जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर लिया है। संगठन ने सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर विस्तारित किया जाएगा। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के बाद जारी बयान में कहा कि यह आंदोलन यहीं समाप्त नहीं होगा और आगे इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक था, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। अभिजीत दीपके ने कहा कि प्रदर्शन में कई ऐसे लोग भी शामिल हुए जिन्होंने पहली बार किसी आंदोलन में हिस्सा लिया। उनके अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर समाज में गहरी चिंता मौजूद है। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आगे की रणनीति पर लगातार काम किया जाएगा। संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है। CJP का कहना है कि यदि अगले सात दिनों में मंत्री के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अभिजीत दीपके ने यह भी कहा कि वह आने वाले दिनों में सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को संबोधित करेंगे और आगे की रणनीति साझा करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि आंदोलन को डिजिटल और जमीनी दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाया जाएगा। CJP प्रवक्ता आशीष रांका ने भी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यह अंतिम अवसर है। उन्होंने कहा कि या तो सरकार स्वयं कार्रवाई करे या प्रधानमंत्री स्तर पर निर्णय लिया जाए। उनके अनुसार, यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में कई घंटों तक नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन चला, जिसके बाद कार्यक्रम समाप्त किया गया। हालांकि आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का अंत नहीं बल्कि शुरुआत है। इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि कुछ लोग विदेश में बैठकर देश की युवा नीति और शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। यह पूरा मामला अब शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में CJP के अल्टीमेटम और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
एलपीजी सिलेंडर महंगा: सरकार का बड़ा बयान, प्रति सिलेंडर 700 रुपये नुकसान का दावा, पाकिस्तान-अमेरिका से की तुलना

नई दिल्ली । घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में हुई 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने इस फैसले को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में उपभोक्ताओं को एलपीजी अब भी कई देशों की तुलना में सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 942 रुपये हो गई है, जो पहले 913 रुपये थी। इससे पहले मार्च में भी 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह कुल मिलाकर हालिया अवधि में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में 89 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस मूल्य निर्धारण के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को प्रत्येक सिलेंडर की बिक्री पर लगभग 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार में एलपीजी की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण आपूर्ति लागत काफी बढ़ गई है, जिसे घरेलू उपभोक्ताओं पर पूरी तरह नहीं डाला गया है। सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक एलपीजी बेंचमार्क कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण भारत में घरेलू एलपीजी की वास्तविक आपूर्ति लागत 1,600 रुपये प्रति सिलेंडर से अधिक हो गई है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को सिलेंडर 942 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी के बाद यह कीमत और कम होकर लगभग 642 रुपये रह जाती है। हालांकि इस योजना में सब्सिडी वितरण को लेकर हाल के समय में बदलाव भी देखने को मिले हैं, जिससे लाभार्थियों के बीच चर्चा बनी हुई है। सरकार के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में घरेलू एलपीजी पर कुल नुकसान बढ़कर लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 41,338 करोड़ रुपये था। इस बढ़ते नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति देने को मंजूरी दी है। सरकार ने यह भी कहा कि संकट के समय देश में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए घरेलू उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है। इसके साथ ही अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त आयात की व्यवस्था भी की गई है, ताकि घरेलू मांग पूरी की जा सके। भारत में एलपीजी की कीमतों की तुलना पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ-साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों से भी की गई है। सरकार का दावा है कि भारत में घरेलू रसोई गैस अब भी अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर उपलब्ध है। इस मूल्य संशोधन को लेकर सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं पर वैश्विक बाजार का पूरा असर डालने से बचाना और देशभर में रसोई गैस की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
इंस्टाग्राम पर दोस्ती, शादी का झांसा और फिर धमकियां: इंदौर में कॉलेज छात्रा की शिकायत पर केस दर्ज

मध्य प्रदेश । इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया के जरिए हुई दोस्ती के बाद एक कॉलेज छात्रा को कथित रूप से परेशान करने और धमकाने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। युवती का आरोप है कि आरोपी ने खुद को अविवाहित बताकर उससे दोस्ती की, लेकिन बाद में उसके शादीशुदा होने की जानकारी सामने आने पर जब उसने संबंध समाप्त कर दिए तो युवक उसे लगातार परेशान करने लगा। पुलिस के अनुसार छात्रा की पहचान इंस्टाग्राम के माध्यम से सिद्धार्थ पचोरे नामक युवक से हुई थी। शुरुआती बातचीत के बाद दोनों की मुलाकात हुई और धीरे-धीरे संपर्क बढ़ता गया। शिकायत के मुताबिक इसी दौरान आरोपी ने छात्रा के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। भरोसे में आकर छात्रा ने भी इस संबंध को गंभीरता से लिया और दोनों के बीच बातचीत जारी रही। कुछ समय बाद छात्रा को जानकारी मिली कि युवक पहले से विवाहित है और उसके बच्चे भी हैं। इस जानकारी के सामने आने के बाद छात्रा ने आरोपी से इस बारे में सवाल किया। आरोप है कि युवक ने जवाब में पत्नी को तलाक देने की बात कही, लेकिन छात्रा ने उस पर विश्वास नहीं किया और उससे दूरी बना ली। इसके बाद उसने बातचीत पूरी तरह बंद कर दी। पीड़िता का आरोप है कि संपर्क खत्म होने के बाद आरोपी का व्यवहार आक्रामक हो गया। वह लगातार फोन, संदेश और अन्य माध्यमों से छात्रा पर दबाव बनाने लगा। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी आत्महत्या करने और उसमें छात्रा को फंसाने जैसी धमकियां देता था। इतना ही नहीं, उसने युवती के परिजनों को भी संदेश भेजकर मानसिक रूप से परेशान करने का प्रयास किया। छात्रा ने पुलिस को बताया कि आरोपी कई बार उसका पीछा भी करता था और रास्ते में रोककर बातचीत करने का दबाव बनाता था। शिकायत के अनुसार कुछ दिन पहले शाम के समय जब वह घर से बाहर निकली तो आरोपी ने रास्ते में रोककर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। घटना के बाद छात्रा ने परिवार को पूरी जानकारी दी और फिर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि युवती द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच शहर में छेड़छाड़ का एक अन्य मामला भी सामने आया है। पुलिस ने 17 वर्षीय स्कूली छात्रा की शिकायत पर एक युवक के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। शिकायत के अनुसार छात्रा जब सामान लेकर घर लौट रही थी, तब आरोपी ने उसे रास्ते में रोक लिया और मोबाइल नंबर मांगने लगा। आरोप है कि युवक ने जबरन उसका हाथ पकड़ने की भी कोशिश की। छात्रा किसी तरह वहां से निकलकर घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। दोनों मामलों ने एक बार फिर महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
INDIA ब्लॉक में बढ़ा सियासी तनाव: थलापति विजय की TVK को समर्थन पर चिदंबरम का बड़ा दावा, DMK को पहले ही दी थी जानकारी

नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में थलापति विजय की पार्टी टीवीके को लेकर बने नए राजनीतिक समीकरणों के बीच INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेद गहराते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने दावा किया है कि उनकी पार्टी ने टीवीके को समर्थन देने के फैसले की जानकारी पहले ही DMK और अन्य सहयोगी दलों को दे दी थी। चिदंबरम ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि कांग्रेस ने अपने गठबंधन सहयोगियों को विश्वास में लेकर ही यह निर्णय लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीआई, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे दलों को भी इस फैसले की जानकारी दी गई थी। उनके अनुसार, केवल घोषणा के समय में एक दिन का अंतर था, लेकिन निर्णय की जानकारी पहले साझा कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य राजनीतिक अस्थिरता को रोकना और किसी भी स्थिति में दोबारा चुनाव की संभावना को टालना था। चिदंबरम के अनुसार, गठबंधन के भीतर भी यह व्यापक सहमति थी कि यदि टीवीके बहुमत से थोड़ा पीछे रह जाती है, तो ऐसी स्थिति में समर्थन देकर स्थिर सरकार बनाने की कोशिश की जाए। वहीं, DMK ने कांग्रेस के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के युवा संगठन ने इस निर्णय को गठबंधन के साथ विश्वासघात करार दिया है। DMK नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने बिना पूरी सहमति के यह समर्थन देकर गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़ा किया है। इस विवाद के बाद INDIA ब्लॉक के भीतर राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। तमिलनाडु में पहले से ही गठबंधन की राजनीति जटिल मानी जाती है, और अब टीवीके को समर्थन देने के फैसले ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है। चुनावी नतीजों के अनुसार, अभिनेता-राजनेता थलापति विजय के नेतृत्व वाली टीवीके ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई, लेकिन वह बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटों से पीछे रह गई। इसके बाद उसे सरकार गठन के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता पड़ी। कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के समर्थन की घोषणा कर टीवीके को समर्थन दिया, जिससे उसके सरकार बनाने की संभावनाएं मजबूत हुईं। इसके बाद वीसीके, भाकपा और माकपा जैसे दलों ने भी समर्थन दिया, जिनके पास सीमित संख्या में विधायक थे। इन समर्थन के बाद टीवीके बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में सफल रही और सरकार गठन का दावा पेश कर सकी। हालांकि, इस राजनीतिक कदम ने INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। DMK का आरोप है कि इस तरह का निर्णय गठबंधन की सामूहिक रणनीति के खिलाफ है और इससे मतदाताओं के विश्वास पर असर पड़ा है। चिदंबरम का दावा है कि यह निर्णय राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिया गया था, जबकि विरोधी दल इसे गठबंधन अनुशासन के खिलाफ मान रहे हैं। इस मुद्दे ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और INDIA ब्लॉक के भीतर भविष्य की एकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, इस विवाद पर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और आने वाले दिनों में यह मामला और राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।
मोबाइल दुकान का ताला तोड़कर लाखों की चोरी, 50 स्मार्टफोन और कैश लेकर भागे बदमाश

मध्य प्रदेश । इंदौर में लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं के बीच विजयनगर थाना क्षेत्र में एक मोबाइल व्यापारी की दुकान को निशाना बनाकर बदमाशों ने लाखों रुपए की चोरी की वारदात को अंजाम दिया। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुई इस घटना में चोर दुकान का ताला तोड़कर अंदर घुसे और करीब 50 मोबाइल फोन, मोबाइल एसेसरीज तथा हजारों रुपए की नकदी लेकर फरार हो गए। घटना की जानकारी रविवार सुबह दुकान मालिक के पहुंचने पर सामने आई। जानकारी के अनुसार, गोल्डन फार्म निरंजनपुर निवासी अभिषेक तिवारी की विजयनगर क्षेत्र स्थित शेखर टावर में ‘मोबाइल जोन’ नाम से दुकान है। रोज की तरह शनिवार रात दुकान बंद कर वे घर चले गए थे। रविवार सुबह जब उन्होंने दुकान खोली तो सामने का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। दुकान के शटर के ताले टूटे हुए थे और अंदर का सामान बिखरा पड़ा था। दुकान की जांच करने पर पता चला कि अज्ञात बदमाश दुकान से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन चोरी कर ले गए हैं। प्रारंभिक आकलन में करीब 50 मोबाइल फोन गायब पाए गए। इसके अलावा पावर बैंक, मोबाइल एसेसरीज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान भी चोरी हो गया। बदमाश दुकान में रखी करीब 41 हजार रुपए की नकदी भी अपने साथ ले गए। कुल नुकसान का आंकड़ा लाखों रुपए में बताया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही व्यापारी ने विजयनगर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाई है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बदमाशों ने सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया। देर रात दुकान का ताला तोड़कर वे अंदर दाखिल हुए और कीमती सामान समेटकर फरार हो गए। पुलिस को उम्मीद है कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां नजर आने की जानकारी भी सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से कारोबारियों में चिंता बढ़ रही है। उन्होंने पुलिस गश्त बढ़ाने और व्यावसायिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी गए सामान की बरामदगी का प्रयास किया जाएगा। शहर में मोबाइल दुकानों और इलेक्ट्रॉनिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाली घटनाओं में हाल के समय में बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे में यह वारदात एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रही है। पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय स्तर पर जुटाई जा रही जानकारी के आधार पर बदमाशों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। फिलहाल व्यापारी को लाखों रुपए के नुकसान का सामना करना पड़ा है, जबकि पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर आरोपियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।
इंदौर में कचरे के ढेर में मिला नवजात का क्षत-विक्षत शव, आसपास मंडरा रहे थे कुत्ते

मध्य प्रदेश । इंदौर के खजराना थाना क्षेत्र में रविवार सुबह एक दर्दनाक और संवेदनशील घटना सामने आई, जिसने इलाके के लोगों को झकझोर कर रख दिया। एक कॉलोनी के समीप कचरे के ढेर में नवजात शिशु का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए एमवाय अस्पताल भिजवाया। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नवजात को वहां किसने और किन परिस्थितियों में छोड़ा। जानकारी के अनुसार सुबह पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी कि झुग्गी बस्ती के पास कचरे के ढेर में एक नवजात का शव पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही एफआरवी और खजराना थाना पुलिस मौके पर पहुंची। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि शव के आसपास कई आवारा कुत्ते घूम रहे थे। शव की स्थिति अत्यंत खराब थी, जिससे स्पष्ट था कि वह लंबे समय तक खुले स्थान पर पड़ा रहा होगा। खजराना थाना प्रभारी मनोज सेंधव के अनुसार प्रथम दृष्टया नवजात लगभग छह से सात माह का प्री-मैच्योर शिशु प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने शव को सुरक्षित रूप से अस्पताल पहुंचाकर पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू कराई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात की मृत्यु किन कारणों से हुई और शव वहां कितने समय से पड़ा था। घटना की सूचना फैलते ही क्षेत्र में लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय नागरिकों ने इस घटना पर दुख और चिंता व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस तरह नवजात को खुले में छोड़ देना बेहद अमानवीय और चिंताजनक घटना है। पुलिस अब मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि नवजात को वहां कौन छोड़कर गया। इसके अलावा क्षेत्र के निवासियों, झुग्गी बस्ती के लोगों और आसपास के संस्थानों से भी पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि कहीं यह मामला अवैध गर्भपात, लावारिस प्रसव या किसी अन्य परिस्थिति से तो जुड़ा नहीं है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले भी एमवाय अस्पताल परिसर में एक नवजात का शव मिलने का मामला सामने आया था। अस्पताल के बाथरूम में मिले उस शव की जांच अब तक पूरी तरह किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में ताजा घटना ने एक बार फिर नवजातों की सुरक्षा, स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार जिस क्षेत्र में यह शव मिला है, उसके आसपास चिकित्सा सुविधाएं और जांच केंद्र भी मौजूद हैं, जहां बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आती हैं। हालांकि पुलिस फिलहाल किसी भी संभावना पर आधिकारिक टिप्पणी करने से बच रही है और जांच पूरी होने का इंतजार कर रही है। फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान नवजात की पहचान, घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचने पर केंद्रित है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज से मिलने वाले सुराग इस मामले की गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
1 किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर बेटे को ले गए माता-पिता, तपती धूप में मां चुन्नी भिगोकर देती रही राहत

मध्य प्रदेश । इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल परिसर में शनिवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुविधा संबंधी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच एक बीमार बच्चे को उसके माता-पिता खुद स्ट्रेचर पर धकेलते हुए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक ले जाते दिखाई दिए। यह तस्वीर न केवल एक परिवार की बेबसी बयां कर रही थी, बल्कि अस्पतालों में मौजूद व्यवस्थागत खामियों को भी उजागर कर रही थी। मामला 12 वर्षीय आदर्श का है, जो रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर समस्या से जूझ रहा है। परिजनों के अनुसार बच्चे का पिछले करीब 15 दिनों से इलाज चल रहा है। पहले उसे न्यू चेस्ट वार्ड में भर्ती किया गया था, जिसके बाद उसका उपचार एमवाय अस्पताल में जारी रहा। शनिवार को डॉक्टरों ने उसे आगे की जांच और परामर्श के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल रेफर कर दिया। परिवार जब बच्चे को लेकर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंचा तो वहां उन्हें बताया गया कि मरीज को भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है और केवल उसकी मेडिकल फाइल तथा दस्तावेजों की जांच की जानी है। इस जानकारी के बाद परिजनों को फिर से बच्चे को स्ट्रेचर पर लेकर एमवाय अस्पताल लौटना पड़ा। दोनों अस्पतालों के बीच लगभग एक किलोमीटर की दूरी है, जिसे परिवार ने भीषण गर्मी में तय किया। इस दौरान सबसे मार्मिक दृश्य बच्चे की मां का था, जो लगातार पानी से अपनी चुन्नी भिगोकर बेटे के ऊपर डाल रही थी ताकि तेज धूप और गर्म हवाओं से उसे कुछ राहत मिल सके। वहीं पिता स्ट्रेचर को धकेलते हुए अस्पताल परिसर में मदद की तलाश करते रहे। परिजनों का आरोप है कि जरूरत के समय उन्हें कोई कर्मचारी, वार्ड बॉय या सहायक उपलब्ध नहीं हुआ, जिसके कारण उन्हें खुद ही मरीज को ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। घटना ने अस्पतालों में मरीज परिवहन व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा मरीजों को वार्ड, जांच केंद्र और अन्य अस्पतालों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एक आउटसोर्स कंपनी को सौंपी गई है। इस व्यवस्था पर हर महीने बड़ी राशि खर्च की जाती है, लेकिन आरोप है कि जरूरत के समय स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और सहायक कर्मचारी उपलब्ध नहीं होते। इसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ता है। गौरतलब है कि संबंधित आउटसोर्स कंपनी पहले भी विभिन्न विवादों में घिर चुकी है। हाल के महीनों में सुरक्षा और व्यवस्थागत खामियों को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं। ऐसे में यह नया मामला एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है। घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया है। एमवाय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चे को किस अस्पताल से रेफर किया गया था और किन परिस्थितियों में परिजनों को स्वयं स्ट्रेचर धकेलना पड़ा। वहीं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के प्रभारी सुपरिटेंडेंट डॉ. पीयूष पंचारिया ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। बच्चे की स्थिति, भर्ती संबंधी जानकारी और उपचार प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है। फिलहाल इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि एक बीमार बच्चे को उसके माता-पिता धूप में स्ट्रेचर पर ढोने को मजबूर हों, तो यह केवल एक परिवार की परेशानी नहीं बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चिंतन का विषय है।
भोपाल में विश्व शांति महायज्ञ के साथ निकली भव्य शोभायात्रा, संभव सागर बोले- संयम ही भारत की असली संपदा

मध्य प्रदेश । भोपाल में धार्मिक आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के आठ दिवसीय आयोजन का भव्य समापन विश्व शांति महायज्ञ और भगवान जिनेंद्र की विशाल शोभायात्रा के साथ किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालु तप, संयम और आराधना में लीन रहे, वहीं अंतिम दिन शहर का वातावरण जयकारों, भक्ति गीतों और धार्मिक उत्साह से सराबोर दिखाई दिया। समापन अवसर पर निकाली गई भगवान जिनेंद्र की भव्य शोभायात्रा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। रजतमय पालकी में विराजित भगवान जिनेंद्र के दर्शन के लिए मार्गभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। केसरिया ध्वज लहराते श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने रास्ते में श्रीफल अर्पित कर भगवान से परिवार और समाज की सुख-समृद्धि तथा विश्व कल्याण की कामना की। पूरे मार्ग पर आध्यात्मिक उल्लास और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। समाज प्रवक्ता अंशुल जैन के अनुसार, आठ दिवसीय इस धार्मिक आयोजन में अभिषेक, जाप, पूजन और विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धा और साधना का अनूठा संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंडल की परिक्रमा कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का भी संचार किया। पूरे आयोजन के दौरान अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने व्रत और उपवास रखकर तपस्या का मार्ग अपनाया। श्रद्धालुओं ने भौतिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाकर आठ दिनों तक धार्मिक आराधना और आत्मचिंतन में समय बिताया। जैन धर्म की परंपराओं के अनुरूप संयम, त्याग और आत्मशुद्धि के संदेश को जीवन में उतारने का प्रयास किया गया। धार्मिक वातावरण में लोगों ने आत्मिक शांति और आध्यात्मिक संतोष का अनुभव किया। आयोजन के दौरान मुनि संभव सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संयम भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपदा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का वास्तविक विकास केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आत्मसंयम और सदाचार से होता है। उन्होंने समाज से पर्यावरण संरक्षण, जीवदया और नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप सभी जीवों के प्रति करुणा और संवेदनशीलता में निहित है। कार्यक्रम का संचालन एवं निर्देशन अविनाश भैया के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। पूजन एवं अर्घ्य समर्पण में धर्म इंद्र, प्रियंका, महेंद्र, श्रीपाल, मेना सुंदरी, ऋषभ, मंजू, कुबेर, आशा, विजेंद्र सहित अनेक पात्रों ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाई। विश्व शांति महायज्ञ और भव्य शोभायात्रा के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम भर नहीं रहा, बल्कि समाज में शांति, सद्भाव, संयम और मानवीय मूल्यों के प्रसार का एक प्रेरणादायी संदेश भी बन गया। आयोजन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक किया।
आज से घरेलू गैस सिलेंडर ₹29 महंगा: ग्वालियर-उज्जैन में ₹1000 के पार, भोपाल में ₹947 का झटका

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। रविवार 7 जून से घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। नई दरों के बाद प्रदेश के प्रमुख शहरों में गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं, जिससे आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। राजधानी भोपाल में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ₹918.50 से बढ़कर ₹947.50 हो गई है। वहीं इंदौर में अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए ₹970 चुकाने होंगे। जबलपुर में इसकी कीमत ₹919 पहुंच गई है। सबसे अधिक असर ग्वालियर और उज्जैन के उपभोक्ताओं पर पड़ा है, जहां सिलेंडर की कीमत क्रमशः ₹1025 और ₹1001 हो गई है। इसके साथ ही दोनों शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर का दाम हजार रुपए के आंकड़े को पार कर गया है। पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार है जब घरेलू LPG सिलेंडर महंगा हुआ है। इससे पहले मार्च में सिलेंडर के दामों में ₹60 की वृद्धि की गई थी। ताजा बढ़ोतरी को जोड़कर देखा जाए तो तीन महीने के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर करीब ₹110 महंगा हो चुका है। लगातार बढ़ती कीमतों ने मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि रसोई गैस रोजमर्रा की जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में लगातार वृद्धि और घरेलू बिक्री पर होने वाले नुकसान के कारण कीमतें बढ़ाना आवश्यक हो गया था। सूत्रों के अनुसार सरकारी तेल विपणन कंपनियों को प्रत्येक घरेलू सिलेंडर पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। हालांकि नई वृद्धि के बाद भी कंपनियों को होने वाले नुकसान की केवल आंशिक भरपाई ही हो पाएगी। गैस सिलेंडर के अलावा छोटे उपभोक्ताओं के लिए उपयोग होने वाले 5 किलोग्राम LPG सिलेंडर की कीमतों में भी ₹11 की बढ़ोतरी की गई है। नई दरों के बाद इसकी कीमत ₹821.50 तक पहुंच गई है। इससे छोटे परिवारों और अस्थायी श्रमिक वर्ग पर भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ेगा। रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि ऐसे समय हुई है जब हाल के सप्ताहों में पेट्रोल, डीजल और CNG के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुल मिलाकर ₹7.50 प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं, जबकि CNG लगभग ₹6 प्रति किलोग्राम महंगी हुई है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर भी दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि LPG सिलेंडर की कीमत तय करने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की दरें, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात और परिवहन लागत, बॉटलिंग एवं वितरण खर्च, सरकार की सब्सिडी नीति तथा कर व्यवस्था जैसी कई महत्वपूर्ण बातें शामिल होती हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। महंगाई के इस दौर में घरेलू गैस सिलेंडर की नई कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और सरकार की नीतियां तय करेंगी कि उपभोक्ताओं को आगे राहत मिलेगी या कीमतों का दबाव और बढ़ेगा।
पटना कोचिंग विवाद: खान सर को लेकर पुलिस का बड़ा बयान, कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

नई दिल्ली । पटना कोचिंग विवाद में खान सर के कोचिंग सेंटर को लेकर लगातार खबरों का दौर जारी है। हाल ही में एफआईआर दर्ज होने के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा गर्म है कि क्या खान सर को गिरफ्तार किया जाएगा। इस मामले में पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने मीडिया के सामने स्पष्ट बयान दिया है। एसएसपी ने कहा कि कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि मामले में गिरफ्तार किए गए सुरक्षा गार्ड्स के बयानों की जांच जारी है और उनके बयान पूरे केस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पुलिस ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पटना कोचिंग विवाद तब शुरू हुआ जब स्थानीय प्रशासन ने खान सर के कोचिंग सेंटर में कुछ अनियमितताएं पाई। इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई और सुरक्षा गार्ड्स को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में संगीन धाराओं को शामिल किया गया है, जिससे यह मामला और गंभीर रूप ले चुका है। स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि किसी भी तरह का उग्र प्रदर्शन या कानून व्यवस्था का उल्लंघन न हो। एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने मीडिया को बताया कि पुलिस मामले की जांच में पूरी पारदर्शिता बनाए रखेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तार किए गए सुरक्षा गार्ड्स के बयान जांच का अहम हिस्सा हैं और इनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कदम उठाने से पहले सभी तथ्यों और सबूतों की जांच की जाएगी। इस पूरे मामले ने पटना में छात्रों और अभिभावकों के बीच भी चर्चा का विषय बना दिया है। कोचिंग सेंटर के बंद होने और कानूनी कार्रवाई के बाद कई अभिभावक चिंतित हैं कि उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि छात्रों की पढ़ाई और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे। इस विवाद ने सोशल मीडिया पर भी बहस को जन्म दिया है। कई लोग इस मामले में खान सर के समर्थन में हैं, जबकि कुछ लोग प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई को उचित मान रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अगली रणनीति पर काम जारी है और गिरफ्तार सुरक्षा गार्ड्स के बयान जांच का मुख्य आधार होंगे। एसएसपी ने कहा कि किसी भी कानून तोड़ने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और सभी कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाएगा। पटना कोचिंग विवाद अब एक संवेदनशील मामला बन चुका है और इसके हर अपडेट पर जनता और मीडिया की नजरें बनी हुई हैं। प्रशासन और पुलिस का ध्यान इस बात पर है कि कानून व्यवस्था को बनाए रखते हुए मामले का निष्पक्ष समाधान निकाला जाए।