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MP पुलिस की बेटी ने रचा इतिहास, माउंट किलिमंजारो फतह करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं दीपिका गौतम

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश पुलिस की एक महिला अधिकारी ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और जुनून से ऐसा इतिहास रच दिया है, जिस पर पूरा प्रदेश गर्व कर सकता है। भोपाल स्थित एससीआरबी (SCRB) पुलिस मुख्यालय में पदस्थ इंस्पेक्टर दीपिका गौतम ने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो को फतह कर मध्यप्रदेश पुलिस के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। इस उपलब्धि के साथ वह प्रदेश पुलिस की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्होंने इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया है। तंजानिया में स्थित माउंट किलिमंजारो समुद्र तल से लगभग 5,895 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्वत अभियानों में गिना जाता है। दीपिका गौतम ने 29 मई को इस ऊंची चोटी पर पहुंचकर तिरंगा लहराया और अपनी उपलब्धि से देश तथा प्रदेश का नाम रोशन किया। इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण दल में दीपिका भारत की एकमात्र प्रतिभागी थीं। कठिन मौसम, ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और लगातार बदलती प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने यह चुनौती स्वीकार की और सफलता हासिल की। दीपिका बताती हैं कि नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अक्सर लोग अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को कभी पीछे नहीं छोड़ा। उनका मानना है कि जीवन में लक्ष्य और सपने होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। इसी सोच ने उन्हें अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी तक पहुंचने का हौसला दिया। माउंट किलिमंजारो का यह अभियान आसान नहीं था। पांच दिनों तक चले इस कठिन सफर में उन्हें तीन अलग-अलग बेस कैंप पार करने पड़े। अंतिम चरण की चढ़ाई रात के समय शुरू हुई, जब तापमान माइनस 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। ऊंचाई बढ़ने के साथ मौसम लगातार बदल रहा था और हर कदम पर नई चुनौती सामने थी। इसके बावजूद दीपिका ने धैर्य, शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती का परिचय देते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया। हालांकि यह उनका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियान था, लेकिन रोमांच और ट्रेकिंग के क्षेत्र में उनका अनुभव पहले से ही काफी समृद्ध रहा है। वह कई बार अमरनाथ और केदारनाथ जैसी कठिन धार्मिक यात्राएं पूरी कर चुकी हैं। पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों के प्रति उनका विशेष लगाव रहा है, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। दीपिका स्वयं को मल्टीटास्किंग व्यक्ति मानती हैं और उनका विश्वास है कि जीवन में नई चुनौतियों को स्वीकार करना ही सफलता का मार्ग बनाता है। उनकी यह उपलब्धि न केवल महिला पुलिस अधिकारियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए भी एक संदेश है जो जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को जीवित रखना चाहते हैं। माउंट किलिमंजारो फतह करने के बाद अब दीपिका का अगला लक्ष्य भी तय हो चुका है। हालांकि उन्होंने अपने आगामी अभियान का खुलासा नहीं किया है, लेकिन संकेत दिए हैं कि अगले वर्ष वह विदेश में एक और बड़े पर्वतारोहण मिशन का हिस्सा बन सकती हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और साहस का प्रतीक बन गई है।

भोपाल मेट्रो पर बढ़ा खर्च, कैबिनेट ने दी 10,033 करोड़ की संशोधित मंजूरी; मंडी शुल्क में भी बड़ा बदलाव

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य की महत्वाकांक्षी भोपाल मेट्रो रेल परियोजना को लेकर बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी प्रदान कर दी गई। लागत में करीब 4 हजार करोड़ रुपए की वृद्धि के बाद अब भोपाल मेट्रो परियोजना की कुल लागत 10,033 करोड़ रुपए पहुंच गई है। इसके साथ ही सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेते हुए मंडी शुल्क व्यवस्था में भी बदलाव किया है। कैबिनेट बैठक के बाद एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि भोपाल मेट्रो परियोजना का प्रारंभिक स्वरूप वर्ष 2016 में तैयार किया गया था। उस समय इसकी अनुमानित लागत लगभग 6,241 करोड़ रुपए आंकी गई थी। हालांकि समय के साथ निर्माण सामग्री की कीमतों, तकनीकी आवश्यकताओं और अन्य कारणों से परियोजना की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब संशोधित लागत 10,033 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है, जिसे कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। सरकार का मानना है कि संशोधित बजट से परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आएगी और आगामी दो वर्षों में मेट्रो परियोजना का स्वरूप अधिक स्पष्ट रूप से सामने दिखाई देगा। भोपाल मेट्रो को राजधानी के सार्वजनिक परिवहन ढांचे को मजबूत करने वाली प्रमुख परियोजना माना जा रहा है, जिससे यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। बैठक में किसानों से जुड़ा एक अहम निर्णय भी लिया गया। सरकार ने कपास उत्पादक किसानों को राहत देते हुए कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क को घटाकर 0.50 प्रतिशत कर दिया है। मंत्री काश्यप ने बताया कि पहले अधिक मंडी शुल्क के कारण किसानों और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता था। महाराष्ट्र में भी कपास पर इसी दर से शुल्क लिया जाता है, इसलिए प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इसके विपरीत सरकार ने अन्य कृषि उपज पर मंडी शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। कुछ वर्ष पहले इसे डेढ़ प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत किया गया था, लेकिन अब फिर से इसे बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का अनुमान है कि इस निर्णय से राज्य को लगभग 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। यह राशि सड़क विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विस्तार और गौ-संवर्धन जैसी योजनाओं पर खर्च की जाएगी। कृषि क्षेत्र को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में भी पहल की गई है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यशालाओं का आयोजन कर किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों और उसके लाभों के बारे में जागरूक किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे कृषि लागत में कमी आएगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन के 12 वर्ष पूर्ण होने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे देश के विकास का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए 5 जून से 21 जून तक प्रदेशभर में जनकल्याण और विकास कार्यों से जुड़े विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी दी। इसके अलावा राज्य के लगभग एक लाख संविदा कर्मचारी-अधिकारियों को 4.5 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि दिए जाने के फैसले का भी स्वागत किया गया। कुल मिलाकर कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों को राज्य के बुनियादी ढांचे, कृषि क्षेत्र और कर्मचारी हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शहीदी दिवस से पहले पाकिस्तान का बड़ा कदम, भारतीय श्रद्धालुओं को मिला वीजा

नई दिल्ली । सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर सामने आई है। गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर पाकिस्तान सरकार ने भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए वीजा जारी कर धार्मिक यात्रा का मार्ग प्रशस्त किया है। पाकिस्तान उच्चायोग ने 10 से 19 जून तक आयोजित होने वाले वार्षिक धार्मिक उत्सव में भाग लेने के लिए 737 भारतीय तीर्थयात्रियों को वीजा प्रदान किए हैं। पाकिस्तान उच्चायोग की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, वीजा प्राप्त श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित प्रमुख सिख धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकेंगे। इनमें गुरुद्वारा पंजा साहिब, गुरुद्वारा ननकाना साहिब, गुरुद्वारा करतारपुर साहिब सहित कई ऐतिहासिक और आस्था से जुड़े स्थान शामिल हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में भारतीय सिख श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों की यात्रा करते हैं और गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं। भारत में पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त साद अहमद वाराइच ने सभी श्रद्धालुओं को सफल, सुरक्षित और शांतिपूर्ण यात्रा की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्राओं को सुगम बनाना दोनों देशों के बीच स्थापित द्विपक्षीय समझौतों और धार्मिक स्वतंत्रता के सम्मान का हिस्सा है। पाकिस्तान उच्चायोग ने यह भी स्पष्ट किया कि वीजा जारी करने की प्रक्रिया 1974 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए धार्मिक स्थलों की यात्रा संबंधी प्रोटोकॉल के तहत की गई है। इधर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को भी इस संबंध में बड़ी राहत मिली है। एसजीपीसी की धर्म प्रचार समिति के सचिव गुरिंदर सिंह मथरेवाल ने जानकारी दी कि कमेटी ने कुल 561 तीर्थयात्रियों के पासपोर्ट पाकिस्तान दूतावास में जमा कराए थे। इनमें से 541 श्रद्धालुओं को वीजा स्वीकृत कर दिया गया, जबकि 20 आवेदनों को मंजूरी नहीं मिल सकी। मथरेवाल के अनुसार, वीजा प्राप्त श्रद्धालुओं का जत्था बुधवार को अमृतसर स्थित एसजीपीसी मुख्यालय से पाकिस्तान के लिए रवाना होगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालु विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेकेंगे और गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस से जुड़े विशेष धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। यह धार्मिक यात्रा 19 जून तक चलेगी, जिसके बाद श्रद्धालु भारत लौट आएंगे। सिख समुदाय के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि अपनी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी मानी जाती है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद धार्मिक यात्राओं के लिए वीजा जारी होना श्रद्धालुओं के लिए राहत और खुशी का विषय माना जा रहा है। गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को सिख इतिहास में त्याग, साहस और धर्म के प्रति समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। ऐसे में उनके शहीदी दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को पाकिस्तान स्थित पवित्र स्थलों के दर्शन का अवसर मिलना सिख संगत के लिए विशेष महत्व रखता है।

तनाव के बीच इजरायल ने रोकी सैन्य कार्रवाई, नेतन्याहू की चेतावनी- किसी भी हमले का जवाब होगा पहले से ज्यादा सख्त

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने की घोषणा की है। हालांकि इस घोषणा के साथ उन्होंने स्पष्ट चेतावनी भी दी कि यदि भविष्य में इजरायल की सुरक्षा को किसी प्रकार का खतरा पैदा किया गया या फिर से हमला किया गया, तो उसका जवाब पहले की तुलना में अधिक कठोर और व्यापक होगा। देश के नाम अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने दावा किया कि हाल की सैन्य कार्रवाइयों का उद्देश्य उन खतरों को समाप्त करना था, जिन्हें इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानता रहा है। उनके अनुसार, सरकार ने ऐसे कदम उठाए जिनका लक्ष्य संभावित खतरों को समय रहते नियंत्रित करना था। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि इजरायल किसी भी ऐसे प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी संप्रभुता या नागरिकों की सुरक्षा को प्रभावित करे। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय मौजूदा परिस्थितियों और सुरक्षा आकलन के आधार पर लिया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इजरायल अपनी सतर्कता कम करेगा। नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि पिछले कुछ समय में हुए घटनाक्रमों ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि इजरायल ने अपनी रक्षा नीति के तहत उन सभी गतिविधियों पर नजर बनाए रखी है, जिन्हें वह अपने हितों के लिए खतरा मानता है। उनके अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां और रक्षा बल भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न संगठनों और समूहों का भी उल्लेख किया तथा कहा कि इजरायल किसी भी प्रकार की आक्रामक गतिविधि का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा क्षेत्रीय तनाव को अस्थायी रूप से कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से दी गई चेतावनियां यह भी दर्शाती हैं कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और भविष्य में घटनाक्रम किस दिशा में जाएंगे, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी। पश्चिम एशिया लंबे समय से भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियों का केंद्र रहा है। ऐसे में किसी भी सैन्य गतिविधि का प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा बाजार और वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और संवाद की अपील लगातार की जाती रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, आने वाले दिनों में दोनों देशों के कदम और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रयास यह तय करेंगे कि क्षेत्र में तनाव कम होता है या फिर नई चुनौतियां सामने आती हैं। फिलहाल इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा को तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, जबकि सुरक्षा संबंधी चेतावनी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि स्थिति पर सतर्क निगरानी जारी रहेगी।

अमेरिकी राजनीति में बढ़ी तल्खी, हकीम जेफरीज बोले- ट्रंप की नीतियों ने बढ़ाया आम लोगों पर आर्थिक बोझ

नई दिल्ली । अमेरिका में आगामी राजनीतिक और नीतिगत बहसों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक नेतृत्व संभाल रहे हकीम जेफरीज ने ट्रंप प्रशासन की आर्थिक, स्वास्थ्य और विदेश नीति को लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों के कारण आम अमेरिकी नागरिकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और सरकार जनता की मूल चिंताओं का समाधान करने में विफल रही है। वॉशिंगटन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान जेफरीज ने कहा कि अमेरिका में जीवन यापन की लागत लगातार बढ़ रही है और यह मुद्दा लाखों परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी वादों के बावजूद आवश्यक वस्तुओं, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और दैनिक जरूरतों से जुड़े खर्चों में अपेक्षित कमी नहीं आई है। इसके विपरीत, कई क्षेत्रों में आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ा है। डेमोक्रेटिक नेता ने विशेष रूप से बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्चों का उल्लेख करते हुए कहा कि कामकाजी वर्ग और मध्यम आय वर्ग के परिवार सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उनके अनुसार, रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने आम नागरिकों के बजट पर अतिरिक्त बोझ डाला है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों के जीवन को अधिक किफायती बनाना होनी चाहिए। जेफरीज ने ट्रंप प्रशासन की व्यापारिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कुछ आर्थिक फैसलों का प्रभाव सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जिससे परिवारों के वार्षिक खर्च में वृद्धि हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नीतियों का लाभ सीमित वर्ग तक पहुंच रहा है जबकि व्यापक स्तर पर जनता को राहत नहीं मिल पा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर भी डेमोक्रेटिक नेता ने रिपब्लिकन नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा सुविधाओं की बढ़ती लागत ने आम नागरिकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। उनके अनुसार, स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार और लागत नियंत्रण की आवश्यकता है ताकि अधिक लोगों को सुलभ और किफायती सेवाएं मिल सकें। विदेश नीति के संदर्भ में जेफरीज ने ईरान से जुड़े घटनाक्रमों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित सैन्य तनाव या संघर्ष का आर्थिक प्रभाव आम नागरिकों तक पहुंचता है, विशेषकर ऊर्जा और ईंधन की कीमतों के रूप में। उन्होंने प्रशासन से अधिक संतुलित और जिम्मेदार कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस दौरान रिपब्लिकन बजट प्रस्ताव का भी विरोध करने के संकेत दिए। पार्टी का तर्क है कि सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग उन क्षेत्रों में किया जाना चाहिए जो सीधे नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएं। डेमोक्रेट्स का कहना है कि आर्थिक राहत, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और रोजगार से जुड़े कदम वर्तमान समय की प्रमुख आवश्यकता हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में महंगाई, स्वास्थ्य सेवाएं और विदेश नीति जैसे मुद्दे आने वाले समय में राष्ट्रीय बहस के केंद्र में बने रहेंगे। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दल इन विषयों को लेकर अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ जनता के सामने जा रहे हैं। ऐसे में आर्थिक स्थिरता और नागरिकों की जीवन लागत से जुड़े प्रश्न आगामी राजनीतिक विमर्श को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी राजनीति में बढ़ती यह बयानबाजी दर्शाती है कि दोनों प्रमुख दल अब उन मुद्दों पर अधिक जोर दे रहे हैं, जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी और आर्थिक सुरक्षा से है।

"जमीन पर काम करने वालों को सीख न दें", महुआ पर काकोली घोष का तीखा हमला

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रही अंदरूनी कलह अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगी है। पार्टी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने वरिष्ठ सांसद महुआ मोइत्रा पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें राजनीति से ज्यादा प्रचार में रुचि रखने वाली नेता बताया है। उनके बयान ने टीएमसी के भीतर बढ़ते मतभेदों और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों को और तेज कर दिया है। एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान काकोली घोष ने कहा कि जब ममता बनर्जी ने राजनीति में अपनी पहचान बनानी शुरू की थी, तब आज खुद को उनका करीबी बताने वाले कई चेहरे राजनीतिक परिदृश्य में मौजूद भी नहीं थे। उन्होंने बिना नाम लिए महुआ मोइत्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि विदेश में बैठकर ट्वीट करने वाले लोग वास्तविक राजनीति नहीं करते, बल्कि केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करने और अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए बयानबाजी करते हैं। काकोली घोष की यह प्रतिक्रिया उस समय सामने आई है जब हाल ही में महुआ मोइत्रा ने पार्टी के बागी सांसदों को “लालची”, “मतलबी” और “गद्दार” करार दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। घोष ने कहा कि कुछ नेता लगातार ऐसे बयान देते हैं, जिनसे मीडिया में उनकी चर्चा बनी रहे, लेकिन इससे पार्टी संगठन को नुकसान पहुंचता है। इस बीच बागी खेमे ने दावा किया है कि उसके साथ करीब 20 सांसदों का समर्थन मौजूद है। काकोली घोष ने स्वयं को भी इस गुट का हिस्सा बताया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बागी सांसदों ने हाल के दिनों में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ भी बैठकें की हैं, जिससे टीएमसी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ गई हैं। उधर, पार्टी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे ने भी टीएमसी में असंतोष की खबरों को बल दिया है। बताया जा रहा है कि रॉय कई सांसदों के साथ केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचे थे, जहां महत्वपूर्ण राजनीतिक चर्चा हुई। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के कई लोकसभा सांसदों की मौजूदगी की खबरें सामने आई हैं। दिल्ली में चल रहे इस राजनीतिक घटनाक्रम के समानांतर पश्चिम बंगाल में भी पार्टी के भीतर उथल-पुथल जारी है। रिपोर्टों के अनुसार, विधानसभा चुनाव के बाद कई विधायक पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। बागी गुट का दावा है कि बड़ी संख्या में विधायकों ने पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग रुख अपनाया है और संगठनात्मक बदलाव की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टीएमसी के भीतर यह असंतोष और बढ़ता है, तो इसका असर आगामी राजनीतिक रणनीतियों और विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर भी पड़ सकता है। फिलहाल ममता बनर्जी विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिशों में जुटी हैं, लेकिन पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध के स्वर उनके लिए नई चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं।

दिल दहला देने वाले मर्डर केस में बड़ा फैसला, आरोपी भाई-बहन को मौत की सजा

नई दिल्ली । हैदराबाद से सामने आए एक दिल दहला देने वाले मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाते हुए एक भाई और बहन को मौत की सजा सुनाई है। दोनों को अपने ही पिता की हत्या का दोषी पाया गया। इस मामले ने न केवल पूरे इलाके को झकझोर दिया था, बल्कि पारिवारिक रिश्तों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। अदालत ने मामले में मृतक की बहू को भी दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मृतक 70 वर्षीय रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से वर्ष 2000 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी और पेंशन प्राप्त कर रहे थे। जांच में सामने आया कि उनके बेटे, बेटी और बहू की नजर उनकी पेंशन और संपत्ति पर थी। इसी लालच में तीनों ने मिलकर हत्या की साजिश रची। मामले के अनुसार, आरोपियों ने वृद्ध व्यक्ति के भोजन में जहर मिलाकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद उन्होंने अपराध को छिपाने की कोशिश की। बताया गया कि शव को ठिकाने लगाने में असफल रहने पर उसके कई टुकड़े किए गए और उन्हें घर के भीतर अलग-अलग बाल्टियों में भरकर रखा गया। इस भयावह घटना का खुलासा तब हुआ जब घर से लगातार दुर्गंध आने लगी। 18 अगस्त 2019 को आसपास के लोगों को घर से आ रही बदबू पर संदेह हुआ। स्थानीय लोगों ने स्थिति की जानकारी लेने की कोशिश की और बाद में पुलिस को सूचना दी। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो घर के भीतर मानव अवशेष मिलने से सनसनी फैल गई। जांच के दौरान पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया और तीनों आरोपियों को 21 अगस्त 2019 को गिरफ्तार कर लिया गया। मल्काजगिरि स्थित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय में चले मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाह पेश किए। अदालत ने पाया कि आरोपियों ने पूर्व नियोजित तरीके से अपराध को अंजाम दिया था। मामले की गंभीरता, हत्या की क्रूरता और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मृतक के बेटे और बेटी को फांसी की सजा सुनाई, जबकि बहू को उम्रकैद की सजा दी गई। यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि इसमें लालच के लिए अपने ही पिता की निर्मम हत्या की गई थी। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इस प्रकार के जघन्य अपराध समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करते हैं तथा ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है। इस फैसले को न्याय व्यवस्था की सख्ती और अपराध के प्रति शून्य सहिष्णुता के रूप में देखा जा रहा है। वहीं यह घटना परिवार और रिश्तों में विश्वास को झकझोर देने वाली घटनाओं में से एक मानी जा रही है।

न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट से पहले विवादों में घिरा इंग्लैंड क्रिकेट, नाइटक्लब कांड में कप्तान बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन के खिलाफ जांच शुरू

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पटल पर शानदार प्रदर्शन कर रही इंग्लैंड की टेस्ट टीम दूसरे मुकाबले से ठीक पहले एक गंभीर अनुशासनात्मक विवाद की चपेट में आ गई है। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जा रही तीन मैचों की टेस्ट श्रृंखला के बीच इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स और स्टार तेज गेंदबाज गस एटकिंसन पर टीम के कड़े प्रोटोकॉल्स और मर्यादाओं को तोड़ने के गंभीर आरोप लगे हैं। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड यानी ईसीबी ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि कर दी है कि सोमवार तड़के लंदन के एक नाइटक्लब में हुई एक कथित घटना के दौरान ये दोनों खिलाड़ी वहां मौजूद थे, जिसके बाद क्रिकेट बोर्ड ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय आंतरिक जांच बिठा दी है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इंग्लिश टीम ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट मैच में न्यूजीलैंड को 115 रनों के बड़े अंतर से मात देकर श्रृंखला में बढ़त बनाई थी। शानदार जीत के ठीक बाद सोमवार की सुबह एक नाइटक्लब में घटी इस अनपेक्षित घटना ने क्रिकेट प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। ईसीबी द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बोर्ड इस समय न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट मैच के समापन के बाद खिलाड़ियों द्वारा किए गए टीम प्रोटोकॉल के उल्लंघन की गहनता से पड़ताल कर रहा है। क्रिकेट बोर्ड ने इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतंत्र जांच के लिए क्रिकेट रेगुलेटर्स को भी पूरी तरह सूचित कर दिया है। ईसीबी के अधिकारियों का कहना है कि वे इस घटना से जुड़े सभी आवश्यक तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्य जुटा रहे हैं और पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही अनुशासनात्मक समिति कोई सख्त कदम उठाएगी। बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि दूसरे टेस्ट मैच के लिए इंग्लैंड की अंतिम टीम का एलान इस मामले के तथ्यों की समीक्षा करने के बाद ही सही समय पर किया जाएगा, जिससे दोनों खिलाड़ियों के खेलने पर संशय गहरा गया है। यह अप्रत्याशित विवाद इंग्लैंड की टीम के लिए एक बड़ा और अनचाहा झटका साबित हो सकता है, विशेषकर इसलिए क्योंकि बेन स्टोक्स न केवल टीम के कप्तान हैं बल्कि उनके नेतृत्व में टीम बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है। वहीं दूसरी ओर, ऑलराउंडर और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन ने लॉर्ड्स टेस्ट मैच में कुल 7 विकेट चटकाकर विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी थी और इंग्लैंड की जीत के मुख्य सूत्रधार बने थे। ऐसे में टीम के दो सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों के खिलाफ जांच बैठना आगामी मैच की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल ईसीबी ने नाइटक्लब के भीतर हुई वास्तविक घटना के विवरण को सार्वजनिक नहीं किया है और जांच पूरी होने तक गोपनीयता बनाए रखने की बात कही है। दोनों देशों के बीच श्रृंखला का दूसरा टेस्ट मैच 17 जून से लंदन के द ओवल मैदान पर खेला जाना निर्धारित है। खेल प्रेमियों और विश्लेषकों की नजरें अब ईसीबी के अगले कदम और टीम चयन पर टिकी हुई हैं, क्योंकि कप्तान पर होने वाली किसी भी संभावित कार्रवाई का सीधा असर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका और टीम के मनोबल पर पड़ना तय है।

श्रीलंका के खिलाफ टी20 श्रृंखला के लिए वेस्टइंडीज टीम घोषित, विश्व कप में खराब प्रदर्शन के बाद टीम में हुए 3 बड़े बदलाव

नई दिल्ली। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने श्रीलंका के खिलाफ घरेलू मैदानों पर खेली जाने वाली आगामी तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए अपनी 15 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम का एलान कर दिया है। हाल ही में संपन्न हुए टी20 विश्व कप 2026 के ग्रुप चरण से बाहर होने के बाद कैरेबियाई टीम की यह पहली टी20 श्रृंखला है, जिसके चलते चयनकर्ताओं ने भविष्य की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए टीम में कई चौंकाने वाले और बड़े फेरबदल किए हैं। इस महत्वपूर्ण श्रृंखला में टीम की कमान एक बार फिर स्टार बल्लेबाज शाई होप के हाथों में सौंपी गई है। मेजबान वेस्टइंडीज के लिए यह टी20 सीरीज साख बचाने और खोई हुई लय वापस पाने का एक बड़ा अवसर है। इससे पहले दोनों देशों के बीच खेली गई तीन मैचों की वनडे सीरीज बारिश से बुरी तरह प्रभावित रही थी, जहां केवल एक ही मैच का परिणाम आ सका था। उस एकमात्र मुकाबले को जीतकर श्रीलंका ने वनडे सीरीज अपने नाम कर ली थी, जबकि बाकी के दो मैच भारी बारिश के कारण रद्द करने पड़े थे। वनडे सीरीज की इस निराशा को पीछे छोड़कर कैरेबियाई टीम अब सबसे छोटे प्रारूप में पलटवार करने की रणनीति तैयार कर रही है। चयनकर्ताओं ने टीम को मजबूत और संतुलित बनाने के लिए अनुभवी बल्लेबाज जॉनसन चार्ल्स, क्वेंटिन सैम्पसन और तेज गेंदबाज जेडेन सील्स को टीम से ड्रॉप कर दिया है। इनके स्थान पर युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी एकीम ऑगस्टे, जेवेल एंड्र्यू और ऑलराउंडर शमर स्प्रिंगर को टीम में जगह दी गई है। हालांकि, टीम के मुख्य तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ अभी भी टीम का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। टीम के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने इन बदलावों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि विश्व कप की निराशा के बाद अब वे टीम को एक नया आकार देने की दिशा में काम कर रहे हैं। कोच डैरेन सैमी ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि भारत में हुए विश्व कप के बाद यह हमारी पहली टी20 सीरीज है और यह हमारे लिए बेहद अहम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम उसी जज्बे, जुझारूपन और एकजुटता के साथ मैदान पर उतरेगी जिसके लिए वेस्टइंडीज क्रिकेट को विश्व भर में जाना जाता है। सैमी के अनुसार, टीम का मुख्य लक्ष्य बुनियादी चीजों को दुरुस्त करना, एक सामूहिक इकाई के रूप में आगे बढ़ना और श्रीलंका के खिलाफ उत्कृष्ट प्रदर्शन करके घरेलू फैंस को गौरवान्वित होने का मौका देना है। इस टी20 श्रृंखला का पूरा कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया है, जिसके तहत तीनों मुकाबले जमैका के ऐतिहासिक सबीना पार्क स्टेडियम में खेले जाएंगे। श्रृंखला का पहला मैच 11 जून को, दूसरा मैच 13 जून को और तीसरा व अंतिम मैच 14 जून को आयोजित होगा। वेस्टइंडीज के लिए सबसे राहत की बात यह है कि इस समय वैश्विक स्तर पर कोई बड़ी टी20 लीग नहीं खेली जा रही है, जिसके चलते उनके सभी प्रमुख और सीनियर खिलाड़ी चयन के लिए उपलब्ध रहे, जिससे बोर्ड को एक मजबूत टीम चुनने में मदद मिली है।

'बुढ़वा मंगल' पर महाबली के चमत्कारी दोहों का महत्व, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए उमड़ी भीड़

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के मंगलवार का अत्यधिक पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। आज छठे बड़े मंगल के पावन अवसर पर तड़के से ही देश के तमाम छोटे-बड़े हनुमान मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना करने से भक्तों को जीवन की हर कसौटी पर विजय प्राप्त होती है। यदि कोई श्रद्धालु समय के अभाव में संपूर्ण हनुमान चालीसा का पाठ नहीं कर पाता है, तो उसके कुछ अत्यंत चमत्कारी दोहों और चौपाइयों के मानसिक जाप से भी अद्वितीय लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश में जुटे युवाओं के लिए हनुमान चालीसा का प्रारंभिक दोहा ‘बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार। बल-बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।’ एक अचूक महामंत्र की तरह कार्य करता है। इस दोहे का सीधा अर्थ है कि साधक स्वयं को बुद्धिहीन मानकर पवनपुत्र का स्मरण कर रहा है, ताकि उसे बल, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मिल सके। बड़े मंगल के दिन स्नान के उपरांत तुलसी की माला से इस दोहे का कम से कम 108 बार जाप करने से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है और किसी भी प्रतियोगिता या इंटरव्यू में सफलता के मार्ग खुलते हैं। इसके अतिरिक्त, जो लोग अज्ञात भय, मानसिक अवसाद या बुरे सपनों से परेशान रहते हैं, उनके लिए ‘भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावे’ की चौपाई को संजीवनी माना गया है। इस चौपाई के नियमित पाठ से किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति या ऊपरी बाधा साधक के समीप नहीं फटकती है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न अंचलों के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में आज के दिन भक्तों को इस चौपाई के सामूहिक कीर्तन के जरिए भयमुक्त होने का संकल्प लेते देखा जा रहा है, जिससे आंतरिक शांति और गहरी नींद की प्राप्ति होती है। शारीरिक व्याधियों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पीड़ितों के लिए ‘नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा’ का पाठ परम कल्याणकारी सिद्ध होता है। इस पंक्ति के निरंतर जाप से असाध्य रोगों के कष्टों में कमी आती है और चिकित्सा के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा मिलने से रोगी तेजी से स्वस्थ होने लगता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में पनपने वाले मानसिक तनाव और डिप्रेशन को दूर करने में भी यह चौपाई अत्यंत प्रभावी साबित हुई है, जिसके चलते आज भंडारे और पूजा पंडालों में इसका विशेष गायन किया जा रहा है। सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए ‘महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी’ का पाठ करने की सलाह दी जाती है। यह चौपाई मानव मस्तिष्क से दुर्बुद्धि और द्वेष की भावनाओं का समूल नाश कर सद्बुद्धि का संचार करती है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर किसी भी प्रकार के अनैतिक विचारों से बचने तथा ईमानदारी से तरक्की पाने के लिए इस दोहे को आत्मसात करना अनिवार्य माना गया है। कुल मिलाकर, यह छठा बड़ा मंगल भक्तों के लिए दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति का एक बड़ा माध्यम बनकर आया है।