मध्य प्रदेश बस ऑनर एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन ने कहा कि परिवहन विभाग की दमनकारी नीतियों और प्रस्तावित योजनाओं के विरोध में बस मालिकों को मजबूर होकर हड़ताल पर जाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि सरकार परमिट नीति और राष्ट्रीयकरण के जरिए निजी बसों के व्यवसाय को बड़ी कंपनियों के हाथ में देने की तैयारी कर रही है।
प्रदेश में कुल 12,780 परमिट वाली और 7,000 से अधिक कॉन्ट्रैक्ट वाली बसें हैं। जय कुमार जैन का कहना है कि परिवहन विभाग योजना बना रहा है कि निजी बस मालिकों से किराया लेकर कंपनियां बस चलाएँ, जबकि मोटर व्हीकल कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इस विरोध में एसोसिएशन ने विस्तृत प्रेस नोट भी जारी किया है।
हड़ताल में केवल कुछ ही नहीं, बल्कि सभी निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी रहेगी। इसमें कई कांग्रेस और बीजेपी से जुड़े नेताओं की बसें भी शामिल हैं। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यह राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि व्यवसाय और परिवहन नीति से जुड़ा सवाल है।
वर्तमान में VLT (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग) प्रणाली लागू है, जो बस की लोकेशन, गति और रूट की जानकारी ऑनलाइन जोड़ती है। ऑपरेटरों का आरोप है कि तकनीकी खामियों और ठेकेदार व्यवस्था के कारण उन्हें बार-बार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यात्रियों पर असर:
होली के दौरान गांव से शहर और शहर से गांव जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। ट्रेनों में लंबी वेटिंग की स्थिति में बसें सबसे बड़ा विकल्प होती हैं। ऐसे में 2 मार्च को हड़ताल होने से हजारों लोग मुश्किल में पड़ सकते हैं। अब सबकी नजर सरकार और बस मालिकों के बीच बातचीत पर टिकी है।
बस मालिकों के आरोप और वजहें:
निजी बस मालिकों के परमिट निरस्त कर राष्ट्रीयकरण की तैयारी।
मल्टीनेशनल कंपनियों को बस संचालन का व्यापार देने का प्रयास।
छोटे और पुराने बस मालिकों का व्यवसाय खतरे में।
VLT प्रणाली और पंजीयन, फिटनेस प्रक्रियाओं में अवरोध।
स्थायी अनुज्ञा और नवीनीकरण मामलों में लंबित निर्णय।
अवैध वसूली और शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई का अभाव।
बस ऑपरेटरों का कहना है कि पहले भी राज्य में परिवहन व्यवस्था के प्रयोग विफल रहे, जैसे MPSRTC का संचालन, और वर्तमान प्रस्ताव भी उसी तरह छोटे और मध्यम बस मालिकों को बाहर करने जैसा है।
इस बार की हड़ताल का मकसद है कि प्राइवेट बस मालिकों का व्यवसाय सुरक्षित रहे और पेरेंट्स और यात्रियों पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए।