मैच की शुरुआत से ही टीम मैनेजमेंट का एक फैसला चर्चा का केंद्र बना रहा, जब इन-फॉर्म अक्षर पटेल को बेंच पर बैठाकर वाशिंगटन सुंदर को प्लेइंग इलेवन में जगह दी गई। पहले बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 187 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। शुरुआती झटकों के बाद दक्षिण अफ्रीका की पारी को अनुभवी डेविड मिलर ने संभाला। मिलर ने भारतीय गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए शानदार अर्धशतक जड़ा और मैच का रुख पूरी तरह अपनी टीम की ओर मोड़ दिया। भारतीय गेंदबाज विकेट की तलाश में छटपटाते रहे, लेकिन मिलर का बल्ला आग उगलता रहा।
विवाद की चिंगारी मैच के 14वें ओवर में सुलगी। गेंदबाजी छोर पर वाशिंगटन सुंदर थे और नॉन-स्ट्राइकर एंड पर डेविड मिलर खड़े थे। ओवर की एक गेंद फेंकते समय सुंदर अचानक रुक गए और अंपायर से शिकायत की कि मिलर क्रीज के बहुत करीब खड़े होकर उन्हें बाधित कर रहे हैं। सुंदर के हाव-भाव और इशारों ने मिलर को उकसा दिया। ओवर समाप्त होते ही यह विवाद शब्दों की जंग में बदल गया। मिलर और सुंदर एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए और दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अंपायरों और अन्य खिलाड़ियों को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा। यह घटना स्पष्ट कर रही थी कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर खिलाड़ियों पर प्रदर्शन का कितना भारी दबाव है।
सुंदर के लिए यह मैच किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। गेंदबाजी में उन्होंने 2 ओवर में 17 रन लुटाए और कोई सफलता हासिल नहीं कर सके। वहीं, जब बल्लेबाजी की बारी आई तो वह महज 11 रन बनाकर चलते बने। दूसरी ओर, 188 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। पारी के पहले ही ओवर में सलामी बल्लेबाज ईशान किशन शून्य पर पवेलियन लौट गए, जिसके बाद विकेटों के गिरने का सिलसिला अंत तक नहीं थमा। पूरी भारतीय टीम 18.5 ओवरों में मात्र 111 रनों पर ढेर हो गई।
दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों ने अनुशासित लाइन-लेंथ से भारतीय बल्लेबाजों को बांधे रखा। इस शर्मनाक हार ने न केवल भारत के नेट रन रेट को बिगाड़ा है, बल्कि सेमीफाइनल की राह को भी बेहद कठिन बना दिया है। टीम इंडिया के लिए अब आगे के हर मुकाबले ‘करो या मरो’ की स्थिति वाले होंगे। सुपर-8 का यह मुकाबला भारतीय क्रिकेट के लिए एक कड़ा सबक है कि बड़े मैचों में रणनीति और अनुशासन ही जीत की कुंजी होते हैं, केवल बहस और दबाव नहीं।