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फूड एक्सपोर्ट में भारत का दम, आंकड़ा 5 लाख करोड़ के करीब: पीयूष गोयल


नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने कहा कि भारत का खाद्य और कृषि उत्पादों का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है और अब यह सालाना करीब 5 लाख करोड़ रुपये (55 अरब डॉलर से अधिक) तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की कृषि क्षमता और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाती है।
नई दिल्ली में आयोजित Aahar – The International Food and Hospitality Fair के 40वें संस्करण के उद्घाटन के दौरान उन्होंने खाद्य, कृषि और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत के लोगों से अपील की कि वे मिलकर भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बनाने की दिशा में काम करें। गोयल ने कहा कि सरकार की नीतियां, बढ़ते व्यापार समझौते और वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों की मांग इस दिशा में बड़े अवसर पैदा कर रही हैं।

कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में तेज उछाल
मंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों यानी 2014 से 2025 के दौरान भारत के कृषि और खाद्य निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में प्रोसेस्ड फूड का निर्यात चार गुना, फल और दालों का निर्यात तीन गुना और प्रोसेस्ड सब्जियों का निर्यात चार गुना बढ़ा है। इसके अलावा कोको का निर्यात तीन गुना और अनाज का निर्यात दोगुना हो गया है। वहीं चावल का निर्यात भी इस अवधि में करीब 62 प्रतिशत बढ़ा है। गोयल ने कहा कि इन उपलब्धियों ने भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों की कतार में ला खड़ा किया है। वर्तमान में भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कृषि उत्पाद निर्यातक बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आगे और बड़ी संभावनाओं का संकेत देती है।

‘दुनिया की फूड बास्केट’ बनने की दिशा में भारत
गोयल ने कहा कि भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में दुनिया में शीर्ष स्थान दिलाने का लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जा सकता है। यह लक्ष्य प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस विजन से जुड़ा है, जिसमें भारत को “दुनिया की फूड बास्केट” बनाने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए किसानों, उद्यमियों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यातकों को मिलकर काम करना होगा। यदि उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर ज्यादा ध्यान दिया जाए तो भारतीय कृषि उत्पाद वैश्विक बाजार में और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।

व्यापार समझौतों से खुले नए वैश्विक बाजार
मंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, जिनके जरिए 38 विकसित और समृद्ध देशों के बाजारों तक पहुंच मिली है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुले हैं और भारतीय कंपनियां वैश्विक वैल्यू चेन से तेजी से जुड़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि आज भारत को वैश्विक व्यापार के करीब दो-तिहाई हिस्से तक प्राथमिक बाजार पहुंच प्राप्त है। इससे भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य बन रहा है और निर्यात के नए रास्ते खुल रहे हैं।

किसानों और एमएसएमई के हितों की सुरक्षा
गोयल ने स्पष्ट किया कि एफटीए वार्ताओं के दौरान सरकार ने किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी उत्पादकों को कोई रियायत नहीं दी गई है। इसी तरह जीन संशोधित (GM) उत्पादों को भी शुल्क में छूट या बाजार तक पहुंच नहीं दी गई है। इसके अलावा चावल, गेहूं, मक्का, सोया मील और कई तरह की दालों जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों को भी व्यापार समझौतों में सुरक्षित रखा गया है। वहीं चीनी क्षेत्र में भी आम तौर पर कोई रियायत नहीं दी गई है, ताकि विदेशी आयात से भारतीय किसानों और घरेलू उत्पादकों को नुकसान न हो।

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से बढ़ेगा वैल्यू एडिशन
मंत्री ने किसानों और उद्यमियों से Agriculture Infrastructure Fund के 1 लाख करोड़ रुपये के फंड का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर ध्यान देने से किसानों को वैश्विक बाजार में बेहतर कीमत मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि अब बड़ी संख्या में छोटे उद्यम भी फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

आहार मेले में पहली बार इटली बना पार्टनर देश
गोयल ने बताया कि इस वर्ष आयोजित आहार फूड एंड हॉस्पिटैलिटी फेयर में Italy को पहली बार पार्टनर देश बनाया गया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 13 मार्च और शनिवार को यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए भी खोली जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे खासकर युवाओं को भारत और दुनिया के फूड, बेवरेज और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की ताकत को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

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