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Q1 नतीजों पर बाजार की बड़ी नजर, डीमार्ट समेत पांच कंपनियां जारी करेंगी अप्रैल-जून तिमाही रिपोर्ट, सोमवार की ट्रेडिंग पर रहेगा असर

नई दिल्ली । शेयर बाजार में अप्रैल-जून तिमाही के वित्तीय नतीजों का दौर तेज हो गया है। शनिवार को पांच कंपनियां अपने पहली तिमाही के परिणाम जारी करेंगी, जिनमें एवेन्यू सुपरमार्ट्स (डीमार्ट) और एलटीएम लिमिटेड पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। इन कंपनियों के नतीजों से न केवल उनके कारोबारी प्रदर्शन का आकलन होगा, बल्कि संबंधित क्षेत्रों की स्थिति और आने वाले महीनों के कारोबारी संकेत भी मिलेंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिणामों का असर अगले कारोबारी सत्र में संबंधित शेयरों की चाल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। आज जिन कंपनियों के वित्तीय नतीजे घोषित होने हैं उनमें अवांटेल लिमिटेड, एवेन्यू सुपरमार्ट्स, गोवरा लीजिंग एंड फाइनेंस, एलटीएम लिमिटेड और तिरुपति फिनलीज शामिल हैं। निवेशकों की सबसे अधिक रुचि डीमार्ट और एलटीएम के प्रदर्शन में बनी हुई है क्योंकि दोनों कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों में गिनी जाती हैं। इनके नतीजों से खुदरा कारोबार और इंजीनियरिंग एवं तकनीकी सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति का भी संकेत मिलेगा। डीमार्ट के नतीजों को उपभोक्ता मांग का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। कंपनी देश की प्रमुख रिटेल श्रृंखलाओं में शामिल है और इसके वित्तीय प्रदर्शन से यह अनुमान लगाया जाता है कि उपभोक्ता खर्च में किस प्रकार का रुझान बना हुआ है। निवेशकों की नजर कंपनी की आय, शुद्ध लाभ, परिचालन मार्जिन और नए स्टोर विस्तार की गति पर रहेगी। यदि कंपनी मजबूत वृद्धि दर्ज करती है तो इसे संगठित खुदरा क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। पिछली तिमाही में डीमार्ट ने बेहतर प्रदर्शन किया था। कंपनी ने राजस्व, परिचालन लाभ और शुद्ध लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की थी। साथ ही उसके परिचालन मार्जिन में भी सुधार देखने को मिला था। इसी कारण इस बार भी बाजार को उम्मीद है कि कंपनी स्थिर मांग और प्रभावी लागत प्रबंधन के दम पर मजबूत परिणाम पेश कर सकती है। दूसरी ओर एलटीएम लिमिटेड के परिणाम भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग सेवाओं के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के बढ़ते उपयोग के बीच निवेशक यह जानना चाहेंगे कि कंपनी के नए ऑर्डर, राजस्व वृद्धि और लाभप्रदता पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है। प्रबंधन की भविष्य की रणनीति और मांग को लेकर दिए जाने वाले संकेत निवेशकों के लिए विशेष महत्व रखेंगे। तिमाही परिणाम जारी होने के बाद कंपनियां आमतौर पर निवेशकों और विश्लेषकों के साथ बैठक भी करती हैं। इन बैठकों में प्रबंधन भविष्य की कारोबारी योजनाओं, संभावित निवेश, नए अनुबंध, बाजार की चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी देता है। कई बार इसी दौरान लाभांश या अन्य कॉरपोरेट घोषणाएं भी की जाती हैं, जिन पर निवेशकों की विशेष नजर रहती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पहली तिमाही के परिणाम पूरे वित्तीय वर्ष की संभावित दिशा का प्रारंभिक संकेत देते हैं। यदि प्रमुख कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं और भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। वहीं अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन की स्थिति में संबंधित शेयरों के साथ-साथ पूरे बाजार की धारणा पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए आगामी कारोबारी सत्र में इन कंपनियों के शेयरों और बाजार की चाल पर निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी।

हेली मैथ्यूज का तूफानी शतक, आयरलैंड को 9 विकेट से रौंदकर वेस्टइंडीज ने सीरीज में बनाई बढ़त

नई दिल्ली। ब्रेडी क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए पहले महिला वनडे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने कप्तान हेली मैथ्यूज के शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन की बदौलत आयरलैंड को 9 विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। मैथ्यूज ने पहले गेंद से तीन महत्वपूर्ण विकेट झटके और फिर बल्ले से नाबाद 159 रन की विस्फोटक पारी खेलकर मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया। उनके इस प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम ने आयरलैंड को 49 ओवर में 269 रन पर समेट दिया। आयरलैंड की ओर से विकेटकीपर बल्लेबाज एमी हंटर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 90 गेंदों में 96 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में छह चौके लगाए और शतक से केवल चार रन दूर रह गईं। कप्तान गेबी लेविस ने 39 रन, ओर्ला प्रेंडरगैस्ट ने 30 और लुइस लिटिल ने 27 रन का योगदान दिया, लेकिन कोई भी बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं बना सका। वेस्टइंडीज की गेंदबाजी में एफी फ्लेचर सबसे सफल रहीं। उन्होंने 10 ओवर में 49 रन देकर चार विकेट हासिल किए। कप्तान हेली मैथ्यूज ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए 10 ओवर में 52 रन देकर तीन विकेट लिए। जैनिलेया ग्लासगो और करिश्मा रामहरक ने एक-एक विकेट लेकर आयरलैंड की पारी को समेटने में अहम भूमिका निभाई। 270 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज ने शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ बना ली। कप्तान हेली मैथ्यूज और रीलियाना ग्रिमंड ने पहले विकेट के लिए 258 रन की रिकॉर्ड साझेदारी कर आयरलैंड की उम्मीदों को पूरी तरह खत्म कर दिया। यह महिला वनडे क्रिकेट में वेस्टइंडीज की ओर से पहले विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी बन गई। मैथ्यूज ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 123 गेंदों में 24 चौकों और दो छक्कों की मदद से नाबाद 159 रन बनाए। यह उनके वनडे करियर का 11वां शतक होने के साथ-साथ इस प्रारूप में उनकी अब तक की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी भी रही। दूसरी ओर रीलियाना ग्रिमंड शतक से चूक गईं और 107 गेंदों में 91 रन बनाकर आउट हुईं। उन्होंने अपनी पारी में 11 चौके लगाए। इसके बाद स्टेफनी टेलर दो रन बनाकर नाबाद लौटीं और वेस्टइंडीज ने केवल एक विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस शानदार जीत के साथ वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की वनडे सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। कप्तान हेली मैथ्यूज का ऑलराउंड प्रदर्शन टीम के लिए बड़ा आत्मविश्वास लेकर आया है। अब दूसरे वनडे में आयरलैंड वापसी की कोशिश करेगा, जबकि वेस्टइंडीज की नजर सीरीज अपने नाम करने पर होगी।

ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए बोले पीएम मोदी, न्यूजीलैंड की उपलब्धियों की खुलकर सराहना, कहा- ‘हमने आपसे बहुत कुछ सीखा’

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आयोजित भारतीय समुदाय के विशेष कार्यक्रम में दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य की साझेदारी पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड का रिश्ता केवल कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास, मित्रता और साझा मूल्यों की मजबूत नींव पर आधारित है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की कई उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने इस देश से बहुत कुछ सीखा है और आज भी सीखने की यह प्रक्रिया लगातार जारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता होने के बावजूद समय के साथ स्वयं को निरंतर बदलता और आधुनिक बनाता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सीखने की क्षमता है। यही कारण है कि देश दुनिया के विभिन्न अनुभवों को अपनाते हुए अपनी विकास यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके आकार से नहीं, बल्कि जनकल्याण की भावना और समाज के विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से तय होती है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की लोकतांत्रिक परंपराओं और सामाजिक विकास की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह वही देश है जिसने दुनिया में सबसे पहले महिलाओं को मतदान का अधिकार देकर समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों की नई मिसाल पेश की। आज न्यूजीलैंड के विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी उसकी सबसे बड़ी ताकतों में शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भी महिला सशक्तिकरण को विकास का प्रमुख आधार मानते हुए शिक्षा, उद्यमिता, नेतृत्व और आर्थिक भागीदारी के नए अवसर लगातार बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में न्यूजीलैंड की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस देश ने कृषि और उससे जुड़े मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से यह साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्र किसी भी राष्ट्र की आर्थिक ताकत बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों पर आधारित कृषि व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और वैश्विक बाजार से जोड़कर न्यूजीलैंड ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। भारत जैसे विशाल कृषि प्रधान देश के लिए यह अनुभव प्रेरणादायक है और इससे कई उपयोगी सीख प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड ने यह भी सिद्ध किया है कि सीमित घरेलू बाजार होने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और नवाचार के बल पर वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बनाई जा सकती है। भारत भी स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और कृषि आधारित उद्योगों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इस दिशा में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। प्रधानमंत्री ने भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को भविष्य की साझा यात्रा बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और पारस्परिक सम्मान की भावना लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने भारतीय समुदाय की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत और न्यूजीलैंड शिक्षा, कृषि, व्यापार, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे, जिससे दोनों देशों की साझेदारी और अधिक व्यापक तथा मजबूत बनेगी।

क्या अब हर बातचीत होगी रिकॉर्ड Meta के नए AI ग्लासेस को लेकर दुनिया भर में छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब यह तकनीक केवल मोबाइल या कंप्यूटर तक सीमित नहीं रह गई है। मेटा ऐसे नए AI स्मार्ट ग्लासेस विकसित कर रही है जो यूजर की रोजमर्रा की गतिविधियों को समझने और याद रखने में सक्षम होंगे। कंपनी का दावा है कि यह तकनीक लोगों को पहले से कहीं अधिक स्मार्ट और व्यक्तिगत डिजिटल सहायता उपलब्ध कराएगी लेकिन इसके साथ ही निजता और डेटा सुरक्षा को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मेटा अपने नए स्मार्ट ग्लासेस में सुपर सेंसिंग नाम के फीचर पर काम कर रही है। यह फीचर यूजर के आसपास के वातावरण को लगातार समझने का प्रयास करेगा। चश्मा हर कुछ सेकंड में तस्वीरें ले सकेगा और आसपास की आवाजों से भी जरूरी जानकारी जुटाएगा। इसके आधार पर AI यूजर की दिनभर की गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझ पाएगा और जरूरत पड़ने पर उनसे जुड़े सवालों के जवाब भी दे सकेगा। इन स्मार्ट ग्लासेस की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यूजर दिनभर में क्या देखता है किन लोगों से मिलता है कहां जाता है और क्या बातचीत करता है इसका संदर्भ AI के पास मौजूद रहेगा। यदि यूजर दिन के अंत में पूछे कि आज उसने क्या किया या किसी व्यक्ति से क्या चर्चा हुई थी तो AI उसी आधार पर जानकारी उपलब्ध करा सकेगा। इससे यह तकनीक एक डिजिटल असिस्टेंट की तरह काम करेगी जो यूजर की याददाश्त का भी सहारा बन सकती है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मेटा इन ग्लासेस में पहले से मौजूद तकनीक को और अधिक उन्नत रूप में पेश करने की तैयारी कर रही है। मौजूदा मॉडल में कुछ फीचर मैन्युअली चालू करने पड़ते हैं लेकिन नए मॉडल में यह प्रक्रिया स्वतः सक्रिय रह सकती है। इससे AI को लगातार विजुअल और ऑडियो जानकारी मिलती रहेगी और वह यूजर के व्यवहार तथा जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकेगा। हालांकि इस नई तकनीक को लेकर सबसे बड़ी चिंता प्राइवेसी को लेकर सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई डिवाइस लगातार तस्वीरें ले और आसपास की आवाज सुनता रहे तो इससे दूसरे लोगों की निजता भी प्रभावित हो सकती है। कई बार आसपास मौजूद लोगों को यह पता भी नहीं चलेगा कि उनकी गतिविधियां किसी AI सिस्टम के लिए विश्लेषित की जा रही हैं। मेटा का कहना है कि रिकॉर्ड की गई तस्वीरों और ऑडियो को स्थायी रूप से सुरक्षित रखने की योजना नहीं है। कंपनी केवल जरूरी मेटाडेटा का उपयोग करेगी ताकि AI को यूजर के सवालों के बेहतर जवाब देने में मदद मिल सके। फिर भी डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत जानकारी के उपयोग को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीक के लिए स्पष्ट नियम और पारदर्शी गोपनीयता नीति बेहद जरूरी होगी। एक और चिंता यह भी है कि यदि इस फीचर के दौरान रिकॉर्डिंग संकेत देने वाली एलईडी लाइट सक्रिय नहीं रहती तो आसपास मौजूद लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पाएगी कि उनकी बातचीत या गतिविधि AI सिस्टम द्वारा समझी जा रही है। इससे सहमति और निगरानी जैसे संवेदनशील मुद्दे और गंभीर हो सकते हैं। AI तकनीक लोगों की जिंदगी को आसान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है लेकिन इसके साथ जिम्मेदार उपयोग और मजबूत डेटा सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मेटा इन स्मार्ट ग्लासेस में उपयोगकर्ताओं की सुविधा और उनकी निजता के बीच संतुलन कैसे बनाती है। यदि यह संतुलन सफल रहता है तो AI पहनने योग्य तकनीक के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू कर सकता है।

32 हजार किताबें, 5 लाख से अधिक ई-बुक्स और आधुनिक सुविधाएं, राजधानी में खुली जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी, पढ़ने की संस्कृति पर अमित शाह का बड़ा संदेश

नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली को आधुनिक शिक्षा और ज्ञान संसाधनों के क्षेत्र में एक नई सौगात मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को नई दिल्ली नगरपालिका परिषद द्वारा विकसित अत्याधुनिक जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। आधुनिक तकनीक और डिजिटल सुविधाओं से सुसज्जित यह बहुमंजिला पुस्तकालय पारंपरिक पुस्तकों और डिजिटल ज्ञान संसाधनों का समन्वित केंद्र होगा। इसका उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और आम पाठकों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे आधुनिक सुविधाओं के साथ अध्ययन और शोध कर सकें। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के बौद्धिक विकास से मापी जाती है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में पुस्तकालयों में अधिक संख्या में लोग अध्ययन करने आते हैं, वह समाज ज्ञान, नवाचार और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता है। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर इस पुस्तकालय को समर्पित किए जाने को गौरव का विषय बताते हुए कहा कि यह संस्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। नई लाइब्रेरी में 32 हजार से अधिक भौतिक पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही पाठकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से 5 लाख से अधिक ई-बुक्स तक पहुंच की सुविधा भी दी गई है। आधुनिक डिजिटल कैटलॉग, अध्ययन कक्ष, शोध सुविधाएं और तकनीक आधारित सेवाएं इसे राजधानी के प्रमुख ज्ञान केंद्रों में शामिल करती हैं। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को एक ही स्थान पर विविध विषयों की अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने पुस्तकालयों की सामाजिक भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं होते, बल्कि वे विचारों, ज्ञान और रचनात्मकता के विकास के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। पढ़ने की संस्कृति मजबूत होने से समाज में जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित होती है, जो किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान होती है। अमित शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र गांधीनगर में लागू किए गए पुस्तकालय मॉडल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गांवों में छोटी-छोटी लाइब्रेरियों को एक केंद्रीय पुस्तकालय से जोड़ने की व्यवस्था की गई, जिससे जरूरत के अनुसार किताबें नियमित रूप से गांवों तक पहुंचाई जाती हैं। इस मॉडल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से शिक्षा के अवसरों का विस्तार होता है और ज्ञान संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ पुस्तकों के अध्ययन की परंपरा को भी बनाए रखें। उनका कहना था कि किताबें केवल जानकारी नहीं देतीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, तार्किक सोच और जीवन मूल्यों को भी मजबूत करती हैं। नई दिल्ली के मध्य स्थित यह पुस्तकालय आने वाले समय में शिक्षा, शोध और बौद्धिक विमर्श का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की क्षमता रखता है। आधुनिक सुविधाओं और व्यापक डिजिटल संसाधनों के साथ यह पहल राजधानी में ज्ञान आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

देवास में तेज रफ्तार का कहर, 14 वर्षीय छात्र की सड़क हादसे में मौत; दोस्तों के सोशल मीडिया पोस्ट ने नम कीं आंखें

देवास । देवास के बालगढ़ रोड पर शुक्रवार रात हुआ एक दर्दनाक सड़क हादसा एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन ले गया। महज 14 वर्षीय छात्र जैद खान अपने दो दोस्तों के साथ घूमने निकला था, लेकिन घर लौटने से पहले ही सड़क दुर्घटना ने उसकी जिंदगी खत्म कर दी। हादसे में उसके दोनों दोस्त मामूली रूप से घायल हुए, जबकि जैद को अस्पताल पहुंचने से पहले ही डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और जैद के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जानकारी के अनुसार दुर्घटना शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे अष्टविनायक कॉलोनी के पास बालगढ़ रोड पर हुई। शांतिपुरा निवासी जैद खान अपने दो दोस्तों के साथ बाइक से घूमने निकला था। लौटते समय उनकी बाइक सामने से आ रही एक कार से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मदद के लिए दौड़ लगाई और एक परिचित की सहायता से तीनों को ऑटो में बैठाकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद जैद खान को मृत घोषित कर दिया। वहीं उसके दोनों दोस्तों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई क्योंकि उन्हें केवल मामूली चोटें आई थीं। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद जैद का शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिजनों के अनुसार जैद आठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा था और पढ़ाई के साथ-साथ बेहद मिलनसार स्वभाव का था। उसके पिता ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और साथ ही एक छोटी किराना दुकान भी संचालित करते हैं। बेटे की असमय मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। मोहल्ले में भी घटना के बाद मातम पसरा हुआ है। पड़ोसियों का कहना है कि जैद सभी का चहेता था और हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहने वाला बच्चा था। हादसे के बाद जैद के दोस्तों और परिचितों ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किए। एक दोस्त ने लिखा कि आ जाना यार हमेशा की तरह एक आवाज पर जबकि अन्य दोस्तों ने उसे श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि जहां भी रहो दोस्त हमेशा खुश रहो। इन संदेशों ने हर किसी की आंखें नम कर दीं और यह एहसास कराया कि एक सड़क हादसा केवल एक परिवार ही नहीं बल्कि पूरे दोस्ती के रिश्ते को भी गहरा जख्म दे जाता है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि कार और बाइक की टक्कर किन परिस्थितियों में हुई इसकी जांच की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही किसकी थी। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। खासकर रात के समय वाहन चलाते समय सावधानी और यातायात नियमों का पालन कितना जरूरी है, यह घटना उसकी दुखद याद दिलाती है। एक पल की चूक ने एक मासूम छात्र की जिंदगी छीन ली और उसके परिवार को ऐसा दर्द दे दिया जिसे शायद समय भी कभी पूरी तरह भर नहीं पाएगा।

पहली बारिश में बह गई करोड़ों के पुल की सुरक्षा दीवार निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच

देवास । देवास जिले के होशियारी और मकोडिया गांवों को जोड़ने वाला करोड़ों रुपए की लागत से बना स्टॉप डैम कम पुल पहली ही बारिश के बाद सवालों के घेरे में आ गया है। मानसून की शुरुआती बारिश में ही पुल के दोनों ओर बनाई गई प्रोटेक्शन वॉल बह गई जबकि उसके पीछे भरी गई मिट्टी भी कई स्थानों से कट गई। इस घटना ने निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुल पर आवागमन जारी है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में तेज बारिश या बाढ़ का दबाव बढ़ा तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। मौके पर निरीक्षण के दौरान पुल के दोनों सिरों पर सुरक्षा दीवार के कई हिस्से क्षतिग्रस्त मिले। जहां मजबूत प्रोटेक्शन वॉल बनाई गई थी वहां अब केवल कंक्रीट के अवशेष और बह चुकी मिट्टी दिखाई दे रही है। पुल के एप्रोच मार्ग के पास भराव मिट्टी के बह जाने से कई स्थानों पर गड्ढेनुमा स्थिति बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तक नदी में बड़ा उफान भी नहीं आया है। केवल सामान्य बारिश और शिप्रा नदी में छोड़े गए पानी के बहाव से ही यह नुकसान हुआ है। ऐसे में यदि मानसून के अगले दौर में जलस्तर बढ़ा तो पुल की नींव तक खतरा पहुंच सकता है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इरफान पटेल धीरज बना गोलू वर्मा टेपू शेख रंजन सिंह चौहान लाखन सिंह राठौर नवाब शेख और शेर मोहम्मद पटेल सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। उनका आरोप है कि सरियों और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता कमजोर रही जिसके कारण पहली ही बारिश में सुरक्षा दीवार टिक नहीं सकी। ग्रामीणों के अनुसार मार्च में भूमिपूजन के बाद जल्दबाजी में करीब 28 दिनों के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया था। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की इस परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मामला सामने आने के बाद हाटपीपल्या विधायक मनोज चौधरी ने पुल का निरीक्षण किया और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर निर्माण गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है और यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जहां कमी पाई गई है उसे तत्काल दूर कराया जाएगा ताकि भविष्य में किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न रहे। सिंचाई विभाग की एसडीओ नेहा दुबे ने बताया कि पुल की मुख्य संरचना पूरी तरह सुरक्षित है और नुकसान केवल प्रोटेक्शन वॉल तथा उसके पीछे की भराव मिट्टी तक सीमित है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अभी जारी है और ग्वालियर की कटारे कंस्ट्रक्शन कंपनी इस परियोजना का निर्माण कर रही है। एजेंसी का अंतिम भुगतान भी अभी नहीं किया गया है। विभाग के अनुसार क्षतिग्रस्त हिस्से की दोबारा मरम्मत कराई जाएगी तथा पूरी प्रोटेक्शन वॉल नए सिरे से बनाई जाएगी। बारिश का दौर थमने के बाद शेष निर्माण कार्य भी पूरा कराया जाएगा। फिलहाल इस पूरे मामले में ग्रामीणों और विभाग के दावों के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। एक ओर ग्रामीण निर्माण में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी ओर विभाग मुख्य पुल को सुरक्षित बताते हुए केवल सुरक्षा दीवार की मरम्मत की बात कह रहा है। अब सभी की नजर प्रस्तावित तकनीकी जांच और मानसून के अगले दौर पर टिकी है क्योंकि तेज बारिश ही यह तय करेगी कि पुल का निर्माण वास्तव में कितना मजबूत और सुरक्षित है।

माता टेकरी में हादसे की आहट कुमार गंधर्व द्वार से टूटे पत्थर एक श्रद्धालु घायल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

देवास । देवास की आस्था का प्रमुख केंद्र माता टेकरी शनिवार सुबह उस समय अचानक चर्चा का विषय बन गया जब रपट मार्ग पर स्थित कुमार गंधर्व प्रवेश द्वार से पत्थर टूटकर नीचे गिर पड़े। इस अप्रत्याशित घटना में एक व्यक्ति घायल हो गया जबकि संयोग से बड़ा हादसा टल गया। जिस समय यह घटना हुई उस दौरान द्वार के आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी थी और कुछ लोग पास में खड़े होकर चाय पी रहे थे। यदि उस समय वहां अधिक भीड़ होती तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह अचानक प्रवेश द्वार के ऊपरी हिस्से से लाल पत्थरों के कई टुकड़े टूटकर नीचे आ गिरे। किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिला और एक बड़ा पत्थर नीचे खड़े व्यक्ति के पैर पर गिर गया जिससे उसे चोट लग गई। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायल की मदद की और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। घटना के बाद कुछ देर के लिए वहां अफरा तफरी का माहौल बन गया और श्रद्धालु भयभीत नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि माता टेकरी देवास का प्रमुख धार्मिक स्थल है जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती है। ऐसे में प्रवेश द्वार जैसी महत्वपूर्ण संरचना से पत्थर गिरना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह की संरचनाओं की नियमित जांच और मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। घटना के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रवेश द्वार और रपट मार्ग की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही जिन स्थानों पर पत्थर ढीले हैं या संरचना कमजोर हो चुकी है वहां तत्काल मरम्मत कराई जाए ताकि किसी भी श्रद्धालु की जान जोखिम में न पड़े। लोगों ने यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। माता टेकरी न केवल देवास बल्कि आसपास के जिलों के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है। फिलहाल इस घटना में केवल एक व्यक्ति घायल हुआ है लेकिन इसे चेतावनी के रूप में देखते हुए प्रशासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रवेश द्वार की मजबूती की जांच कराएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करेगा ताकि श्रद्धालु बिना किसी भय के माता टेकरी के दर्शन कर सकें।

ईरान के परमाणु ठिकानों पर फिर बढ़ी हलचल, नई सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता, अमेरिका-ईरान समझौते के पालन पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव और युद्धविराम के बाद सामने आई नई सैटेलाइट तस्वीरों ने एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। संवेदनशील परमाणु परिसरों में निर्माण और मरम्मत संबंधी गतिविधियों के संकेत मिलने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या ईरान हाल में हुए समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन कर रहा है। इन घटनाक्रमों ने वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों और कई देशों की चिंताओं को फिर बढ़ा दिया है। हालिया तस्वीरों के विश्लेषण में ईरान के पारचिन परमाणु परिसर में सबसे अधिक गतिविधियां दर्ज होने की बात सामने आई है। यह वही स्थान है, जिसे लंबे समय से परमाणु हथियारों से जुड़े संभावित परीक्षणों के संदर्भ में संवेदनशील माना जाता रहा है। तस्वीरों में क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत, निर्माण कार्य और सुरक्षा संरचनाओं को दोबारा मजबूत किए जाने जैसे संकेत दिखाई दिए हैं। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि संबंधित परिसरों को फिर से सक्रिय स्थिति में लाने की प्रक्रिया चल रही हो सकती है। इसी तरह पिकऐक्स माउंटेन क्षेत्र में भी सुरंगों के आसपास वाहनों की आवाजाही और अन्य गतिविधियों के संकेत मिलने की जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे स्थानों पर किसी भी प्रकार की असामान्य हलचल अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करती है, क्योंकि इन परिसरों को ईरान के रणनीतिक परमाणु कार्यक्रम से जोड़कर देखा जाता रहा है। हालांकि इन गतिविधियों का वास्तविक उद्देश्य क्या है, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। दूसरी ओर इस्फहान, फोरडो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु केंद्रों में फिलहाल बड़े स्तर पर नई गतिविधियों के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। इसके बावजूद कुछ मिसाइल भंडारण केंद्रों पर मरम्मत और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने का काम दिखाई देने से सुरक्षा विश्लेषकों की चिंता बढ़ी है। उनका कहना है कि यदि सैन्य और परमाणु ढांचे से जुड़े परिसरों में एक साथ गतिविधियां बढ़ती हैं तो क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। पिछले महीने हुए 14 सूत्रीय समझौते में ईरान ने दोहराया था कि वह परमाणु हथियार विकसित या प्राप्त नहीं करेगा तथा संवर्धित यूरेनियम से जुड़े मुद्दों के समाधान में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी का सहयोग करेगा। इस समझौते को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था। हालांकि अब सामने आए घटनाक्रमों ने समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। निर्माण गतिविधियां नियमित मरम्मत, सुरक्षा सुधार या अन्य प्रशासनिक कारणों से भी हो सकती हैं। ऐसे में किसी भी दावे की पुष्टि के लिए स्वतंत्र निरीक्षण, तकनीकी विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल ईरान की इन गतिविधियों पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यदि अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण एजेंसियां अतिरिक्त जानकारी साझा करती हैं या संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि हालिया गतिविधियां सामान्य रखरखाव का हिस्सा हैं या फिर वास्तव में परमाणु कार्यक्रम से जुड़े किसी बड़े घटनाक्रम का संकेत देती हैं।

'आज मोदी हमारा फोन भी नहीं उठाते', शहबाज शरीफ के सलाहकार का बड़ा बयान, भारत से रिश्तों पर पाकिस्तान की पुरानी नीति को ठहराया जिम्मेदार

नई दिल्ली । पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विशेष सलाहकार राणा सनाउल्लाह खान के हालिया बयान ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। एक टेलीविजन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर पाकिस्तान के पास था, लेकिन उस समय लिए गए राजनीतिक फैसलों और लगातार विरोध की नीति के कारण वह मौका हाथ से निकल गया। उन्होंने यह भी कहा कि आज यदि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान के नेताओं से संवाद के प्रति उत्सुक नहीं दिखाई देते हैं तो इसके लिए पाकिस्तान को आत्ममंथन करना चाहिए। राणा सनाउल्लाह ने बातचीत के दौरान वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा का अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की संभावना बनी थी। उनके अनुसार यदि उस दौर में सकारात्मक माहौल को आगे बढ़ाया जाता तो दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती थी। उन्होंने संकेत दिया कि उस अवसर का सही उपयोग नहीं किया गया और बाद की घटनाओं ने दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक जटिल बना दिया। कार्यक्रम के दौरान जब उनसे भारत के साथ संपर्क और बैकडोर कूटनीति को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे संवाद की प्रक्रिया पूरी तरह कभी समाप्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर प्रत्यक्ष बातचीत भले सीमित रही हो, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर संपर्क बनाए रखने की कोशिशें समय-समय पर होती रही हैं। उनके अनुसार ऐसे संवाद क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक होते हैं। राणा सनाउल्लाह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपने अतीत से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि उस समय संबंध सुधारने की दिशा में गंभीर प्रयास किए गए होते तो आज हालात अलग हो सकते थे। उनके मुताबिक राजनीतिक मतभेदों के कारण अवसरों को खोना दोनों देशों के हित में नहीं रहा। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय सहयोग मजबूत होने से आर्थिक चुनौतियों का सामना करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता था और पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता था। बयान के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ टकराव की राजनीति ने पाकिस्तान को अपेक्षित लाभ नहीं पहुंचाया। उनका मानना है कि पड़ोसी देशों के बीच संवाद और विश्वास बहाली का माहौल दोनों देशों के नागरिकों के हित में होता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में यदि अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं तो वार्ता और सहयोग के रास्ते फिर से तलाशे जा सकते हैं। राणा सनाउल्लाह के इस बयान को पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक बहस के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उनके वक्तव्य ने यह संकेत दिया कि पाकिस्तान के भीतर भी भारत के साथ संबंधों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं। हालांकि दोनों देशों के संबंध सुरक्षा, सीमा, आतंकवाद और कूटनीतिक मुद्दों सहित कई जटिल विषयों से जुड़े रहे हैं, लेकिन समय-समय पर संवाद बहाल करने की कोशिशें भी होती रही हैं। ऐसे में उनका यह बयान दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति और भविष्य की संभावित कूटनीतिक दिशा को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।