एनसीआर मास्टर प्लान 2041 को मिली नई रफ्तार, हाथरस में विकसित होगा आधुनिक अर्बन सेंटर, उद्योग, आवास और रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

नई दिल्ली । दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ती आबादी और तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश में एक नई आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान 2041 के तहत हाथरस के आसपास एक हाईटेक अर्बन सेंटर बसाया जाएगा, जिसे भविष्य के सैटेलाइट शहर के रूप में विकसित करने की योजना है। इस परियोजना का उद्देश्य एनसीआर के बड़े शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करना और आसपास के जिलों में संतुलित विकास को बढ़ावा देना है। यह नई टाउनशिप आगरा और अलीगढ़ के बीच रणनीतिक स्थान पर विकसित होगी, जिससे दोनों शहरों के साथ-साथ नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली तक बेहतर संपर्क स्थापित होगा। प्रस्तावित अर्बन सेंटर के लिए हजारों एकड़ भूमि चिन्हित की गई है और इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में बड़े क्षेत्रफल में आधुनिक आवासीय और औद्योगिक ढांचा तैयार करने की योजना बनाई गई है। परियोजना के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसमें क्षेत्र की भविष्य की आबादी, औद्योगिक आवश्यकताओं, परिवहन व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं का व्यापक अध्ययन शामिल होगा। आधुनिक जीआईएस आधारित योजना के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शहर का विस्तार व्यवस्थित, टिकाऊ और दीर्घकालिक जरूरतों के अनुरूप हो। प्रस्तावित शहर को चार प्रमुख हिस्सों में विकसित करने की योजना है। इसमें औद्योगिक क्षेत्र, आवासीय क्षेत्र, वाणिज्यिक केंद्र और हरित क्षेत्र शामिल होंगे। औद्योगिक जोन में विनिर्माण इकाइयों और नए निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि आवासीय क्षेत्र में आधुनिक कॉलोनियां, किफायती आवास, विद्यालय, अस्पताल और सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वाणिज्यिक क्षेत्र में व्यापारिक प्रतिष्ठान, होटल, कार्यालय और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं स्थापित होंगी। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त क्षेत्र हरित पट्टी और पार्कों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उत्कृष्ट कनेक्टिविटी होगी। यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से यह क्षेत्र नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली से सीधे जुड़ सकेगा। साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक तेज पहुंच उपलब्ध होने से उद्योगों, व्यापार और निर्यात गतिविधियों को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। भविष्य में प्रस्तावित अन्य परिवहन परियोजनाओं का लाभ भी इस क्षेत्र को मिल सकता है। रेल संपर्क के लिहाज से भी हाथरस महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रमुख रेल मार्गों से जुड़े होने के कारण यहां माल परिवहन और यात्री आवागमन दोनों को सुविधा मिलेगी। समर्पित माल गलियारों के नेटवर्क का लाभ मिलने से औद्योगिक इकाइयों के लिए देश के विभिन्न हिस्सों और बंदरगाहों तक सामान पहुंचाना अधिक आसान और तेज हो सकेगा। इससे क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हाथरस पहले से ही हींग, कांच के मोती, कपड़ा, गुलाल और अन्य पारंपरिक उद्योगों के लिए जाना जाता है। नई परियोजना के तहत इन स्थानीय उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग, अनुसंधान और निर्यात सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। साथ ही डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, रेडीमेड परिधान, मशीन टूल्स, इलेक्ट्रिकल उपकरण और मेडिकल उपकरण जैसे क्षेत्रों में नए निवेश आकर्षित करने की भी तैयारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अर्बन सेंटर केवल एक नई टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक, आवासीय और आर्थिक विकास का नया केंद्र बन सकता है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और एनसीआर के आसपास संतुलित शहरी विकास को गति मिलने की संभावना है।
बारिश से बेहाल मध्यप्रदेश अंडरब्रिज डूबे नदियां उफान पर कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में मानसून अब पूरे शबाब पर है और लगातार हो रही बारिश ने प्रदेश के कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बीते चौबीस घंटे के दौरान 40 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। धार में सबसे अधिक करीब 2.4 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई जबकि राजगढ़ रतलाम शिवपुरी टीकमगढ़ खरगोन भोपाल और उज्जैन सहित कई जिलों में झमाझम बारिश हुई। लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर नदी नाले उफान पर आ गए हैं और लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। शाजापुर जिले में हालात ऐसे बन गए कि शिक्षकों को जान जोखिम में डालकर उफनता नाला पार कर स्कूल पहुंचना पड़ा। वहीं रतलाम में सागोद रोड से ईश्वर नगर जाने वाले अंडरब्रिज में पानी भर जाने से आवागमन प्रभावित हो गया। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और लोगों को लंबा रास्ता तय कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। प्रदेश के कई हिस्सों में बुधवार सुबह से रिमझिम और तेज बारिश का दौर जारी है। कहीं पिछले 16 घंटे से लगातार मध्यम और तेज बारिश हो रही है तो कहीं सुबह से आसमान में बादल छाए रहने के साथ लगातार फुहारें पड़ रही हैं। इस बारिश से जहां उमस और गर्मी से राहत मिली है वहीं निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में नदी नालों के उफान ने लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। भोपाल के जलस्रोतों पर भी बारिश का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। कुलांस नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे राजधानी के बड़े तालाब में पानी की आवक तेज हो गई है। दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में लगातार बारिश के कारण कई छोटे बड़े नाले उफान पर हैं। कई गांवों का संपर्क अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ है और प्रशासन लोगों से अनावश्यक रूप से नदी नाले पार नहीं करने की अपील कर रहा है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए प्रदेश में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार कई स्थानों पर चौबीस घंटे के दौरान चार से आठ इंच तक बारिश हो सकती है। श्योपुर शिवपुरी गुना अशोकनगर सागर और टीकमगढ़ जिलों के लिए अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है जहां लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। इसके अलावा ग्वालियर मुरैना भिंड दतिया निवाड़ी छतरपुर दमोह कटनी जबलपुर नरसिंहपुर रायसेन नर्मदापुरम विदिशा सीहोर राजगढ़ आगर मालवा उज्जैन इंदौर धार झाबुआ नीमच और मंदसौर में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल देवास हरदा बैतूल खरगोन बड़वानी खंडवा बुरहानपुर छिंदवाड़ा सिवनी मंडला बालाघाट पन्ना सतना रीवा सीधी शहडोल और सिंगरौली सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।इसके अलावा ग्वालियर मुरैना भिंड दतिया निवाड़ी छतरपुर दमोह कटनी जबलपुर नरसिंहपुर रायसेन नर्मदापुरम विदिशा सीहोर राजगढ़ आगर मालवा उज्जैन इंदौर धार झाबुआ नीमच और मंदसौर में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल देवास हरदा बैतूल खरगोन बड़वानी खंडवा बुरहानपुर छिंदवाड़ा सिवनी मंडला बालाघाट पन्ना सतना रीवा सीधी शहडोल और सिंगरौली सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान नदी नालों से दूर रहें जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें। लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए आने वाले दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर और तेज होने की संभावना बनी हुई है।
बारुईपुर रेप-मर्डर केस में बड़ा घटनाक्रम, मुख्य आरोपी पुलिस एनकाउंटर में ढेर; पीड़िता को न्याय दिलाने की कार्रवाई तेज

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 12 वर्षीय बच्ची से कथित रेप और हत्या के मामले में मंगलवार देर रात बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब इस मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल प्रवास मंडल पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। पुलिस के अनुसार आरोपी को घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि और क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उसने कथित रूप से पुलिसकर्मियों से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह मामला उस समय सामने आया था जब बारुईपुर क्षेत्र से लापता हुई 12 वर्षीय बच्ची का शव एक तालाब से बोरी में बंद बरामद हुआ। प्रारंभिक जानकारी के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया और स्थानीय लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी तथा कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। घटना के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए विशेष टीम का गठन किया और विभिन्न तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल टावर लोकेशन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपियों की पहचान की। इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। शुरुआती स्तर पर दर्ज मामले में बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यौन अपराध से संबंधित गंभीर धाराएं भी जोड़ी गईं। इसके बाद जांच को और व्यापक रूप दिया गया ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों का स्पष्ट रूप से पता लगाया जा सके। घटना ने पूरे क्षेत्र में गहरी चिंता और नाराजगी पैदा कर दी है। स्थानीय नागरिकों ने दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की मांग उठाई। प्रशासन ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की नियमित निगरानी शुरू की है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को कानून से बचने नहीं दिया जाएगा। इस बीच राजनीतिक स्तर पर भी मामले को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद कई नेताओं ने घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले ऐसे अपराधों के मामलों में त्वरित जांच और सख्त सजा ही समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत कर सकती है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग लगातार उठ रही है। राज्य सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में अभियोजन पक्ष को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत आरोपियों के खिलाफ कठोरतम दंड सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार जांच अभी जारी है और सभी आवश्यक वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों को एकत्र कर न्यायालय में मजबूत केस प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा संवेदनशील मामलों में त्वरित न्याय की आवश्यकता पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगातार हादसों से बढ़ी चिंता, दौसा में दो साल में 61 मौतों के बाद खुद निरीक्षण करेंगे नितिन गडकरी

नई दिल्ली । दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के राजस्थान स्थित दौसा खंड पर लगातार बढ़ते सड़क हादसों ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के वर्षों में इस हिस्से पर दुर्घटनाओं और मौतों की बढ़ती संख्या के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी स्वयं मौके का निरीक्षण करने जा रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य एक्सप्रेसवे पर मौजूद संभावित तकनीकी और यातायात संबंधी कमियों का आकलन करना तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए आवश्यक सुधारों की दिशा तय करना है। दौसा जिले की सीमा में आने वाले एक्सप्रेसवे पर वर्ष 2025 में 33 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें 35 लोगों की जान गई। वहीं वर्ष 2026 में जून तक 24 हादसों में 26 लोगों की मौत हो चुकी है। इस तरह दो वर्षों से भी कम समय में इस मार्ग पर 61 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार सामने आ रहे इन आंकड़ों ने सड़क सुरक्षा और एक्सप्रेसवे के संचालन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में इसी मार्ग पर हुई एक भीषण बस दुर्घटना ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले कि मार्ग पर दिशा-सूचक संकेत स्पष्ट नहीं होने के कारण आगे चल रहे वाहन के चालक को सही निकास बिंदु समझने में परेशानी हुई। इसके बाद वाहन की गति अचानक कम होने से पीछे आ रही तेज रफ्तार बस उससे टकरा गई। इस दुर्घटना में कई लोगों की जान चली गई, जबकि अनेक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए। प्रारंभिक स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में लगे दिशा-सूचक बोर्ड तेज गति से चल रहे वाहनों के चालकों के लिए पर्याप्त स्पष्ट नहीं हैं। कई स्थानों पर टर्न से पहले लगाए गए संकेत छोटे दिखाई देते हैं, जिससे चालक समय रहते सही लेन नहीं चुन पाते। कुछ मामलों में वाहन आगे निकलने के बाद अचानक गति कम कर देते हैं या वापस मुड़ने की कोशिश करते हैं, जिससे पीछे आ रहे वाहनों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक एक्सप्रेसवे पर केवल चौड़ी सड़क बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले साइनेज, पर्याप्त दूरी पर चेतावनी संकेत, स्पष्ट लेन मार्गदर्शन और सुरक्षित निकास व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि संकेत समय पर और स्पष्ट दिखाई दें तो चालक पहले ही आवश्यक निर्णय ले सकते हैं और दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। केंद्रीय मंत्री के निरीक्षण के दौरान सड़क की डिजाइन, साइनेज, लेन प्रबंधन, निकास बिंदुओं और अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा किए जाने की संभावना है। इसके आधार पर आवश्यक सुधार कार्यों की रूपरेखा तैयार की जा सकती है ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं की संख्या कम हो और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है और इस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन आवाजाही करते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाना समय की आवश्यकता माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर इंजीनियरिंग, स्पष्ट संकेतक, नियमित सुरक्षा ऑडिट और यातायात नियमों का सख्ती से पालन ही इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है। गडकरी के इस निरीक्षण से एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
RGPV में बड़ा फेरबदल परीक्षा संचालन की कमान फिर प्रो. संजीव शर्मा को विभागीय जांच की तैयारी शुरू

भोपाल । राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। प्रो. अर्चना तिवारी से परीक्षा नियंत्रक सहित सभी अतिरिक्त जिम्मेदारियां वापस ले ली गई हैं जबकि प्रो. संजीव शर्मा को फिर से परीक्षा नियंत्रक बनाया गया है। विश्वविद्यालय ने विभागीय जांच की तैयारी के भी निर्देश दिए हैं। भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए परीक्षा व्यवस्था और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जून जुलाई 2026 की परीक्षाओं के सुचारु संचालन को ध्यान में रखते हुए परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी प्रो. अर्चना तिवारी से वापस लेकर प्रो. संजीव शर्मा को सौंप दी है। आदेश जारी होते ही यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रो. अर्चना तिवारी को परीक्षा नियंत्रक के पद से मुक्त करने के साथ ही परीक्षा संबंधी सभी कार्यों से तत्काल प्रभाव से अलग कर दिया गया है। इतना ही नहीं उनके कार्यालय में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को भी परीक्षा से जुड़े कार्यों से अलग करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि परीक्षा संचालन पूरी तरह नई व्यवस्था के तहत किया जा सके। प्रशासनिक फेरबदल केवल परीक्षा नियंत्रक के पद तक सीमित नहीं रहा। विश्वविद्यालय ने प्रो. अर्चना तिवारी को स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के प्रभारी निदेशक पद से भी हटा दिया है। उनकी जगह डॉ. जितेन्द्र अग्रवाल को अगले आदेश तक प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया है। इसके अलावा प्रो. तिवारी से डायरेक्टर आईक्यूएसी सहित सभी अतिरिक्त प्रशासनिक दायित्व भी वापस ले लिए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जून जुलाई परीक्षा सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा से बचने और परीक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से प्रो. संजीव शर्मा को दोबारा परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा और परीक्षा संचालन की पूरी जिम्मेदारी अब उनके पास होगी। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विभागीय जांच की तैयारी है। आदेश की प्रतिलिपि में उपकुलसचिव स्थापना को निर्देश दिए गए हैं कि प्रो. अर्चना तिवारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने जांच अधिकारी नियुक्त करने और आरोप पत्र जारी करने के लिए अलग से प्रस्ताव तैयार किया जाए। इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल जिम्मेदारियों में बदलाव तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि मामले की विस्तृत जांच भी कराना चाहता है। जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय जांच समिति की अंतरिम रिपोर्ट मिलने के बाद की गई है। समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में माना है कि परीक्षा प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने परीक्षा संचालन में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करने में अपेक्षित स्तर की सावधानी नहीं बरती गई। इसी आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल प्रशासनिक बदलाव का निर्णय लिया। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश कुलपति की स्वीकृति से जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है। हालांकि आदेश में प्रस्तावित विभागीय जांच के विस्तृत कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है लेकिन प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब सभी की नजर विभागीय जांच की आगामी प्रक्रिया और उसकी अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
भोपाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल 14.69 लाख के टैक्स घोटाले में आरोपी जेल पहुंचे लेकिन नौकरी बरकरार

भोपाल । भोपाल नगर निगम में प्रॉपर्टी टैक्स और जलकर वसूली से जुड़ा 14 लाख 69 हजार 798 रुपए का बड़ा घोटाला सामने आने के बाद निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को मार्च महीने में ही मिल गई थी लेकिन इसके बावजूद लगभग चार महीने तक कार्रवाई नहीं की गई और मामला फाइलों में दबा रहा। आखिरकार 5 जुलाई को एफआईआर दर्ज हुई जिसके बाद दोनों आरोपी कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। हालांकि अब तक नगर निगम ने उनकी सेवाएं समाप्त नहीं की हैं। जांच के अनुसार यह पूरा फर्जीवाड़ा नेशनल लोक अदालत के दौरान अंजाम दिया गया। 14 मार्च 2026 को वार्ड 33 के वार्ड प्रभारी रघुवीर तिवारी की यूजर आईडी का दुरुपयोग कर 106 फर्जी प्रॉपर्टी टैक्स और जलकर रसीदें जारी की गईं। इन रसीदों में करीब 14.69 लाख रुपए टैक्स जमा होना दर्शाया गया जबकि बैंक खातों के मिलान में बड़ी गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई तो घोटाले की परतें खुलती चली गईं। जांच में सामने आया कि वार्ड 24 में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर शिराज उलहक और योजना शाखा में कार्यरत मोहम्मद समीर खान ने मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। आरोप है कि दोनों संपत्ति मालिकों को आधे टैक्स में भुगतान कराने का लालच देते थे। इसके लिए उन्होंने वार्ड 24 की एक ऑपरेटर के माध्यम से वार्ड 33 के प्रभारी की यूजर आईडी और पासवर्ड हासिल किए और उसी का उपयोग कर फर्जी रसीदें जारी कर दीं। लोगों से वसूली गई रकम सरकारी खाते में जमा करने के बजाय खुद हड़प ली गई। इस घोटाले ने नगर निगम के ऑनलाइन टैक्स सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वार्ड की यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग दूसरे वार्ड में कर इतनी बड़ी संख्या में फर्जी रसीदें जारी होना तकनीकी व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करता है। अब पूरे सिस्टम के तकनीकी ऑडिट और अन्य वार्डों के रिकॉर्ड की भी जांच की मांग उठने लगी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसी तरह की अनियमितताएं अन्य स्थानों पर भी तो नहीं हुई हैं। इस मामले का सबसे बड़ा नुकसान उन नागरिकों को हुआ जिन्होंने आरोपियों को टैक्स की राशि देकर वैध समझकर रसीदें प्राप्त कर ली थीं। बाद में उनके खातों में वही टैक्स दोबारा बकाया दिखाया गया। यानी जिन्होंने भुगतान किया वही दोबारा निगम के रिकॉर्ड में बकायादार बन गए। इससे आम लोगों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि दोनों आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं लेकिन अब तक नगर निगम ने उनसे गबन की गई राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू नहीं की है और न ही उनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं। अपर आयुक्त अंजू अरुण कुमार ने कहा है कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि नगर निगम दोषियों के खिलाफ कितनी तेजी और सख्ती से आगे की कार्रवाई करता है।
अपराधियों पर पुलिस की कड़ी नजर पुराने भोपाल में रातभर चला चेकिंग अभियान कई वाहनों की जांच

भोपाल । भोपाल के पुराने शहर में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा अपराधियों पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से मंगलवार देर रात पुलिस ने व्यापक चेकिंग और सर्च अभियान चलाया। अभियान के दौरान शहर के कई थाना क्षेत्रों में प्रमुख चौराहों बाजारों और संवेदनशील इलाकों में बैरिकेड्स लगाकर आने जाने वाले वाहनों की गहन जांच की गई। पुलिस की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना अपराधियों में कानून का भय बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। रातभर चले इस अभियान के दौरान पुलिस ने बिना किसी ठोस कारण देर रात सड़कों पर घूम रहे लोगों से पूछताछ की। उनकी पहचान की पुष्टि की गई और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े लोगों पर विशेष नजर रखी गई। जरूरत पड़ने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की गई ताकि किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि को समय रहते रोका जा सके। अभियान के दौरान दोपहिया और चारपहिया वाहनों की भी सघन जांच की गई। वाहन चालकों से ड्राइविंग लाइसेंस वाहन पंजीयन प्रमाण पत्र बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई। जिन लोगों ने यातायात नियमों का उल्लंघन किया उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई। पुलिस ने बिना हेलमेट वाहन चलाने ओवरलोडिंग और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी सख्ती दिखाई। सिर्फ वाहन जांच तक ही अभियान सीमित नहीं रहा बल्कि पुलिस टीमों ने पुराने भोपाल के संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त भी की। बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मौजूद लोगों से बातचीत कर उन्हें सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी दी गई। पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके। डीसीपी आयुष गुप्ता ने बताया कि शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों में कानून का डर कायम रखने के लिए इस तरह के विशेष अभियान आगे भी लगातार चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों पर कार्रवाई करना ही नहीं बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत करना भी है। इसके साथ ही यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए भी नियमित रूप से विशेष अभियान जारी रहेंगे। भोपाल पुलिस का मानना है कि लगातार निगरानी सघन चेकिंग और आम जनता के सहयोग से अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। इसी रणनीति के तहत भविष्य में भी शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे अभियान चलाए जाते रहेंगे ताकि राजधानी में कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे और नागरिक सुरक्षित वातावरण में रह सकें।
मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड को लेकर बढ़ा विवाद गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में तेज हुआ आंदोलन

नई दिल्ली । मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर प्रदेश में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस फैसले का विरोध करते हुए अब सीधे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन के मुख्य संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने से मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। इसी को लेकर दोनों संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को पत्र भेजकर मौजूदा आदेश को वापस लेने और बोर्ड का नए सिरे से पुनर्गठन करने की मांग की गई है। शमशुल हसन ने कहा कि संगठन को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनव्वर पटेल या अन्य मुस्लिम सदस्यों के कामकाज पर कोई आपत्ति नहीं है। उनका विरोध केवल उन दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर है जिन्हें बोर्ड में शामिल किया गया है। उनका कहना है कि वक्फ इस्लाम से जुड़ी धार्मिक और सामाजिक संस्था है इसलिए इसके संचालन और प्रबंधन में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों की ही भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में यह भी आग्रह किया गया है कि वर्तमान वक्फ बोर्ड को भंग कर समाज की भावनाओं के अनुरूप नए बोर्ड का गठन किया जाए। उनका विश्वास है कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोग इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए उचित निर्णय लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में भी जनभावनाओं को देखते हुए कई महत्वपूर्ण फैसलों पर पुनर्विचार किया गया है इसलिए इस मामले में भी सरकार सकारात्मक कदम उठा सकती है। इस मुद्दे पर शमशुल हसन ने उन उलेमाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए जिन्होंने नए वक्फ बोर्ड और उसके अध्यक्ष का स्वागत किया है। उनका कहना है कि धार्मिक नेतृत्व को समाज की भावनाओं के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुरान और हदीस की शिक्षाओं से परिचित होने के बावजूद यदि कोई ऐसे फैसलों का समर्थन करता है तो इससे समाज में नाराजगी बढ़ती है। उन्होंने धार्मिक नेतृत्व से अपने रुख पर पुनर्विचार करने की अपील भी की। शमशुल हसन ने कहा कि इतिहास में मुस्लिम उलेमाओं ने समाज और धार्मिक संस्थाओं की रक्षा के लिए कई संघर्ष किए हैं। आज भी धार्मिक नेतृत्व की जिम्मेदारी केवल बयान देने तक सीमित नहीं है बल्कि समुदाय के अधिकारों और धार्मिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की भी है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस मुद्दे पर चुप हैं या समर्थन कर रहे हैं उन्हें इतिहास से सीख लेते हुए समाज के हित में आवाज उठानी चाहिए। संगठन का दावा है कि केवल मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में मुस्लिम समाज इस फैसले से असंतुष्ट है। उनका कहना है कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि एक ऐसे निर्णय के विरोध में है जिसे समुदाय अपनी धार्मिक व्यवस्था में हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेगा। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए पहली बार दो गैर मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल किया है। इसी फैसले के बाद विभिन्न मुस्लिम संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन देने का सिलसिला लगातार जारी है।
महंगी क्रीम नहीं सही कारण पहचानिए तभी दूर होगा अंडरआर्म्स का जिद्दी कालापन

नई दिल्ली । अंडरआर्म्स का काला पड़ना आज के समय में महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए एक आम समस्या बन गया है। कई लोग इसे केवल साफ सफाई की कमी मान लेते हैं जबकि वास्तविकता इससे कहीं अलग है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार अंडरआर्म्स की त्वचा शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक पतली और संवेदनशील होती है। यही कारण है कि इस हिस्से पर होने वाली हल्की जलन लगातार घर्षण या गलत स्किन केयर का असर जल्दी दिखाई देता है। यदि समय रहते सही कारण की पहचान कर ली जाए तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अंडरआर्म्स के काले होने की सबसे आम वजह बार बार शेविंग करना मानी जाती है। रेजर से बाल हटाने पर बाल केवल ऊपर से कटते हैं जबकि उनकी जड़ त्वचा के भीतर बनी रहती है। इससे त्वचा गहरी दिखाई देने लगती है। लगातार शेविंग करने से त्वचा में सूक्ष्म जलन और रगड़ भी होती है जो समय के साथ पिग्मेंटेशन बढ़ा सकती है। ऐसे में यदि संभव हो तो त्वचा के अनुसार सुरक्षित हेयर रिमूवल तरीका अपनाना बेहतर माना जाता है। बहुत अधिक टाइट कपड़े पहनना भी अंडरआर्म्स के कालेपन की बड़ी वजह बन सकता है। लगातार घर्षण के कारण शरीर उस हिस्से में अधिक मेलानिन बनाना शुरू कर देता है जिससे त्वचा का रंग धीरे धीरे गहरा होने लगता है। अधिक वजन वाले लोगों में यह समस्या और अधिक देखने को मिलती है। इसलिए हल्के और सूती कपड़े पहनना त्वचा के लिए बेहतर माना जाता है। आजकल अधिकांश लोग रोजाना डिओडरेंट या एंटीपर्सपिरेंट का उपयोग करते हैं। कई उत्पादों में मौजूद अल्कोहल खुशबू वाले रसायन और अन्य केमिकल संवेदनशील त्वचा में एलर्जी या जलन पैदा कर सकते हैं। यदि लंबे समय तक ऐसा होता रहे तो त्वचा पर दाग और कालापन बढ़ सकता है। इसलिए हमेशा अपनी त्वचा के अनुसार उत्पाद चुनें और किसी भी तरह की जलन महसूस होने पर उसका उपयोग बंद कर दें। डेड स्किन यानी मृत त्वचा कोशिकाओं का जमा होना भी अंडरआर्म्स को काला दिखा सकता है। जिस तरह चेहरे की नियमित सफाई जरूरी होती है उसी तरह इस हिस्से की भी हल्के तरीके से सफाई और एक्सफोलिएशन करना जरूरी है। हालांकि बहुत ज्यादा स्क्रब करने से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है इसलिए संतुलित देखभाल ही सबसे बेहतर उपाय है। कुछ मामलों में अंडरआर्म्स का कालापन केवल बाहरी कारणों से नहीं बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलावों से भी जुड़ा हो सकता है। हार्मोनल असंतुलन इंसुलिन रेजिस्टेंस या एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स जैसी त्वचा संबंधी स्थिति में अंडरआर्म्स और गर्दन की त्वचा मोटी और गहरे रंग की हो सकती है। यदि कालापन अचानक बढ़ जाए या इसके साथ खुजली मोटापन या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। स्वस्थ और साफ अंडरआर्म्स के लिए रोजाना सफाई करें त्वचा को बेवजह रगड़ने से बचें शेविंग के बाद मॉइस्चराइजर लगाएं और अपनी त्वचा के अनुरूप स्किन केयर उत्पादों का ही इस्तेमाल करें। सही आदतें अपनाकर और समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।
दिलजीत दोसांझ की प्रतिबंधित फिल्म 'सतलुज' के लेखक ने तोड़ी चुप्पी; सीबीएफसी और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली । अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों देश के सिनेमा जगत और दर्शकों के बीच गंभीर चर्चा का विषय बनी हुई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘ज़ी5’ पर रिलीज होने के महज दो दिनों के भीतर ही इस फिल्म को अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिसके बाद से इसके कंटेंट और प्रतिबंध को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हनी त्रेहन के निर्देशन में बनी इस फिल्म का नाम पहले ‘पंजाब 95’ रखा गया था, जिसे सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के बाद बदलकर ‘सतलुज’ किया गया था। अब इस फिल्म के सह-लेखक निरेन भट्ट ने फिल्म को बिना किसी स्पष्ट कारण के हटाए जाने पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फिल्म के सह-लेखक निरेन भट्ट ने हाल ही में एक मीडिया साक्षात्कार में फिल्म को हटाए जाने की प्रक्रिया और सिस्टम की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सिस्टम में बैठे कुछ लोगों को इस फिल्म की कहानी से बहुत बड़ी दिक्कत है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस पूरे मामले पर संबंधित विभागों की ओर से बातचीत का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। उन्होंने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सीबीएफसी की तरफ से साधी गई लंबी चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि बोर्ड कभी यह स्पष्ट नहीं करता कि उन्हें फिल्म के किस हिस्से से आपत्ति है या ये फैसले आखिर किस स्तर पर लिए जा रहे हैं। प्रशासनिक हलकों और रिपोर्ट्स में यह अंदेशा जताया गया था कि इस संवेदनशील फिल्म को भारत विरोधी तत्वों द्वारा एक एजेंडे या प्रोपेगैंडा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए निरेन भट्ट ने देश में हाल ही में रिलीज हुई अन्य राजनीतिक और संवेदनशील फिल्मों का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश में ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरला स्टोरी’ जैसी फिल्में बिना किसी रुकावट के रिलीज हो सकती हैं, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय ताकतों का हथियार क्यों नहीं माना गया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि सिर्फ एक बायोग्राफी को दबाने के लिए काल्पनिक आशंकाओं के आधार पर फैसला लेना बिल्कुल अतार्किक है। उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘सतलुज’ की कहानी पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के वास्तविक जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित है। जसवंत सिंह खालड़ा पेशे से एक बैंक कर्मचारी थे, जिन्होंने साल 1984 से 1994 के बीच पंजाब के अशांत दौर में मारे गए और लापता घोषित किए गए लगभग 25 हजार लोगों के लावारिस अंतिम संस्कार के मामलों की स्वतंत्र जांच शुरू की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन लोगों को फर्जी पुलिस मुठभेड़ों में मारा गया था। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में मानवाधिकारों को लेकर काम करने वाले संगठनों के बीच यह मामला हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है क्योंकि इस मामले की जांच के दौरान ही खालड़ा रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे और बाद में उनका शव सतलुज नदी से बरामद हुआ था।