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नेशनल हाईवे 45 पर ब्रिज ढहने से यातायात प्रभावित, कंपनी और अधिकारियों पर कार्रवाई


जबलपुर/मध्यप्रदेश के जबलपुर में नेशनल हाईवे 45 पर बने ब्रिज के ढहने से सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। इस गंभीर घटना के बाद प्रदेश के पीडब्ल्यूडी (PWD) मंत्री राकेश सिंह ने बड़ी कार्रवाई की घोषणा की है। मंत्री ने बताया कि ब्रिज बनाने वाली निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया है। इसके साथ ही ब्रिज निर्माण में लगे इंजीनियर और ठेकेदार के खिलाफ भी FIR दर्ज की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री राकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि प्राथमिक निरीक्षण में घटना में लापरवाही की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना कभी नहीं होनी चाहिए थी और इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल मामले में जांच कमेटी बनाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि घटनास्थल और जिम्मेदारों की स्थिति पहले ही स्पष्ट हो चुकी है।

घटना स्थल पर मिली जानकारी के अनुसार, जबलपुर नेशनल हाईवे 45 पर बना ब्रिज का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। इस दुर्घटना के कारण रेलवे लाइन पर स्थित ब्रिज का एक हिस्सा गिरने से हाईवे पर आवागमन प्रभावित हो गया। पहले से ही ब्रिज का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त था और आवागमन उस हिस्से से ही चल रहा था। अब ब्रिज के दूसरे हिस्से के भी क्षतिग्रस्त होने के बाद सड़क मार्ग पूरी तरह जोखिम भरा हो गया।

ब्रिज नेशनल हाईवे 45 पर स्थित है, जो जबलपुर को भोपाल से जोड़ता है। ब्रिज का निर्माण लगभग 4 साल पहले पूरा हुआ था। इतनी कम अवधि में ब्रिज का क्षतिग्रस्त होना निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। घटना के बाद यातायात को शहपुरा शहर के भीतर से डाइवर्ट कर दिया गया है, ताकि दुर्घटना स्थल से गुजरने वाले वाहन सुरक्षित रहें।

मंत्री राकेश सिंह ने इस अवसर पर किसानों को लेकर कांग्रेस के आगामी आंदोलन पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश लगातार कृषि क्षेत्र में पुरस्कार प्राप्त कर रहा है और किसानों को लेकर किसी बड़े प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं है। मंत्री ने यह भी कहा कि दिशा रहित नेतृत्व के कारण ऐसे आंदोलन होते हैं, जबकि प्रदेश में सरकार ने किसानों के हितों का लगातार ध्यान रखा है।

इस पूरे मामले ने निर्माण सुरक्षा, ब्रिज रखरखाव और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर दिया है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। अधिकारियों और ठेकेदारों को सतर्क करने के लिए यह कदम एक संदेश भी है कि निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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