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‘पहले वार नहीं करते तो वे कर देते’, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान हमलों को ठहराया जरूरी कदम


नई दिल्ली। अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हालिया अमेरिकी सैन्य हमलों का जोरदार बचाव करते हुए कहा है कि यह कार्रवाई मजबूरी में की गई। उनके मुताबिक खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर आशंका थी कि तेहरान पहले हमला कर सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि यदि अमेरिका ने पहले कदम नहीं उठाया होता तो स्थिति परमाणु टकराव तक पहुंच सकती थी।

पश्चिम एशिया में चौथे दिन भी तनाव बरकरार
पश्चिम एशिया में तनाव लगातार चौथे दिन भी बना हुआ है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल की ओर से किए गए हवाई हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबर है। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़राइल से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन घटनाओं ने पूरे इलाके की सुरक्षा स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

‘ईरान एक महीने में बना सकता था परमाणु हथियार’
व्हाइट हाउस में फ्रेडरिक मर्ज के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बातचीत के पक्ष में था, लेकिन उन्हें अचानक हमले की आशंका थी। उनका कहना था, “अगर हमने अभी जो किया, वह नहीं किया होता, तो वे पहले हमला कर देते।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान एक महीने के भीतर परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में पहुंच सकता था। उन्होंने ईरानी शासन को ‘खतरनाक और चरमपंथी विचारधारा वाला’ बताते हुए आरोप लगाया कि पिछले 47 वर्षों से वह वैश्विक अस्थिरता को बढ़ावा देता रहा है।

ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि ओबामा प्रशासन ने ईरान के साथ ‘सबसे खराब समझौता’ किया था, जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल में समाप्त कर दिया।

‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर
ट्रंप ने इस सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम देते हुए दावा किया कि इस कार्रवाई में ईरान की मिसाइल क्षमता और एयर डिफेंस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार अब ईरान की सैन्य ताकत काफी हद तक कमजोर हो चुकी है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी ईरान के मौजूदा शासन को लेकर अमेरिका के साथ समान चिंता जताई। हालांकि ट्रंप ने कुछ यूरोपीय देशों के रुख पर नाराजगी जाहिर की और स्पेन तथा ब्रिटेन की आलोचना की, जबकि जर्मनी की सराहना की।

खाड़ी देशों में भी बढ़ी चिंता
तनाव का असर बहरीन, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात तक महसूस किया जा रहा है। ईरान की ओर से इन क्षेत्रों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद आम नागरिकों और प्रवासी कामगारों की चिंताएं बढ़ गई हैं। लगातार बढ़ते सैन्य टकराव और तीखे बयानों के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है, और दुनिया की निगाहें अब आने वाले कूटनीतिक और सैन्य कदमों पर टिकी हैं।

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