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30 दिन की न्यायिक हिरासत पर जाएगी PM-CM की कुर्सी? 130वें संविधान संशोधन विधेयक ने बढ़ाया सियासी तापमान, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

नई दिल्ली । संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर देश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। प्रस्तावित संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री ऐसे गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहता है, जिसमें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, तो उसका पद स्वतः रिक्त माना जाएगा। इस प्रस्ताव को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखा मतभेद सामने आ गया है और इसकी संवैधानिक वैधता पर भी व्यापक चर्चा हो रही है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार केवल गिरफ्तारी के आधार पर किसी जनप्रतिनिधि का पद समाप्त नहीं होगा। कार्रवाई तभी होगी जब संबंधित व्यक्ति लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहेगा। इसके बाद 31वें दिन प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के मामले में राष्ट्रपति तथा राज्यों में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के मामले में राज्यपाल आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का संचालन जेल से नहीं किया जा सकता। उसका तर्क है कि सार्वजनिक जीवन में उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए जवाबदेही और नैतिक मानकों का पालन आवश्यक है। सरकार का यह भी कहना है कि किसी भी आरोपी को न्यायालय से जमानत पाने के पर्याप्त अवसर मिलते हैं और यदि 30 दिन बाद भी न्यायिक हिरासत जारी रहती है तो मामले की गंभीरता स्वतः स्पष्ट होती है। साथ ही अदालतों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे और किसी भी राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई की स्थिति में न्यायपालिका हस्तक्षेप कर सकती है। विपक्ष इस प्रस्ताव का लगातार विरोध कर रहा है। उसका कहना है कि भारतीय न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत यह है कि जब तक किसी व्यक्ति को अदालत दोषी घोषित नहीं करती, तब तक उसे निर्दोष माना जाता है। विपक्ष का आरोप है कि केवल हिरासत को आधार बनाकर किसी निर्वाचित प्रतिनिधि का पद समाप्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। विपक्षी दलों ने यह भी आशंका जताई है कि जांच एजेंसियों के माध्यम से राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाकर इस कानून का दुरुपयोग किया जा सकता है। इस विधेयक की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति अपनी रिपोर्ट मानसून सत्र से पहले प्रस्तुत करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि समिति मूल प्रावधान को बरकरार रखने के साथ कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की भी सिफारिश कर सकती है, ताकि राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित मामलों में इस कानून का गलत इस्तेमाल रोका जा सके। समिति में शामिल कुछ विपक्षी सदस्य असहमति नोट भी दर्ज करा सकते हैं। विधेयक के पारित होने की राह आसान नहीं मानी जा रही है क्योंकि संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है। मौजूदा संसदीय गणित में सत्तापक्ष को अभी भी अपेक्षित समर्थन जुटाने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में क्षेत्रीय दलों का रुख और संभावित राजनीतिक समीकरण इस विधेयक के भविष्य को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव केवल कानूनी बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही, संघीय ढांचे, न्यायिक प्रक्रिया और जनप्रतिनिधियों की संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़े व्यापक प्रश्न भी खड़े करता है। संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर विस्तृत बहस होने की संभावना है और यह तय करेगा कि जवाबदेही और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित किया जाए।

राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने के बाद दतिया में उपचुनाव का ऐलान चुनाव आयोग ने जारी किया पूरा कार्यक्रम अब जनता चुनेगी नया विधायक

दतिया । मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का चुनावी शंखनाद हो चुका है। चुनाव आयोग ने उपचुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र की जनता 30 जुलाई को अपने नए विधायक के लिए मतदान करेगी जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही दतिया विधानसभा क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों पर चुनावी नियम प्रभावी हो गए हैं। अब सभी दलों की नजर इस महत्वपूर्ण मुकाबले पर टिक गई है और चुनावी तैयारियां तेज होने लगी हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार उपचुनाव की अधिसूचना 6 जुलाई को जारी होगी। इसके बाद उम्मीदवार 13 जुलाई तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी जबकि 16 जुलाई नाम वापस लेने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। सभी मतदान केंद्रों पर मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वीवीपैट के माध्यम से कराया जाएगा ताकि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे। निर्वाचन प्रक्रिया को 4 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद आई। उन्हें एक पुराने आपराधिक मामले में दो वर्ष से अधिक की सजा सुनाई गई थी जिसके बाद कानून के अनुसार उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने सीट को रिक्त घोषित कर दिया और निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी। राजेंद्र भारती के खिलाफ मामला वर्ष 1998 में सामने आए दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक के एक कथित फिक्स्ड डिपॉजिट फर्जीवाड़े से जुड़ा है। आरोप था कि बैंक के रिकॉर्ड में कथित रूप से हेरफेर कर एक फिक्स्ड डिपॉजिट की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पंद्रह वर्ष कर दी गई। इसी आधार पर वर्ष 1999 से 2011 के बीच ब्याज की राशि निकाली जाती रही। उस समय राजेंद्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संबंधित संस्था के ट्रस्टी भी थे। जांच के बाद इस मामले में आरोपपत्र दायर किया गया और अदालत की सुनवाई के बाद उन्हें दो वर्ष से अधिक की सजा सुनाई गई। कानूनी प्रावधानों के तहत दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता समाप्त हो जाती है। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस बनाम भारत संघ फैसले जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 और संविधान के अनुच्छेद 191 के प्रावधानों के आधार पर उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म कर दी गई। इसके बाद दतिया सीट रिक्त घोषित हुई और अब इस पर उपचुनाव कराया जा रहा है। दतिया विधानसभा उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं बल्कि प्रदेश की राजनीति के लिए भी अहम माना जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस मुकाबले को प्रतिष्ठा का प्रश्न मान रहे हैं। आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार तेज होगा और सभी राजनीतिक दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। अब सबकी निगाहें 30 जुलाई के मतदान और 3 अगस्त को आने वाले जनादेश पर टिकी हैं जो दतिया की राजनीति की नई दिशा तय करेगा।

हनीमून मर्डर केस में नया मोड़, सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची मेघालय पुलिस, शुक्रवार को होगी अहम सुनवाई

नई दिल्ली । चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड एक बार फिर कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है। इस मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पुलिस ने शीर्ष अदालत से निचली अदालत द्वारा दिए गए जमानत आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी के फरार होने की आशंका को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने का निर्देश दिया है। यह मामला वर्ष 2025 में सामने आया था, जब इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ विवाह के कुछ दिनों बाद हनीमून मनाने मेघालय पहुंचे थे। यात्रा के दौरान चेरापूंजी क्षेत्र में राजा अचानक लापता हो गए थे। व्यापक तलाश के बाद उनका शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ, जिसके बाद मामले ने हत्या का रूप ले लिया और जांच एजेंसियों ने विस्तृत पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा तथा अन्य सहयोगियों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप दर्ज किए। जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने विस्तृत चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की और दावा किया कि वारदात पूर्व नियोजित थी तथा इसे आर्थिक लाभ और निजी कारणों को ध्यान में रखकर अंजाम दिया गया था। बाद में सोनम को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। हालांकि, मामले में एक तकनीकी त्रुटि ने कानूनी प्रक्रिया को नया मोड़ दे दिया। गिरफ्तारी के दौरान तैयार किए गए अरेस्ट मेमो में हत्या से संबंधित लागू धारा के स्थान पर गलत धारा दर्ज कर दी गई। इतना ही नहीं, दस्तावेज में कुछ अन्य तथ्यात्मक त्रुटियां भी सामने आईं। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को कानून के अनुरूप सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। इसी आधार पर निचली अदालत ने सोनम रघुवंशी को सशर्त जमानत प्रदान कर दी। इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिल सकी। उच्च न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि विधिक प्रक्रिया का पालन प्रत्येक आपराधिक मामले में अनिवार्य है और जांच एजेंसियों से अपेक्षित सावधानी बरतना आवश्यक है। अब मेघालय पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि गिरफ्तारी मेमो में दर्ज त्रुटियां जानबूझकर नहीं की गई थीं, बल्कि यह प्रशासनिक और टाइपिंग संबंधी चूक का परिणाम थीं। पुलिस का कहना है कि गंभीर अपराध से जुड़े मामले में केवल तकनीकी भूल के आधार पर आरोपी को राहत देना न्यायहित में उचित नहीं माना जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में साक्ष्यों, अपराध की प्रकृति और जांच की गंभीरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं। शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि जमानत आदेश पर अंतरिम रोक लगाई जाए या नहीं तथा गिरफ्तारी प्रक्रिया में हुई तकनीकी त्रुटियों का इस मामले पर कितना कानूनी प्रभाव पड़ता है। इस निर्णय का असर न केवल राजा रघुवंशी हत्याकांड की आगे की सुनवाई पर पड़ेगा, बल्कि भविष्य में गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी प्रक्रिया और कानूनी औपचारिकताओं की व्याख्या के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुरुवार के इन दान उपायों से बरसेगी बृहस्पति की कृपा विवाह करियर और धन संबंधी बाधाएं होंगी दूर

नई दिल्ली । हिंदू धर्म(Hinduism) में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा पाठ व्रत और दान का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि सच्ची श्रद्धा से किए गए दान और शुभ कर्म व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में भी गुरुवार को गुरु ग्रह का दिन माना गया है और मान्यता है कि इस दिन किए गए कुछ विशेष दान गुरु ग्रह को मजबूत करने में सहायक होते हैं। इससे शिक्षा विवाह संतान करियर और आर्थिक स्थिति से जुड़ी बाधाओं में राहत मिलने की उम्मीद की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के विवाह में लगातार रुकावटें आ रही हों या करियर में मनचाही सफलता न मिल रही हो तो गुरुवार के दिन पीले रंग की वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। पीले फल पीली मिठाई या अन्य पीले खाद्य पदार्थ जरूरतमंदों को दान करने से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। ऐसा करने से भाग्य का साथ मिलता है और जीवन में शुभ अवसर बढ़ने लगते हैं। गुरुवार के दिन चने की दाल और गुड़ का दान भी अत्यंत शुभ माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह उपाय आर्थिक परेशानियों को कम करने और परिवार में सुख शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है। कहा जाता है कि श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से किया गया यह दान जीवन में समृद्धि और सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त करता है। हल्दी का संबंध भी गुरु ग्रह से माना जाता है। इसलिए गुरुवार को हल्दी का दान करने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन हल्दी दान करने से मानसिक तनाव कम होता है और जीवन में आ रही बाधाओं से राहत मिलती है। साथ ही घर में सुख शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। कई लोग इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में भी हल्दी का प्रयोग करते हैं जिसे शुभ माना जाता है। पीले वस्त्रों का दान भी गुरुवार के प्रमुख उपायों में शामिल है। पीला रंग गुरु ग्रह का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस दिन पीले कपड़े किसी जरूरतमंद को दान करने से गुरु दोष के प्रभाव को कम करने की मान्यता है। धार्मिक विश्वास है कि इससे स्वास्थ्य में सुधार होता है आर्थिक संकट धीरे धीरे कम होने लगते हैं और व्यक्ति के मान सम्मान तथा सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। साथ ही जीवन में उन्नति के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से दान का सबसे बड़ा महत्व केवल वस्तु देने में नहीं बल्कि उसके पीछे छिपे निस्वार्थ भाव में माना गया है। इसलिए गुरुवार के दिन यदि श्रद्धा और सेवा भावना के साथ दान किया जाए तो उसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि ज्योतिषीय उपाय और धार्मिक मान्यताएं व्यक्तिगत आस्था का विषय हैं और इन्हें श्रद्धा के साथ ही अपनाना चाहिए। कर्म पर विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ किए गए शुभ कार्य जीवन में आत्मिक संतोष और सामाजिक सद्भाव दोनों को बढ़ाने का माध्यम बन सकते हैं।

टीएमसी में सियासी संग्राम तेज, बागी गुट का चुनाव आयोग में शक्ति प्रदर्शन; दो-तिहाई विधायकों के समर्थन का दावा, बढ़ीं ममता बनर्जी की चुनौतियां

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी सियासी खींचतान अब एक नए चरण में पहुंच गई है। पार्टी के बागी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर संगठन पर अपना दावा पेश किया और कहा कि उन्हें विधानसभा में पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है तथा तृणमूल कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। बागी गुट की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष यह दावा किया गया कि हाल ही में आयोजित प्रतिनिधि सम्मेलन में नई राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया था। इसके बाद संगठनात्मक बदलाव की जानकारी आयोग को भेजी गई और आधिकारिक तौर पर पक्ष रखने का अवसर मांगा गया। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक, पार्षद और जिला परिषद सदस्य जुड़े हुए हैं, इसलिए वास्तविक बहुमत उनके पास है। बागी नेताओं ने अपनी मुहिम को केवल नेतृत्व परिवर्तन का मामला नहीं बताया, बल्कि इसे संगठन की कार्यशैली से जुड़ा मुद्दा बताया। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर किया गया है और संगठन सीमित नेतृत्व के प्रभाव में सिमट गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंतरिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी नहीं रही, जिसके कारण असंतोष लगातार बढ़ता गया। गुट के नेताओं ने यह भी दावा किया कि वे स्वयं को तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक प्रतिनिधि मानते हैं। उनका कहना है कि पार्टी की मूल विचारधारा और संगठनात्मक संरचना को बचाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब चुनाव आयोग के समक्ष संगठन की वैधता और बहुमत से जुड़े सभी तथ्य प्रस्तुत किए जा चुके हैं तथा आगे का निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार होगा। राजनीतिक विवाद के बीच विधानसभा में विधायकों के समर्थन को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। बागी गुट का कहना है कि उसके साथ बहुमत में विधायक मौजूद हैं और इसी आधार पर संगठन पर उसका दावा मजबूत है। दूसरी ओर, मूल नेतृत्व के समर्थक इन दावों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। ऐसे में वास्तविक संख्या और समर्थन को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कुछ दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता को लेकर भी विवाद सामने आया है। इसी संबंध में जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है। जांच के बाद संबंधित नेताओं के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई भी की गई, जिसके बाद पार्टी के भीतर मतभेद और खुलकर सामने आ गए। इसके बाद बड़ी संख्या में विधायकों ने अलग प्रस्ताव पेश करते हुए स्वयं को बहुमत वाला समूह बताया। बाद के घटनाक्रम में विधानसभा स्तर पर भी नेतृत्व से जुड़े बदलाव देखने को मिले, जिससे राजनीतिक विवाद और गहरा गया। अब पूरे मामले पर सभी की नजर चुनाव आयोग की आगामी प्रक्रिया और संभावित निर्णय पर टिकी है। यदि बागी गुट अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज और संख्या प्रस्तुत करने में सफल रहता है तो राज्य की राजनीति में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। वहीं यदि दावे सिद्ध नहीं होते हैं तो पार्टी का मौजूदा नेतृत्व अपनी स्थिति और मजबूत करने का प्रयास करेगा। आने वाले दिनों में यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन सकता है।

फोन नंबर छिपाकर होगी चैट लेकिन WhatsApp के नए फीचर पर सरकार ने क्यों लगा दिया ब्रेक

नई दिल्ली । दुनियाके सबसे लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp का नया Username फीचर लॉन्च होने से पहले ही विवादों में आ गया है। यह फीचर यूजर्स को बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए केवल एक यूनिक यूजरनेम के जरिए बातचीत शुरू करने की सुविधा देगा। कंपनी का दावा है कि इससे लोगों की प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी लेकिन भारत सरकार को आशंका है कि यही सुविधा साइबर अपराधियों के लिए नया हथियार भी बन सकती है। इसी वजह से सरकार ने Meta को नोटिस भेजकर फिलहाल भारत में इस फीचर को लागू नहीं करने और तीन दिन के भीतर इसकी पूरी कार्यप्रणाली की जानकारी देने को कहा है। अब तक WhatsApp पर किसी नए व्यक्ति से बातचीत शुरू करने के लिए उसका मोबाइल नंबर होना जरूरी था। नए सिस्टम के लागू होने के बाद यूजर अपने अकाउंट के लिए एक यूनिक Username चुन सकेंगे और उसी के जरिए दूसरे लोग उनसे संपर्क कर सकेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सामान्य बातचीत के दौरान मोबाइल नंबर सामने नहीं आएगा जिससे निजी जानकारी अधिक सुरक्षित रहेगी। खासकर ऑनलाइन खरीदारी फ्रीलांस काम या नए व्यावसायिक संपर्कों के दौरान यह सुविधा काफी उपयोगी मानी जा रही है। Meta ने इस फीचर के साथ Username Key नाम की अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी तैयार की है। यदि कोई यूजर चाहे तो अपने Username के साथ एक अलग सुरक्षा कुंजी भी जोड़ सकता है। ऐसे में केवल Username जान लेना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि नई चैट शुरू करने के लिए सामने वाले के पास वह सुरक्षा कुंजी भी होनी चाहिए। कंपनी का कहना है कि इससे अनचाहे संदेशों और स्पैम से सुरक्षा मिलेगी। हालांकि भारत सरकार की चिंता इस फीचर के संभावित दुरुपयोग को लेकर है। यदि मोबाइल नंबर की जगह केवल Username दिखाई देगा तो कोई भी व्यक्ति किसी सरकारी संस्था बैंक बड़ी कंपनी या प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलता जुलता नाम चुनकर लोगों को धोखा देने की कोशिश कर सकता है। शुरुआती स्तर पर असली और फर्जी अकाउंट में अंतर करना मुश्किल हो सकता है जिससे साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण सरकार ने Meta से पूछा है कि फर्जी अकाउंट की पहचान कैसे होगी अपराधियों को ट्रैक करने की प्रक्रिया क्या होगी और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को किस तरह आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यूजर की निजता सुरक्षित रहे लेकिन कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जांच प्रक्रिया भी प्रभावित न हो। इस फीचर की तुलना Telegram के Username सिस्टम से भी की जा रही है क्योंकि वहां कई वर्षों से बिना मोबाइल नंबर साझा किए केवल Username के जरिए संपर्क किया जा सकता है। पहले भी विभिन्न साइबर अपराधों और संवेदनशील मामलों में Telegram की भूमिका पर सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में सरकार यह समझना चाहती है कि कहीं WhatsApp पर भी वही चुनौतियां दोबारा सामने न आ जाएं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मजबूत सत्यापन प्रणाली नहीं बनाई गई तो फर्जी Username बनाकर लोगों को बैंक अधिकारी सरकारी कर्मचारी या किसी परिचित के नाम पर आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। दूसरी ओर Meta का कहना है कि उसने हाई प्रोफाइल व्यक्तियों के Username सुरक्षित रखने और फर्जी खातों पर नियंत्रण के लिए कई सुरक्षा उपाय तैयार किए हैं। कुल मिलाकर WhatsApp का Username फीचर डिजिटल प्राइवेसी की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा और फर्जी पहचान जैसी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। अब सबकी नजर सरकार और Meta के बीच होने वाली बातचीत पर है क्योंकि उसी के बाद तय होगा कि यह नया फीचर भारत में कब और किन सुरक्षा शर्तों के साथ शुरू किया जाएगा।

'बाहुबली यूनिवर्स' का महा-विस्तार: दो भागों की एनीमे फिल्म लेकर आ रहे हैं ईशान शुक्ला, मृत्यु के बाद की अनसुनी कहानी का होगा खुलासा

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हो चुकी ‘बाहुबली’ फ्रैंचाइजी के प्रशंसकों के लिए एक अत्यंत रोमांचक और बड़ी खबर सामने आई है। जहाँ एक तरफ मुख्य स्टार कास्ट प्रभास, राणा दग्गुबाती और अनुष्का शेट्टी ने ‘बाहुबली 3’ के निर्माण का संकेत देकर हलचल बढ़ा दी है, वहीं दूसरी तरफ इस सिनेमाई यूनिवर्स के क्रिएटर एस एस राजामौली के मार्गदर्शन में एक भव्य एनीमे फिल्म ‘बाहुबली: द एटर्नल वॉर’ की तैयारियां तेज हो गई हैं। दो भागों में बनने वाली इस महत्वाकांक्षी एनीमे फिल्म के निर्देशक ईशान शुक्ला ने इसके अनूठे कॉन्सेप्ट और कहानी को लेकर कई बेहद दिलचस्प खुलासे किए हैं। इस नई फिल्म की कहानी मूल फिल्मों के नायक अमरेंद्र बाहुबली के जीवन के अंत के बाद से शुरू होगी। निर्देशक ईशान शुक्ला के अनुसार, यह फिल्म अमरेंद्र बाहुबली की आत्मा की उस परलोक यात्रा पर आधारित है, जहां वह एक विशाल और दिव्य उद्देश्य को पूरा करने के लिए ‘देवासुर संग्राम’ का हिस्सा बनता है। फिल्म का यह अलौकिक और पौराणिक कॉन्सेप्ट पारंपरिक भारतीय सिनेमा से बिल्कुल अलग है, जिसने अपने शुरुआती टीज़र से ही दर्शकों और फिल्म समीक्षकों के बीच भारी उत्सुकता पैदा कर दी है। इस अनूठे एनीमे प्रोजेक्ट की शुरुआत की कहानी भी काफी दिलचस्प है। वर्ष 2024 में एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के दौरान निर्देशक ईशान शुक्ला की मुलाकात बाहुबली के मूल निर्माता शोबू येरलागडा से हुई थी। शोबू इस ऐतिहासिक फ्रैंचाइजी को एनिमेशन के माध्यम से वैश्विक मंच पर आगे ले जाने के इच्छुक थे। इसके बाद ईशान ने अमरेंद्र बाहुबली की मृत्यु के बाद की काल्पनिक और आध्यात्मिक यात्रा पर एक पूरी स्क्रिप्ट तैयार की। यह विचार निर्माता शोबू और मास्टर डायरेक्टर एस एस राजामौली को इतना पसंद आया कि उन्होंने तुरंत इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी। निर्देशक ने बताया कि हमारे प्राचीन धर्मग्रंथों में पृथ्वी के अलावा अन्य लोकों और आयामों का विस्तृत वर्णन मिलता है, जिसे पर्दे पर जीवंत करने के लिए एनीमे को सबसे उपयुक्त माध्यम माना गया। अमर चित्र कथा के प्रभाव और भारतीय पौराणिक कथाओं के प्रति लगाव ने इस कहानी को आकार देने में मुख्य भूमिका निभाई। अमरेंद्र बाहुबली का चरित्र भगवान राम की तरह बेहद पवित्र और आदर्शवादी रहा है, इसलिए उसकी असमय मृत्यु के बाद परलोक में उसकी आत्मा के अंतर्द्वंद्व और उसके सामने आने वाले विकल्पों को देखना दर्शकों के लिए एक बिल्कुल नया और दार्शनिक अनुभव होगा। इस कहानी की सबसे बड़ी भावनात्मक त्रासदी का जिक्र करते हुए निर्देशक ने कहा कि अमरेंद्र बाहुबली को पृथ्वी छोड़ते समय यह कभी पता ही नहीं चल पाया था कि उसके सबसे वफादार कटप्पा ने उसकी पीठ में छुरा क्यों घोंपा था। प्राचीन भारतीय इतिहास और गाथाओं में ऐसे कई प्रसंग मिलते हैं जहां पराक्रमी योद्धा सत्ता शिखर पर पहुंचने से ठीक पहले षड्यंत्र का शिकार हो गए। फिल्म का प्री-प्रोडक्शन कार्य आधिकारिक रूप से पूरा कर लिया गया है, और चूंकि उच्च स्तरीय एनिमेशन निर्माण में लंबा समय लगता है, इसलिए मेकर्स ने साल 2027 में इस महागाथा के पहले भाग को सिनेमाघरों में रिलीज करने का लक्ष्य रखा है।

बारिश ने छीनी भारत की जीत की उम्मीद अभिषेक और श्रेयस की शानदार पारियां भी नहीं दिला सकीं नतीजा

नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 श्रृंखला का पहला मुकाबला रोमांचक होने से पहले ही बारिश की भेंट चढ़ गया। चेस्टर ले स्ट्रीट में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 189 रन का मजबूत स्कोर बनाया था लेकिन लगातार बारिश और गीले मैदान के कारण इंग्लैंड अपनी पारी शुरू भी नहीं कर सका। काफी देर तक मौसम साफ होने का इंतजार किया गया लेकिन हालात में सुधार नहीं होने पर अंपायरों ने मैच को बिना किसी परिणाम के समाप्त घोषित कर दिया। इस तरह श्रेयस अय्यर और अभिषेक शर्मा की शानदार पारियां भी टीम को जीत नहीं दिला सकीं। भारतीय टीम की शुरुआत हालांकि बेहद खराब रही। दूसरे ही ओवर में संजू सैमसन केवल एक रन बनाकर आउट हो गए जबकि ईशान किशन बिना खाता खोले रन आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद ऐसा लग रहा था कि भारत बड़े स्कोर तक नहीं पहुंच पाएगा लेकिन अभिषेक शर्मा और कप्तान श्रेयस अय्यर ने जिम्मेदारी संभालते हुए शानदार साझेदारी की और टीम को मुकाबले में वापस ला दिया। अभिषेक शर्मा ने एक बार फिर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का परिचय दिया। उन्होंने केवल 24 गेंदों में 59 रन की विस्फोटक पारी खेली जिसमें छह चौके और चार शानदार छक्के शामिल रहे। उन्होंने मात्र 20 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और इंग्लैंड के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। उनकी यह पारी भारतीय पारी की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। दूसरे छोर पर कप्तान श्रेयस अय्यर ने संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। उन्होंने 47 गेंदों में 68 रन बनाए जिसमें छह चौके और एक छक्का शामिल था। उन्होंने 38 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और मध्यक्रम को मजबूती प्रदान की। उनके आउट होने के बाद शिवम दुबे ने तेजी से रन जुटाते हुए केवल 21 गेंदों में नाबाद 42 रन बनाए और भारत का स्कोर 189 रन तक पहुंचा दिया। इंग्लैंड की ओर से साकिब महमूद सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने तीन विकेट अपने नाम किए। भारत के 190 रन के लक्ष्य का पीछा करने के लिए इंग्लैंड मैदान पर उतर ही नहीं पाया। लगातार होती बारिश के कारण पूरा मैदान कवर से ढका रहा और ग्राउंड स्टाफ की तमाम कोशिशों के बावजूद खेल दोबारा शुरू नहीं हो सका। कट ऑफ समय तक भी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर मैच अधिकारियों ने मुकाबला रद्द करने का फैसला लिया। इस मुकाबले में एक बार फिर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिला। आयरलैंड दौरे के बाद इंग्लैंड श्रृंखला के पहले मैच में भी उनका डेब्यू टलने से प्रशंसकों में निराशा देखने को मिली। अब उम्मीद की जा रही है कि आगामी मुकाबलों में टीम प्रबंधन उन्हें मौका दे सकता है। बारिश के कारण भले ही पहला मुकाबला बेनतीजा रहा लेकिन भारतीय बल्लेबाजों की लय टीम के लिए सकारात्मक संकेत है। अब दोनों टीमें मैनचेस्टर में होने वाले दूसरे टी20 मुकाबले की तैयारी करेंगी जहां श्रृंखला की पहली जीत हासिल करने के लिए दोनों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

शनि का रेवती नक्षत्र में महागोचर: बदलते ही नक्षत्रों की चाल, इन चार राशियों की चमकेगी किस्मत और होगी धनवर्षा

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में न्याय और कर्म के देवता माने जाने वाले शनि देव की चाल में होने वाला हर छोटा-बड़ा बदलाव सभी 12 राशियों के जीवन पर गहरा और व्यापक प्रभाव डालता है। इसी कड़ी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटनाक्रम के तहत शनि देव कल रेवती नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं। ग्रहों के इस नक्षत्र परिवर्तन को बेहद प्रभावशाली माना जा रहा है, क्योंकि इसके लागू होते ही मात्र 12 घंटों के भीतर देश के कई जातकों की किस्मत में बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से चार राशियां ऐसी हैं, जिनके लिए यह गोचर आर्थिक समृद्धि और भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित होगा। मध्य प्रदेश ज्योतिषीय गणनाओं और आकाशीय नक्षत्रों की स्थिति के विश्लेषण के अनुसार, शनि का रेवती नक्षत्र में जाना कुछ राशियों के लिए अप्रत्याशित धन लाभ और करियर में उन्नति के नए मार्ग प्रशस्त करेगा। इस गोचर के प्रभाव से व्यापार और नौकरी के क्षेत्र में लंबे समय से रुके हुए कार्य अचानक गति पकड़ने लगेंगे। जिन चार राशियों के लिए यह समय सबसे अधिक फलदायी रहने वाला है, उन्हें आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलता मिलेगी और उनके संचित धन में भारी वृद्धि होने के प्रबल संकेत दिखाई दे रहे हैं। इस महागोचर के कारण जातकों के जीवन में चल रही पुरानी परेशानियां, विशेषकर आर्थिक तंगी और कर्ज की स्थिति से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। निवेश के दृष्टिकोण से भी यह समय इन भाग्यशाली राशियों के लिए अत्यंत उत्तम रहेगा, जिससे भविष्य में बड़े रिटर्न प्राप्त होने के योग बनेंगे। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और समाज में मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। ज्योतिषविदों का मानना है कि शनि देव का यह नक्षत्र परिवर्तन इन विशिष्ट राशियों के जातकों के जीवन में खुशहाली और स्थायित्व लेकर आएग

मिथुन राशि राशिफल 2026: गुरु और शनि की चाल बदलेगी जीवन की दशा, जुलाई से दिसंबर तक धन संचय के साथ मिलेंगे प्रगति के नए अवसर

नई दिल्ली। वर्ष 2026 का प्रथम भाग समाप्त होने के साथ ही ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार वर्ष के आगामी छह महीने बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुके हैं। जुलाई से दिसंबर 2026 की इस अवधि में शनि देव पहले वक्री और फिर मार्गी चाल चलेंगे, जबकि देवगुरु बृहस्पति अक्टूबर के अंत तक कर्क राशि में विराजमान रहेंगे। इस दौरान सूर्य, शुक्र, मंगल और बुध के साथ-साथ राहु-केतु का भी राशि परिवर्तन होने जा रहा है। ग्रहों की इस अनूठी और प्रभावशाली चाल का सीधा व व्यापक असर मिथुन राशि के जातकों के जीवन पर देखने को मिलेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो साल 2026 का उत्तरार्ध मिथुन राशि के जातकों के लिए काफी मजबूत और सकारात्मक रहने की संभावना है। जुलाई से लेकर 31 अक्टूबर तक गुरु की अनुकूल स्थिति के कारण जातकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस अवधि में न केवल कमाई के नए साधन विकसित होंगे, बल्कि धन संचय और बचत करने के प्रयासों में भी बड़ी सफलता मिलेगी। हालांकि, 31 अक्टूबर के बाद आर्थिक लाभ की गति थोड़ी सामान्य हो सकती है, लेकिन शुक्र का शुभ प्रभाव निरंतर वित्तीय स्थिरता और सहयोग बनाए रखेगा। पेशेवर जीवन और करियर के लिहाज से भी मिथुन राशि के लोगों के लिए जुलाई से अक्टूबर के अंत तक का समय बेहद शानदार रहने वाला है। इस समयावधि में गुरु का सकारात्मक सहयोग आपके द्वारा किए गए सभी प्रयासों को सफलता की ओर ले जाएगा। व्यापारिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपने काम के विस्तार और नई साझेदारियों के बेहतरीन अवसर मिलेंगे। वहीं, नौकरीपेशा जातकों को कार्यस्थल पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा और उनके काम की सराहना होगी। 31 अक्टूबर के बाद जिम्मेदारियां बढ़ने से मेहनत थोड़ी अधिक करनी पड़ सकती है। प्रेम और वैवाहिक जीवन के मामले में मिथुन राशि के जातकों को इस अवधि में मिले-जुले परिणाम प्राप्त होंगे। जुलाई से अक्टूबर के अंत तक जीवनसाथी के साथ आपसी समझ और संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। हालांकि, इस दौरान शनि की वक्री दृष्टि के कारण रिश्तों में बीच-बीच में छोटी-मोटी गलतफहमियां या वैचारिक मतभेद उभर सकते हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 31 अक्टूबर के बाद के समय में जातकों को अपने रिश्तों में अधिक संयम, परिपक्वता और आपसी संवाद बनाए रखने की आवश्यकता होगी, ताकि सामंजस्य बना रहे। स्वास्थ्य के मोर्चे पर वर्ष 2026 की यह दूसरी छमाही संतुलित दिनचर्या का पालन करने की मांग करती है। अक्टूबर के अंत तक गुरु ग्रह के शुभ प्रभाव से शारीरिक और मानसिक स्थिति काफी बेहतर और ऊर्जावान बनी रहेगी। इसके बाद का समय स्वास्थ्य के लिहाज से औसत रह सकता है, इसलिए किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी को नजरअंदाज करने से बचना होगा। विशेष रूप से जिन जातकों को पूर्व में हृदय या छाती से संबंधित कोई तकलीफ रही है, उन्हें बदलते मौसम और ग्रहीय गोचर के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।