ई-अटेंडेंस विवाद के बीच महिला शिक्षकों को राहत: संतान पालन अवकाश को माना जाएगा उपस्थिति

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में शिक्षकों के तबादलों को लेकर चल रहे विवाद के बीच स्कूल शिक्षा विभाग ने महिला शिक्षकों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन महिला शिक्षकों को सक्षम प्राधिकारी द्वारा संतान पालन अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) स्वीकृत किया गया है, उनकी अवकाश अवधि को ई-अटेंडेंस प्रणाली में उपस्थिति के रूप में मान्यता दी जाएगी। इस निर्णय से उन महिला शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता के कारण स्वैच्छिक तबादलों के लिए आवेदन करने में कठिनाइयों का सामना कर रही थीं। प्रदेश में स्वैच्छिक तबादलों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस को अनिवार्य शर्त बनाया है। इस फैसले का प्रदेश के करीब सवा चार लाख शिक्षकों द्वारा विरोध किया जा रहा था। विशेष रूप से महिला शिक्षकों का कहना था कि संतान पालन अवकाश के दौरान उनकी अनुपस्थिति को ई-अटेंडेंस में गैरहाजिरी माना जा रहा है, जिससे वे तबादला प्रक्रिया में पात्रता खो सकती हैं। इसी स्थिति को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि स्वीकृत संतान पालन अवकाश की अवधि को कार्य दिवसों में उपस्थिति के रूप में जोड़ा जाएगा। इससे महिला शिक्षकों की ई-अटेंडेंस प्रतिशतता प्रभावित नहीं होगी और वे तबादले के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा कर सकेंगी। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन महिला शिक्षकों को संतान पालन अवकाश स्वीकृत है, वे अपने प्रकरण से संबंधित आवेदन राज्य स्तरीय अभ्यावेदन निराकरण समिति को भेज सकती हैं। विभाग ने इसके लिए विशेष ई-मेल व्यवस्था भी उपलब्ध कराई है। समिति प्रत्येक मामले की जांच करेगी और पात्र पाए जाने पर अवकाश अवधि को ई-अटेंडेंस में उपस्थिति के रूप में दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने जिलों में ऐसे सभी मामलों का संकलन कर उन्हें शीघ्र राज्य स्तरीय समिति को भेजें। इस आदेश की प्रतियां मंत्रालय, कलेक्टरों, संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को भी भेज दी गई हैं, ताकि निर्णय का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। शिक्षा विभाग का यह कदम ऐसे समय आया है जब ई-अटेंडेंस की शर्त को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा था। कई शिक्षक संगठनों ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए सरकार से नियमों में संशोधन की मांग की थी। महिला शिक्षकों को मिली यह राहत विभाग की ओर से संतुलित समाधान की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से न केवल महिला शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि तबादला प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील और न्यायसंगत बनाने में भी मदद मिलेगी। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि राज्य स्तरीय समिति इन मामलों का निराकरण कितनी तेजी से करती है और अन्य वर्गों के शिक्षकों की मांगों पर विभाग क्या रुख अपनाता है।
3000 रुपये की कमाई से बिग बॉस स्टार तक, अर्चना गौतम की प्रेरणादायक संघर्ष कहानी

नई दिल्ली । मनोरंजन जगत की चमक-दमक के पीछे संघर्ष, मेहनत और धैर्य की लंबी कहानी छिपी होती है। इसका ताजा उदाहरण अभिनेत्री अर्चना गौतम हैं, जिन्होंने हाल ही में अपने करियर के शुरुआती दिनों के कुछ ऐसे अनुभव साझा किए, जिन्हें सुनकर हर कोई हैरान रह गया। आज भले ही अर्चना गौतम टीवी और सोशल मीडिया की चर्चित हस्ती हों, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कई छोटे-बड़े संघर्षों का सामना किया है। ‘बिग बॉस 16’ से घर-घर में पहचान बनाने वाली अर्चना गौतम हाल ही में एक रियलिटी शो में पहुंचीं, जहां उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर की चुनौतियों पर खुलकर बात की। अर्चना ने बताया कि इंडस्ट्री में पहचान बनाने से पहले उन्होंने कई छोटे किरदार निभाए। यहां तक कि लोकप्रिय क्राइम शो ‘CID’ में उन्होंने एक मृत शरीर यानी लाश का रोल भी किया था। अर्चना के अनुसार, उस समय उन्हें प्रतिदिन 3000 रुपये का भुगतान किया जाता था। हालांकि यह रकम आज भले ही छोटी लगे, लेकिन उस दौर में उनके लिए यह काम और कमाई दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण थे। उन्होंने बताया कि यह उनके करियर का तीसरा टेलीविजन शो था और उस भूमिका ने उन्हें अभिनय की दुनिया को करीब से समझने का मौका दिया। अर्चना ने सेट से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने हंसते हुए बताया कि जब वह लाश बनकर बिना हिले-डुले लेटी रहती थीं, तब शो के सीनियर कलाकार उनकी आंखें खोलकर देखते थे कि कहीं वह पलक तो नहीं झपका रहीं। क्योंकि एक मृत शरीर के किरदार में बिल्कुल स्थिर रहना जरूरी होता था। उनके लिए यह अनुभव नया और चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि लंबे समय तक बिना किसी हरकत के पड़े रहना आसान नहीं था। अभिनेत्री ने कहा कि लोग अक्सर ग्लैमर इंडस्ट्री को बाहर से देखकर यह मान लेते हैं कि यहां सफलता आसानी से मिल जाती है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग होती है। नए कलाकारों को छोटे-छोटे रोल, लंबे इंतजार, ऑडिशन और असफलताओं के दौर से गुजरना पड़ता है। कई बार मेहनत का परिणाम तुरंत नहीं मिलता, लेकिन लगातार प्रयास ही सफलता की राह खोलते हैं। अर्चना गौतम की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कोई भी उपलब्धि रातों-रात हासिल नहीं होती। छोटे किरदारों से शुरू हुआ उनका सफर आज उन्हें मनोरंजन जगत की चर्चित हस्तियों में शामिल कर चुका है। उनके संघर्ष की यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सपना देखते हैं। आज अर्चना गौतम जिस आत्मविश्वास और लोकप्रियता के साथ दर्शकों के बीच मौजूद हैं, उसके पीछे वर्षों की मेहनत, धैर्य और संघर्ष की लंबी यात्रा छिपी हुई है। यही वजह है कि उनकी सफलता की कहानी लाखों युवाओं को अपने सपनों के लिए लगातार प्रयास करने की प्रेरणा देती है।
योग दिवस पर फिटनेस का जश्न: अक्षय कुमार से शिल्पा शेट्टी तक, सितारों ने दिया स्वस्थ जीवन का संदेश

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर पूरे देश में योग की धूम देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर विभिन्न राज्यों के जनप्रतिनिधियों और लाखों लोगों ने योगाभ्यास कर स्वास्थ्य और फिटनेस का संदेश दिया। इस खास मौके पर बॉलीवुड सितारे भी पीछे नहीं रहे। अक्षय कुमार, शिल्पा शेट्टी, सुनील शेट्टी, नील नितिन मुकेश और फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा सहित कई नामी हस्तियां अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हुईं और लोगों को योग अपनाने के लिए प्रेरित किया। मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया के साथ अभिनेता अक्षय कुमार ने योगाभ्यास किया। अक्षय ने उपस्थित लोगों के साथ विभिन्न योगासन किए और नियमित व्यायाम तथा योग को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस वर्ष योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ उम्र के लिए योग’ रही, जिसका संदेश भी कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया गया। वहीं हरियाणा के गुरुग्राम में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने योग सत्र का नेतृत्व किया। फिटनेस और योग के प्रति अपने समर्पण के लिए पहचानी जाने वाली शिल्पा ने हजारों लोगों के साथ योग किया और जीवन में अनुशासन तथा नियमितता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को अंदर से मजबूत, संतुलित और केंद्रित बनाता है। शिल्पा ने लोगों से अपील की कि वे योग को केवल एक दिन की गतिविधि न मानें, बल्कि इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। कार्यक्रम के दौरान उनका बेटा भी मौजूद रहा, जिसे वे योग के विभिन्न आसनों का अभ्यास कराती नजर आईं। अभिनेता सुनील शेट्टी ने भी योग दिवस पर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि फिट रहने का सबसे बड़ा मंत्र नियमितता है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन थोड़ा समय भी योग को देता है तो उसके सकारात्मक परिणाम निश्चित रूप से दिखाई देते हैं। उनके अनुसार योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने की एक संपूर्ण प्रक्रिया है। अभिनेता नील नितिन मुकेश ने योग को मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ते हुए कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। योग व्यक्ति को तनाव से दूर रखता है और जीवन में संतुलन स्थापित करने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि योग हमें अनुशासन और आत्मविश्वास सिखाता है, जो सफलता की राह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ अभिनेता मुकेश ऋषि ने भी योग के फायदों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों से योग और व्यायाम उनके जीवन का हिस्सा रहे हैं। वहीं फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा ने कहा कि यदि लोग हर दिन योग दिवस की भावना के साथ योग करें तो वे लंबे समय तक स्वस्थ और ऊर्जावान रह सकते हैं। योग दिवस के अवसर पर बॉलीवुड सितारों की सक्रिय भागीदारी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि योग केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का प्रभावी माध्यम है।
लो भई! ‘ब्रश से रंगे जा रहे समोसे’ वाले वीडियो ने मचाई हलचल, लेकिन सच निकला कुछ और

नई दिल्ली। भारत में समोसा सिर्फ एक स्नैक नहीं, बल्कि लोगों की पसंद और स्वाद का हिस्सा है। ऐसे में जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक व्यक्ति समोसे जैसी दिखने वाली वस्तुओं पर ब्रश से रंग लगाता नजर आया, तो लोगों के बीच हड़कंप मच गया। वीडियो शेयर करने वालों ने दावा किया कि बाजार में बेचने से पहले समोसों को रंगा जा रहा है। वीडियो देखते ही कई लोगों ने खाद्य पदार्थों में मिलावट और गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई। कुछ यूजर्स ने इसे फूड सेफ्टी का गंभीर मामला बताया, जबकि कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब समोसे पर भी भरोसा करना मुश्किल हो गया है। वीडियो में आखिर दिखा क्या?वायरल क्लिप में एक व्यक्ति जमीन पर बैठा दिखाई देता है। उसके आसपास बड़ी संख्या में त्रिकोण आकार की वस्तुएं रखी होती हैं, जो पहली नजर में समोसे जैसी लगती हैं। कुछ का रंग हल्का होता है, जबकि कुछ बिल्कुल तले हुए सुनहरे समोसे जैसे दिखाई देते हैं। व्यक्ति हाथ में ब्रश लेकर उन पर रंग लगाता नजर आता है। पास में अलग-अलग रंगों से भरे छोटे बर्तन भी दिखाई देते हैं। यही दृश्य देखकर लोगों ने मान लिया कि ये खाने वाले समोसे हैं और उन्हें आकर्षक बनाने के लिए रंगा जा रहा है। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहसवीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। एक वर्ग ने इसे मिलावट का उदाहरण बताया, जबकि दूसरे वर्ग ने इस दावे पर सवाल उठाए। कई लोगों ने कहा कि बिना पूरी जानकारी के किसी वीडियो पर विश्वास करना सही नहीं है। कुछ यूजर्स ने ध्यान दिलाया कि जिस तरीके से रंग भरा जा रहा है, वह किसी कलाकार के काम जैसा लग रहा है, न कि खाद्य सामग्री तैयार करने जैसा। क्या थे ये असली समोसे?बाद में कई सोशल मीडिया यूजर्स ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिखाई दे रही वस्तुएं खाने के लिए नहीं थीं। उनका दावा था कि ये मिट्टी, क्ले, प्लास्टर या अन्य सामग्री से बने सजावटी मॉडल थे, जिन्हें वास्तविक समोसे जैसा रूप देने के लिए रंगा जा रहा था। कई लोगों ने बताया कि बाजार में सजावट, विज्ञापन, फोटोशूट और डिस्प्ले के लिए नकली खाद्य मॉडल बनाए जाते हैं। वीडियो में दिखाई गई वस्तुएं भी संभवतः उसी प्रकार की थीं। वायरल कंटेंट से सीखयह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला हर वीडियो पूरी सच्चाई नहीं बताता। कई बार अधूरी जानकारी या गलत दावों के साथ साझा किए गए वीडियो लोगों में भ्रम पैदा कर देते हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी वायरल वीडियो को देखकर तुरंत निष्कर्ष निकालने के बजाय उसके स्रोत और तथ्यों की जांच करना जरूरी है। डिजिटल युग में जागरूकता और तथ्य जांच (फैक्ट चेक) पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
4 दिन रजस्वला रहेंगी मां कामाख्या, बंद रहेंगे मंदिर के कपाट; अंबुबाची मेले में उमड़ेगी आस्था

नई दिल्ली । असम के Kamakhya Temple में 22 जून से विश्व प्रसिद्ध अंबुबाची महापर्व का शुभारंभ होने जा रहा है। 51 शक्तिपीठों में शामिल इस मंदिर को देवी शक्ति की आराधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नीलाचल पर्वत पर स्थित इस शक्तिपीठ में देवी सती का योनि भाग गिरा था, जिसके कारण यह स्थान विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। अंबुबाची पर्व के दौरान मान्यता है कि मां कामाख्या रजस्वला होती हैं। इसी वजह से मंदिर के कपाट तीन से चार दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस अवधि में नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन भी स्थगित रहते हैं। श्रद्धालु इसे देवी की विश्राम अवधि मानते हैं, जिसके बाद मंदिर पुनः खुलने पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जब लाल हो जाता है सफेद वस्त्रकामाख्या मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यहां देवी की कोई प्रतिमा नहीं है। मंदिर के गर्भगृह में प्राकृतिक योनि-आकार की शिला की पूजा होती है, जिससे निरंतर जलधारा बहती रहती है। अंबुबाची पर्व शुरू होने से पहले पुजारी इस शिला के समीप सफेद वस्त्र रखते हैं। मान्यता के अनुसार, जब मंदिर के कपाट पुनः खोले जाते हैं तो यह वस्त्र लाल रंग का दिखाई देता है। इस पवित्र वस्त्र के छोटे-छोटे टुकड़ों को श्रद्धालुओं में प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाता है। भक्त इसे देवी की कृपा और शुभता का प्रतीक मानते हैं। ब्रह्मपुत्र नदी और रहस्य का आकर्षणअंबुबाची मेले के दौरान यह भी मान्यता है कि पास बहने वाली Brahmaputra River का जल लालिमा लिए दिखाई देता है। श्रद्धालु इसे देवी की दिव्य लीला मानते हैं। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार जल में खनिज तत्वों और अन्य प्राकृतिक कारणों से ऐसा प्रभाव देखने को मिल सकता है। दुनिया का सबसे बड़ा तांत्रिक मेलाअंबुबाची मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि तांत्रिक साधना का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है। देशभर से साधु, संत, अघोरी और तांत्रिक यहां पहुंचकर विशेष साधनाएं करते हैं। यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे बड़ा तांत्रिक मेला भी कहा जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस अवसर पर मां कामाख्या के दर्शन और आशीर्वाद के लिए गुवाहाटी पहुंचते हैं। मंदिर के कपाट खुलने के बाद विशेष पूजा-अर्चना होती है और फिर भक्तों के लिए दर्शन प्रारंभ किए जाते हैं।
श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्म का संगम, ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ सिद्धचक्र महामंडल विधान

मध्यप्रदेश । राजधानी भोपाल के वर्धमान नगर स्थित दाता कॉलोनी में रविवार को धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री महावीर जैन मंदिर परिसर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ विधिवत रूप से किया गया। आयोजन के पहले दिन मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की उपस्थिति से गुलजार रहा और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया। कार्यक्रम की शुरुआत जिनालय से निकाली गई भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। गाजे-बाजे, धार्मिक जयघोष और भजनों के बीच निकली इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण किए और हाथों में अष्ट द्रव्य लेकर भगवान की भक्ति में भावपूर्ण भजन गाते हुए यात्रा को भव्य स्वरूप प्रदान किया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं के जयकारों से वातावरण धर्ममय हो उठा। धार्मिक अनुष्ठानों से गूंजा मंदिर परिसरप्रवक्ता अंशुल जैन के अनुसार इस पुण्य आयोजन में मालती (स्व.) अनोखी लाल जैन कठनेरा परिवार ने पुण्यार्जक परिवार के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। धर्म इंद्र सविता नवीन एवं दिगंबर दीक्षा चंदना द्वारा विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ अनुष्ठानों में भाग लिया। कलश यात्रा के पश्चात देव आज्ञा, गुरु आज्ञा, मंडप शुद्धि, पात्र शुद्धि तथा अन्य पारंपरिक विधि-विधानों का आयोजन किया गया। वैदिक और जैन परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुई इन धार्मिक क्रियाओं ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। 28 जून को होगी पूर्णाहुतिआठ दिनों तक चलने वाला यह पावन श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 28 जून को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा। इस दौरान प्रतिदिन विशेष पूजन, अभिषेक, धार्मिक प्रवचन और विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन समिति के अनुसार श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि अधिक से अधिक लोग धर्म लाभ प्राप्त कर सकें। कार्यक्रम में मनोज बांगा, विनोद (एमपीटी), विजय जैन, विनोद जैन, प्रमोद, विकास, निखिलेश, वीरेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन और श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सफलता और समाज की सुख-समृद्धि के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और सामूहिक सहभागिता को भी मजबूत करने का संदेश देता है।
खर्च पर लगाम! अब दिल्ली जाने से पहले लेनी होगी परमिशन, MP सरकार का बड़ा फैसला

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों पर नियंत्रण लगाने और संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेशों के अनुसार अब प्रदेश के आईएएस, आईपीएस और सचिव स्तर के अधिकारियों को सरकारी खर्च पर दिल्ली, गुजरात, अन्य राज्यों या विदेश यात्रा करने से पहले मुख्य सचिव की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वहीं अन्य अधिकारियों को राज्य से बाहर की शासकीय यात्रा के लिए अपने विभागीय सचिव से मंजूरी लेनी होगी। सरकार का मानना है कि अनावश्यक यात्राओं और प्रशासनिक खर्चों में कटौती कर राज्य के वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ऑनलाइन बैठकों को मिलेगा बढ़ावासरकार ने स्पष्ट किया है कि विभागीय बैठकों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सेमिनारों को अधिकतम डिजिटल माध्यमों के जरिए आयोजित किया जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अधिकारियों की अनावश्यक यात्रा कम हो और समय व धन दोनों की बचत हो सके। इसके अलावा अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, बस सेवा और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। ऊर्जा बचत पर सरकार का विशेष फोकसराज्य सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। कार्यालयों में ऊर्जा ऑडिट कराने, बिजली खपत की निगरानी करने तथा शाम 7 बजे के बाद अनावश्यक रूप से चल रहे पंखे, लाइट, कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरण बंद रखने को कहा गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा देने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया है। प्राकृतिक खेती और हरित विकास को प्रोत्साहनकृषि विभाग को प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं निर्माण एजेंसियों को फ्लाई ऐश, प्लास्टिक वेस्ट बिटुमिन और अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री का अधिक उपयोग करने के लिए कहा गया है। सरकार का लक्ष्य विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ना है। PNG और LPG कनेक्शनों की होगी जांचसरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क के विस्तार में सहयोग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उज्ज्वला योजना और सामान्य एलपीजी कनेक्शनों में डुप्लीकेट तथा अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर कार्रवाई करने का अभियान भी चलाया जाएगा। फूड ऑयल के कम उपयोग पर चलेगा अभियानलोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को खाद्य तेल के अत्यधिक उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए व्यवहार परिवर्तन आधारित अभियान चलाए जाएंगे, जिससे लोगों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित हो सके। 90 दिन का जन-जागरूकता अभियानजनसंपर्क विभाग को ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर 90 दिनों का व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पर्यटन विभाग को “देखो अपना देश” और “सबसे पहले मध्यप्रदेश” जैसे अभियानों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने सभी विभागों को इन निर्देशों के पालन की मासिक रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने के लिए भी कहा है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी बल्कि ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।
योग दिवस पर MP में दिखा उत्साह: राष्ट्रपति ने किया योग, इंदौर ने बनाया रिकॉर्ड, राजगढ़ में मंत्री की तबीयत बिगड़ी

मध्यप्रदेश । अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को मध्य प्रदेश के शहरों, कस्बों और गांवों में योग का उत्साह देखने को मिला। राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम जबलपुर के सदर स्थित गैरिसन ग्राउंड में आयोजित किया गया, जहां देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सामूहिक योगाभ्यास किया। इस दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सामाजिक संगठन और आम नागरिक उपस्थित रहे। योग कार्यक्रम ने स्वास्थ्य, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों की आस्था को एक बार फिर मजबूती से सामने रखा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने योगाभ्यास से पहले सभी प्रतिभागियों का अभिवादन किया और योग को स्वस्थ जीवन का आधार बताया। उनके साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी विभिन्न योगासन और प्राणायाम किए। गैरिसन ग्राउंड में सैकड़ों लोगों ने एक साथ योग कर सामूहिक स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश दिया। वहीं, इंदौर ने इस बार योग दिवस पर एक अनूठा रिकॉर्ड अपने नाम किया। शहर में आयोजित विशाल सामूहिक योग कार्यक्रम में हजारों लोगों ने तीन मिनट से अधिक समय तक लगातार भ्रामरी प्राणायाम किया। आयोजकों के अनुसार यह योग के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है। प्रशिक्षकों के निर्देशन में हुए इस आयोजन ने लोगों को नियमित योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। राजधानी भोपाल में भी योग दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। टीटी नगर स्टेडियम और बड़े तालाब क्षेत्र में हजारों लोगों ने योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। प्रशासन की ओर से पेयजल, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे प्रतिभागियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। प्रदेश के अन्य जिलों में भी योग दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। नर्मदापुरम के सेठानी घाट, महेश्वर के माहिष्मती घाट, सांची स्तूप परिसर और कई ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों पर सामूहिक योगाभ्यास हुआ। महिलाओं ने भारतीय परंपरा और संस्कृति पर आधारित विशेष योग प्रस्तुतियां भी दीं, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा। हालांकि राजगढ़ में आयोजित योग दिवस कार्यक्रम के दौरान एक अप्रत्याशित घटना भी सामने आई। टाइफाइड से पीड़ित मंत्री नारायण सिंह पंवार की योग कार्यक्रम के दौरान तबीयत बिगड़ गई। कमजोरी महसूस होने पर स्टाफ ने उन्हें सहारा देकर मंच के पीछे बैठाया। राहत की बात यह रही कि प्राथमिक देखभाल के बाद उनकी स्थिति सामान्य बताई गई। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद तेज हवा चलने से आयोजन स्थल का आधा टेंट भी गिर गया, हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पूरे मध्य प्रदेश में आयोजित कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन की कुंजी है। बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी ने साबित कर दिया कि योग अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
MP Weather Update: 37 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 दिन लेट मानसून 25 जून तक देगा दस्तक

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की देरी अब चिंता का कारण बनती जा रही है। सामान्य तौर पर 15 जून तक प्रदेश में दस्तक देने वाला मानसून इस बार 6 दिन पीछे चल रहा है और मौसम विभाग ने इसके 25 जून तक पहुंचने की संभावना जताई है। मानसून के इंतजार के बीच प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं, जिसके चलते कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर बना हुआ है। रविवार को इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, शिवपुरी, रीवा, शहडोल, सतना, मुरैना, धार, झाबुआ और अलीराजपुर समेत 37 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। शनिवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने करवट ली। उज्जैन में 2.4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि भोपाल में 1.3 इंच पानी बरसा। इंदौर, ग्वालियर, श्योपुर, सीहोर और धार के पीथमपुर सहित कई इलाकों में तेज बारिश हुई। बारिश और बादलों की वजह से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। धार में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि भोपाल में 33.4 और इंदौर में 35.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार मानसून फिलहाल तेलंगाना क्षेत्र में धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। यदि इसकी रफ्तार बनी रही तो 23 जून तक छत्तीसगढ़ पहुंच सकता है और इसके बाद 25 जून के आसपास मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा। पिछले वर्ष मानसून 16 जून को ही प्रदेश में पहुंच गया था, लेकिन इस बार इसकी गति काफी धीमी है। मानसून की देरी का असर जून महीने की बारिश पर भी दिखाई दे रहा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 46 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा असर पूर्वी मध्य प्रदेश पर पड़ा है, जहां जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में सामान्य से करीब 65 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में भी वर्षा का आंकड़ा सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम है। कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई के लिए कम से कम चार इंच बारिश आवश्यक है ताकि मिट्टी में पर्याप्त नमी बन सके। कई किसानों ने मानसून आने की उम्मीद में पहले ही सोयाबीन की बुवाई कर दी थी, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे उनकी लागत बढ़ेगी। फिलहाल प्रदेशभर के किसानों और आम लोगों की नजरें आसमान पर टिकी हुई हैं। मौसम विभाग को उम्मीद है कि अगले चार दिनों में मानसून सक्रिय होकर मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा, जिससे गर्मी और बारिश की अनिश्चितता के बीच राहत मिलने की संभावना बनेगी।
NEET-UG री-एग्जाम 2026: कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा आज, भोपाल-इंदौर समेत प्रदेशभर में हाई अलर्ट

मध्यप्रदेश । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के री-एग्जाम को लेकर रविवार को मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा आयोजित की जा रही है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सतना, खंडवा और अन्य जिलों में हजारों अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। भोपाल में 32 परीक्षा केंद्रों पर करीब 13,774 अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे हैं, जबकि इंदौर में 14 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। ग्वालियर में लगभग 5 हजार, जबलपुर में 10 हजार, छिंदवाड़ा में 4,303, गुना में 1,839, विदिशा में 1,709, नर्मदापुरम में 1,283 और अशोकनगर में 865 अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने की संभावना जताई गई है। इस बार परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। परीक्षा सामग्री ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है तथा सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की निगरानी में सामग्री केंद्रों तक पहुंचाई गई। सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। अभ्यर्थियों का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा है और इसके लिए अतिरिक्त मशीनों तथा कर्मचारियों की तैनाती की गई है। परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्रों पर सुबह 11 बजे से रिपोर्टिंग, बायोमेट्रिक जांच और फ्रिस्किंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित होगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों को निर्धारित समय से अतिरिक्त 65 मिनट का समय भी प्रदान किया जाएगा। परीक्षा को लेकर ड्रेस कोड का भी सख्ती से पालन कराया जा रहा है। छात्रों को हल्के रंग के साधारण कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर, ईयरफोन, बेल्ट, आभूषण, पर्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। धार्मिक या पारंपरिक पोशाक पहनकर आने वाले अभ्यर्थियों को अतिरिक्त जांच प्रक्रिया के कारण समय से पहले पहुंचने की सलाह दी गई है। री-एग्जाम के लिए आने वाले छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भोपाल, विदिशा, नर्मदापुरम, गुना और अशोकनगर रेलवे स्टेशनों पर विशेष हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं। यहां छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने, परिवहन सुविधाओं और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि कुछ अभ्यर्थियों को अंतिम समय में परीक्षा केंद्र बदलने जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ा। मुरैना के एक छात्र का केंद्र ग्वालियर से बदलकर भोपाल कर दिया गया, जिससे उसे अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ी। वहीं कई छात्रों ने पिछले डेढ़ महीने को तनाव और अनिश्चितता से भरा बताया। उनका कहना है कि परीक्षा से जुड़े विवादों ने मानसिक दबाव बढ़ाया, लेकिन अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने पहुंचे हैं। प्रदेशभर में प्रशासन, पुलिस और परीक्षा एजेंसियों की निगरानी में परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के प्रयास जारी हैं। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परीक्षा पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।