ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अत्यंत शुभ कालखंड की शुरुआत, बुध, गुरु और शुक्र के अनूठे संयोग से चमकेगी चार भाग्यशाली राशियों की किस्मत

नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर और उनकी युति को मानव जीवन तथा पूरी सृष्टि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। खगोलीय पंचांग की गणनाओं के अनुसार, आगामी 22 जून से अंतरिक्ष में एक बेहद दुर्लभ और महाशक्तिशाली ‘सरस्वती राजयोग’ का निर्माण होने जा रहा है। यह शुभ संयोग कर्क राशि में तीन प्रमुख ग्रहों की अनूठी युति के कारण बनने जा रहा है, जो आगामी 4 जुलाई तक पूरी तरह प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस अवधि में ज्ञान के कारक बृहस्पति, बुद्धि के दाता बुध और भौतिक सुखों के स्वामी शुक्र एक साथ आकर संसार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेंगे, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव मुख्य रूप से चार विशेष राशियों पर देखने को मिलेगा। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, यह खगोलीय घटना इसलिए भी अधिक प्रभावशाली मानी जा रही है क्योंकि इस समय देवताओं के गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में गोचर कर रहे हैं। जब भी गुरु, बुध और शुक्र जैसे नैसर्गिक रूप से शुभ माने जाने वाले ग्रह कुंडली के केंद्र या त्रिकोण भावों में मजबूत स्थिति में एक साथ आते हैं, तो इस बेहद कल्याणकारी योग का सृजन होता है। इस कालखंड के दौरान विशेष रूप से शिक्षा, रचनात्मक क्षेत्रों, व्यापार और नौकरीपेशा लोगों के जीवन में अभूतपूर्व प्रगति देखने को मिलती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ने के साथ-साथ इस योग के प्रभाव से बंपर आर्थिक लाभ और रुके हुए कार्यों में गति आने के मजबूत संकेत मिल रहे हैं। इस ज्योतिषीय परिवर्तन से सबसे अधिक लाभान्वित होने वाली राशियों में मेष राशि प्रमुखता से शामिल है। मेष राशि के जातकों के लिए यह समय सुख-सुविधाओं और भौतिक संसाधनों में वृद्धि कराने वाला साबित होगा। यदि इस राशि के लोगों ने भूतकाल में कोई निवेश किया है, तो इस अवधि में उन्हें उससे बड़ा वित्तीय मुनाफा होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में उच्च पद की प्राप्ति अथवा मनचाही जगह पर स्थानांतरण का सुख मिल सकता है। पैतृक संपत्ति से जुड़े पुराने विवादों में भी इस दौरान बड़ी राहत मिलने के आसार नजर आ रहे हैं, जिससे पारिवारिक वातावरण सुखद रहेगा। मिथुन और कर्क राशि के जातकों के लिए भी यह समय किसी वरदान से कम नहीं होने वाला है। मिथुन राशि के लोगों के लिए विशेषकर वित्तीय मोर्चे पर यह अत्यधिक फलदायी सिद्ध होगा, जहां मीडिया, विपणन, कानून और शिक्षा जगत से जुड़े पेशेवरों को अपनी प्रतिभा दिखाने के शानदार अवसर मिलेंगे। लंबे समय से अटका हुआ धन वापस आने से संचित कोष में बढ़ोतरी होगी। वहीं दूसरी ओर, चूंकि यह राजयोग कर्क राशि में ही घटित हो रहा है, इसलिए कर्क राशि के जातकों के व्यक्तित्व में गजब का निखार आएगा। उनके व्यावसायिक निर्णयों की सराहना होगी और व्यापारिक क्षेत्र में बड़ा आर्थिक लाभ कमाने के नए मार्ग प्रशस्त होंगे। मध्य प्रदेश। मीन राशि के जातकों पर भी इस सरस्वती राजयोग की विशेष कृपा बरसने वाली है, जिससे उनका भाग्य पूरी तरह से सहायक भूमिका में नजर आएगा। इस राशि के लोगों को आकस्मिक धन लाभ होने के मजबूत योग बन रहे हैं, जिससे उनकी दैनिक आर्थिक चिंताएं समाप्त होंगी। सामाजिक जीवन में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को प्रतिष्ठित संस्थानों से नए प्रस्ताव मिल सकते हैं। संक्षेप में कहें तो, ग्रहों का यह आगामी राशि परिवर्तन देश के व्यापक जनमानस में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ विशेषकर इन चार राशि वाले जातकों के करियर और वित्तीय स्थिति को एक नई ऊंचाई प्रदान करने का कार्य करेगा।
वनडे विश्व कप 2027 में रोहित शर्मा और विराट कोहली के खेलने पर सस्पेंस बरकरार, बीसीसीआई ने रणनीतिक फैसलों को सार्वजनिक करने से किया इनकार

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट जगत में इस समय सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यही बना हुआ है कि क्या स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा और दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली वर्ष 2027 में होने वाले आगामी वनडे विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा होंगे या नहीं। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में खिताबी जीत दर्ज करने के बाद से ही इन दोनों सीनियर खिलाड़ियों के वनडे क्रिकेट में भविष्य को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं। इसी बीच भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के सचिव देवजीत सैकिया ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, उनके इस बयान ने स्थिति को स्पष्ट करने के बजाय सस्पेंस को और अधिक बढ़ा दिया है क्योंकि उन्होंने साफ कर दिया है कि टीम की रणनीतियों से जुड़ी चर्चाएं पूरी तरह आंतरिक होती हैं। क्रिकेट बोर्ड के सचिव ने एक साक्षात्कार के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य, खिलाड़ियों की भूमिकाओं और आगामी विश्व कप की रूपरेखा को लेकर बोर्डरूम के भीतर नियमित तौर पर समीक्षा की जाती है। चयन समिति, क्रिकेट सलाहकार समिति, मुख्य कोच और कोचिंग स्टाफ के साथ-साथ खुद खिलाड़ियों के बीच भी एक मजबूत संवाद प्रणाली स्थापित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि टीम से जुड़े सभी बड़े और महत्वपूर्ण फैसले इसी निरंतर चलने वाली प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। लेकिन जब उनसे सीधे तौर पर इन दोनों पूर्व कप्तानों के अगले विश्व कप में खेलने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने रणनीतिक चर्चाओं का हवाला देते हुए इस पर सीधा जवाब देने से साफ तौर पर परहेज किया। बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, किसी भी बड़े टूर्नामेंट की दूरगामी रणनीतियों और सीनियर खिलाड़ियों के चयन संबंधी विचारों को मीडिया या आम जनता के सामने समय से पहले प्रकट करना उचित नहीं होता है। यह एक गोपनीय प्रशासनिक ढांचा है और इन पर चर्चा बोर्ड के आंतरिक दायरे में ही रहनी चाहिए। इस रहस्यमयी रुख से यह साफ जाहिर होता है कि बीसीसीआई फिलहाल इन दोनों दिग्गज बल्लेबाजों के भविष्य के रोडमैप को लेकर कोई भी जल्दबाजी में सार्वजनिक बयान या संकेत देने के मूड में नजर नहीं आ रहा है, जिससे क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है। दूसरी ओर, रोहित शर्मा और विराट कोहली विभिन्न मंचों पर इस बात के स्पष्ट संकेत दे चुके हैं कि वे खेल के इस पारंपरिक सीमित ओवरों के प्रारूप में अपनी सेवाएं जारी रखना चाहते हैं और उनकी नजरें अगले विश्व कप पर टिकी हुई हैं। चैंपियंस ट्रॉफी की ऐतिहासिक सफलता के बाद भी दोनों ही दिग्गजों ने वनडे क्रिकेट खेलते रहने की इच्छा व्यक्त की थी। हालांकि, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और मुख्य कोच गौतम गंभीर की अगुवाई वाले प्रबंधन ने भी अब तक इस विषय पर कोई आधिकारिक या ठोस आश्वासन मीडिया के सामने प्रस्तुत नहीं किया है। ऐसे में आने वाले समय में इन दोनों सीनियर खिलाड़ियों का व्यक्तिगत प्रदर्शन और उनकी शारीरिक फिटनेस ही इस पूरी तस्वीर को साफ करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी। मध्य प्रदेश। इसी बीच बोर्ड के सचिव ने राजनीतिक और कूटनीतिक परिस्थितियों के कारण स्थगित हुए भारत के पड़ोसी देशों के दौरों और द्विपक्षीय श्रृंखलाओं पर भी बोर्ड की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड किसी भी अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के आयोजन या विदेशी दौरों को लेकर पूरी तरह से भारत सरकार की गृह और विदेश नीतियों का अनुसरण करता है। खेल संस्था का राजनीति से कोई प्रत्यक्ष सरोकार नहीं है और सरकार की ओर से मिलने वाले दिशा-निर्देशों के आधार पर ही खेल से जुड़े कार्यक्रम तय किए जाते हैं। बहरहाल, वर्तमान में भारतीय टीम अफगानिस्तान के खिलाफ जारी घरेलू वनडे श्रृंखला में बेहतर प्रदर्शन कर रही है और खेल प्रेमी आगामी समय में रोहित-विराट के भविष्य पर आने वाले हर मोड़ पर नजरें गड़ाए हुए हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग में नई भूमिका के साथ वापसी कर सकते हैं 'सिक्सर किंग' युवराज सिंह, दिल्ली कैपिटल्स के साथ चल रही गंभीर चर्चा

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम को दो विश्व कप जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह जल्द ही इंडियन प्रीमियर लीग में एक नई और बेहद प्रभावशाली भूमिका में नजर आ सकते हैं। खेल गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, दिल्ली कैपिटल्स की फ्रेंचाइजी आगामी सीजन के लिए युवराज सिंह को अपने मुख्य सपोर्ट स्टाफ में शामिल करने की पूरी तैयारी कर रही है। यदि दोनों पक्षों के बीच चल रही यह बातचीत अंतिम रूप ले लेती है, तो यह युवराज सिंह के कोचिंग और मेंटरशिप करियर का पहला सबसे बड़ा और हाई-प्रोफाइल असाइनमेंट साबित होगा, जिसे लेकर क्रिकेट प्रेमियों के बीच भारी उत्सुकता देखी जा रही है। टूर्नामेंट के शुरुआती सीजन से ही खिताब की तलाश में जुटी दिल्ली कैपिटल्स का प्रदर्शन पिछले कुछ समय से उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, जिसके कारण फ्रेंचाइजी अब अपने प्रबंधन और रणनीतिक दल में बड़े बदलाव करने की योजना पर काम कर रही है। इस पुनर्गठन की प्रक्रिया में युवराज सिंह का नाम सबसे आगे चल रहा है। आगामी दो वर्षों के लिए टीम के संचालन का अधिकार एक नए समूह के हाथों में जाने से बदलाव की गति और तेज हो गई है। इसके साथ ही पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली के भी एक बार फिर क्रिकेट निदेशक के रूप में टीम से जुड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे गांगुली और युवराज की ऐतिहासिक जोड़ी फ्रेंचाइजी के लिए नया अध्याय लिख सकती है। हालांकि युवराज सिंह ने अभी तक किसी भी आईपीएल टीम के साथ आधिकारिक तौर पर मुख्य कोच या मेंटर के रूप में काम नहीं किया है, लेकिन देश के युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने में उनका योगदान हमेशा सराहनीय रहा है। भारतीय क्रिकेट के कई मौजूदा युवा सितारे खुले तौर पर यह स्वीकार कर चुके हैं कि युवराज सिंह ने घरेलू स्तर पर उनके खेल कौशल और मानसिक मजबूती को बेहतर बनाने में व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन दिया है। क्रिकेट जगत में उन्हें एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में देखा जाता है जो खिलाड़ियों को केवल तकनीक ही नहीं सिखाते, बल्कि बड़े मंच पर अत्यधिक दबाव की परिस्थितियों से निपटने का हुनर भी बखूबी सिखाते हैं। अक्षर पटेल की कप्तानी वाली दिल्ली कैपिटल्स का प्रदर्शन बीते सीजन में काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा था, जहां टीम महत्वपूर्ण मुकाबलों में निरंतरता की कमी के कारण प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई थी। टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही विभागों में कई मौकों पर रणनीतिक चूक साफ तौर पर देखने को मिली थी। ऐसे में फ्रेंचाइजी के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि युवराज सिंह जैसा अनुभवी और जुझारू खिलाड़ी टीम के ड्रेसिंग रूम में नई ऊर्जा, सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्मविश्वास का संचार कर सकता है, जो टीम को खिताबी मुकाबले तक ले जाने में मददगार साबित होगा। अपने शानदार आईपीएल करियर के दौरान 132 मुकाबले खेलने वाले युवराज सिंह के पास इस फटाफट क्रिकेट प्रारूप का एक लंबा और समृद्ध व्यावहारिक अनुभव मौजूद है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टी20 विश्व कप 2007 और एकदिवसीय विश्व कप 2011 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहने का उनका बेजोड़ अनुभव अब युवा पीढ़ी के काम आ सकता है। हालांकि इस प्रस्तावित नियुक्ति को लेकर अभी तक दिल्ली कैपिटल्स या युवराज सिंह की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पर्दे के पीछे चल रही गंभीर तैयारियों से स्पष्ट है कि आगामी सीजन में क्रिकेट प्रशंसकों को डगआउट में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
आठ वर्ष के लंबे अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी करेंगी प्रीति जिंटा, सनी देओल संग ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म में निभाएंगी मुख्य भूमिका

नई दिल्ली । बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री प्रीति जिंटा एक लंबे अंतराल के बाद हिंदी सिनेमा जगत में जोरदार वापसी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सोशल मीडिया से लेकर फिल्म गलियारों तक इन दिनों उनकी आगामी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ को लेकर जबरदस्त चर्चाएं हो रही हैं। यह फिल्म इसलिए भी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इसके जरिए अभिनेत्री करीब आठ साल बाद बड़े पर्दे पर मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। इससे पहले वर्ष 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘भैयाजी सुपरहिट’ की असफलता के बाद से उन्होंने ग्लैमर जगत से एक दूरी बना ली थी और उनका ध्यान मुख्य रूप से इंडियन प्रीमियर लीग और अपने परिवार पर केंद्रित हो गया था। सिनेमाई विशेषज्ञों के अनुसार, हिंदी सिनेमा में इन दिनों 90 के दशक के दिग्गज कलाकारों की दूसरी पारी बेहद सफल साबित हो रही है। इसी क्रम में सनी देओल ने भी हाल के वर्षों में बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता दर्ज की है, जिसके बाद अब उनकी पुरानी सह-कलाकार प्रीति जिंटा ने भी मैदान में उतरने का मन बना लिया है। आगामी फिल्म का पहला लुक और टीजर सामने आने के बाद से ही दर्शकों के बीच उत्सुकता काफी बढ़ गई है। इस देशभक्ति और भावनात्मक ड्रामा फिल्म में दोनों कलाकारों की जोड़ी एक बार फिर दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। अभिनेत्री के पिछले करियर ग्राफ पर नजर डालें तो आठ साल पहले आई उनकी पिछली फिल्म कई तकनीकी बाधाओं और देरी के कारण बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। उस व्यावसायिक झटके के बाद अभिनेत्री ने किसी भी फिल्म में छोटे कैमियो रोल करने से भी परहेज किया था। हालांकि, अब ‘बंटवारा 1947’ के साथ वह अपनी कलात्मक क्षमता को साबित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म की मजबूत पटकथा अभिनेत्री के करियर को एक नया मोड़ दे सकती है। आने वाला समय अभिनेत्री के प्रशंसकों के लिए काफी रोमांचक होने वाला है क्योंकि यह बहुप्रतीक्षित फिल्म इसी वर्ष 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी। इसके अलावा फिल्म उद्योग के भीतर से आ रही खबरों के मुताबिक, प्रीति जिंटा की यह वापसी केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रहने वाली है। वे इस वर्ष के अंत तक एक प्रमुख प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनने वाली रोमांटिक क्राइम ड्रामा फिल्म की शूटिंग भी शुरू कर सकती हैं। साथ ही आगामी समय में कुछ अन्य बड़े निर्देशकों के प्रोजेक्ट्स और मशहूर वेब सीरीज के नए सीजन में भी उनकी भागीदारी को लेकर गंभीर चर्चाएं चल रही हैं।
सार्वजनिक मंच पर पारंपरिक नियमों की अनदेखी पर ईरानी गायिका के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई, मानवाधिकार संगठनों में आक्रोश

नई दिल्ली । ईरान में सख्त इस्लामी ड्रेस कोड और हिजाब नियमों के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वहां की एक अदालत ने देश की मशहूर गायिका परस्तू अहमदी को बिना हिजाब के सार्वजनिक रूप से उपस्थित होने और स्लीवलेस ड्रेस पहनने के आरोप में 74 कोड़ों की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद से न केवल ईरान के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कला जगत से जुड़े लोगों में गहरा असंतोष और आक्रोश देखा जा रहा है। इस सख्त कानूनी कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों पर एक बड़े आघात के रूप में देखा जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, गायिका परस्तू अहमदी हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक हिजाब को छोड़कर बिना सिर ढके और स्लीवलेस पोशाक में नजर आई थीं। सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद ईरान के रूढ़िवादी प्रशासन और नैतिक पुलिस ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया। इसके बाद मामले की सुनवाई करते हुए स्थानीय अदालत ने इसे देश के शरिया कानूनों और सार्वजनिक शालीनता के नियमों का खुला उल्लंघन माना और गायिका को कोड़े मारने की कठोर सजा मुकर्रर कर दी। ईरान में साल 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद भड़के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद से ही महिलाओं के पहनावे और हिजाब को लेकर कानून बेहद सख्त कर दिए गए हैं। प्रशासन लगातार सार्वजनिक स्थानों, सांस्कृतिक आयोजनों और सोशल मीडिया पर महिलाओं की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहा है। परस्तू अहमदी जैसी लोकप्रिय हस्ती पर इस प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करके प्रशासन ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी, चाहे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा कितनी भी बड़ी क्यों न हो। इस अदालती फैसले के सार्वजनिक होने के बाद से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरान सरकार की कड़ी आलोचना शुरू कर दी है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि कलाकारों पर इस प्रकार की शारीरिक प्रताड़ना की सजा थोपना पूरी तरह से अमानवीय है और यह महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का हनन है। सोशल मीडिया पर भी दुनिया भर के लोग गायिका के समर्थन में आ गए हैं और इस दंडात्मक कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर ईरान के सख्त कानूनों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच चल रहे पुराने संघर्ष को वैश्विक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है।
आर्थिक बाधाओं को दूर कर व्यापार और करियर में उन्नति दिलाएंगे किचन के ये बुनियादी बदलाव, वास्तु नियमों से बढ़ेगी घर में बरकत

नई दिल्ली । भारतीय संस्कृति और गृह विज्ञान में रसोई घर को केवल भोजन पकाने का स्थान ही नहीं, बल्कि घर की समृद्धि और खुशहाली का मुख्य केंद्र माना गया है। वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार, रसोई में मौजूद ऊर्जा का सीधा असर परिवार की आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर पड़ता है। यदि रसोई घर में वास्तु नियमों की अनदेखी की जाए, तो यह अनजाने में आर्थिक उन्नति को रोक सकता है और घर में बरकत की कमी का कारण बन सकता है। इसके विपरीत, कुछ बेहद आसान और प्रभावी बदलाव करके कोई भी अपने जीवन में धन के आगमन को तेज कर सकता है और दिन-डूनी रात-चौगुनी तरक्की हासिल कर सकता है। वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, रसोई में सबसे महत्वपूर्ण तत्व अग्नि और जल का संतुलन होता है। सामान्यतः घरों में सिंक और गैस चूल्हा एक ही कतार में या बेहद पास रख दिए जाते हैं, जिसे वास्तु में एक गंभीर दोष माना जाता है। अग्नि और जल परस्पर विरोधी तत्व हैं, इसलिए इनका एक साथ होना घर के धन प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है। सिंक और चूल्हे के बीच उचित दूरी होना आवश्यक है ताकि दोनों तत्वों की सकारात्मकता बनी रहे और अनावश्यक वित्तीय खर्चों पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जा सके। रसोई घर की दिशा का भी वित्तीय स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। घर की दक्षिण-पूर्व दिशा, जिसे आग्नेय कोण कहा जाता है, रसोई के निर्माण के लिए सबसे उत्तम मानी गई है। इस दिशा में बनाई गई रसोई घर के सदस्यों के करियर और व्यवसाय में नए अवसरों का सृजन करती है। इसके साथ ही, रसोई में बर्तनों और सामान की स्वच्छता का ध्यान रखना भी अत्यंत आवश्यक है। रात के समय सिंक में जूठे बर्तन छोड़ना नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है, जिससे धन की हानि होने लगती है। हर रात रसोई को पूरी तरह साफ करके ही सोना चाहिए। इसके अतिरिक्त, अनाज के भंडारण की दिशा और बर्तनों के रख-रखाव में भी विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। भारी अनाज और डिब्बों को हमेशा रसोई की दक्षिण या पश्चिम दिशा में व्यवस्थित रखना चाहिए। उत्तर या पूर्व दिशा को जितना संभव हो खाली और स्वच्छ रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार तेजी से होता है। रसोई में टूटे-फूटे बर्तन या बंद पड़ी घड़ियां और खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखने से हमेशा बचना चाहिए, क्योंकि ये भाग्य को बाधित करते हैं और आर्थिक मंदी को बढ़ावा देते हैं। किचन के रंगों का चुनाव भी धन और समृद्धि को आकर्षित करने में बड़ी भूमिका निभाता है। रसोई की दीवारों पर गहरे या काले रंगों के बजाय हल्के और जीवंत रंगों जैसे हल्का पीला, नारंगी या क्रीम रंग का प्रयोग करना चाहिए। ये रंग न केवल सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं, बल्कि घर में बरकत की निरंतरता भी बनाए रखते हैं। इन छोटे लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण बदलावों को जीवन में अपनाकर किसी भी घर की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार देखा जा सकता है।
डोभाल की अध्यक्षता में ब्रिक्स एनएसए मीटिंग, रणनीतिक सहयोग और सुरक्षा पर फोकस

नई दिल्ली । नई दिल्ली में 22 से 23 जून 2026 को ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन होने जा रहा है जिसकी अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस उच्च स्तरीय बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और एनएसए शामिल होंगे और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया तेजी से बदलते भू राजनीतिक परिदृश्य और नई तकनीकी चुनौतियों का सामना कर रही है। बैठक का मुख्य विषय आज की दुनिया के सामने मौजूद गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां तय किया गया है जिसके तहत साइबर सुरक्षा आतंकवाद सूचना युद्ध और उभरती तकनीक के सुरक्षा प्रभाव जैसे मुद्दों पर फोकस किया जाएगा। दो दिन चलने वाली इस बैठक में सदस्य देश अपने अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण साझा करेंगे ताकि सामूहिक सुरक्षा सहयोग को और मजबूत किया जा सके। विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक के दौरान काउंटर टेररिज्म और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग पर ब्रिक्स के संयुक्त कार्य समूहों की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। इससे सीमा पार खतरों से निपटने और एक मजबूत बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचा विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। भारत इस मंच के माध्यम से ब्रिक्स के भीतर सुरक्षा सहयोग को केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित न रखते हुए उसे रणनीतिक और तकनीकी मुद्दों तक विस्तारित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसी बीच इस बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के शामिल होने की संभावना भी चर्चा में है जो अगस्त 2025 के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा। वांग यी चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका भी निभाते हैं और एनएसए अजीत डोभाल के निमंत्रण पर भारत आ रहे हैं। इस यात्रा को भारत और चीन के बीच चल रहे संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि वैश्विक कूटनीतिक गतिविधियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की टाइमिंग के कारण पिछले कुछ ब्रिक्स बैठकों में उनकी अनुपस्थिति भी देखी गई थी। इस बार की बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें बड़े भू राजनीतिक समीकरणों के बीच सुरक्षा सहयोग के नए रास्ते तलाशने की कोशिश होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच रणनीतिक भरोसा बढ़ाने और वैश्विक सुरक्षा ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मैथ्यूस कुन्हा के दो गोलों से ब्राजील का शानदार प्रदर्शन, हैती पर एकतरफा जीत दर्ज कर वर्ल्ड कप में मजबूत किया दावा

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील ने अपने पारंपरिक आक्रामक खेल और मजबूत सामूहिक प्रदर्शन का शानदार परिचय देते हुए हैती को 3-0 से पराजित कर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इस जीत के साथ दक्षिण अमेरिकी दिग्गज टीम ने ग्रुप सी में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है और बेहतर गोल अंतर के आधार पर शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। मैच में सबसे अधिक चर्चा मैथ्यूस कुन्हा के प्रदर्शन की रही, जिन्होंने दो गोल कर टीम की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई। टूर्नामेंट के अपने पिछले मुकाबले में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद ब्राजील पर दबाव था। मोरक्को के खिलाफ ड्रॉ के बाद टीम की रणनीति और फिनिशिंग क्षमता को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि हैती के खिलाफ मैदान पर उतरी ब्राजीलियाई टीम पूरी तरह बदली हुई नजर आई। शुरुआती मिनटों से ही खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार आक्रमण करते हुए विरोधी टीम पर दबाव बनाया। ब्राजील के आक्रमण की अगुवाई मैथ्यूस कुन्हा, विनीसियस जूनियर और राफिन्हा ने की। तीनों खिलाड़ियों के बीच शानदार तालमेल देखने को मिला, जिससे हैती का रक्षात्मक ढांचा लगातार दबाव में रहा। मैच का पहला गोल पहले हाफ में आया, जब ब्राजील के हमले के दौरान गेंद हैती के डिफेंडर से टकराने के बाद गोल में पहुंच गई और टीम को शुरुआती बढ़त मिल गई। इस गोल ने ब्राजील को और अधिक आत्मविश्वास प्रदान किया। पहला गोल मिलने के बाद ब्राजील ने अपनी गति और तेज कर दी। कुछ ही देर बाद मैथ्यूस कुन्हा ने शानदार व्यक्तिगत कौशल का प्रदर्शन करते हुए बॉक्स के बाहर से बेहतरीन शॉट लगाया, जिसे रोक पाना गोलकीपर के लिए संभव नहीं था। इस गोल ने ब्राजील की बढ़त को दोगुना कर दिया और मुकाबले की दिशा लगभग तय कर दी। पहले हाफ के अंतिम क्षणों में विनीसियस जूनियर ने भी अपना नाम स्कोरशीट में दर्ज कराया। तेज मूवमेंट और सटीक फिनिशिंग के दम पर उन्होंने टीम के लिए तीसरा गोल किया। पहले हाफ की समाप्ति तक ब्राजील 3-0 की मजबूत बढ़त हासिल कर चुका था और हैती के लिए वापसी की संभावनाएं बेहद सीमित हो गई थीं। दूसरे हाफ में हैती ने आक्रामक रवैया अपनाने का प्रयास किया और कुछ मौकों पर ब्राजील के गोल पर खतरा भी पैदा किया। हालांकि ब्राजील की रक्षापंक्ति और गोलकीपर एलिसन ने शानदार संयम दिखाया। एक अवसर पर हैती के खिलाड़ी ने हेडर के जरिए गोल करने की कोशिश की, लेकिन एलिसन ने बेहतरीन बचाव करते हुए टीम की बढ़त बरकरार रखी। मुकाबले के अंतिम चरण में ब्राजील के युवा खिलाड़ी एंड्रिक ने भी गेंद को गोल में पहुंचाया, लेकिन रेफरी ने उसे ऑफसाइड करार दे दिया। इसके बावजूद ब्राजील की जीत पर कोई असर नहीं पड़ा और टीम ने पूरे आत्मविश्वास के साथ मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस परिणाम के साथ ब्राजील ने न केवल ग्रुप में अपनी स्थिति मजबूत की है, बल्कि खिताब की दौड़ में अपनी दावेदारी भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत की है। दूसरी ओर लगातार दूसरी हार झेलने वाली हैती की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई है। ब्राजील अब आगामी मुकाबलों में इसी लय को बरकरार रखते हुए नॉकआउट चरण में मजबूत स्थिति हासिल करने का प्रयास करेगा।
चेन्नई वनडे में अफगानिस्तान का बड़ा फैसला, टॉस जीतकर चुनी बल्लेबाजी; सीरीज बचाने की आखिरी कोशिश में टीम ने किए कई बदलाव

नई दिल्ली । भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली जा रही एकदिवसीय श्रृंखला के तीसरे और अंतिम मुकाबले में अफगानिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया है। चेन्नई के प्रतिष्ठित एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे इस मुकाबले में दोनों टीमों के लिए अलग-अलग लक्ष्य हैं। जहां भारतीय टीम श्रृंखला में क्लीन स्वीप दर्ज करने के इरादे से मैदान में उतरी है, वहीं अफगानिस्तान की कोशिश सम्मानजनक जीत हासिल कर दौरे का समापन करने की है। श्रृंखला के शुरुआती दोनों मुकाबलों में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की थी। लगातार दो जीत के साथ मेजबान टीम पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुकी है। ऐसे में अंतिम मुकाबला परिणाम के लिहाज से भले ही निर्णायक न हो, लेकिन दोनों टीमों के लिए यह अपनी तैयारियों और संयोजन को परखने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। टॉस जीतने के बाद अफगानिस्तान के कप्तान ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। टीम प्रबंधन का मानना है कि चेन्नई की पिच शुरुआती चरण में बल्लेबाजों के लिए अनुकूल हो सकती है और बड़ा स्कोर खड़ा कर दबाव बनाने की रणनीति टीम के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इसी सोच के तहत अफगानिस्तान ने अपनी प्लेइंग इलेवन में कई बदलाव किए हैं, जिससे टीम को नया संतुलन और अतिरिक्त मजबूती देने का प्रयास किया गया है। दूसरी ओर भारतीय कप्तान ने भी स्वीकार किया कि यदि टॉस उनके पक्ष में जाता तो टीम पहले बल्लेबाजी को ही प्राथमिकता देती। हालांकि भारतीय खेमे का आत्मविश्वास मजबूत दिखाई दे रहा है, क्योंकि टीम ने पूरे दौरे में संतुलित और आक्रामक क्रिकेट का प्रदर्शन किया है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में खिलाड़ियों ने प्रभावशाली योगदान दिया है। भारतीय बल्लेबाजी की बात करें तो शीर्ष क्रम शानदार फॉर्म में नजर आ रहा है। पिछले मुकाबले में टीम के प्रमुख बल्लेबाजों ने बड़ी साझेदारी कर विपक्षी गेंदबाजों को दबाव में ला दिया था। युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के संतुलित प्रदर्शन ने भारतीय बल्लेबाजी को मजबूत बनाया है। मध्यक्रम में भी टीम के पास ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं जो तेज गति से रन बनाने की क्षमता रखते हैं। गेंदबाजी विभाग में भी भारत को लगातार सफलता मिली है। तेज गेंदबाजों और स्पिनरों के संयोजन ने अफगानिस्तान के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। नई गेंद से शुरुआती सफलता और मध्य ओवरों में विकेट निकालने की क्षमता ने भारतीय टीम को श्रृंखला में बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अफगानिस्तान के लिए अब तक की श्रृंखला चुनौतीपूर्ण रही है। टीम के कुछ बल्लेबाजों ने व्यक्तिगत रूप से अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन सामूहिक प्रयास की कमी स्पष्ट दिखाई दी। शीर्ष क्रम के कुछ खिलाड़ियों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में सफल नहीं रहे। गेंदबाजी विभाग भी अपेक्षित प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहा, जिसके कारण टीम को लगातार दबाव का सामना करना पड़ा। तीसरे मुकाबले में अफगानिस्तान की उम्मीदें उसके अनुभवी खिलाड़ियों पर टिकी होंगी। यदि शीर्ष क्रम मजबूत शुरुआत देने में सफल रहता है तो टीम प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा कर सकती है। वहीं भारत की नजर एक और प्रभावशाली प्रदर्शन के साथ श्रृंखला को 3-0 से समाप्त करने पर होगी। चेन्नई में खेला जा रहा यह मुकाबला युवा खिलाड़ियों को खुद को साबित करने और टीम प्रबंधन को भविष्य की योजनाओं के लिए विकल्प तलाशने का भी अवसर प्रदान कर रहा है। क्रिकेट प्रेमियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या भारत क्लीन स्वीप पूरा कर पाएगा या अफगानिस्तान अंतिम मुकाबले में वापसी कर सम्मान बचाने में सफल रहेगा।
चेन्नई में सीरीज के आखिरी मुकाबले की जंग, भारत की नजर क्लीन स्वीप पर तो अफगानिस्तान के सामने सम्मान बचाने की चुनौती

नई दिल्ली । भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला चेन्नई के एमए चिदंबरम क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। शुरुआती दोनों मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज कर भारतीय टीम पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुकी है और अब उसकी नजर क्लीन स्वीप पर टिकी है। दूसरी ओर अफगानिस्तान के लिए यह मुकाबला प्रतिष्ठा बचाने का अवसर होगा। लगातार दो हार के बाद टीम अंतिम मैच में बेहतर प्रदर्शन कर सीरीज का समापन सकारात्मक अंदाज में करना चाहेगी। भारतीय टीम इस समय शानदार लय में दिखाई दे रही है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में खिलाड़ियों ने प्रभावित किया है। कप्तान शुभमन गिल सीरीज के सबसे सफल बल्लेबाज बनकर उभरे हैं। उन्होंने शुरुआती दोनों मुकाबलों में लगातार रन बनाकर टीम को मजबूत शुरुआत दी है। उनकी कप्तानी और बल्लेबाजी ने भारतीय टीम को आत्मविश्वास प्रदान किया है। वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी उपयोगिता साबित की है। पिछले मुकाबले में उनकी शतकीय पारी ने भारतीय बल्लेबाजी क्रम की मजबूती को और अधिक रेखांकित किया। रोहित शर्मा ने भी आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए टीम को तेज शुरुआत दिलाई थी। हालांकि अंतिम मुकाबले में टीम प्रबंधन की निगाहें यशस्वी जायसवाल और श्रेयस अय्यर जैसे खिलाड़ियों पर भी रहेंगी, जिनसे बड़ी पारी की उम्मीद की जा रही है। मध्यक्रम का मजबूत प्रदर्शन भारत को एक और बड़ी जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। गेंदबाजी विभाग में भी भारतीय टीम का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। तेज गेंदबाजों और युवा खिलाड़ियों ने अफगानिस्तान के बल्लेबाजों को लगातार दबाव में रखा है। नई गेंद से मिली सफलता और मध्य ओवरों में विकेट लेने की क्षमता ने भारत को दोनों मुकाबलों में बढ़त दिलाई। युवा गेंदबाजों ने भी अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। दूसरी तरफ अफगानिस्तान के लिए यह सीरीज अब तक निराशाजनक रही है। टीम के कुछ बल्लेबाजों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश खिलाड़ी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके हैं। शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने कुछ मौकों पर संघर्ष जरूर किया, लेकिन साझेदारियों की कमी और लगातार विकेट गिरने के कारण टीम बड़े स्कोर तक नहीं पहुंच सकी। गेंदबाजी में भी अफगानिस्तान का प्रदर्शन कमजोर रहा है, जिसका फायदा भारतीय बल्लेबाजों ने भरपूर उठाया। चेन्नई का एमए चिदंबरम स्टेडियम पारंपरिक रूप से स्पिन गेंदबाजों के लिए अनुकूल माना जाता है। यहां की सतह पर गेंद कुछ धीमी गति से आती है, जिससे बल्लेबाजों को धैर्य के साथ खेलना पड़ता है। हालांकि हाल के वर्षों में यहां बल्लेबाजों को भी मदद मिलती रही है और बड़े स्कोर देखने को मिले हैं। ऐसे में दोनों टीमों को परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति तैयार करनी होगी। मौसम भी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है। पूर्वानुमान के अनुसार मैच के दौरान बादल छाए रहने और बारिश की संभावना बनी हुई है। यदि मौसम ने हस्तक्षेप किया तो मैच की गति और रणनीति दोनों प्रभावित हो सकती हैं। तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहने की संभावना है, जिससे खिलाड़ियों की फिटनेस और सहनशक्ति भी परीक्षा में रहेगी। कुल मिलाकर यह मुकाबला सीरीज परिणाम से अधिक दोनों टीमों की मानसिकता और प्रदर्शन का परीक्षण होगा। भारत जहां अपनी जीत की लय को बरकरार रखते हुए क्लीन स्वीप का लक्ष्य लेकर उतरेगा, वहीं अफगानिस्तान सम्मानजनक जीत के साथ दौरे का समापन करने की पूरी कोशिश करेगा।