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असम-अरुणाचल में बारिश बनी आफत, बाढ़ से 22 हजार से अधिक लोग प्रभावित, 60 साल पुराना रेलवे पुल ढहने से रेल सेवा ठप

नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने असम और अरुणाचल प्रदेश में हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। कई जिलों में आई बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। असम में हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने के बाद कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटा है तथा मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार राज्य के धेमाजी, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और कोकराझार समेत कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 22 हजार से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हो चुके हैं। सबसे अधिक असर धेमाजी जिले में देखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। बाढ़ का पानी दर्जनों गांवों तक पहुंच चुका है और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी किनारे बसे गांवों में खतरा बढ़ने के बाद प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है। राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। इस प्राकृतिक आपदा का असर पशुधन पर भी पड़ा है और हजारों मवेशी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसी बीच धेमाजी जिले में लगभग छह दशक पुराना रेलवे पुल क्षतिग्रस्त होकर आंशिक रूप से ढह गया। बताया गया कि लगातार बारिश और नदी किनारे तेज कटाव के कारण पुल का एक पिलर कमजोर हो गया, जिससे उसका एक हिस्सा टूट गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय पुल से कोई ट्रेन नहीं गुजर रही थी, इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पुल को नुकसान पहुंचने के बाद संबंधित रेलवे खंड पर ट्रेन सेवाएं एहतियातन रोक दी गई हैं और तकनीकी टीमें मरम्मत कार्य में जुट गई हैं। अरुणाचल प्रदेश में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। हाल ही में बादल फटने की घटनाओं के बाद कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है। अब तक कई लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार खोज अभियान चला रहे हैं। लेकू नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे सीमावर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। मौसम विभाग ने 1 जुलाई तक असम और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश, तेज आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और आपदा प्रबंधन दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य सरकार से स्थिति की जानकारी लेकर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मिलकर राहत एवं पुनर्वास कार्य को तेज गति से आगे बढ़ा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने तक सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगले कुछ दिन पूर्वोत्तर के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

अमरनाथ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, पहली पूजा के साथ सुरक्षा व्यवस्था हुई मजबूत, 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण

नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा 2026 की शुरुआत से पहले सोमवार को बाबा बर्फानी की पहली पूजा विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल एवं श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा ने पूजा-अर्चना कर यात्रा के सफल और सुरक्षित संचालन की कामना की। इस वर्ष पवित्र यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त यानी रक्षाबंधन तक चलेगी। कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस धार्मिक यात्रा के लिए प्रशासन ने लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग दोनों से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना होंगे। प्रशासन के अनुसार 15 अप्रैल से अब तक चार लाख से अधिक श्रद्धालु यात्रा के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं। यात्रा का पहला जत्था 2 जुलाई को जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैंप से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना किया जाएगा। यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया है। बालटाल और चंदनवाड़ी में बेस अस्पताल शुरू कर दिए गए हैं, जबकि दोनों यात्रा मार्गों पर चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन सहायता केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को किसी भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का तुरंत उपचार मिल सके, इसके लिए डॉक्टरों और मेडिकल टीमों की तैनाती भी की गई है। प्रशासन का कहना है कि यात्रा मार्गों पर बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि महागणेश टॉप के पास जमी बर्फ को हटाने का कार्य अंतिम चरण में है। अधिकारियों के मुताबिक अगले दो से तीन दिनों में यह काम भी पूरा कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह सुगम हो सकेगी। यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को भी अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोड ओपनिंग पार्टी लगातार गश्त कर रही है। इसके साथ ही इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को सक्रिय कर पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी की जा रही है। पुलिस, अर्धसैनिक बलों और प्रशासनिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर मॉक ड्रिल और सुरक्षा अभ्यास भी आयोजित किए गए हैं। यात्रा मार्ग और बेस कैंपों पर आने वाले श्रद्धालुओं तथा साधु-संतों की नियमित जांच भी की जा रही है। अमरनाथ यात्रा के लिए दो प्रमुख मार्ग निर्धारित किए गए हैं। पारंपरिक पहलगाम मार्ग लगभग 41 किलोमीटर लंबा है, जहां से पवित्र गुफा तक पहुंचने में सामान्यतः तीन से चार दिन का समय लगता है। यह मार्ग अपेक्षाकृत आसान माना जाता है और ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ने के कारण श्रद्धालुओं को अनुकूल वातावरण मिलता है। वहीं बालटाल मार्ग करीब सात किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसकी चढ़ाई अधिक खड़ी और कठिन होने के कारण यह अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यात्रा शुरू होने से पहले जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रायल काफिले का सफल ड्राई रन भी किया गया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का परीक्षण किया गया। ट्रायल काफिला तय समय के भीतर रामबन पहुंचा, जिससे प्रशासन ने यात्रा की तैयारियों पर संतोष जताया। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

सऊदी अरब-फ्रांस के बीच उच्चस्तरीय संवाद, ईरान-अमेरिका समझौते, होर्मुज संकट और क्षेत्रीय स्थिरता पर हुई विस्तृत चर्चा

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच सऊदी अरब और फ्रांस ने क्षेत्रीय शांति तथा सुरक्षा को लेकर अपने समन्वय को और मजबूत करने के संकेत दिए हैं। इसी क्रम में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस एवं प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के साथ-साथ दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया ज्ञापन समझौते से जुड़े ताजा घटनाक्रम की समीक्षा की। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी कूटनीतिक प्रयासों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि तनाव कम करने के लिए संवाद और सहयोग की प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ाना आवश्यक है। वार्ता में समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी प्रमुख विषय रही। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय नौवहन की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समुद्री व्यापार को किसी भी प्रकार के तनाव या टकराव से प्रभावित नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय विवादों के समाधान के लिए सैन्य विकल्पों के बजाय कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता दोहराई। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने सऊदी अरब और फ्रांस के द्विपक्षीय संबंधों की भी समीक्षा की। आर्थिक, रणनीतिक और राजनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की गई। इसके अलावा साझा वैश्विक चुनौतियों और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करते हुए भविष्य में सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हस्ताक्षरित ज्ञापन समझौते का उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करना और संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ना था। हालांकि समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच समय-समय पर तनावपूर्ण घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बनी हुई है। हालिया घटनाक्रमों के बीच अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों ने फिलहाल आपसी हमलों को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवादों के समाधान के लिए कतर की राजधानी दोहा में वार्ता करने पर सहमति जताई है। पहले यह बैठक स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित थी, लेकिन क्षेत्र में बढ़े तनाव को देखते हुए इसका स्थान बदल दिया गया। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष तकनीकी स्तर की वार्ताओं को जारी रखते हुए समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब और फ्रांस के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुआ यह संवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रमुख देशों के बीच निरंतर कूटनीतिक संपर्क और सहयोग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। ऐसे प्रयास क्षेत्रीय तनाव कम करने और दीर्घकालिक शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इराक दौरे पर अराघची ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की अहम वार्ता, ईरान-अमेरिका एमओयू, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज तनाव पर हुई व्यापक चर्चा

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में लगातार बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच ईरान और इराक के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क एक बार फिर चर्चा में है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बगदाद में इराक के राष्ट्रपति निजार अमेदी और प्रधानमंत्री अली अल-जैदी से अलग-अलग मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान-अमेरिका के बीच हालिया समझौता ज्ञापन (एमओयू) और मौजूदा तनावपूर्ण परिस्थितियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया। बैठकों में दोनों देशों ने संवाद को ही स्थायी समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देने पर सहमति व्यक्त की। इराक के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति अमेदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा स्थापित करने के लिए निरंतर बातचीत और आपसी विश्वास को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि लंबित विवादों का समाधान सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है। उनका मानना है कि संवाद आधारित पहल से पूरे क्षेत्र में स्थिर और सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकता है। प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ हुई बैठक में भी यही दृष्टिकोण सामने आया। उन्होंने कहा कि इराक किसी भी प्रकार के संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने वाली सभी पहलों का समर्थन करता है। उनके अनुसार युद्ध और टकराव की स्थिति समाप्त होने से क्षेत्र के देशों के लिए आर्थिक विकास, निवेश और जनकल्याण के नए अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इराक शांति और सहयोग पर आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था का पक्षधर है। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने संकट की परिस्थितियों में इराक की संतुलित भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि तेहरान अपने पड़ोसी देशों के साथ भरोसे और सहयोग पर आधारित संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा कहा कि साझा चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार समन्वय बनाए रखना समय की मांग है। यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय हुई है जब हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव तेज हो गया था। अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए आरोप लगाया कि होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लगातार चुनौती दी जा रही है। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन घटनाओं ने पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया। हालांकि ताजा घटनाक्रम में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने आपसी सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े विवादों पर बातचीत के लिए कतर की राजधानी दोहा में बैठक करने पर सहमति जताई है। इस वार्ता का उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आगे किसी भी प्रकार के टकराव से बचने के उपाय तलाशना है। जानकारी के अनुसार, प्रारंभिक योजना के तहत यह वार्ता स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित थी, जहां मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे थे। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव को देखते हुए बैठक का स्थान बदलकर दोहा कर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार की निरंतरता को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे समय में इराक और ईरान के बीच हुई यह उच्चस्तरीय बातचीत पूरे क्षेत्र में संवाद आधारित समाधान को आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देखी जा रही है।

भारत-सेशेल्स रिश्तों को नई मजबूती, रक्षा, डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और ब्लू इकोनॉमी समेत 19 क्षेत्रों में बढ़ा सहयोग

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दिवसीय सेशेल्स दौरा भारत और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स के बीच कुल 19 महत्वपूर्ण समझौतों और सहयोगी पहलों पर सहमति बनी, जिनका उद्देश्य रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई दिशा देना है। इन समझौतों को दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का मजबूत आधार माना जा रहा है। दौरे के दौरान भारत ने सेशेल्स को एक फास्ट पेट्रोल वेसल, कई यूटिलिटी वाहन, लेजर रेडियल क्लास बोट्स और छह एम्बुलेंस भेंट कीं। इन पहलों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, मानवीय सहयोग बढ़ाना और हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और प्रभावी बनाना है। साथ ही सेशेल्स कोस्ट गार्ड के जहाज की मरम्मत और डोर्नियर विमान के आधुनिकीकरण जैसे प्रोजेक्ट भी सहयोग के प्रमुख केंद्र रहे। आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई गति देने के लिए भारत और सेशेल्स के बीच यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू करने पर सहमति बनी। इस दिशा में दोनों देशों के संबंधित वित्तीय संस्थानों के बीच समझौते किए गए, जिससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा और भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रणाली का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी मजबूत होगा। इसके साथ ही आर्थिक सहयोग और वित्तीय समावेशन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों देशों ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जन औषधि योजना के तहत सस्ती और गुणवत्तापूर्ण भारतीय दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके अलावा नए राष्ट्रीय अस्पताल की शुरुआती तैयारियों और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास से जुड़े समझौतों पर भी सहमति बनी, जिससे सेशेल्स की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में भारत की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा। कृषि, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग का दायरा विस्तारित किया है। कृषि अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार की गई है। वहीं प्रोफेशनल और टेक्निकल एजुकेशन सेंटर की स्थापना तथा विदेश सेवा से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए संस्थागत सहयोग को भी नई मजबूती मिलेगी। इन पहलों का उद्देश्य स्थानीय क्षमता निर्माण के साथ दीर्घकालिक विकास साझेदारी को मजबूत करना है। ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और ब्लू इकोनॉमी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। ग्रीन हाइड्रोजन, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे, समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर साझा प्रयासों पर जोर दिया गया। इसके साथ ही सेशेल्स ने आपदा-रोधी अवसंरचना से जुड़े वैश्विक गठबंधन की सदस्यता भी ग्रहण की, जिससे जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सहयोग और मजबूत होगा। दौरे के दौरान अंतरिक्ष सहयोग, प्रत्यर्पण संधि, नाविकों के प्रशिक्षण, खाद्य सुरक्षा, विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता तथा बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कई महत्वपूर्ण समझौते भी किए गए। भारत ने सेशेल्स को चावल और सीमेंट की आपूर्ति के साथ विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग भी उपलब्ध कराया। इन पहलों से स्पष्ट है कि दोनों देश केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि व्यापक आर्थिक, रणनीतिक और विकासात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री की इस यात्रा ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करने के साथ भारत-सेशेल्स संबंधों को नई ऊंचाई देने का मार्ग भी प्रशस्त किया।

उर्दू कक्षा को लेकर बढ़ा विवाद, शिक्षक से कथित मारपीट के बाद सख्त कार्रवाई की उठी मांग

नई दिल्ली: तेलंगाना के निजामाबाद जिले में एक स्कूल में उर्दू की कक्षा के दौरान हुए विवाद ने प्रदेश की राजनीति को भी गर्मा दिया है। आरोप है कि कुछ लोग स्कूल परिसर में जबरन घुस गए और पढ़ाई कर रहे शिक्षक के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट की। घटना के बाद पुलिस ने बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश करने, डराने-धमकाने और मारपीट समेत विभिन्न आरोपों में 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना अरमूर स्थित भारत चंद्र स्कूल की है, जहां एक शिक्षक छात्रों को उर्दू पढ़ा रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने स्कूल पहुंचकर इस बात पर आपत्ति जताई कि गैर-मुस्लिम छात्रों को उर्दू भाषा सिखाई जा रही है। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और शिक्षक के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। इस दौरान मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति शिक्षक को पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में थप्पड़ मारता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा जगत और विभिन्न सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने इसे कानून-व्यवस्था और शिक्षकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना के विरोध में कई शिक्षक और अल्पसंख्यक संगठनों ने निजामाबाद बंद का आह्वान किया। उनका कहना है कि ड्यूटी के दौरान किसी शिक्षक के साथ इस तरह का व्यवहार पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। संगठनों ने प्रशासन से स्कूल स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस नेता डॉ. शमा मोहम्मद ने राज्य सरकार से पूरे प्रकरण में निष्पक्ष जांच कराने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी शिक्षक के साथ कानून हाथ में लेकर हिंसक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने शिक्षा संस्थानों में सुरक्षित माहौल बनाए रखने पर भी जोर दिया। दूसरी ओर, विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि छात्रों को उर्दू भाषा के साथ धार्मिक सामग्री और गीत भी पढ़ाए जा रहे थे, जिस पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वायरल वीडियो सहित सभी उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

जुलाई में OTT पर एंटरटेनमेंट का धमाका नेटफ्लिक्स से जियोहॉटस्टार तक रिलीज होंगी ये बड़ी फिल्में और सीरीज

नई दिल्ली। जुलाई का महीना ओटीटी दर्शकों के लिए जबरदस्त मनोरंजन लेकर आ रहा है। अगर आप घर बैठे नई फिल्में और वेब सीरीज देखने के शौकीन हैं तो आने वाले हफ्तों में आपके पास विकल्पों की कोई कमी नहीं होगी। नेटफ्लिक्स जियोहॉटस्टार और एप्पल टीवी प्लस जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म पर कई बड़ी और बहुप्रतीक्षित रिलीज दस्तक देने जा रही हैं। इनमें एक्शन ड्रामा कॉमेडी थ्रिलर साइंस फिक्शन और के ड्रामा जैसे अलग अलग जॉनर शामिल हैं। महीने की शुरुआत 2 जुलाई को नेटफ्लिक्स की पहली ओरिजिनल तेलुगू सीरीज सुपर सुब्बू से होगी। सात एपिसोड की यह कॉमेडी ड्रामा सीरीज एक साधारण युवक की मजेदार और दिलचस्प जिंदगी पर आधारित है। इसमें संदीप किशन मुख्य भूमिका निभा रहे हैं जबकि मिथिला पालकर और मुरली शर्मा भी अहम किरदारों में नजर आएंगे। इसके अगले दिन यानी 3 जुलाई को जियोहॉटस्टार पर प्रीतम एंड पेड्रो रिलीज होगी। इस वेब सीरीज को मशहूर फिल्मकार राजकुमार हिरानी ने क्रिएट और प्रोड्यूस किया है जबकि निर्देशन अविनाश अरुण ने किया है। अमित दुबे की चर्चित किताबों से प्रेरित इस सीरीज में अर्शद वारसी और विक्रांत मैसी मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इसी प्रोजेक्ट के जरिए वीर हिरानी अभिनय की दुनिया में कदम रख रहे हैं। 3 जुलाई को ही एप्पल टीवी प्लस पर साइंस फिक्शन सीरीज साइलो सीजन 3 भी रिलीज होगी। भविष्य की दुनिया पर आधारित यह कहानी उन लोगों के इर्दगिर्द घूमती है जो जहरीले वातावरण के कारण जमीन के नीचे बने विशाल साइलो में रहने को मजबूर हैं। पहले दो सीजन की सफलता के बाद तीसरे सीजन का दर्शकों को लंबे समय से इंतजार था। 10 जुलाई को नेटफ्लिक्स पर फिल्म इक्का स्ट्रीम होगी। इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि करीब 29 साल बाद सनी देओल और अक्षय खन्ना की जोड़ी एक साथ नजर आएगी। फिल्म में दीया मिर्जा तिलोत्तमा शोम संजीदा शेख और आकांक्षा रंजन कपूर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। [relpost] 17 जुलाई को नेटफ्लिक्स पर युवाओं की पसंदीदा रोमांटिक सीरीज हार्टस्टॉपर फॉरएवर सीजन 3 रिलीज होगी। यह सीरीज अपने अंतिम सीजन के साथ दर्शकों से विदा लेगी। इसी दिन के ड्रामा प्रेमियों के लिए द ईस्ट पैलेस भी स्ट्रीम होगी। रहस्य और फैंटेसी से भरपूर इस कहानी में नाम जू ह्युक ऐसे किरदार में नजर आएंगे जो जीवित और मृत दुनिया के बीच यात्रा कर सकता है। महीने के अंत में 29 जुलाई को जियोहॉटस्टार पर हॉलीवुड फिल्म द डेविल वीयर्स प्राडा 2 दस्तक देगी। फैशन इंडस्ट्री और कॉर्पोरेट दुनिया की पृष्ठभूमि पर बनी इस बहुप्रतीक्षित सीक्वल का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। थिएटर में रिलीज के बाद अब यह फिल्म ओटीटी दर्शकों के लिए उपलब्ध होगी। कुल मिलाकर जुलाई 2026 ओटीटी दर्शकों के लिए मनोरंजन से भरपूर रहने वाला है। चाहे आपको एक्शन पसंद हो रोमांस थ्रिलर साइंस फिक्शन या फिर कॉमेडी हर वर्ग के दर्शकों के लिए इस महीने कुछ न कुछ खास देखने को मिलेगा।

जब अपनी ही फिल्म के फ्लॉप होने की दुआ मांगने लगे थे किशोर कुमार किस्मत ने बना दिया सुपरहिट

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के महान गायक अभिनेता और निर्माता किशोर कुमार अपनी शानदार गायकी के साथ साथ अपने अनोखे स्वभाव और मजेदार किस्सों के लिए भी जाने जाते थे। उनके जीवन से जुड़ी कई घटनाएं आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा उनकी सुपरहिट फिल्म चलती का नाम गाड़ी से जुड़ा है। कहा जाता है कि इस फिल्म के निर्माण के दौरान किशोर कुमार चाहते थे कि उनकी अपनी ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो जाए। हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और यही फिल्म बाद में उनकी सबसे बड़ी सफलताओं में शामिल हो गई। बताया जाता है कि वर्ष 1958 के दौरान किशोर कुमार आयकर से जुड़े मामलों में उलझे हुए थे। उन पर टैक्स का बड़ा बकाया था और इसी परेशानी से निकलने के लिए उन्होंने एक अलग ही योजना बनाई। उनका विचार था कि यदि वह एक ऐसी फिल्म बनाएंगे जो बॉक्स ऑफिस पर असफल हो जाएगी तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा। इस नुकसान को आय में समायोजित करके टैक्स का बोझ कम किया जा सकेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने निर्देशक सत्येन बोस के साथ मिलकर चलती का नाम गाड़ी का निर्माण शुरू किया। फिल्म में मधुबाला को मुख्य भूमिका दी गई जबकि किशोर कुमार अपने भाइयों के साथ पर्दे पर नजर आए। इस फिल्म का निर्माण हिंदी के साथ साथ बंगाली भाषा में भी किया गया जहां इसे लुकचुरी नाम से रिलीज किया गया। कहा जाता है कि किशोर कुमार मन ही मन यही चाहते थे कि फिल्म दर्शकों को पसंद न आए और उनकी योजना सफल हो जाए। लेकिन रिलीज के बाद कहानी पूरी तरह बदल गई। फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिला और यह उस दौर की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में शामिल हो गई। अपनी शानदार कॉमेडी दमदार अभिनय और यादगार गीतों की वजह से फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की और लंबे समय तक सिनेमाघरों में चलती रही। करीब 35 लाख रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर लगभग एक करोड़ पच्चीस लाख रुपये का कारोबार किया जबकि दुनिया भर में इसकी कमाई करीब ढाई करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उस समय के हिसाब से यह बेहद बड़ी सफलता मानी गई। फिल्म की अप्रत्याशित कामयाबी ने किशोर कुमार की टैक्स बचाने की पूरी योजना पर पानी फेर दिया क्योंकि नुकसान दिखाने की जगह उन्हें बड़ा मुनाफा हो गया। बताया जाता है कि आयकर से जुड़ा उनका मामला लंबे समय तक अदालतों में चलता रहा। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम का सकारात्मक पहलू यह रहा कि भारतीय सिनेमा को एक ऐसी क्लासिक कॉमेडी फिल्म मिली जिसे आज भी दर्शक पूरे परिवार के साथ देखना पसंद करते हैं। चलती का नाम गाड़ी समय के साथ एक यादगार फिल्म बन गई और इसके गीत तथा किरदार आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं। यही वजह है कि किशोर कुमार का यह अनोखा किस्सा आज भी फिल्म प्रेमियों के बीच मुस्कान बिखेर देता है।

गोविंदा को डरा गई थी गदर की स्क्रिप्ट फिल्म बनी ब्लॉकबस्टर और सनी देओल के करियर की सबसे बड़ी हिट

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाने वाली गदर एक प्रेम कथा आज भी दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में शामिल है। वर्ष 2001 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड बनाए और सनी देओल के करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। हालांकि इस फिल्म को लेकर एक पुराना किस्सा एक बार फिर चर्चा में है। निर्देशक अनिल शर्मा ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उन्होंने फिल्म की कहानी अभिनेता गोविंदा को भी सुनाई थी लेकिन कहानी की भव्यता और विषय को देखकर वह हैरान रह गए थे। लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि गदर में तारा सिंह के किरदार के लिए पहले गोविंदा को चुना गया था। हालांकि निर्देशक अनिल शर्मा ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोविंदा को कभी इस फिल्म के लिए साइन नहीं किया गया था। उस समय वह फिल्म महाराजा की शूटिंग कर रहे थे और इसी दौरान अनिल शर्मा ने उन्हें गदर की कहानी सुनाई थी। निर्देशक के अनुसार गोविंदा ने कहानी सुनने के बाद कहा कि इतनी बड़ी और भव्य फिल्म बनाना आसान नहीं होगा। उस दौर में पाकिस्तान की पृष्ठभूमि पर इतने बड़े स्तर पर फिल्म बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता था। यही वजह थी कि गोविंदा इस परियोजना की विशालता को लेकर आशंकित नजर आए। अनिल शर्मा ने साफ कहा कि तारा सिंह के किरदार के लिए उनकी पहली और अंतिम पसंद हमेशा सनी देओल ही थे। फिल्म में सनी देओल ने तारा सिंह का किरदार निभाया जबकि अमीषा पटेल ने सकीना की भूमिका से दर्शकों का दिल जीत लिया। दोनों की जोड़ी को जबरदस्त लोकप्रियता मिली और फिल्म का देशभक्ति तथा प्रेम से जुड़ा भावनात्मक कथानक लोगों के दिलों में बस गया। फिल्म के संवाद और गीत भी आज तक याद किए जाते हैं। निर्देशक ने यह भी बताया कि मुख्य अभिनेत्री के किरदार के लिए केवल काजोल ही नहीं बल्कि कई अभिनेत्रियों से बातचीत की गई थी। अंत में अमीषा पटेल को यह भूमिका मिली और उन्होंने अपने अभिनय से फिल्म को यादगार बना दिया। गदर उनके करियर की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में शामिल हो गई। करीब 18 करोड़ 50 लाख रुपये के बजट में बनी गदर एक प्रेम कथा ने रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। फिल्म ने भारत और विदेशों में मिलाकर 133 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया और उस समय की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल हो गई। भारतीय बॉक्स ऑफिस पर भी इसने शानदार कमाई करते हुए कई रिकॉर्ड बनाए। आज भी गदर को हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में गिना जाता है और तारा सिंह का किरदार सनी देओल की पहचान बन चुका है। निर्देशक के इस पुराने खुलासे ने एक बार फिर यह चर्चा तेज कर दी है कि यदि गोविंदा ने इस कहानी पर अलग नजरिया अपनाया होता तो शायद हिंदी सिनेमा का इतिहास कुछ और होता। हालांकि अंततः यह फिल्म सनी देओल के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में बदल गई।

हरमनप्रीत की अर्धशतकीय पारी भी नहीं बचा सकी भारत ऑस्ट्रेलिया ने जीत के साथ किया वर्ल्ड कप से बाह

नई दिल्ली।  महिला टी20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का अभियान सेमीफाइनल से पहले ही समाप्त हो गया। लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए अहम मुकाबले में छह बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने भारत को छह विकेट से हराकर अंतिम चार में पहुंचने की उम्मीदों पर विराम लगा दिया। कप्तान हरमनप्रीत कौर की शानदार अर्धशतकीय पारी भी टीम को जीत नहीं दिला सकी और भारतीय टीम लगातार दूसरी बार टी20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के हाथों हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवर में चार विकेट पर 170 रन का मजबूत स्कोर बनाया। टीम को आक्रामक शुरुआत शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने दिलाई। शेफाली ने 26 गेंदों में 34 रन बनाए जबकि स्मृति ने 37 गेंदों पर 38 रन की उपयोगी पारी खेली। इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने तेज बल्लेबाजी करते हुए केवल 27 गेंदों में 56 रन बनाए और टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से गेंदबाजी में सोफी मोलिनेक्स सबसे सफल रहीं। उन्होंने चार ओवर में 46 रन देकर दो विकेट हासिल किए और भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। हालांकि भारतीय बल्लेबाजों ने अंतिम ओवरों में तेजी से रन जोड़कर ऑस्ट्रेलिया के सामने 171 रन का लक्ष्य रखा। लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम को भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआती चरण में चुनौती दी और रन गति पर भी कुछ समय तक नियंत्रण बनाए रखा। एक समय आवश्यक रन गति लगातार बढ़ती हुई दिखाई दे रही थी और मुकाबला पूरी तरह संतुलित नजर आ रहा था। लेकिन भारतीय टीम दबाव को अंत तक बनाए रखने में सफल नहीं रही। कुछ महत्वपूर्ण मौकों पर खराब गेंदबाजी और फील्डिंग में हुई चूक का फायदा ऑस्ट्रेलिया ने पूरी तरह उठाया। ऑस्ट्रेलिया की जीत में एलिस पेरी और एश गार्डनर ने अहम भूमिका निभाई। एलिस पेरी ने 38 गेंदों पर 56 रन की जिम्मेदार पारी खेली जबकि एश गार्डनर ने केवल 29 गेंदों में 53 रन बनाकर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। फोएबे लिचफील्ड ने भी 24 रन का उपयोगी योगदान देकर टीम को लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद की। इन पारियों की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने चार विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और शानदार जीत दर्ज की। यह हार भारतीय महिला टीम के लिए इसलिए भी निराशाजनक रही क्योंकि 2024 महिला टी20 विश्व कप में भी ऑस्ट्रेलिया ने ही भारत का सफर समाप्त किया था। इस बार भी बड़े मुकाबले में वही कहानी दोहराई गई। भारतीय टीम ने बल्लेबाजी में अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन गेंदबाजी और फील्डिंग में महत्वपूर्ण क्षणों पर हुई गलतियां भारी पड़ गईं। अब टीम इंडिया को इस हार से सीख लेकर भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों की तैयारी पर ध्यान देना होगा ताकि आने वाले वैश्विक मंचों पर बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।