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हॉलीवुड से मिला बड़ा सम्मान फराह खान बनीं ऑस्कर एकेडमी की सदस्य अब वोटिंग प्रक्रिया में निभाएंगी अहम भूमिका

नई दिल्ली । फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान के लिए वर्ष 2026 एक बेहद खास उपलब्धि लेकर आया है। भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान दिलाते हुए उन्हें एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज की प्रतिष्ठित सदस्यता के लिए आमंत्रित किया गया है। यही संस्था हर साल दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ऑस्कर पुरस्कारों का आयोजन करती है। इस सम्मान के साथ फराह खान अब उन चुनिंदा फिल्मी हस्तियों की सूची में शामिल हो जाएंगी जिन्हें विश्व सिनेमा के सबसे बड़े मंच पर अपनी भागीदारी निभाने का अवसर मिलता है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की जानकारी खुद फराह खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने प्रशंसकों के साथ साझा की। उन्होंने इस सम्मान के लिए एकेडमी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित समूह का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व और खुशी दोनों का विषय है। उनके इस संदेश के सामने आते ही फिल्म जगत के कलाकारों और प्रशंसकों ने उन्हें लगातार शुभकामनाएं देना शुरू कर दिया। हर वर्ष एकेडमी दुनिया भर के उन कलाकारों तकनीशियनों और फिल्म विशेषज्ञों को सदस्य बनने का निमंत्रण देती है जिन्होंने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इस वर्ष कुल 529 नए सदस्यों को आमंत्रित किया गया है जिनमें फराह खान का नाम भी शामिल है। सदस्यता स्वीकार करने के बाद उन्हें ऑस्कर पुरस्कारों की नामांकन और विजेताओं के चयन की प्रक्रिया में मतदान का अधिकार मिलेगा। यह जिम्मेदारी केवल उन लोगों को मिलती है जिनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और विश्वसनीयता हासिल होती है। फराह खान पिछले कई दशकों से भारतीय फिल्म उद्योग का अहम चेहरा रही हैं। उन्होंने बतौर कोरियोग्राफर कई यादगार गीतों को अपनी रचनात्मकता से नई पहचान दी है। इसके अलावा उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी सफलता हासिल की और कई लोकप्रिय फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी फिल्मों की भव्यता मनोरंजन और बड़े स्तर की प्रस्तुति ने उन्हें देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अलग पहचान दिलाई है। यही वजह है कि अब उन्हें विश्व सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित संस्था का सदस्य बनने का अवसर मिला है। इस बार एकेडमी की आमंत्रित सूची में कई अन्य भारतीय प्रतिभाओं को भी जगह मिली है। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज के साथ वरिष्ठ संपादक ए श्रीकर प्रसाद और दीपा भाटिया को भी सदस्यता का निमंत्रण भेजा गया है। दीपा भाटिया चार दशकों से अधिक लंबे करियर में अनेक चर्चित फिल्मों से जुड़ी रही हैं और उनकी संपादन कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। इसके अलावा कॉस्ट्यूम डिजाइनर एका लखानी कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर शालिनी कांतैया एनीमेशन क्षेत्र से अवनीत कौर प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ राजेश रामचंद्रन तथा विजुअल इफेक्ट्स से जुड़े बेकी ग्राहम और जय मेहता को भी इस सूची में स्थान मिला है। इन सभी आमंत्रित सदस्यों के शामिल होने के बाद एकेडमी के कुल सदस्यों की संख्या लगभग 11000 से अधिक हो जाएगी। ये सदस्य आने वाले वर्षों में ऑस्कर पुरस्कारों के लिए फिल्मों कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फराह खान को मिला यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का भी मजबूत प्रमाण है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के फिल्मकारों और कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और दुनिया के सबसे बड़े फिल्म मंच पर भारत की मजबूत मौजूदगी को और अधिक प्रभावशाली बनाएगी।

राज्यों पर पड़ेगा वित्तीय बोझ: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने 'विकसित भारत गारंटी' के नियमों को बदलने की मांग उठाई

नई दिल्ली । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी और प्रस्तावित ‘विकसित भारत गारंटी’ योजना के वर्तमान स्वरूप पर गहरी असहमति जताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र प्रेषित किया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था के मौजूदा नियमों को यदि इसी तरह लागू किया गया तो राज्य सरकार के खजाने पर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी और अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने केंद्र से इस योजना के वित्तीय और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों में तत्काल सुधार करने का आग्रह किया है। मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र के माध्यम से नई योजना के तहत तय किए गए फंडिंग पैटर्न पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने उल्लेख किया कि ‘विकसित भारत गारंटी’ अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के मुताबिक मजदूरी, सामग्री और प्रशासनिक खर्चों को वहन करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 का अनुपात निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि देश में पिछले दो दशकों से ग्रामीण रोजगार योजना एक बिल्कुल अलग वित्तीय ढांचे के अंतर्गत सफलतापूर्वक संचालित हो रही थी, जहां राज्यों पर इस तरह का भार नहीं था। अचानक किए गए इस नीतिगत बदलाव से राज्यों की वित्तीय स्थिति पूरी तरह असंतुलित हो जाएगी। तमिलनाडु सरकार का मानना है कि इस नए वित्तीय फॉर्मूले के कारण राज्य को अपनी अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, अथवा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को दिए जाने वाले रोजगार के दिनों की संख्या को कम करना पड़ेगा। इस संभावित संकट से बचने के लिए मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया है कि मजदूरी और प्रशासनिक व्यय की पूरी शत-प्रतिशत जिम्मेदारी केंद्र सरकार को खुद उठानी चाहिए, जबकि निर्माण सामग्री से जुड़े खर्चों को केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 के तार्किक अनुपात में साझा किया जाना चाहिए। वित्तीय बोझ के अलावा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने इस योजना के प्रशासनिक केंद्रीकरण और पंचायतों के वर्गीकरण की पद्धति पर भी कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा फंड वितरण के लिए अपनाई जा रही इस केंद्रीय व्यवस्था को एक प्रकार का ‘माइक्रोमैनेजमेंट’ करार दिया है। पत्र में कहा गया है कि पूरे विविधतापूर्ण देश के लिए एक समान फॉर्मूला लागू करना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि हर राज्य और क्षेत्र की सामाजिक व आर्थिक परिस्थितियां भिन्न होती हैं। इसलिए राज्यों को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप फंड आवंटित करने की पूरी स्वायत्तता मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र से जुड़े एक विशेष नियम को लेकर भी व्यावहारिक आपत्ति दर्ज कराई है, जिसके तहत खेती के पीक सीजन के दौरान ग्रामीण रोजगार के कार्यों को 60 दिनों के लिए बंद रखने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने वैश्विक जलवायु परिवर्तन और ‘अल नीनो’ के प्रभावों का हवाला देते हुए कहा कि अब खेती का समय और चक्र पहले की तरह निश्चित नहीं रह गया है। ऐसे में किसी एक निश्चित समयावधि के लिए काम को पूरी तरह रोक देना उचित नहीं है, क्योंकि ग्रामीण मजदूरों को विपरीत मौसम और संकट के समय किसी भी वक्त रोजगार की सख्त आवश्यकता पड़ सकती है।

वैश्विक मंच पर गूंजा बॉलीवुड का नाम: 'द एकेडमी' ने फराह खान सहित भारतीय फिल्म जगत की हस्तियों को वोटिंग अधिकार के लिए किया आमंत्रित

नई दिल्ली। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए वैश्विक स्तर पर एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण सामने आया है। मशहूर फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान को ऑस्कर पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था ‘एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज’ ने साल 2026 की प्रतिष्ठित सदस्यता के लिए आमंत्रित किया है। इस विशेष आमंत्रण को स्वीकार करने के बाद फराह खान अब ऑस्कर अवॉर्ड्स की आधिकारिक वोटिंग प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकेंगी, जो भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुंच और प्रभाव को रेखांकित करता है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि और अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए फराह खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी खुशी और गर्व साझा किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस बेहद सम्मानित और वैश्विक समूह का हिस्सा बनना उनके लिए एक अत्यंत सुखद और गर्व से भरा अनुभव है। वर्तमान में एक रियलिटी शो की मेजबानी कर रहीं फराह खान के लिए यह आमंत्रण उनके दशकों लंबे फिल्मी करियर और कलात्मक योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली एक बड़ी पहचान के रूप में देखा जा रहा है। एकेडमी हर साल सिनेमाई जगत में उत्कृष्ट योगदान देने वाले दुनिया भर के चुनिंदा कलाकारों, निर्देशकों और तकनीकी विशेषज्ञों को अपनी सदस्यता सूची में शामिल करती है। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष वैश्विक स्तर पर कुल 529 फिल्म पेशेवरों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें भारत से फराह खान के अलावा मनोरंजन जगत के कई अन्य प्रतिष्ठित नाम भी शामिल हैं। इस सूची में मशहूर फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज का नाम भी प्रमुखता से दर्ज है, जिन्होंने ‘मकबूल’, ‘ओमकारा’ और ‘हैदर’ जैसी फिल्मों के माध्यम से भारतीय सिनेमा को एक नई वैचारिक और कलात्मक दिशा दी है। इस बार एकेडमी की सूची में भारतीय सिनेमा के परदे के पीछे काम करने वाले तकनीकी दिग्गजों को भी व्यापक प्रतिनिधित्व मिला है। दिग्गजों की इस फेहरिस्त में अनुभवी फिल्म एडिटर ए. श्रीकर प्रसाद और दीपा भाटिया का नाम शामिल है। दीपा भाटिया ने अपने साढ़े चार दशक से अधिक लंबे शानदार करियर में ‘आरआरआर’, ‘दिल चाहता है’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘माय नेम इज़ खान’ और ‘काय पो छे’ जैसी कालजयी और व्यावसायिक रूप से बेहद सफल फिल्मों में संपादन का बेहतरीन कार्य किया है। उनके इस अनुभव को अब वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। इनके अतिरिक्त, भारतीय सिनेमा में अपनी वेशभूषा और कास्टिंग कला का लोहा मनवाने वाली हस्तियों को भी इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला है। इनमें कॉस्ट्यूम डिजाइनर एका लखानी, विख्यात कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर शालिनी कांतैया का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह चयन दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा के तकनीकी और रचनात्मक दोनों ही पक्षों को समान रूप से सम्मान मिल रहा है। सिनेमा की आधुनिक विधाओं में भी भारतीयों की प्रतिभा को इस आमंत्रण के जरिए स्वीकार किया गया है। एनीमेशन श्रेणी में भारत की अवनीत कौर को आमंत्रित किया गया है, जबकि प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राजेश रामचंद्रन को सदस्यता का प्रस्ताव मिला है। वहीं, विजुअल इफेक्ट्स जैसी जटिल तकनीकी श्रेणी में बेकी ग्राहम और जय मेहता को इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बनाया गया है। इन पेशेवरों के शामिल होने से ऑस्कर के मंच पर भारतीय दृष्टिकोण और अधिक मजबूत होगा। इस आमंत्रण को औपचारिक रूप से स्वीकार करने के बाद, ये सभी भारतीय दिग्गज दुनिया भर के लगभग 11,000 से अधिक विशिष्ट एकेडमी सदस्यों के विशेष समूह में शामिल हो जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सदस्यता के बाद इन सभी भारतीय सिनेमाई दिग्गजों को ऑस्कर अवॉर्ड्स के मुख्य नॉमिनेशन तय करने और विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं को चुनने के लिए सीधे वोट देने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाएगा, जिससे वैश्विक सिनेमा के निर्णयों में भारत की भागीदारी बढ़ेगी।

अमेरिका ने ट्रेड डील से पहले दिए सकारात्मक संकेत… 4 भारतीय कंपनियों को से हटाए बैन

नई दिल्ली। भारत (India) के लिए अमेरिका (America) से अच्छी खबर आई है. रूस के साथ कथित व्यापार संबंधों को लेकर चार भारतीय कंपनियों (Indian Companies) पर लगाए गए प्रतिबंध हटा लिए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार से अमेरिका द्वारा ये बैन हटाए गए हैं और इसकी जानकारी अमेरिकी वित्त विभाग ने शेयर करते हुए कहा है कि US ने चार भारतीय कंपनियों पर उन बैन को हटाया है, जो रूस के सैन्य-औद्योगिक अड्डे का समर्थन करने के लिए लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और उपकरण की आपूर्ति करने के आरोपों पर लगाए गए थे. अब अमेरिका की प्रतिबंध लिस्ट से अलग हो गई हैं। इन कंपनियों को बड़ी राहतएक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक हैदराबाद स्थित आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (RRG Engineering Technologies) और लोकेश मशीन्स लिमिटेड पर से प्रतिबंध हटाए गए हैं. तो वहीं अहमदाबाद स्थित गैलेक्सी बियरिंग्स और नई दिल्ली स्थित शौर्य एरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड को विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFC) की बैन लिस्ट से हटा दिया गया है. गैलेक्सी पर 2024 में लगा था बैनभारतीय कंपनी गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड पर अक्टूबर 2024 में प्रतिबंध लगाया गया था. अमेरिका ने उस समय कंपनी पर रोलर बियरिंग और रोलर असेंबली समेत दर्जनों हाई क्वालिटी वाले दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं को रूसी संस्थाओं को निर्यात करने का आरोप लगाया था. अब अमेरिकी वित्त विभाग ने इन आरोपों को वापस लेते हुए कंपनी पर से हैन हटा दिए हैं. अन्य तीन कंपनियों में अगला नाम शौर्य एरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड का है, जिसे बैन मुक्त कर दिया गया है. इसपर कथित तौर पर रडार उपकरण, रेडियो नेविगेशनल एंड उपकरण, रेडियो रिमोट कंट्रोल उपकरण और दूसरे इलेक्ट्रिक उपकरण रूस को भेजने के आरोप लगा गए थे. RRG पर इसलिए था प्रतिबंधअमेरिका ने भारतीय कंपनी आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज पर रूस स्थित कंपनी आर्टेक्स लिमिटेड को माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स की 100 से अधिक खेपें भेजने का आरोप लगाया गया था. इसके बाद इसे प्रतिबंध वाली अमेरिकी लिस्ट में शामिल किया गया था. एक अन्य भारतीय कंपनी अमेरिका की इस प्रतिबंधों वाली लिस्ट में शामिल थी, जिसका नाम लोकेश मशीन्स है और इस पर विभिन्न रूसी मैन्युफेक्चरिंग कंपनियों को मशीन टूल्स की दर्जनों खेपों की आपूर्ति करने का आरोप लगाया गया था. ट्रेड डील से पहले आई खबरUS-Iran Trade Deal पर बातचीत का दौर जारी है और दोनों ही देश टैरिफ विवाद के बाद अब अपने रिश्तों को ट्रैक पर लाने की कोशिश में लगे हुए हैं. अमेरिका की ओर से भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध हटाया जाना एक पॉजिटिव सिग्नल माना जा रहा है. रिपोर्ट्स में दोनों देशों के बीच डील पर बातचीत अब अंतिम चरण में बताई जा रही है।

संसद के मॉनसून सत्र से मजबूत हुआ NDA…..दल बदल से INDIA गठबंधन को भारी नुकसान

नई दिल्ली। संसद (Parliament) का मॉनसून सत्र (Monsoon Session) शुरू होने वाला है। अब एक ओर जहां दलों की टूट के बाद NDA मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। वहीं, विपक्षी गठबंधन INDIA का संख्याबल कुछ घट गया है। हालांकि, सत्तारूढ़ एनडीए अब भी दो तिहाई बहुमत से काफी दूर है, लेकिन अगर वह लोकसभा में दो और दलों को साध लेता है, तो इसके काफी करीब पहुंच सकता है। इस नंबरगेम को विस्तार से समझते हैं। अगर लोकसभा में सभी 540 मौजूदा सांसद उपस्थित होते हैं और वोट देते हैं, तो दो तिहाई बहुमत के लिए 360 मतों की जरूरत होगी। जब अप्रैल में संविधान संशोधन बिल लाया गया, तब सदन में 548 लोकसभा सांसदों ने वोट डाले थे। इनमें से 298 समर्थन और 230 खिलाफ थे। जबकि, 11 सांसद अनुपस्थित थे। इसके चलते दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा घटकर 352 पर आ गया था। दल टूटने के बाद नंबर कहां पहुंचेतृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ विलय कर लिया था। ये दल एनडीए को समर्थन दे रहा है और सदन में अलग बैठने का अनुरोध किया है। वहीं, शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों ने NDA में शामिल शिवसेना के साथ हाथ मिला लिया है। इसके चलते गठबंधन 319 पर पहुंच गया है। हालांकि, अब तक 360 बहुमत का आंकड़ा दूर है। विपक्ष की ताकत समझेंलोकसभा चुनाव 2024 के बाद 225 पर पहुंचे INDIA गठबंधन को हाल में हुईं पार्टियों में टूट से बड़ा झटका लगा है। 26 सांसदों के जाने के बाद विपक्ष का लोकसभा में आंकड़ा घटकर 199 पर आ गया है। वहीं, 22 सांसदों वाली द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम ने भी खुद को इस गठबंधन से दूर कर लिया है। दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और डीएमके में दूरी बढ़ गई है। INDIA अलायंस में सबसे बड़ा दल 98 सांसदों के साथ कांग्रेस है। वहीं, इसके बाद 37 सांसदों वाली समाजवादी पार्टी है। इस लिस्ट में टूट से पहले टीएमसी तीसरे नंबर पर थी। वहीं, शिवसेना यूबीटी चौथे स्थान पर थी, लेकिन अब आंकड़ा बदल गया है। कैसे आंकड़ा पा सकता है एनडीएइस मुहिम में 5 निर्दलीय सांसदों की भूमिका अहम हो जाती है। दरअसल, अमृतपाल सिंह और शेख अब्दुल रशीद जेल में हैं। अब अगर एनडीए 4 सांसदों वाली YSRCP का समर्थन हासिल करता है। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी और डीएमके से कुछ बात बनती है, तो एनडीए को फायदा हो सकता है। आसान भाषा में समझें, तो शरद पवार गुट के पास 8 सांसद हैं और डीएमके के पास 22 सदस्य हैं। अगर ये दोनों दल वोटिंग से दूर रहते हैं, तो बहुमत का आंकड़ा 330 पर आ जाएगा। वहीं, निर्दलीय और जगन मोहन रेड्डी की पार्टी की मदद से एनडी 9 वोट और जुटा लेगा, लेकिन इसके बाद भी 2 मतों की और दरकार होगी।

Venezuela: भूकंप में मृतकों की संख्या 2200 के पार, अब भी रेस्क्यू जारी, मेक्सिको से आई मशहूर बचाव टीम

मेक्सिको सिटी। वेनेजुएला (Venezuela) में आए विनाशकारी भूकंप (Earthquakes) ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या 2,200 के पार पहुंच गई है, जबकि 11,000 से ज्यादा लोग घायल हैं। इस मुश्किल घड़ी में मेक्सिको (Mexico) की मशहूर बचाव टीम ‘टोपोस’ (Topos Azteca) मदद के लिए वेनेजुएला पहुंच रही है। यह टीम मलबे में दबे लोगों को निकालने में माहिर मानी जाती है। तबाही का मंजर और बढ़ती चुनौतियांभूकंप के करीब एक हफ्ते बाद भी वेनेजुएला में हालात बेहद खराब हैं। सबसे ज्यादा असर ला गुआरा राज्य में हुआ है, जहां कई बहुमंजिला इमारतें और घर जमींदोज हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बचाव टीमें दिन-रात मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही हैं। हालांकि, समय बीतने के साथ अब जीवित बचे लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। मेक्सिको से रवाना हुए 39 वर्षीय स्वयंसेवक जर्मन बेलो अपने साथ बचाव उपकरणों के अलावा बड़ी संख्या में ‘बॉडी बैग’ भी ले जा रहे हैं, ताकि मृतकों के शवों को सम्मान के साथ निकाला जा सके। कौन हैं ये ‘टोपोस’ और कैसे करते हैं काम?‘टोपोस’ मेक्सिको का एक नागरिक बचाव संगठन है। इसकी शुरुआत 1985 में मेक्सिको सिटी में आए भीषण भूकंप के बाद हुई थी। स्पेनिश भाषा में ‘टोपोस’ का मतलब ‘छछूंदर’ (Moles) होता है। इस टीम को यह नाम इसलिए मिला क्योंकि इसके सदस्य मलबे के बीच बनी बेहद संकरी जगहों और छेदों में रेंगकर घुस जाते हैं। ये लोग थर्मल कैमरे और संवेदनशील माइक्रोफोन जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं ताकि मलबे के नीचे दबी हल्की सी आहट या शरीर की गर्मी को पहचाना जा सके। खामोशी का संकेत और बचाव का तरीकाबचाव कार्य के दौरान यह टीम एक खास तकनीक अपनाती है। जब कोई बचावकर्मी हवा में मुट्ठी बंद करके हाथ उठाता है, तो इसका मतलब होता है ‘बिल्कुल खामोश हो जाएं’। यह संकेत मिलते ही वहां मौजूद अन्य लोग चुप हो जाते हैं। इस सन्नाटे में बचावकर्मी मलबे के नीचे कान लगाकर सुनते हैं कि कहीं से कोई आवाज या खटखटाहट तो नहीं आ रही। इसके बाद फावड़े और हथौड़ों की मदद से धीरे-धीरे मलबा हटाया जाता है ताकि मलबे के और ज्यादा गिरने का खतरा न रहे। उम्मीद की एक आखिरी किरणमेक्सिको सिटी के एयरपोर्ट पर एक भावुक पल देखने को मिला। जब वेनेजुएला के एक इंजीनियर डिएगो बेजरानो को पता चला कि जर्मन बेलो और उनकी टीम उनके देश जा रही है, तो वह रो पड़े। डिएगो का परिवार अभी भी वेनेजुएला की राजधानी कराकस में है। बेलो ने उन्हें गले लगाकर तसल्ली दी। बेलो पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं और अपनी छोटी सी वर्कशॉप चलाते हैं, लेकिन आपदा के समय वह सब छोड़कर लोगों की जान बचाने निकल पड़ते हैं। उनका कहना है कि किसी दुखी इंसान को उम्मीद देना ही उनका सबसे बड़ा इनाम है।

मोदी कैबिनेट में जल्द होगा बड़ा फेरबदल…! 6 दिग्गज मंत्री OUT और 9 नए चेहरे हो सकते हैं IN

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) जल्द ही अपनी कैबिनेट का विस्तार (Modi Cabinet Reshuffle) करने जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, यह फेरबदल जल्द से जल्द होने की संभावना है। इस बार के कैबिनेट विस्तार में कुछ चौंकाने वाले फैसले देखने को मिल सकते हैं। खराब प्रदर्शन और राजनीतिक समीकरणों के चलते कई दिग्गज मंत्रियों (Veteran Ministers) की विदाई हो सकती है, वहीं कुछ नए और अप्रत्याशित चेहरो को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ अलग-अलग हुई मुलाकातों के बाद इस कवायद को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सूत्रों की मानें तो इस फेरबदल में कुछ बड़े विभागों के मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। ऐसे करीब आधा दर्जन मंत्री हैं, जिनके नाम पर कैंची चल सकती है। वहीं, एनडीए के सहयोगी सहित 9 नेताओं को पीएम मोदी की नई टीम में जगह मिल सकती है। धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री: हाल ही में देश भर में हुए NEET पेपर लीक विवाद के बाद से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भारी राजनीतिक दबाव है। माना जा रहा है कि इस विवाद का असर उनकी कुर्सी पर पड़ सकता है। इससे पहले भी यूजीसी और एनसीईआरटी विवाद को लेकर वह विपक्ष के निशाने पर हैं। हरदीप सिंह पुरी, पेट्रोलियम मंत्री:इन्हें भी कैबिनेट से हटाकर संगठन या किसी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में भेजा जा सकता है। इसके अलावा, जिन मंत्रियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है या जिन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव होने हैं वहां के समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए कुछ राज्यमंत्रियों की भी छुट्टी की जा सकती है। इनके अलावा राज्यसभा चुनाव के जरिए ही भाजपा ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। उनमें केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इन नए चेहरों की हो सकती है सरप्राइज एंट्रीशक्तिकांत दास (पूर्व गवर्नर, RBI): रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव शक्तिकांत दास का नाम इस रेस में सबसे आगे है। उन्हें सीधे कैबिनेट में लाकर कोई बेहद महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो सौंपा जा सकता है। श्रीकांत शिंदे (सांसद, शिवसेना): महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन को मजबूत करने और शिवसेना के शिंदे गुट को केंद्र में प्रतिनिधित्व देने के लिए सांसद श्रीकांत शिंदे को मंत्री बनाया जा सकता है। अरुण गोविल (सांसद, भाजपा): रामायण धारावाहिक के जरिए घर-घर में पहचान बनाने वाले मेरठ के नवनिर्वाचित सांसद अरुण गोविल को भी मोदी टीम में जगह मिल सकती है। सूत्रों का कहना है कि ऐसे करीब 9 नाम हैं, जिन्हें नई कैबिनेट विस्तार में जगह मिल सकती है। शानदार काम करने वालों का होगा प्रमोशनभाजपा के वरिष्ठ नेता अनुराग ठाकुर को आगामी फेरबदल में कोई बड़ी और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी जा सकती है। इसके साथ ही बेहतर काम करने वाले कुछ राज्यमंत्रियों (MoS) को प्रमोट करके स्वतंत्र प्रभार या सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है। मंत्रालयों में बड़ा फेरबदलचर्चा है कि इस फेरबदल में मंत्रियों के विभागों में भी बड़ा उलटफेर होगा। दिल्ली के सियासी हलकों में चर्चा है कि यदि शक्तिकांत दास की कैबिनेट में एंट्री होती है तो उन्हें देश का नया वित्त मंत्री बनाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धर्मेंद्र प्रधान की जगह शिक्षा मंत्रालय जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। चुनाव और क्षेत्रीय समीकरणों पर फोकसइस पूरे फेरबदल के पीछे आगामी राज्यों के विधानसभा चुनाव और भविष्य की राजनीतिक बिसात (2029 लोकसभा चुनाव) को मुख्य वजह माना जा रहा है। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए इस बार ओडिशा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में विशेष तवज्जो मिलने के पूरे आसार हैं।

कब मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा? जानें तिथि, मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व माना गया है। यह पर्व गुरु, शिक्षक और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। यह पावन अवसर हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को आता है। शास्त्रों में इसे आषाढ़ पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा और वेद व्यास जयंती के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने चारों वेदों का संकलन और वर्गीकरण कर मानव समाज को ज्ञान की अमूल्य धरोहर दी। इसके अलावा महाभारत और श्रीमद्भागवत जैसे महान ग्रंथों की रचना भी उनके द्वारा की गई मानी जाती है। इसी कारण उन्हें आदि गुरु के रूप में सम्मान दिया जाता है और उनके प्रति आस्था व्यक्त करते हुए गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा 2026 की तिथिपंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई को शाम 6 बजकर 18 मिनट पर होगी।पूर्णिमा तिथि का समापन 29 जुलाई 2026 को रात 8 बजकर 5 मिनट पर होगा।उदया तिथि के आधार पर गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई 2026 (बुधवार) को मनाया जाएगा। गुरु पूर्णिमा का महत्वगुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि जीवन में ज्ञान और अनुशासन के महत्व को समझने का अवसर भी है। इस दिन शिष्य अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। मान्यता है कि इस दिन गुरु की पूजा करने से जीवन में ज्ञान, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह दिन आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें– अपने गुरु या मार्गदर्शक का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें– गुरु पूजन कर उन्हें श्रद्धा अनुसार दक्षिणा या उपहार अर्पित करें– जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें– श्रीमद्भागवत, रामचरितमानस या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें– भगवान विष्णु की आराधना और स्मरण करें– ध्यान, जप और सत्संग के माध्यम से मानसिक शांति प्राप्त करें– जीवन में ज्ञान, विनम्रता और सदाचार अपनाने का संकल्प लें नोट : यह जानकारी पंचांग, धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक स्रोतों पर आधारित है।

कानपुर से इंदौर जाएगा हिप्पो 'सतीश', 700 किमी के सफर में होगा 20 हजार लीटर पानी खर्च

कानपुर। कानपुर और इंदौर चिड़ियाघरों के बीच जल्द ही एक अनोखा एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम होने जा रहा है। इस योजना के तहत कानपुर चिड़ियाघर को इंदौर से एक शेरनी मिलेगी, जबकि बदले में कानपुर का चर्चित दरियाई घोड़ा ‘सतीश’ इंदौर भेजा जाएगा। खास बात यह है कि करीब 700 किलोमीटर लंबे इस सफर के दौरान हिप्पो की देखभाल के लिए लगभग 20 हजार लीटर पानी की व्यवस्था की गई है। 10 दिन में पूरा होगा 700 किलोमीटर का सफरकानपुर से इंदौर की दूरी करीब 700 किलोमीटर है। नेशनल जू अथॉरिटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार वन्यजीवों को ले जाने वाले वाहनों की अधिकतम गति 70 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। रास्ते में निर्धारित पड़ाव और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए हिप्पो ‘सतीश’ को इंदौर पहुंचने में करीब 10 दिन लगने का अनुमान है। दरियाई घोड़े के लिए पानी क्यों है जरूरी?विशेषज्ञों के अनुसार, दरियाई घोड़ा अपने जीवन का लगभग 80 प्रतिशत समय पानी में बिताता है। लंबे समय तक धूप और गर्म हवा के संपर्क में रहने से उसकी त्वचा सूख सकती है, फट सकती है और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी कारण पूरे सफर के दौरान उसके शरीर को लगातार नम बनाए रखने की विशेष व्यवस्था की गई है। पिंजरे के ऊपर लगाए जाएंगे दो बड़े पानी के ड्रमइंदौर चिड़ियाघर प्रशासन हिप्पो के परिवहन के लिए विशेष डिजाइन का पिंजरा तैयार कर रहा है। पिंजरे के ऊपर 100-100 लीटर क्षमता वाले दो बड़े पानी के ड्रम लगाए जाएंगे। इन ड्रमों से यात्रा के दौरान लगातार हिप्पो के शरीर पर पानी का छिड़काव किया जाएगा, ताकि उसकी त्वचा में नमी बनी रहे और उसे गर्मी से राहत मिलती रहे। रास्ते में तय किए गए विशेष पड़ावयात्रा के दौरान वाहन किन स्थानों पर रुकेगा, इसकी भी पहले से योजना बनाई जा रही है। कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार, केवल ऐसे हाईवे ढाबों और पड़ावों का चयन किया जा रहा है जहां पर्याप्त पानी की उपलब्धता हो और गहरे ट्यूबवेल चालू अवस्था में हों। हर पड़ाव पर पाइप की मदद से हिप्पो को अच्छी तरह नहलाया जाएगा। साथ ही पिंजरे पर लगे पानी के ड्रमों को भी दोबारा भरा जाएगा। अनुमान है कि पूरी 10 दिन की यात्रा में नहलाने और ड्रम भरने सहित कुल करीब 20 हजार लीटर पानी का उपयोग होगा। शेरनी के बदले इंदौर जाएगा ‘सतीश’कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक, वहां शेरों की संख्या पर्याप्त है, लेकिन शेरनियों की कमी के कारण प्रजनन कार्यक्रम प्रभावित हो रहा था। दूसरी ओर, इंदौर चिड़ियाघर को एक स्वस्थ दरियाई घोड़े की जरूरत थी। कानपुर में एक से अधिक हिप्पो मौजूद हैं, लेकिन इंदौर की टीम ने स्वास्थ्य और व्यवहार के आधार पर ‘सतीश’ को चुना है। दोनों चिड़ियाघरों के बीच एक्सचेंज प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा चुका है और अब केवल स्थानांतरण की तारीख तय होना बाकी है।

मोदी 3.0 के पहले कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज, क्या युवाओं, महिलाओं और OBC को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व?

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के पहले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट विस्तार 5 जुलाई या 11 जुलाई के बाद कभी भी हो सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई टीम में किन चेहरों को जगह मिलेगी और किन मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव हो सकता है। नई सोशल इंजीनियरिंग पर हो सकता है जोरराजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए युवाओं, महिलाओं और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को अधिक प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई जा सकती है। माना जा रहा है कि इसके जरिए सरकार विकसित भारत-2047 के विजन, महिला सशक्तिकरण और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए व्यापक राजनीतिक संदेश देना चाहती है। युवा नेतृत्व को मिल सकता है अवसरप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते रहे हैं। मौजूदा लोकसभा में 30 वर्ष से कम आयु का एक सांसद, 31 से 40 वर्ष के बीच 15 सांसद और 41 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 39 सांसद हैं। वर्तमान केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 50 वर्ष या उससे कम आयु के मंत्रियों की हिस्सेदारी लगभग 24 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में पहली मोदी सरकार के मंत्रिमंडल की औसत आयु 62 वर्ष थी, जो 2019 में घटकर 60 वर्ष और 2021 के पुनर्गठन के बाद 58 वर्ष रह गई। वर्ष 2024 में भी मंत्रिपरिषद की औसत आयु 58 वर्ष है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार और अधिक युवा सांसदों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। क्या महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारी?प्रधानमंत्री मोदी कई मंचों से महिलाओं को देश की प्रमुख शक्ति बताते रहे हैं। वर्तमान में संसद में एनडीए के 58 महिला सांसद हैं, जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल में केवल सात महिला मंत्री हैं। इनमें दो कैबिनेट मंत्री और पांच राज्य मंत्री शामिल हैं, जो कुल मंत्रियों का लगभग 10 प्रतिशत हैं। फिलहाल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, रक्षा खडसे, शोभा करंदलाजे, अनुप्रिया पटेल, सावित्री ठाकुर और निमूबेन बंभानिया मंत्रिपरिषद का हिस्सा हैं। वर्ष 2021 के मंत्रिमंडल विस्तार में महिला मंत्रियों की संख्या 11 तक पहुंची थी, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों और आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस बार मंत्रिमंडल में नए महिला चेहरों को शामिल किया जा सकता है। OBC और SC वर्ग पर भी रह सकती है नजरमंत्रिमंडल विस्तार में ओबीसी प्रतिनिधित्व भी प्रमुख मुद्दा माना जा रहा है। विपक्ष लगातार जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सरकार को घेरता रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पिछड़े वर्ग के एक हिस्से में बदले राजनीतिक समीकरणों को भी सरकार ध्यान में रख सकती है। वर्तमान मंत्रिपरिषद में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं, जो कुल मंत्रियों का लगभग 38 प्रतिशत हैं। इसके अलावा 10 मंत्री अनुसूचित जाति (एससी), पांच अनुसूचित जनजाति (एसटी) और पांच मंत्री अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ओबीसी, एससी और महिला नेताओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है। ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने की भी संभावना जताई जा रही है, जो युवा होने के साथ-साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हों। आधिकारिक घोषणा का इंतजारहालांकि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि प्रदर्शन के आधार पर कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल हो सकता है, कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है और कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है। अब सभी की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले फैसले पर टिकी हुई है।