करो या मरो मुकाबले में भारत की नजर ब्रिस्टल पर, इसी मैदान पर रोहित के शतक से इंग्लैंड को मिली थी करारी शिकस्त

नई दिल्ली ।भारत और इंग्लैंड के बीच जारी पांच मैचों की टी20 सीरीज अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गई है। शुरुआती तीन मुकाबलों में दो हार झेलने के बाद भारतीय टीम सीरीज में 0-2 से पिछड़ चुकी है और अब ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में होने वाला चौथा मुकाबला उसके लिए करो या मरो की स्थिति बन गया है। यदि भारत यह मैच हारता है तो इंग्लैंड सीरीज अपने नाम कर लेगा, जबकि जीत मिलने पर भारतीय टीम वापसी की उम्मीदें जिंदा रख सकेगी। ब्रिस्टल का मैदान भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए खास महत्व रखता है। टीम इंडिया ने यहां अब तक केवल एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला है, लेकिन उस मैच की याद आज भी भारतीय फैंस के दिलों में ताजा है। वर्ष 2018 में इसी मैदान पर भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की थी और उस मुकाबले के नायक रहे थे रोहित शर्मा। उन्होंने महज 56 गेंदों में नाबाद 100 रन की विस्फोटक पारी खेलकर इंग्लैंड के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की थी। विराट कोहली ने भी 43 रनों की अहम पारी खेली थी, जिसकी बदौलत भारत ने 199 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य केवल 18.4 ओवर में तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया था। उस मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में नौ विकेट के नुकसान पर 198 रन बनाए थे, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने लक्ष्य का पीछा जिस अंदाज में किया, उसने मेजबान टीम को पूरी तरह बेबस कर दिया। यही वजह है कि ब्रिस्टल का मैदान भारतीय टीम के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। हालांकि मौजूदा सीरीज में परिस्थितियां भारत के पक्ष में नहीं हैं। तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई थी। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 201 रन बनाए। फिल साल्ट ने 70 रन की शानदार पारी खेली, जबकि जोस बटलर और सैम करन ने भी तेज बल्लेबाजी कर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। 202 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाज पूरी तरह संघर्ष करते नजर आए। पूरी टीम केवल 76 रन पर सिमट गई और सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। यह हार भारतीय टीम की टी20 इतिहास की सबसे निराशाजनक हारों में गिनी जा रही है। अब बल्लेबाजों के सामने खुद को साबित करने और सीरीज में वापसी करने की बड़ी चुनौती है। दूसरी ओर इंग्लैंड का ब्रिस्टल में रिकॉर्ड भी बहुत प्रभावशाली नहीं रहा है। मेजबान टीम ने इस मैदान पर अब तक पांच टी20 मुकाबले खेले हैं, जिनमें केवल दो में जीत मिली जबकि तीन मैचों में हार का सामना करना पड़ा। हालांकि वर्ष 2025 में इंग्लैंड ने इसी मैदान पर वेस्टइंडीज को हराकर जीत दर्ज की थी, जिससे टीम का आत्मविश्वास भी ऊंचा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारतीय टीम 2018 की सुनहरी यादों को दोहराते हुए ब्रिस्टल में एक बार फिर जीत हासिल कर पाएगी या इंग्लैंड इसी मैदान पर सीरीज अपने नाम करने में सफल रहेगा। क्रिकेट प्रेमियों को एक हाई-वोल्टेज मुकाबले की उम्मीद है जिसमें दोनों टीमें पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेंगी।
अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, सीजफायर टूटने के बाद बढ़ी सैन्य कार्रवाई, पाकिस्तान ने संयम और बातचीत की अपील की

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम युद्धविराम प्रभावी नहीं रह गया है। इससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। ताजा घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान तलाशने की अपील की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच लागू अंतरिम युद्धविराम अब प्रभावी नहीं है। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर व्यापक असर पड़ सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और संवाद की संभावना अभी भी बनी हुई है। संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने, किसी भी प्रकार की उकसाने वाली कार्रवाई से बचने और विवाद का समाधान बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से निकालने का आग्रह किया है। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है और यदि आवश्यकता हुई तो वह मध्यस्थता के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है। क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य टकराव लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है और किसी भी बड़े संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार पर पड़ सकता है। यही कारण है कि वैश्विक निवेशक और विभिन्न देश इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। तनाव बढ़ने के साथ ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता देखने को मिली है। निवेशकों के बीच यह आशंका बनी हुई है कि यदि संघर्ष और व्यापक हुआ तो समुद्री व्यापार मार्गों तथा ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ईरान की ओर से भी हालिया घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया गया है। वहां के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समझौता नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका ने भी अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात दोहराई है। दोनों पक्षों के सख्त बयानों ने तनाव कम होने की उम्मीदों को फिलहाल कमजोर किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश और संगठन लगातार संयम बरतने तथा संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र को व्यापक अस्थिरता की ओर ले जा सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों की सफलता और दोनों देशों की अगली रणनीति पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।
मेक्सिको फुटबॉल में नए दौर की शुरुआत, पूर्व कप्तान राफेल मार्केज बने हेड कोच, 2030 तक तैयार करेंगे मजबूत टीम

नई दिल्ली । जिम्बाब्वे के खिलाफ जारी तीन मैचों की वनडे सीरीज के बीच बांग्लादेश क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है। टीम के अनुभवी बल्लेबाज लिटन दास हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह फिट नहीं हो सके हैं और इसी वजह से उन्हें पूरी वनडे सीरीज से बाहर होना पड़ा है। बांग्लादेश क्रिकेट टीम प्रबंधन ने उनकी जगह बाएं हाथ के बल्लेबाज परवेज हुसैन को टीम में शामिल किया है। लिटन अब आगे के उपचार और रिहैबिलिटेशन के लिए ढाका लौटेंगे। लिटन दास पहले वनडे मुकाबले में भी चोट के कारण नहीं खेल पाए थे। इसके बाद टीम के मेडिकल स्टाफ ने उनकी फिटनेस पर लगातार नजर रखी। दूसरे मुकाबले से पहले उनका फिटनेस टेस्ट कराया गया लेकिन परिणाम संतोषजनक नहीं रहा। मेडिकल टीम का मानना है कि लगातार कम अंतराल में होने वाले मुकाबलों को देखते हुए उनका पूरी तरह फिट होकर मैदान में लौटना संभव नहीं है। ऐसे में खिलाड़ी की लंबी अवधि की फिटनेस को प्राथमिकता देते हुए उन्हें पूरी सीरीज से बाहर रखने का फैसला लिया गया। बांग्लादेश टीम के फिजियो बैजेदुल इस्लाम खान ने बताया कि लिटन अभी मैच खेलने की स्थिति में नहीं हैं। फिटनेस टेस्ट के बाद यह स्पष्ट हो गया कि वह अगले दोनों मुकाबलों तक भी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाएंगे। इसी कारण टीम प्रबंधन ने जोखिम लेने के बजाय उन्हें आराम देने का फैसला किया है। लिटन की गैरमौजूदगी ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश पहले ही सीरीज में पिछड़ चुका है। पहले वनडे में टीम को जिम्बाब्वे के खिलाफ 25 रन से अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। मुकाबले में बांग्लादेश के गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे को केवल 141 रन पर समेट दिया था। तेज गेंदबाज नाहिद राणा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 10 ओवर में सिर्फ 21 रन देकर छह विकेट झटके जबकि तस्कीन अहमद ने दो विकेट हासिल किए। हालांकि आसान लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश की बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई। पूरी टीम 116 रन पर सिमट गई और आठ बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। विकेटकीपर बल्लेबाज नुरुल हसन ने सबसे अधिक 31 रन बनाए जबकि तौहीद हृदय ने 25 रन का योगदान दिया। बाकी बल्लेबाज जिम्बाब्वे के गेंदबाजों के सामने संघर्ष करते नजर आए। जिम्बाब्वे की जीत में रिचर्ड नगारवा और ब्रैड इवांस की तेज गेंदबाजी ने अहम भूमिका निभाई। दोनों ने तीन-तीन विकेट लेकर बांग्लादेश की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी जबकि ब्लेसिंग मुजारबानी ने भी दो महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। अब सीरीज बचाने की जिम्मेदारी बांग्लादेश के बाकी बल्लेबाजों और नए शामिल किए गए परवेज हुसैन पर होगी। युवा बल्लेबाज के पास खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित करने का अच्छा मौका है। दूसरी ओर जिम्बाब्वे जीत की लय बरकरार रखते हुए सीरीज अपने नाम करने के इरादे से मैदान में उतरेगा। दोनों टीमों के बीच दूसरा वनडे 9 जुलाई और तीसरा मुकाबला 11 जुलाई को खेला जाएगा। बांग्लादेश के लिए ये दोनों मैच करो या मरो की स्थिति वाले होंगे।
विश्व कप के बाद बड़ा बदलाव, मेक्सिको ने राफेल मार्केज को बनाया हेड कोच, 2030 तक रहेगा नया मिशन

नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद मेक्सिको फुटबॉल टीम ने भविष्य की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। मैक्सिकन फुटबॉल फेडरेशन ने टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज डिफेंडर राफेल मार्केज को राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का नया हेड कोच नियुक्त किया है। 47 वर्षीय मार्केज अब वर्ष 2030 तक टीम की कमान संभालेंगे और आने वाले चार वर्षों में मेक्सिको को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएंगे। राफेल मार्केज की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब मेक्सिको को फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में इंग्लैंड के हाथों 3-2 से हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद तत्कालीन मुख्य कोच जेवियर एगुइरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि मार्केज की नियुक्ति कोई तात्कालिक फैसला नहीं बल्कि पहले से तैयार की गई दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य पिछले वर्षों में तैयार की गई टीम को आगे बढ़ाना और 2030 विश्व कप सहित अन्य बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए मजबूत आधार तैयार करना है। राफेल मार्केज मेक्सिको फुटबॉल इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 148 मुकाबले खेलते हुए कई वर्षों तक टीम का नेतृत्व किया और अपनी मजबूत रक्षात्मक शैली तथा नेतृत्व क्षमता से अलग पहचान बनाई। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने विश्व फुटबॉल में मेक्सिको का सम्मान बढ़ाया और अब वही अनुभव बतौर मुख्य कोच टीम के काम आएगा। कोचिंग की बात करें तो जुलाई 2024 से वह जेवियर एगुइरे के सहयोगी के रूप में राष्ट्रीय टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा थे। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के साथ नजदीक से काम किया और टीम की रणनीतियों को समझा। अब पहली बार उन्हें पूरी टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ी और सहायक कोच के रूप में उनके अनुभव का लाभ मेक्सिको को आने वाले वर्षों में मिल सकता है। पूर्व कोच जेवियर एगुइरे का तीसरा कार्यकाल लगभग दो वर्षों तक चला और इस दौरान उन्होंने टीम को कई महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाईं। उनके नेतृत्व में मेक्सिको ने 2025 में कॉनकाकाफ गोल्ड कप और नेशंस लीग का खिताब अपने नाम किया। उनके कार्यकाल में टीम ने कुल 50 मुकाबले खेले जिनमें 33 जीत दर्ज कीं जबकि 9 मैच ड्रॉ रहे और केवल 8 में हार मिली। इस प्रदर्शन को मेक्सिको फुटबॉल के हालिया वर्षों के सबसे सफल दौरों में माना जाता है। मैक्सिकन फुटबॉल फेडरेशन ने एगुइरे के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने टीम को नई दिशा दी और ऐसी मजबूत नींव तैयार की जिस पर भविष्य की सफल टीम बनाई जा सकती है। स्वयं एगुइरे ने भी पद छोड़ते समय संकेत दिया था कि राफेल मार्केज इस जिम्मेदारी के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प हैं। उन्होंने कहा था कि टीम का भविष्य सुरक्षित हाथों में है और आने वाले चार वर्षों में मार्केज मेक्सिको फुटबॉल को नई पहचान दिलाने की क्षमता रखते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि महान खिलाड़ी के रूप में अपनी छाप छोड़ने वाले राफेल मार्केज क्या कोच के रूप में भी वही सफलता दोहरा पाते हैं। मेक्सिको के प्रशंसकों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में टीम 2030 विश्व कप तक दुनिया की मजबूत फुटबॉल टीमों में अपनी जगह और मजबूत करेगी।
सीजफायर टूटते ही फिर भड़की जंग, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, बहरीन और कुवैत में सैन्य ठिकाने बने निशाना

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। हालिया संघर्षविराम समाप्त होने के बाद दोनों देशों ने लगातार दूसरे दिन एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए जाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन के जरिए निशाना बनाने का दावा किया है। इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, हालिया अभियान का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वहां जहाजों पर हो रहे कथित हमलों को रोकना था। इसी रणनीति के तहत उत्तरी ईरान के एक महत्वपूर्ण रेलवे पुल और कुछ अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन ठिकानों का उपयोग सैन्य रसद और मिसाइल संचालन के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हालिया घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि समुद्री मार्गों या अमेरिकी हितों पर हमले जारी रहे तो सैन्य कार्रवाई और तेज की जा सकती है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसकी कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। कुवैत की सेना ने पुष्टि की कि उसके वायु रक्षा तंत्र ने मिसाइलों और ड्रोन से जुड़े हमलों को रोकने की कार्रवाई की। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, कई धमाकों की आवाजें वायु रक्षा प्रणाली द्वारा किए गए अवरोधन अभियान के दौरान सुनाई दीं। हालांकि अधिकारियों ने हमलों की उत्पत्ति या संभावित नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। बहरीन में भी स्थिति तनावपूर्ण रही। वहां के गृह मंत्रालय ने हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने की पुष्टि की और नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। लगातार दूसरे दिन हुई इस सैन्य कार्रवाई ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। कई देशों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और संयम बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रहती है तो क्षेत्रीय तनाव और गहरा सकता है। हालांकि कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की संभावनाएं भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि इन घटनाओं का प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा घोटाले की जांच शुरू, सरकारी समिति के रहते बनी निजी कमेटी, अफसरों की भूमिका पर सवाल

मध्यप्रदेश । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद अब मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर भी विवादों के केंद्र में आ गया है। मंदिर में श्रद्धालुओं से चढ़ावा लेने और उसे निजी बैंक खातों में जमा करने के आरोपों ने प्रशासन और मंदिर प्रबंधन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है और कलेक्टर प्रीति यादव ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को सात दिन के भीतर यह बताने के निर्देश दिए गए हैं कि गड़बड़ी कहां हुई कितनी राशि का मामला है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मंदिर के संचालन के लिए पहले से शासकीय प्रबंध समिति मौजूद है जिसके पदेन अध्यक्ष संबंधित एसडीएम होते हैं। इसके बावजूद वर्ष 2024 में नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति नाम से एक निजी समिति बनाई गई। आरोप है कि इस समिति के सदस्य मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से नकद राशि और चांदी के रूप में दान लेने लगे तथा अपनी अलग रसीदें जारी करते रहे। बताया जा रहा है कि चांदी के अलावा मिलने वाली नकद राशि सरकारी खाते में जमा करने के बजाय निजी बैंक खातों में जमा की जाती रही। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी समिति के रहते निजी समिति आखिर कैसे बनाई गई और तीन वर्षों तक प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उसका संचालन कैसे चलता रहा। शिकायतों के अनुसार तत्कालीन एसडीएम और बाद में पदस्थ अन्य अधिकारियों के कार्यकाल में भी इस व्यवस्था पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही वजह है कि अब जांच की आंच केवल समिति तक सीमित नहीं है बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। मंदिर परिसर में लगे शिलालेखों में लगभग 170 श्रद्धालुओं द्वारा चांदी दान किए जाने का उल्लेख मिलता है लेकिन उसके बाद कितने लोगों ने दान दिया कितना चढ़ावा आया और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि समिति का नियमित ऑडिट भी नहीं कराया गया जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। हालांकि समिति के सदस्यों का कहना है कि तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की जानकारी और सहमति से ही समिति का गठन किया गया था तथा उसका विधिवत पंजीयन भी कराया गया था। शिकायत के आधार पर गठित जांच समिति कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। इसमें गर्भगृह में लगाए गए चांदी के वास्तविक उपयोग की जांच के साथ यह भी देखा जाएगा कि कुल कितना चढ़ावा प्राप्त हुआ और उसे सरकारी खाते में जमा क्यों नहीं कराया गया। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि सरकारी मंदिर में निजी समिति का गठन नियमों के अनुरूप था या नहीं। मां बगलामुखी मंदिर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और विशेष अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में पहले से 27 सरकारी दान पेटियां और ऑनलाइन दान की व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में समानांतर निजी व्यवस्था चलने से मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं। मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि मंदिर की प्रतिष्ठा और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है जिससे यह स्पष्ट होगा कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का है या फिर चढ़ावे के नाम पर बड़े वित्तीय घोटाले का।
नाबालिग रेप पीड़िता के स्वास्थ्य और हितों को प्राथमिकता, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 27 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की दी मंजूरी

नई दिल्ली । बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में 16 वर्षीय रेप पीड़िता को 27 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त कराने की अनुमति प्रदान की है। अदालत ने यह फैसला मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और पीड़िता की शारीरिक तथा मानसिक स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद सुनाया। न्यायालय ने माना कि इस मामले में पीड़िता के सर्वोत्तम हित, स्वास्थ्य और भविष्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है। मामले के अनुसार नाबालिग लड़की यौन शोषण की शिकार हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। गर्भावस्था 27 सप्ताह तक पहुंच चुकी थी। गर्भावस्था की इस अवधि में चिकित्सकीय गर्भसमापन के लिए न्यायालय की अनुमति आवश्यक होती है। इसी कारण पीड़िता की ओर से अदालत का दरवाजा खटखटाया गया, जहां पूरे मामले पर संवेदनशीलता के साथ सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में पीड़िता की उम्र, स्वास्थ्य और गर्भावस्था जारी रहने से उसके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का उल्लेख किया गया। न्यायालय ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद माना कि इस परिस्थिति में गर्भावस्था को जारी रखना पीड़िता के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इसी आधार पर अदालत ने चिकित्सकीय गर्भसमापन की अनुमति देने का निर्णय लिया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में संबंधित अस्पताल को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पूरी चिकित्सकीय प्रक्रिया निर्धारित नियमों और विशेषज्ञों की निगरानी में संपन्न हो। अदालत ने विशेष रूप से कहा कि उपचार के दौरान पीड़िता की सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता का पूर्ण संरक्षण किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उसे आवश्यक चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। इस फैसले को नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़ितों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल कानूनी प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि पीड़िता के जीवन, स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति का समग्र मूल्यांकन भी आवश्यक है। न्यायालय का उद्देश्य पीड़िता के अधिकारों और हितों की रक्षा करना है ताकि उसे भविष्य में अनावश्यक शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों में मेडिकल बोर्ड की राय महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अदालतें प्रत्येक मामले के तथ्यों, चिकित्सकीय स्थिति और कानूनी प्रावधानों के आधार पर अलग-अलग निर्णय लेती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में कोई भी फैसला परिस्थितियों और उपलब्ध चिकित्सा साक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही लिया जाता है। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित अस्पताल अब न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी करेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान पीड़िता की पहचान और निजी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाए। न्यायालय का यह निर्णय नाबालिग पीड़ितों के अधिकारों, स्वास्थ्य सुरक्षा और न्यायिक संवेदनशीलता के संतुलन का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
सड़क पार करते समय मोबाइल देखना पड़ा भारी, विजयवाड़ा में बस की टक्कर से व्यक्ति की मौत, चालक हिरासत में

नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में सड़क सुरक्षा से जुड़ा एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसने एक बार फिर सड़क पर लापरवाही के गंभीर परिणामों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। व्यस्त ट्रैफिक जंक्शन पर सड़क पार कर रहे एक व्यक्ति की बस की चपेट में आने से मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के समय वह अपने मोबाइल फोन में व्यस्त था, जिसके कारण उसे पीछे से आ रहे वाहन का अंदाजा नहीं हो सका। घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसकी जांच पुलिस कर रही है। बताया गया कि व्यक्ति हाथ में थैला लिए सड़क पार कर रहा था। इसी दौरान उसने अपनी जेब से मोबाइल फोन निकाला और उसमें देखने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उसका पूरा ध्यान मोबाइल पर था, जिससे वह आसपास के ट्रैफिक पर नजर नहीं रख सका। कुछ ही क्षण बाद पीछे से आ रही बस ने उसे टक्कर मार दी। हादसा इतना गंभीर था कि व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद पीछे से आ रही दूसरी बस ने सड़क पर पड़े व्यक्ति को बचाते हुए अपना रास्ता बदला, जिससे एक और बड़ी दुर्घटना टल गई। घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। बस चालक को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की जा रही है। साथ ही दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि मोबाइल फोन के उपयोग के कारण व्यक्ति का ध्यान सड़क और ट्रैफिक से हट गया था। हालांकि पुलिस का कहना है कि दुर्घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। वहीं बस चालक की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं। इस घटना ने सड़क सुरक्षा नियमों के पालन की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क पार करते समय मोबाइल फोन का उपयोग, तेज आवाज में हेडफोन लगाना या ट्रैफिक पर ध्यान न देना गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। पैदल यात्रियों को हमेशा निर्धारित स्थान से सड़क पार करनी चाहिए और दोनों ओर से आने वाले वाहनों की स्थिति सुनिश्चित करने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए। शहरी क्षेत्रों में बढ़ते यातायात के बीच सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालकों की ही नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों की भी समान जिम्मेदारी है। सतर्कता, ट्रैफिक नियमों का पालन और मोबाइल जैसी चीजों से ध्यान हटाकर सड़क पर पूरी एकाग्रता बनाए रखना ऐसे हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पुलिस ने भी नागरिकों से अपील की है कि सड़क पर चलते या पार करते समय पूरी सावधानी बरतें और किसी भी प्रकार के ध्यान भटकाने वाले व्यवहार से बचें, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
बुजुर्ग दंपती की हत्या में सुपारी किलिंग का शक गहराया, बारिश का फायदा उठाकर फरार हुए आरोपी, CCTV बना बड़ा सुराग

भोपाल । भोपाल के ऐशबाग स्थित सुदामा नगर में बुजुर्ग दंपती हेमंत फिलेमोन और उनकी पत्नी शकुंतला बारीक की सनसनीखेज हत्या की गुत्थी अब और उलझती जा रही है। पुलिस की जांच में हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं लेकिन अब तक हत्यारों का कोई पुख्ता सुराग हाथ नहीं लग सका है। इस बीच घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ने जांच को नई दिशा दी है। फुटेज में तेज बारिश के दौरान रेनकोट पहने दो संदिग्ध युवक वारदात के बाद इलाके से निकलते दिखाई दिए हैं। पुलिस का मानना है कि यही दोनों युवक इस दोहरे हत्याकांड में शामिल हो सकते हैं और इन्हें पकड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि दोनों संदिग्ध पहले एक साथ चलते दिखाई देते हैं लेकिन कुछ दूरी पर पहुंचकर अलग अलग रास्तों से आगे बढ़ जाते हैं। इसके बाद सुभाष नगर अंडरब्रिज के पास दोनों फिर एक स्थान पर मिलते हैं और वहां से आगे बढ़ने के बाद कैमरों की नजर से ओझल हो जाते हैं। पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने बारिश और रेनकोट का सहारा लेकर अपनी पहचान छिपाने की पूरी योजना बनाई थी ताकि सीसीटीवी कैमरों में उनका चेहरा साफ दिखाई न दे। फुटेज में एक तीसरे संदिग्ध के भी नजर आने की जानकारी मिली है जिसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। तकनीकी जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो चुका है कि दंपती की हत्या 24 जून को ही कर दी गई थी जबकि उनके शव 27 जून को घर के अंदर मिले। यानी करीब तीन दिनों तक दोनों के शव घर में ही पड़े रहे और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार शकुंतला बारीक को दो गोलियां मारी गई थीं जबकि हेमंत फिलेमोन के सिर में एक गोली दागी गई थी। जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया उससे पुलिस को शुरुआत से ही पेशेवर शूटरों के शामिल होने का संदेह है। पुलिस की जांच अब सुपारी किलिंग के एंगल पर सबसे अधिक केंद्रित हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि आरोपियों ने वारदात से पहले कई दिनों तक बुजुर्ग दंपती की गतिविधियों पर नजर रखी और पूरी योजना के साथ हत्या को अंजाम दिया। जिस सटीक तरीके से गोली मारी गई उससे यह आशंका और मजबूत हुई है कि वारदात में प्रशिक्षित अपराधियों का हाथ हो सकता है। जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पुलिस को जानकारी मिली है कि दंपती अपना मकान लगभग एक करोड़ बीस लाख रुपए में बेचने की तैयारी कर रहे थे। मकान का सौदा लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका था लेकिन रजिस्ट्री और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही दोनों की हत्या हो गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस सौदे से किस व्यक्ति या समूह को आर्थिक नुकसान होने वाला था और कहीं इसी वजह से हत्या की साजिश तो नहीं रची गई। मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच साइबर सेल और विभिन्न थानों की करीब बीस टीमें लगातार काम कर रही हैं। पुलिस मोबाइल लोकेशन डिजिटल ट्रांजैक्शन बैंक खातों और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच कर रही है। मृतका की एक करीबी रिश्तेदार के बैंक खातों में कुछ संदिग्ध लेनदेन भी सामने आए हैं जिनकी गहन पड़ताल जारी है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि जांच हर पहलू से आगे बढ़ रही है और किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। मामले में उपयोगी और पुख्ता जानकारी देने वाले व्यक्ति के लिए पचास हजार रुपए के इनाम की भी घोषणा की गई है। पुलिस को उम्मीद है कि तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही इस बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड का खुलासा किया जा सकेगा।
बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी बच्चों पर पड़ सकती है भारी, देखभाल न होने पर संपत्ति वापस लेने का अधिकार बरकरार: हाई कोर्ट

नई दिल्ली । बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों को मजबूत करने वाले एक महत्वपूर्ण फैसले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि माता-पिता ने अपनी संपत्ति इस शर्त पर बच्चों को हस्तांतरित की है कि वे उनकी देखभाल करेंगे, लेकिन बाद में बच्चे इस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करते, तो माता-पिता को वह संपत्ति वापस लेने का कानूनी अधिकार है। अदालत ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना कानून का उद्देश्य है और इस अधिकार का लाभ केवल आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता तक सीमित नहीं है। यह मामला मुंबई के लोअर परेल स्थित एक फ्लैट से जुड़ा था, जहां एक बुजुर्ग दंपति और उनका बेटा एक ही घर में रहते थे। पिता ने कई वर्ष पहले अपनी कमाई से फ्लैट खरीदा था और बाद में विश्वास के आधार पर उसे उपहार स्वरूप अपने बेटे के नाम कर दिया। उपहार के साथ यह शर्त भी तय की गई थी कि बेटा अपने माता-पिता को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा तथा उनके बुढ़ापे में उनकी उचित देखभाल करेगा। समय बीतने के साथ परिवार के संबंधों में तनाव बढ़ता गया। माता-पिता का आरोप था कि बेटे का व्यवहार बदल गया और उन्हें अपेक्षित सम्मान तथा देखभाल नहीं मिली। हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें अपना ही घर छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए कानून के तहत संबंधित न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया और अपनी संपत्ति वापस दिलाने की मांग की। मामले की सुनवाई के बाद न्यायाधिकरण ने बेटे और उसके परिवार को निर्धारित अवधि के भीतर फ्लैट खाली कर उसका कब्जा माता-पिता को सौंपने का निर्देश दिया। बेटे ने इस आदेश को चुनौती देते हुए अदालत में कहा कि उसके पिता आर्थिक रूप से सक्षम हैं, उनका अपना व्यवसाय है और उनके पास अन्य संपत्तियां भी हैं। इसलिए उन्हें इस कानून के तहत राहत नहीं मिलनी चाहिए। हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के संरक्षण से जुड़े कानून की धारा 23 स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था करती है कि यदि संपत्ति का हस्तांतरण देखभाल और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसी शर्तों के साथ किया गया हो और प्राप्तकर्ता उन शर्तों का पालन न करे, तो संबंधित न्यायाधिकरण उस उपहार को निरस्त घोषित कर सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अधिकार का संबंध माता-पिता की आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उनके साथ किए गए वादे और उसकी पूर्ति से है। अदालत ने माना कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मान, देखभाल और सुरक्षित जीवन भी उनकी मूल आवश्यकताओं का हिस्सा हैं। यदि परिवार का कोई सदस्य संपत्ति प्राप्त करने के बाद अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटता है, तो कानून ऐसे बुजुर्गों को प्रभावी कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन अनेक वरिष्ठ नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है, जिन्होंने विश्वास के आधार पर अपनी संपत्ति बच्चों के नाम कर दी, लेकिन बाद में उपेक्षा या दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। इससे यह संदेश भी जाता है कि संपत्ति का हस्तांतरण केवल अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी साथ लेकर आता है। यदि उस जिम्मेदारी का पालन नहीं किया जाता, तो कानून बुजुर्ग माता-पिता को न्याय दिलाने के लिए उनके पक्ष में खड़ा है।