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पति और सास की प्रताड़ना से टूटी जिंदगी: आत्महत्या के बाद दर्ज हुई FIR, जांच में सामने आए गंभीर आरोप

मध्यप्रदेश । इंदौर में विवाहिता आत्महत्या के दो अलग-अलग मामलों में पुलिस जांच के बाद ससुराल पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विजयनगर और तिलक नगर थाना क्षेत्रों से जुड़े इन मामलों में पुलिस ने मर्ग जांच, साक्षियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। दोनों घटनाओं ने एक बार फिर घरेलू प्रताड़ना और वैवाहिक विवादों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला मामला विजयनगर थाना क्षेत्र का है, जहां भमौरी स्थित न्यू अंजनी नगर में रहने वाली सीमा जैन ने 19 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला, वहीं मृतका के परिजनों और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि सीमा को कथित रूप से दहेज की मांग और घरेलू प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। जांच में मिले साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने पति अमन जैन और सास सपना जैन निवासी खरगोन के खिलाफ दहेज प्रताड़ना सहित संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। मृतका के परिजनों ने पुलिस को बताया कि सीमा की शादी पिछले वर्ष मई माह में खरगोन जिले के कसरावद क्षेत्र में हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के समय ससुराल पक्ष ने दूल्हे की बीमारी की जानकारी छिपाई थी। विवाह के बाद जब इस बात की जानकारी सीमा को मिली तो दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने लगे। परिजनों के अनुसार लगातार तनाव और प्रताड़ना के कारण सीमा मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थी। बताया गया कि सीमा पिछले चार महीनों से इंदौर में अपनी मां और भाई के साथ रह रही थी। पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ चुका था कि दोनों के बीच तलाक का मामला भी न्यायालय में विचाराधीन था। इसी दौरान उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। वहीं दूसरा मामला तिलक नगर थाना क्षेत्र का है, जहां संविद नगर निवासी 26 वर्षीय आरती पटेल ने 25 मई को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने घटना के बाद मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मृतका के पिता द्वारका पटेल, भाई दीपक पटेल और रिश्तेदार खेमचंद पटेल के बयान दर्ज किए गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि आरती का पति गोपाल पटेल, जो सागर जिले के ग्राम सरदई का निवासी है, शादी के बाद से ही उसके साथ विवाद करता था और कई बार मारपीट भी करता था। परिवार का कहना है कि लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के चलते आरती गहरे तनाव में रहने लगी थी। मर्ग जांच में सामने आए तथ्यों, साक्षियों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने गोपाल पटेल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है। दोनों मामलों में पुलिस आगे की जांच कर रही है और आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। इन घटनाओं ने घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और वैवाहिक विवादों के गंभीर सामाजिक पहलुओं को फिर उजागर किया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इजरायली तकनीक से नरसिंहपुर में चमत्कार: बंजर जमीन पर खड़ा किया 70 एकड़ का 'मैंगो किंगडम', अब लंदन-दुबई में धूम

मध्य प्रदेश। राज्य के नरसिंहपुर जिले के छेना गाँव से आधुनिक कृषि और दृढ़ संकल्प की एक ऐसी अभूतपूर्व कहानी सामने आई है, जिसने देश के कृषि विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। जहां की पथरीली और कम उपजाऊ जमीन पर पारंपरिक खेती करना भी घाटे का सौदा माना जाता था, वहीं आज इजरायली तकनीक के चमत्कार से 70 एकड़ का एक विशाल और आधुनिक आमों का साम्राज्य खड़ा हो चुका है। स्थानीय प्रगतिशील किसान के इस साहसिक और तकनीकी प्रयास की बदौलत अब नरसिंहपुर के रसीले आमों का स्वाद सात समंदर पार दुबई और लंदन जैसे वैश्विक बाजारों तक पहुँच गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस सफलता के पीछे इजरायल की प्रसिद्ध ‘अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्लांटेशन’ (UHDP) यानी सघन बागवानी कूटनीति और आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली का कुशल उपयोग है। पारंपरिक तरीके से जहां एक एकड़ में आम के बेहद सीमित पौधे लगाए जाते हैं, वहीं इस आधुनिक इजरायली तकनीक के माध्यम से प्रति एकड़ पौधों की संख्या कई गुना बढ़ा दी गई। इसके साथ ही, बूंद-बूंद सिंचाई और नियंत्रित खाद प्रबंधन के जरिए पौधों को सीधे जड़ों तक पोषक तत्व दिए गए, जिससे पथरीली और कम पानी वाली जमीन पर भी पौधों का तेजी से और स्वस्थ विकास संभव हो सका। नरसिंहपुर के इस विशाल मैंगो ऑर्चर्ड (आम के बाग) में आम की कई उन्नत और व्यावसायिक प्रजातियों का उत्पादन किया जा रहा है, जिनकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बहुत अधिक है। फसल की गुणवत्ता, रंग और स्वाद को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाए रखने के लिए पूरी तरह से जैविक और वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन किया जाता है। यही कारण है कि इस बाग के आमों को सीधे विदेशों में निर्यात करने के लिए अंतरराष्ट्रीय डीलर्स और बड़ी कंपनियों से अनुबंध मिले हैं, जिससे स्थानीय क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी आय के नए मार्ग खुल गए हैं। इस चमत्कारिक कृषि मॉडल ने न केवल नरसिंहपुर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के कृषि परिदृश्य को एक नई दिशा दिखाई है। जिला प्रशासन और बागवानी विभाग के अधिकारी भी इस सफलता को एक बड़े उदाहरण के रूप में देख रहे हैं। इस बागवानी मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी और विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों में भी बंपर पैदावार सुनिश्चित करता है। लंदन और दुबई जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में यहां के आमों की खेप पहुंचने से भारतीय कृषि उत्पादों की साख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत हुई है। इस कृषि क्रांति ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही तकनीक, कड़ा परिश्रम और आधुनिक दृष्टिकोण को मिला दिया जाए, तो किसी भी बंजर या कम उम्मीद वाली जमीन को सोने की खान में बदला जा सकता है। आज इस 70 एकड़ के आम साम्राज्य को देखने और समझने के लिए दूर-दूर से किसान और कृषि वैज्ञानिक नरसिंहपुर के छेना गाँव पहुँच रहे हैं। यह प्रोजेक्ट अब क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का एक बड़ा जरिया बन चुका है और आत्मनिर्भर खेती की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

इंदौर मेट्रो का कमर्शियल रन फिर अटका, 24 जून को खत्म होगी CMRS मंजूरी; दोबारा होगा सेफ्टी निरीक्षण

मध्यप्रदेश । इंदौरवासियों का मेट्रो में सफर करने का इंतजार एक बार फिर लंबा होता नजर आ रहा है। सुपर कॉरिडोर से विजय नगर तक प्रस्तावित इंदौर मेट्रो का कमर्शियल रन फिर टल गया है। पहले जहां 18 जून को इसका शुभारंभ होने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं अब स्थिति ऐसी बन गई है कि मेट्रो संचालन शुरू होने में और अधिक समय लग सकता है। मेट्रो परियोजना के तहत सुपर कॉरिडोर के लगभग 5.9 किलोमीटर लंबे हिस्से में संचालन की तैयारियां काफी पहले पूरी होने का दावा किया गया था। इसके बावजूद मेट्रो अभी तक ट्रायल और सीमित संचालन के दायरे से बाहर नहीं निकल पाई है। कमर्शियल रन शुरू नहीं होने के कारण यात्रियों को अभी भी मेट्रो सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (CMRS) द्वारा कमर्शियल रन के लिए दी गई मंजूरी की वैधता 24 जून को समाप्त हो रही है। मेट्रो अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस तारीख तक नियमित यात्री सेवा शुरू कर पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है। यदि ऐसा होता है तो मेट्रो प्रबंधन को पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ेगी। सूत्रों के अनुसार, मंजूरी की अवधि समाप्त होने के बाद सीएमआरएस से दोबारा निरीक्षण कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए नए सिरे से आवेदन, दस्तावेजी प्रक्रिया और तकनीकी परीक्षणों की आवश्यकता पड़ेगी। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग एक महीने का समय लग सकता है। ऐसे में कमर्शियल रन की शुरुआत जुलाई या उससे आगे तक खिसकने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने भी स्वीकार किया है कि कमर्शियल रन की नई तारीख अभी निर्धारित नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि 24 जून से पहले सीएमआरएस को दोबारा निरीक्षण के लिए पत्र भेजा जाएगा। निरीक्षण और आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद ही यात्री सेवाएं शुरू की जा सकेंगी। गौरतलब है कि पहले केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर के हाथों 18 जून को कमर्शियल रन का शुभारंभ प्रस्तावित था। कार्यक्रम की तैयारियां भी लगभग पूरी कर ली गई थीं, लेकिन राज्यसभा चुनाव की व्यस्तताओं के कारण यह आयोजन स्थगित कर दिया गया। इसके बाद उम्मीद थी कि 20 जून को केंद्रीय मंत्री के इंदौर दौरे के दौरान मेट्रो को हरी झंडी मिल सकती है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई कार्यक्रम तय नहीं किया गया है। बार-बार टल रहे कमर्शियल रन ने शहरवासियों की उत्सुकता को निराशा में बदलना शुरू कर दिया है। इंदौर देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है और यहां मेट्रो को शहरी परिवहन की बड़ी जरूरत माना जा रहा है। ऐसे में परियोजना के संचालन में लगातार हो रही देरी कई सवाल खड़े कर रही है। हालांकि मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही सेवा शुरू की जाएगी। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि इंदौरवासियों को मेट्रो की पहली नियमित सवारी के लिए अभी कुछ और समय इंतजार करना पड़ेगा।

20 जून को होगा इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का भूमि पूजन, 30 मिनट में तय होगा सफर; सिंहस्थ-2028 को मिलेगी नई रफ्तार

मध्यप्रदेश । मालवा क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। 20 जून को इंदौर जिले के चंद्रावतीगंज में इस परियोजना का भूमि पूजन किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर विशेष रूप से शामिल होंगे। इस परियोजना को सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 48.10 किलोमीटर लंबे इस एक्सेस-कंट्रोल्ड फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) द्वारा हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत कराया जाएगा। इसकी अनुमानित निर्माण लागत लगभग 1,089 करोड़ रुपए है। परियोजना का उद्देश्य इंदौर और उज्जैन के बीच तेज, सुरक्षित और बाधारहित यातायात सुविधा उपलब्ध कराना है। भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बुधवार को कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने मंच व्यवस्था, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और बैठक व्यवस्था जैसी सुविधाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली जाएं। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण के बाद इंदौर से उज्जैन की दूरी महज 30 से 35 मिनट में तय की जा सकेगी। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच बढ़ते ट्रैफिक और यात्रा समय की समस्या को देखते हुए यह परियोजना एक बड़ी राहत साबित होगी। इससे मौजूदा हाईवे पर वाहनों का दबाव भी कम होगा और यात्रा अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनेगी। धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। उज्जैन में महाकाल मंदिर, महाकाल लोक और सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं इंदौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ हवाई और व्यावसायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। नया कॉरिडोर दोनों शहरों को आधुनिक और तेज संपर्क मार्ग से जोड़कर श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारिक वर्ग को बड़ी सुविधा देगा। परियोजना का प्रारंभ इंदौर के पित्र पर्वत क्षेत्र के पास से होगा और इसका अंतिम छोर उज्जैन के सिंहस्थ बायपास क्षेत्र तक रहेगा। यह सड़क भविष्य में यातायात की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए विस्तार योग्य भी होगी। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। सरकार ने निर्माण एजेंसी को परियोजना पूरा करने के लिए लगभग 24 महीने का समय दिया है। लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 से पहले यह कॉरिडोर पूरी तरह तैयार हो जाए ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मालवा क्षेत्र के धार्मिक, आर्थिक और पर्यटन विकास के नए कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। महाकाल लोक, ओंकारेश्वर, इंदौर एयरपोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह मार्ग क्षेत्र के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

ऐतिहासिक कूटनीतिक कामयाबी: ट्रंप और पेजेश्कियान के हस्ताक्षरों से टला महायुद्ध, अमेरिका-ईरान शांति समझौता तत्काल प्रभाव से लागू

नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति के पन्नों में आज का दिन एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव के रूप में दर्ज हो गया है। पिछले कई महीनों से युद्ध की कगार पर खड़े अमेरिका और ईरान ने अपने सारे विवादों और दुश्मनी को पीछे छोड़ते हुए आखिरकार शांति समझौते पर आधिकारिक मुहर लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दोनों देशों के बीच जारी सैन्य टकराव को हमेशा के लिए खत्म करने के मकसद से एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बड़े घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव पूरी तरह समाप्त हो गया है और यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है। व्हाइट हाउस और ईरानी राजनयिकों द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस शांति समझौते से जुड़ी दो बेहद महत्वपूर्ण तस्वीरें और वीडियो वैश्विक मीडिया के सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय महल में आयोजित एक विशेष रात्रिभोज के दौरान इस समझौते की मूल प्रति पर हस्ताक्षर किए। इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी उनके ठीक बगल में मौजूद थे, जिनकी गवाही में व्हाइट हाउस ने हस्ताक्षर का वीडियो भी जारी किया है। दूसरी तरफ, तेहरान से ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की भी समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए तस्वीरें दुनिया के सामने आईं। इससे पहले बीते रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ ने इस मसौदे पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक समारोह की जगह इसे तुरंत ही लागू करने का फैसला लिया गया। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत कुल 14 प्रमुख शर्तें तय की गई हैं, जो दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की दिशा तय करेंगी। समझौते की पहली और सबसे बड़ी शर्त के अनुसार, अमेरिका और ईरान सभी मोर्चों पर अपनी सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा करते हैं। दोनों देशों ने वचन दिया है कि वे भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी तरह का युद्ध या सैन्य अभियान शुरू नहीं करेंगे। इसके साथ ही, लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाएगा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने और 60 दिनों के भीतर बातचीत के जरिए एक अंतिम और पूर्ण रूप से बाध्यकारी समझौता तैयार करने की प्रतिबद्धता जताई है। मध्य प्रदेश और देश के अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समझौते से वैश्विक बाजार और तेल आपूर्ति को बड़ी राहत मिलेगी। समझौते के तहत अमेरिका अगले 30 दिनों के भीतर ईरान के खिलाफ लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और सभी व्यापारिक अवरोधों को पूरी तरह हटा लेगा। इसके बदले में ईरान फारस की खाड़ी से लेकर ओमान सागर तक आने-जाने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए अगले 60 दिनों तक पूरी तरह निशुल्क और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए ओमान के साथ बातचीत शुरू की जाएगी। इसके अतिरिक्त, अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के आर्थिक पुनर्वास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की भारी-भरकम फंडिंग सुनिश्चित करने पर सहमत हुआ है। परमाणु कार्यक्रम के मोर्चे पर भी इस समझौते ने बेहद संवेदनशील मुद्दों को सुलझाया है। ईरान ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, जबकि उसके पास मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री के प्रबंधन का समाधान दोनों देश आपसी सहमति के मैकेनिज्म से निकालेंगे। जब तक अंतिम समझौता पूरा नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष यथास्थिति बनाए रखेंगे, जिसके तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को वर्तमान स्थिति से आगे नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा। इसके अलावा, अमेरिकी वित्त विभाग ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए तत्काल बैंकिंग और बीमा छूट प्रदान करेगा, और विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को भी पूरी तरह रिलीज किया जाएगा। इस ऐतिहासिक शांति समझौते को अंतिम रूप देने के बाद अब इसे औपचारिक मंजूरी के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के समक्ष भेजा जाएगा।

अनिका की जिंदगी के लिए जुटे 8.23 करोड़ रुपए, अब सिर्फ 77 लाख की दरकार; 9 करोड़ पूरे होते ही शुरू होगा इलाज

मध्यप्रदेश । इंदौर की मासूम अनिका शर्मा की जिंदगी बचाने की मुहिम अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचती दिखाई दे रही है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रही अनिका के इलाज के लिए अब तक 8 करोड़ 23 लाख रुपए जुटाए जा चुके हैं। परिवार को अब सिर्फ शेष राशि मिलने का इंतजार है, ताकि कुल 9 करोड़ रुपए पूरे होते ही बच्ची का इलाज शुरू कराया जा सके। पिछले कई महीनों से अनिका के माता-पिता सरिता शर्मा और प्रवीण शर्मा अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। महंगे इलाज और विदेश से आने वाले विशेष इंजेक्शन की व्यवस्था करना परिवार के लिए आसान नहीं था, लेकिन समाज, दानदाताओं और सामाजिक संगठनों के सहयोग से यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। अनिका SMA टाइप-2 बीमारी से पीड़ित है, जो बच्चों की मांसपेशियों और शारीरिक विकास को प्रभावित करती है। इस बीमारी के इलाज के लिए अमेरिका से विशेष इंजेक्शन मंगवाया जाना है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपए बताई जा रही है। यही कारण है कि परिवार लंबे समय से क्राउड फंडिंग के जरिए राशि जुटाने में लगा हुआ है। इलाज के लिए सिर्फ धनराशि जुटाना ही चुनौती नहीं थी, बल्कि अनिका की उम्र और वजन भी महत्वपूर्ण मानदंड थे। परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि इलाज के लिए निर्धारित वजन सीमा से बच्ची का वजन अधिक न हो जाए। इसके लिए माता-पिता ने बेहद सावधानी बरतते हुए अनिका को नियंत्रित और विशेष लिक्विड डाइट पर रखा। लगातार निगरानी और चिकित्सकीय सलाह के चलते वे अब तक उसका वजन नियंत्रित रखने में सफल रहे हैं। अनिका की मदद के लिए समाज के हर वर्ग से लोग आगे आए हैं। इंदौर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लोगों ने आर्थिक सहयोग दिया। कई संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और व्यक्तिगत दानदाताओं ने सहायता राशि उपलब्ध कराई, जबकि कुछ लोगों और संगठनों ने मदद का आश्वासन भी दिया है। अब परिवार को इन्हीं स्वीकृत सहायता राशियों के मिलने का इंतजार है। इस अभियान को देशभर में पहचान दिलाने में कई चर्चित हस्तियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। अभिनेता सोनू सूद, वरिष्ठ कलाकार रजा मुराद, बिग बॉस की आवाज के रूप में प्रसिद्ध विजय विक्रम सिंह सहित कई सेलिब्रिटी वीडियो संदेशों के माध्यम से लोगों से सहयोग की अपील कर चुके हैं। इन अपीलों का सकारात्मक असर देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़े। हाल ही में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और “SMA Man of India” के नाम से पहचाने जाने वाले प्रतीक क्वात्रा ने ट्रू होप फाउंडेशन के साथ मिलकर अनिका के लिए 1 करोड़ 20 लाख रुपए की सहायता उपलब्ध कराई। इस सहायता राशि का चेक परिवार को सौंप दिया गया है, जिससे इलाज की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा है। अनिका के माता-पिता का कहना है कि जिन लोगों और संस्थाओं ने सहायता का आश्वासन दिया है, यदि वे जल्द राशि उपलब्ध करा दें तो 9 करोड़ रुपए का लक्ष्य पूरा हो जाएगा और उनकी बेटी को जीवन देने वाला इलाज समय पर मिल सकेगा। परिवार को उम्मीद है कि समाज का सहयोग उनकी बेटी के जीवन में नई उम्मीद लेकर आएगा।

गायत्री जयंती 2026: सुख-समृद्धि और पुण्य फल के लिए 25 जून को जरूर करें ये 5 विशेष धार्मिक उपाय

नई दिल्ली। सनातन धर्म में देवमाता, वेदमाता और विश्वमाता के रूप में पूजनीय मां गायत्री का अवतरण दिवस यानी गायत्री जयंती इस वर्ष 25 जून 2026, दिन गुरुवार को बेहद श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को ही ममतामयी मां गायत्री का प्राकट्य हुआ था। ज्योतिषविदों और आध्यात्मिक गुरुओं का मानना है कि इस पावन तिथि पर यदि कुछ विशेष और बेहद सरल धार्मिक उपाय व नियम अपनाए जाएं, तो जातक के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है और उसे अक्षय पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। मध्य प्रदेश और देश के तमाम हिस्सों में इस दिन मां गायत्री की विशेष आराधना की जाती है, क्योंकि उन्हें बुद्धि, विवेक और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। गायत्री जयंती के शुभ अवसर पर सबसे पहला और प्रभावी उपाय तय संख्या में गायत्री मंत्र का शुद्ध उच्चारण के साथ जाप करना है। शांत और स्वच्छ वातावरण में बैठकर कमल गट्टे या तुलसी की माला से 108 या 1008 बार गायत्री मंत्र का जाप करने से न केवल मानसिक तनाव दूर होता है, बल्कि व्यक्ति की एकाग्रता और बौद्धिक क्षमता में भी अभूतपूर्व विकास होता है। इस पावन दिवस पर घर या देवस्थान में गायत्री यज्ञ अथवा हवन का आयोजन करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। इसके लिए शुद्ध देसी घी, जौ, काले तिल, कपूर और गुड़ जैसी मांगलिक सामग्रियों को मिलाकर हवन कुंड तैयार किया जाता है। यज्ञ की प्रत्येक आहुति के साथ गायत्री मंत्र का सामूहिक या व्यक्तिगत उच्चारण करने से घर-परिवार और आसपास के संपूर्ण वातावरण का शुद्धिकरण होता है। डॉक्टरों और पर्यावरणविदों का भी मानना है कि इस प्रकार के वैदिक हवन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक तरंगों का प्रवाह बढ़ता है। चूंकि मां गायत्री को ज्ञान की सर्वोच्च देवी माना गया है, इसलिए इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार, गायत्री जयंती पर जरूरतमंद, निर्धन और अनाथ विद्यार्थियों को शिक्षा से संबंधित सामग्रियां जैसे पुस्तकें, कॉपियां और पेन दान करने से विद्या और करियर में अपार सफलता मिलती है। इसके साथ ही योग्य ब्राह्मणों को आदरपूर्वक अन्न, वस्त्र और जलपात्र का दान करने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है और समाज में यश व कीर्ति की प्राप्ति होती है। आध्यात्मिक चेतना और आत्मिक शुद्धि के लिए इस दिन व्रत रखने और पूर्णतः सात्त्विक दिनचर्या का पालन करने की सलाह दी जाती है। यदि स्वास्थ्य कारणों से निराहार या फलाहार व्रत रखना संभव न हो, तो व्यक्ति को लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर केवल सात्त्विक आहार ही ग्रहण करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, शाम के समय मां गायत्री की कपूर से आरती करने के बाद गायत्री चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से पारिवारिक कलह समाप्त होते हैं और घर के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम, तालमेल और विश्वास की भावना सुदृढ़ होती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पांच दिवसीय एमपी दौरे पर, इंदौर पहुंचते ही ओंकारेश्वर रवाना; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इंदौर पहुंचीं। देश की प्रथम नागरिक के स्वागत के लिए देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मौजूद रहे। राष्ट्रपति के आगमन के साथ ही प्रदेश में उनके महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हो गई है, जो 22 जून तक जारी रहेगी। इंदौर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू सीधे ओंकारेश्वर के लिए रवाना हुईं। यहां वे भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना करेंगी। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर ओंकारेश्वर और इंदौर दोनों स्थानों पर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इंदौर में विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने वीर हनुमान मंदिर परिसर स्थित ऐतिहासिक बावड़ी का अवलोकन किया और शहर की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर अधिकारियों से चर्चा की। राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से जुड़ा हुआ है। 19 जून को वे अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में भाग लेंगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और प्रभावित समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना है। इसके अलावा राष्ट्रपति ग्वालियर और श्योपुर में आयोजित विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों में भी शामिल होंगी। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार एयरपोर्ट और उसके आसपास के क्षेत्रों को अस्थायी रूप से नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। वहीं 17 से 19 जून तक शहर के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है ताकि वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम जनता को न्यूनतम परेशानी हो। ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। दर्शनार्थियों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था, बस सेवाएं और मार्गदर्शन केंद्र बनाए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित ट्रैफिक प्लान का पालन करें और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलें। राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर भारी मालवाहक वाहनों के मार्ग भी बदले गए हैं। इंदौर-इच्छापुर मार्ग पर चलने वाले ट्रकों और अन्य भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है। इससे वीआईपी रूट पर यातायात का दबाव कम करने और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने में मदद मिलेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे प्रदेश में विकास, स्वास्थ्य जागरूकता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यक्रमों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

रणवीर सिंह विवाद से आगे बढ़े फरहान अख्तर, सुपरस्टार सलमान खान को लेकर दो भागों में मेगा बजट फिल्म बनाने की योजना

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे फिल्म उद्योग और प्रशंसकों के बीच हलचल मचा दी है। अभिनेता रणवीर सिंह के साथ चल रहे ‘डॉन 3’ विवाद की सुर्खियों के बीच, मशहूर निर्माता-निर्देशक फरहान अख्तर अब बॉलीवुड के सुल्तान सलमान खान के साथ एक महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम करने की योजना बना रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों दिग्गज एक बड़े बजट की पीरियोडिक ड्रामा फिल्म के लिए हाथ मिला सकते हैं, जो यदि धरातल पर उतरती है, तो सिनेमाई इतिहास में पहली बार होगा जब सलमान खान और फरहान अख्तर किसी प्रोजेक्ट में एक साथ नजर आएंगे। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सुपरस्टार सलमान खान और एक्सेल एंटरटेनमेंट के कर्ता-धर्ता फरहान अख्तर पिछले एक महीने से लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं और उनके बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। प्रोजेक्ट से जुड़े करीबी सूत्रों का दावा है कि सलमान खान को फिल्म की शुरुआती स्क्रिप्ट और इसकी मूल अवधारणा काफी पसंद आई है और उन्होंने इस ऐतिहासिक कहानी में अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाई है। बताया जा रहा है कि फरहान जिस फिल्म को लेकर सलमान के साथ चर्चा कर रहे हैं, वह एक विशाल ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित दो भागों (टू-पार्ट्स) में रिलीज होने वाली फिल्म होगी। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच चल रही यह बातचीत अभी अपने बेहद शुरुआती चरण में है और अभी तक किसी भी तरह का कानूनी या लिखित पेपर वर्क शुरू नहीं किया गया है। शुरुआती सहमति बनने के बाद दोनों ही पार्टियां इस अनूठे सहयोग को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस मेगा प्रोजेक्ट से जुड़ी आधिकारिक घोषणा और विस्तृत जानकारी इस साल के अंत तक सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल फिल्म के निर्देशक का नाम तय नहीं किया गया है, क्योंकि फरहान अख्तर इस प्रोजेक्ट को केवल प्रोड्यूस (निर्माण) करेंगे। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो इस फिल्म की शूटिंग अगले साल यानी 2027 के शुरुआती महीनों में शुरू की जा सकती है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब फरहान अख्तर और रणवीर सिंह के बीच ‘डॉन 3’ को छोड़ने को लेकर गहरा विवाद चल रहा है। दरअसल, रणवीर सिंह द्वारा अचानक इस बहुप्रतीक्षित फिल्म से कदम पीछे खींचने के बाद फरहान ने फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लाइज (FWICE) में अभिनेता की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद संगठन ने असहयोग का निर्देश भी जारी किया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इस बीच उद्योग में ऐसी अफवाहें भी उड़ी थीं कि सलमान खान ने दोनों के बीच सुलह कराने की मध्यस्थता की है, लेकिन बाद में इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया। दूसरी ओर, सलमान खान इन दिनों अपने अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स में भी व्यस्त हैं। वह जल्द ही निर्देशक अपूर्व लाखिया की फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (जिसका पूर्व नाम बैटल ऑफ गलवान था) में कर्नल बी संतोष बाबू की मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे, जिसमें उनके साथ चित्रांगदा सिंह भी अहम किरदार में हैं। ऐसे में फरहान अख्तर के प्रोडक्शन हाउस के तहत बनने वाली इस नई पीरियोडिक फिल्म से जुड़ने की खबर ने इंडस्ट्री का पारा बढ़ा दिया है, हालांकि इस संबंध में अभी तक सलमान खान या फरहान अख्तर की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या पुष्टि साझा नहीं की गई है।

कांग्रेस के मंच पर गूंजे ‘मुर्दाबाद’ के नारे, CM का तंज और सांसद का बैनर वाला बचाव बना चर्चा का विषय

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में बुधवार का दिन बयानबाजी, विरोध और दिलचस्प घटनाओं के नाम रहा। एक तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला, तो दूसरी ओर कांग्रेस के ही कार्यक्रम में पार्टी विरोधी नारे गूंजने लगे। वहीं मंडला में भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का बारिश से बचने के लिए बैनर का सहारा लेना भी चर्चा का विषय बन गया। उज्जैन के महिदपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिना नाम लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी पार्टी की कमान ‘नौसिखियों’ के हाथ में दे दी है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जब गाड़ी चलाने वाले ही अनुभवहीन हों तो गाड़ी आगे बढ़ने के बजाय पीछे ही जाएगी। इससे पहले भी मुख्यमंत्री पटवारी को लेकर तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त होने से जोड़कर देखा जा रहा है। उधर ग्वालियर में यूथ कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘रन फॉर OTF’ मैराथन कार्यक्रम में उस समय अजीब स्थिति बन गई जब कांग्रेस के मंच पर ही ‘कांग्रेस पार्टी मुर्दाबाद’ के नारे गूंजने लगे। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधायक जयवर्धन सिंह सहित कई नेता मौजूद थे। बताया जा रहा है कि मैराथन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन पुरस्कार नहीं मिलने से नाराज कुछ प्रतिभागियों ने मंच के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते नाराजगी नारेबाजी में बदल गई और कांग्रेस के मंच पर ही कांग्रेस विरोधी आवाजें सुनाई देने लगीं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजनीतिक हलचल के बीच मंडला से भी एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते जिले के निवास क्षेत्र के देवगांव में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति की ओर था कि अचानक तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल पर लगा बैनर उतार लिया और उसे सांसद के सिर के ऊपर तानकर खड़े हो गए। कुछ देर तक सांसद इसी अस्थायी व्यवस्था के सहारे बारिश से बचते रहे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बीच मंत्रालय से जुड़ा एक रोचक किस्सा भी चर्चा में रहा। एक पुलिस अधिकारी अपनी बेटी की शादी का निमंत्रण देने एक वरिष्ठ महिला अधिकारी के कार्यालय पहुंचे, लेकिन महिला अधिकारी ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया और कर्मचारी के माध्यम से ही कार्ड मंगवा लिया। यह घटना भी मंत्रालय के गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। राजनीति, प्रशासन और सामाजिक घटनाओं से जुड़ी इन घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मध्य प्रदेश की सियासत में हर दिन कुछ न कुछ ऐसा होता है, जो लोगों की चर्चा और सोशल मीडिया की सुर्खियां बन जाता है।