मंदिर में सुरक्षा का ख्याल रखने वाले गार्ड अमर सिंह परिहार और कप्तान सिंह अपनी-अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। अमर सिंह रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक मुख्य गेट पर तैनात थे, जबकि कप्तान सिंह छतरी के भीतर घूम-घूमकर ड्यूटी करते थे। इसके बावजूद, चोरों ने दीवार के रास्ते मंदिर परिसर में घुसकर चोरी को अंजाम दिया और सामान ले भागे।
सूचना मिलने पर पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू की। शुरुआती जांच में पता चला कि चोरों ने कुशलता से मंदिर परिसर में प्रवेश किया और बिना किसी को देखे सामान उठा लिया। पुजारी संजय हिरवे ने बताया कि मंदिर में रखी पेटी, जिसमें चांदी, तांबा और पीतल के सामान रखे थे, पूरी तरह खाली कर दी गई। इस घटना से छतरी और आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
पुलिस ने फरियादी अमर सिंह परिहार की शिकायत पर अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज किया और उनकी तलाश शुरू कर दी। फोरेंसिक टीम ने मौके पर पैरों के निशान, दरवाजे और दीवारों की जांच की, ताकि चोरी करने वालों का पता लगाया जा सके। ग्वालियर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि मामला संवेदनशील है और शीघ्र ही चोरों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।
सिंधिया अम्मा महाराज की छतरी, जो शहर में ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है, वहां हुई चोरी ने स्थानीय लोगों में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चोरी होने की घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस घटना के बाद सुरक्षा बढ़ाई जाएगी और मंदिर परिसर में निगरानी कैमरों और गार्ड की संख्या में वृद्धि की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की चोरी आमतौर पर योजनाबद्ध होती है और चोरों ने पूरी तैयारी के साथ मंदिर परिसर में घुसकर चोरी की। पुलिस ने आसपास के CCTV फुटेज खंगाले और स्थानीय निवासियों से भी जानकारी जुटाई। ग्वालियर पुलिस का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द चोरी गए जेवरात बरामद हों और अज्ञात चोरों को गिरफ्तार किया जाए।