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MP : 190 तहसीलदार और प्रभारी डिप्टी कलेक्टर पदोन्नत, बने डिप्टी कलेक्टर, आदेश जारी

भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए प्रदेश के 190 तहसीलदार एवं प्रभारी डिप्टी कलेक्टरों को नियमित रूप से डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नत कर दिया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेश जारी कर सभी अधिकारियों की पदोन्नति को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के अनुसार, पदोन्नत किए गए अधिकारी पूर्व से प्रभारी डिप्टी कलेक्टर अथवा तहसीलदार के रूप में कार्यरत थे। अब इन्हें मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा के डिप्टी कलेक्टर (वरिष्ठ श्रेणी) के पद पर नियमित पदोन्नति प्रदान की गई है। पदोन्नति के साथ ही इन अधिकारियों को नियमित डिप्टी कलेक्टर का दर्जा मिल गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पदोन्नति मध्यप्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियमों तथा विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की अनुशंसा के आधार पर की गई है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि पदोन्नति शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अधीन प्रभावी रहेगी। View PDF विभाग ने सभी संबंधित विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों तथा अन्य अधिकारियों को आदेश की प्रति भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पदोन्नत अधिकारियों की सूची भी आदेश के साथ संलग्न की गई है, जिसमें सभी 190 अधिकारियों के नाम एवं वर्तमान पदस्थापना का उल्लेख है। इस निर्णय से प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ जिलों एवं उपखंड स्तर पर नियमित डिप्टी कलेक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों के संचालन में गति आने की उम्मीद है।

पत्नी की हत्या छिपाने के लिए खरीदा जहरीला कोबरा: पोस्टमार्टम ने खोली साजिश की परतें, बैंक अफसर को उम्रकैद

इंदौर । इंदौर के बहुचर्चित वर्ष 2019 के शिवानी हत्याकांड में करीब साढ़े छह साल बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी बैंक अधिकारी अमितेष उर्फ शालू पटेरिया को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि आरोपी ने अपनी पत्नी की पहले गला घोंटकर हत्या की और इसके बाद मौत को सर्पदंश से हुई प्राकृतिक मृत्यु दिखाने के लिए बेहद सुनियोजित साजिश रची। इस मामले में आरोपी को हत्या के अलावा साक्ष्य मिटाने और संरक्षित वन्यजीव की अवैध हत्या के मामले में भी अलग-अलग सजा सुनाई गई है। अभियोजन के अनुसार घटना एक दिसंबर 2019 को इंदौर के संचार नगर स्थित घर में हुई थी। आरोपी अपनी पत्नी शिवानी को अस्पताल लेकर पहुंचा और डॉक्टरों को बताया कि उसकी मौत सांप के काटने से हुई है। लेकिन मृतका के परिजनों ने शुरू से ही इस पर संदेह जताया और हत्या की आशंका व्यक्त की। घटनास्थल पर एक मृत कोबरा मिलने से मामला और उलझ गया। जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे तथ्य मिले जिन्होंने पूरी कहानी बदल दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि शिवानी की मौत सर्पदंश से नहीं बल्कि मुंह और गला दबाने से दम घुटने के कारण हुई थी। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों ने इस निष्कर्ष को मजबूत किया। बिस्तर, तकिए और अन्य सामग्री से मिले वैज्ञानिक प्रमाणों ने हत्या की पुष्टि की। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी राजस्थान के अलवर से करीब 620 किलोमीटर दूर जाकर ब्लैक डेजर्ट प्रजाति का जहरीला कोबरा खरीदकर लाया था। आरोप है कि उसने कई दिनों तक उसे घर में छिपाकर रखा और हत्या के बाद कोबरा का उपयोग सर्पदंश की झूठी कहानी गढ़ने के लिए किया। बाद में उसने कोबरा को भी मार दिया। अदालत ने इसे सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र माना। पुलिस जांच के दौरान आरोपी से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। अभियोजन ने मोबाइल रिकॉर्ड, कथित बातचीत, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों को अदालत में पेश किया। अदालत ने उपलब्ध वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया। मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू वन्यजीव संरक्षण कानून से भी जुड़ा रहा। जांच में कोबरा की अवैध हत्या की पुष्टि होने के बाद आरोपी पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई। अदालत ने इस अपराध के लिए तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा साक्ष्य मिटाने के अपराध में भी अलग से कारावास का दंड दिया गया। इस फैसले के साथ मध्य प्रदेश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल शिवानी हत्याकांड का न्यायिक अध्याय समाप्त हुआ। यह मामला इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि आधुनिक फोरेंसिक जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य किस तरह जटिल आपराधिक मामलों की सच्चाई सामने लाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

इंदौर के होटल में युवक ने फांसी लगाकर दी जान: मोबाइल पर बात करते हुए कमरे में गया, देर रात स्टाफ ने देखा शव

इंदौर । इंदौर के लसूडिया थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में काम करने वाले एक युवक की फंदे से लटकी लाश मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात की है। होटल कर्मचारियों ने जब युवक को काफी देर तक रिसेप्शन पर नहीं देखा तो उसकी तलाश शुरू की। स्टाफ रूम में पहुंचने पर वह फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार घटना खालसा चौक स्थित ड्रीम पैलेस होटल की है। मृतक की पहचान सिवनी जिले के रहने वाले सोनू पुत्र सरदार बंजारा के रूप में हुई है। वह होटल में कर्मचारी के रूप में कार्यरत था और रात की ड्यूटी संभाल रहा था। होटल कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि देर रात कुछ ग्राहक होटल पहुंचे और काफी देर तक रिसेप्शन पर आवाज लगाते रहे लेकिन सोनू वहां नहीं आया। जब काफी समय तक उसका कोई पता नहीं चला तो एक कर्मचारी उसे तलाशते हुए स्टाफ के कमरे तक पहुंचा। वहां का नजारा देखकर सभी के होश उड़ गए। सोनू कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। घटना की जांच के दौरान पुलिस ने होटल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में सोनू मोबाइल फोन पर किसी से बात करते हुए अपने कमरे की ओर जाता दिखाई दे रहा है। इसके बाद वह बाहर नहीं निकला। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और कॉल डिटेल की जांच की जा रही है ताकि घटना से पहले हुई बातचीत और संभावित कारणों का पता लगाया जा सके। होटल प्रबंधन के मुताबिक सोनू करीब एक महीने पहले ही काम की तलाश में होटल पहुंचा था और उसे नौकरी पर रखा गया था। नियुक्ति के समय उसका आधार कार्ड लिया गया था लेकिन उसके पिछले कार्यस्थल या निजी परिस्थितियों की जानकारी होटल प्रबंधन के पास नहीं है। पुलिस अब उसके परिजनों से संपर्क करने का प्रयास कर रही है और उनसे पूछताछ के बाद आगे की जांच करेगी। इधर शहर के मल्हारगंज थाना क्षेत्र से भी एक संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। इंद्रा नगर निवासी सनोज पुत्र रामदास को परिजन मृत अवस्था में एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। पुलिस ने इस मामले में भी जांच शुरू कर दी है और मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है। लसूडिया पुलिस का कहना है कि फिलहाल आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मोबाइल की जांच और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आप या आपका कोई परिचित भावनात्मक संकट, अवसाद या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहा है, तो किसी भरोसेमंद परिजन, मित्र या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत बात करें। समय पर मदद मिलना बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में नई गति की उम्मीद, पीएम मोदी की यात्रा से वार्षिक समिट, आर्थिक सहयोग और लोगों के जुड़ाव को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तेजी से मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। यात्रा से पहले ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त नागेश सिंह ने दोनों देशों के बीच विकसित हो रहे रणनीतिक सहयोग, आर्थिक साझेदारी, रक्षा संबंधों, लोगों के बीच बढ़ते संपर्क और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह दौरा दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करेगा तथा भविष्य के सहयोग के लिए नए रास्ते खोलेगा। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दोनों देशों के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं। वर्ष 2020 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उनके अनुसार दोनों लोकतांत्रिक देशों के साझा मूल्य इस संबंध को और अधिक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। नागेश सिंह ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाए रखने के पक्षधर हैं। हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष और अस्थिरता के बावजूद भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध स्थिरता और भरोसे के साथ आगे बढ़े हैं। यही कारण है कि दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी एक-दूसरे के साथ समन्वय बढ़ा रहे हैं। उन्होंने आर्थिक सहयोग को भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार ऑस्ट्रेलिया के पास प्रचुर मात्रा में महत्वपूर्ण खनिज और प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं, जबकि भारत के पास विशाल बाजार और मजबूत विनिर्माण क्षमता है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनका मानना है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभदायक साबित होगी। भारतीय उच्चायुक्त ने दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी जुड़ाव को भी संबंधों की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लगभग दस लाख लोग विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षा, व्यवसाय, राजनीति और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में भारतीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी दोनों देशों के बीच मजबूत सामाजिक और सांस्कृतिक पुल का कार्य कर रही है। इससे आपसी विश्वास और सहयोग को लगातार नई मजबूती मिल रही है। उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आयोजित होने वाले वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन को भी विशेष महत्व का बताया। उनके अनुसार भारत बहुत कम देशों के साथ हर वर्ष शीर्ष नेतृत्व स्तर पर नियमित शिखर बैठक आयोजित करता है। यह परंपरा दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और निरंतर संवाद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा उसी निरंतरता का हिस्सा है और इससे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई पहल सामने आने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री के ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित करने के लिए एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। उच्चायुक्त ने बताया कि इस कार्यक्रम को लेकर भारतीय समुदाय में व्यापक उत्साह है और देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होने पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल भारतीय समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों की गहराई को भी प्रदर्शित करेगा। खेल सहयोग पर उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट से आगे बढ़कर अन्य खेलों में भी साझेदारी का विस्तार करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच खेलों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और नई खेल संस्कृतियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हो रही है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की द्विपक्षीय साझेदारी अपने स्वतंत्र आधार पर आगे बढ़ रही है और इसका मूल उद्देश्य शांति, स्थिरता, साझा विकास तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना है।

इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए प्रधानमंत्री मोदी, देशभर से बधाइयों का दौर; नेताओं ने बताया भारत के गौरव का क्षण

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्ण ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किए जाने के बाद देशभर में उन्हें बधाइयां देने का सिलसिला शुरू हो गया। लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस उपलब्धि को भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। नेताओं का कहना है कि यह सम्मान भारत की सक्रिय विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ते प्रभाव की व्यापक स्वीकृति को दर्शाता है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान भारत और इंडोनेशिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझेदारी को नई दिशा मिली है। उनके अनुसार यह सम्मान क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे दोनों देशों के बीच मित्रता और अधिक मजबूत होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके दूरदर्शी नेतृत्व, प्रभावशाली कूटनीति और भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता की वैश्विक पहचान है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है और यह सम्मान उसी बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है। उनके अनुसार भारत आज विश्व समुदाय के बीच एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी वैश्विक नेतृत्व क्षमता और भारत-इंडोनेशिया के बीच गहरे होते संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ की सफलता का भी महत्वपूर्ण संकेत है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग लगातार नए आयाम हासिल कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय विकास और साझा समृद्धि को भी बल मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सम्मान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रदान किया। इसे इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है और यह उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने असाधारण योगदान के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक सहयोग को नई दिशा दी हो। इस सम्मान को भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जा रहा है। सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न बताते हुए देश के 140 करोड़ नागरिकों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें मिला यह सम्मान भारत के लोगों के प्रति इंडोनेशिया की सद्भावना और दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, वहां की सरकार और जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों की मित्रता आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सहयोग केवल राजनीतिक या रणनीतिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे अनेक क्षेत्रों में लगातार विस्तार हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारत की विदेश नीति की बढ़ती स्वीकार्यता और वैश्विक स्तर पर मजबूत होती भूमिका का संकेत है। हाल के वर्षों में भारत ने विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को विस्तार दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी स्थिति और प्रभाव दोनों मजबूत हुए हैं। ऐसे सम्मान न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देते हैं, बल्कि वैश्विक समुदाय में भारत की सकारात्मक और विश्वसनीय छवि को भी और सुदृढ़ बनाते हैं।

एमपी की राजनीति और नौकरशाही में हलचल: सिंधिया के भाषण पर सीएम का ‘मक्खन’ वाला तंज, एसीएस की नाराजगी और विजय शाह के बयान चर्चा में

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही में इन दिनों कई घटनाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक ओर कैबिनेट मंत्री विजय शाह अपने भाषण को लेकर सुर्खियों में हैं तो दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संबोधन पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इसी बीच रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल और भोपाल के एक होटल से जुड़ा एक चर्चित प्रशासनिक किस्सा भी लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वीबीजी राम जी योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बेटियों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता मिली है तथा बेटी बचाओ जैसे अभियानों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने बचपन का एक प्रसंग भी सुनाया जिसमें उनकी मां खुले में शौच के लिए जाते समय सावधानी बरतने की सीख देती थीं। उनके इस भाषण की राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग अलग तरह से चर्चा हो रही है। उधर रीवा जिले के मनगवां क्षेत्र से सामने आई एक घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। गांव तक सड़क नहीं होने और बारिश से रास्ता खराब होने के कारण एक बीमार महिला को परिजन खाट पर उठाकर अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर हुए। समय पर इलाज नहीं मिलने से महिला की मौत हो गई। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब प्रदेश में एयर एंबुलेंस जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की घोषणा की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सड़क और एंबुलेंस सुविधा की कमी को लेकर विपक्ष और स्थानीय लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं। इधर शिवपुरी में हथियार निर्माण फैक्ट्री के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री मोहन यादव और निवेश परियोजना की सराहना की। भाषण के दौरान उनका उत्साह देखकर मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि आज महाराज की आवाज में वैसा आनंद आया जैसा मां रोटी पर थोड़ा ज्यादा मक्खन लगा दे। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर मंच पर मौजूद नेताओं के साथ कार्यक्रम में शामिल लोग भी मुस्कुराते नजर आए। इसके बाद यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। इसी बीच भोपाल में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से जुड़ा एक चर्चित किस्सा भी सामने आया है। चर्चा है कि एक होटल में सामान्य ग्राहक की तरह व्यवहार किए जाने के कुछ समय बाद संबंधित विभाग की जांच टीम वहां पहुंच गई। हालांकि इस मामले को लेकर किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित अधिकारी या विभाग की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है। इसलिए इस घटना को केवल चर्चाओं और अपुष्ट दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन घटनाओं ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति प्रशासनिक कार्यशैली और जनसुविधाओं को लेकर बहस तेज कर दी है। जहां नेताओं के बयान और मंचीय संवाद सुर्खियां बटोर रहे हैं वहीं स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे आम लोगों की चिंता का कारण बने हुए हैं।

भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई रणनीतिक मजबूती, पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो की वार्ता में व्यापार, रक्षा और समुद्री सहयोग पर बनी व्यापक सहमति

नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में मंगलवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानव विकास सहित कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति देना समय की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वार्ता के बाद कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में केवल मजबूती ही नहीं आई है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का दायरा भी लगातार विस्तृत हुआ है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि मौजूदा बैठक से रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सहयोग के नए अवसर तैयार होंगे। वार्ता के दौरान आर्थिक सहयोग को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में साझेदारी को विस्तार देने पर विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि आपसी सहयोग से न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी। रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी बैठक का प्रमुख केंद्र रहा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण समुद्री देशों के रूप में भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर साझा दृष्टिकोण दोहराया। दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, रणनीतिक समन्वय और रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इस दौरान रक्षा क्षेत्र में हुए समझौतों को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया। संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से जुड़ा सहयोग रहा, जिसके तहत भारत इंडोनेशिया को अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही इंडोनेशिया ने भारतीय ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली को खरीदने का निर्णय भी लिया है। इन समझौतों को भारत के रक्षा निर्यात और दोनों देशों के बढ़ते रक्षा सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का तीन दिवसीय इंडोनेशिया दौरा केवल रणनीतिक और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊर्जा देने का प्रयास माना जा रहा है। उन्होंने साझा सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि योग्याकार्ता स्थित एक हजार वर्ष से अधिक पुराने प्रम्बानन मंदिर का पुनर्निर्माण परियोजना दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री बुधवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस परियोजना का शुभारंभ करेंगे। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक सहयोग, रक्षा साझेदारी, आर्थिक संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। दोनों देशों ने भविष्य में आपसी विश्वास, साझा हितों और क्षेत्रीय शांति को आधार बनाकर सहयोग को और अधिक मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

हमीदिया अस्पताल में मेडिकल चमत्कार: 10.2 किलो ओवरी ट्यूमर के साथ गर्भवती का सफल ऑपरेशन, स्वस्थ शिशु का हुआ जन्म

मध्य प्रदेश । भोपाल के हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञों ने 10.2 किलोग्राम वजन के विशाल ओवरी ट्यूमर से पीड़ित गर्भवती महिला का सफल सिजेरियन ऑपरेशन किया। इस दुर्लभ और जोखिमभरी सर्जरी में पहले 2.6 किलोग्राम वजन के स्वस्थ शिशु का सुरक्षित जन्म कराया गया और इसके तुरंत बाद उसी ऑपरेशन के दौरान महिला की ओवरी से 10.2 किलोग्राम का ट्यूमर भी सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। ऑपरेशन के बाद मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा उनकी स्थिति स्थिर और संतोषजनक बताई जा रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह मामला चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यंत जटिल था क्योंकि एक ओर महिला गर्भवती थी और दूसरी ओर उसकी ओवरी में असामान्य रूप से बड़ा ट्यूमर मौजूद था। ऐसी स्थिति में मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान को गंभीर खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों ने ऑपरेशन से पहले पूरी योजना तैयार की और हर चरण को बेहद सावधानी से पूरा किया ताकि किसी प्रकार की जटिलता उत्पन्न न हो। इस सफल शल्य चिकित्सा का नेतृत्व गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा वाधवानी के मार्गदर्शन में किया गया। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी सिंह और डॉ. अदिति खरे ने सर्जरी को अंजाम दिया। वहीं एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. तृप्ति वत्सल्य, डॉ. जितेन्द्र कुमार और डॉ. देवांशु सराफ ने संभाली। ऑपरेशन के दौरान विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी पूरी टीम के साथ समन्वय बनाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान इतने बड़े ओवरी ट्यूमर के साथ सफल प्रसव और ट्यूमर को एक ही ऑपरेशन में निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा रहता है। इसके अलावा गर्भस्थ शिशु पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। लेकिन अनुभवी डॉक्टरों की टीम, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और सटीक रणनीति की बदौलत यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। यह सफलता न केवल हमीदिया अस्पताल की विशेषज्ञता को दर्शाती है बल्कि यह भी साबित करती है कि सरकारी अस्पतालों में जटिल से जटिल मामलों का भी उच्च स्तर पर सफल इलाज संभव है। डॉक्टरों की समर्पित टीम और बेहतर चिकित्सा प्रबंधन के कारण मां और नवजात दोनों को नया जीवन मिला है। यह उपलब्धि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है।

भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिली नई रणनीतिक रफ्तार, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की साझेदारी का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा

नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई मजबूती देते हुए दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष, औद्योगिक सहयोग और तकनीक समेत अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनाई है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था और पूरी मानवता पर भी दिखाई देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग का नया दौर साझा विकास और स्थिरता को नई दिशा देगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा दिए गए आत्मीय स्वागत और देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान को भारत के 140 करोड़ नागरिकों के सम्मान के रूप में स्वीकार करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के दशकों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों का प्रतीक है तथा भविष्य में सहयोग को और अधिक मजबूत करने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों में विश्वास, सहयोग और रणनीतिक समझ लगातार बढ़ी है। वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नए चरण में प्रवेश कर रही है। विकास, सुरक्षा, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आगे भी इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिया गया है। रक्षा और समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए दोनों देशों के तटरक्षक बल मिलकर काम करेंगे। ब्लू इकोनॉमी, बंदरगाह विकास और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में भी साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति बनी है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और समुद्री संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को भी सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। भारत की किफायती दवाओं की उपलब्धता इंडोनेशिया में बढ़ाने, वहां के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण में सहयोग देने तथा उन्नत गेहूं के बीज उपलब्ध कराने जैसे कदमों पर सहमति बनी है। इसके साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन से जुड़े भारतीय अनुभव भी साझा किए जाएंगे, ताकि दोनों देशों के नागरिकों तक सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। तकनीक और डिजिटल क्षेत्र में दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने का निर्णय लिया है। भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस प्रणाली को इंडोनेशिया की भुगतान व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी सहमति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और पर्यटन को सुविधा मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान का परिसर इंडोनेशिया में स्थापित करने की योजना भी सामने आई है, जिससे पूरे आसियान क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष अनुसंधान, तकनीकी क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों, स्टील और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए भी संयुक्त प्रयासों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता में एकता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने में दोनों देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, आसियान की केंद्रीय भूमिका, संवाद आधारित कूटनीति और वैश्विक शांति के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि साझा इतिहास, साझा विश्वास और साझा समृद्धि के आधार पर भारत और इंडोनेशिया आने वाले वर्षों में नई सफलताओं की मिसाल कायम करेंगे।

भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, जकार्ता में पीएम मोदी और राष्ट्रपति सुबियांतो के बीच रक्षा से डिजिटल अर्थव्यवस्था तक होगी व्यापक चर्चा

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दूसरे दिन भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद है। जकार्ता में प्रधानमंत्री का औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया, जहां इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ उनकी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक निर्धारित है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने वाले कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। औपचारिक स्वागत समारोह के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री मोदी का आत्मीय स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन करने के बाद अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों से परिचय कराया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन स्थित अतिथि पुस्तिका में हस्ताक्षर भी किए। इस अवसर पर दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री भी उपस्थित रहे, जिससे इस यात्रा के महत्व का स्पष्ट संकेत मिला। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भारत और इंडोनेशिया के राष्ट्रीय ध्वज लेकर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने बच्चों का अभिवादन स्वीकार किया और उनसे आत्मीयता से मुलाकात की। यह दृश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और जन-स्तरीय संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने जकार्ता पहुंचने पर मिले स्वागत को विशेष बताते हुए उसके कुछ दृश्य साझा किए और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ होने वाली बैठक को लेकर उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी ने दोनों देशों के लोगों को लाभ पहुंचाया है और अब इस सहयोग को नए क्षेत्रों तक विस्तारित करने का अवसर है। द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषय प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे। इसके अलावा दोनों देश निवेश, व्यापार, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय सहयोग को लेकर भी नए अवसरों पर विचार करेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्ग और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा होने की संभावना है। बैठक के दौरान वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत अब तक हुई प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। दोनों देश इस साझेदारी को अधिक व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाने के लिए नई पहल पर सहमति बना सकते हैं। इससे द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी की यह इंडोनेशिया की चौथी यात्रा है, लेकिन व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा है। ऐसे में इस दौरे को दोनों देशों के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं के बीच यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने तथा भविष्य की साझा विकास यात्रा को नई गति देने की दिशा में एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।