26 से 30 जून तक EPFO पोर्टल रहेगा ठप, पीएफ क्लेम और UMANG समेत कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी अस्थायी रूप से बंद

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के करोड़ों सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। संगठन अपने डिजिटल सिस्टम को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए डेटाबेस माइग्रेशन तथा क्लेम प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर का अपग्रेडेशन कर रहा है। इस तकनीकी प्रक्रिया के चलते 26 जून से 30 जून तक ईपीएफओ की कई प्रमुख ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहेंगी। इस दौरान सदस्य और नियोक्ता दोनों ही कई जरूरी सुविधाओं का उपयोग नहीं कर सकेंगे। ईपीएफओ के अनुसार, 26 जून की मध्यरात्रि से 30 जून की रात 11:59 बजे तक मेंबर पोर्टल, एम्प्लॉयर पोर्टल और उमंग ऐप के माध्यम से उपलब्ध अधिकांश ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इन पांच दिनों के दौरान उपयोगकर्ता अपने खाते में लॉग इन नहीं कर पाएंगे, जिससे ऑनलाइन माध्यम से होने वाले कई कार्य पूरी तरह बाधित रहेंगे। संगठन को उम्मीद है कि सभी सेवाएं 1 जुलाई से दोबारा सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी। इस अवधि में कर्मचारी नया पीएफ क्लेम जमा नहीं कर सकेंगे और पहले से जमा क्लेम की स्थिति भी ऑनलाइन नहीं देख पाएंगे। इसके अलावा ई-पासबुक डाउनलोड करने या खाते का विवरण देखने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। जिन कर्मचारियों को अपने भविष्य निधि खाते से संबंधित किसी प्रक्रिया को पूरा करना है, उन्हें सेवाएं बहाल होने तक इंतजार करना होगा। नियोक्ताओं पर भी इस तकनीकी अपग्रेडेशन का असर पड़ेगा। वे इलेक्ट्रॉनिक चालान-कम-रिटर्न (ईसीआर) दाखिल नहीं कर सकेंगे और नए कर्मचारियों के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया भी अस्थायी रूप से बंद रहेगी। इससे नई नियुक्तियों और नियमित मासिक अनुपालन से जुड़े कुछ कार्य निर्धारित अवधि तक प्रभावित रह सकते हैं। ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यह कदम संगठन की डिजिटल व्यवस्था को अधिक आधुनिक, तेज और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। सिस्टम माइग्रेशन पूरा होने के बाद क्लेम प्रोसेसिंग और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के पहले से अधिक प्रभावी और सुचारु रूप से संचालित होने की उम्मीद है। इसलिए यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। देशभर में सात करोड़ से अधिक कर्मचारी ईपीएफओ की सेवाओं से जुड़े हुए हैं। निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि योजना सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में संगठन ने सदस्यों और नियोक्ताओं से अपील की है कि जिन कार्यों के लिए ऑनलाइन सेवाओं की आवश्यकता है, वे उन्हें 1 जुलाई के बाद पूरा करने की योजना बनाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उन्नयन से भविष्य में क्लेम निपटान की गति बेहतर होगी और ऑनलाइन सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। हालांकि जिन कर्मचारियों को तत्काल पीएफ निकासी, क्लेम स्टेटस या अन्य डिजिटल सेवाओं की आवश्यकता है, उन्हें अगले कुछ दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। 1 जुलाई से सभी सेवाएं सामान्य रूप से बहाल होने की संभावना जताई गई है।
वीजा प्रक्रिया होगी हाईटेक ट्रंप प्रशासन एआई और मोबाइल ऐप से बदलेगा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम

नई दिल्ली । अमेरिका की ट्रंप सरकार वीजा प्रोसेसिंग और कानूनी इमिग्रेशन सेवाओं में बड़ा डिजिटल बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नई तकनीक और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए पूरी इमिग्रेशन प्रक्रिया को पहले से अधिक तेज सुरक्षित और पारदर्शी बनाना चाहती है। इस पहल का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया में होने वाली देरी कम करना कागजी कार्रवाई घटाना और सुरक्षा जांच को अधिक प्रभावी बनाना है। इससे भविष्य में लाखों वीजा आवेदकों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब कमेटी के समक्ष बताया कि गृह सुरक्षा विभाग तेजी से इमिग्रेशन सिस्टम का आधुनिकीकरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग ऐसा ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से आवेदन प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाएगा और मानवीय त्रुटियों को काफी हद तक कम करेगा। मुलिन के अनुसार पहला एआई आधारित प्लेटफॉर्म अगले 30 दिनों के भीतर शुरू किया जाएगा। शुरुआती चरण में इसका इस्तेमाल डेफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स यानी डीएसीए कार्यक्रम के लंबित मामलों के निपटारे के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे वर्षों से लंबित आवेदनों का तेजी से समाधान संभव होगा और आगे आने वाले आवेदनों का भी शीघ्र निस्तारण किया जा सकेगा। सरकार आवेदन प्रक्रिया में होने वाली सामान्य गलतियों को भी समाप्त करना चाहती है। इसी उद्देश्य से ऐसा डिजिटल सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिसमें अधूरा या गलत आवेदन जमा ही नहीं किया जा सकेगा। इससे बार बार दस्तावेज लौटने और सुधार के कारण होने वाली देरी कम होगी। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा तकनीक इस बदलाव को संभव बना सकती है और अब जरूरत केवल उसे व्यापक स्तर पर लागू करने की है। गृह सुरक्षा विभाग वाणिज्य विभाग के साथ मिलकर एक आधुनिक मोबाइल एप्लीकेशन भी विकसित कर रहा है। इस ऐप के माध्यम से आवेदक अपने दस्तावेज जमा कर सकेंगे आवेदन की स्थिति देख सकेंगे और आवश्यक प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी कर पाएंगे। मार्कवेन मुलिन ने बताया कि उन्होंने इस योजना की जानकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी दी है और राष्ट्रपति ने इस पहल का समर्थन किया है। सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक अपनाने से न केवल आवेदकों को सुविधा मिलेगी बल्कि उद्योग जगत और नियोक्ताओं को भी लाभ होगा। वीजा प्रक्रिया में होने वाली देरी का असर सीधे अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार पर पड़ता है। इसलिए सरकार तकनीक के जरिए दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। मुलिन ने बताया कि एच टू ए कृषि वीजा की प्रोसेसिंग अवधि पहले ही घटाकर लगभग 15 दिन कर दी गई है। अब सरकार डेयरी फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी दूर करने के लिए भी नए विकल्पों पर विचार कर रही है क्योंकि वर्तमान वीजा नियम वहां की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछली सरकार के दौरान स्वीकृत कई इमिग्रेशन मामलों की दोबारा जांच की जा रही है ताकि सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाया जा सके। इसके लिए अतिरिक्त स्क्रीनिंग सिस्टम भी विकसित किए गए हैं जिससे केवल पात्र और नियमों के अनुरूप आवेदकों को ही मंजूरी मिले। भारत अमेरिका में पढ़ाई रोजगार और उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए सबसे बड़े स्रोत देशों में शामिल है। ऐसे में यदि एआई आधारित वीजा प्रोसेसिंग सफल होती है तो हजारों भारतीय छात्रों पेशेवरों और कानूनी आवेदकों को तेज सेवा और बेहतर डिजिटल अनुभव का लाभ मिल सकता है। हालांकि अंतिम मंजूरी मौजूदा अमेरिकी इमिग्रेशन कानूनों और सुरक्षा मानकों के अनुसार ही दी जाएगी।
बढ़ते साइबर हमलों से निपटने की तैयारी में अमेरिका ट्रंप प्रशासन करेगा साइबर रक्षा एजेंसी का बड़ा पुनर्गठन

नई दिल्ली । दुनिया भर में तेजी से बढ़ते साइबर हमलों और डिजिटल जासूसी की घटनाओं के बीच अमेरिका अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी साइबर रक्षा एजेंसी साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी यानी सीआईएसए का व्यापक पुनर्गठन किया जाएगा ताकि चीन रूस ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों से मिलने वाली साइबर चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके। अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब कमेटी के समक्ष कहा कि मौजूदा समय में साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा बन चुकी है। उनके अनुसार विदेशी साइबर हमले केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं हैं बल्कि निजी कंपनियों बैंकिंग नेटवर्क ऊर्जा क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में सीआईएसए की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। मुलिन ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में एजेंसी अपनी मूल जिम्मेदारियों से भटक गई थी और अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सकी। उन्होंने कहा कि अब सरकार का लक्ष्य केवल एजेंसी को दोबारा सक्रिय करना नहीं बल्कि उसे दुनिया की सबसे सक्षम साइबर सुरक्षा संस्थाओं में शामिल करना है। इसके लिए नए नेतृत्व की नियुक्ति की जा रही है और अनुभवी विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा ताकि एजेंसी आधुनिक साइबर खतरों का तेजी से जवाब देने में सक्षम बन सके। उन्होंने बताया कि फिलहाल एजेंसी अपनी जरूरत के मुकाबले लगभग आधे कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। सरकार का अनुमान है कि करीब 600 नए विशेषज्ञों की भर्ती से इसकी कार्यक्षमता में बड़ा सुधार आएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी पुराने पदों को भरना जरूरी नहीं है बल्कि जरूरत के अनुसार विशेषज्ञता आधारित नियुक्तियां की जाएंगी। गृह सुरक्षा सचिव के अनुसार एजेंसी का पुनर्गठन एक लंबी प्रक्रिया होगी और नए निदेशक के कार्यभार संभालने के बाद इसे पूरी तरह प्रभावी बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है। इस दौरान संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के साथ तकनीकी क्षमताओं को भी नई दिशा दी जाएगी। मुलिन ने सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर साझेदारी पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि मेटा गूगल जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियां अकेले साइबर अपराधियों और विदेशी हैकर समूहों का मुकाबला नहीं कर सकतीं। इसके लिए सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों के बीच सूचनाओं के आदान प्रदान तथा संयुक्त रणनीति की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि गृह सुरक्षा विभाग अपने आंतरिक नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है ताकि अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं को खत्म किया जा सके और साइबर ऑपरेशन अधिक तेज और प्रभावी बन सकें। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से विकसित हो रही डिजिटल तकनीकों को देखते हुए भविष्य में कांग्रेस से नए कानूनी दिशा निर्देश भी मांगे जा सकते हैं। अमेरिका लगातार अपने सहयोगी देशों के साथ साइबर सुरक्षा सहयोग को भी मजबूत कर रहा है। भारत सहित कई साझेदार देशों के साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा साइबर रेजिलिएंस और उभरती तकनीकों की सुरक्षा को लेकर संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में साइबर युद्ध और डिजिटल सुरक्षा किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का सबसे अहम आधार बनने वाले हैं और इसी दिशा में अमेरिका अपनी तैयारियों को नई गति दे रहा है।
7.5 तीव्रता के भूकंप ने वेनेजुएला को झकझोरा, 235 लोगों की मौत, बचाव अभियान तेज, अंतरराष्ट्रीय सहायता जुटाने में सरकार सक्रिय

नई दिल्ली । वेनेजुएला में बुधवार शाम आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। शुरुआती रिपोर्टों के मुकाबले हालात कहीं अधिक गंभीर साबित हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 235 हो गई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं और कई अब भी मलबे में फंसे हुए हैं। लगातार चल रहे राहत एवं बचाव अभियान के बीच सरकार ने पुनर्वास और पुनर्निर्माण की दिशा में भी बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज करने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने निजी कंपनियों को भारी मशीनें और मलबा हटाने वाले उपकरण तत्काल उपलब्ध कराने का आदेश दिया है ताकि बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही सरकार ने 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर का विशेष राहत कोष बनाने का फैसला किया है जिससे प्रभावित परिवारों और क्षेत्रों को आर्थिक सहायता मिल सके। कारोबारियों को राहत देने के लिए विशेष ऋण सुविधा भी शुरू की जा रही है ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को जल्द दोबारा पटरी पर लाया जा सके। नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने बताया कि यह देश में कई दशकों बाद आई सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। उनके अनुसार करीब 200 लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। बचाव दल दिन रात अभियान चला रहे हैं और समय के साथ जीवन बचाने की चुनौती लगातार कठिन होती जा रही है। उन्होंने कहा कि हर संभव संसाधन बचाव अभियान में लगाए गए हैं और प्राथमिकता अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है। विदेश मंत्री इवान गिल ने जानकारी दी कि वेनेजुएला सरकार अंतरराष्ट्रीय सहायता के समन्वय के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर रही है। उन्होंने बताया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से कम से कम एक दर्जन देशों ने राहत सामग्री विशेषज्ञ टीमों और तकनीकी सहयोग की पेशकश की है। सरकार इन प्रस्तावों पर तेजी से काम कर रही है ताकि प्रभावित इलाकों तक जल्द सहायता पहुंचाई जा सके। बुधवार को आए दोनों भूकंपों की तीव्रता क्रमशः 7.2 और 7.5 मापी गई थी। दोनों झटके लगभग 10 किलोमीटर की कम गहराई पर आए जिससे उनका असर अत्यधिक विनाशकारी रहा। उत्तर मध्य राज्य ला गुएरा और राजधानी काराकस महानगरीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया। दोनों भूकंपों के बीच एक मिनट से भी कम का अंतर था और उसके बाद आए लगातार आफ्टरशॉक्स ने पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों के गिरने का खतरा और बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वेनेजुएला को व्यापक समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है और सभी संबंधित एजेंसियों को तत्काल राहत कार्यों के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने भी वेनेजुएला के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए बचाव एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम भेजने की तैयारी का ऐलान किया है। वैश्विक सहयोग के बीच अब वेनेजुएला के सामने सबसे बड़ी चुनौती राहत कार्यों को तेज करते हुए प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और सामान्य जीवन बहाल करना है।
150 इंजेक्शन, लंबा इंतजार और कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव, अनुष्का रंजन ने साझा किया IVF के जरिए मां बनने का कठिन सफर

नई दिल्ली । अभिनेत्री अनुष्का रंजन ने मां बनने के अपने सफर को लेकर खुलकर बात करते हुए आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान झेली गई शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों का अनुभव साझा किया है। हाल ही में अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा करने वाली अनुष्का ने बताया कि मातृत्व तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था। इसके पीछे लंबा इलाज, लगातार चिकित्सकीय प्रक्रियाएं और कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव शामिल रहे। उन्होंने अपने अनुभव को साझा कर उन महिलाओं का हौसला बढ़ाने की कोशिश की है, जो इसी तरह की परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। अनुष्का रंजन ने बताया कि उन्होंने और उनके पति आदित्य सील ने परिवार बढ़ाने की योजना पर गंभीरता से विचार करने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह ली। सामान्य रूप से गर्भधारण नहीं होने पर दोनों ने आईवीएफ प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, यह उपचार केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद थकाने वाला साबित हुआ। कई बार उन्हें लगा कि इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उनके लिए बेहद कठिन हो जाएगा। अभिनेत्री ने बताया कि उपचार के दौरान उन्हें 150 से अधिक इंजेक्शन लेने पड़े। कई बार इंजेक्शन का दर्द इतना अधिक होता था कि आंखों में आंसू आ जाते थे। शुरुआती चरण में उनके पति आदित्य सील स्वयं उन्हें इंजेक्शन लगाने में मदद करते थे और हर कठिन पल में उनका हौसला बढ़ाते थे। अनुष्का के मुताबिक, लगातार दवाइयों, जांचों और उपचार के बीच कई ऐसे क्षण आए जब उन्होंने मानसिक रूप से खुद को बेहद कमजोर महसूस किया, लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। उन्होंने कहा कि आईवीएफ केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि भावनात्मक परीक्षा भी है। इस दौरान महिलाएं शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ मानसिक दबाव, चिंता और अनिश्चितता से भी गुजरती हैं। इसलिए इस विषय को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि समाज में आईवीएफ को लेकर सही जानकारी और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि इस उपचार से गुजर रही महिलाओं को बेहतर समझ और भावनात्मक सहयोग मिल सके। अनुष्का ने बताया कि इस विषय पर उनकी बहन आकांक्षा ने भी उन्हें कई महत्वपूर्ण बातें समझाईं। उनके अनुसार, समाज में अक्सर यह धारणा बना दी जाती है कि विवाह के बाद गर्भधारण आसानी से हो जाता है, जबकि वास्तविकता कई बार इससे अलग होती है। विशेषज्ञों से बातचीत के दौरान उन्हें यह समझ आया कि प्रत्येक ओव्यूलेशन चक्र में गर्भधारण की संभावना सीमित होती है। इस जानकारी ने उन्हें प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद की। अभिनेत्री का कहना है कि इस पूरे अनुभव ने उन्हें महिलाओं की मानसिक और शारीरिक क्षमता का नया एहसास कराया। उनका मानना है कि मातृत्व का सफर हर महिला के लिए अलग होता है और किसी की परिस्थितियों का आकलन बिना पूरी जानकारी के नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने उन महिलाओं से भी सकारात्मक बने रहने की अपील की जो किसी कारणवश गर्भधारण में कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। अनुष्का रंजन ने इस अवसर पर पुरुषों से भी संवेदनशीलता और सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पत्नी या जीवनसाथी आईवीएफ जैसी प्रक्रिया से गुजर रही हैं, तो उन्हें धैर्य, समझ और भावनात्मक समर्थन देना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, परिवार का साथ इस कठिन सफर को काफी हद तक आसान बना सकता है। उन्होंने कहा कि अपने अनुभव को सार्वजनिक करने का उद्देश्य आईवीएफ से जुड़ी झिझक को कम करना और इस विषय पर खुलकर संवाद को बढ़ावा देना है।
महिला टी20 विश्व कप में भारत की शानदार जीत, बांग्लादेश को 5 विकेट से हराकर सेमीफाइनल की उम्मीदों को दी नई मजबूती

नई दिल्ली । आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बांग्लादेश को पांच विकेट से हराकर सेमीफाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। टीम इंडिया ने 137 रन के लक्ष्य को 16.5 ओवर में पांच विकेट खोकर हासिल करते हुए टूर्नामेंट में अपनी तीसरी जीत दर्ज की। इस महत्वपूर्ण सफलता के साथ भारतीय टीम ने अंकतालिका में अपनी दावेदारी मजबूत रखी है और अब उसकी निगाहें अंतिम लीग मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले अहम मैच पर टिकी हैं। मुकाबले में बांग्लादेश ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही अनुशासित लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी करते हुए विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा। फील्डिंग के दौरान कुछ आसान कैच जरूर छूटे, लेकिन गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट निकालकर बांग्लादेश को बड़ी साझेदारी बनाने का मौका नहीं दिया। निर्धारित 20 ओवर में बांग्लादेश की टीम छह विकेट के नुकसान पर 136 रन ही बना सकी। भारतीय गेंदबाजी आक्रमण में राधा यादव सबसे प्रभावशाली रहीं। उन्होंने तीन महत्वपूर्ण विकेट लेकर मध्यक्रम को पूरी तरह झकझोर दिया और रनगति पर लगातार नियंत्रण बनाए रखा। युवा स्पिनर श्री चरणी ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए दो विकेट अपने नाम किए। तेज गेंदबाज रेणुका सिंह ठाकुर और नंदिनी शर्मा ने भी एक-एक विकेट लेकर विपक्षी टीम को बड़ा स्कोर बनाने से रोका। गेंदबाजों के सामूहिक प्रदर्शन ने भारत के लिए लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बनने नहीं दिया। 137 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और शुरुआती झटका जल्दी लग गया। इसके बाद शेफाली वर्मा ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया। उन्होंने केवल 34 गेंदों में 53 रन की शानदार अर्धशतकीय पारी खेली। अपनी पारी के दौरान शेफाली ने आकर्षक स्ट्रोक्स के साथ तेज रनगति बनाए रखी और बांग्लादेशी गेंदबाजों को दबाव में ला दिया। शेफाली के आउट होने के बाद मध्यक्रम ने भी जिम्मेदारी निभाई। यास्तिका भाटिया ने 23 रन की उपयोगी पारी खेलकर टीम को संभाला, जबकि जेमिमा रोड्रिग्स ने महज 14 गेंदों में 26 रन बनाकर जीत की राह आसान कर दी। ऋचा घोष ने भी महत्वपूर्ण समय पर उपयोगी योगदान दिया। बल्लेबाजों के संतुलित प्रदर्शन के दम पर भारत ने 19 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया, जिससे नेट रन रेट के लिहाज से भी टीम को महत्वपूर्ण फायदा मिला। शानदार अर्धशतकीय पारी खेलने वाली शेफाली वर्मा को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने पूरे मैच के दौरान आत्मविश्वास और आक्रामकता के साथ बल्लेबाजी करते हुए विपक्षी टीम को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। वहीं गेंदबाजी में राधा यादव और श्री चरणी की प्रभावी भूमिका भारतीय जीत की सबसे बड़ी वजहों में शामिल रही। इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने सेमीफाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, लेकिन अंतिम चार में जगह सुनिश्चित करने के लिए अगला मुकाबला बेहद अहम साबित होगा। भारत का अंतिम लीग मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला जाएगा, जिसे टूर्नामेंट का निर्णायक मुकाबला माना जा रहा है। यदि भारतीय टीम इस चुनौती को पार करने में सफल रहती है तो सेमीफाइनल का टिकट लगभग तय हो जाएगा। ऐसे में टीम अब पूरे आत्मविश्वास और बेहतर लय के साथ अगले मुकाबले की तैयारी में जुट गई है।
AI की नई उड़ान इंसानी सोच और कबूतरों की पैनी नजर से तैयार होगा भविष्य का मेडिकल सुपर टूल

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को पहले से अधिक सक्षम और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अमेरिका में एक बेहद दिलचस्प और अनोखा प्रयोग चल रहा है। इस बार शोधकर्ताओं का फोकस केवल इंसानी दिमाग तक सीमित नहीं है बल्कि उन्होंने कबूतरों की असाधारण देखने की क्षमता को भी अध्ययन का हिस्सा बनाया है। इस रिसर्च का उद्देश्य ऐसा एडवांस्ड एआई सिस्टम तैयार करना है जो मेडिकल स्कैन में छिपे उन बेहद छोटे संकेतों को भी पहचान सके जो कई बार अनुभवी डॉक्टरों की नजर से भी छूट जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में एआई कंपनियां अपने मॉडल्स को इंसानों की मदद से प्रशिक्षित करती रही हैं लेकिन अब शोध एक नए स्तर पर पहुंच गया है। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इंसानी मस्तिष्क और पक्षियों की विजुअल क्षमता किस तरह जटिल मेडिकल इमेज को समझती है और इसी प्रक्रिया को एआई में विकसित किया जा सकता है। यह महत्वपूर्ण शोध अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित कॉलेज ऑफ द होली क्रॉस में डॉ ग्रेगरी डिगिरोलामो और उनकी टीम कर रही है। उनका उद्देश्य यह समझना है कि रेडियोलॉजिस्ट एक्स रे और सीटी स्कैन देखते समय किस तरह निर्णय लेते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि कई बार इंसानी दिमाग किसी असामान्यता को महसूस तो कर लेता है लेकिन वह जानकारी अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच पाती। यदि इस प्रक्रिया को एआई समझ जाए तो वह डॉक्टरों की मदद करते हुए अधिक सटीक परिणाम दे सकता है। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने रेडियोलॉजिस्ट की आंखों की गतिविधियों का भी विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि जब डॉक्टर सीटी स्कैन में फेफड़ों की गांठों को देखते हैं तो उनकी नजर उसी हिस्से पर अधिक देर तक टिकती है और आंखों की पुतलियां भी फैल जाती हैं। कई मामलों में डॉक्टर बाद में रिपोर्ट सामान्य लिख देते हैं लेकिन दिमाग शुरुआती स्तर पर असामान्यता को महसूस कर चुका होता है। यह संकेत बताता है कि मानव मस्तिष्क अवचेतन स्तर पर कई ऐसी जानकारियां पकड़ लेता है जिन्हें बाद में निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता। इसी सिद्धांत को और बेहतर समझने के लिए शोधकर्ताओं ने छह कबूतरों को विशेष प्रशिक्षण दिया। इन पक्षियों को सीटी स्कैन के छोटे वीडियो दिखाए गए और उनसे यह पहचानने का अभ्यास कराया गया कि फेफड़ों में गांठ मौजूद है या नहीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कबूतरों की विजुअल पहचान क्षमता बेहद प्रभावशाली होती है और वे सूक्ष्म अंतर भी पहचान सकते हैं। यही विशेषता भविष्य के एआई सिस्टम को अधिक संवेदनशील और सटीक बनाने में मदद कर सकती है। डॉ डिगिरोलामो का कहना है कि इस तकनीक का उद्देश्य डॉक्टरों की जगह लेना नहीं बल्कि उनकी क्षमता को और मजबूत बनाना है। भविष्य में ऐसे एआई टूल विकसित किए जा सकते हैं जो रेडियोलॉजिस्ट के साथ मिलकर काम करें और उन संकेतों की ओर ध्यान दिलाएं जो सामान्य जांच के दौरान अनदेखे रह जाते हैं। इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाना आसान हो सकता है और मरीजों का इलाज समय रहते शुरू किया जा सकेगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में इसका उपयोग हृदय रोगों की पहचान कला की असली और नकली कृतियों की जांच सुरक्षा एजेंसियों की स्क्रीनिंग प्रणाली और कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में एआई केवल तेज ही नहीं बल्कि पहले से कहीं अधिक समझदार और संवेदनशील भी बन सकता है।
ट्रैफिक और पुलिस पर वीडियो बनाना पड़ा महंगा, मोरक्को में विदेशी कंटेंट क्रिएटर को अदालत ने सुनाई एक साल की सजा

नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो को लेकर मोरक्को में एक विदेशी कंटेंट क्रिएटर को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। फ्रेंच-अल्जीरियाई इन्फ्लुएंसर यास नौबेले को स्थानीय अदालत ने एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। मामला उस वीडियो से जुड़ा है जिसमें उन्होंने मोरक्को की ट्रैफिक व्यवस्था, स्थानीय नागरिकों की ड्राइविंग शैली और पुलिस व्यवस्था पर सार्वजनिक टिप्पणियां की थीं। अदालत ने इन टिप्पणियों को सरकारी संस्थाओं की कथित मानहानि और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला माना। जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय यास नौबेले निजी यात्रा पर मोरक्को के ऐतिहासिक शहर माराकेश पहुंची थीं। इसी दौरान उन्होंने टैक्सी में यात्रा करते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर दिया। वीडियो में उन्होंने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, वाहन चालकों के व्यवहार और यातायात नियमों के पालन को लेकर कई आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं, जो बाद में व्यापक चर्चा का विषय बन गईं। वीडियो में उन्होंने स्थानीय ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि बिना उचित कारण लोगों को रोका जाता है। इसके अलावा उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी लगाए और मोरक्को की व्यवस्थाओं की तुलना दूसरे देशों से करते हुए उन्हें कमजोर बताया। सोशल मीडिया पर वीडियो के तेजी से वायरल होने के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों ने इसकी जांच शुरू कर दी। प्रशासन के अनुसार, जांच में वीडियो की सामग्री का परीक्षण किया गया और इसे सरकारी संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला माना गया। इसके बाद इन्फ्लुएंसर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। बताया गया कि यात्रा पूरी होने के बाद जब वह फ्रांस लौटने के लिए एयरपोर्ट पहुंचीं, तब सीमा अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने संबंधित वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया था, लेकिन तब तक जांच प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने वीडियो, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा की। न्यायालय ने उन्हें मोरक्को के नागरिकों और पुलिस बल के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी करने का दोषी मानते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इसके साथ आर्थिक दंड भी लगाया। हालांकि फैसले के बाद उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च अदालत में अपील करने का कानूनी अधिकार भी प्रदान किया गया है। यह मामला एक बार फिर इस तथ्य को सामने लाता है कि अलग-अलग देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानहानि और सरकारी संस्थाओं पर सार्वजनिक टिप्पणी से जुड़े कानून अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी विदेशी नागरिक या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर के लिए यह आवश्यक है कि वह जिस देश की यात्रा कर रहा हो, वहां के स्थानीय कानूनों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी रखे तथा उनका पालन करे। इंटरनेट पर साझा की गई सामग्री कई बार सीमाओं से परे भी कानूनी परिणाम उत्पन्न कर सकती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच यह घटना सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है। अधिक लोकप्रियता या व्यापक पहुंच हासिल करने की प्रतिस्पर्धा में प्रकाशित सामग्री यदि स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करती है या किसी देश की संस्थाओं को लेकर कानूनी विवाद खड़ा करती है, तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इसलिए ऑनलाइन सामग्री साझा करते समय तथ्यात्मकता, जिम्मेदारी और स्थानीय नियमों का पालन करना पहले से कहीं अधिक आवश्यक माना जा रहा है।
मुहर्रम केवल मातम नहीं, इंसाफ और मानवता का संदेश भी, कर्बला की शहादत से जुड़ी है इसकी सबसे बड़ी पहचान

नई दिल्ली । इस्लामिक हिजरी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह नया इस्लामिक वर्ष शुरू होने का संकेत जरूर देता है, लेकिन इसकी पहचान उत्सव से अधिक आत्मचिंतन, शहादत और त्याग से जुड़ी हुई है। दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान इस महीने में कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना को याद करते हैं, जिसने सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान का संदेश दिया। इसी कारण मुहर्रम केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा का प्रतीक भी माना जाता है। मुहर्रम की 10वीं तारीख, जिसे अशूरा कहा जाता है, इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने कर्बला की धरती पर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहादत प्राप्त की थी। इस घटना को इस्लामिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक घटनाओं में गिना जाता है। समय बीतने के बावजूद कर्बला की यह शहादत आज भी सत्य और न्याय के लिए संघर्ष की सबसे बड़ी मिसाल मानी जाती है। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, पैगंबर हजरत मोहम्मद के इंतकाल के बाद मुस्लिम समाज में नेतृत्व को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए। बाद में जब यजीद सत्ता में आया तो उसने अपने शासन के प्रति निष्ठा स्वीकार करने की मांग की। हजरत इमाम हुसैन ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका मानना था कि सत्ता का आधार न्याय, ईमानदारी और नैतिक सिद्धांत होने चाहिए तथा अन्यायपूर्ण शासन का समर्थन नहीं किया जा सकता। यही सिद्धांत आगे चलकर कर्बला की ऐतिहासिक घटना का कारण बने। वर्ष 680 ईस्वी में वर्तमान इराक स्थित कर्बला में इमाम हुसैन, उनके परिवार और साथियों को घेर लिया गया। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, उन्हें कई दिनों तक पानी और आवश्यक संसाधनों से वंचित रखा गया। इसके बाद हुए संघर्ष में इमाम हुसैन सहित उनके परिवार और साथियों ने शहादत प्राप्त की। यह बलिदान केवल धार्मिक इतिहास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और नैतिक मूल्यों की रक्षा के प्रतीक के रूप में पूरी दुनिया में याद किया जाता है। मुहर्रम के दौरान मनाया जाने वाला मातम केवल शोक व्यक्त करने की परंपरा नहीं है। इसका उद्देश्य कर्बला के बलिदान को याद करते हुए सत्य, न्याय और मानवता के मूल्यों को जीवित रखना भी है। विशेष रूप से शिया समुदाय इस अवसर पर मजलिसों का आयोजन करता है, काले वस्त्र धारण करता है और कर्बला की घटना का स्मरण करता है। कई स्थानों पर ताजिया जुलूस भी निकाले जाते हैं, जिन्हें इमाम हुसैन की शहादत के प्रति श्रद्धांजलि का प्रतीक माना जाता है। भारत सहित अनेक देशों में ताजिया मुहर्रम की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। बांस, कागज और सजावटी सामग्री से तैयार किए जाने वाले ताजिए कर्बला स्थित इमाम हुसैन के रौजे का प्रतीक माने जाते हैं। धार्मिक विद्वान इस अवसर पर केवल शोक तक सीमित रहने के बजाय समाज सेवा, जरूरतमंदों की सहायता, रक्तदान और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने जैसे कार्यों को भी इमाम हुसैन की शिक्षाओं के अनुरूप बताते हैं। मुहर्रम का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था। यह अवसर सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य, न्याय और नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए। कर्बला की शहादत केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि साहस, धैर्य, त्याग और मानवता की रक्षा के लिए प्रेरित करने वाली ऐसी अमर विरासत है, जो हर पीढ़ी को अपने सिद्धांतों पर दृढ़ रहने का संदेश देती है। संक्षिप्त सार:मुहर्रम इस्लामिक वर्ष का पहला महीना है, जिसकी सबसे बड़ी पहचान कर्बला में हजरत इमाम हुसैन की शहादत से जुड़ी है। यह महीना सत्य, न्याय, त्याग और मानवता के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है। English Keywords:Muharram, Karbala, ImamHussain, Ashura, Sacrifice नई दिल्ली । इस्लामिक हिजरी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह नया इस्लामिक वर्ष शुरू होने का संकेत जरूर देता है, लेकिन इसकी पहचान उत्सव से अधिक आत्मचिंतन, शहादत और त्याग से जुड़ी हुई है। दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान इस महीने में कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना को याद करते हैं, जिसने सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान का संदेश दिया। इसी कारण मुहर्रम केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा का प्रतीक भी माना जाता है। मुहर्रम की 10वीं तारीख, जिसे अशूरा कहा जाता है, इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने कर्बला की धरती पर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहादत प्राप्त की थी। इस घटना को इस्लामिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक घटनाओं में गिना जाता है। समय बीतने के बावजूद कर्बला की यह शहादत आज भी सत्य और न्याय के लिए संघर्ष की सबसे बड़ी मिसाल मानी जाती है। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, पैगंबर हजरत मोहम्मद के इंतकाल के बाद मुस्लिम समाज में नेतृत्व को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए। बाद में जब यजीद सत्ता में आया तो उसने अपने शासन के प्रति निष्ठा स्वीकार करने की मांग की। हजरत इमाम हुसैन ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका मानना था कि सत्ता का आधार न्याय, ईमानदारी और नैतिक सिद्धांत होने चाहिए तथा अन्यायपूर्ण शासन का समर्थन नहीं किया जा सकता। यही सिद्धांत आगे चलकर कर्बला की ऐतिहासिक घटना का कारण बने। वर्ष 680 ईस्वी में वर्तमान इराक स्थित कर्बला में इमाम हुसैन, उनके परिवार और साथियों को घेर लिया गया। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, उन्हें कई दिनों तक पानी और आवश्यक संसाधनों से वंचित रखा गया। इसके बाद हुए संघर्ष में इमाम हुसैन सहित उनके परिवार और साथियों ने शहादत प्राप्त की। यह बलिदान केवल धार्मिक इतिहास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और नैतिक मूल्यों की रक्षा के प्रतीक के रूप में पूरी दुनिया में याद किया जाता है। मुहर्रम के दौरान मनाया जाने वाला मातम केवल शोक व्यक्त करने की परंपरा नहीं है। इसका उद्देश्य कर्बला के बलिदान को याद करते हुए सत्य, न्याय और मानवता के मूल्यों को जीवित
सीनियरिटी से नहीं मिलता हाईकोर्ट जज बनने का अधिकार कॉलेजियम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कॉलेजियम की सिफारिशों में सामान्य परिस्थितियों में न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि संवैधानिक अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति पूरी तरह कॉलेजियम के स्वतंत्र आकलन और गोपनीय प्रक्रिया पर आधारित होती है। ऐसे मामलों की गहन न्यायिक जांच केवल असाधारण परिस्थितियों में ही संभव है। मामला हिमाचल प्रदेश के एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी अरविंद मल्होत्रा की याचिका से जुड़ा था। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की उस सिफारिश को चुनौती दी थी जिसमें उनसे जूनियर तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में आगे बढ़ाए गए थे। याचिकाकर्ता का कहना था कि पहले उनके नाम पर पुनर्विचार के निर्देश दिए गए थे लेकिन बाद में उनसे कनिष्ठ अधिकारियों की सिफारिश कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब हाईकोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पहले ही मंजूरी दे चुका है तब इस स्तर पर उस प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा का कोई ठोस आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि कॉलेजियम की कार्यवाही पूरी तरह गोपनीय होती है और उसकी जांच पड़ताल शुरू करना पूरी व्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में गोपनीयता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। यदि हर सिफारिश की न्यायिक जांच शुरू कर दी जाए तो यह पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को प्रभावित करेगा और अनावश्यक विवादों का रास्ता खुल जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर कॉलेजियम के फैसलों की पड़ताल कर किसी नए विवाद या मुसीबतों का पिटारा नहीं खोलना चाहती। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें यह स्वतंत्रता दी कि यदि आवश्यक समझें तो हाईकोर्ट के सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत रखें अथवा उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा लें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल वरिष्ठता के आधार पर किसी न्यायिक अधिकारी को हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाए जाने का अधिकार नहीं मिल जाता। कॉलेजियम नियुक्ति के समय योग्यता अनुभव कार्यशैली ईमानदारी और समग्र मूल्यांकन जैसे कई पहलुओं पर विचार करता है। इसलिए केवल वरिष्ठ होने के आधार पर नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। पीठ ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी को औपचारिक रूप से खारिज किया गया है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने संकेत दिया कि उनकी सेवा अवधि अभी लंबी है और भविष्य में रिक्तियां आने पर उनके नाम पर फिर विचार किया जा सकता है। इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायपालिका में नियुक्तियों की पारदर्शिता जितनी महत्वपूर्ण है उतनी ही आवश्यक उसकी गोपनीयता भी है। कॉलेजियम प्रणाली में अदालत का हस्तक्षेप सीमित रहेगा ताकि संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और गरिमा बनी रहे।