शिवपुरी में सुबह 10 बजे तक कलेक्ट्रेट कार्यालय में ताले लगे मिले जबकि कलेक्टर डिप्टी कलेक्टर और अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मचारी अनुपस्थित थे। सीहोर में महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय 10.10 बजे तक बंद था और कई कर्मचारी सीधे फील्ड में चले गए।
वहीं मंदसौर में अधिकारियों ने समय पालन की दिशा में सुधार दिखाया और सुबह 10 बजे तक कार्यालयों में उपस्थिति सुनिश्चित की। सीतामऊ जनपद पंचायत में भी मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी आदेशों के अनुसार अधिकारी समय पर पहुंचते नजर आए। धार में मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में कुछ ही कर्मचारी सुबह 10 बजे उपस्थित थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी अनीता सेंगर ने बताया कि सभी कर्मचारियों को समय पर आने के लिए लगातार निर्देश दिए जाएंगे।
शाजापुर में जिला पंचायत कार्यालय और इसके शाखाओं में 10.05 बजे तक ताले लगे रहे लेकिन कुछ कर्मचारी समय पर काम करते दिखाई दिए। नर्मदापुरम में फाइलों पर धूल जमी मिली और कर्मचारियों की कुर्सियां खाली पाईं गईं। दतिया में सुबह 10 बजे तक कोई भी अधिकारी या कर्मचारी कार्यालय में मौजूद नहीं था।
श्योपुर में महिला एवं बाल विकास और खाद आपूर्ति विभाग के कार्यालय 10 बजे तक बंद मिले। नर्मदापुरम में अधिकांश कार्यालयों में कुर्सियां खाली थीं और लोग फरियादी अधिकारियों का इंतजार करते रहे। इछावर तहसील और जिला मुख्यालय में भी अधिकारी और कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं हुए।
उज्जैन में जिला मलेरिया विभाग में 10.20 बजे तक केवल 3 कर्मचारियों की उपस्थिति थी और विभागीय अधिकारी दिनेश्वर सिंह सिसोदिया अनुपस्थित थे। विभागीय कर्मचारियों ने फील्ड कार्य का हवाला दिया। कुल 63 पदस्थ कर्मचारियों में से सुबह 10.30 बजे तक केवल 4 कर्मचारी कार्यालय में दिखाई दिए।
सिंगरौली में महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय सुबह 10 बजे बाद भी नहीं खुला। परियोजना अधिकारी से संपर्क करने के प्रयास में कॉल रिसीव नहीं हुई जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठे। मऊगंज जिले में तीन प्रमुख कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया जहां सन्नाटा और अधिकारियों की अनुपस्थिति देखने को मिली।
प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सभी कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य है। समयपालन में लगातार हो रही लापरवाही से शासन की छवि प्रभावित हो रही है और सुधारात्मक कदमों की आवश्यकता बढ़ गई है।