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हिंदी सिनेमा में डबल रोल का अनोखा ट्रेंड: जब बॉलीवुड के इन टॉप एक्टर्स ने एक ही स्क्रीन पर निभाया बाप और बेटे का दमदार रोल

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में पटकथाओं की मांग और निर्देशकों के प्रयोगों ने समय-समय पर अभिनेताओं को अपनी अभिनय क्षमता की सीमाओं को लांघने का अवसर दिया है। बॉलीवुड में दोहरे किरदारों यानी डबल रोल का चलन दशकों पुराना है, लेकिन इस विधा में सबसे कठिन और प्रभावकारी प्रयोग तब माना जाता है जब एक ही अभिनेता को एक ही फिल्म के भीतर पिता और पुत्र दोनों की भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। यह प्रयोग न केवल अभिनेता के कौशल की परीक्षा लेता है बल्कि दर्शकों को भी एक ही पर्दे पर दो अलग-अलग पीढ़ियों के दृष्टिकोण को देखने का अवसर देता है। हाल के वर्षों में कई ऐसे बड़े अभिनेताओं ने इस चुनौती को स्वीकार किया और अपने किरदारों से सिनेमाघरों में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस फेहरिस्त में सबसे पहला और सबसे मजबूत नाम हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन का आता है। उन्होंने अपने लंबे और शानदार करियर में कई बार इस तरह के चुनौतीपूर्ण प्रयोगों को पर्दे पर जीवंत किया है। फिल्म सूर्यवंशम में ठाकुर भानुप्रताप सिंह और उनके सीधे-सादे बेटे हीरा ठाकुर के रूप में उनका अभिनय आज भी टेलीविजन संस्कृति का एक अहम हिस्सा बन चुका है। इसके अलावा उन्होंने अदालत, आखिरी रास्ता और महान जैसी फिल्मों में भी पिता और पुत्र की भूमिकाएं बहुत ही संजीदगी के साथ निभाई थीं। महान फिल्म में तो उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए पिता और दो बेटों का ट्रिपल रोल निभाकर सबको हैरत में डाल दिया था। वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता शाहरुख खान ने भी इस श्रेणी में अपना नाम दर्ज कराया है। फिल्म इंग्लिश बाबू देसी मैम में बहुआयामी भूमिकाएं निभाने के बाद, उन्होंने हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म जवान में इस कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस फिल्म में उन्होंने कैप्टन विक्रम राठौड़ के रूप में एक निडर पिता और आजाद के रूप में एक न्यायप्रिय बेटे का किरदार निभाया था। दोनों किरदारों के बीच का तालमेल और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी दमदार थी कि दर्शकों ने सिनेमाघरों में तालियों और सीटियों के साथ इसका स्वागत किया और फिल्म ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस प्रकार के किरदारों को निभाने में एक्शन और फिक्शन फिल्मों के सुपरस्टार ऋतिक रोशन भी पीछे नहीं रहे हैं। उन्होंने अपनी बेहद लोकप्रिय सुपरहीरो फ्रेंचाइजी कृष और कृष 3 में एक साथ दो पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व किया। एक तरफ जहां उन्होंने मानसिक रूप से विशेष और बाद में बुजुर्ग हो चुके वैज्ञानिक पिता रोहित मेहरा का किरदार निभाया, वहीं दूसरी तरफ शक्तिशाली और रक्षक बेटे कृष्णा उर्फ कृष के रूप में भी खुद को स्थापित किया। एक ही फ्रेम में दो अलग उम्र और शारीरिक हाव-भाव वाले किरदारों को एक साथ निभाना ऋतिक रोशन के करियर के सबसे बेहतरीन प्रयोगों में गिना जाता है। समकालीन अभिनेताओं में रणबीर कपूर ने भी इस श्रेणी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने बड़े बजट की पीरियड ड्रामा फिल्म शमशेरा में पिता और पुत्र की दोहरी भूमिका निभाई थी। फिल्म में उन्होंने डकैत शमशेरा और उसके विद्रोही बेटे बल्ली के किरदारों को निभाने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से काफी मेहनत की थी। भले ही फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिश्रित प्रतिक्रिया मिली हो, लेकिन रणबीर कपूर के इस दोहरे प्रयास और अभिनय की समीक्षकों द्वारा काफी सराहना की गई थी। इसी तरह एक्शन स्टार जॉन अब्राहम ने भी अपनी फिल्म सत्यमेव जयते के दूसरे भाग में इसी तरह का प्रयोग दोहराया था, जहां उन्होंने एक किसान पिता और उसके जुड़वां बेटों की तिहरी भूमिका निभाई थी। वहीं अभिनेता सलमान खान की फिल्म वीर में भी एक ऐसी ही कहानी देखने को मिली थी, जिसमें पिता के निधन के बाद बेटे का किरदार कहानी को आगे बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त, अक्षय कुमार जैसे कलाकार भी अपनी आने वाली फिल्मों और पिछले कुछ प्रोजेक्ट्स में इस तरह के किरदारों की संभावनाओं को टटोलते नजर आए हैं। कुल मिलाकर, एक ही फिल्म में पिता और बेटे का किरदार निभाना बॉलीवुड एक्टर्स के लिए हमेशा से अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित करने का सबसे बड़ा जरिया रहा है।

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के समर्थन में उतरे पंजाबी स्टार एमी विर्क, 'डॉन 3' विवाद को लेकर निर्माताओं पर साधा निशाना

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में फिल्मों के हिट और फ्लॉप होने के साथ ही निर्माताओं और कलाकारों के समीकरण किस तरह बदलते हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण हालिया विवाद में देखने को मिल रहा है। पंजाबी फिल्म उद्योग के जाने-माने अभिनेता और गायक एमी विर्क ने बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह के पक्ष में खड़े होते हुए फिल्म ‘डॉन 3’ के निर्माताओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक विशेष साक्षात्कार के दौरान उन्होंने खुलकर कहा कि जब अभिनेता का समय खराब चल रहा था और उनकी कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लगातार असफल हो रही थीं, तब निर्माताओं ने उनके साथ अपनी फिल्म की शूटिंग शुरू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। इस पूरे विवाद की जड़ें फिल्म ‘डॉन 3’ की घोषणा और उसके बाद बदले हालातों से जुड़ी हुई हैं। लगभग तीन साल पहले घोषित हुई इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का निर्माण कार्य काफी समय तक अटका रहा। इसी बीच रणवीर सिंह की नई फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और वह देश की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हो गई। एमी विर्क का कहना है कि जैसे ही रणवीर की इस फिल्म ने सफलता के नए आयाम छुए, वैसे ही निर्माताओं ने ‘डॉन 3’ पर जल्द से जल्द काम शुरू करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया ताकि वे अभिनेता की नई स्टार वैल्यू का आर्थिक लाभ उठा सकें। विवाद तब और गहरा गया जब ‘धुरंधर’ की भारी सफलता के तुरंत बाद रणवीर सिंह ने किन्हीं कारणों से ‘डॉन 3’ परियोजना से खुद को अलग कर लिया। निर्माताओं का दावा है कि उन्होंने फिल्म की आउटडोर लोकेशंस की रेकी, अनुमति और अन्य प्री-प्रोडक्शन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए थे, जो अभिनेता के हटने से पूरी तरह बर्बाद हो गए। इस नुकसान की भरपाई के लिए निर्माण कंपनी ने अभिनेता से 45 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की है। हालांकि रणवीर सिंह ने शुरुआत में इस मांग को खारिज करते हुए आंशिक समझौते के तहत केवल 10 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी, जिसे निर्माताओं ने स्वीकार नहीं किया। इस गतिरोध के बीच मनोरंजन उद्योग की प्रमुख संस्था फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने भी हस्तक्षेप किया था और अभिनेता के खिलाफ असहयोग का निर्देश जारी किया था, जिसे बाद में हटा लिया गया। मध्य प्रदेश सहित देश भर के फिल्म वितरकों और सिनेमा जगत के विशेषज्ञों की इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनी हुई है। एमी विर्क ने इस वित्तीय मांग को पूरी तरह अनुचित बताते हुए कहा कि यदि निर्माताओं को लगता है कि उनका वास्तविक नुकसान हुआ है तो वे मामूली बकाया राशि लेकर मामला सुलझा सकते हैं, न कि इतनी बड़ी रकम का दबाव बनाएं। उन्होंने अभिनेता को कानूनी राह अपनाने और किसी भी दबाव के आगे न झुकने की सलाह दी है। साक्षात्कार के दौरान विर्क ने रणवीर सिंह के साथ अपने पुराने संबंधों और उनकी हालिया व्यक्तिगत खुशियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘धुरंधर’ की सफलता और रणवीर के घर बेटी के जन्म के बाद उनकी अभिनेता से लंबी बातचीत हुई थी, जिसमें रणवीर ने फिल्म के लिए की गई अपनी कड़ी मेहनत को साझा किया था। विर्क ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे सफल फिल्म का मुख्य हिस्सा उनका एक करीबी दोस्त है। फिलहाल यह विवाद अदालती नोटिसों और कानूनी दांव-पेंच के बीच फंसा हुआ है और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मनोरंजन जगत का यह बड़ा विवाद किस मोड़ पर जाकर थमता है।

होर्मुज तनाव से उछला कच्चा तेल, 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा ब्रेंट; पेट्रोल-डीजल कीमतों पर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के कारण निवेशकों और आयातक देशों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। बाजार आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड में भी तेजी देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल आपूर्ति मार्गों को लेकर पैदा हुई आशंकाओं ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है, जिसके चलते कीमतों में तेजी आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या आपूर्ति बाधित होने की आशंका सीधे तेल बाजार को प्रभावित करती है। रिपोर्टों के अनुसार हालिया घटनाओं के बाद निवेशकों ने आपूर्ति जोखिम को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है या तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि बाजार की दिशा काफी हद तक आने वाले दिनों में राजनीतिक और सैन्य घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। फिलहाल निवेशक हर नए घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महत्वपूर्ण मानी जाती है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर परिवहन, उद्योग और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल कच्चे तेल की दरों से तय नहीं होतीं, बल्कि इनमें कर, परिवहन लागत, विनिमय दर और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति भी अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भविष्य में ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल किसी तत्काल मूल्य वृद्धि को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में ईंधन दरों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के कारण उपभोक्ताओं और उद्योग जगत की निगाहें तेल बाजार पर टिकी हुई हैं। आर्थिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक मांग और आपूर्ति संतुलन तथा प्रमुख तेल उत्पादक देशों की नीतियां कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगी। ऐसे में ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का दौर कुछ समय तक जारी रह सकता है।

बॉलीवुड की नई रिलीज फिल्मों की रफ्तार पड़ी धीमी, 'है जवानी तो इश्क होना है' और 'बंदर' के कलेक्शन में लगातार छठे दिन भारी गिरावट

नई दिल्ली । देश के सिनेमाघरों में चल रही बॉक्स ऑफिस की जंग में इस समय क्षेत्रीय और हिंदी सिनेमा के बीच एक बड़ा फासला देखने को मिल रहा है। दक्षिण भारतीय फिल्म जगत की नई पेशकश ने अपनी जबरदस्त व्यावसायिक पकड़ का प्रदर्शन करते हुए दो सौ करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होने की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ भारी-भरकम स्टार कास्ट और बड़े निर्देशकों के मार्गदर्शन में बनी बॉलीवुड की दो प्रमुख फिल्में दर्शकों की कमी के कारण सिनेमाघरों में अपनी पकड़ खोती जा रही हैं। वर्किंग डेज की शुरुआत के साथ ही इन दोनों हिंदी फिल्मों के दैनिक प्रदर्शन ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो फिल्म वितरकों और निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है। मेगास्टार राम चरण और जान्हवी कपूर की मुख्य भूमिकाओं से सजी फिल्म ‘पेद्दी’ अपनी रिलीज के पहले दिन से ही बॉक्स ऑफिस पर राज कर रही है। दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ-साथ हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी इस फिल्म की मांग लगातार बनी हुई है। अपनी रिलीज के सातवें दिन भी इस फिल्म ने संतोषजनक कमाई करते हुए बाजार में अपनी निरंतरता साबित की है, जबकि इसके छठे दिन का प्रदर्शन भी काफी मजबूत रहा था। अब तक के कुल संकलन के आंकड़ों को देखा जाए तो यह फिल्म बहुत जल्द एक नया रिकॉर्ड कायम करने की तरफ बढ़ रही है। इस मजबूत व्यावसायिक प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बेहतर विषय-वस्तु और मजबूत स्टार वैल्यू वाली फिल्मों को दर्शक पूरे देश में हाथों-हाथ ले रहे हैं। इसके विपरीत बॉलीवुड के बड़े सितारों से सजी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का जादू बॉक्स ऑफिस पर फीका पड़ता दिखाई दे रहा है। नामचीन सितारों की मौजूदगी और अनुभवी निर्देशन के बावजूद फिल्म छठे दिन अपनी रफ्तार को बरकरार रखने में नाकाम रही। पांचवें दिन के मुकाबले छठे दिन इसके कलेक्शन में बड़ी गिरावट देखने को मिली है, जिससे इसका कुल कारोबार अब तक काफी सीमित रह गया है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों से आ रही रिपोर्ट के अनुसार शाम के शो में दर्शकों की संख्या में काफी कमी आई है, जिसने फिल्म के आगे के सफर को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है। वहीं इसी सप्ताह रिलीज हुई बॉलीवुड की एक अन्य प्रयोगधर्मी और डार्क थ्रिलर फिल्म ‘बंदर’ बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह पस्त नजर आ रही है। गंभीर किरदारों और सस्पेंस से भरपूर होने के बावजूद यह फिल्म शुरुआत से ही दर्शकों को थिएटर्स तक खींचने में नाकाम साबित हुई है। अपनी रिलीज के छठे दिन इस फिल्म का कलेक्शन बेहद निराशाजनक रहा, जो इसकी कुल लागत और उम्मीदों के लिहाज से बहुत मामूली है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि सीमित प्रचार और मुख्यधारा के दर्शकों से जुड़ाव की कमी के कारण इस फिल्म का कुल संकलन अब तक के सबसे निचले स्तर पर बना हुआ है। मौजूदा व्यापारिक आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहांत में भी ‘पेद्दी’ का दबदबा इसी तरह जारी रह सकता है क्योंकि दर्शकों के बीच इसकी लोकप्रियता और माउथ पब्लिसिटी काफी मजबूत है। दूसरी तरफ हिंदी बेल्ट की दोनों फिल्मों को अपनी साख बचाने के लिए आने वाले दिनों में असाधारण प्रदर्शन करने की जरूरत होगी, जिसकी संभावना फिलहाल बेहद कम दिखाई दे रही है। सिनेमाघरों के मालिक भी अब अपना पूरा ध्यान उस फिल्म पर केंद्रित कर रहे हैं जो लगातार फुटफॉल दे रही है, जिससे आने वाले दिनों में स्क्रीन्स की संख्या में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।

Sunny Leone CID Notice: ₹2400 करोड़ निवेश घोटाले की जांच में अभिनेत्री सनी लियोनी को CID का नोटिस, एजेंसी ने मांगी भुगतान संबंधी जानकारी

  Sunny Leone CID Notice: नई दिल्ली । कर्नाटक में कथित 2,400 करोड़ रुपये के शिवम एसोसिएट्स निवेश घोटाले की जांच के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री सनी लियोनी का नाम भी चर्चा में आ गया है। हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि अभिनेत्री को भेजा गया नोटिस केवल जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया का हिस्सा है और फिलहाल उनके खिलाफ किसी प्रकार की धोखाधड़ी या आपराधिक गतिविधि का आरोप नहीं लगाया गया है। मामले की जांच कर रही कर्नाटक क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) कथित निवेश योजना से जुड़े वित्तीय लेनदेन और धन के प्रवाह की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि वह यह समझने का प्रयास कर रही है कि निवेशकों से जुटाई गई कथित राशि का उपयोग किन-किन क्षेत्रों में किया गया और उसका अंतिम लाभ किसे प्राप्त हुआ। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स के प्रमोटर और मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे शिवानंद नीलनवर द्वारा निर्मित एक कन्नड़ फिल्म में अभिनेत्री सनी लियोनी ने विशेष प्रस्तुति दी थी। इसी संदर्भ में एजेंसी ने अभिनेत्री से उस प्रदर्शन के लिए प्राप्त भुगतान और उससे संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी है। अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2023 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘चैंपियन’ के एक गीत में प्रस्तुति देने के लिए अभिनेत्री को भुगतान किया गया था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भुगतान का स्रोत क्या था और क्या उसका संबंध कथित निवेश योजना से जुड़ी किसी वित्तीय गतिविधि से था। हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल भुगतान प्राप्त करना किसी व्यक्ति को स्वतः आरोपी नहीं बनाता और जांच का उद्देश्य तथ्यों की पुष्टि करना है। सीआईडी के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स और उससे जुड़े लोगों पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर बिना आवश्यक अनुमति के निवेश और जमा योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों से धन एकत्र किया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में हजारों निवेशकों से धन जुटाए जाने के आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी अब उन सभी वित्तीय लेनदेन की समीक्षा कर रही है जो इस कथित नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक अपराधों की जांच में एजेंसियां अक्सर उन सभी व्यक्तियों या संस्थाओं से जानकारी मांगती हैं जिनके साथ संबंधित पक्षों का वित्तीय लेनदेन हुआ हो। ऐसे नोटिस का उद्देश्य तथ्यों का सत्यापन करना होता है और इसे किसी व्यक्ति की संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड तथा भुगतान संबंधी सूचनाओं की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी। वहीं, सनी लियोनी के खिलाफ इस समय किसी प्रकार के अपराध में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस पूरे मामले पर मनोरंजन जगत और निवेशकों की नजर बनी हुई है, जबकि जांच एजेंसियां कथित घोटाले के वित्तीय पहलुओं को खंगालने में जुटी हैं।

वैश्विक खेल इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन आज से, 104 कड़े मुकाबलों के बीच खिताब बचाने उतरेगी अर्जेंटीना और लियोनेल मेसी की सेना

नई दिल्ली । खेल जगत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मंच फीफा विश्व कप 2026 का ऐतिहासिक शंखनाद हो गया है। उत्तरी अमेरिका के तीन देशों, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाला यह टूर्नामेंट फुटबॉल के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और भव्य आयोजन बनने जा रहा है। खेल के स्वरूप में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए इस बार प्रतिस्पर्धा करने वाली टीमों की संख्या को बढ़ाकर 48 कर दिया गया है। टीमों की संख्या बढ़ने के कारण इस महाकुंभ में कुल 104 हाई-वोल्टेज मुकाबले खेले जाएंगे, जो दुनिया भर के खेल प्रशंसकों को एक नया रोमांच प्रदान करेंगे।टूर्नामेंट का आधिकारिक उद्घाटन मैक्सिको सिटी के ऐतिहासिक स्टेडियम में एक बेहद भव्य और रंगारंग समारोह के साथ हुआ। इस उद्घाटन समारोह में दुनिया भर के शीर्ष संगीतकारों और कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया, जिसमें वैश्विक पॉप स्टार्स ने फीफा के आधिकारिक एंथम पर लाइव परफॉर्म किया। इस सांस्कृतिक और खेल महोत्सव को दुनिया के कोने-कोने में प्रसारित किया जा रहा है। भारतीय उपमहाद्वीप में भी खेल प्रेमियों के लिए व्यापक प्रसारण व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि वे अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में इस वैश्विक उत्सव का सीधा आनंद उठा सकें। इसके अतिरिक्त खेल के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए कुछ विशेष और महत्वपूर्ण नॉकआउट मुकाबलों के मुफ्त प्रसारण की भी व्यवस्था की गई है।इस बार का विश्व कप न केवल टीमों और मैचों की संख्या के लिहाज से बड़ा है, बल्कि इसकी वित्तीय संरचना भी ऐतिहासिक है। शासी निकाय ने इस टूर्नामेंट के लिए कुल प्रदर्शन-आधारित पुरस्कार राशि को बढ़ाकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। टूर्नामेंट की विजेता टीम को मिलने वाली इनामी राशि अन्य वैश्विक खेल प्रतियोगिताओं की तुलना में कई गुना अधिक है। इस वित्तीय प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतियोगिता में अंतिम पायदान पर रहने वाली टीम को भी एक बड़ी धनराशि सहायता और भागीदारी शुल्क के रूप में मिलेगी, जो कई अन्य खेलों के कुल बजट से भी अधिक है। यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि वैश्विक खेल बाजार में फुटबॉल का आर्थिक साम्राज्य कितना मजबूत है।अगर इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो पिछले 96 वर्षों के सफर में इस चमचमाती सुनहरी ट्रॉफी पर केवल आठ देशों का ही कब्जा रहा है। ब्राजील, जर्मनी, इटली और अर्जेंटीना जैसे दिग्गजों ने इस खेल पर हमेशा अपना वर्चस्व बनाए रखा है। इस बार भी मुख्य मुकाबला इन्हीं पारंपरिक महाशक्तियों के बीच माना जा रहा है, लेकिन टूर्नामेंट के बढ़े हुए प्रारूप ने छोटे और उभरते हुए देशों के लिए भी बड़े उलटफेर करने के रास्ते खोल दिए हैं। मध्य प्रदेश सहित भारत के तमाम राज्यों के फुटबॉल जानकारों का मानना है कि इस बार ग्रुप स्टेज में कड़े मुकाबले देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि हर टीम इस ऐतिहासिक मंच पर खुद को साबित करने के लिए पूरी जान लगा देगी।इस पूरे टूर्नामेंट में दुनिया भर की खेल प्रेमी जनता की नजरें विशेष रूप से डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना और उनके करिश्माई कप्तान लियोनेल मेसी पर टिकी हुई हैं। आधुनिक फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार मेसी के करियर का यह आखिरी विश्व कप माना जा रहा है, जिससे इस अभियान की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। अर्जेंटीना के सामने अपनी बादशाहत को बरकरार रखने की बहुत बड़ी चुनौती होगी क्योंकि फ्रांस, ब्राजील और पुर्तगाल जैसी मजबूत टीमें उन्हें कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अगले कुछ हफ्तों तक चलने वाला यह खेल उत्सव यह तय करेगा कि दुनिया को कोई नया चैंपियन मिलता है या फिर पुराने दिग्गजों का ही दबदबा कायम रहता है।

सनातन धर्म क्यों कहलाता है शाश्वत? जानिए जीवन, कर्म और पुनर्जन्म से जुड़े इसके मूल सिद्धांत

नई दिल्ली । सनातन धर्म को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की आधारशिला माना जाता है। हजारों वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का मार्गदर्शन कर रही है। सनातन शब्द का अर्थ ही है – जो सदैव बना रहे, जिसका न आदि हो और न अंत। यही कारण है कि सनातन धर्म को शाश्वत धर्म भी कहा जाता है। महामंडलेश्वर स्वामी आदित्य कृष्ण गिरि महाराज के अनुसार सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के संपूर्ण जीवन को दिशा देने वाला दर्शन है। उनके अनुसार यह धर्म जीवन के उन मूल प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास करता है, जिनके बारे में प्रत्येक व्यक्ति कभी न कभी विचार करता है। जैसे मनुष्य इस संसार में क्यों आया है, उसके जीवन का उद्देश्य क्या है, उसे अपने कर्म कैसे करने चाहिए और जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग क्या है। सनातन परंपरा में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को मानव जीवन के चार प्रमुख पुरुषार्थ माना गया है। इन सिद्धांतों के माध्यम से व्यक्ति को संतुलित और मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा दी जाती है। यही वजह है कि सनातन धर्म को केवल एक धार्मिक व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी माना जाता है। सनातन धर्म की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी उत्सव परंपरा भी है। वर्षभर में मनाए जाने वाले विभिन्न पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक समरसता, प्रकृति के प्रति सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति के अवसर भी प्रदान करते हैं। भारतीय संस्कृति में उत्सवों को जीवन में सकारात्मकता, ऊर्जा और सामूहिकता का प्रतीक माना गया है। पुनर्जन्म की अवधारणा भी सनातन दर्शन का एक महत्वपूर्ण अंग है। हिंदू धार्मिक ग्रंथों में कर्म और पुनर्जन्म के सिद्धांत का विस्तार से उल्लेख मिलता है। इस मान्यता के अनुसार व्यक्ति के कर्म उसके भविष्य को प्रभावित करते हैं और आत्मा जन्म-मृत्यु के चक्र से गुजरती है। मोक्ष को इस चक्र से मुक्ति की अंतिम अवस्था माना गया है। स्वामी आदित्य कृष्ण गिरि महाराज का कहना है कि सनातन धर्म प्रकृति के शाश्वत नियमों और जीवन के निरंतर परिवर्तन को स्वीकार करता है। ऋतुओं का बदलना, जीवन और मृत्यु का चक्र तथा सृष्टि के निरंतर परिवर्तन को यह धर्म प्राकृतिक सत्य के रूप में देखता है। इसी कारण यह परंपरा समय के साथ स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखने में सक्षम रही है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता और समावेशी दृष्टिकोण है। यह विभिन्न विचारधाराओं, आध्यात्मिक मार्गों और उपासना पद्धतियों को स्थान देता है। यही कारण है कि हजारों वर्षों के इतिहास के बाद भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है और यह आज भी करोड़ों लोगों को जीवन के मूल्यों, कर्तव्यों और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखा रहा है। सनातन धर्म का मूल संदेश यही है कि मनुष्य अपने कर्मों, नैतिक मूल्यों और आत्मिक विकास के माध्यम से जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है। यही विचार इसे एक शाश्वत और निरंतर प्रवाहित होने वाली परंपरा के रूप में स्थापित करते हैं।

हिंदू कुश हिमालय पर मंडरा रहा जलवायु संकट, कम बारिश से बढ़ सकता है बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर झील फटने का खतरा

नई दिल्ली । मानसून के आगमन के साथ देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है, लेकिन इसी बीच हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों द्वारा जारी ताजा आकलन के अनुसार इस वर्ष मानसून के दौरान इस संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। इसके साथ ही तापमान भी औसत से अधिक रह सकता है, जिससे जलवायु संबंधी कई गंभीर चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ एटमॉस्फेरिक फिजिक्स द्वारा जारी HKH मॉनसून आउटलुक 2026 में संकेत दिए गए हैं कि कम बारिश और बढ़ते तापमान का संयुक्त प्रभाव इस क्षेत्र में सूखे, भूस्खलन, अचानक बाढ़ और ग्लेशियर झील फटने जैसी घटनाओं के खतरे को बढ़ा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार अल नीनो जैसी मौसमीय परिस्थितियां मानसून को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे वर्षा का वितरण असंतुलित हो सकता है। हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र लगभग 3,500 किलोमीटर तक फैला हुआ है और अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, चीन तथा म्यांमार जैसे देशों को जोड़ता है। यह क्षेत्र केवल पर्वतों और ग्लेशियरों के लिए ही नहीं, बल्कि एशिया की कई महत्वपूर्ण नदी प्रणालियों का उद्गम स्थल होने के कारण भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, यांग्त्जी, मेकांग, इरावदी और अमू दरिया जैसी नदियां इसी क्षेत्र से जुड़ी हैं, जिन पर करोड़ों लोगों की जल, कृषि और आजीविका संबंधी जरूरतें निर्भर करती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले शीतकाल में बर्फ का टिकाव सामान्य से कम रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका अर्थ है कि क्षेत्र मानसून में अपेक्षाकृत कम जल भंडार के साथ प्रवेश कर रहा है। ऐसी स्थिति में स्थानीय समुदायों को वर्षा, भूजल और प्राकृतिक जल स्रोतों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। यदि बारिश उम्मीद से कम होती है, तो जल उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि कम वर्षा का मतलब यह नहीं है कि प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कम हो जाएगा। कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की घटनाएं भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकती हैं। अचानक आने वाली बाढ़, पहाड़ी ढलानों का खिसकना और ग्लेशियर झीलों का फटना ऐसे खतरे हैं जो कम बारिश वाले मौसम में भी सामने आ सकते हैं। रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन को भी एक प्रमुख कारण बताया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार बदलते मौसम पैटर्न के कारण हिमालयी क्षेत्र पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील हो गया है। तापमान में वृद्धि और वर्षा की अनिश्चितता भविष्य में इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी, जल संसाधनों और स्थानीय आबादी पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन और नीति निर्माताओं को इन चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण और जलवायु अनुकूलन की रणनीतियों को मजबूत करना होगा। क्योंकि हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में होने वाले बदलाव केवल पर्वतीय इलाकों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका असर पूरे दक्षिण एशिया और उससे जुड़े करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है।

Gwalior Development Project: ग्वालियर को विकास कार्यों की सौगात, ऊर्जा मंत्री आज करेंगे 3.92 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का भूमिपूजन

energy minister Pradyuman singh tomar

Gwalior Development Project: ग्वालियर। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर आज गुरुवार को ग्वालियर में लगभग 3 करोड़ 92 लाख रुपए की लागत से होने वाले विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इन कार्यों में सीवर लाइन, सड़क निर्माण, नाली निर्माण, पार्कों के उन्नयन और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। 30 साल बाद फिर साथ दिखे अक्षय, सुनील और रवीना, ‘वेलकम टू द जंगल’ ने ताजा कर दी ‘मोहरा’ की यादें शाम 5 बजे कार्यक्रम में शामिल होंगे ऊर्जा मंत्री शाम 5 बजे वार्ड क्रमांक-32 के गांधी नगर पार्क में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वे करीब 1.98 करोड़ रुपए की लागत से नई सीवर लाइन के संधारण कार्य की आधारशिला रखेंगे। इसके अलावा क्षेत्र की सड़कों और गलियों के डामरीकरण, नाली निर्माण, पार्कों में नए उपकरण लगाने तथा सार्वजनिक सुलभ कॉम्प्लेक्स के मरम्मत कार्यों का भी भूमिपूजन करेंगे। कैसे बने ‘कल्याण कुमार’ से ‘पवन कल्याण’? आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम ने सुनाया दिलचस्प किस्सा माता मंदिर में करेंगे रात्रि विश्राम इसके बाद शाम 6 बजे वे बहोड़ापुर क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-3 स्थित शहीद सरमन सिंह पार्क पहुंचेंगे, जहां 23.60 लाख रुपए की लागत से पार्क के सौंदर्यीकरण कार्य का शुभारंभ करेंगे। दिनभर के कार्यक्रमों के बाद ऊर्जा मंत्री आनंद नगर स्थित माता मंदिर में रात्रि विश्राम करेंगे। वहीं शुक्रवार सुबह मंदिर परिसर में आयोजित स्वच्छता और वृक्षारोपण कार्यक्रम में शामिल होकर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश देंगे।

फीफा विश्व कप 2026: गोल्डन बॉल की जंग में मेसी, एमबाप्पे और यमाल आमने-सामने, कौन बनेगा टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी?

नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 का आगाज होते ही दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की निगाहें सिर्फ ट्रॉफी पर ही नहीं, बल्कि टूर्नामेंट के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तिगत सम्मान ‘गोल्डन बॉल’ पर भी टिक गई हैं। यह पुरस्कार विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को दिया जाता है और इसके लिए हर बार दुनिया के सबसे बड़े सितारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। इस बार भी अनुभवी दिग्गजों और युवा प्रतिभाओं के बीच रोमांचक मुकाबले की उम्मीद की जा रही है। गोल्डन बॉल के प्रमुख दावेदारों में सबसे चर्चित नाम अर्जेंटीना के कप्तान लियोनल मेसी का है। 39 वर्षीय मेसी पहले ही दो बार यह सम्मान जीतकर इतिहास रच चुके हैं। 2022 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर अर्जेंटीना को चैंपियन बनाने वाले मेसी अब अपने करियर के अंतिम विश्व कप में एक और यादगार उपलब्धि हासिल करने की कोशिश करेंगे। क्लब फुटबॉल में भी उनकी फॉर्म प्रभावशाली रही है, जिससे उनके समर्थकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। स्पेन के युवा स्टार लामिन यमाल को इस विश्व कप का सबसे बड़ा उभरता चेहरा माना जा रहा है। महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। तेज रफ्तार, बेहतरीन ड्रिब्लिंग और आक्रमण में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता उन्हें गोल्डन बॉल की दौड़ में मजबूत दावेदार बनाती है। यदि स्पेन टूर्नामेंट में गहरी छाप छोड़ता है, तो यमाल इतिहास रच सकते हैं। फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे भी इस सूची में बेहद मजबूत दावेदार हैं। 2022 विश्व कप फाइनल में हैट्रिक लगाने वाले एमबाप्पे पहले ही विश्व कप इतिहास के सबसे खतरनाक गोल स्कोररों में गिने जाने लगे हैं। उनकी गति, तकनीक और बड़े मुकाबलों में प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें हर टूर्नामेंट में खास बनाती है। इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन भी बेहतरीन फॉर्म में विश्व कप में उतर रहे हैं। क्लब स्तर पर लगातार गोल करने वाले केन के कंधों पर इंग्लैंड को लंबे समय बाद विश्व चैंपियन बनाने की जिम्मेदारी होगी। यदि इंग्लैंड खिताब जीतने में सफल रहता है तो केन का नाम गोल्डन बॉल की दौड़ में सबसे आगे दिखाई दे सकता है। ब्राजील के स्टार विंगर विनीसियस जूनियर से भी काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। क्लब फुटबॉल में शानदार प्रदर्शन के बावजूद वह अभी तक विश्व मंच पर अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा सके हैं। हालांकि नए माहौल और अनुभवी मार्गदर्शन में वह ब्राजील के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। वहीं, पुर्तगाल के महान फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 41 वर्ष की उम्र में अपने छठे विश्व कप में हिस्सा लेने जा रहे रोनाल्डो के पास इतिहास रचने का अवसर है। यदि वह पुर्तगाल को पहली बार विश्व कप खिताब दिलाने में सफल रहते हैं, तो यह फुटबॉल इतिहास की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक होगी। इन छह बड़े नामों के अलावा एरलिंग हालंद, केविन डी ब्रुइन, जमाल मुसियाला, फ्लोरियन विर्ट्ज, लुइस डियाज और माइकल ओलिसे जैसे खिलाड़ी भी अपने प्रदर्शन से गोल्डन बॉल की दौड़ को रोमांचक बना सकते हैं। कुल मिलाकर विश्व कप 2026 में न केवल खिताब की लड़ाई दिलचस्प होगी, बल्कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने की प्रतिस्पर्धा भी प्रशंसकों को रोमांचित करेगी।