घर खरीदारों के लिए बढ़ सकती है इंतजार की घड़ी, वैश्विक संकट के असर से लाखों मकानों की डिलीवरी पर मंडराया खतरा

नई दिल्ली । देश का रियल एस्टेट क्षेत्र वर्ष 2026 में एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में लॉन्च की गई बड़ी आवासीय परियोजनाएं अब अपने अंतिम निर्माण चरण में पहुंच चुकी हैं और लाखों घर खरीदार अपने सपनों के घर का कब्जा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों ने इस उम्मीद के सामने नई अनिश्चितताएं खड़ी कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब केवल ऊर्जा और व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव रियल एस्टेट क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। यदि वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में बाधाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो निर्माण कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है, जिससे कई परियोजनाओं की डिलीवरी तय समय पर नहीं हो पाएगी। देश के सात प्रमुख महानगरों में इस वर्ष बड़ी संख्या में आवासीय इकाइयों का निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। इनमें दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता जैसे बड़े आवासीय बाजार शामिल हैं। इन शहरों में हजारों परियोजनाएं अंतिम चरण में हैं और डेवलपर्स खरीदारों को समय पर घर सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। विशेष रूप से मुंबई महानगर क्षेत्र और पुणे को लेकर अधिक चिंता जताई जा रही है। इन दोनों शहरों में सबसे अधिक आवासीय इकाइयों की डिलीवरी प्रस्तावित है। ऐसे में यदि निर्माण सामग्री की उपलब्धता प्रभावित होती है या लागत में तेज वृद्धि होती है, तो इन बाजारों पर सबसे पहले असर देखने को मिल सकता है। बड़ी परियोजनाओं की संख्या अधिक होने के कारण यहां किसी भी प्रकार की देरी का प्रभाव हजारों परिवारों तक पहुंच सकता है। दक्षिण भारत के प्रमुख शहर भी इससे अछूते नहीं हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में भी बड़ी संख्या में आवासीय परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। यदि सप्लाई चेन में व्यवधान बना रहता है, तो इन शहरों में भी परियोजनाओं की गति धीमी पड़ सकती है। इसका सीधा असर उन खरीदारों पर होगा जो लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं। रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार निर्माण क्षेत्र स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट, मशीनरी और परिवहन सेवाओं पर काफी हद तक निर्भर करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा कीमतों में वृद्धि होने पर इन सभी क्षेत्रों की लागत बढ़ जाती है। जब निर्माण लागत बढ़ती है तो परियोजनाओं के बजट और समयसीमा दोनों प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि डेवलपर्स मौजूदा परिस्थितियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। हालांकि उद्योग जगत का मानना है कि वर्तमान स्थिति महामारी काल जैसी नहीं है। आज डेवलपर्स की वित्तीय स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है और परियोजना प्रबंधन में तकनीक का उपयोग भी बढ़ा है। इसके बावजूद वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिमों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लंबे समय तक बने रहने वाले संकट से निर्माण क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है। एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू नियामकीय व्यवस्था भी है। रेरा जैसे नियमों के कारण डेवलपर्स पर तय समय में परियोजनाएं पूरी करने का दबाव रहता है। यदि लागत बढ़ती है या सप्लाई बाधित होती है, तो समयसीमा का पालन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में रियल एस्टेट क्षेत्र की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों और आपूर्ति व्यवस्था की स्थिरता पर निर्भर करेगी।
गर्मियों की गहरी जुताई किसानों के लिए फायदेमंद सौदा: कीटनाशकों का खर्च घटेगा, उत्पादन बढ़ेगा

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की बुआई की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे समय में कृषि वैज्ञानिक किसानों को गर्मियों की गहरी जुताई अपनाने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जून की तेज धूप का सही उपयोग कर खेतों की गहरी जुताई की जाए तो इससे न केवल मिट्टी की सेहत सुधरती है, बल्कि फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले अनेक कीट, रोग और खरपतवार भी शुरुआती स्तर पर नियंत्रित किए जा सकते हैं। अक्सर किसान फसल कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ देते हैं और मानसून आने के बाद ही जुताई का कार्य करते हैं। कृषि वैज्ञानिक इसे एक रणनीतिक भूल मानते हैं। उनका कहना है कि गर्मियों में की गई गहरी जुताई मिट्टी के भीतर मौजूद कीटों के अंडों, लार्वा और रोगजनक फफूंद को सतह पर ले आती है, जहां तेज धूप और अधिक तापमान के कारण उनका प्रभाव काफी हद तक समाप्त हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार गहरी जुताई का एक महत्वपूर्ण लाभ मिट्टी की संरचना में सुधार भी है। खेत की सख्त परत टूटने से पौधों की जड़ें अधिक गहराई तक विकसित हो पाती हैं। इससे पौधों को पोषक तत्व और नमी बेहतर तरीके से प्राप्त होती है। इसके साथ ही वर्षा का पानी मिट्टी में अधिक मात्रा में समा जाता है, जिससे जल संरक्षण में भी मदद मिलती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गहरी जुताई के बाद खेत में गोबर खाद, फसल अवशेष या अन्य जैविक पदार्थ मिलाने से मिट्टी की उर्वरता और जैविक गुणवत्ता में तेजी से सुधार होता है। खुली धूप में ये पदार्थ अच्छी तरह विघटित होकर मिट्टी का हिस्सा बन जाते हैं, जिससे आगामी फसल को आवश्यक पोषक तत्व आसानी से उपलब्ध होते हैं और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो सकती है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि गहरी जुताई किसानों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। मानसून के दौरान यदि कुछ दिनों तक वर्षा नहीं होती, तो मिट्टी की गहराई में संचित नमी फसल को सूखे के प्रभाव से बचाने में मदद करती है। इससे जल धारण क्षमता बढ़ती है और फसल का विकास बेहतर होता है। खरपतवार नियंत्रण के लिहाज से भी यह तकनीक काफी उपयोगी मानी जाती है। जुताई के दौरान खरपतवारों के बीज और जड़ें सतह पर आ जाती हैं, जो तेज धूप में नष्ट हो सकती हैं। इससे बाद में निंदाई-गुड़ाई पर होने वाला खर्च कम होता है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस प्रक्रिया से मजदूरी और खरपतवार नियंत्रण संबंधी खर्च में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। कृषि महाविद्यालय पवारखेड़ा के सहायक प्राध्यापक डॉ. अनसिंह निनामा के अनुसार किसानों को हर दो से तीन वर्ष में कम से कम एक बार 9 से 12 इंच गहराई तक जुताई अवश्य करनी चाहिए। उनके अनुसार यह उपाय भूमिगत कीटों, जड़ गलन रोग और खरपतवारों को नियंत्रित करने के साथ-साथ फसल उत्पादन में 15 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि करने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन की बेहतर शुरुआत के लिए गर्मियों की गहरी जुताई एक कम लागत वाला लेकिन अत्यंत प्रभावी कृषि उपाय है, जो किसानों को लंबे समय तक आर्थिक और उत्पादन संबंधी लाभ दे सकता है।
E20 के बाद अब E30 तक का रास्ता साफ, सरकार की नई नीति से एथेनॉल अर्थव्यवस्था और हरित ईंधन को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली । देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से E22, E25, E27 और E30 श्रेणी के ईंधनों को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से छूट देने का निर्णय लिया है। इस फैसले को भारत की वैकल्पिक ईंधन नीति और हरित ऊर्जा अभियान के लिए अहम माना जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को कर राहत का लाभ मिलेगा। इससे तेल विपणन कंपनियों और ईंधन क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले उत्पाद बाजार में लाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जा सकेगी। एथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से कृषि आधारित स्रोतों से तैयार किया जाता है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से जीवाश्म ईंधनों की खपत कम होती है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाने में मदद मिलती है। यही कारण है कि भारत सहित दुनिया के कई देश एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने एथेनॉल उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उत्पादन बढ़ने के साथ अब सरकार का ध्यान अधिक एथेनॉल खपत वाले ईंधनों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में उपलब्ध अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का उपयोग करने के लिए उच्च मिश्रण वाले ईंधनों को प्रोत्साहन देना आवश्यक हो गया था। इस नीति का एक प्रमुख उद्देश्य कच्चे तेल के आयात बिल को कम करना भी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से आयात करता है। ऐसे में पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ने से विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही इससे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से जुड़े किसानों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इस फैसले का सीधा प्रभाव सभी वाहन चालकों पर नहीं पड़ेगा। वर्तमान में अधिकांश पेट्रोल वाहन E20 तक के ईंधन के उपयोग के लिए डिजाइन किए गए हैं। E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च मिश्रण वाले ईंधनों के व्यापक उपयोग के लिए ऐसे वाहनों की आवश्यकता होगी जो तकनीकी रूप से इन ईंधनों के अनुकूल हों। इसलिए इन ईंधनों का प्रसार चरणबद्ध तरीके से होने की संभावना है। हाल के वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को लेकर भी चर्चा बढ़ी है। इस तकनीक वाले वाहन विभिन्न स्तर के एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर संचालित हो सकते हैं। सरकार भविष्य में ऐसे वाहनों और उनसे जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी जोर दे रही है। इससे एथेनॉल आधारित ईंधनों के उपयोग को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि कर छूट का यह निर्णय केवल ईंधन क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। यदि एथेनॉल उत्पादन, वाहन तकनीक और वितरण नेटवर्क का विस्तार समान गति से होता है तो आने वाले वर्षों में देश के ईंधन बाजार में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
भोपाल को ‘सिलेंडर फ्री’ बनाने की तैयारी: 4 बड़ी कॉलोनियों में 100% PNG कनेक्शन पर फोकस, चार इमली भी योजना में शामिल

मध्य प्रदेश । राजधानी भोपाल में घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर जारी चुनौतियों के बीच प्रशासन ने शहर को धीरे-धीरे ‘सिलेंडर फ्री’ बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। खाद्य विभाग और गैस वितरण एजेंसियों ने उन क्षेत्रों में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन को बढ़ावा देने की योजना बनाई है, जहां गैस पाइपलाइन का नेटवर्क पहले से उपलब्ध है या तेजी से विस्तार किया जा रहा है। खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शहर में थिंक गैस कंपनी द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में भूमिगत गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। होशंगाबाद रोड, बावड़ियाकलां, सलैया, अवधपुरी, अयोध्या बायपास और साकेत नगर जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में घरों तक पीएनजी कनेक्शन पहुंच चुके हैं। अब प्रशासन का लक्ष्य इन क्षेत्रों में अधिकतम परिवारों को पाइप्ड गैस नेटवर्क से जोड़ना है। योजना के तहत फिलहाल चार प्रमुख आवासीय परियोजनाओं और कॉलोनियों पर विशेष फोकस किया गया है। इनमें केराल केनसिप, सौम्या पार्कलैंड, सागर लेक व्यू होम्स और आकृति ग्रीन शामिल हैं। रणनीति यह है कि इन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत कनेक्शन सुनिश्चित करने के बाद अगले चरण में अन्य कॉलोनियों को शामिल किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि चरणबद्ध तरीके से कार्य करने से गैस नेटवर्क का विस्तार अधिक प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा। शहर के सबसे प्रतिष्ठित और वीआईपी इलाकों में शामिल चार इमली और 74 बंगला क्षेत्रों में भी गैस पाइपलाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत लोगों के सरकारी आवास स्थित हैं। अधिकांश हिस्सों में पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा होने के बाद यहां भी कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रशासन का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश में पिछले कुछ महीनों से एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मांग और आपूर्ति के बीच अंतर के कारण कई उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि पीएनजी नेटवर्क के विस्तार से घरेलू गैस की आपूर्ति अधिक स्थिर और सुविधाजनक हो सकेगी। खाद्य विभाग के अनुसार, शहर की 172 से अधिक कॉलोनियों के सामने गैस पाइपलाइन नेटवर्क पहुंच चुका है। कई क्षेत्रों से लोग स्वयं भी पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर रहे हैं। भविष्य में पुराने भोपाल और अन्य घनी आबादी वाले इलाकों तक भी इस नेटवर्क का विस्तार करने की योजना है। सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, जिन क्षेत्रों में पीएनजी लाइन उपलब्ध होगी, वहां निर्धारित समयसीमा के भीतर कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने भी गैस इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को गति देने के लिए कई प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, जिससे पाइपलाइन नेटवर्क तेजी से विकसित किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी व्यवस्था से उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी और गैस खत्म होने जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। साथ ही यह व्यवस्था दीर्घकालिक रूप से अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प के रूप में भी देखी जा रही है। हालांकि इसके साथ उपभोक्ताओं के सामने पारंपरिक एलपीजी और पीएनजी के बीच विकल्प चुनने का सवाल भी महत्वपूर्ण बना रहेगा।
पश्चिम एशिया संकट गहराया तो महंगा हो सकता है तेल, सप्लाई पर दबाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया नया खतरा

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बिगड़ते संबंधों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा तनाव और बढ़ता है तथा स्थिति व्यापक संघर्ष में बदलती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। वैश्विक तेल बाजार पहले से ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों, ऊर्जा कंपनियों और आयातक देशों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। तेल की कीमतों में हालिया तेजी इस बात का संकेत है कि बाजार संभावित आपूर्ति बाधाओं को लेकर सतर्क हो चुका है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो ऊर्जा लागत में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार खाड़ी क्षेत्र विश्व तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या परिवहन व्यवधान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है। तेल उत्पादन और निर्यात में बाधा आने की आशंका के कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। यही वजह है कि निवेशक लगातार घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि क्षेत्र में तेल उत्पादन और परिवहन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मार्ग दबाव में हैं। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक माना जा रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का अनुमान है कि गंभीर संकट की स्थिति में कच्चा तेल 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि फिलहाल कुछ ऐसे कारक भी हैं जो बाजार को पूरी तरह अस्थिर होने से बचा रहे हैं। प्रमुख देशों के रणनीतिक तेल भंडार, वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग और कुछ बड़े उपभोक्ता देशों द्वारा आयात में संतुलन बनाए रखने के प्रयासों से बाजार को अस्थायी राहत मिली हुई है। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ते हैं तो ये उपाय लंबे समय तक पर्याप्त साबित नहीं होंगे। ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर केवल तेल तक सीमित नहीं रहता। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा प्रभाव परिवहन, विनिर्माण, विमानन और उपभोक्ता वस्तुओं की लागत पर पड़ता है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और कई देशों की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़े प्रभाव ने बाजार को पहले ही संवेदनशील बना दिया है। आपूर्ति में कमी और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं और तनाव कम होता है तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर यदि टकराव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ-साथ विश्व अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों और उनके आर्थिक प्रभावों पर टिकी हुई हैं।
एमपी में सड़क हादसों का भयावह आंकड़ा: एक साल में 1 लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं, हर 10 में से 6 पीड़ित युवा

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। डायल-108 एंबुलेंस सेवा की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक वर्ष में प्रदेशभर में 1,03,294 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इन हादसों का सबसे ज्यादा शिकार युवा वर्ग हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के लोग कुल दुर्घटनाओं में 61 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे अधिक प्रभावित रहे। इसके बाद 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 24 प्रतिशत लोग हादसों का शिकार बने। वहीं 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत, 0 से 15 वर्ष आयु वर्ग की 4 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की 3 प्रतिशत दर्ज की गई। जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सागर जिला सड़क हादसों के मामले में प्रदेश में सबसे ऊपर रहा, जहां एक वर्ष के दौरान 6,061 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इसके बाद इंदौर में 4,853 और भोपाल में 4,546 सड़क हादसे सामने आए। इसके अलावा छिंदवाड़ा, जबलपुर, धार और रीवा जैसे जिलों में भी तीन हजार से अधिक दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो बढ़ती सड़क असुरक्षा की ओर संकेत करती हैं। महीनेवार विश्लेषण में मई 2025 सबसे चिंताजनक महीना साबित हुआ, जब 12,047 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। जून और जुलाई में दुर्घटनाओं की संख्या में कुछ कमी देखी गई, लेकिन अगस्त के बाद फिर से बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया। त्योहारों के मौसम में अक्टूबर और नवंबर के दौरान भी हादसों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं। इनमें ओवर स्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, सड़क के ब्लैक स्पॉट, गड्ढे, क्षमता से अधिक सवारी बैठाना तथा लापरवाही और स्टंटबाजी प्रमुख हैं। डायल-108 एंबुलेंस सेवा के वरिष्ठ प्रबंधक तरुण सिंह परिहार के अनुसार, दुर्घटनाओं के बाद गंभीर चोटों का बड़ा कारण हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना है। उन्होंने लोगों से यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाने की अपील की है। वहीं भोपाल आरटीओ जितेंद्र शर्मा का कहना है कि सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवर स्पीडिंग है। उनके अनुसार यदि वाहन चालक निर्धारित गति सीमा का पालन करें तो सड़क दुर्घटनाओं में करीब 60 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। हाल के दिनों में भोपाल में हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने भी लोगों का ध्यान सड़क सुरक्षा की ओर आकर्षित किया है। पुलिस के अनुसार तेज रफ्तार बाइक के डिवाइडर से टकराने की घटना में दो मेडिकल छात्रों की मौत हो गई थी। यह हादसा एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए केवल सख्त कानून ही नहीं, बल्कि जनजागरूकता, बेहतर सड़क ढांचा और जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार भी उतना ही जरूरी है। बढ़ते हादसों के बीच सड़क सुरक्षा अब प्रदेश के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
शेयरधारकों को नकदी लौटाने की तैयारी, लेकिन बाजार का भरोसा कमजोर; विप्रो के सामने आय वृद्धि और मुनाफे की चुनौती बरकरार

नई दिल्ली । देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल विप्रो इन दिनों निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। कंपनी ने 15,000 करोड़ रुपये के बड़े शेयर बायबैक कार्यक्रम की शुरुआत की है, लेकिन इसके बावजूद उसके शेयरों पर दबाव कम होता नजर नहीं आ रहा। बायबैक शुरू होने के साथ ही कंपनी के शेयर में गिरावट दर्ज की गई और यह कई वर्षों के निचले स्तर तक पहुंच गया। बाजार में हालिया कमजोरी के बीच विप्रो का प्रदर्शन व्यापक सूचकांकों की तुलना में अधिक कमजोर दिखाई दिया है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में लगातार गिरावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी है। वर्ष 2026 में अब तक कंपनी के शेयर मूल्य में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिससे निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा है। कंपनी ने शेयरधारकों को अतिरिक्त नकदी लौटाने के उद्देश्य से बायबैक योजना लागू की है। इसके तहत बड़ी संख्या में शेयर वापस खरीदे जाएंगे। बायबैक का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध कुल शेयरों की संख्या को कम करना और शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन करना माना जाता है। आमतौर पर ऐसी योजनाओं से प्रति शेयर आय और अन्य वित्तीय संकेतकों में सुधार की संभावना बढ़ जाती है। कंपनी का कहना है कि उसके पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है और वह पूंजी आवंटन की रणनीति के तहत निवेशकों को लाभ पहुंचाना चाहती है। बायबैक में छोटे निवेशकों के लिए भी एक हिस्सा सुरक्षित रखा गया है, जिससे खुदरा निवेशकों को भागीदारी का अवसर मिल सके। हालांकि बाजार की प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल कंपनी के भविष्य के कारोबार पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में कंपनी को कई परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बड़े ग्राहकों से मिलने वाले कारोबार में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने और कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लागू होने में देरी जैसी परिस्थितियां राजस्व वृद्धि पर असर डाल सकती हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी मांग में कमजोरी भी कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। आईटी उद्योग इस समय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में बढ़ते निवेश के कारण कंपनियों को नए अवसर तो मिल रहे हैं, लेकिन साथ ही प्रतिस्पर्धा और लागत का दबाव भी बढ़ रहा है। विप्रो भी इसी चुनौतीपूर्ण माहौल में अपनी विकास रणनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े सौदों का वास्तविक वित्तीय लाभ मिलने में समय लग सकता है। ऐसे में निकट अवधि में आय वृद्धि सीमित रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही कर्मचारियों के वेतन, नए प्रोजेक्ट्स की लागत और उभरती तकनीकों में निवेश से लाभप्रदता पर भी असर पड़ सकता है। इसके बावजूद कंपनी की मजबूत वैश्विक उपस्थिति, विविध ग्राहक आधार और डिजिटल सेवाओं में बढ़ता फोकस भविष्य के लिए सकारात्मक पहलू माने जा रहे हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि बायबैक कार्यक्रम के बाद कंपनी अपने कारोबारी प्रदर्शन और विकास योजनाओं को किस तरह आगे बढ़ाती है। आने वाली तिमाहियों के वित्तीय नतीजे निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतक साबित हो सकते हैं।
भारत में AI क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, TCS और Anthropic की साझेदारी से हजारों कर्मचारियों को मिलेगा उन्नत AI प्लेटफॉर्म

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने एआई क्षेत्र की अग्रणी संस्था एंथ्रोपिक के साथ साझेदारी कर अपने डिजिटल परिवर्तन अभियान को नई दिशा देने का फैसला किया है। इस सहयोग का उद्देश्य विभिन्न उद्योगों में एआई आधारित समाधानों के विकास को गति देना और ग्राहकों को उन्नत तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस साझेदारी के तहत टीसीएस अपने लगभग 50 हजार कर्मचारियों को Claude AI प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराएगी। इस पहल का लाभ इंजीनियरिंग, वित्त, कानूनी सेवाओं, विपणन, बिक्री और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत पेशेवरों को मिलेगा। कंपनी का मानना है कि कर्मचारियों को अत्याधुनिक एआई उपकरणों से जोड़ने से उत्पादकता बढ़ेगी और जटिल कार्यों को अधिक दक्षता के साथ पूरा किया जा सकेगा। टीसीएस इस सहयोग के अंतर्गत एक विशेष विशेषज्ञ टीम का गठन भी करेगी, जो Claude एआई मॉडल पर आधारित नए तकनीकी समाधान विकसित करेगी। कंपनी को इन एआई क्षमताओं और टूल्स तक शुरुआती पहुंच मिलने से वह अपने ग्राहकों के लिए तेजी से नवाचार करने की स्थिति में होगी। इससे एंटरप्राइज ग्राहकों को अत्याधुनिक एआई तकनीकों का लाभ अपेक्षाकृत कम समय में मिल सकेगा। दोनों कंपनियां मिलकर बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी प्रशासन, जीवन विज्ञान, विमानन, दूरसंचार और चिकित्सा प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करेंगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां डेटा सुरक्षा, विश्वसनीयता और नियामकीय अनुपालन सर्वोच्च प्राथमिकता रखते हैं। ऐसे क्षेत्रों में एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना इस साझेदारी का प्रमुख लक्ष्य माना जा रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को एआई टूल्स से जोड़ना भविष्य की कार्यशैली को बदल सकता है। इससे न केवल कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि संगठन के भीतर नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता भी मजबूत होगी। आधुनिक व्यवसायों में एआई की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह कदम उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यह साझेदारी ग्राहकों के लिए भी कई नए अवसर लेकर आएगी। कंपनियां ऐसे एआई समाधान विकसित करेंगी जो व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पुराने तकनीकी ढांचे को आधुनिक बनाने और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। इससे डिजिटल परिवर्तन परियोजनाओं की गति बढ़ने और परिचालन लागत को कम करने की संभावना भी जताई जा रही है। एआई तकनीक के तेजी से विस्तार के बीच यह सहयोग भारत के तकनीकी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर एआई अपनाने की बढ़ती मांग के बीच भारतीय आईटी कंपनियां नई तकनीकों में निवेश कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं। टीसीएस और एंथ्रोपिक की यह साझेदारी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित समाधान व्यवसायों की कार्यप्रणाली को व्यापक रूप से प्रभावित करेंगे। ऐसे में बड़े पैमाने पर एआई प्रशिक्षण, उन्नत प्लेटफॉर्म तक पहुंच और उद्योग-विशिष्ट समाधानों का विकास कंपनियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है।
Akhilesh Yadav Daughter Controversy: अखिलेश की बेटी पर टिपणी करना पड़ा बरी, शख्स के खिलाफ FIR दर्ज!

Akhilesh Yadav Daughter Controversy: गुना। समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी अब कानूनी विवाद का रूप ले चुकी है। मामले में अखिल भारतवर्षीय युवा यादव महासभा की शिकायत पर गुना के कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। ट्रंप के दामाद की लग्जरी परियोजना पर अल्बानिया में विरोध, हजारों लोग सड़कों पर उतरे क्या है वियवदित पोस्ट गुना में रहने वाले ब्रजेश भानु शर्मा ने फेसबुक पर एक फोटो पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव की बेटी पर टिपणी की थी। पोस्ट में लिखा था- नीग्रो के साथ 7 करोड़ लेकर भागने वाली पहली महिला बनी यूपी के अखिलेश यादव की बेटी। सिर्फ यही नहीं, बल्कि पहले भी आरोपी ने कई बार आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिसके बाद यह विवाद खड़ा हुआ। अखिल भारतवर्षीय युवा यादव महासभा ने किया विरोध मामले को लेकर अखिल भारतवर्षीय युवा यादव महासभा के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने गुना के कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है की ब्रजेश भानु शर्मा की इस हरकत से पूरे यादव समाज में भारी आक्रोश है। यादव समाज का कहना है कि ऐसे असामजिक तत्वों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए। Friend Theft 55 lakh: रिटायर्ड फौजी के घर 55 लाख की चोरी, भैंस खरीदने के लिए जिगरी दोस्त ने ही डाला डाका! गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन होगा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव का कहना है कि हम सनातन धर्म के लोग किसी भी समाज की बहन-बेटी पर इस तरह की गलत टिप्पणी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। धर्मेंद्र यादव ने कहा- प्रशासन से मांग है कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को बढ़ावा न मिले। यादव महासभा ने चेतवनी दी है कि अगर आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो पूरा समाज सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेगा।
TMC में बड़ी टूट के संकेत? बागी सांसदों की भूपेंद्र यादव से मुलाकात, 19 सांसदों की सूची से मचा सियासी हड़कंप

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती दिख रही है। पार्टी में असंतोष के बीच कई बागी नेताओं ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की। इस बैठक में टीएमसी के कुछ बागी सांसद भी मौजूद रहे। जानकारी के अनुसार, इस बैठक में प्रतिमा मंडल, माला रॉय, मिताली बाग और सयानी घोष शामिल रहीं। बताया जा रहा है कि यह बैठक करीब एक घंटे तक चली, जिसमें राजनीतिक हालात और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के भीतर असंतोष केवल विधायकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब कई सांसद भी बागी रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि 19 सांसदों की एक सूची सामने आई है, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे प्रमुख नाम भी शामिल हैं। बताया यह भी जा रहा है कि इन सांसदों ने अपने हस्ताक्षर के साथ एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। इस सूची के सामने आने के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। ऐसे में यदि 19 सांसदों के बागी होने का दावा सही साबित होता है, तो यह पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है। उधर, कोलकाता में पार्टी के बागी विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि 64 विधायक उनके समर्थन में हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी विधायक जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष को अपना पत्र सौंपेंगे और एक अलग राजनीतिक पहचान के साथ काम करेंगे। ऋतब्रत बनर्जी, जिन्हें 3 जून को टीएमसी से निष्कासित किया गया था, को विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी है। उनके अनुसार, उनका गुट अब पश्चिम बंगाल के हितों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक दिशा तय करेगा। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर टीएमसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते दावों ने राज्य की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।