भोपाल-राजगढ़ को जोड़ने वाला डायवर्सन जलमग्न, प्रशासन ने आवाजाही पर लगाया प्रतिबंध

भोपाल । लगातार हो रही बारिश के चलते भोपाल और राजगढ़ जिले को जोड़ने वाले पार्वती नदी के अस्थायी वैकल्पिक मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर नदी के बीच बनाए गए इस डायवर्सन पर पानी भर जाने और तेज बहाव के कारण प्रशासन ने सोमवार देर रात यह फैसला लिया। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। बैरसिया एसडीएम आशुतोष शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि पार्वती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे नदी के बीच बना अस्थायी मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है और वहां से गुजरना बेहद जोखिमभरा हो गया है। किसी भी संभावित हादसे को रोकने के लिए इस मार्ग पर सभी प्रकार के वाहनों और लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। बैरिकेडिंग और निगरानी के निर्देशप्रशासन ने संबंधित विभागों को मार्ग के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाने, चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा संकेतक स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर इस रास्ते का उपयोग न कर सके। आदेश के पालन की जिम्मेदारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जनपद पंचायत, लोक निर्माण विभाग (PWD) और पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है। अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने तथा लोगों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों से भेजने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाईप्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। पहले भी हो चुके हैं हादसेयह वैकल्पिक मार्ग जनवरी 2025 में पार्वती नदी पर बने 49 वर्ष पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद तैयार किया गया था। बारिश शुरू होने से पहले तक इसी रास्ते से बसें, ट्रक, कारें और दोपहिया वाहन गुजर रहे थे, लेकिन जलस्तर बढ़ने के साथ यहां हादसों का खतरा भी बढ़ गया। पिछले वर्ष अक्टूबर में इसी मार्ग पर एक बस फंस गई थी, जबकि हाल ही में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी में गिर गई थी। हालांकि उस हादसे में चारों लोग सुरक्षित बच गए थे। कई जिलों की लाइफलाइन है यह मार्गबैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर स्थित यह पुल भोपाल और राजगढ़ के अलावा गुना, विदिशा, शिवपुरी, अशोकनगर, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन और इंदौर जैसे जिलों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही मार्ग आगरा-बंबई राष्ट्रीय राजमार्ग से भी जुड़ता है। करीब 49 वर्ष पुराने इस पुल की अब तक केवल दो बार मरम्मत हुई है। रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई और जनवरी 2025 में पुल धंसने के बाद इसे पूरी तरह बंद करना पड़ा था। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे बंद मार्ग से गुजरने का प्रयास न करें और केवल सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों का ही उपयोग करें।
कमजोर तिमाही बिजनेस अपडेट से ट्रेंट के शेयर में बड़ी बिकवाली, निवेशकों की उम्मीदों को झटका, एक ही दिन में 11 प्रतिशत से अधिक लुढ़का स्टॉक

नई दिल्ली । टाटा समूह की प्रमुख रिटेल कंपनी ट्रेंट के शेयरों में मंगलवार को तेज गिरावट दर्ज की गई, जब कंपनी की जून तिमाही से जुड़ा कारोबारी अपडेट बाजार की अपेक्षाओं से कमजोर रहा। कारोबार के शुरुआती घंटों में कंपनी का शेयर 11 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जिससे निवेशकों की धारणा पर स्पष्ट असर दिखाई दिया। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी की आय वृद्धि अनुमान से कम रहने और नए स्टोर जोड़ने की रफ्तार धीमी पड़ने के कारण बाजार ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी। जून तिमाही के दौरान ट्रेंट ने 5,666 करोड़ रुपये की स्टैंडअलोन आय दर्ज की, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 4,781 करोड़ रुपये था। हालांकि कंपनी की आय में सालाना आधार पर वृद्धि हुई, लेकिन यह वृद्धि बाजार की उम्मीदों से कम रही। निवेशकों और विश्लेषकों को इस अवधि में लगभग 22 से 23 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद थी, जबकि वास्तविक वृद्धि करीब 19 प्रतिशत के आसपास रही। इसी अंतर ने शेयर बाजार में दबाव बढ़ा दिया। तिमाही के अंत तक कंपनी के कुल स्टोरों की संख्या बढ़कर 1,312 हो गई। इनमें 301 वेस्टसाइड स्टोर, 982 जूडियो आउटलेट और लाइफस्टाइल श्रेणी के 29 स्टोर शामिल रहे। इसके बावजूद नए स्टोर खोलने की गति पहले की तुलना में अपेक्षाकृत धीमी रहने को लेकर बाजार ने चिंता जताई। रिटेल क्षेत्र में विस्तार की रफ्तार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है और इसी वजह से इस पहलू पर भी विशेष ध्यान दिया गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि तिमाही प्रदर्शन अपेक्षाओं से कमजोर जरूर रहा, लेकिन इसे कंपनी के कारोबार में किसी स्थायी या संरचनात्मक समस्या का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। उनका मानना है कि रिटेल कारोबार में तिमाही दर तिमाही उतार-चढ़ाव सामान्य बात है और किसी एक तिमाही के आंकड़ों के आधार पर कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं का आकलन करना उचित नहीं होगा। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के विस्तार और बिक्री की गति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। हाल के महीनों में ट्रेंट के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया था और निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न भी मिला था। मंगलवार की बड़ी गिरावट के बावजूद पिछले एक महीने के दौरान कंपनी का शेयर लगभग 9 प्रतिशत का लाभ दे चुका है। हालांकि एक वर्ष की अवधि में इसमें करीब 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत, यदि लंबे समय के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले पांच वर्षों में ट्रेंट ने लगभग 390 प्रतिशत का उल्लेखनीय रिटर्न देकर निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। कंपनी के पिछले वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही में ट्रेंट ने 5,028 करोड़ रुपये की आय दर्ज की थी। इस दौरान कुल खर्च 4,117 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का ऑपरेटिंग मुनाफा 911 करोड़ रुपये और कर के बाद शुद्ध लाभ 413 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। ऑपरेटिंग मार्जिन भी बढ़कर 18 प्रतिशत पर पहुंच गया था, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 15 प्रतिशत से अधिक था। इससे स्पष्ट है कि कंपनी की लाभप्रदता में सुधार देखने को मिला था, लेकिन मौजूदा तिमाही के कारोबारी संकेतकों ने निवेशकों की उम्मीदों को फिलहाल कुछ हद तक निराश किया है।
सेंसेक्स-निफ्टी सीमित बढ़त के साथ खुले, आईटी सेक्टर में खरीदारी रही हावी, एफपीआई के रुख में बदलाव से बाजार को मिला सहारा

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को कारोबारी सत्र की शुरुआत सीमित बढ़त के साथ की। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट स्तर पर कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि आईटी क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। निवेशकों का रुझान फिलहाल चुनिंदा सेक्टरों की ओर बना हुआ है और बाजार में सतर्क आशावाद का माहौल देखने को मिल रहा है। शुरुआती कारोबार में आईटी कंपनियों के शेयर सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बने। इस क्षेत्र में लगातार खरीदारी के कारण संबंधित सेक्टोरल इंडेक्स अन्य सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करता नजर आया। इसके अलावा वित्तीय सेवाएं, निजी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, ऑटो, हेल्थकेयर, ऑयल एंड गैस, रियल्टी और सर्विसेज सेक्टर में भी सकारात्मक कारोबार देखने को मिला, जिससे बाजार का समग्र रुख संतुलित बना रहा। दूसरी ओर धातु, रक्षा, मीडिया, मैन्युफैक्चरिंग, सार्वजनिक उपक्रमों और कमोडिटी से जुड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन क्षेत्रों में बिकवाली के कारण कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते रहे। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल मजबूत बुनियादी संकेतों वाले क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। लार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। व्यापक बाजार में किसी बड़ी तेजी या गिरावट के बजाय संतुलित कारोबार देखने को मिला। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशक फिलहाल बड़े फैसले लेने के बजाय बाजार के अगले संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के साथ कुछ वित्तीय और उपभोक्ता कंपनियों के शेयरों में अच्छी मजबूती देखने को मिली। वहीं कुछ औद्योगिक, स्टील, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रहा। बाजार का यह मिश्रित प्रदर्शन निवेशकों की सेक्टर आधारित रणनीति को दर्शाता है, जहां अलग-अलग उद्योगों में अलग रुख अपनाया जा रहा है। वैश्विक बाजारों का प्रभाव भी भारतीय शेयर बाजार पर सीमित रूप से दिखाई दिया। अधिकांश एशियाई बाजारों में कमजोरी का माहौल रहा, जबकि अमेरिकी बाजार पिछले कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे। विशेष रूप से तकनीकी कंपनियों में आई मजबूती का सकारात्मक असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में जिन दो प्रमुख कारणों से बाजार पर दबाव बना हुआ था, उनमें अब राहत के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी से आयात लागत को लेकर चिंताएं कम हुई हैं। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का रुख भी बदलता नजर आ रहा है। लगातार बिकवाली के बाद अब विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी शुरू होना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय खरीदारी भी बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही है। विदेशी और घरेलू निवेशकों की भागीदारी से बाजार में संतुलन बना हुआ है, जिससे आने वाले समय में निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो भारतीय शेयर बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर आगामी आर्थिक संकेतकों, कॉर्पोरेट नतीजों और वैश्विक बाजारों की दिशा पर बनी हुई है।
शेयर बाजार में बढ़त के बीच ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली के संकेत, टाइटन और आईटी शेयरों की तेजी ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार ने मंगलवार को सकारात्मक संकेतों के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में निवेशकों की खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ खुले। सेंसेक्स ने शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाई, जबकि निफ्टी भी बढ़त के साथ महत्वपूर्ण स्तरों के करीब पहुंच गया। बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला, जिससे बाजार का समग्र माहौल सकारात्मक बना रहा। शुरुआती कारोबार में टाइटन कंपनी के शेयर सबसे अधिक चर्चा में रहे। कंपनी के हालिया कारोबारी अपडेट के बाद निवेशकों की मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे शेयर में करीब तीन प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी क्षेत्र में भी सकारात्मक रुझान दिखाई दिया और इंफोसिस सहित कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज हुई। इससे संकेत मिला कि निवेशक गुणवत्ता वाले बड़े शेयरों में दोबारा रुचि दिखा रहे हैं। बाजार में श्रीराम फाइनेंस, एसबीआई लाइफ, जियो फाइनेंशियल, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और आयशर मोटर्स जैसे शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। विभिन्न क्षेत्रों में खरीदारी का यह रुझान दर्शाता है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा कंपनियों पर भरोसा जता रहे हैं। हालांकि व्यापक बाजार में कारोबार अपेक्षाकृत संतुलित बना हुआ है और निवेशक अगले संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कई सत्रों की बढ़त के बाद अब ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है। इसी वजह से निफ्टी कुछ समय तक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। साप्ताहिक एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव बाजार की गतिविधियां भी सूचकांकों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे समय में उतार-चढ़ाव सामान्य से अधिक रहने की संभावना मानी जा रही है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 24,500 अंक का स्तर निकट अवधि में महत्वपूर्ण प्रतिरोध माना जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर को मजबूती के साथ पार करता है तो आगे नई तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर 24,400 अंक के आसपास का स्तर तत्काल समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर से नीचे फिसलता है तो अल्पकालिक दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बाजार में अभी तक व्यापक कमजोरी के संकेत नहीं हैं, लेकिन ऊंचे स्तरों पर निवेशकों द्वारा लाभ बुक करने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में सूचकांक कुछ समय तक सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद अगली दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने के बजाय कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन और बाजार के समग्र रुझान पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार फिलहाल संतुलित स्थिति में दिखाई दे रहा है। कॉर्पोरेट नतीजों, आर्थिक आंकड़ों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। आने वाले कारोबारी सत्रों में यही कारक बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल शुरुआती कारोबार में आई मजबूती ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है, लेकिन ऊपरी स्तरों पर सतर्कता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक माना जा रहा है।
थाईलैंड की खुदाई में मिला भारत से जुड़ा बड़ा सबूत, ब्राह्मी लिपि की अंगूठी ने खोले इतिहास के राज

नई दिल्ली । भारत और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक तथा व्यापारिक संबंध आधुनिक दौर तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें करीब दो हजार वर्ष पुरानी हैं। इसका ताजा प्रमाण थाईलैंड में हुई एक पुरातात्विक खुदाई से मिला है, जहां वैज्ञानिकों को दो सोने की प्राचीन अंगूठियां मिली हैं। इनमें से एक अंगूठी पर भारतीय ब्राह्मी लिपि में अंकित शब्दों ने इतिहासकारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज प्राचीन भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मजबूत व्यापारिक संपर्क का महत्वपूर्ण साक्ष्य है। यह खोज थाईलैंड के पेत्चाबुरी प्रांत स्थित दोन याई थोंग पुरातात्विक स्थल पर हुई। थाईलैंड के फाइन आर्ट्स डिपार्टमेंट के अनुसार यहां मानव कंकालों की खुदाई के दौरान ये अंगूठियां मिलीं। प्रारंभिक अध्ययन में पता चला कि इनका संबंध लगभग 2,000 वर्ष पुराने आयरन एज काल से हो सकता है। ब्राह्मी लिपि में मिला अहम संदेशविशेषज्ञों ने एक अंगूठी पर अंकित ब्राह्मी लिपि को पढ़ने की कोशिश की, जिसमें ‘पुस रखितस’ लिखा मिला। इसका अर्थ बताया गया है- “वह व्यक्ति जिसे पुष्य का संरक्षण प्राप्त है।” भारतीय परंपरा में पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। दूसरी अंगूठी पर कोई लेख नहीं मिला, लेकिन दोनों आभूषणों की बनावट और शैली भारतीय प्रभाव की ओर संकेत करती है। भारतीय व्यापारी से जुड़ा हो सकता है संबंधपुरातत्वविदों का मानना है कि ये अंगूठियां किसी संपन्न भारतीय व्यापारी की हो सकती हैं, जो समुद्री व्यापार के जरिए उस समय थाईलैंड पहुंचा होगा। उस दौर में भारत के व्यापारी मसाले, वस्त्र, धातु, आभूषण और अन्य वस्तुओं का व्यापार दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से करते थे। यही कारण है कि थाईलैंड सहित कई क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति, भाषा और धार्मिक प्रभाव के प्रमाण समय-समय पर मिलते रहे हैं।धान के खेत से शुरू हुई बड़ी खोजइस ऐतिहासिक स्थल की पहचान तब हुई जब स्थानीय ग्रामीणों को धान के खेत में प्राचीन वस्तुएं मिलीं। इसके बाद सरकार ने यहां वैज्ञानिक खुदाई शुरू कराई। फरवरी से अब तक यहां से आठ मानव कंकाल, सोने और कांसे के आभूषण, मिट्टी के बर्तन और कई अन्य प्राचीन वस्तुएं बरामद हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि खुदाई पूरी होने के बाद इन सभी अवशेषों को संग्रहालय में आम लोगों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। राखीगढ़ी पर भी बढ़ी उम्मीदेंउधर भारत में भी सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े स्थलों में शामिल राखीगढ़ी को लेकर शोध तेज हो गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने वहां से मिले मानव कंकालों को वैज्ञानिक और डीएनए विश्लेषण के लिए भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण को सौंपा है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इन अध्ययनों से प्राचीन भारतीय सभ्यता, लोगों की जीवनशैली और आनुवंशिक इतिहास से जुड़े कई नए तथ्य सामने आएंगे। थाईलैंड में मिली यह नई खोज एक बार फिर साबित करती है कि प्राचीन भारत का व्यापारिक और सांस्कृतिक प्रभाव समुद्री मार्गों के जरिए हजारों किलोमीटर दूर तक फैला हुआ था।
खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, परमाणु हथियार पर दोहराया अमेरिकी रुख

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका समझौते का रास्ता चाहता है, लेकिन यदि हालात बने तो निर्णायक कार्रवाई करने में भी देर नहीं करेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में अपने हितों की रक्षा करेगा। उनके अनुसार, पहला विकल्प समझौता है, लेकिन यदि बातचीत सफल नहीं होती तो अमेरिका अपने उद्देश्य पूरे करने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि वह बड़े पैमाने पर जनहानि नहीं चाहते, इसलिए कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं। परमाणु कार्यक्रम पर दोहराया अमेरिकी रुखट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता न बचे। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के समय में तेल की कीमतें युद्ध के दौरान बढ़े स्तर से नीचे आ चुकी हैं और अमेरिका चाहता है कि ईरान किसी भी संभावित समझौते की शर्तों का पालन करे। सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता अमेरिकाट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना नहीं है। उनका कहना था कि अमेरिका की प्राथमिकता क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है। युद्धविराम के बाद भी जारी है बयानबाजीहालांकि हाल के संघर्ष के बाद दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन बयानबाजी लगातार जारी है। ट्रंप पहले भी कई बार ईरान को लेकर कड़े बयान दे चुके हैं और राजनयिक समाधान के साथ-साथ सैन्य विकल्प खुले होने की बात कह चुके हैं। ईरान ने दिया कड़ा जवाबट्रंप के बयान पर ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई। आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की हत्या से उसके विचार समाप्त नहीं होते। दूतावास ने अमेरिका पर ईरान के इतिहास और संस्कृति को न समझने का आरोप लगाया और कहा कि दबाव की राजनीति से उसके सिद्धांत नहीं बदलेंगे। दोनों देशों के बीच जारी यह तीखी बयानबाजी संकेत देती है कि युद्धविराम के बावजूद रिश्तों में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत और क्षेत्रीय घटनाक्रम इस संबंध की दिशा तय करेंगे।
सऊदी अरब की ऐतिहासिक तेल कटौती, 20 साल की सबसे बड़ी कीमत गिरावट से भारत को मिल सकती है बड़ी राहत

नई दिल्ली । सऊदी अरब ने वैश्विक तेल बाजार में बड़ा कदम उठाते हुए एशियाई ग्राहकों के लिए अपने प्रमुख अरब लाइट क्रूड की कीमत में अगस्त 2026 से प्रभावी ऐतिहासिक कटौती का ऐलान किया है। सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कमी की है, जिसे पिछले दो दशकों की सबसे बड़ी कटौती माना जा रहा है। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय ऑयल मार्केट में हलचल मचा दी है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ा दी है। क्यों घटाई गई कीमत?तेल बाजार में हाल के दिनों में वैश्विक मांग कमजोर हुई है, जबकि आपूर्ति लगातार बढ़ रही है। इजरायल-ईरान तनाव कम होने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इसी बीच ओपेक प्लस देशों ने भी उत्पादन बढ़ाने पर सहमति बनाई है, जिससे बाजार में सप्लाई और बढ़ गई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए सऊदी अरब ने एशियाई बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने के लिए कीमतों में बड़ी कटौती की है। भारत को क्या होगा फायदा?भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और सऊदी अरब उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में सऊदी की इस कीमत कटौती का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई स्तरों पर दिखाई दे सकता है। सबसे पहले, भारत का तेल आयात बिल कम हो सकता है, जिससे चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव घटेगा। विदेशी मुद्रा भंडार पर बोझ कम होने और रुपये को मजबूती मिलने की भी संभावना है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे रहती हैं, तो इसका लाभ घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी के रूप में भी मिल सकता है। हालांकि, खुदरा ईंधन कीमतों में बदलाव सरकार की कर नीति और तेल विपणन कंपनियों के मूल्य निर्धारण पर भी निर्भर करेगा। महंगाई पर भी पड़ सकता है असरकच्चा तेल सस्ता होने से परिवहन लागत घट सकती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, औद्योगिक उत्पादों और लॉजिस्टिक्स पर पड़ता है। इससे महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे में भी सुधार होने की संभावना जताई जा रही है। एशियाई बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धाविशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब के इस फैसले के बाद अन्य तेल निर्यातक देशों पर भी कीमतों में प्रतिस्पर्धी बदलाव का दबाव बढ़ सकता है। इससे एशियाई बाजार में खरीदारों को बेहतर शर्तों पर कच्चा तेल मिलने की संभावना बनेगी। अगर वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत सहित कई आयातक देशों को आने वाले महीनों में आर्थिक राहत मिल सकती है।
भारत विरोधी साजिशों के बीच पाकिस्तान-यूक्रेन का सीक्रेट गठजोड़: 'ऑपरेशन सिंदूर' में मुंह की खाने के बाद ड्रोन तकनीक के लिए मुनीर सेना ने थामा कीव का हाथ

नई दिल्ली । भारतीय सीमाओं पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत रची गई एक बहुत बड़ी सैन्य साजिश के पूरी तरह विफल होने के बाद पाकिस्तानी सेना और उसके प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की बौखलाहट साफ नजर आ रही है। भारत द्वारा रणनीतिक मोर्चे पर मात खाने और सिंधु जल समझौते को लेकर सख्त रुख अपनाने के बाद पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व अब सीधे युद्ध की धमकियां देने पर उतर आया है। इस करारी शिकस्त और भारी नाकामी के बावजूद पाकिस्तानी सेना के इस अप्रत्याशित आक्रामक तेवर और बढ़े हुए आत्मविश्वास के पीछे एक नया अंतरराष्ट्रीय कोण सामने आ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, पाकिस्तान ने अब रूस के साथ भीषण युद्ध में लगे यूक्रेन के साथ एक गुप्त सैन्य समझौता किया है। इस गुप्त सैन्य गठजोड़ के तहत यूक्रेन की सेना पाकिस्तानी मिलिट्री को आधुनिक ड्रोन ऑपरेशन्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की सीक्रेट ट्रेनिंग दे रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों पाकिस्तानी सेना ने भारत के खिलाफ एक अत्यंत आधुनिक और घातक साजिश रचने का प्रयास किया था, जिसके तहत भारतीय सीमाओं के भीतर महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए एक साथ करीब 600 ड्रोन्स को लॉन्च करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, भारतीय सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और अचूक रक्षा प्रणाली के सामने पाकिस्तानी सेना का यह ‘मेगा ड्रोन प्लान’ पूरी तरह मटियामेट हो गया। पाकिस्तानी सेना के अधिकांश लड़ाकू ड्रोन्स को भारतीय सेना ने सीमा पर ही मार गिराया, जबकि कई ड्रोन तकनीकी खामियों के कारण स्वयं ही क्रैश हो गए। इस रणनीतिक विफलता ने पाकिस्तानी जनरलों को यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि उनकी मौजूदा सैन्य तकनीक और परिचालन क्षमता भारत के आधुनिक रक्षा तंत्र के सामने बेहद कमजोर और अपर्याप्त है। इसी कमजोरी को छिपाने और आधुनिक युद्ध कौशल सीखने के लिए पाकिस्तान ने अपने पुराने रणनीतिक सहयोगी यूक्रेन का रुख किया है, जो पिछले कई वर्षों से रूस के खिलाफ अत्यधिक हाई-टेक और ड्रोन-आधारित युद्ध लड़ रहा है। लगातार जारी इस युद्ध ने यूक्रेन को ‘कामिकेजे ड्रोन्स’ (आत्मघाती ड्रोन) और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर्स के क्षेत्र में दुनिया का सबसे अनुभवी और युद्ध-प्रशिक्षित देश बना दिया है। अब यूक्रेन अपनी इस सैन्य महारत और युद्ध के अनुभवों को एक कमर्शियल एसेट के रूप में इस्तेमाल करते हुए आर्थिक लाभ के लिए पाकिस्तानी सेना को प्रशिक्षित कर रहा है। पाकिस्तान इस ड्रोन ट्रेनिंग को अपने लिए एक संजीवनी बूटी की तरह देख रहा है, जिसके बल पर वह भारत के हाथों मिली तकनीकी शिकस्त का बदला लेने का सपना देख रहा है। यही मुख्य कारण है कि जनरल मुनीर का कॉन्फिडेंस अचानक बढ़ा हुआ नजर आ रहा है। रणनीतिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो सोवियत संघ से अलग होने के बाद यूक्रेन का भारत के प्रति रुख हमेशा से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पूर्व के वर्षों में यूक्रेन ने कई महत्वपूर्ण वैश्विक मंचों और संयुक्त राष्ट्र में भारत के परमाणु परीक्षणों तथा कश्मीर मुद्दे पर नई दिल्ली की नीतियों के खिलाफ रुख अपनाया था। हालांकि, बाद के वर्षों में यूक्रेन की आधिकारिक नीति में बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखा गया और उसने जम्मू-कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच का एक द्विपक्षीय मामला मानते हुए इसे 1972 के शिमला समझौते के तहत सुलझाने की बात कही थी। परंतु, वर्तमान में पाकिस्तान के साथ उसका यह गुप्त सैन्य सहयोग भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाने वाला है।
भारत-इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई: 1170 साल पुराने प्राम्बानन शिव मंदिर के जीर्णोद्धार में तकनीक और एआई की मदद देगा भारत

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक साझेदारी को एक नई और अभूतपूर्व मजबूती मिलने जा रही है। वैश्विक भू-राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच दोनों देश अपने प्राचीन संबंधों को रणनीतिक दिशा देने में जुट गए हैं। इस महत्वपूर्ण राजनयिक पहल के तहत भारत, इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित 1170 साल पुराने ऐतिहासिक प्राम्बानन शिव मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और संरक्षण कार्य में अपना तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। यह प्राचीन हिंदू मंदिर परिसर वर्तमान में यूनेस्को (UNESCO) का एक प्रतिष्ठित विश्व धरोहर स्थल है। इस विशाल मंदिर परिसर के इतिहास की खोज का सफर काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1733 में डच औपनिवेशिक शासन के दौरान एक अधिकारी ने जावा के जंगलों में पत्थरों का एक विशाल ढेर देखा था, जिसे स्थानीय लोग ‘रोरो जोंग्रांग’ नामक राजकुमारी की लोककथा से जोड़कर देखते थे। इसके बाद 19वीं और 20वीं शताब्दी में जब इस स्थान पर वैज्ञानिक पद्धति से खुदाई की गई, तब वहां पत्थरों पर प्राचीन संस्कृत और पुरानी जावानीज भाषा में लिखे कई महत्वपूर्ण शिलालेख प्राप्त हुए। इन शिलालेखों में इस स्थान को ‘शिवगृह’ के रूप में संबोधित किया गया था और इस पर वर्ष 856 अंकित था, जिससे इसके शिव मंदिर होने की आधिकारिक पुष्टि हुई। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, इस भव्य मंदिर का निर्माण मातरम साम्राज्य के हिंदू संजय वंश के राजाओं द्वारा करवाया गया था। इसकी शुरुआत राजा राकाई पिकातन ने वर्ष 850 के आसपास की थी, जबकि मुख्य शिव मंदिर का उद्घाटन उनके उत्तराधिकारी राजा लोकपाल ने वर्ष 856 में संपन्न कराया था। यह परिसर केवल भगवान शिव को ही समर्पित नहीं है, बल्कि यह हिंदू धर्म के तीनों मुख्य देवताओं—ब्रह्मा, विष्णु और महेश को समर्पित होने के कारण ‘त्रिमूर्ति मंदिर’ भी कहलाता है। परिसर का मुख्य शिव मंदिर लगभग 47 मीटर ऊंचा है और इसकी दीवारों पर पत्थरों को तराशकर रामायण की संपूर्ण गाथा अत्यंत खूबसूरती से उकेरी गई है। ऐतिहासिक शोधों से स्पष्ट होता है कि इंडोनेशिया में हिंदू धर्म का प्रसार किसी सैन्य आक्रमण या बलप्रयोग के कारण नहीं, बल्कि ईसा की पहली शताब्दी में भारत के दक्षिणी छोर (वर्तमान तमिलनाडु) से समुद्री जहाजों द्वारा पहुंचे व्यापारियों के माध्यम से हुआ था। इन व्यापारियों के साथ गई हिंदू संस्कृति, कला, संस्कृत भाषा और पूजा पद्धतियों ने स्थानीय राजाओं को काफी प्रभावित किया, जिसके बाद उन्होंने भारत से विद्वान ब्राह्मणों को अपने राज्य में आमंत्रित किया। बाद में 10वीं शताब्दी के दौरान पास के मेरापी ज्वालामुखी में हुए भीषण विस्फोट और भूकंप के कारण इस क्षेत्र की आबादी को पूर्व की ओर पलायन करना पड़ा, जिससे यह संस्कृति मुख्य रूप से बाली द्वीप तक ही सीमित रह गई। अब इस नए दौर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञ इस प्राचीन धरोहर को पुनर्जीवित करने के लिए इंडोनेशियाई प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस जीर्णोद्धार कार्य में ‘अनास्टाइलोसिस’ तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिसके तहत परिसर में बिखरे मूल पत्थरों को ही आपस में जोड़कर मंदिर को उसकी पुरानी शक्ल दी जाएगी। इस जटिल कार्य को सुगम बनाने के लिए आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा, जो पत्थरों के सटीक मिलान में मदद करेगी। शुरुआत में इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक या दो छोटे मंदिरों पर काम शुरू किया जाएगा। वैश्विक पटल पर यह अनूठी पहल दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश और सबसे बड़ी हिंदू आबादी वाले देश के बीच आपसी सौहार्द का एक बेजोड़ उदाहरण पेश कर रही है।
14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या का महायोग स्नान दान और इन उपायों से मिलेगी सुख समृद्धि की सौगात

नई दिल्ली । 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ रही है। मंगलवार के साथ अमावस्या का संयोग बनने के कारण इसे भौमवती अमावस्या कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि स्नान दान पितरों के तर्पण और भगवान हनुमान की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा जीवन में सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार आषाढ़ अमावस्या की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी सरोवर या घर पर गंगाजल मिले जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर पितरों का स्मरण किया जाता है। जिन लोगों के लिए संभव हो वे तिल और जल से पितरों का तर्पण भी कर सकते हैं। मान्यता है कि इससे पितृ दोष के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। चूंकि इस बार अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है इसलिए भगवान हनुमान की पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन हनुमान मंदिर में जाकर सिंदूर चमेली का तेल लाल फूल और गुड़ चने का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से मानसिक शांति साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है। आषाढ़ अमावस्या पर दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र तिल गुड़ फल या दक्षिणा का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। गाय को हरा चारा खिलाना और पक्षियों को दाना पानी देना भी शुभ माना जाता है। इन कार्यों को सेवा और करुणा की भावना से करने की परंपरा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन एक सरल उपाय भी किया जाता है। शाम के समय दो या तीन लौंग के साथ कपूर जलाकर पूरे घर में उसका धुआं किया जाता है। मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक वातावरण बनता है। हालांकि इसे धार्मिक आस्था का हिस्सा माना जाता है और इसके आध्यात्मिक महत्व को ही प्रमुखता दी जाती है। आषाढ़ अमावस्या के दिन क्रोध झूठ और अनावश्यक विवाद से बचने की सलाह दी जाती है। सात्विक भोजन करना ईश्वर का स्मरण करना और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना इस दिन के शुभ कार्यों में शामिल माना गया है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत रखकर दिनभर पूजा पाठ और दान पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भौमवती अमावस्या आत्मचिंतन सेवा और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए स्नान दान तर्पण और हनुमान जी की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने तथा सुख समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है। हालांकि इन मान्यताओं को आस्था और परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।