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ब्लंडेल और फिलिप्स ने संभाली न्यूजीलैंड की पारी, दूसरे टेस्ट के पहले दिन 291/7 का मजबूत स्कोर

नई दिल्ली । न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच केनिंग्टन ओवल में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन का खेल रोमांच और उतार-चढ़ाव से भरपूर रहा। शुरुआती झटकों के बावजूद न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी करते हुए दिन का खेल समाप्त होने तक 7 विकेट के नुकसान पर 291 रन बना लिए। टॉम ब्लंडेल और ग्लेन फिलिप्स की जिम्मेदार पारियों ने टीम को संकट से निकालकर सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया और शुरुआत में उसका यह निर्णय सही साबित होता नजर आया। न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉनवे मात्र 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद कप्तान टॉम लाथम ने कुछ अच्छे शॉट जरूर लगाए, लेकिन वह बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके और 27 रन बनाकर आउट हो गए। हेनरी निकोल्स ने भी शुरुआत तो की, लेकिन 24 रन के निजी स्कोर पर उनकी पारी समाप्त हो गई। युवा बल्लेबाज रचिन रविंद्र से टीम को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन वह भी 33 रन बनाकर आउट हो गए। 107 रन के स्कोर तक न्यूजीलैंड अपने चार प्रमुख बल्लेबाजों के विकेट गंवा चुका था और टीम दबाव में दिखाई दे रही थी। ऐसे समय में अनुभवी बल्लेबाज टॉम ब्लंडेल ने मोर्चा संभाला और डेरिल मिचेल के साथ मिलकर पारी को स्थिरता प्रदान की। ब्लंडेल और मिचेल ने पांचवें विकेट के लिए 81 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की, जिससे न्यूजीलैंड की पारी फिर से पटरी पर लौट आई। मिचेल 44 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन ब्लंडेल ने अपना संघर्ष जारी रखा। उन्होंने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण दिखाते हुए 84 गेंदों में 51 रन बनाए। उनकी पारी में छह आकर्षक चौके शामिल रहे। ब्लंडेल के आउट होने के बाद ग्लेन फिलिप्स ने जिम्मेदारी संभाली और शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। फिलिप्स ने तेज गति से रन बनाते हुए इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। दिन का खेल समाप्त होने तक वह 74 गेंदों में 49 रन बनाकर नाबाद लौटे। अपनी पारी में उन्होंने नौ चौके लगाए और दूसरे दिन अर्धशतक पूरा करने के करीब पहुंच गए। उनके साथ काइल जेमिसन 6 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। इंग्लैंड की गेंदबाजी की बात करें तो युवा गेंदबाज सन्नी बेकर और जैकब बेथेल ने सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन किया। दोनों ने दो-दो विकेट हासिल किए। जोफ्रा आर्चर, मैथ्यू फिशर और जोश टंग को एक-एक सफलता मिली। हालांकि दिन के अंतिम सत्र में इंग्लिश गेंदबाज न्यूजीलैंड के निचले क्रम को पूरी तरह दबाव में नहीं ला सके। इस मैच में इंग्लैंड की टीम कई बदलावों के साथ मैदान पर उतरी है। नियमित कप्तान बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे, जिसके चलते जो रूट टीम की कप्तानी कर रहे हैं। वहीं चोटिल ओली रोबिन्सन की जगह जोफ्रा आर्चर को अंतिम एकादश में शामिल किया गया है।

पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे को WhatsApp जालसाजों ने बनाया निशाना, 7.8 करोड़ की साइबर ठगी से मचा हड़कंप

नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में सामने आए एक बड़े साइबर फ्रॉड ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन पहचान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल के पुत्र और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश कुमार गुजराल साइबर ठगी का शिकार हो गए। जालसाजों ने बेहद सुनियोजित तरीके से उनकी पहचान का इस्तेमाल करते हुए करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। इस मामले में करीब 7.8 करोड़ रुपये की रकम ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई, जिसके बाद पुलिस और साइबर एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने नरेश गुजराल की तस्वीर का उपयोग कर व्हाट्सऐप पर एक फर्जी प्रोफाइल तैयार की। इसके बाद ठगों ने उनके स्टाफ के एक सदस्य से संपर्क किया और खुद को नरेश गुजराल बताकर बातचीत शुरू की। संदेशों के माध्यम से यह विश्वास दिलाया गया कि वह किसी महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त हैं और तत्काल एक वित्तीय लेनदेन कराना आवश्यक है। इसी बहाने स्टाफ को एक निर्धारित बैंक खाते में आरटीजीएस के जरिए बड़ी राशि ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। ठगों की योजना इतनी सुनियोजित थी कि शुरुआती स्तर पर किसी को संदेह नहीं हुआ। व्हाट्सऐप प्रोफाइल पर नरेश गुजराल की तस्वीर लगी होने और संवाद की शैली विश्वसनीय लगने के कारण संबंधित कर्मचारी निर्देशों का पालन करता रहा। हालांकि बाद में लेनदेन की प्रकृति और रकम को लेकर संदेह पैदा हुआ, जिसके बाद मामले ने नया मोड़ लिया। घटना का खुलासा तब हुआ जब संबंधित कर्मचारी ने पूरे मामले की जानकारी नरेश गुजराल की बेटी दीक्षा गुजराल को दी। उन्हें लेनदेन में कुछ असामान्य लगा और उन्होंने तत्काल अपने पिता से संपर्क कर भुगतान संबंधी निर्देशों की पुष्टि की। बातचीत के दौरान स्पष्ट हो गया कि नरेश गुजराल ने ऐसा कोई संदेश या आदेश जारी नहीं किया था। इसके बाद परिवार को एहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत मिलते ही साइबर विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों ने मनी ट्रेल की जांच शुरू कर दी। बैंक खातों और लेनदेन के रिकॉर्ड को खंगालते हुए अधिकारियों ने तेजी से कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप ठगी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा समय रहते फ्रीज कराया जा सका। शुरुआती कार्रवाई में लगभग चार करोड़ रुपये को सुरक्षित कर लिया गया, जिससे संभावित नुकसान को काफी हद तक सीमित करने में मदद मिली। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि ठगों ने व्यक्तिगत जानकारी और संपर्क विवरण कैसे प्राप्त किए। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस धोखाधड़ी के पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह सक्रिय है या नहीं। जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और संचार माध्यमों का विश्लेषण कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। यह घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि आज के समय में केवल फोटो और नाम का इस्तेमाल कर किसी की पहचान का दुरुपयोग किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वित्तीय निर्देश को केवल मैसेज के आधार पर स्वीकार करने के बजाय स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है। विशेष रूप से बड़ी रकम के लेनदेन से पहले फोन कॉल या प्रत्यक्ष पुष्टि जैसी प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक हो गया है। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच यह प्रकरण आम लोगों और संस्थानों दोनों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सतर्कता, पहचान की पुष्टि और त्वरित शिकायत ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मानी जा रही है।

हैरी केन ने रचा इतिहास, वर्ल्ड कप में गैरी लिनेकर के रिकॉर्ड की बराबरी कर बने इंग्लैंड के संयुक्त शीर्ष स्कोरर

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के अपने पहले ही मुकाबले में इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह दुनिया के सबसे भरोसेमंद स्ट्राइकरों में क्यों गिने जाते हैं। क्रोएशिया के खिलाफ खेले गए मुकाबले में केन ने दो शानदार गोल दागकर न केवल अपनी टीम को 4-2 की महत्वपूर्ण जीत दिलाई, बल्कि इंग्लैंड फुटबॉल इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय भी जोड़ दिया। इन दो गोलों के साथ केन ने विश्व कप इतिहास में इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा गोल करने के गैरी लिनेकर के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। मैच से पहले हैरी केन को इस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए दो गोलों की जरूरत थी और उन्होंने यह काम पहले हाफ में ही पूरा कर दिया। केन ने 12वें मिनट में पेनल्टी के जरिए अपना पहला गोल दागा और टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। इस गोल के साथ उन्होंने एक और खास रिकॉर्ड अपने नाम किया। वह फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में शूटआउट को छोड़कर पांच पेनल्टी गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इसके बाद हाफ टाइम से ठीक पहले उन्होंने अपना दूसरा गोल दागकर इंग्लैंड की स्थिति मजबूत कर दी और गैरी लिनेकर के 10 विश्व कप गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। हैरी केन का विश्व कप सफर 2018 में शुरू हुआ था और तब से वह लगातार बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ते आए हैं। रूस में खेले गए 2018 विश्व कप में उन्होंने छह गोल दागकर गोल्डन बूट अपने नाम किया था। उस टूर्नामेंट में इंग्लैंड सेमीफाइनल तक पहुंचा था और केन टीम के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे थे। इसके बाद कतर में आयोजित 2022 विश्व कप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और दो महत्वपूर्ण गोल किए। अब 2026 विश्व कप में उन्होंने अपने गोलों की संख्या 10 तक पहुंचाकर इतिहास रच दिया है। इंग्लैंड के लिए केन का योगदान केवल विश्व कप तक सीमित नहीं है। वह राष्ट्रीय टीम के सर्वकालिक शीर्ष गोल स्कोरर भी हैं और पिछले कई वर्षों से टीम की सफलता के प्रमुख स्तंभ रहे हैं। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने यूरो 2020 और यूरो 2024 के फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि टीम खिताब जीतने में सफल नहीं हो सकी, लेकिन केन के नेतृत्व और प्रदर्शन की हर स्तर पर सराहना हुई। क्रोएशिया के खिलाफ मुकाबले में इंग्लैंड ने आक्रामक फुटबॉल का शानदार प्रदर्शन किया। केन के दो गोलों के अलावा जूड बेलिंगहैम और मार्कस रैशफोर्ड ने भी एक-एक गोल दागा। इंग्लैंड की यह जीत न केवल टूर्नामेंट में आत्मविश्वास बढ़ाने वाली रही, बल्कि इसने यह भी संकेत दिया कि टीम खिताब की मजबूत दावेदारों में शामिल है। अब सभी की निगाहें हैरी केन पर टिकी हैं, क्योंकि अगले गोल के साथ वह गैरी लिनेकर को पीछे छोड़कर फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में इंग्लैंड के सबसे सफल गोल स्कोरर बन जाएंगे। जिस फॉर्म में केन नजर आ रहे हैं, उसे देखते हुए यह रिकॉर्ड टूटना सिर्फ समय की बात लग रही है।

बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, ऋतब्रत बनर्जी को मिली राहत; ममता खेमे को झटका

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर चल रहे विवाद के बीच कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दिए जाने के निर्णय पर अंतरिम रोक लगाने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। इस आदेश के साथ ही यह साफ हो गया है कि फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी ही पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। यह मामला उस समय अदालत पहुंचा था जब विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया में मूल राजनीतिक दल की अनुशंसा और संगठनात्मक स्थिति को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। इसी आधार पर अदालत से मांग की गई थी कि अंतिम निर्णय आने तक इस नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने उपलब्ध तथ्यों और कानूनी पक्षों पर विचार करने के बाद अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि वर्तमान परिस्थितियों में नियुक्ति पर रोक लगाने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। इसके परिणामस्वरूप विधानसभा अध्यक्ष का पूर्व निर्णय प्रभावी बना रहेगा। अदालत के आदेश से ऋतब्रत बनर्जी को बड़ी राहत मिली है। अब वे अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक विपक्ष के नेता के रूप में सदन के भीतर अपनी भूमिका जारी रख सकेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला विधानसभा की शक्ति संरचना और विपक्ष की रणनीति दोनों पर प्रभाव डाल सकता है। साथ ही यह राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में नए समीकरण भी पैदा कर सकता है। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए दोनों पक्षों को विस्तृत हलफनामे और लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि अगली सुनवाई से पहले सभी संबंधित पक्ष अपने तर्क, दस्तावेज और कानूनी आधार रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें। इसके बाद मामले के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी और अंतिम निर्णय की दिशा तय होगी। इस फैसले के बाद विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र और उनके प्रशासनिक निर्णय को भी फिलहाल कानूनी संरक्षण मिला है। अदालत के रुख से यह संकेत मिला है कि संवैधानिक पदों से जुड़े मामलों में न्यायालय बिना विस्तृत सुनवाई के हस्तक्षेप करने से बचना चाहता है। यही कारण है कि अदालत ने अंतिम निर्णय से पहले यथास्थिति बनाए रखने को प्राथमिकता दी है। राजनीतिक दृष्टि से यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य की सत्तारूढ़ राजनीति और विपक्षी खेमे के बीच पहले से जारी टकराव के बीच यह मामला केवल एक पद की नियुक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियां, दलगत अधिकार, संसदीय परंपराएं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे कई संवैधानिक प्रश्न भी शामिल हो गए हैं। फिलहाल सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां दोनों पक्ष अपने विस्तृत कानूनी तर्क अदालत के सामने रखेंगे। तब तक ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में कार्य करते रहेंगे और विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय पूरी तरह लागू माना जाएगा।

जूड बेलिंगहैम ने रचा इतिहास, चार बड़े इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय फुटबॉलर बने

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पहले ही मुकाबले में इंग्लैंड के युवा स्टार जूड बेलिंगहैम ने ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया, जिसने उन्हें यूरोपीय फुटबॉल के सबसे खास खिलाड़ियों की सूची में शामिल कर दिया है। इंग्लैंड ने ग्रुप एल के अपने पहले मैच में क्रोएशिया को 4-2 से हराकर टूर्नामेंट का शानदार आगाज किया, लेकिन इस जीत के साथ सबसे ज्यादा चर्चा बेलिंगहैम की ऐतिहासिक उपलब्धि की रही। 22 वर्षीय जूड बेलिंगहैम अब चार बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने अब तक दो फीफा वर्ल्ड कप और दो यूईएफए यूरो चैंपियनशिप में हिस्सा लिया है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने जर्मनी के प्रतिभाशाली खिलाड़ी जमाल मुसियाला का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। बेलिंगहैम की यह उपलब्धि उनकी निरंतरता, प्रतिभा और कम उम्र में हासिल की गई सफलता का शानदार उदाहरण मानी जा रही है। क्रोएशिया के खिलाफ मुकाबले में बेलिंगहैम ने न सिर्फ रिकॉर्ड बनाया बल्कि मैदान पर भी अपनी उपयोगिता साबित की। उन्होंने एक शानदार गोल दागा और मिडफील्ड में टीम के खेल को नियंत्रित करते हुए इंग्लैंड की जीत में अहम भूमिका निभाई। कप्तान हैरी केन के दो गोलों के अलावा बेलिंगहैम और मार्कस रैशफोर्ड के गोलों ने इंग्लैंड को 4-2 की मजबूत जीत दिलाई। बेलिंगहैम का अंतरराष्ट्रीय सफर बेहद कम उम्र में शुरू हुआ था। उन्होंने मात्र 17 साल और 136 दिन की उम्र में इंग्लैंड की सीनियर टीम के लिए डेब्यू किया था। इंग्लैंड के इतिहास में उनसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले सिर्फ दो खिलाड़ी—वेन रूनी और थियो वालकॉट—रहे हैं। इसके बाद उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन से खुद को टीम का अहम हिस्सा बना लिया। उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट यूरो 2020 था, जहां उन्होंने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद उन्होंने फीफा वर्ल्ड कप 2022, यूरो 2024 और अब फीफा वर्ल्ड कप 2026 में हिस्सा लेकर यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किया। इतनी कम उम्र में चार बड़े टूर्नामेंट खेलने की उपलब्धि इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में वह इंग्लैंड फुटबॉल के सबसे बड़े चेहरों में से एक बन सकते हैं। मैच के बाद बेलिंगहैम ने कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है और हर बार इंग्लैंड की जर्सी पहनते समय वह अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है और वह मैदान पर उतरते ही पूरी ऊर्जा के साथ खेलते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह सीजन काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन बड़े मैचों में टीम के लिए योगदान देना हमेशा उनकी प्राथमिकता रही है। चार बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय खिलाड़ियों की सूची में अब जूड बेलिंगहैम शीर्ष पर पहुंच गए हैं। उनके बाद जमाल मुसियाला, पेड्री, जेरेमी डोकू, माइकल ओवेन और लुकास पोडोल्स्की का नाम आता है। यह उपलब्धि न केवल बेलिंगहैम के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि इंग्लैंड फुटबॉल के उज्ज्वल भविष्य का भी संकेत देती है।

मॉस्को पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन प्रहार, तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना; जेलेंस्की बोले- यह जवाबी कार्रवाई है

नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां दोनों पक्ष सीधे एक-दूसरे की रणनीतिक और आर्थिक क्षमताओं को नुकसान पहुंचाने में जुटे दिखाई दे रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में यूक्रेन ने मॉस्को क्षेत्र पर व्यापक ड्रोन हमला कर रूस की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। इस कार्रवाई के बाद रूस की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है, जबकि कई हवाई अड्डों पर उड़ानों के संचालन को अस्थायी रूप से प्रभावित करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेन द्वारा किए गए इस हमले का मुख्य लक्ष्य एक महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी और ऊर्जा ढांचे से जुड़े ठिकाने थे। हमले के बाद रिफाइनरी क्षेत्र से उठते धुएं और आग की तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने इस कार्रवाई की गंभीरता को उजागर किया। ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाए जाने को युद्ध की बदलती रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहां सैन्य ठिकानों के साथ-साथ आर्थिक और औद्योगिक ढांचे भी संघर्ष का केंद्र बनते जा रहे हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले के बाद जारी बयान में कहा कि यह कार्रवाई रूस द्वारा यूक्रेनी शहरों और नागरिक क्षेत्रों पर लगातार किए जा रहे हमलों का जवाब है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन उन संसाधनों और संरचनाओं को निशाना बना रहा है जो युद्ध संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके अनुसार यह रणनीति रूस की सैन्य क्षमता और आपूर्ति तंत्र को कमजोर करने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है। दूसरी ओर रूस ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने बड़ी संख्या में ड्रोन को मार गिराया और संभावित नुकसान को सीमित करने में सफलता हासिल की। हालांकि राजधानी क्षेत्र तक ड्रोन पहुंचने की घटनाओं ने रूस की सुरक्षा तैयारियों और हवाई रक्षा तंत्र को लेकर नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी के आसपास बार-बार हो रहे ड्रोन हमले इस संघर्ष के नए स्वरूप को दर्शाते हैं। युद्ध के मौजूदा चरण में ऊर्जा अवसंरचना विशेष रूप से निशाने पर है। तेल रिफाइनरी, ईंधन भंडारण केंद्र, बिजली संयंत्र और परिवहन नेटवर्क दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं। इन पर हमले का उद्देश्य केवल तत्काल नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि विरोधी पक्ष की आपूर्ति श्रृंखला, सैन्य लॉजिस्टिक्स और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना भी होता है। यही कारण है कि हाल के महीनों में इस प्रकार के हमलों में तेजी देखी गई है। जेलेंस्की ने यह भी संकेत दिया कि यूक्रेनी बलों ने रूस के अन्य क्षेत्रों और कब्जे वाले इलाकों में स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया है। इससे स्पष्ट है कि यूक्रेन अब युद्ध को केवल अपनी सीमाओं तक सीमित रखने के बजाय रूस के भीतर मौजूद रणनीतिक परिसंपत्तियों तक पहुंचाने की क्षमता प्रदर्शित कर रहा है। यह घटनाक्रम संघर्ष की तीव्रता को और बढ़ा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच चल रहा यह संघर्ष फिलहाल समाप्ति की ओर जाता नहीं दिख रहा है। इसके विपरीत, ऊर्जा ढांचे और महत्वपूर्ण आर्थिक परिसंपत्तियों पर बढ़ते हमले संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में युद्ध और अधिक जटिल तथा व्यापक रूप ले सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल मॉस्को सहित रूस के कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है। वहीं यूक्रेन ने संकेत दिया है कि वह अपने खिलाफ हो रहे हमलों का जवाब देने की रणनीति जारी रखेगा। ऐसे में युद्ध का अगला चरण दोनों देशों के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

भारत ने वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी को 3-1 से रौंदा, एफआईएच प्रो लीग में दिखाया दम

नई दिल्ली । एफआईएच हॉकी प्रो लीग 2025-26 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एक बार फिर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन करते हुए मौजूदा विश्व चैंपियन जर्मनी को 3-1 से शिकस्त दे दी। रॉटरडैम में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने शुरुआत से ही आक्रामक और संतुलित खेल दिखाया तथा जर्मनी को पूरे मैच में दबाव में बनाए रखा। इस जीत ने न केवल भारतीय टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि टीम बड़े मुकाबलों में किसी भी दिग्गज को चुनौती देने की क्षमता रखती है। मैच की शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और जर्मन टीम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। इसका फायदा भारत को सातवें मिनट में मिला, जब मनदीप सिंह ने शानदार मूव बनाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास और बढ़ गया। पहले क्वार्टर के अंतिम क्षणों में शिलानंद लाकड़ा ने बेहतरीन स्ट्राइक लगाकर भारत की बढ़त को दोगुना कर दिया। 13वें मिनट में आए इस गोल ने जर्मनी को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया और स्कोर 2-0 हो गया। दूसरे क्वार्टर में जर्मनी ने वापसी की कोशिश की और भारतीय हाफ में लगातार हमले किए। हालांकि भारतीय डिफेंस चट्टान की तरह मजबूती से खड़ा रहा। जर्मनी को मिले पेनल्टी कॉर्नर भी भारतीय रक्षा पंक्ति और गोलकीपर मोहित की सतर्कता के सामने बेअसर साबित हुए। अमित रोहिदास ने भी महत्वपूर्ण मौके पर शानदार ब्लॉक लगाकर टीम को बढ़त बनाए रखने में मदद की। पहले हाफ के अंत तक भारत 2-0 से आगे रहा। तीसरे क्वार्टर में भारत ने अपनी आक्रामक रणनीति जारी रखी। 35वें मिनट में नीलकांत शर्मा ने शानदार व्यक्तिगत कौशल का प्रदर्शन करते हुए कई जर्मन डिफेंडरों को छकाया और शानदार गोल दागकर भारत को 3-0 की मजबूत बढ़त दिला दी। यह गोल मैच का सबसे आकर्षक क्षणों में से एक रहा। हालांकि तीसरे क्वार्टर के अंत में जर्मनी के राफेल हार्टकोफ ने गोल कर अंतर कम करने की कोशिश की, लेकिन तब तक भारत मैच पर पूरी तरह पकड़ बना चुका था। अंतिम क्वार्टर में जर्मनी ने वापसी के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने अनुशासित और संयमित खेल दिखाया। काउंटर-प्रेसिंग और विंग्स से तेज हमलों के जरिए भारत ने जर्मनी को दबाव में रखा। मैच के अंतिम मिनटों में जर्मनी को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उसे भी नाकाम कर दिया और 3-1 की यादगार जीत अपने नाम कर ली। इस मुकाबले का एक और ऐतिहासिक पहलू रहा। अनुभवी खिलाड़ी मनप्रीत सिंह ने अपना 413वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते हुए दिलीप टिर्की का 412 मैचों का रिकॉर्ड तोड़ दिया और भारत के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए। वहीं मिडफील्ड में शानदार प्रदर्शन करने वाले हार्दिक सिंह को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। भारत की यह जीत टीम की बढ़ती ताकत और आगामी बड़े टूर्नामेंटों के लिए उसके मजबूत इरादों का संकेत मानी जा रही है।

‘टीम इंडिया के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है’: डेब्यू सीरीज में चमके गुरनूर बरार, सफलता का बताया राज

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट को एक और उभरता हुआ तेज गेंदबाज मिल गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने अपने पहले दोनों वनडे मुकाबलों में तीन-तीन विकेट लेकर यह साबित कर दिया कि वह भविष्य में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा बन सकते हैं। लखनऊ में खेले गए मुकाबले के बाद गुरनूर बरार ने अपनी सफलता के पीछे घरेलू क्रिकेट और इंडिया ए टीम में मिले अनुभव को सबसे बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि इंडिया ए का मंच उनके लिए सीखने और खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुआ है। गुरनूर ने कहा कि जब उन्हें इंडिया ए टीम में चुना गया था, तब वह बेहद उत्साहित थे। उनके अनुसार, इंडिया ए में खेलते समय उन्होंने वही रणनीति अपनाई जो वह रणजी ट्रॉफी में इस्तेमाल करते थे। हार्ड लेंथ पर लगातार तेज गेंदबाजी करना और गेंद को स्विंग कराना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने बताया कि इंडिया ए में मिले अनुभव ने उन्हें यह विश्वास दिया कि वह बड़े स्तर पर भी उसी आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर सकते हैं। युवा तेज गेंदबाज ने कहा कि उन्होंने भारतीय टीम के लिए खेलते समय भी अपनी स्वाभाविक गेंदबाजी पर भरोसा रखा। उन्होंने किसी तरह का अतिरिक्त दबाव नहीं लिया और अपनी मजबूत पक्षों पर ध्यान केंद्रित किया। बरार का मानना है कि अभी भी उनके प्रदर्शन में और सुधार की काफी गुंजाइश है और आने वाले मैचों में वह और बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं। उन्होंने टीम प्रबंधन और गेंदबाजी कोच की भी जमकर तारीफ की। गुरनूर ने कहा कि उन्हें कोचिंग स्टाफ से पूरा समर्थन मिला है। टीम प्रबंधन ने उन्हें कोई नई तकनीक अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि उनकी मौजूदा क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए अपनी ताकत के अनुसार गेंदबाजी करने की सलाह दी। यही भरोसा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मददगार साबित हुआ। गुरनूर बरार ने कहा कि वह भगवान के आभारी हैं कि उन्हें भारतीय टीम के लिए खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और वह आने वाले वर्षों में टीम इंडिया के लिए बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य केवल टीम में जगह बनाना नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की सफलताओं में महत्वपूर्ण योगदान देना है। आईपीएल 2026 में गुरनूर बरार गुजरात टाइटंस का हिस्सा रहे। हालांकि उन्हें अधिक मैच खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन टीम के साथ बिताया गया समय उनके लिए बेहद मूल्यवान रहा। उन्होंने बताया कि गुजरात टाइटंस के ड्रेसिंग रूम में अनुभवी खिलाड़ियों और कोचों से बहुत कुछ सीखने को मिला। बरार ने कहा कि टीम में मुख्य कोच आशीष नेहरा के अलावा कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और इशांत शर्मा जैसे अनुभवी गेंदबाज मौजूद थे। उनके साथ समय बिताने और बातचीत करने से उन्हें गेंदबाजी के कई तकनीकी और मानसिक पहलुओं को समझने का मौका मिला। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार शुरुआत के बाद अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें गुरनूर बरार पर टिकी हैं। यदि वह इसी तरह निरंतर प्रदर्शन करते रहे, तो भारतीय तेज गेंदबाजी को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प मिल सकता है।

ईरानी स्कूल त्रासदी पर ट्रंप का बयान, 168 छात्राओं की मौत वाले मिसाइल हमले को बताया ‘अनजाने में हुई गलती’

नई दिल्ली । ईरान के मीनाब शहर में एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए विनाशकारी मिसाइल हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी बहस के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया बयान सामने आया है। इस हमले में 168 छात्राओं और कई शिक्षकों की मौत हुई थी, जिसके बाद पूरी दुनिया में गहरी चिंता और संवेदना व्यक्त की गई थी। अब इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह हमला जानबूझकर नहीं किया गया था और मामले की विस्तृत जांच अभी भी जारी है। फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युद्ध और सैन्य अभियानों के दौरान कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं जिन्हें जानबूझकर अंजाम नहीं दिया जाता। उनके अनुसार इस मामले में भी वास्तविक परिस्थितियों और जिम्मेदारियों का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी भी पक्ष पर निश्चित आरोप लगाना उचित नहीं होगा। प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने इस हमले के लिए जवाबदेही और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए, तो ट्रंप ने अपेक्षाकृत तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर जांच एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं और सभी तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रक्षा विभाग के पास इस मामले से जुड़ी अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध है और जांच प्रक्रिया वहीं से संचालित की जा रही है। गौरतलब है कि फरवरी महीने में मीनाब स्थित एक प्राथमिक विद्यालय पर मिसाइल गिरने से भारी तबाही मच गई थी। इस हमले में बड़ी संख्या में छात्राओं की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश की आयु छह से तेरह वर्ष के बीच बताई गई थी। इस घटना ने न केवल ईरान बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी झकझोर कर रख दिया था। बच्चों को निशाना बनाने या उनकी मौत का कारण बनने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई को लेकर वैश्विक स्तर पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। हमले के बाद विभिन्न देशों और मानवाधिकार संगठनों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि यदि किसी सैन्य कार्रवाई के कारण निर्दोष नागरिकों की जान गई है, तो उसके लिए जिम्मेदार परिस्थितियों और निर्णय प्रक्रिया की पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। इसी कारण यह मामला लगातार वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना से जुड़े प्रारंभिक आकलनों और विभिन्न रिपोर्टों ने इस हमले की प्रकृति को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। कुछ रिपोर्टों में सैन्य गतिविधियों और मिसाइल संचालन से जुड़े संभावित पहलुओं का उल्लेख किया गया, जिसके बाद जांच का दायरा और व्यापक कर दिया गया। अब सभी पक्ष अंतिम निष्कर्षों का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि त्रासदी किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल सैन्य या राजनीतिक मुद्दा नहीं होतीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत गंभीर होती हैं। निर्दोष बच्चों की मौत ने वैश्विक स्तर पर युद्ध और संघर्षों के मानवीय प्रभावों को फिर से केंद्र में ला दिया है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद इस मामले की दिशा और इससे जुड़ी राजनीतिक तथा कूटनीतिक चर्चाओं को नया आयाम मिल सकता है।

देवास में देर रात किराना दुकान में लगी भीषण आग: ऊपर सो रहे थे मालिक, लाखों का सामान जलकर खाक

मध्यप्रदेश । देवास जिले के हाटपीपल्या क्षेत्र के ग्राम गाराखेड़ी में बुधवार देर रात एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन एक व्यापारी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। गांव में स्थित एक किराना दुकान में अचानक आग लग गई, जिससे दुकान में रखा लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, हालांकि आग ने दुकान के भीतर रखे अधिकांश सामान को अपनी चपेट में ले लिया। जानकारी के अनुसार, गाराखेड़ी निवासी धर्मेंद्र सिंह सैंधव की किराना दुकान में देर रात अज्ञात कारणों से आग लग गई। घटना के समय धर्मेंद्र सिंह दुकान के ऊपर बने हिस्से में सो रहे थे। रात करीब 2:30 बजे उन्हें अचानक जलने की तेज बदबू और धुएं का एहसास हुआ। पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब उन्होंने नीचे आकर देखा तो दुकान के भीतर आग तेजी से फैल चुकी थी। आग की लपटें और धुएं का गुबार देखकर धर्मेंद्र सिंह घबरा गए। उन्होंने तत्काल डायल-112 को सूचना दी और आसपास के लोगों को भी मदद के लिए बुलाया। कुछ ही देर में पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। इसके साथ ही गांव के कई लोग भी आग बुझाने के प्रयास में जुट गए। घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम सक्रिय हुई। सैनिक जालम सिंह और पायलट विजय पटेल मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू कराया। वहीं फायर ब्रिगेड के कर्मचारी सुरेंद्र सिंह और राहुल सिंह ने आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास किए। आग की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने भी पूरा सहयोग किया। पड़ोसी रघुवीर सिंह सोलंकी, भगत सिंह, सावन सिंह, संजय सिंह और आर्यन शर्मा सहित कई ग्रामीण आग बुझाने में जुट गए। सभी ने मिलकर आग को आसपास के मकानों और अन्य हिस्सों में फैलने से रोकने की कोशिश की। काफी देर की मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पा लिया गया। हालांकि जब तक आग बुझाई गई, तब तक दुकान में रखा अधिकांश सामान जल चुका था। किराना सामग्री, दैनिक उपयोग के उत्पाद और अन्य जरूरी सामान पूरी तरह नष्ट हो गए। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार व्यापारी को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। नुकसान का सटीक आकलन प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा किया जाएगा। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि शॉर्ट सर्किट, विद्युत खराबी या अन्य संभावित कारणों की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्र में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आग का पता नहीं चलता तो यह हादसा और भी गंभीर रूप ले सकता था। समय पर मिली सूचना, फायर ब्रिगेड की तत्परता और ग्रामीणों के सहयोग से एक बड़ा नुकसान होने से जरूर बच गया, लेकिन व्यापारी की वर्षों की मेहनत कुछ ही घंटों में राख में बदल गई।