इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए मामा कोचिंग क्लासेस शुरू करने का फैसला किया है। इस पहल के तहत छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण तैयारी कराई जाएगी। शुरुआत में यह कोचिंग Vidisha के साथ साथ Raisen और Bhairunda से शुरू की जाएगी। यहां छात्रों को बैंकिंग एसएससी एमपीपीएससी डीआरडीओ और फॉरेस्ट सर्विस जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी ताकि ग्रामीण और छोटे शहरों के प्रतिभाशाली युवाओं को भी बेहतर अवसर मिल सकें।
शिवराज सिंह चौहान ने अपने मंत्रालयों में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक नई परंपरा भी शुरू की है। उन्होंने कहा है कि सरकारी कार्यक्रमों में अब गुलदस्ते शाल और मोमेंटो की जगह पौधे भेंट किए जाएंगे। उनका मानना है कि उपहार देने के बजाय प्रकृति के लिए उपकार करना ज्यादा जरूरी है। इस अभियान के तहत पौधे लगाने वाले लोग क्यूआर कोड के माध्यम से अपनी फोटो पोर्टल पर अपलोड कर शिव वृक्ष मित्र बन सकेंगे।
उन्होंने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि इस बार उनके जन्मदिन पर कोई भी होर्डिंग शाल या बुके लेकर न आए। इसके बजाय अधिक से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी सुरक्षित रह सके।
इसके अलावा शिवराज सिंह चौहान ने अपने माता पिता की स्मृति में प्रेम सुंदर प्रतिभा सम्मान शुरू करने की घोषणा भी की है। इस योजना के तहत विदिशा लोकसभा क्षेत्र की आठों विधानसभाओं में कक्षा दसवीं और बारहवीं के टॉपर्स को सम्मानित किया जाएगा। प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को क्रमशः 51 हजार 31 हजार और 21 हजार रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। साथ ही लोकसभा स्तर पर भी शीर्ष तीन विद्यार्थियों को विशेष पुरस्कार दिए जाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए मामा चलित अस्पताल भी शुरू किए जाएंगे। इन मोबाइल अस्पतालों में आधुनिक जांच सुविधाएं और योग्य डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी जो गांव गांव और दूरदराज के मजरे टोलों तक पहुंचकर लोगों को निशुल्क इलाज और परामर्श देगी। इन अस्पतालों का संचालन सांसद निधि और जनसहयोग से किया जाएगा।
इसके साथ ही दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत क्षेत्र में दिव्यांग लोगों की पहचान कर उन्हें मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल दी जा रही है ताकि उनकी रोजमर्रा की आवाजाही आसान हो सके और वे बिना किसी पर निर्भर हुए अपने काम कर सकें।