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होली खेलने से पहले करें त्वचा की सही तैयारी वरना रंग छोड़ सकते हैं जिद्दी दाग


नई दिल्ली/वाराणसी। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली रंगभरी एकादशी के अवसर पर शिवनगरी काशी भक्ति और रंगों के अनोखे संगम में डूब जाती है। होली से ठीक चार दिन पहले पड़ने वाला यह पर्व काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को विशेष स्वरूप देता है। मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती को उनके मायके से काशी लेकर आते हैं और इसी उपलक्ष्य में पूरा शहर उत्सव में सराबोर हो उठता है।

पौराणिक परंपरा के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता गौरा के साथ गौना बारात लेकर काशी पहुंचते हैं। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के कारण काशीवासी इस दिन बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का भव्य स्वागत करते हैं। शहर की गलियों से लेकर प्रमुख मंदिरों तक नमः पार्वती पतये हर हर महादेव के जयकारों की गूंज सुनाई देती है। जहां अन्य स्थानों पर होली की केवल तैयारियां होती हैं वहीं काशी में इस दिन से विधिवत रंगोत्सव की शुरुआत मानी जाती है। भक्त बाबा और माता से अनुमति लेकर गुलाल अबीर और फूलों की वर्षा के साथ होली खेलना आरंभ करते हैं।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में इस अवसर पर विशेष आयोजन होता है। बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का भव्य डोला निकाला जाता है जो संकरी गलियों से गुजरते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन देता है। पूरा क्षेत्र रंगों और फूलों से भर जाता है। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र के अनुसार मंदिर परिसर में बेरिकेडिंग की जाएगी और स्पर्श दर्शन की व्यवस्था नहीं रहेगी ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इस वर्ष एक विशेष आकर्षण मथुरा ब्रज की रास परंपरा का समावेश भी है। ब्रज के रसिया और रंग खेलने वाले कलाकार काशी पहुंचेंगे और यहां रास रचाएंगे जिससे उत्सव का उल्लास और भी बढ़ जाएगा। यह सांस्कृतिक संगम काशी की आध्यात्मिक गरिमा को नए रंगों से सजा देगा।

स्थानीय निवासी प्रभुनाथ त्रिपाठी बताते हैं कि काशीवासी देवी देवताओं के साथ मिलकर बाबा और माता के आगमन की खुशी मनाते हैं। यह परंपरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। इस दिन भक्त रंग अर्पित कर होली खेलने की अनुमति मांगते हैं और मान्यता है कि भगवान शिव माता पार्वती को उनके ससुराल का भ्रमण भी कराते हैं।

धार्मिक दृष्टि से रंगभरी एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन शिव पार्वती की पूजा करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलने और दांपत्य जीवन में सुख समृद्धि आने की मान्यता है। काशी के छोटे बड़े सभी मंदिरों को सजाया जाता है दीप जलाए जाते हैं और पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से भर उठता है। रंगभरी एकादशी काशी की उस जीवंत परंपरा का प्रतीक है जहां आस्था रंगों से मिलकर अनोखा उत्सव रचती है।

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