विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा

नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा इन दिनों विंबलडन का रोमांच करीब से देख रही हैं। इस दौरान उन्होंने टेनिस के महान खिलाड़ी नोवाक जोकोविच और भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तुलना करते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों की सबसे बड़ी ताकत कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता है। जियो हॉटस्टार से बातचीत में दीप्ति ने कहा कि जब भी नोवाक जोकोविच का नाम आता है तो सबसे पहले उनकी मानसिक मजबूती की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि जोकोविच कभी हार नहीं मानते और चाहे हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण हों, उनका आत्मविश्वास और संयम हमेशा कायम रहता है। यही गुण उन्हें दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शामिल करता है। दीप्ति ने कहा कि क्रिकेट में अगर किसी खिलाड़ी की तुलना जोकोविच से की जा सकती है तो वह महेंद्र सिंह धोनी हैं। उनके अनुसार धोनी मैदान पर हमेशा बेहद शांत दिखाई देते हैं और दबाव की स्थिति में भी उनके चेहरे पर घबराहट नहीं दिखती। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर में कई मुश्किल मुकाबलों में टीम इंडिया को जीत दिलाई। उन्होंने कहा कि दोनों दिग्गज खिलाड़ियों से यह सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और मानसिक संतुलन बनाए रखना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। भारतीय ऑलराउंडर ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा समय में नोवाक जोकोविच उनके पसंदीदा टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह बचपन से रोजर फेडरर और राफेल नडाल जैसे दिग्गजों को खेलते हुए देखती आई हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जोकोविच की जुझारू मानसिकता और कभी हार न मानने वाले रवैये ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया है। अब वह उनके लगभग हर मुकाबले को फॉलो करती हैं। दीप्ति ने विंबलडन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह उनका लंबे समय से देखा गया सपना था। उन्होंने कहा कि वर्षों तक टीवी पर इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम को देखने के बाद पहली बार यहां लाइव मुकाबले देखने का अनुभव बेहद खास है। स्टेडियम का माहौल, दर्शकों का उत्साह और प्रतियोगिता का वातावरण उन्हें बेहद रोमांचित कर रहा है। जब उनसे पूछा गया कि यदि उन्हें विंबलडन में किसी तीन भारतीय खेल हस्तियों के साथ मैच देखने का मौका मिले तो वह किन्हें चुनेंगी, तो उन्होंने सचिन तेंदुलकर, रवि शास्त्री और सुनील गावस्कर का नाम लिया। दीप्ति का मानना है कि इन तीनों दिग्गजों के साथ बैठकर मैच देखने और खेल पर उनकी राय सुनना अपने आप में यादगार अनुभव होगा। दीप्ति शर्मा का यह बयान खेल जगत के दो महान खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती और नेतृत्व क्षमता को लेकर उनकी गहरी समझ को भी दर्शाता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि किसी भी खेल में प्रतिभा के साथ मानसिक दृढ़ता और दबाव में सही फैसले लेने की क्षमता ही महान खिलाड़ियों की पहचान होती है।
ईरान-इजरायल तनाव के बीच गालिबाफ और अराघची कथित तौर पर थे निशाने पर, अमेरिकी दखल से टली कार्रवाई, शांति वार्ता बचाने की कोशिश तेज

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के बीच ईरान और इजरायल से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जानकारी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, युद्धविराम और बातचीत की प्रक्रिया के दौरान ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची पर संभावित हमले की आशंका जताई गई थी। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद यह कार्रवाई टल गई, जिससे शांति वार्ता प्रभावित होने से बच गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक उस समय अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को स्थायी रूप देने तथा आगे की बातचीत को लेकर प्रयास जारी थे। इसी दौरान आशंका जताई गई कि यदि वार्ता में शामिल शीर्ष ईरानी नेताओं को निशाना बनाया जाता, तो दोनों देशों के बीच तनाव फिर से चरम पर पहुंच सकता था। ऐसी स्थिति में कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को गंभीर झटका लगने का खतरा था। बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन ने क्षेत्रीय सहयोगी देशों के माध्यम से संभावित सुरक्षा जोखिम की जानकारी ईरानी पक्ष तक पहुंचाई। इसके बाद संबंधित नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत कर दी गई। रिपोर्टों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य बातचीत की प्रक्रिया को बाधित होने से बचाना और क्षेत्र में व्यापक सैन्य टकराव की आशंका को कम करना था। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से जारी तनाव में दोनों देशों की रणनीतियां अलग-अलग प्राथमिकताओं पर आधारित रही हैं। एक ओर सुरक्षा और सैन्य दबाव की नीति अपनाई जाती रही है, वहीं दूसरी ओर परमाणु कार्यक्रम, समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर कूटनीतिक संवाद भी समानांतर रूप से चलता रहा है। ऐसे में वार्ता से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा अत्यंत संवेदनशील विषय मानी जाती है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि संबंधित ईरानी नेताओं की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई बार अतिरिक्त सतर्कता बरती गई थी। बीते वर्षों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों पर हमलों की घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियां पहले से अधिक सतर्क हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय दौरों और महत्वपूर्ण बैठकों के दौरान विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जाते रहे हैं। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में आयोजित वार्ता के दौरान भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए थे। वापसी यात्रा के दौरान संभावित खतरे की सूचना मिलने पर विमान की उड़ान योजना में बदलाव किया गया और प्रतिनिधिमंडल को वैकल्पिक मार्ग से सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाया गया। हालांकि इस संबंध में संबंधित देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों में सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक प्रयासों के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। किसी भी शीर्ष राजनीतिक या कूटनीतिक नेतृत्व पर संभावित हमला न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, बल्कि शांति प्रक्रिया को भी गंभीर रूप से बाधित कर सकता है। ऐसे में सभी पक्षों के लिए संवाद बनाए रखना और तनाव कम करने की दिशा में निरंतर प्रयास करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली में सजेगा इंटर-स्कूल फुटबॉल का महाकुंभ, ओरिएंटल कप के चौथे संस्करण का आगाज 7 जुलाई से

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर के प्रतिष्ठित इंटर-स्कूल फुटबॉल टूर्नामेंट ओरिएंटल कप का चौथा संस्करण 7 से 16 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। इस बार प्रतियोगिता पहले से कहीं अधिक भव्य होगी। आयोजकों ने रिकॉर्ड पुरस्कार राशि के साथ 10 प्रतिभाशाली छात्र-एथलीटों के लिए कुल 2.5 लाख रुपये की छात्रवृत्ति योजना की भी घोषणा की है। इस वर्ष टूर्नामेंट में दिल्ली-एनसीआर के 45 से अधिक स्कूलों के करीब 1,500 खिलाड़ी भाग लेंगे। प्रतियोगिता के दौरान लड़कों की अंडर-17 और लड़कियों की अंडर-19 श्रेणियों में 50 से अधिक मुकाबले खेले जाएंगे। आयोजकों का मानना है कि यह प्रतियोगिता युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और प्रतिस्पर्धी माहौल में निखरने का बेहतरीन मंच उपलब्ध कराएगी। ओरिएंटल कप के संस्थापक फरीद बख्शी ने कहा कि इस टूर्नामेंट का उद्देश्य केवल मुकाबले आयोजित करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर फुटबॉल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि इस बार पुरस्कार राशि को दोगुने से भी अधिक बढ़ाया गया है और पहली बार 10 योग्य छात्र-एथलीटों के लिए 2.5 लाख रुपये की छात्रवृत्ति शुरू की गई है। इससे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आर्थिक सहयोग मिलने के साथ उनके खेल और शिक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी। बख्शी ने लड़कियों की बढ़ती भागीदारी पर भी खुशी जताई। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट के पहले संस्करण की तुलना में अब लड़कियों की टीमों की संख्या दोगुनी हो चुकी है और कुल प्रतिभागी टीमों में उनकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह बदलाव स्कूल स्तर पर महिला फुटबॉल के प्रति बढ़ती रुचि और समान अवसरों की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इस बार लड़कों की अंडर-17 प्रतियोगिता में 25 से अधिक टीमें मैदान में उतरेंगी, जबकि लड़कियों की अंडर-19 श्रेणी में 16 से अधिक टीमें भाग लेंगी। आयोजकों के अनुसार, यह 2023 में शुरू हुए टूर्नामेंट के लगातार बढ़ते प्रभाव और लोकप्रियता को दर्शाता है। ओरिएंटल कप की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। तब से अब तक यह प्रतियोगिता 55 से अधिक स्कूलों और गैर-सरकारी संगठनों को जोड़ चुकी है। पिछले तीन संस्करणों में 2,700 से अधिक युवा फुटबॉलर हिस्सा ले चुके हैं और 80 से अधिक मुकाबले सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। आयोजन समिति का लक्ष्य इसे देश के सबसे प्रतिष्ठित इंटर-स्कूल फुटबॉल टूर्नामेंटों में शामिल करना है।
पाकिस्तान में भीषण सड़क हादसा, बलूचिस्तान-खैबर पख्तूनख्वा सीमा पर खाई में गिरी यात्री बस; 40 लोगों की मौत, कई घायल, राहत अभियान तेज

नई दिल्ली । पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा की सीमा पर शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री घायल हो गए। यह दुर्घटना उस समय हुई जब बलूचिस्तान के शेरानी जिले से डेरा इस्माइल खान की ओर जा रही एक यात्री बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस बलूचिस्तान के धनसार क्षेत्र से रवाना हुई थी और खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान की ओर जा रही थी। यात्रा के दौरान पहाड़ी मार्ग पर बस अचानक नियंत्रण खो बैठी और गहरी खाई में जा गिरी। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कई यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। हादसे की सूचना मिलते ही दोनों प्रांतों के प्रशासन, पुलिस, बचाव दल और आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण रहा, फिर भी बचावकर्मियों ने स्थानीय लोगों की सहायता से घायलों को खाई से बाहर निकालने का अभियान तेज गति से चलाया। कई घंटे तक चले अभियान के दौरान मृतकों के शवों को भी बाहर निकालकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त बस में यात्रियों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। शुरुआती विवरण में बस में 36 यात्रियों के होने की बात कही गई, लेकिन रास्ते में खराब हुई दूसरी बस के कुछ यात्रियों के भी इसमें सवार हो जाने से कुल यात्रियों की संख्या बढ़ गई थी। बाद में बचाव एजेंसियों ने बताया कि दुर्घटना के समय बस में लगभग 48 यात्री मौजूद थे। इसी कारण मृतकों और घायलों के आंकड़ों का अंतिम सत्यापन किया जा रहा है। हादसे के बाद प्रांतीय सरकार ने तत्काल राहत कार्यों की निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों को घायलों के समुचित उपचार और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है ताकि परिजनों को शीघ्र सूचना दी जा सके और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। सरकार ने दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच के आदेश भी दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हादसा वाहन की तकनीकी खराबी, चालक की लापरवाही, अत्यधिक यात्रियों के सवार होने या सड़क की परिस्थितियों में से किस वजह से हुआ। जांच रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। पाकिस्तान के पर्वतीय क्षेत्रों में संकरी और घुमावदार सड़कों के कारण सड़क दुर्घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यात्री वाहनों की नियमित तकनीकी जांच, निर्धारित क्षमता का पालन, सुरक्षित ड्राइविंग और सड़क सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने से ऐसे हादसों की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। फिलहाल प्रशासन राहत कार्यों के साथ-साथ दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच में जुटा हुआ है।
अहमदाबाद में फीबा बास्केटबॉल वर्ल्ड कप 2027 क्वालिफायर की मेजबानी, भारत की नजर दमदार प्रदर्शन पर

नई दिल्ली। अहमदाबाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। शहर के वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नारनपुरा में फीबा बास्केटबॉल वर्ल्ड कप 2027 एशियन क्वालिफायर विंडो-3 का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 2 जुलाई से 5 जुलाई 2026 तक चलेगी, जिसमें भारतीय पुरुष बास्केटबॉल टीम घरेलू दर्शकों के सामने दो मजबूत एशियाई टीमों कतर और लेबनान के खिलाफ चुनौती पेश कर रही है। भारतीय टीम ने अपने अभियान की शुरुआत 2 जुलाई को कतर के खिलाफ मुकाबले से की, जबकि 5 जुलाई को उसका सामना एशिया की मजबूत टीम लेबनान से होगा। यह दोनों मुकाबले भारत के लिए विश्व कप क्वालिफिकेशन अभियान में बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने कहा कि अहमदाबाद लगातार बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी कर अपनी अलग पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि महज एक सप्ताह पहले इसी परिसर में एवीसी पुरुष वॉलीबॉल कप का सफल आयोजन हुआ था और अब फीबा बास्केटबॉल वर्ल्ड कप 2027 एशियन क्वालिफायर की मेजबानी शहर की खेल क्षमता और आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगितियों को आकर्षित करने के लिए लगातार काम कर रही है। इससे न केवल खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलेंगे बल्कि राज्य को वैश्विक खेल मानचित्र पर भी नई पहचान मिलेगी। भारतीय टीम इस समय हेड कोच स्कॉट फ्लेमिंग के मार्गदर्शन में नए सिरे से टीम निर्माण की प्रक्रिया में है। टीम का फोकस युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव दिलाने और भविष्य के लिए मजबूत संयोजन तैयार करने पर है। हालिया फीबा रैंकिंग में भारत दुनिया में 76वें और एशिया में 14वें स्थान पर है। शुरुआती मुकाबलों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद टीम घरेलू मैदान पर वापसी की उम्मीद के साथ उतर रही है। भारतीय टीम में कंवर संधू, प्रणव प्रिंस, प्रिंसपाल सिंह और हर्ष डागर जैसे युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल हैं, जिन्होंने हाल के टूर्नामेंटों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। घरेलू दर्शकों का समर्थन टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। अहमदाबाद में लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगितियों का आयोजन यह संकेत देता है कि शहर भविष्य में भी बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए तेजी से तैयार हो रहा है। वहीं भारतीय टीम के लिए यह टूर्नामेंट न केवल विश्व कप क्वालिफिकेशन की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि एशियाई स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता साबित करने का भी सुनहरा अवसर है।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आत्मदाह से मचा हड़कंप, तिब्बती झंडा लिए व्यक्ति की मौत के बाद कारणों की जांच में जुटी अमेरिकी एजेंसियां

नई दिल्ली । अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर एक व्यक्ति द्वारा आत्मदाह किए जाने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और चर्चा को जन्म दे दिया है। गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। घटना के समय उसके हाथ में तिब्बती झंडा होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि अधिकारियों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि आत्मदाह का संबंध तिब्बत मुद्दे से जुड़े किसी विरोध प्रदर्शन से था। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। घटना उस समय सामने आई जब संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में दिनभर की निर्धारित बैठकें समाप्त हो चुकी थीं। आपातकालीन सूचना मिलने के बाद पुलिस और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे। तब तक व्यक्ति गंभीर रूप से झुलस चुका था। प्राथमिक कार्रवाई के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। अधिकारियों ने मृतक की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की है। बताया गया है कि पहले उसके परिजनों को आधिकारिक रूप से सूचना दी जाएगी, जिसके बाद ही पहचान जारी की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल आत्मदाह के पीछे के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के समय व्यक्ति के हाथ में तिब्बती झंडा था। इसी कारण इस घटना को लेकर तिब्बत से जुड़े राजनीतिक और मानवाधिकार संबंधी मुद्दों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक यह नहीं कहा है कि यह कदम किसी राजनीतिक विरोध या संगठित अभियान का हिस्सा था। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण करने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। तिब्बत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का संवेदनशील विषय रहा है। चीन तिब्बत को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और वहां अपने प्रशासनिक अधिकार का दावा करता है। दूसरी ओर, तिब्बती समुदाय का एक वर्ग अपनी सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक स्वतंत्रता और स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहा है। यही वजह है कि तिब्बत से जुड़े प्रतीकों और घटनाओं पर वैश्विक स्तर पर विशेष ध्यान दिया जाता है। भारत के धर्मशाला में निर्वासित तिब्बती प्रशासन वर्षों से तिब्बती समुदाय के सामाजिक और प्रशासनिक मामलों का संचालन करता रहा है। हालांकि चीन इस प्रशासन को मान्यता नहीं देता। बीते वर्षों में तिब्बत मुद्दे के समाधान के लिए कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन किसी स्थायी समाधान तक पहुंचा नहीं जा सका। इसके बाद से औपचारिक संवाद भी लगभग ठप रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थान पर हुई इस घटना की जांच केवल व्यक्तिगत कारणों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे जुड़े सभी संभावित सामाजिक, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं का भी मूल्यांकन किया जाएगा। फिलहाल अमेरिकी जांच एजेंसियां घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही हैं। अधिकारियों ने अपील की है कि जांच पूरी होने तक घटना के कारणों को लेकर किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने से बचा जाए।
थाईलैंड में दर्दनाक हादसा, 11 वर्षीय बच्चे की चलाई पिकअप धार्मिक जुलूस में घुसी, 10 बौद्ध भिक्षुओं की मौत, कानून के दायरे पर उठे सवाल

नई दिल्ली । थाईलैंड के मुकदाहान प्रांत में एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। धार्मिक पदयात्रा पर निकले बौद्ध भिक्षुओं के समूह में एक पिकअप वाहन के घुस जाने से 10 भिक्षुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वाहन एक 11 वर्षीय बच्चा चला रहा था, जिसने बिना अनुमति अपने माता-पिता की पिकअप लेकर घर से बाहर निकलने के बाद नियंत्रण खो दिया। घटना के बाद पूरे देश में सड़क सुरक्षा, अभिभावकों की जिम्मेदारी और नाबालिगों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार हादसे के समय 35 बौद्ध भिक्षु और पांच श्रद्धालु धार्मिक पदयात्रा पर थे। सभी सड़क के किनारे एक पंक्ति में आगे बढ़ रहे थे, तभी तेज रफ्तार पिकअप अनियंत्रित होकर सीधे जुलूस में जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कई भिक्षु दूर तक उछल गए। पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कई घायल अब भी अस्पताल में भर्ती हैं और उनमें से तीन की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस जांच में पता चला है कि बच्चा अपने माता-पिता की जानकारी के बिना वाहन लेकर निकल गया था। वाहन के घर से गायब होने पर परिजनों ने तत्काल पुलिस को इसकी सूचना दी थी। इसके कुछ समय बाद हादसे की जानकारी सामने आई। पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। हादसे में बचे भिक्षुओं और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जांच अधिकारियों ने बताया कि बच्चा फिलहाल विस्तृत बयान देने की स्थिति में नहीं है। शुरुआती स्तर पर यह आशंका भी जताई गई है कि वह विशेष आवश्यकताओं वाला बच्चा हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि चिकित्सकीय परीक्षण और विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति का भी मूल्यांकन कर रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शी एक भिक्षु ने बताया कि सभी लोग धार्मिक मंत्रों का जाप करते हुए शांतिपूर्वक आगे बढ़ रहे थे। तभी सामने से तेज गति से आती पिकअप अचानक उनकी ओर मुड़ गई। उन्होंने समय रहते स्वयं को बचा लिया, लेकिन उनके पीछे चल रहे कई भिक्षु वाहन की चपेट में आ गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दल ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। स्थानीय अस्पताल ने घायलों की संख्या अधिक होने के कारण लोगों से रक्तदान की अपील की है। चिकित्सकों के अनुसार कई घायलों का उपचार जारी है और कुछ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं ताकि दुर्घटना के सभी पहलुओं का पता लगाया जा सके। थाईलैंड के कानून के अनुसार 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सामान्य परिस्थितियों में आपराधिक दायित्व लागू नहीं होता। ऐसे में इस मामले में बच्चे के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की संभावना सीमित मानी जा रही है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सभी कानूनी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। प्रशासन ने इस घटना को गंभीर चेतावनी बताते हुए अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से वाहन दूर रखें और सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विश्व धरोहर तक्षशिला पर मंडराया संकट, संरक्षण के नाम पर आधुनिक निर्माण से पाकिस्तान को यूनेस्को की सख्त फटकार

नई दिल्ली । विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण को लेकर पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवालों के घेरे में आ गया है। प्राचीन तक्षशिला में संरक्षण कार्यों के दौरान आधुनिक निर्माण सामग्री और तकनीकों के उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को ने गंभीर आपत्ति जताई है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि यदि विवादित निर्माण कार्यों को तत्काल नहीं रोका गया और पहले किए गए बदलावों को वापस नहीं लिया गया, तो तक्षशिला को विश्व धरोहर सूची से हटाने तक की कार्रवाई की जा सकती है। तक्षशिला भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में गिनी जाती है। यह स्थल वैदिक, बौद्ध और प्राचीन भारतीय सभ्यता के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां विभिन्न कालखंडों के नगरों, मठों, धार्मिक स्थलों और पुरातात्विक अवशेषों का विशाल समूह मौजूद है, जो सदियों पुराने शहरी विकास और सांस्कृतिक इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। यूनेस्को की आपत्ति उन संरक्षण कार्यों को लेकर है जिनमें ऐतिहासिक संरचनाओं की मरम्मत के दौरान आधुनिक सीमेंट, नई चिनाई और अतिरिक्त निर्माण का उपयोग किया गया। संस्था का मानना है कि इस प्रकार के हस्तक्षेप से स्मारकों की मौलिकता और ऐतिहासिक स्वरूप प्रभावित होता है। अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मानकों के अनुसार किसी भी विश्व धरोहर स्थल पर मरम्मत या संरक्षण का कार्य मूल निर्माण शैली और पारंपरिक तकनीकों के अनुरूप होना चाहिए। जानकारी के अनुसार तक्षशिला परिसर के दो प्रमुख पुरातात्विक स्थलों पर किए गए निर्माण कार्यों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की गई। निरीक्षण के दौरान ऐसे बदलाव सामने आए जिनमें पुरानी दीवारों के स्थान पर नई दीवारें तैयार करना, उनकी ऊंचाई बढ़ाना तथा आधुनिक सामग्री का उपयोग शामिल बताया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के निर्माण से ऐतिहासिक संरचनाओं की प्रामाणिकता और सांस्कृतिक महत्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यूनेस्को ने पाकिस्तान से स्पष्ट रूप से कहा है कि संबंधित निर्माण कार्यों को तुरंत रोका जाए और जिन हिस्सों में आधुनिक हस्तक्षेप किया गया है, उनकी समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। संस्था ने यह भी संकेत दिया है कि यदि निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया तो तक्षशिला को संकटग्रस्त विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया जा सकता है। स्थिति में सुधार नहीं होने पर विश्व धरोहर का दर्जा वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व धरोहर स्थलों का संरक्षण केवल संरचनाओं को बचाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उनके मूल स्वरूप, ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक होता है। आधुनिक निर्माण सामग्री का अनियंत्रित उपयोग किसी भी प्राचीन स्मारक की ऐतिहासिक विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सिद्धांत अत्यंत सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। तक्षशिला लंबे समय से इतिहास, पुरातत्व और सांस्कृतिक अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां स्थित अवशेष भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन शिक्षा, व्यापार, धर्म और नगर नियोजन की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। ऐसे में संरक्षण कार्यों में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन केवल औपचारिक आवश्यकता नहीं, बल्कि इस वैश्विक धरोहर की ऐतिहासिक पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसके संरक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।
विंबलडन 2026: एलेक्जेंड्रा एला ने रचा इतिहास, पहली फिलीपीन खिलाड़ी बनीं जो तीसरे दौर में पहुंचीं

नई दिल्ली। विंबलडन 2026 में फिलीपींस की युवा टेनिस स्टार एलेक्जेंड्रा एला ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार महिला एकल के तीसरे दौर में प्रवेश कर लिया। गुरुवार को ऑल इंग्लैंड क्लब में खेले गए दूसरे दौर के मुकाबले में एला ने ऑस्ट्रेलिया की माया जॉइंट को 3-6, 6-2, 6-0 से हराकर न सिर्फ शानदार वापसी की, बल्कि विंबलडन के तीसरे दौर में पहुंचने वाली फिलीपींस की पहली खिलाड़ी बनने का गौरव भी हासिल किया। मुकाबले की शुरुआत एला के लिए चुनौतीपूर्ण रही। पहले सेट में माया जॉइंट ने आक्रामक खेल दिखाते हुए 6-3 से बढ़त बना ली। शुरुआती झटके के बाद एला ने अपना खेल पूरी तरह बदल दिया और दूसरे सेट में बेहतरीन सर्विस तथा दमदार ग्राउंड स्ट्रोक्स की बदौलत 6-2 से मुकाबला बराबरी पर ला दिया। निर्णायक तीसरे सेट में 21 वर्षीय एला ने अपने प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने शुरुआत में ही सर्विस ब्रेक हासिल कर दबाव बनाया और लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए 6-0 से सेट जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। पूरे मुकाबले में उनकी फिटनेस, संयम और आक्रामक खेल ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। यह जीत एला के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि पिछले वर्ष ईस्टबोर्न ओपन के फाइनल में उन्हें माया जॉइंट के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। उस मैच का फैसला तीसरे सेट के टाईब्रेक में 12-10 से हुआ था। विंबलडन में मिली यह जीत उनके लिए उस हार का बेहतरीन जवाब साबित हुई। महिला एकल के अन्य मुकाबलों में 21वीं वरीयता प्राप्त मैरी बौजकोवा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रांट को 7-5, 6-3 से हराकर तीसरी बार विंबलडन के तीसरे दौर में जगह बनाई। अब उनका सामना पिछले साल की क्वार्टर फाइनलिस्ट ल्यूडमिला सैमसनोवा से होगा, जिन्होंने 15वीं वरीयता प्राप्त डायना श्नाइडर को 6-4, 4-6, 6-2 से हराया। अमेरिका की एमा नवारो ने भी लगातार तीसरे वर्ष विंबलडन के तीसरे दौर में प्रवेश किया। उन्होंने ओक्साना सेलेखमेतेवा को 3-6, 6-4, 6-1 से मात देकर शानदार वापसी दर्ज की। नवारो का अगला मुकाबला मार्टा कोस्त्युक और अन्ना ब्लिंकोवा के बीच होने वाले मैच की विजेता से होगा। एलेक्जेंड्रा एला की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल फिलीपींस के टेनिस इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि युवा खिलाड़ी अब ग्रैंड स्लैम स्तर पर बड़े उलटफेर करने का दम रखते हैं।
महिला टी20 विश्व कप 2026: साइवर-ब्रंट की कप्तानी पारी से इंग्लैंड फाइनल में, दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराया

नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने दमदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराकर पांचवीं बार फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। लंदन के केनिंग्टन ओवल में खेले गए मुकाबले में इंग्लिश टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट पर 169 रन बनाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 129 रन ही बना सकी। इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। एमी जोन्स 2 रन और डैनी व्याट 12 रन बनाकर आउट हो गईं, जबकि एलिसा कैप्सी भी सिर्फ 1 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। महज 23 रन पर तीन विकेट गिरने के बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट और अनुभवी हीथर नाइट ने मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 133 रन की शानदार साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। कप्तान साइवर-ब्रंट ने जिम्मेदारी भरी बल्लेबाजी करते हुए 47 गेंदों में 75 रन बनाए। उनकी पारी में 11 चौके और एक छक्का शामिल रहा। वहीं हीथर नाइट ने 47 गेंदों पर 58 रन की उपयोगी पारी खेली जिसमें छह चौके और एक छक्का शामिल था। दोनों की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत इंग्लैंड ने चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। दक्षिण अफ्रीका की ओर से शबनम इस्माइल और नॉनकुलुलेको म्लाबा ने दो-दो विकेट लिए लेकिन बाकी गेंदबाज इंग्लैंड की बड़ी साझेदारी को तोड़ने में सफल नहीं हो सके। 170 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका को कप्तान लौरा वोल्वार्ट और ताजमिन ब्रिट्स ने अच्छी शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 43 रन जोड़े लेकिन इसके बाद टीम लगातार अंतराल पर विकेट गंवाती रही। वोल्वार्ट 17 रन बनाकर आउट हुईं जबकि एनेरी डर्कसेन, मारिजाने कैप, सुने लुस और क्लो ट्रायोन बड़ी पारी नहीं खेल सकीं। ताजमिन ब्रिट्स ने अकेले संघर्ष करते हुए 45 गेंदों में 51 रन बनाए लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। नादिन डी क्लर्क 14 रन बनाकर नाबाद रहीं, जबकि बाकी बल्लेबाज इंग्लैंड के अनुशासित गेंदबाजी आक्रमण के सामने टिक नहीं सके। इंग्लैंड की ओर से लॉरेन बेल और चार्ली डीन ने दो-दो विकेट झटके। फ्रेया केम्प और लिन्से स्मिथ ने एक-एक विकेट लेकर दक्षिण अफ्रीका की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने पांचवीं बार महिला टी20 विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया है। अब रविवार को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर उसका मुकाबला छह बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से होगा। क्रिकेट प्रेमियों को खिताबी मुकाबले में महिला क्रिकेट की दो सबसे सफल टीमों के बीच रोमांचक टक्कर देखने को मिलेगी।