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दीपक जलाने में न करें ये गलतियां, वरना पूजा का पूरा फल हो सकता है प्रभावित

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपक केवल प्रकाश का प्रतीक नहीं है बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति का भी प्रतीक माना जाता है। इसलिए घर के मंदिर या किसी भी पूजा स्थल पर दीपक जलाते समय शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। मान्यता है कि विधि-विधान से जलाया गया दीपक घर में सुख, शांति और समृद्धि लाता है। वहीं नियमों की अनदेखी करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता। ऐसे में दीपक जलाने का सही समय, दिशा, मंत्र और विधि जानना जरूरी है। दीपक जलाने का सही समय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिन में दो बार दीपक जलाना शुभ माना जाता है। पहला दीपक सूर्योदय के समय और दूसरा सूर्यास्त के बाद संध्या काल में जलाना चाहिए। सुबह लगभग 5 बजे से 7 बजे के बीच तथा शाम को 5:30 बजे से 7:30 बजे के बीच दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मौसम और स्थान के अनुसार समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है। शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि इससे माता लक्ष्मी का घर में आगमन होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। दीपक जलाने की सही विधि पूजा के लिए मिट्टी, पीतल या तांबे का दीपक उपयोग किया जा सकता है। दीपक जलाने से पहले उसे अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। यदि मिट्टी का दीपक हो तो उसे कुछ समय पानी में भिगोकर सुखा लेना उचित माना जाता है। इसके बाद दीपक में गाय का घी, तिल का तेल या सरसों का तेल डालें। बाती को अच्छी तरह घी या तेल में भिगोकर दीपक में स्थापित करें। ध्यान रखें कि दीपक टूटा हुआ, खंडित या गंदा न हो क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। एक दीपक की लौ से दूसरा दीपक जलाने से भी बचना चाहिए। साथ ही दीपक में पर्याप्त तेल या घी रखें ताकि वह बीच में बुझ न जाए। दीपक जलाते समय करें इस मंत्र का जाप दीपक प्रज्वलित करते समय इस मंत्र का उच्चारण करना शुभ माना जाता है— शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा।शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से दीपक की आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है और घर में सकारात्मक वातावरण बनता है। दीपक जलाने की सही दिशा शास्त्रों के अनुसार घी का दीपक भगवान के दाईं ओर तथा तेल का दीपक बाईं ओर रखना चाहिए। दीपक की लौ का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना गया है। पूर्व दिशा में रखा गया दीपक आयु और यश में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं उत्तर दिशा में दीपक रखने से धन, वैभव और समृद्धि प्राप्त होने की मान्यता है। दक्षिण दिशा को यम और पितरों की दिशा माना गया है। इसलिए सामान्य पूजा में इस दिशा में दीपक नहीं रखा जाता। विशेष पितृ कर्म या धार्मिक अवसरों पर ही इसका उपयोग किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा, नियम और विधि के साथ जलाया गया दीपक जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है तथा घर के वातावरण को पवित्र बनाता है।

‘कमाल और मीना’ को लेकर बढ़ी उत्सुकता, कियारा आडवाणी के नाम पर अटकलें तेज; निर्देशक ने कास्टिंग पर तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में शामिल कमाल अमरोही और मीना कुमारी के रिश्ते को बड़े पर्दे पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है। फिल्म ‘कमाल और मीना’ को लेकर दर्शकों के बीच लंबे समय से उत्सुकता बनी हुई है। खासकर तब से, जब यह चर्चा सामने आई कि अभिनेत्री कियारा आडवाणी इस फिल्म में मीना कुमारी का किरदार निभा सकती हैं। अब इन अटकलों के बीच फिल्म के निर्देशक सिद्धार्थ पी मल्होत्रा ने कास्टिंग को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। निर्देशक ने स्पष्ट किया है कि फिल्म की कास्टिंग प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंची है और किसी भी कलाकार के नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण केवल कलाकारों के चयन तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें बजट, प्रोडक्शन योजना और कई अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है। ऐसे में जब तक सभी स्तरों पर सहमति नहीं बनती, तब तक किसी भी नाम को अंतिम नहीं माना जा सकता। फिल्म की घोषणा के बाद से ही दर्शकों और फिल्म प्रेमियों के बीच यह चर्चा लगातार बनी हुई है कि मीना कुमारी जैसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली व्यक्तित्व की भूमिका कौन निभाएगा। कियारा आडवाणी का नाम सामने आने के बाद इस चर्चा ने और गति पकड़ ली। हालांकि निर्देशक के ताजा बयान से साफ हो गया है कि फिलहाल किसी अभिनेत्री के चयन को लेकर आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। फिल्म ‘कमाल और मीना’ की सबसे खास बात इसकी शोध आधारित कहानी मानी जा रही है। निर्देशक के अनुसार फिल्म की पटकथा तैयार हो चुकी है और इसके लिए कमाल अमरोही तथा मीना कुमारी से जुड़े निजी दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया गया है। बताया गया है कि कहानी दोनों के बीच लिखे गए लगभग 2000 प्रेम पत्रों और निजी डायरी नोट्स पर आधारित होगी। यही वजह है कि फिल्म को केवल एक जीवनी आधारित परियोजना नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के एक महत्वपूर्ण अध्याय के दस्तावेजी पुनर्सृजन के रूप में भी देखा जा रहा है। मीना कुमारी को हिंदी सिनेमा की सबसे संवेदनशील और प्रभावशाली अभिनेत्रियों में गिना जाता है। उनकी फिल्मों, अभिनय शैली और निजी जीवन ने दशकों तक दर्शकों को प्रभावित किया। वहीं कमाल अमरोही अपने दौर के प्रतिष्ठित फिल्मकारों में शामिल रहे हैं। दोनों की निजी और पेशेवर यात्रा भारतीय सिनेमा के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। ऐसे में इस कहानी को पर्दे पर उतारने की चुनौती भी काफी बड़ी मानी जा रही है। फिल्म से जुड़े सूत्रों के अनुसार, निर्माता और निर्देशक ऐसे कलाकारों की तलाश में हैं जो इन ऐतिहासिक किरदारों की गंभीरता और भावनात्मक गहराई को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकें। इसी कारण कास्टिंग प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरती जा रही है। उधर कियारा आडवाणी भी इन दिनों अपने आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में हैं। उनकी अगली बड़ी फिल्म ‘टॉक्सिक’ रिलीज की तैयारी में है, जिसमें कई चर्चित कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। ऐसे में यदि भविष्य में ‘कमाल और मीना’ के लिए उनका नाम आधिकारिक रूप से घोषित होता है, तो यह उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण और प्रतिष्ठित भूमिकाओं में से एक साबित हो सकती है। फिलहाल दर्शकों की नजर फिल्म की आधिकारिक कास्टिंग घोषणा पर टिकी हुई है, जो आने वाले समय में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर तस्वीर और स्पष्ट कर सकती है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, लेकिन टैरिफ बढ़त के बिना लागू नहीं होगा समझौता: पीयूष गोयल

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति होने के बावजूद इसके क्रियान्वयन पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच समझौते की रूपरेखा लगभग तय हो चुकी है, लेकिन भारत तब तक इसे लागू नहीं करेगा जब तक उसे अपने प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में स्पष्ट और प्रभावी टैरिफ लाभ प्राप्त नहीं हो जाता। लंदन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार कार्यक्रम के दौरान गोयल ने कहा कि किसी भी मुक्त व्यापार समझौते का मूल उद्देश्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर बाजार पहुंच हासिल करना होता है। भारत चाहता है कि उसे अमेरिका के साथ व्यापार में ऐसी टैरिफ व्यवस्था मिले, जिससे वह चीन, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार और फिलीपींस जैसे देशों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी स्थिति में आ सके। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच इस समझौते की बुनियादी सहमति इसी वर्ष फरवरी में बन गई थी। दोनों देशों ने समझौते की व्यापक रूपरेखा पर सहमति जताई थी और उसके बाद से तकनीकी, कानूनी तथा टैरिफ संबंधी विवरणों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। गोयल के अनुसार समझौते को लेकर किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं है, बल्कि अब केवल उन शर्तों को सुनिश्चित किया जा रहा है जो भारत के व्यापारिक हितों को मजबूत करें। व्यापार मंत्रालय का मानना है कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और ऐसे समय में किसी भी समझौते का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब उससे निर्यातकों को प्रत्यक्ष आर्थिक फायदा प्राप्त हो। इसी कारण भारत अमेरिका के साथ ऐसी टैरिफ संरचना चाहता है जो उसके उद्योगों और निर्यातकों को अन्य प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बढ़त प्रदान करे। फरवरी में हुई अंतरिम सहमति के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर कुछ श्रेणियों में शुल्क दरों को कम करने पर सहमत हुआ था। इसके साथ ही कुछ अतिरिक्त शुल्कों में राहत देने पर भी चर्चा हुई थी, जिससे भारतीय निर्यातकों को फायदा मिल सकता था। उस समय प्रस्तावित व्यवस्था को भारत के लिए लाभकारी माना गया था क्योंकि इससे कई एशियाई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर व्यापारिक स्थिति बनने की संभावना थी। हालांकि इसके बाद अमेरिका में कानूनी और नीतिगत परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला। अमेरिकी न्यायिक प्रक्रिया और टैरिफ प्राधिकरण से जुड़े निर्णयों के कारण व्यापार नीति को लेकर कुछ नई अनिश्चितताएं सामने आईं। इसी दौरान अस्थायी टैरिफ व्यवस्था लागू की गई, जिसकी समयसीमा जुलाई के अंत तक निर्धारित है। भारत अब उस अवधि के बाद बनने वाली अंतिम टैरिफ संरचना का इंतजार कर रहा है। इसके समानांतर अमेरिका ने कुछ व्यापारिक मामलों को लेकर जांच प्रक्रियाएं भी शुरू की हैं, जिनके निष्कर्ष भविष्य की शुल्क व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। भारत इन सभी पहलुओं का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कर रहा है ताकि किसी भी समझौते का दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह रुख उसके बदलते आर्थिक आत्मविश्वास को दर्शाता है। सरकार अब केवल व्यापार समझौते करने पर जोर नहीं दे रही, बल्कि ऐसे समझौते चाहती है जो भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और निवेशकों को वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करें। आने वाले हफ्तों में अमेरिका की अंतिम टैरिफ नीति और जांच संबंधी निष्कर्ष सामने आने के बाद दोनों देशों के बीच इस बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है।

शनि प्रदोष व्रत 2026: शिव-शनि की कृपा से मिलेगा ऋण मुक्ति का आशीर्वाद, जानें चमत्कारी उपाय

नई दिल्ली । ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ने वाला शनि प्रदोष व्रत इस वर्ष 27 जून 2026 को मनाया जाएगा। शनिवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और शनि देव दोनों की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में जो लोग लंबे समय से कर्ज के बोझ तले दबे हैं या आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है। पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 जून की रात 10:22 बजे से होगी और 28 जून की मध्यरात्रि 12:43 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए 27 जून को व्रत और पूजा की जाएगी। इस दौरान भगवान शिव की आराधना और शनि देव की उपासना करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होने की मान्यता है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार शनि प्रदोष व्रत पर शिवलिंग का विशेष अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रदोष काल में काले तिल मिले जल से शिवलिंग का अभिषेक करने और भगवान शिव का ध्यान करने से ऋण संबंधी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है। श्रद्धापूर्वक की गई यह पूजा आर्थिक संकटों को कम करने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। शिव पुराण में वर्णित ऋणमुक्तेश्वर महादेव की उपासना भी इस दिन विशेष फलदायी मानी गई है। मान्यता है कि शनि प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते हुए ऋणमुक्तेश्वर महादेव का स्मरण करने से भारी से भारी कर्ज से मुक्ति का मार्ग खुल सकता है। यह उपाय आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है। दान को भी शनि प्रदोष व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। जरूरतमंद लोगों को काले तिल, सरसों का तेल या काले वस्त्र दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे जीवन में आर्थिक उन्नति के नए अवसर प्राप्त होते हैं और कर्ज का बोझ कम होने लगता है। यदि धन संबंधी परेशानियां लगातार बनी हुई हैं तो शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाकर ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है। वहीं पीपल के वृक्ष के नीचे दीपदान करने से रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान लोग इस दिन काले तिल, भोजन और कंबल का दान कर सकते हैं। इसके अलावा शनि देव के समक्ष बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिक दृष्टि से शनि प्रदोष व्रत आत्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और ईश्वर कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए उपाय व्यक्ति को नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकते हैं।

भारत पर अमेजन का बड़ा दांव, 2030 तक 48 अरब डॉलर निवेश; 38 लाख रोजगार और AI विस्तार का रोडमैप तैयार

नई दिल्ली । भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता पर भरोसा जताते हुए अमेजन ने देश में बड़े निवेश का ऐलान किया है। अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद घोषणा की कि कंपनी वर्ष 2030 तक भारत में 48 अरब डॉलर का निवेश करेगी। इस निवेश का बड़ा हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर केंद्रित होगा। यह फैसला भारत को वैश्विक डिजिटल और तकनीकी केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक के बाद एंडी जेसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भारत में अमेजन की यात्रा अभी शुरुआत भर है। उन्होंने कहा कि कंपनी पिछले एक दशक से देश के ग्राहकों, विक्रेताओं, स्टार्टअप्स, डेवलपर्स और उद्योगों के साथ मिलकर काम कर रही है और आने वाले वर्षों में इस साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा। जेसी ने बताया कि अगले पांच वर्षों में किए जाने वाले कुल 48 अरब डॉलर के निवेश में 21 अरब डॉलर से अधिक राशि केवल एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर खर्च की जाएगी। इसके साथ ही 2026 से 2030 के बीच भारत में अमेजन का कुल नियोजित एआई और क्लाउड निवेश 21 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा, जो इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े विदेशी निवेशों में से एक माना जा रहा है। अमेजन वेब सर्विसेज के तहत मुंबई और हैदराबाद स्थित डेटा सेंटर नेटवर्क का भी विस्तार किया जाएगा। इससे भारतीय स्टार्टअप्स, उद्योगों और सरकारी संस्थानों को आधुनिक एआई तकनीक, एडवांस्ड कंप्यूटिंग क्षमता, सुरक्षित क्लाउड सेवाएं और अत्याधुनिक डेवलपर टूल्स तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी। कंपनी का मानना है कि इससे भारत की डिजिटल प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। अमेजन ने रोजगार सृजन को लेकर भी बड़ा लक्ष्य तय किया है। कंपनी के अनुसार वर्ष 2030 तक लगभग 38 लाख रोजगार अवसरों का समर्थन किया जाएगा। इसके अलावा 80 अरब डॉलर के ई-कॉमर्स निर्यात को सक्षम बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अमेजन का उद्देश्य देश के 1.5 करोड़ छोटे व्यवसायों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना और 40 लाख सरकारी स्कूलों के छात्रों तक एआई आधारित शिक्षा और तकनीकी अवसर पहुंचाना भी है। कंपनी ने अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने की भी योजना बनाई है। इस वर्ष देशभर में 20 से अधिक नए फुलफिलमेंट सेंटर और 100 से ज्यादा नए लास्ट माइल डिलीवरी स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इससे खासकर टियर-3 और टियर-4 शहरों में ग्राहकों को तेज और भरोसेमंद डिलीवरी सुविधा मिलेगी। साथ ही डिलीवरी सहयोगियों के कल्याण के लिए सम्मान नामक विशेष कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा। अमेजन के अनुसार वर्ष 2010 से 2030 तक भारत में कंपनी का कुल निवेश 88 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। कंपनी का कहना है कि उसने अब तक 1.2 करोड़ छोटे कारोबारों को डिजिटल बनाने में मदद की है, 20 अरब डॉलर से अधिक के ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा दिया है और 28 लाख रोजगारों का समर्थन किया है। इसके अलावा 1 करोड़ से अधिक भारतीयों को क्लाउड स्किल्स की ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत में ई-कॉमर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेजन भारत के विकसित और आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य में दीर्घकालिक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

एयर सुविधा 2.0, इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य निगरानी होगी और मजबूत

नई दिल्ली। इबोला वायरस के बढ़ते वैश्विक खतरे के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नागर विमानन मंत्रालय ने दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के सहयोग से अत्याधुनिक और पूरी तरह कॉन्टैक्टलेस Air Suvidha 2.0 पोर्टल लॉन्च किया है। इस नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना और संक्रामक बीमारियों के संभावित प्रसार को समय रहते रोकना है। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला तथा बुंडिबुग्यो वायरस बीमारी के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। इसके बाद कई देशों ने अपनी सीमा और स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्थाओं को मजबूत करना शुरू कर दिया है। भारत ने भी एहतियाती कदम उठाते हुए एयर सुविधा 2.0 को लागू किया है ताकि किसी भी संभावित संक्रमण की समय रहते पहचान की जा सके। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज के सहयोग से विकसित इस पोर्टल के तहत भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन हेल्थ सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा। इस फॉर्म में यात्रियों को पिछले 21 दिनों की यात्रा का पूरा विवरण देना होगा। इसके अलावा उन्हें यह भी बताना होगा कि वे किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं या नहीं तथा उनमें किसी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी लक्षण मौजूद हैं या नहीं। नई व्यवस्था के अनुसार यह प्रक्रिया इमिग्रेशन क्लियरेंस से पहले पूरी करनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग अधिक सटीक और तेज होगी। साथ ही स्वास्थ्य एजेंसियों को संभावित जोखिम वाले यात्रियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। Air Suvidha 2.0 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी रियल टाइम डेटा शेयरिंग क्षमता है। यह सिस्टम यात्रियों द्वारा दी गई जानकारी को तुरंत एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम और संबंधित राज्य निगरानी अधिकारियों के साथ साझा करेगा। इससे किसी भी संदिग्ध मामले की पहचान होने पर तुरंत निगरानी, चिकित्सा जांच और आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय शुरू किए जा सकेंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल और कॉन्टैक्टलेस होगी। यात्रियों को एयरपोर्ट पर पहुंचकर कागजी फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अपनी उड़ान से 24 घंटे पहले तक ऑनलाइन सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भर सकते हैं। विशेष रूप से वेब चेक इन के दौरान यह प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है ताकि भारत पहुंचने पर इमिग्रेशन और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया तेज और सुगम हो सके। फॉर्म जमा करने के बाद यात्रियों को केवल डाउनलोड किया गया सेल्फ डिक्लेरेशन दस्तावेज स्वास्थ्य डेस्क या इमिग्रेशन अधिकारियों को दिखाना होगा। इससे एयरपोर्ट पर समय की बचत होगी और भीड़भाड़ भी कम होगी। अधिकारियों ने सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सही जानकारी के साथ समय पर फॉर्म भरें। उनका कहना है कि Air Suvidha 2.0 न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि भविष्य में किसी भी संभावित स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वेनेजुएला में तबाही के बीच भारत का मानवीय संदेश, पीएम मोदी के समर्थन पर राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने कहा धन्यवाद

नई दिल्ली । वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद उत्पन्न मानवीय संकट के बीच भारत ने एक बार फिर वैश्विक मानवीय सहयोग की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वेनेजुएला की जनता के प्रति व्यक्त की गई संवेदनाओं और राहत कार्यों में हरसंभव सहयोग के आश्वासन का वहां की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने स्वागत किया है। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इस कठिन समय में भारत का समर्थन वेनेजुएला के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का जवाब देते हुए डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि वे भारत की ओर से व्यक्त संवेदनाओं और सहायता की इच्छा का दिल से स्वागत करती हैं। उन्होंने कहा कि भूकंप से प्रभावित लोगों के लिए भारत का सहयोग और समर्थन दोनों देशों के बीच मजबूत मित्रता और मानवीय संबंधों का प्रतीक है। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने इस कठिन घड़ी में भारत के साथ खड़े होने के लिए विशेष धन्यवाद भी दिया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप पर गहरा दुख व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से हुई जनहानि और व्यापक तबाही की खबर बेहद पीड़ादायक है। प्रधानमंत्री ने भारत के लोगों की ओर से उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के लोगों के साथ खड़ा है और हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। वेनेजुएला सरकार लगातार राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रही है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के अनुसार अब तक कम से कम 32 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में इमारतों के ढहने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर बचाव कार्यों को तेज करने में जुटी हैं। इस बीच यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने चेतावनी दी है कि आपदा का वास्तविक असर आने वाले दिनों में और स्पष्ट हो सकता है। एजेंसी ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में हालात का आकलन कर रही हैं। सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार स्रोतों से सामने आई तस्वीरों में काराकस सहित कई शहरों में इमारतों और घरों को भारी नुकसान पहुंचा दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार बुधवार शाम सबसे पहले 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। इसके महज एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली झटका महसूस किया गया। दोनों भूकंप समुद्र तटीय क्षेत्र मोरोन के पास और राजधानी काराकस से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में आए। भूकंप की गहराई केवल 10 किलोमीटर होने के कारण इसका प्रभाव अधिक विनाशकारी साबित हुआ। वेनेजुएला के गृह, न्याय और शांति मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने बताया कि देश के कई हिस्सों में इमारतों और सार्वजनिक ढांचों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और आफ्टरशॉक्स की आशंका को देखते हुए सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस आपदा पर नजर बनाए हुए है और कई देशों ने वेनेजुएला को सहायता देने की पेशकश की है।

LPG उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव, PNG कनेक्शन लेने के 30 दिन के भीतर गैस कनेक्शन सरेंडर करना होगा अनिवार्य

नई दिल्ली । देश में घरेलू गैस वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नए नियम के तहत अब उन उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन निर्धारित समय के भीतर सरेंडर करना होगा, जिनके घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है और जिन्होंने उसका कनेक्शन ले लिया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से गैस वितरण नेटवर्क को अधिक संतुलित बनाया जा सकेगा तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। पिछले कुछ वर्षों में देश के कई महानगरों और बड़े शहरों में पीएनजी नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। घरों तक पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस पहुंचाने की इस सुविधा को सुरक्षित, सुविधाजनक और निरंतर आपूर्ति वाली व्यवस्था के रूप में देखा जाता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता मौजूद हैं जो पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्शन एक साथ उपयोग कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि इससे वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और गैस संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन प्रभावित होता है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘वन हाउसहोल्ड, वन गैस कनेक्शन’ की अवधारणा को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। नए नियम के अनुसार यदि किसी घरेलू उपभोक्ता ने अपने घर में पीएनजी कनेक्शन सक्रिय करा लिया है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। यह नियम सभी प्रमुख गैस कंपनियों के घरेलू उपभोक्ताओं पर लागू होगा। सरकार का उद्देश्य केवल डुप्लिकेट कनेक्शनों को कम करना ही नहीं है, बल्कि उन क्षेत्रों तक एलपीजी की उपलब्धता को बेहतर बनाना भी है जहां अभी तक पीएनजी नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे गैस सिलेंडरों की उपलब्धता अधिक जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक पहुंच सकेगी और सब्सिडी व्यवस्था का दुरुपयोग भी कम होगा। नए नियम के साथ उपभोक्ताओं की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है। यदि कोई परिवार भविष्य में ऐसे क्षेत्र में स्थानांतरित होता है जहां पीएनजी सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसके लिए एलपीजी कनेक्शन दोबारा प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। कनेक्शन सरेंडर करते समय उपभोक्ताओं को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनकी सहायता से वे नए स्थान पर अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया के माध्यम से एलपीजी सेवा फिर से शुरू कर सकेंगे। सरकार गैस वितरण व्यवस्था को डिजिटल और सुरक्षित बनाने पर भी लगातार जोर दे रही है। इसी क्रम में ओटीपी आधारित डिलीवरी प्रणाली पहले से लागू की जा चुकी है। अब सिलेंडर वितरण के समय उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी के सत्यापन के बाद ही डिलीवरी पूरी की जाती है। इससे फर्जी डिलीवरी और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में मदद मिल रही है। इसके अलावा ई-केवाईसी प्रक्रिया को भी अनिवार्य बनाया जा रहा है ताकि सभी उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड अद्यतन और सत्यापित रहे। सरकार का मानना है कि डिजिटल सत्यापन, पारदर्शी वितरण व्यवस्था और गैस कनेक्शनों के बेहतर प्रबंधन से वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, पीएनजी नेटवर्क के विस्तार और एलपीजी वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए उठाया गया यह कदम ऊर्जा क्षेत्र में संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आने वाले समय में इससे गैस आपूर्ति प्रणाली अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनने की उम्मीद है।

वेनेजुएला में मौत और तबाही का मंजर, पीएम मोदी ने जताई संवेदना, ट्रंप ने जारी किया अलर्ट

काराकस। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए लगातार दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। देश के कई शहरों में इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और जानमाल के बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है। भूकंप के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा कि वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप से हुई तबाही की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने भारत की जनता की ओर से वेनेजुएला की सरकार और वहां के नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है उनके दुख में पूरा भारत सहभागी है। प्रधानमंत्री ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भूकंप से हुई तबाही पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में आए दोनों भूकंप अत्यंत शक्तिशाली थे और शुरुआती रिपोर्टें अच्छे संकेत नहीं दे रही हैं। ट्रंप के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने और भारी जनहानि की आशंका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहायता के लिए पूरी तरह तैयार है और सभी संबंधित एजेंसियों को राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सतर्क रहने के निर्देश दे दिए गए हैं। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार पहला भूकंप बुधवार देर शाम 7.1 तीव्रता का दर्ज किया गया। इसके ठीक एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली झटका महसूस किया गया। दोनों भूकंपों का केंद्र राजधानी काराकस से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम स्थित तटीय क्षेत्र मोरोन के आसपास था। भूकंप की गहराई केवल 10 किलोमीटर होने के कारण इसका प्रभाव और अधिक विनाशकारी माना जा रहा है। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि राजधानी काराकस सहित कई शहरों में लोग दहशत में घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई इमारतों में दरारें आ गईं जबकि कुछ भवन पूरी तरह ढह गए। स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में सड़कों पर मलबा और क्षतिग्रस्त मकान दिखाई दे रहे हैं। वेनेजुएला के गृह, न्याय और शांति मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने पुष्टि की कि देश के विभिन्न हिस्सों में नुकसान की खबरें मिली हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे फिलहाल इमारतों के अंदर जाने से बचें क्योंकि आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले झटकों का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं तथा प्रभावित इलाकों में आपातकालीन टीमें तैनात कर दी गई हैं। भूकंप का असर पड़ोसी देश कोलंबिया तक भी महसूस किया गया। वहां के कई शहरों में लोगों ने तेज झटकों की सूचना दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि नुकसान का वास्तविक आकलन आने वाले दिनों में ही हो पाएगा। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और राहत कार्यों में सहयोग के लिए तैयार हैं। वेनेजुएला इस समय अपने हालिया इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। पूरी दुनिया की नजर अब राहत और बचाव कार्यों पर टिकी हुई है, जबकि प्रभावित परिवारों के लिए वैश्विक स्तर पर संवेदनाएं और सहायता के संदेश लगातार सामने आ रहे हैं। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए लगातार दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। देश के कई शहरों में इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और जानमाल के बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है। भूकंप के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा कि वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप से हुई तबाही की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने भारत की जनता की ओर से वेनेजुएला की सरकार और वहां के नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है उनके दुख में पूरा भारत सहभागी है। प्रधानमंत्री ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भूकंप से हुई तबाही पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में आए दोनों भूकंप अत्यंत शक्तिशाली थे और शुरुआती रिपोर्टें अच्छे संकेत नहीं दे रही हैं। ट्रंप के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने और भारी जनहानि की आशंका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहायता के लिए पूरी तरह तैयार है और सभी संबंधित एजेंसियों को राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सतर्क रहने के निर्देश दे दिए गए हैं। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार पहला भूकंप बुधवार देर शाम 7.1 तीव्रता का दर्ज किया गया। इसके ठीक एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली झटका महसूस किया गया। दोनों भूकंपों का केंद्र राजधानी काराकस से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम स्थित तटीय क्षेत्र मोरोन के आसपास था। भूकंप की गहराई केवल 10 किलोमीटर होने के कारण इसका प्रभाव और अधिक विनाशकारी माना जा रहा है। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि राजधानी काराकस सहित कई शहरों में लोग दहशत में घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई इमारतों में दरारें आ गईं जबकि कुछ भवन पूरी तरह ढह गए। स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में सड़कों पर मलबा और क्षतिग्रस्त मकान दिखाई दे रहे हैं। वेनेजुएला के गृह, न्याय और शांति मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने पुष्टि की कि देश के विभिन्न हिस्सों में नुकसान की खबरें मिली हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे फिलहाल इमारतों के अंदर जाने से बचें क्योंकि आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले झटकों का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर

भविष्य की तकनीकों पर भारत-अमेरिका का बड़ा दांव, AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ेगी साझेदारी

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने भविष्य की तकनीकों और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। वाशिंगटन में आयोजित उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे अहम क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने पर व्यापक चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया तकनीकी प्रतिस्पर्धा के नए दौर में प्रवेश कर रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरती तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। भारतीय दूतावास द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने अमेरिकी विदेश विभाग के अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब एस. हेलबर्ग से मुलाकात कर द्विपक्षीय तकनीकी सहयोग को मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना था जहां दोनों देश मिलकर दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी विकसित कर सकते हैं। वार्ता के दौरान सेमीकंडक्टर निर्माण को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाने के लिए सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता बढ़ाना आवश्यक है। हाल के वर्षों में चिप्स की वैश्विक कमी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी उद्योगों की स्थिरता के लिए मजबूत और विश्वसनीय उत्पादन नेटवर्क बेहद जरूरी हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी दोनों देशों के बीच व्यापक चर्चा हुई। भारत और अमेरिका ने एआई तकनीक के विकास, उसके सुरक्षित उपयोग और विभिन्न क्षेत्रों में उसके प्रभावी अनुप्रयोग को बढ़ावा देने पर विचार साझा किए। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण, रक्षा और वित्तीय सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में बड़े बदलाव ला सकता है। बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर भी महत्वपूर्ण बातचीत हुई। ये खनिज उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी उत्पादन और रक्षा उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की। भारत और अमेरिका के बीच यह संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। तकनीकी सहयोग को लेकर दोनों देशों की बढ़ती नजदीकियां वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। इस बीच केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है और इसमें कुशल पेशेवरों की भारी मांग पैदा हो रही है। उनके अनुसार वर्तमान में लगभग 800 अरब डॉलर मूल्य की यह इंडस्ट्री जल्द ही 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है। वैष्णव ने यह भी बताया कि वर्ष 2032 तक दुनिया भर में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग 10 लाख नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। वहीं उद्योग को लगभग 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में भारत के पास वैश्विक तकनीकी प्रतिभा केंद्र के रूप में उभरने और दुनिया को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने का सुनहरा अवसर है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता यह तकनीकी सहयोग न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में भी नई दिशा तय कर सकता है।