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राज्यपाल के निर्देशों पर विभाग की चुप्पी आदिवासी विकास रिपोर्ट 2 महीने से लंबित

नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामला चर्चा में आ गया है। राज्यपाल मंगू भाई पटेल द्वारा मांगी गई रिपोर्ट दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राजभवन तक नहीं पहुंची है। मामला आदिवासी और अनुसूचित क्षेत्रों में जल संसाधन विभाग द्वारा कराए गए विकास कार्यों और उन पर खर्च किए गए बजट से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट में देरी को लेकर अब विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने आदिवासी क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा के उद्देश्य से अप्रैल महीने में जल संसाधन विभाग की प्रमुख अभियंता को पत्र भेजा था। इस पत्र में विशेष रूप से आदिवासी अंचलों में जल आपूर्ति और जल जीवन मिशन से संबंधित परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। साथ ही यह भी पूछा गया था कि इन योजनाओं का लाभ कितने लोगों तक पहुंचा और उनका वास्तविक प्रभाव क्या रहा। राजभवन की ओर से भेजे गए इस पत्र को दो महीने से अधिक समय बीत चुका है लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। बताया जा रहा है कि विभाग के 116 मुख्य अभियंताओं को इस संबंध में जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन अपेक्षित कार्रवाई समय पर नहीं हो सकी। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जून महीने में जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना के संचनालय और मध्य प्रदेश शासन ने भी विभाग को अलग से पत्र लिखकर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई और मामला लंबित बना हुआ है। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल बजट खर्च को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग ने पिछले एक वर्ष के दौरान आदिवासी क्षेत्रों में 38 विभिन्न परियोजनाओं पर लगभग 1085 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। विभाग आवंटित बजट का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा उपयोग भी कर चुका है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद योजनाओं से लाभान्वित हुए लोगों का स्पष्ट ब्यौरा अब तक राजभवन को उपलब्ध नहीं कराया गया है। राज्यपाल ने अपने पत्र में विशेष रूप से यह जानकारी मांगी थी कि इन परियोजनाओं से कितने आदिवासी परिवारों को वास्तविक लाभ मिला और योजनाओं का जमीनी प्रभाव क्या रहा। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी लाभार्थियों की संख्या और परियोजनाओं के परिणामों को लेकर रिपोर्ट लंबित रहना कई सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी योजना पर बड़ी राशि खर्च की जाती है तो उसकी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक होता है। ऐसे में राजभवन द्वारा मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराना विभागीय समन्वय और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग कब तक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और आदिवासी क्षेत्रों में खर्च किए गए करोड़ों रुपये के वास्तविक परिणामों का विवरण राजभवन के सामने कब आता है। यह मामला आने वाले दिनों में प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

कहीं ट्रक भिड़े कहीं पलटी गाड़ी ,MP में सड़क दुर्घटनाओं ने छीन ली कई जिंदगियां

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मंगलवार का दिन सड़क हादसों के लिहाज से बेहद दर्दनाक साबित हुआ। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए पांच बड़े सड़क हादसों ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। कहीं तेज रफ्तार ट्रकों की टक्कर ने जान ले ली तो कहीं अनियंत्रित वाहन पलटने से लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इन हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हादसों के बाद कई स्थानों पर अफरा-तफरी और चीख पुकार का माहौल देखने को मिला। अनूपपुर जिले में नेशनल हाईवे 43 पर टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक हादसा हुआ। सड़क पार कर रहे एक व्यक्ति को तेज रफ्तार बाइक ने टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं शाजापुर जिले में नेशनल हाईवे 52 पर उकावता चौकी के पास दो ट्रकों की जोरदार भिड़ंत हो गई। बताया जा रहा है कि पीछे से आ रहे ट्रक चालक को नींद की झपकी आ गई जिसके कारण ट्रक आगे चल रहे वाहन से टकरा गया। हादसा इतना भीषण था कि ट्रक चालक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि क्लीनर गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को वाहन से बाहर निकाला और घायल को अस्पताल पहुंचाया। नरसिंहपुर जिले में तेंदूखेड़ा के पास एक स्कॉर्पियो वाहन गाय को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पलट गया। वाहन में सवार छह लोग घायल हो गए जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायल रीवा जिले के निवासी हैं जो इंदौर से अपनी बहन का इलाज कराकर लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन तीन बार पलटा जिसके कारण उसका अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। पन्ना जिले के शाहनगर थाना क्षेत्र में कचौरी मोड़ के पास एक और भीषण हादसा सामने आया। कटनी से पन्ना जा रहा तेज रफ्तार ट्रक नियंत्रण खो बैठा और सड़क से उतरकर खेतों में घुस गया। लगभग सौ मीटर तक घिसटने के बाद ट्रक एक जामुन के पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक का केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में ट्रक के परिचालक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से दोनों को वाहन से बाहर निकाला। इधर सीहोर जिले में जताखेड़ा के पास चावल से भरा एक ट्रक पलट गया। ट्रक पलटने के बाद उसमें आग लग गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस और अन्य राहत दल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए गए। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। लगातार हो रहे सड़क हादसे एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। तेज रफ्तार, चालक की लापरवाही और थकान जैसी वजहें अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनती हैं। पुलिस ने सभी मामलों में जांच शुरू कर दी है और दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

Madhya Pradesh News: MP में अब मुक्तिधाम से ही मिलेगा मृत्यु प्रमाण पत्र! CM मोहन यादव का बड़ा निर्देश

CM MOHAN YADAV

HIGHLIGHTS: मुक्तिधाम में ही मिलेगा मृत्यु प्रमाण पत्र। CM मोहन यादव ने अधिकारियों को दिए निर्देश। दफ्तरों के चक्कर लगाने से मिलेगी राहत। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को होगा फायदा। नई व्यवस्था के लिए जल्द बनेगी कार्ययोजना।   Madhya Pradesh News: भोपाल। मध्य प्रदेश में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की परेशानी जल्द खत्म हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विश्राम घाटों और मुक्तिधामों में ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को लम्बे समय तक कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और काम बिना किसी देरी के पूरा हो सकेगा। Gwalior DLEd Exam: डीएलएड परीक्षा में भतीजे की जगह पेपर देने पहुंचे चाचा, बोले-उसकी अंग्रेजी कमजोर है इसलिए बना सॉल्वर अब नहीं जाना होगा अलग-अलग कर्यालय आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को और सरल बनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिजनों को प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। अंतिम संस्कार के समय ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने से मृत्यु प्रमाण पत्र आसानी से उपलब्ध कराया जा सकेगा। फिलाडेल्फिया में फ्रांस का जलवा एम्बाप्पे के दो गोल से नॉकआउट में एंट्री अपने-अपने जिलों की विकास रिपोर्ट पेश करें मंत्री बैठक में मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त को जिलों के विकास कार्यों का सोशल ऑडिट कराने की भी बात कही। उन्होंने प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों की विकास रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि प्रत्येक जिले की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार विकास का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से आम नागरिकों को राहत मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और सरल बन सकेंगी।

MP के जम्बो सीताफल को मिला GI टैग सिवनी के किसानों के लिए खुलेंगे वैश्विक बाजार के दरवाजे

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जिले के प्रसिद्ध जम्बो सीताफल को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्राप्त हो गया है। यह उपलब्धि न केवल सिवनी की कृषि पहचान को मजबूत करेगी बल्कि यहां के हजारों किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई संभावनाएं भी उपलब्ध कराएगी। लंबे समय से अपने अनोखे स्वाद और विशाल आकार के लिए पहचाने जाने वाले इस फल को अब आधिकारिक रूप से विशिष्ट उत्पाद का दर्जा मिल गया है। जीआई टैग किसी उत्पाद की विशेष भौगोलिक पहचान और उसकी विशिष्ट गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उस नाम का उपयोग केवल उसी क्षेत्र में उत्पादित वस्तु के लिए किया जा सके। सिवनी के जम्बो सीताफल को यह मान्यता मिलने के बाद इसकी विशिष्ट पहचान सुरक्षित हो जाएगी और अन्य क्षेत्रों में उत्पादित फल इसके नाम का उपयोग नहीं कर सकेंगे। सिवनी का जम्बो सीताफल अपने बड़े आकार और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। सामान्य रूप से एक सीताफल का वजन 200 से 650 ग्राम तक होता है लेकिन जिले के भूतबंधानी क्षेत्र में उत्पादित कई सीताफल 800 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक वजन के पाए जाते हैं। यही विशेषता इसे सामान्य सीताफलों से अलग बनाती है। इसके अलावा इस फल का स्वाद भी इसकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है। इसमें बीज अपेक्षाकृत कम होते हैं जबकि सफेद और गाढ़ा गूदा अधिक मात्रा में पाया जाता है। प्राकृतिक रूप से बेहद मीठा स्वाद इसे उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनाता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत आसपास के राज्यों में इसकी काफी मांग रहती है। पोषण के लिहाज से भी यह फल बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें पोटैशियम मैग्नीशियम और विभिन्न आवश्यक विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। इसी वजह से इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है। जीआई टैग मिलने का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। अब वे अपने उत्पाद को विशेष पहचान के साथ बाजार में बेच सकेंगे जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाएगी। साथ ही निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सिवनी के जम्बो सीताफल की अलग पहचान बनेगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। इससे सीताफल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को गुणवत्ता आधारित खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। कुल मिलाकर सिवनी के जम्बो सीताफल को मिला जीआई टैग जिले की कृषि विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अयोध्या के बाद MP की अयोध्या में भी मचा था ,हड़कंप रामराजा मंदिर से गायब हुए थे कैश और आभूषण

नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं के बीच मध्य प्रदेश का एक पुराना मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। यह मामला बुंदेलखंड की अयोध्या कहे जाने वाले ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर से जुड़ा है जहां वर्ष 2017 में चंदे की राशि और आभूषणों में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया था। उस समय इस घटना ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी थी और मंदिर प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े हुए थे। ओरछा का रामराजा सरकार मंदिर मध्य प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां भगवान श्रीराम को राजा के रूप में पूजा जाता है और देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर के चढ़ावे और संपत्तियों में कथित अनियमितता की खबर सामने आने के बाद लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई थीं। मामला उस समय का है जब निवाड़ी जिला अस्तित्व में नहीं आया था और ओरछा अविभाजित टीकमगढ़ जिले का हिस्सा था। आरोप लगाए गए कि मंदिर के खातों दान राशि आभूषणों नगद बही खातों स्टॉक रजिस्टर तथा मंदिर की चल और अचल संपत्तियों के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। जांच के दौरान यह भी कहा गया कि मंदिर से नकदी और कुछ आभूषण गायब पाए गए थे। इस मामले में मंदिर के तत्कालीन लिपिक मुन्नालाल तिवारी को आरोपी बनाया गया और उनके खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। हालांकि जांच लंबे समय तक चलती रही लेकिन कथित चंदा चोरी कांड का कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आ सका। यही कारण रहा कि यह मामला वर्षों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझा रहा। बाद में मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच प्रक्रिया में हुई देरी पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी भी नागरिक के सिर पर आपराधिक मुकदमे की तलवार अनिश्चितकाल तक नहीं लटकाई जा सकती। केवल प्रशासनिक कठिनाइयों अधिकारियों के तबादलों सेवानिवृत्ति या दस्तावेज जुटाने में लगने वाला समय जांच को वर्षों तक लंबित रखने का आधार नहीं बन सकता। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अत्यधिक देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त त्वरित और निष्पक्ष न्याय के अधिकार का उल्लंघन है। इसी आधार पर अदालत ने दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। यह फैसला उस समय काफी चर्चित रहा था क्योंकि अदालत ने जांच एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि राज्य सरकार ने इस फैसले से असहमति जताई थी और बाद में एकलपीठ के निर्णय के खिलाफ अपील करने की तैयारी भी शुरू की थी। ऐसे में यह मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना गया और कानूनी स्तर पर इसकी चर्चा जारी रही। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे ताजा विवाद के बीच ओरछा का यह पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में है। दोनों घटनाएं यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले चढ़ावे और संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है।

निर्जला एकादशी 2026 से पहले कर लें ,ये जरूरी तैयारियां तभी मिलेगा व्रत का पूर्ण फल

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है लेकिन सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु विधि विधान से निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं उन्हें वर्ष भर की 24 एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून गुरुवार को रखा जाएगा लेकिन इसकी तैयारी और नियम एक दिन पहले दशमी तिथि से ही प्रारंभ हो जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब श्रद्धालु दशमी तिथि से ही संयम और नियमों का पालन शुरू कर दें। इस दिन भोजन और दिनचर्या दोनों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। दशमी तिथि के दिन केवल सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। भोजन में प्याज लहसुन और तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। शाम के समय सूर्यास्त से पहले हल्का और सुपाच्य भोजन कर लेना उचित माना गया है। इसके बाद अन्न का त्याग कर देना चाहिए। कई श्रद्धालु दशमी की रात से ही जल का सेवन भी बंद कर देते हैं ताकि अगले दिन निर्जला व्रत का पालन पूरी निष्ठा के साथ कर सकें। एकादशी के दिन बाल धोना शुभ नहीं माना जाता इसलिए व्रत रखने वाले लोगों को दशमी तिथि में ही स्नान के साथ बाल धो लेने चाहिए। इससे व्रत के दिन किसी प्रकार की असुविधा भी नहीं होती और धार्मिक नियमों का पालन भी हो जाता है। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है। बिना तुलसी के विष्णु पूजन अधूरा माना जाता है। हालांकि एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को स्पर्श करना या पत्तियां तोड़ना वर्जित माना गया है। इसलिए पूजा के लिए आवश्यक तुलसी दल दशमी तिथि में ही तोड़कर सुरक्षित रख लेना चाहिए। एकादशी के दिन तुलसी माता को दूर से प्रणाम कर दीपक अर्पित किया जा सकता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार दशमी तिथि की रात्रि में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। श्रद्धा और विश्वास के साथ लिया गया यह संकल्प व्रत की सफलता का आधार माना जाता है। इसके बाद व्रती को द्वादशी तिथि में पारण होने तक नियमों का पालन करना चाहिए। निर्जला एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं बल्कि आत्मसंयम और भक्ति का महापर्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा आराधना जप और दान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा पूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में सुख समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए यदि आप इस वर्ष निर्जला एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं तो दशमी तिथि से ही इसकी तैयारी शुरू कर लें ताकि आपको व्रत का संपूर्ण और शुभ फल प्राप्त हो सके।

19 साल की दीया मिर्जा से सलमान खान ने कही थी ऐसी बात, आज भी नहीं भूलीं एक्ट्रेस

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने हाल ही में फिल्म निर्माता और कोरियोग्राफर फराह खान के व्लॉग में अपने करियर के शुरुआती दिनों से जुड़ा एक दिलचस्प और मजेदार किस्सा साझा किया। बातचीत के दौरान दीया ने न सिर्फ अपने घर और करियर की यादें ताजा कीं बल्कि सलमान खान के साथ फिल्म तुमको न भूल पाएंगे की शूटिंग के दौरान हुई एक मजेदार घटना का भी जिक्र किया। फराह खान अपने कुक दिलीप के साथ दीया मिर्जा के घर पहुंचीं थीं। बातचीत के दौरान दीया ने बताया कि उन्होंने यह घर अपनी शुरुआती फिल्म तुमको न भूल पाएंगे से मिली फीस से खरीदा था। उन्होंने कहा कि यह जगह उनके लिए बेहद खास है और शहर की भागदौड़ से दूर उन्हें यहां सुकून मिलता है। बातचीत के दौरान दोनों ने फिल्म की शूटिंग से जुड़ी पुरानी यादों को भी साझा किया। दीया ने फराह से पूछा कि क्या उन्हें वह गाना याद है जिसकी शूटिंग के दौरान लाखों लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। इस पर फराह ने बताया कि उस दौर में कलाकारों के पास आज जैसी सुविधाएं नहीं होती थीं। कई बार कलाकारों को पेड़ों के पीछे या अस्थायी जगहों पर कपड़े बदलने पड़ते थे। फराह ने हंसते हुए कहा कि सलमान खान भी बिना किसी झिझक के वहीं कपड़े बदल लिया करते थे। इसके बाद बातचीत का सबसे दिलचस्प हिस्सा सामने आया। जब फराह ने दीया से कहा कि उन्हें दोबारा सलमान खान के साथ काम करना चाहिए तो दीया ने एक पुराना किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि जब वह महज 19 साल की थीं तब एक शूटिंग के दौरान उन्होंने फिल्म में सलमान खान की मां का किरदार निभा रही अभिनेत्री को देखा। दीया को लगा कि वह अभिनेत्री उम्र में काफी युवा थीं और उन्होंने इस बात का जिक्र सलमान से कर दिया। दीया के मुताबिक उनकी बात सुनकर सलमान खान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि चिंता मत करो एक दिन तुम भी मेरी मां का रोल करोगी। सलमान की यह बात सुनकर उस समय सभी हंस पड़े थे। सालों बाद भी यह मजेदार टिप्पणी दीया को याद है और उन्होंने इसे बड़े ही हल्के अंदाज में साझा किया। बात को आगे बढ़ाते हुए फराह खान ने भी मजाक किया और अपने कुक दिलीप से पूछा कि क्या दीया सलमान खान की मां जैसी लगती हैं। इस पर दिलीप ने जवाब दिया कि नहीं वह तो उनकी छोटी बहन जैसी लगती हैं। दिलीप का जवाब सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े। यह पूरा किस्सा न सिर्फ बॉलीवुड के पुराने दिनों की झलक दिखाता है बल्कि यह भी बताता है कि सेट पर कलाकारों के बीच किस तरह का दोस्ताना माहौल हुआ करता था। सलमान खान की मजाकिया शैली और दीया मिर्जा की सादगी ने इस यादगार घटना को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।

चीन का अनोखा प्रयोग: बनाया 20 मंजिला एयर प्यूरीफायर टावर, जानिए कितनी हवा कर सकता है साफ

नई दिल्ली। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए चीन ने एक बेहद अनोखा और विशाल प्रयोग किया है। देश के शान्शी प्रांत के शिआन शहर में दुनिया का सबसे बड़ा एयर प्यूरीफायर टॉवर बनाया गया है, जिसकी ऊंचाई 100 मीटर से अधिक है। यह लगभग 20 मंजिला इमारत के बराबर माना जाता है। इस परियोजना को चीनी विज्ञान अकादमी के इंस्टीट्यूट ऑफ अर्थ एनवायरनमेंट ने विकसित किया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह टॉवर प्रतिदिन करीब 1 करोड़ घन मीटर (10 मिलियन क्यूबिक मीटर) तक शुद्ध हवा उत्पन्न करने में सक्षम है, जिससे आसपास के बड़े क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है। सौर ऊर्जा आधारित अनोखी तकनीकयह एयर प्यूरीफायर पारंपरिक बिजली आधारित सिस्टम पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। इसके आधार क्षेत्र में बड़े कांच के ग्रीनहाउस बनाए गए हैं। प्रदूषित हवा इन संरचनाओं में प्रवेश करती है, जहां सूर्य की गर्मी से यह गर्म होकर ऊपर उठती है। इसके बाद यह हवा टॉवर के भीतर लगे कई फिल्टर सिस्टम से गुजरती है, जो धूल, धुआं और अन्य हानिकारक कणों को छान लेते हैं। सौर ऊर्जा पर आधारित होने के कारण इसे दिन के समय बहुत कम अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है। PM2.5 स्तर में आई कमी अध्ययन के दौरान टॉवर के आसपास लगभग 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निगरानी के लिए कई स्टेशन लगाए गए थे। आंकड़ों के अनुसार, भारी प्रदूषण वाले दिनों में PM2.5 जैसे खतरनाक कणों में औसतन 15 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कई मौकों पर यह प्रणाली गंभीर स्मॉग को मध्यम स्तर तक लाने में भी सफल रही। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह शुरुआती परिणाम हैं और दीर्घकालिक अध्ययन के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे। भविष्य में और बड़े प्रोजेक्ट की योजना इस परियोजना को चीन के लंबे समय से चले आ रहे स्मॉग संकट से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है। वैज्ञानिक अब इससे भी बड़ा मॉडल विकसित करने की योजना पर काम कर रहे हैं, जिसकी ऊंचाई लगभग 500 मीटर और व्यास 200 मीटर तक हो सकता है। ऐसी प्रस्तावित प्रणाली के साथ विशाल ग्रीनहाउस जोड़े जाने की योजना है, जिससे किसी छोटे शहर की हवा को भी साफ करने की क्षमता विकसित की जा सके। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वायु प्रदूषण का स्थायी समाधान केवल ऐसी तकनीकों से नहीं, बल्कि उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ ऊर्जा के व्यापक उपयोग से ही संभव होगा।

चीन ने 10 अमेरिकी रक्षा कंपनियों पर लगाया निर्यात प्रतिबंध, 46 फर्मों की खरीद पर भी रोक बीजिंग। अमेरिका और चीन के बीच जारी कारोबारी एवं रणनीतिक टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। चीन ने अमेरिका की हालिया कार्रवाई के जवाब में 10 अमेरिकी सैन्य क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों पर निर्यात प्रतिबंध लगाने के साथ 4

बीजिंग। अमेरिका और चीन के बीच जारी कारोबारी एवं रणनीतिक टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। चीन ने अमेरिका की हालिया कार्रवाई के जवाब में 10 अमेरिकी सैन्य क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों पर निर्यात प्रतिबंध लगाने के साथ 46 रक्षा कंपनियों के उत्पादों की सरकारी खरीद पर भी रोक लगा दी है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा करते हुए कहा कि देश की कंपनियां अब इन 10 अमेरिकी फर्मों को दोहरे उपयोग (डुअल-यूज) वाली वस्तुओं का निर्यात नहीं करेंगी। ऐसी वस्तुएं वे होती हैं जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर उठाया कदम चीन का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा और अमेरिकी सरकार द्वारा चीनी सैन्य कंपनियों की सूची का दायरा बढ़ाने के जवाब में लिया गया है। प्रतिबंधित अमेरिकी कंपनियों में सैन्य ड्रोन निर्माण और दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। वहीं, चीन के वित्त मंत्रालय ने सरकारी विभागों और संस्थानों को 46 अमेरिकी रक्षा कंपनियों से उत्पाद खरीदने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। इनमें लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन मिसाइल्स एंड डिफेंस जैसी प्रमुख रक्षा कंपनियां भी शामिल हैं। हालांकि, चीन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अत्यावश्यक वस्तुओं के लिए विशेष निर्यात अनुमति का आवेदन किया जा सकता है। अमेरिकी सूची में शामिल हुईं अलीबाबा और बायजू इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी रक्षा विभाग ने कई चीनी प्रौद्योगिकी कंपनियों को उन संस्थाओं की सूची में जोड़ा था, जिनके बारे में अमेरिका का दावा है कि उनके चीन की सेना से संबंध हैं। इस सूची में अलीबाबा और बायजू जैसी कंपनियों के नाम भी शामिल किए गए। बायजू ने अमेरिकी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। अमेरिकी सूची में शामिल होने के बाद इन कंपनियों के लिए अमेरिकी सेना से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करना संभव नहीं रहेगा। चीन ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा था कि यह कार्रवाई मई में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बनी सहमति की भावना के विपरीत है। तकनीक और व्यापार को लेकर जारी है खींचतान दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक तनाव लंबे समय से जारी है। इसका केंद्र आयात शुल्क, उन्नत तकनीक और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर नियंत्रण को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर कई बार अतिरिक्त आयात शुल्क लगाए हैं, जिसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं और कृषि उत्पादों पर प्रतिशोधात्मक शुल्क लागू किए। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कई निर्यात नियंत्रण और प्रतिबंध लगाए हैं।

Bhind Principal Fake Certificate: छात्र नेताओं का आरोप- ट्रांसफर बचाने के लिए एमजेएस प्राचार्य ने बनवाया फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट

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Bhind Principal Fake Certificate: भिंड। शासकीय एमजेएस महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर.ए. शर्मा एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। हाल ही में उनका स्थानांतरण श्योपुर जिले के शासकीय महाविद्यालय ढोढर में किया गया है। इसी बीच उन पर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर तबादला रुकवाने के आरोप लगे हैं। मामले को लेकर छात्र नेताओं ने कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा को शिकायत सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। Gwalior DLEd Exam: डीएलएड परीक्षा में भतीजे की जगह पेपर देने पहुंचे चाचा, बोले-उसकी अंग्रेजी कमजोर है इसलिए बना सॉल्वर मेडिकल सर्टिफिकेट में प्राचार्य को बताया अनफिट छात्र नेताओं का कहना है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद डॉ. शर्मा ने अपना ट्रांसफर रुकवाने के प्रयास शुरू कर दिए। इसी दौरान जिला अस्पताल से उनके नाम पर मेडिकल सर्टिफिकेट जारी हुआ, जिसमें उन्हें स्वास्थ्य कारणों से कार्य के लिए अनफिट बताया गया। बाद में फिटनेस सर्टिफिकेट जारी होने पर भी छात्रों ने सवाल खड़े किए हैं। वहीं, डॉ. आर.ए. शर्मा ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनके खिलाफ रची गई साजिश बताया है। उनका कहना है कि स्थानांतरण के बाद उन्हें नियमों के विपरीत जल्दबाजी में कार्यमुक्त कर दिया गया। उन्होंने अपने स्थानांतरण को कोर्ट में चुनौती दी, जहां से उन्हें स्थगन आदेश भी प्राप्त हुआ है। IND vs ENG: टी20 सीरीज के लिए इंग्लैंड टीम घोषित, अनकैप्ड ऑलराउंडर जेम्स कोल्स की एंट्री से बढ़ी चर्चा डॉक्टरों ने फिटनेस प्रमाण-पत्र भी दिया प्राचार्य के मुताबिक तबीयत खराब होने के कारण उन्होंने जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया था, जिसके आधार पर मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किया गया। बाद में स्वास्थ्य में सुधार होने पर डॉक्टरों ने फिटनेस प्रमाण-पत्र भी दे दिया। फिलहाल छात्र नेताओं की शिकायत और प्राचार्य के दावों के बीच मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर है, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।