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खेल-खेल में हादसा: घड़ी का सेल निगलने के बाद बच्चे की जान बचाई डॉक्टरों ने


खंडवा से बुधवार को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। बुरहानपुर निवासी 10 वर्षीय कृष्णा खेलते समय गलती से अपनी घड़ी का सेल निगल बैठा। छोटे बच्चे की लापरवाही एक बड़ी परेशानी बन गई, जब सेल गले के निचले हिस्से में फंस गया। कृष्णा को तेज दर्द, बेचैनी और सांस लेने में कठिनाई होने लगी, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।

परिवार ने देखते ही बच्चे को जिला अस्पताल सह शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय खंडवा पहुंचाया। वहां के नाक-कान-गला विभाग (ईएनटी) में डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत एक्स-रे जांच कराई। जांच में स्पष्ट हुआ कि घड़ी का सेल आहार नली के निचले हिस्से में फंस गया है और यदि समय पर कार्रवाई न की जाए तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

विभागाध्यक्ष और ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. सुनील बाजोलिया ने तुरंत उपचार की कमान संभाली। उन्होंने अपनी टीम के साथ बिना समय गंवाए दूरबीन पद्धति यानी एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से ऑपरेशन शुरू किया। यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और जटिल थी, क्योंकि घड़ी का सेल गले के नाजुक हिस्से में फंसा हुआ था।

करीब आधे घंटे की लगातार मेहनत और विशेषज्ञता के बाद डॉक्टरों ने बच्चे की घड़ी का सेल सुरक्षित निकाल लिया। बच्चे की जान इस समय पूरी तरह सुरक्षित बताई जा रही है और वह अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट रहा है।

डॉ. बाजोलिया ने बताया कि बच्चों की ऐसी लापरवाही अक्सर गंभीर परिणाम दे सकती है। खेलते समय छोटे सामान निगल जाने की घटनाएं आम हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से बड़ी अनहोनी टली जा सकती है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों पर नजर रखें और छोटे-छोटे खतरनाक सामान उनके हाथों से दूर रखें।

इस घटना ने खंडवा अस्पताल की ईएनटी टीम की विशेषज्ञता और तत्परता को भी उजागर किया। बच्चे की स्थिति को देखते हुए तुरंत एक्स-रे, सही निदान और एंडोस्कोपिक प्रक्रिया ने मुश्किल हालात में भी जान बचाई। परिवार ने डॉक्टरों की सराहना की और कहा कि समय पर इलाज मिलने से बड़े हादसे से बचा जा सका।

खेलते समय बच्चों की सुरक्षा और सतर्कता पर इस घटना ने एक बार फिर जोर दिया। अस्पताल अधिकारियों का कहना है कि समय रहते सही कदम उठाने से ऐसी अनहोनी टाली जा सकती है और छोटे-छोटे हादसे बड़े संकट में नहीं बदलते।

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