेदी, सुनीता माली, राजनारायण लाड़, विकास दशोरा, अंसार मेव, ऋषिराज लाड़ और कनिष्क सोनी सहित कई समाजसेवी उपस्थित रहे। लगातार 128 दिनों से बिना रुके चल रहा यह अभियान अब केवल सफाई कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि जनभागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का एक सफल मॉडल बनता जा रहा है। श्रमदानियों के समर्पण और नागरिकों के सहयोग से शिवना नदी के तटों पर स्वच्छता और सुंदरता लौटती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोग भी इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल मान रहे हैं। शिवना शुद्धिकरण अभियान यह संदेश दे रहा है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर किसी लक्ष्य के लिए कार्य करें, तो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण सुधार की दिशा में उल्लेखनीय बदलाव संभव है।
Rosneft के Igor Sechin का अनुमान: भारत की तेज़ ग्रोथ और तेल खपत के चलते अगले दशक में वैश्विक ऊर्जा पर भारत का दबदबा

नई दिल्ली । वैश्विक तेल बाजार में भारत की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है और विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में देश इस क्षेत्र में प्रमुख खिलाड़ी बन जाएगा। हाल ही में रूसी तेल कंपनी Rosneft के सीईओ इगोर सेचिन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि साल 2035 तक वैश्विक तेल मांग में भारत का हिस्सा लगभग आधा होगा। उनका अनुमान है कि वैश्विक तेल की बढ़ती मांग में भारत की हिस्सेदारी सबसे अधिक रहेगी। इगोर सेचिन ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में कहा कि भारत की तेल खपत अगले दशक में करीब आठ मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच जाएगी, जो 44 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। उनका कहना था कि जबकि वैश्विक मांग में कुल मिलाकर लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि होगी, भारत अकेले वैश्विक मांग में होने वाली वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा संभालेगा। इससे स्पष्ट होता है कि भारत तेल बाजार में रणनीतिक महत्व रखता है। रूस और भारत के आर्थिक संबंधों पर बात करते हुए सेचिन ने बताया कि अप्रैल 2022 से रूस की तेल आपूर्ति से भारत और चीन को लगभग 40 अरब डॉलर का लाभ हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और चीन के साथ रूस की साझेदारी ने स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद की है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से रूस को अलग करना संभव नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा की बढ़ती मांग ने देश को वैश्विक तेल बाजार में निर्णायक स्थिति दे दी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जो अनुमान से बेहतर रही। आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने भी भारत की अर्थव्यवस्था को सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया है। इगोर सेचिन ने होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) की संवेदनशीलता पर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इस स्ट्रेट के जरिए तेल और गैस की आपूर्ति में व्यवधान आने से फर्टिलाइजर्स और फूड प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं। उनका कहना था कि इस प्रभाव के प्रति भारत सबसे अधिक संवेदनशील देशों में शामिल है, जबकि अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है। रूस और भारत के बीच ऊर्जा साझेदारी से यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक तेल के खेल में भारत की भूमिका आने वाले दशक में और मजबूत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बढ़ती मांग न केवल घरेलू ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक बाजार पर भी इसका असर होगा।
जुए के खेल का वीडियो वायरल, महिला पुलिसकर्मी के पति का नाम आने से चर्चा तेज

मध्य प्रदेश । रीवा शहर में अवैध जुए के कथित संचालन को लेकर एक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल हो रहे इस वीडियो में बड़ी संख्या में लोगों के एक स्थान पर एकत्र होकर दांव लगाते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के गुढ़ चौराहा इलाके का बताया जा रहा है, जहां एक बस्ती में लंबे समय से अवैध जुए का फड़ संचालित होने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर होती रही हैं। जानकारी के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि शहर के बीचोंबीच कथित रूप से इतने बड़े स्तर पर जुए का संचालन कैसे हो रहा था। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और लाखों रुपये तक का दांव लगाया जाता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से संचालित हो रही थीं तो संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी। लोगों का आरोप है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मामले को लेकर कुछ व्यक्तियों के नाम भी स्थानीय स्तर पर चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि कथित जुआ फड़ के संचालन में कुछ लोगों की सक्रिय भूमिका होने की बातें कही जा रही हैं। इसके साथ ही एक महिला पुलिसकर्मी के पति का नाम भी चर्चाओं में सामने आया है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी ने इन आरोपों को सत्यापित किया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोपों के रूप में ही देखा जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता तभी स्थापित मानी जा सकती है जब जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलें और संबंधित एजेंसियां इसकी पुष्टि करें। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, ताकि तथ्य और आरोपों के बीच स्पष्ट अंतर सामने आ सके। उधर, वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई है। सिटी कोतवाली पुलिस का कहना है कि मामले की जानकारी प्राप्त हुई है और वीडियो की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, वीडियो की सत्यता, स्थान और उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान की जाएगी। यदि जांच में जुआ खेले जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ जुआ एक्ट और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का यह भी कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। अब शहरवासियों की नजर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है। लोगों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सके और कानून व्यवस्था में आमजन का विश्वास मजबूत हो।
चौपाटियों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल उजागर, उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी नजर आए

मध्य प्रदेश । रीवा शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। जहां एक ओर आम उपभोक्ता गैस सिलेंडर की समय पर उपलब्धता और रिफिल में होने वाली देरी को लेकर परेशान दिखाई देते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की चौपाटियों और खानपान की दुकानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का खुलेआम उपयोग होता नजर आ रहा है। हालिया पड़ताल में सामने आए तथ्यों ने गैस वितरण व्यवस्था और निगरानी तंत्र दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित चौपाटियों और फूड स्टॉल्स का निरीक्षण करने पर पाया गया कि बड़ी संख्या में दुकानदार घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, शहर की करीब 90 प्रतिशत चौपाटियों पर घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई स्थानों पर उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर भी उपयोग में दिखाई दिए, जबकि इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को घरेलू ईंधन उपलब्ध कराना है। सबसे अधिक चौंकाने वाली स्थिति सिरमौर चौराहे के पीछे स्थित एमपी-17 चौपाटी क्षेत्र में देखने को मिली। यहां संचालित अधिकांश दुकानों में घरेलू गैस सिलेंडर उपयोग में पाए गए। निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई प्रतिष्ठान नहीं मिला जहां नियमानुसार कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा हो। इससे यह सवाल उठने लगा है कि नियमों का उल्लंघन इतने बड़े पैमाने पर होने के बावजूद संबंधित विभागों की नजर इस ओर क्यों नहीं गई। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों पर सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं का उद्देश्य आम परिवारों की जरूरतों को पूरा करना है। ऐसे सिलेंडरों का व्यावसायिक गतिविधियों में उपयोग न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे गैस आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। यदि बड़ी संख्या में घरेलू सिलेंडर व्यवसायों में खपाए जाएंगे तो वास्तविक उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं। शहर के कई उपभोक्ताओं ने समय पर रिफिल नहीं मिलने और बुकिंग के बाद लंबा इंतजार करने की शिकायतें भी की हैं। ऐसे में लोगों का मानना है कि घरेलू सिलेंडरों के दुरुपयोग की जांच की जानी चाहिए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समय-समय पर कार्रवाई की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दिखाई नहीं देते। उनका आरोप है कि यदि नियमित और निष्पक्ष निरीक्षण किए जाएं तो घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का बड़ा नेटवर्क सामने आ सकता है। नियमों के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, फास्ट फूड सेंटर, चाय की दुकान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केवल कमर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके बावजूद कई स्थानों पर घरेलू सिलेंडरों का उपयोग जारी है, जिससे सुरक्षा और नियामकीय दोनों प्रकार की चिंताएं बढ़ रही हैं। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीएम अनुराग तिवारी ने कहा कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग नियमों के विरुद्ध है। यदि ऐसी शिकायतें सामने आई हैं तो संबंधित विभागों से जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी घरेलू गैस सिलेंडर का अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। शहरवासियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके और गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
बीएसएफ और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड के बीच तनाव, भारतीय-विदेशी दस्तावेजों के अभाव में प्रवासी फंसे

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल से सटी भारत-बांग्लादेश सीमा पर इन दिनों एक असामान्य स्थिति देखने को मिल रही है, जहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग सामने आ रहे हैं जो लंबे समय से भारत में रह रहे थे और अब अपनी पहचान बताकर वापस बांग्लादेश लौटने की इच्छा जता रहे हैं। यह पूरा मामला उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर चेकपोस्ट से सामने आया है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग वेरिफिकेशन के लिए पहुंच रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अनुसार, इन लोगों की बायोमीट्रिक जांच और दस्तावेजों की पुष्टि की जा रही है, जिसके बाद उन्हें फिलहाल होल्डिंग सेंटरों में भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार है जब स्थिति ऐसी बनी है कि अवैध प्रवासियों को खोजने की जरूरत नहीं पड़ रही, बल्कि लोग स्वयं सामने आकर अपनी पहचान दर्ज करा रहे हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हकीमपुर बॉर्डर पर हर दिन लगभग 200 से 300 लोग वेरिफिकेशन के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से कई लोगों के पास भारतीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, लेकिन बांग्लादेश से जुड़े वैध पहचान पत्र नहीं हैं। इसी कारण उनके मामलों की जांच जटिल हो गई है और दोनों देशों के बीच प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया लंबी हो रही है। इस बीच बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा एजेंसी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने आरोप लगाया है कि भारतीय सुरक्षा बलों की ओर से कुछ लोगों को सीमा पार धकेलने की कोशिश की गई है, हालांकि BSF ने इन आरोपों को खारिज किया है। बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी तरह की अवैध घुसपैठ या वापसी की कोशिश पर सख्ती से नजर रखी जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई प्रवासियों की व्यक्तिगत कहानियां भी सामने आई हैं। बांग्लादेश के सातक्षीरा जिले के मो. खालिद गाजी ने बताया कि वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ सीमा पर पहुंचे, लेकिन उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। उनका दावा है कि उन्हें दोनों तरफ से अस्वीकार किया गया और उन्हें BSF का जासूस बताकर वापस भेज दिया गया। इसी तरह मुंबई में रह रहे मोहम्मद अख्तर शेख ने बताया कि वे करीब 22 साल पहले बांग्लादेश से भारत आए थे और उनके पास भारतीय आधार कार्ड तो है, लेकिन बांग्लादेश का कोई दस्तावेज नहीं है। उन्हें आशंका है कि अब वे किसी भी देश में पूरी तरह स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जिससे उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है। मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी बॉर्डर से जुड़े एक अन्य व्यक्ति इस्लाम सरदार की कहानी भी सामने आई है, जिन्होंने कहा कि वे वर्षों से भारत में रह रहे हैं और अब अपने मूल देश लौटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वहां भी दस्तावेजों की कमी के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अपनी स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर बदलते हालात, प्रशासनिक सख्ती और पहचान सत्यापन की नई प्रक्रिया के चलते यह स्थिति बनी है। पश्चिम बंगाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि लंबे समय से रह रहे कई प्रवासी अब अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत और सीमा प्रबंधन की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, सभी मामलों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, ताकि मानवीय और कानूनी दोनों पहलुओं का संतुलन बना रहे।
मां से विवाद के चलते किया था बच्ची से रेप:आरोपी ताऊ बोला था-बहुत चपड़-चपड़ करती है; 6 साल की पीड़ित ICU में, हालत नाजुक

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के रीवा जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक कलयुगी बड़े पापा (ताऊ) ने अपनी ही 6 साल की मासूम भतीजी को अपनी हवस और दुश्मनी का शिकार बना डाला। इस खौफनाक वारदात के पीछे जो वजह सामने आई है, उसने समाज के क्रूर चेहरे को उजागर कर दिया है। आरोपी ने मासूम के साथ यह दरिंदगी सिर्फ इसलिए की क्योंकि उसका बच्ची की मां से विवाद चल रहा था। पीड़ित बच्ची ने खुद अस्पताल में अपनी मां को रोते हुए इस बात की गवाही दी। मां के अनुसार, जब मासूम दर्द से तड़प रही थी और आरोपी से गिड़गिड़ाते हुए कह रही थी- “बड़े अब्बू छोड़ दो”, तब उस हैवान का दिल पसीजने के बजाय उसने बेहद क्रूरता से जवाब दिया- “तेरी मां ज्यादा चपड़-चपड़ करती है।” पुलिस तफ्तीश में सामने आया है कि वारदात से ठीक एक दिन पहले यानी 3 जून को आरोपी ने बच्ची की मां के साथ घरेलू विवाद को लेकर बेरहमी से मारपीट की थी। इसके बाद 4 जून की रात उसने इस घिनौनी साजिश को अंजाम दिया और बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसका गला घोंटकर उसे जान से मारने की कोशिश भी की। अस्पताल के बिस्तर पर बेहाल मां; तड़प रही मासूम और डॉक्टरों की 24 घंटे निगरानीइस समय 6 साल की वह मासूम रीवा के संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती है, जहां उसकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने बताया कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट में बेहद गंभीर चोटें आई हैं और उसे लगातार ब्लीडिंग हो रही है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम आईसीयू में चौबीसों घंटे उसकी सेहत और सांसों पर पैनी नजर रखे हुए है। अस्पताल के बाहर पीड़ित मां का रो-रोकर बुरा हाल है। अपनी सुध-बुध खो चुकी मां ने सुबकते हुए कहा कि जिस बच्ची के हाथों में आज खिलौने होने चाहिए थे, उसके पूरे शरीर पर इलाज की सुइयां और दवाइयों की पाइपें लगी हुई हैं। मां ने रुंधे गले से कहा- “मेरी मासूम बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था? उस दरिंदे ने मेरी बेटी की हंसी और उसका बचपन सब कुछ छीन लिया। जब भी आईसीयू का दरवाजा खुलता है, मेरी धड़कनें थम जाती हैं। मेरी बस एक ही मांग है कि मेरी बेटी को न्याय मिले और दोषी को ऐसी खौफनाक सजा दी जाए जिसे देखकर आगे कोई ऐसा करने की हिम्मत न कर सके।” समाज में भारी आक्रोश; 30 मामलों का पुराना अपराधी है फरार आरोपीइस जघन्य कृत्य के बाद पूरे इलाके और पड़ोसियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि पूरे समाज के मुंह पर तमाचा है। मोहल्ले के लोगों ने एकजुट होकर प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ बिना किसी नरमी के फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला चलाकर ऐसी सजा दी जाए जो समाज के लिए नजीर बने। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पूरी मुस्तैदी से आरोपी की तलाश में जुटी है। सीएसपी राजीव पाठक ने बताया कि आरोपी का अपने भाई के साथ संपत्ति को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। आरोपी कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि एक आदतन अपराधी है, जिस पर शहर के अलग-अलग थानों में मारपीट, चोरी और लूट जैसे 30 से अधिक गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं। घटना के समय बच्ची का पिता भी एक अन्य लूट के मामले में जेल में बंद था, जिसका फायदा उठाकर आरोपी ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। पुलिस की कई टीमें जिले और आसपास के इलाकों में लगातार दबिश दे रही हैं और अधिकारियों का दावा है कि फरार आरोपी को जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
झारखंड राज्यसभा सीटों पर सियासी गतिरोध खत्म, JMM-कांग्रेस में 1-1 सीट पर बनी निर्णायक सहमति

नई दिल्ली । झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर महागठबंधन के दो प्रमुख घटक दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच जारी विवाद अब समाप्त हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि दोनों दलों के लिए एक-एक सीट पर चुनाव लड़ने की सहमति हो गई है। इससे पहले झामुमो के विधायकों ने दोनों सीटों पर दावा ठोक दिया था, जिससे गठबंधन में तनातनी बढ़ गई थी। पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को झामुमो ने राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है। बैद्यनाथ राम लातेहार से पूर्व विधायक रह चुके हैं और आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने में उनका योगदान सराहनीय माना जाता है। झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बैद्यनाथ राम पार्टी के मजबूत और समर्पित कार्यकर्ता हैं और उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। जानकारी के अनुसार, इस विवाद को सुलझाने में पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक, भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने सीएम हेमंत सोरेन से लंबी चर्चा की। इसके बाद सीएम ने दोनों दलों के लिए एक-एक सीट पर उम्मीदवार तय करने पर सहमति दे दी। राज्यसभा की दो सीटों पर अब कांग्रेस और जेएमएम के एक-एक उम्मीदवार मैदान में होंगे। बताया जा रहा है कि झारखंड में पहले कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार प्रणव झा का नाम घोषित कर दिया था, जिससे जेएमएम नेतृत्व में नाराजगी उत्पन्न हो गई थी। पार्टी के नेताओं का आरोप था कि कांग्रेस ने जेएमएम को विश्वास में लिए बिना नाम की घोषणा की थी। हालांकि अब दोनों पार्टियों के बीच सभी मतभेद दूर होते दिख रहे हैं और सहमति से उम्मीदवार तय हो गए हैं। सीएम हेमंत सोरेन ने रविवार रात गठबंधन के सभी विधायकों को डिनर पर बुलाया। इस बैठक का मकसद गठबंधन के भीतर आपसी सामंजस्य बनाए रखना और भविष्य में सहयोग को मजबूत करना बताया गया है। इससे पहले JMM की ओर से दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की संभावना जताई गई थी, लेकिन अब विवाद खत्म होकर गठबंधन में स्थिरता लौट आई है। राज्यसभा चुनाव से पहले इस तरह का समाधान महागठबंधन के लिए राहत भरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों दलों की आपसी सहमति से न केवल राज्यसभा में प्रतिनिधित्व तय होगा, बल्कि भविष्य में झारखंड में गठबंधन को भी मजबूती मिलेगी। बैद्यनाथ राम के नाम पर सहमति से आदिवासी और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा गया है। हालांकि चुनाव की प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन JMM और कांग्रेस के बीच विवाद के शांत होने से महागठबंधन की छवि बेहतर बनी है। दोनों दलों के नेताओं ने आपसी सहयोग और संवाद को ही भविष्य में निर्णय लेने का आधार बनाने का संकल्प जताया है। इससे राज्यसभा चुनाव की तैयारी और रणनीति को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
“मैं खुद लटक जाऊंगी…” बेटे ने बताए मां के आखिरी शब्द, सामने आई दिल दहला देने वाली घटना

मध्य प्रदेश । जबलपुर के आधारताल क्षेत्र में सामने आए पति-पत्नी की मौत के सनसनीखेज मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम गवाह वह 8 वर्षीय मासूम बच्चा बन गया है, जिसने अपनी मां और सौतेले पिता के बीच मौत से पहले हुई पूरी घटना अपनी आंखों से देखी। बच्चे के बयान ने पुलिस जांच को नई दिशा दी है और इस दर्दनाक पारिवारिक त्रासदी की कई परतें खोल दी हैं। पुलिस के अनुसार, 3 जून की रात घर में पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ गया कि मामला जानलेवा स्थिति तक पहुंच गया। बच्चे ने पुलिस को बताया कि उसके पिता मयंक सिंह ने गुस्से में चाकू उठा लिया था। इसी दौरान उसकी मां नेहा सिंह ने कथित तौर पर कहा कि यदि उसे मारना है तो वह खुद ही फांसी लगाकर जान दे देगी। इसके बाद घर के भीतर जो कुछ हुआ, वह पूरे मामले का सबसे संवेदनशील हिस्सा बन गया है। मासूम के बयान के मुताबिक, मयंक ने कमरे में फंदा तैयार किया। जब नेहा फंदे के नीचे रखी टेबल पर खड़ी हुई तो कुछ ही क्षणों में वह फंदे पर लटक गई। पुलिस अब बच्चे के बयान, घटनास्थल के साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई। बच्चे ने यह भी बताया कि मां के फंदे पर लटकने के बाद पिता ने कुछ देर बाद उसे नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि पूरी रात महिला का शव घर में ही पड़ा रहा। जब बच्चे ने मां के बारे में पूछा तो उसे बताया गया कि वह आराम कर रही है। इसके बाद पिता बेटे को दूसरे कमरे में ले जाकर सो गया। अगले दिन मयंक अपने बेटे को स्कूटी से बहन के घर छोड़ आया। इसी बीच पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि नेहा सिंह की पहले पति से शादी हुई थी और उसके निधन के बाद वर्ष 2024 में मयंक से उसकी मुलाकात हुई थी। दोनों ने परिवार की सहमति से विवाह किया था और आधारताल में किराए के मकान में रह रहे थे। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि जनवरी 2025 में विजय नगर स्थित एक स्पा सेंटर पर पुलिस कार्रवाई के दौरान नेहा वहां मिली थी। इसके बाद पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ने लगा था। मयंक कथित तौर पर नहीं चाहता था कि नेहा वहां काम करे, जबकि नेहा रोजगार जारी रखना चाहती थी। बाद में वह इंदौर में काम करने लगी, लेकिन बेटे से मिलने नियमित रूप से जबलपुर आती थी और परिवार की आर्थिक सहायता भी करती थी। पुलिस के अनुसार, 5 जून को मयंक बेटे को अपनी बहन के घर छोड़कर निकल गया। इसके बाद वह जीसीएफ क्षेत्र के एक खंडहरनुमा भवन में पहुंचा, जहां उसने कथित रूप से एक सुसाइड नोट लिखा। बाद में शनिवार को उसी स्थान पर उसका शव फंदे से लटका मिला। घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में उसने पत्नी की हत्या करने की बात स्वीकार करने का दावा किया है और कुछ पारिवारिक सदस्यों पर प्रताड़ना के आरोप भी लगाए हैं। रांझी थाना पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। बच्चे के बयान, सुसाइड नोट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक प्रभावित वह मासूम है, जिसने कुछ ही दिनों में अपनी मां और पिता दोनों को खो दिया।
घर के बाहर झगड़ा शांत कराने पहुंचीं बीजेपी नेता, पिस्टल से चली गोली बनी मौत की वजह

मध्य प्रदेश । जबलपुर में भाजपा की सक्रिय महिला नेता और पूर्व पार्षद प्रत्याशी संगीता रजक की गोली लगने से मौत हो गई। घटना शनिवार देर रात न्यू शोभापुर क्षेत्र में हुई, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में उपचार के लिए हैदराबाद ले जाया गया। वहां ओमेगा अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार घटना शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात करीब 1 से 2 बजे के बीच की है। बताया जा रहा है कि संगीता रजक के घर के बाहर कुछ लोग गाली-गलौज और शोर-शराबा कर रहे थे। आवाज सुनकर संगीता रजक अपने पति बंटी रजक के साथ घर से बाहर निकलीं। दोनों ने कथित रूप से वहां मौजूद लोगों को समझाने और शांत रहने के लिए कहा, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान संगीता रजक घर के भीतर गईं और अपनी लाइसेंसी पिस्टल लेकर बाहर आ गईं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक हड़बड़ाहट और अफरा-तफरी के माहौल में उनके हाथ में मौजूद पिस्टल का ट्रिगर दब गया। गोली सीधे उनके पेट में लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ीं। घटना के बाद परिजन और आसपास के लोग उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। बाद में बेहतर उपचार की उम्मीद में उन्हें हैदराबाद के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के प्रयासों के बावजूद मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही रांझी थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा तैयार कराया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह मामला दुर्घटनावश गोली चलने का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सभी संभावित पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि देर रात घर के बाहर विवाद किस कारण से हो रहा था और वहां मौजूद लोग कौन थे। इसके अलावा घटना के समय की परिस्थितियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। पुलिस जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले अज्ञात बदमाशों ने संगीता रजक के घर पर बम फेंकने और वाहन में तोड़फोड़ करने की घटना को अंजाम दिया था। इस संबंध में उनके पति बंटी रजक ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। ऐसे में पुलिस पुराने घटनाक्रम और हालिया घटना के बीच किसी संभावित संबंध की भी पड़ताल कर रही है। संगीता रजक ने पिछले नगरीय निकाय चुनाव में गोकलपुर वार्ड से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ा था। हालांकि वे चुनाव नहीं जीत सकी थीं, लेकिन क्षेत्र में उनकी सक्रिय राजनीतिक पहचान थी। बताया जा रहा है कि वे आगामी स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियों में भी जुटी हुई थीं। उनके पति बंटी रजक भी भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं और विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। फिलहाल पुलिस परिजनों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। इस दुखद घटना से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक का माहौल है।