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मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू

भोपाल । भोपाल के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान को लेकर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक शुक्रवार को राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गई। मास्टर प्लान के लंबे समय से लागू नहीं होने के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने बैठक में तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजधानी के विकास का सबसे अहम दस्तावेज ही लागू नहीं हो पा रहा है तो विकास समीक्षा बैठकों का क्या औचित्य रह जाता है। इसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के हस्तक्षेप से माहौल और अधिक गरमा गया और बैठक में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। विवाद के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी बात सांसद से हो रही थी ऐसे में बीच में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसे है। दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि कुछ समय तक बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है और नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने दोनों नेताओं को रोकने और समझाने का प्रयास किया लेकिन वे वापस नहीं लौटे। बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने भी स्वीकार किया कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात कर मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह किया जाएगा। उनका मानना है कि राजधानी के भविष्य के विकास और बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित बनाने के लिए मास्टर प्लान सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। बैठक के दौरान केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना भी जनप्रतिनिधियों के निशाने पर रही। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने परियोजना की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े निर्माण तो हुए लेकिन नागरिक सुविधाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इमारतों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और दशहरा मैदान जैसी महत्वपूर्ण जगहों का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी के बड़े व्यावसायिक प्लॉट छोटे किए जाएं ताकि उनकी बिक्री आसान हो और परियोजना की आय बढ़ सके। महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य समस्याओं का समाधान भी समय पर नहीं हो पाता जिससे आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इस पर कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रियंक मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि अलग बैठक कर सभी समस्याओं की समीक्षा की जाएगी और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दिया ताकि सभी विभाग मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं तो अधिकारियों को उन्हें गंभीरता से लेकर जल्द समाधान करना चाहिए। बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन को लेकर भी पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार संभागायुक्त को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाए जबकि भोपाल और सीहोर के कलेक्टर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी बैठक में प्रमुखता से उठाई गई।

120 साल पुरानी Eveready के सामने नई चुनौती, बैटरी कारोबार पर बढ़ा लागत और नियमों का दबाव; ₹200 करोड़ के Alkaline प्लांट से भविष्य की रणनीति मजबूत

नई दिल्ली । देश की सबसे पुरानी और प्रमुख ड्राई-सेल बैटरी कंपनियों में शामिल Eveready अपने पारंपरिक कारोबार के लिए एक नए दौर की चुनौतियों का सामना कर रही है। करीब 120 वर्षों के इतिहास वाली यह कंपनी आज भी भारतीय ड्राई-सेल बैटरी बाजार में लगभग 52 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है और हर वर्ष 1.3 अरब से अधिक बैटरियों की बिक्री करती है। इसके बावजूद बदलते बाजार, बढ़ती लागत और नए नियामकीय प्रावधानों ने कंपनी के पारंपरिक बैटरी कारोबार पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे माहौल में कंपनी ने भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए अल्कलाइन बैटरी उत्पादन पर विशेष जोर देना शुरू किया है। हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर जिंक की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ड्राई-सेल बैटरियों के निर्माण में जिंक एक प्रमुख कच्चा माल है, इसलिए इसकी लागत बढ़ने का सीधा असर उत्पादन खर्च पर पड़ रहा है। इसके साथ ही रुपये में कमजोरी के कारण आयातित कच्चे माल की कीमत भी बढ़ गई है। इससे कंपनियों के लिए लागत को नियंत्रित करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे समय में मुनाफे को बनाए रखना बैटरी उद्योग के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। उद्योग के सामने दूसरी महत्वपूर्ण चुनौती सरकार के नए बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट नियम हैं। इन नियमों के तहत कंपनियों को केवल बैटरी बेचने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों को वापस एकत्रित कर उनके सुरक्षित रीसाइक्लिंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। इससे कंपनियों पर अतिरिक्त परिचालन और अनुपालन लागत बढ़ने की संभावना है। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन उद्योग के लिए यह एक नई जिम्मेदारी भी लेकर आया है। इसी बदलते परिदृश्य को देखते हुए Eveready ने लगभग 200 करोड़ रुपये के निवेश से देश का पहला आधुनिक अल्कलाइन बैटरी उत्पादन संयंत्र स्थापित किया है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में अल्कलाइन बैटरियों की मांग तेजी से बढ़ेगी, क्योंकि ये सामान्य जिंक-कार्बन बैटरियों की तुलना में अधिक समय तक चलती हैं और बेहतर प्रदर्शन देती हैं। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, स्मार्ट गैजेट्स और उच्च ऊर्जा खपत वाले उत्पादों में अल्कलाइन बैटरियों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद भी धीरे-धीरे बदल रही है। अब ग्राहक अधिक टिकाऊ और बेहतर प्रदर्शन देने वाले उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में केवल पारंपरिक ड्राई-सेल बैटरियों पर निर्भर रहना किसी भी कंपनी के लिए दीर्घकालिक रणनीति नहीं माना जा सकता। इसी कारण कंपनियां नए उत्पादों, उन्नत तकनीक और बेहतर गुणवत्ता वाली बैटरियों के विकास पर निवेश बढ़ा रही हैं। Eveready का उद्देश्य केवल मौजूदा बाजार हिस्सेदारी बनाए रखना नहीं, बल्कि तेजी से बदलते बैटरी उद्योग में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत करना भी है। कंपनी का मानना है कि नवाचार, आधुनिक उत्पादन क्षमता और पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप कारोबार का विस्तार भविष्य में उसकी विकास रणनीति का आधार बनेगा। यदि अल्कलाइन बैटरियों की मांग अनुमान के अनुरूप बढ़ती है, तो यह निवेश कंपनी को नए अवसरों का लाभ उठाने के साथ-साथ बदलते बाजार में दीर्घकालिक मजबूती भी प्रदान कर सकता है।

मोहन सरकार का बड़ा फैसला तहसीलदार और नायब तहसीलदार को मिले सब रजिस्ट्रार के अधिकार 48 लाख परिवारों को मिलेगा फायदा

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण आबादी की भूमि पर वर्षों से काबिज लाखों परिवारों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 के तहत तहसीलदार प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को सब रजिस्ट्रार के अधिकार प्रदान कर दिए हैं। इस फैसले से प्रदेश के 48 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को मुफ्त रजिस्ट्री कराने में सुविधा मिलेगी और उन्हें सरकारी कार्यालयों के बार बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार का उद्देश्य ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि का वैधानिक स्वामित्व दिलाना है ताकि भविष्य में वे अपनी संपत्ति का कानूनी उपयोग कर सकें। इसके साथ ही राज्य सरकार ने स्टाम्प शुल्क पंजीयन शुल्क और पंचायत उपकर पूरी तरह माफ करने का फैसला भी लागू कर दिया है। इन सभी रियायतों का वित्तीय भार सरकार स्वयं उठाएगी। अनुमान है कि इस योजना पर सरकार को लगभग 3800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ वहन करना पड़ेगा। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में आवश्यक अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं। नई व्यवस्था के अनुसार अब केवल उप पंजीयक कार्यालय ही नहीं बल्कि तहसीलदार प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी स्वामित्व योजना के अंतर्गत आने वाली भूमि की रजिस्ट्री कर सकेंगे। इससे प्रदेश में मौजूद सीमित संख्या वाले उप पंजीयक कार्यालयों पर दबाव कम होगा और ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रजिस्ट्री की सुविधा मिल जाएगी। सरकार का मानना है कि जब ग्रामीणों के नाम पर भूमि का विधिवत पंजीयन हो जाएगा तो उन्हें बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से आसानी से ऋण मिल सकेगा। इसका उपयोग वे मकान निर्माण छोटे व्यवसाय कृषि कार्य और अन्य आर्थिक गतिविधियों में कर सकेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आने की उम्मीद है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक आयुक्त कोष एवं लेखा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी और एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे। समिति समय समय पर योजना की समीक्षा करेगी दिशा निर्देश जारी करेगी और प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आवश्यक निर्णय लेगी। सरकार ने योजना के प्रचार प्रसार जनजागरूकता और आवश्यक मुद्रण कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए हैं। राजस्व विभाग को योजना से जुड़े परिपत्र जारी करने और आवश्यक स्पष्टीकरण देने का अधिकार दिया गया है ताकि पूरे प्रदेश में प्रक्रिया एक समान और पारदर्शी तरीके से लागू हो सके। इस फैसले को ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकार मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुफ्त रजिस्ट्री और स्थानीय स्तर पर पंजीयन की सुविधा मिलने से लाखों परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी। English Tags:MadhyaPradesh, SwamitvaYojana, PropertyRights, LandRegistration, RuralDevelopment

वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा, सेंसेक्स 77 हजार के पार पहुंचा, शुरुआती कारोबार में दिखी चौतरफा तेजी

नई दिल्ली । मजबूत वैश्विक संकेतों और घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी के चलते भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को सकारात्मक शुरुआत की। कारोबार के शुरुआती चरण में ही सेंसेक्स 77 हजार अंक के स्तर को पार कर गया, जबकि निफ्टी भी उल्लेखनीय बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आई इस मजबूती ने निवेशकों के बीच भरोसे को और मजबूत किया तथा अधिकांश प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 683 अंकों की बढ़त के साथ 77,425 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 205 अंक मजबूत होकर 24,168 के करीब कारोबार करता दिखा। प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों की रुचि केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक माहौल बना रहा। बाजार की इस तेजी में सूचना प्रौद्योगिकी और मेटल सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आईटी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे संबंधित सूचकांक प्रमुख बढ़त वाले सेक्टरों में शामिल रहे। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, प्राइवेट बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कमोडिटी क्षेत्र से जुड़े शेयरों ने भी बाजार को मजबूती प्रदान की। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में सीमित दबाव देखने को मिला, हालांकि इसका व्यापक बाजार की दिशा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक रुझान दर्ज किया गया। बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, सीमेंट और मेटल क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों का विश्वास विभिन्न सेक्टरों में व्यापक रूप से बना हुआ है और बाजार की तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के कारोबारी सत्रों में बाजार में आई गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आने और घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने भी बाजार की धारणा को मजबूत किया है। यही कारण है कि बाजार में निवेशकों का विश्वास लगातार बेहतर होता दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों का सकारात्मक रुख भी भारतीय बाजार के लिए सहायक साबित हुआ। एशिया के अधिकांश प्रमुख शेयर बाजार बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए, जबकि अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बेहतर रुझान का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला, जिससे शुरुआती कारोबार में खरीदारी का दबदबा बना रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने पिछले कारोबारी सत्र में सीमित निकासी दर्ज की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में उल्लेखनीय निवेश जारी रखा। घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया और बाजार को स्थिरता प्रदान की। यही संतुलन शुक्रवार की शुरुआत में भी सकारात्मक माहौल बनाए रखने में महत्वपूर्ण रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेश प्रवाह और कॉरपोरेट परिणामों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि यही कारक निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Datiya bypoll election: दतिया उपचुनाव में BJP की बढ़ी टेंशन! पूर्व BJYM अध्यक्ष ने की दावेदारी की मांग?

Mukesh Mudotia

Datiya bypoll election: मध्यप्रदेश। दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर बीजेपी में दावेदारी को लेकर हलचलें बढ़ गयी है। पार्टी से एक और दावेदार सामने आया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पूर्व जिला अध्यक्ष मुकेश मुड़ोतिया ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर चुनाव लड़ने के लिए टिकट की मांग की है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर सबसे मजबूत माना जा रहा है। ऐसे में मुड़ोतिया की दावेदारी ने पार्टी के अंदर नई चर्चा छेड़ दी है। स्थानीय कार्यकर्ता को मिले मौका 6 जुलाई को लिखे पत्र में मुकेश मुड़ोतिया ने स्थानीय उम्मीदवार को प्राथमिकता देने की मांग की है। उन्होंने लिखा कि जिस चेहरे को टिकट देने की चर्चा हो रही है, वह दतिया का स्थायी निवासी नहीं है। ऐसे में इस बार किसी स्थानीय, सक्रिय और लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे कार्यकर्ता को मौका मिलना चाहिए। उनका कहना है कि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और जनता के बीच भी अच्छा संदेश जाएगा। दुनिया में रहने लायक सबसे अच्छे शहरों की सूची में दिल्ली 120वें स्थान पर, मुम्बई उससे भी पीछे पार्टी के नेताओं को भेजा पत्र मुड़ोतिया ने अपनी दावेदारी का पत्र बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत कई वरिष्ठ नेताओं को भेजा है। उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह को भी पत्र लिखकर अपनी बात रखी है। बंगाल में भ्रष्टाचार की परतें खोलेगी सरकार टीएमसी के 15 साल के कार्यकाल पर तैयार होगा व्हाइट पेपर गिनाए संगठन और चुनावी अनुभव पत्र में मुड़ोतिया ने बताया कि वह पिछले करीब चार दशक से बीजेपी के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। वर्ष 2000 से 2005 तक लगातार दो कार्यकाल के लिए BJYM के जिला अध्यक्ष रहे। इसके अलावा उन्हें उत्तर प्रदेश और हरियाणा विधानसभा चुनाव में प्रवासी सह-प्रभारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। उन्होंने अपने सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों का भी उल्लेख करते हुए टिकट की मांग की है। Morena news: ग्रामीण बोले-पैसे चाहिए तो हमसे लो, लेकिन शहर को जलभराव और गंदगी से मुक्त करो बीजेपी का जवाब- टिकट मांगना हर कार्यकर्ता का अधिकार मुड़ोतिया की दावेदारी पर बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष रणवीर सिंह रावत ने कहा कि टिकट मांगना हर कार्यकर्ता का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान करता है और उम्मीदवार का चयन उसकी क्षमता, संगठन में योगदान और जीत की संभावना को देखते हुए किया जाता है।

प्यार से हत्या तक क्यों पहुंच रहे रिश्ते एक्सपर्ट ने बताए बदलते समाज और मानसिक तनाव के चौंकाने वाले कारण

भोपाल । बीते कुछ समय में सामने आए कई चर्चित मामलों ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पति पत्नी और प्रेम संबंधों में हिंसा का स्वरूप पहले से अधिक खतरनाक होता जा रहा है। मध्य प्रदेश सहित देश के अलग अलग हिस्सों में सामने आए हत्या और गंभीर अपराधों के मामलों ने रिश्तों में बढ़ते तनाव और मानसिक असंतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती सामाजिक परिस्थितियां संवाद की कमी सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव और विवाहेतर संबंधों से उपजा तनाव कई बार लोगों को हिंसक सोच की ओर धकेल देता है। हालांकि वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी अपराध को केवल महिला या पुरुष अथवा मानसिक बीमारी से जोड़कर देखना पूरी तरह गलत और वैज्ञानिक दृष्टि से अनुचित होगा। भोपाल के मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार पिछले सात से आठ वर्षों में पुरुषों के साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से जुड़े मामलों में लगभग साठ से सत्तर प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। पहले जहां गंभीर आक्रामकता या हत्या जैसे विचारों के साथ महीने में एक या दो मरीज इलाज के लिए आते थे वहीं अब हर महीने पांच से दस ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। इनमें केवल शारीरिक हिंसा ही नहीं बल्कि मानसिक प्रताड़ना और रिश्तों में लगातार बढ़ता तनाव भी प्रमुख कारण बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि उनके पास आने वाले कई मामलों में मरीज स्वयं स्वीकार करते हैं कि उनके मन में अपने जीवनसाथी को नुकसान पहुंचाने या हत्या करने जैसे विचार आते हैं। एक मामले में युवा महिला ने चिकित्सकों को बताया कि उसे डर है कहीं वह अपने पति की हत्या न कर दे। जांच में सामने आया कि लंबे समय से वह अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पा रही थी और व्यक्तित्व संबंधी समस्याओं से भी जूझ रही थी। उपचार और कपल काउंसलिंग के बाद उसकी स्थिति में सुधार आया और हिंसक विचार समाप्त हो गए। एक अन्य मामले में एक व्यक्ति ने स्वीकार किया कि उसके मन में कई बार पत्नी की हत्या कर जेल जाने तक के विचार आते थे। जांच में उसमें डिप्रेशन और पर्सनैलिटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक समस्याएं सामने आईं। विशेषज्ञों ने उसके मानसिक उपचार और व्यवहार नियंत्रण पर काम किया जिसके बाद उसकी स्थिति में सुधार देखा गया। डॉ. त्रिवेदी का कहना है कि सोशल मीडिया ने लोगों की अपेक्षाएं और तुलना की प्रवृत्ति बढ़ा दी है। संयुक्त परिवारों की जगह न्यूक्लियर फैमिली का चलन बढ़ने से भावनात्मक सहारा कम हुआ है। इसके साथ ही रिश्तों में संवाद की कमी और विवाहेतर संबंधों से पैदा होने वाला अविश्वास कई बार मानसिक दबाव को बढ़ा देता है। मनोरंजन के बदलते स्वरूप का भी असर देखने को मिल रहा है जहां अपराध करने वाले किरदारों को भी नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जिससे कुछ लोगों की सोच प्रभावित होती है। हालांकि विशेषज्ञ इस बात पर विशेष जोर देते हैं कि मानसिक बीमारी से जूझ रहे अधिकांश लोग कभी हिंसक नहीं होते। किसी भी अपराध को केवल मानसिक रोग या किसी एक लिंग से जोड़कर देखना उचित नहीं है। यदि रिश्तों में लगातार तनाव गुस्सा अवसाद या हिंसक विचार महसूस हों तो समय रहते मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक की मदद लेना बेहद जरूरी है। सही समय पर काउंसलिंग और उपचार न केवल रिश्तों को बचा सकता है बल्कि किसी बड़ी और दुखद घटना को भी टाल सकता है।

वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विरोध ताजुल मसाजिद से सरकार तक पहुंचेगा मुस्लिम समाज का संदेश

भोपाल । मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजधानी भोपाल में एक बड़े प्रतीकात्मक विरोध के रूप में सामने आने जा रहा है। शुक्रवार को ऐतिहासिक ताजुल मसाजिद में शहरभर से आने वाले नमाजी हाथों पर काली पट्टी बांधकर जुमे की नमाज अदा करेंगे और सरकार के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आपत्ति सरकार तक पहुंचाना है। जानकारी के अनुसार भोपाल के अलग अलग इलाकों से बड़ी संख्या में लोग जुमे की नमाज के लिए ताजुल मसाजिद पहुंचेंगे। नमाज के दौरान सभी लोग काली पट्टी बांधकर वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले के खिलाफ अपनी असहमति व्यक्त करेंगे। आयोजकों का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार के निर्णय के विरोध में है। वक्फ बोर्ड के गठन के बाद से राजधानी में विरोध लगातार तेज होता गया है। सबसे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस नियुक्ति का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था। इसके बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर वर्तमान वक्फ बोर्ड को भंग करने और नियुक्ति संबंधी आदेश वापस लेने की मांग भी की गई। इस घटनाक्रम के बाद विरोध का दायरा लगातार बढ़ता गया। इसी बीच निकाह काजी मोहम्मद मआज़ खान नोमानी नदवी ने दीनी तालीमी बोर्ड के महासचिव पद से इस्तीफा देकर अपने वैचारिक मतभेद सार्वजनिक किए। उन्होंने वक्फ बोर्ड के कुछ सदस्यों के समर्थन पर असहमति जताते हुए अपने पद से अलग होने का फैसला लिया। उनके इस्तीफे के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया। पिछले दो दिनों के दौरान कई उलेमा और मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता के नाम पर वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम प्रतिनिधियों को शामिल कर रही है तो यही व्यवस्था अन्य धार्मिक संस्थाओं में भी समान रूप से लागू की जानी चाहिए। नायब सदर मुफ्ती जिया कासमी ने भी इसी तरह की मांग उठाते हुए सभी धार्मिक संस्थाओं के लिए समान नीति अपनाने की बात कही। विवाद उस समय और गहरा गया जब मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के नव नियुक्त अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के बाद कई धार्मिक पदाधिकारियों और संगठनों ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई। कुछ ने वीडियो संदेश जारी किए तो कई लोगों ने बयान देकर अपने विरोध को दर्ज कराया। आज ताजुल मसाजिद में होने वाला काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह अब तक हुए ज्ञापनों प्रदर्शन इस्तीफों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पहला बड़ा सामूहिक और प्रतीकात्मक आयोजन होगा। प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है जबकि आयोजकों ने सभी लोगों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है।

निजी रिश्तों के तनाव से जब थम गई थी सुरीली जुगलबंदी, किशोर कुमार ने मिथुन के लिए गाना बंद करने के बाद उन्हीं के लिए रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत

नई दिल्ली ।  भारतीय सिनेमा जगत के इतिहास में अपनी जादुई आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले महान गायक किशोर कुमार और डिस्को डांसर के नाम से मशहूर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और अनसुना किस्सा सामने आया है। अपने दौर में हर बड़े अभिनेता की आवाज बनने वाले किशोर कुमार ने एक समय पर मिथुन चक्रवर्ती के लिए फिल्मों में पाश्र्वगायन (प्लेबैक सिंगिंग) करने से पूरी तरह इनकार कर दिया था। इस फैसले के पीछे कोई व्यावसायिक या पेशेवर विवाद नहीं था, बल्कि इसके पीछे पूरी तरह से उनके निजी जीवन से जुड़ी एक भावुक वजह थी, जिसने दोनों दिग्गजों के बीच सालों तक दूरियां बनाए रखीं। इस कड़वाहट की मुख्य वजह अभिनेत्री योगिता बाली थीं। महान अभिनेत्री मधुबाला के दुखद निधन के बाद किशोर कुमार ने योगिता बाली से तीसरी शादी की थी, लेकिन उनका यह वैवाहिक रिश्ता ज्यादा समय तक टिक नहीं सका और जल्द ही दोनों अलग हो गए। इसी दौरान फिल्म ‘ख्वाब’ की शूटिंग के समय योगिता बाली और मिथुन चक्रवर्ती एक-दूसरे के करीब आए और दोनों में प्यार हो गया। इसके बाद योगिता बाली और मिथुन चक्रवर्ती ने शादी कर ली। इस शादी से किशोर कुमार काफी आहत हुए थे और उनका दिल टूट गया था, जिसके बाद उन्होंने गुस्से और दुख में मिथुन चक्रवर्ती के लिए कभी भी अपनी आवाज न देने का सख्त फैसला कर लिया। सालों तक मिथुन चक्रवर्ती की फिल्मों के लिए गाना न गाने के बाद, समय के साथ दोनों के बीच के व्यक्तिगत घाव धीरे-धीरे भरने लगे। वक्त बीतने के साथ किशोर कुमार की नाराजगी कम हुई और उन्होंने अपने काम को निजी जिंदगी से अलग रखते हुए मिथुन चक्रवर्ती के लिए दोबारा स्टूडियो में कदम रखा। दोनों के बीच की आपसी खटास खत्म होने के बाद किशोर कुमार ने ‘सुरक्षा’ और ‘वक्त की आवाज’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में मिथुन चक्रवर्ती के लिए एक से बढ़कर एक बेहतरीन और यादगार गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया, जिन्हें दर्शकों ने बेहद पसंद किया। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अनोखा और भावुक मोड़ तब आया जब किशोर कुमार ने अपने जीवन का सबसे अंतिम गाना भी मिथुन चक्रवर्ती के लिए ही रिकॉर्ड किया। किशोर कुमार को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वे जिस अभिनेता से कभी नाराज थे, उसी के लिए उनका आखिरी गाना इतिहास में दर्ज होने जा रहा है। उन्होंने फिल्म ‘वक्त की आवाज’ के लिए ‘गुरु-गुरु’ गाना रिकॉर्ड किया था, जो बाद में पर्दे पर मिथुन चक्रवर्ती पर ही फिल्माया गया। इस गाने की रिकॉर्डिंग के कुछ समय बाद ही संगीत की दुनिया का यह चमकता सितारा हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गया। हालांकि इस पूरे विवाद और व्यक्तिगत मतभेदों को लेकर न तो कभी किशोर कुमार ने अपने जीवन में खुलकर कोई बयान दिया और न ही मिथुन चक्रवर्ती ने कभी मीडिया के सामने इस पर चर्चा की। दोनों ही कलाकारों ने हमेशा एक-दूसरे के प्रति गहरा पेशेवर सम्मान बनाए रखा। किशोर कुमार सिर्फ एक महान गायक ही नहीं, बल्कि एक बेहद प्रतिभाशाली अभिनेता और कुशल निर्देशक भी थे, जिन्हें उनके शानदार करियर के दौरान रिकॉर्ड 8 फिल्मफेयर पुरस्कारों से नवाजा गया था और साथ ही मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिष्ठित लता मंगेशकर पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।

भोपाल में दर्दनाक घटना लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्ग ने किया सुसाइड

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है जहां लंबे समय से गंभीर बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे 60 वर्षीय बुजुर्ग ने घर के भीतर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है जबकि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मृतक पिछले कई महीनों से पैरालिसिस की बीमारी से पीड़ित थे और इसी कारण गहरे अवसाद में चले गए थे। पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान मनोहर लाल रैकवार पिता मोहनलाल रैकवार निवासी बेटा गांव बैरागढ़ के रूप में हुई है। वह पेशे से प्लंबर थे और अपने परिवार के साथ रहते थे। करीब आठ महीने पहले उन्हें पैरालिसिस का अटैक आया था जिसके बाद उनके शरीर का एक हिस्सा ठीक से काम नहीं कर रहा था। बीमारी के चलते उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई थी और सामान्य काम भी दूसरों की मदद के बिना कर पाना मुश्किल हो गया था। परिजनों के अनुसार लगातार बिगड़ती सेहत और शारीरिक असहायता ने उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान कर दिया था। धीरे धीरे वह अवसाद की स्थिति में पहुंच गए थे और अधिकतर समय घर में ही रहते थे। बीमारी के कारण उनका सामाजिक और पेशेवर जीवन भी प्रभावित हो गया था जिससे उनकी चिंता और बढ़ती चली गई। शुक्रवार सुबह जब उनकी पत्नी नींद से उठकर घर की पहली मंजिल पर पहुंचीं तो उन्होंने मनोहर लाल को पाइप के सहारे बनाए गए फंदे पर लटका देखा। यह दृश्य देखकर उन्होंने तुरंत शोर मचाया जिसके बाद आसपास रहने वाले रिश्तेदार और पड़ोसी मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर उन्हें नीचे उतारा लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना तत्काल बैरागढ़ थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में बीमारी और उससे उपजे मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या की आशंका सामने आई है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि गंभीर बीमारी केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक चलने वाली शारीरिक समस्याएं कई बार व्यक्ति को अवसाद और निराशा की ओर धकेल देती हैं। ऐसे समय में परिवार और समाज का भावनात्मक सहयोग तथा समय पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से मानसिक तनाव अवसाद या निराशा से जूझ रहा हो तो उसकी भावनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए और उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। समय पर संवाद और चिकित्सकीय सहायता कई बार किसी की जिंदगी बचा सकती है।

सेंसर बोर्ड की आपत्तियों और ऑनलाइन लीक के नुकसान से उबरी 'जन नायकन', 'ए' सर्टिफिकेट के साथ सिनेमाघरों में दस्तक देने को तैयार थलपति विजय की अंतिम फिल्म

नई दिल्ली । तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राजनेता थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित और आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने महीनों से चले आ रहे लंबे इंतजार और विवादों के बाद आखिरकार इस फिल्म को हरी झंडी दे दी है। सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने के साथ ही फिल्म की संभावित रिलीज डेट भी सामने आ गई है, जिसके अनुसार यह फिल्म आगामी 24 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। यह फिल्म थलपति विजय के अभिनय करियर की अंतिम फिल्म है, जिसे देखने के लिए उनके प्रशंसक लंबे समय से बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। सेंसर बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक, ‘जन नायकन’ को सीबीएफसी की तरफ से ‘ए’ (वयस्क) सर्टिफिकेट जारी किया गया है। इसके साथ ही फिल्म की समयावधि यानी रनटाइम को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है, यह फिल्म 3 घंटे और 3 मिनट लंबी होने वाली है। हालांकि, सेंसर वेबसाइट पर जारी किए गए इस सर्टिफिकेट में फिल्म की मुख्य कहानी की रूपरेखा या बोर्ड द्वारा लगाए गए कट्स और बदलावों के बारे में फिलहाल कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। इस सर्टिफिकेशन के पूरा होने के साथ ही फिल्म की रिलीज के रास्ते में आ रही सबसे बड़ी कानूनी अड़चन दूर हो गई है। इस फिल्म को थलपति विजय की आखिरी फिल्म इसलिए माना जा रहा है क्योंकि वे अब अभिनय की दुनिया को पूरी तरह अलविदा कहकर एक पूर्णकालिक राजनेता के रूप में सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बना चुके हैं। अभिनेता ने हाल ही में 10 मई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, जिसके बाद से उनके राजनीतिक दायित्व काफी बढ़ गए हैं। यही वजह है कि फैंस के बीच इस फिल्म को लेकर एक अलग ही स्तर का उत्साह और भावुकता देखने को मिल रही है। प्रशंसक इस बात से बेहद खुश हैं कि कई महीनों से अधर में लटकी उनकी पसंदीदा स्टार की अंतिम फिल्म अब बड़े पर्दे पर प्रदर्शित होने के लिए पूरी तरह तैयार है। ‘जन नायकन’ में थलपति विजय के साथ-साथ मनोरंजन जगत के कई अन्य बड़े और लोकप्रिय चेहरे भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म के कलाकारों की सूची में बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल, अभिनेत्री पूजा हेगड़े और ममिता बैजू जैसे नाम शामिल हैं, जो फिल्म के आकर्षण को और ज्यादा बढ़ाते हैं। हालांकि मेकर्स की ओर से अभी रिलीज डेट का कोई भव्य आधिकारिक ऐलान होना बाकी है, लेकिन व्यापार विश्लेषकों और अंदरूनी सूत्रों की रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स ने 24 जुलाई को ही सिनेमाघरों में उतारने की पूरी तैयारी कर ली है। इस फिल्म का रिलीज तक पहुंचने का सफर बेहद उतार-चढ़ाव और भारी आर्थिक नुकसान से भरा रहा है। मूल रूप से यह फिल्म इसी साल की शुरुआत में 9 जनवरी 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सैन्य बलों के चित्रण और कुछ दृश्यों से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की शिकायतों के बाद सेंसर बोर्ड ने इसे रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया था। इस विवाद के बीच 9 अप्रैल को यह फिल्म ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लीक हो गई, जिससे मेकर्स को करीब 300 से 400 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा और अमेजन प्राइम वीडियो ने भी अपनी 120 करोड़ रुपये की बड़ी ओटीटी डील रद्द कर दी थी। इन सभी चुनौतियों को पार कर अब यह फिल्म सिनेमाघरों में आने को तैयार है।